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  • बृजभूषण की संपत्ति पर विनेश फोगाट ने उठाए सवाल, बोलीं- अब पीछे नहीं हटूंगी, सुप्रीम कोर्ट तक लड़ेंगे

    बृजभूषण की संपत्ति पर विनेश फोगाट ने उठाए सवाल, बोलीं- अब पीछे नहीं हटूंगी, सुप्रीम कोर्ट तक लड़ेंगे


    नई दिल्ली। कांग्रेस नेता और पहलवान विनेश फोगाट ने भारतीय कुश्ती महासंघ के पूर्व अध्यक्ष बृजभूषण शरण सिंह को लेकर एक बार फिर तीखा हमला बोला है। हरियाणा के जींद में एक राजनीतिक कार्यक्रम के दौरान पत्रकारों से बातचीत में विनेश ने बृजभूषण को गुंडा और अपराधी बताते हुए सवाल किया कि आखिर ऐसे व्यक्ति को इतना सम्मान क्यों दिया जाना चाहिए। उन्होंने आरोप लगाया कि राजनीतिक ताकत और पैसे के प्रभाव का इस्तेमाल महिलाओं के खिलाफ किया गया और भारतीय जनता पार्टी पर बृजभूषण का समर्थन करने का आरोप लगाया।

    विनेश फोगाट ने बृजभूषण के राजनीतिक प्रभाव वाले उत्तर प्रदेश के गोंडा इलाके को लेकर भी कई सवाल खड़े किए। उन्होंने दावा किया कि वहां कई लोगों को परेशान किए जाने और जमीन पर कब्जे से जुड़े सवाल सामने आते रहे हैं। विनेश ने बृजभूषण की संपत्ति और धन के स्रोत पर भी सवाल उठाते हुए पूछा कि इतनी संपत्ति और पैसा कहां से आया। उन्होंने हेलिकॉप्टर से यात्रा और कथित आर्थिक प्रभाव का जिक्र करते हुए कहा कि इन सवालों के जवाब सामने आने चाहिए। विनेश ने यह भी कहा कि उनकी लड़ाई आगे सुप्रीम कोर्ट तक ले जाई जाएगी।

    महिला पहलवानों से जुड़े पुराने विवाद का जिक्र करते हुए विनेश ने बृजभूषण पर लगाए गए यौन उत्पीड़न के आरोपों को भी उठाया। उन्होंने आरोप लगाया कि पैसे और ताकत के दम पर लड़कियों के साथ अत्याचार किया जाता है। विनेश के मुताबिक यही BJP की हकीकत है और पार्टी बृजभूषण का समर्थन कर रही है। हालांकि बृजभूषण इन आरोपों को खारिज करते रहे हैं और हाल ही में एक अदालत ने उन्हें मामले में बरी किया है।

    विनेश ने 2023 के पहलवान आंदोलन को भी याद किया। उन्होंने कहा कि उस समय दिल्ली के जंतर मंतर पर प्रदर्शन करने वाले पहलवानों के साथ जिस तरह का पुलिस व्यवहार हुआ था वैसा ही व्यवहार अब प्रदर्शन कर रही बेटियों के साथ देखने को मिला। महिला पहलवानों के आरोपों के बाद 2023 में विनेश फोगाट साक्षी मलिक और बजरंग पूनिया समेत कई पहलवानों ने विरोध प्रदर्शन किया था। यह आंदोलन भारतीय कुश्ती और खेल प्रशासन को लेकर देशभर में चर्चा का बड़ा मुद्दा बना था।

    विनेश फोगाट ने BJP के राष्ट्रवाद और देशभक्ति के दावों पर भी सवाल उठाए। उन्होंने कहा कि BJP नेताओं को कांग्रेस को देशभक्ति का पाठ पढ़ाने का अधिकार नहीं है। RSS कार्यालयों में लंबे समय तक तिरंगा नहीं फहराए जाने का आरोप लगाते हुए उन्होंने कहा कि आज वही लोग तिरंगा यात्राएं निकाल रहे हैं। उन्होंने कांग्रेस अध्यक्ष मल्लिकार्जुन खड़गे से जुड़े कथित शुद्धिकरण विवाद का भी जिक्र किया और सवाल किया कि क्या किसी दलित नेता को किसी स्थान पर जाने का अधिकार नहीं है।

    हरियाणा BJP अध्यक्ष डॉ. अर्चना गुप्ता के कथित बयान को लेकर भी विनेश ने निशाना साधा। उन्होंने आरोप लगाया कि समुदायों को लेकर इस तरह के बयान केवल प्रचार और TRP हासिल करने के लिए दिए जाते हैं। विनेश ने दावा किया कि BJP का समय खत्म हो रहा है और जनता अब ऐसे बयानों का जवाब देगी। उन्होंने कहा कि लोगों की राय लेना लोकतांत्रिक प्रक्रिया का सकारात्मक हिस्सा है और नेताओं को जनता की बात सुननी चाहिए।

    विनेश फोगाट के इन बयानों के बाद बृजभूषण शरण सिंह और BJP को लेकर राजनीतिक बहस फिर तेज होने की संभावना है। 2023 का पहलवान आंदोलन पहले ही भारतीय खेल और राजनीति के बीच रिश्तों को लेकर बड़ा विवाद बन चुका है। अब विनेश के ताजा आरोपों ने इस पुराने विवाद को एक बार फिर राजनीतिक चर्चा के केंद्र में ला दिया है।

  • विनेश फोगाट को कोर्ट से राहत, एशियन गेम्स ट्रायल में वापसी का रास्ता साफ

    विनेश फोगाट को कोर्ट से राहत, एशियन गेम्स ट्रायल में वापसी का रास्ता साफ


    नई दिल्ली । Vinesh Phogat को देश की सर्वोच्च अदालत से बड़ी राहत मिली है। सुप्रीम कोर्ट ने उन्हें एशियन गेम्स 2026 के चयन ट्रायल में हिस्सा लेने की अनुमति दे दी है। यह ट्रायल 30 और 31 मई को आयोजित किए जाएंगे। अदालत के इस फैसले से उनका अंतरराष्ट्रीय मंच पर वापसी का रास्ता एक बार फिर खुल गया है।

    डब्ल्यूएफआई के फैसले पर सुप्रीम कोर्ट की रो
    पूरा मामला तब शुरू हुआ जब Wrestling Federation of India (WFI) ने विनेश फोगाट को चयन ट्रायल में भाग लेने से रोक दिया था। फेडरेशन का कहना था कि उनके खिलाफ अनुशासनात्मक कार्रवाई और डोपिंग से जुड़े नियमों के उल्लंघन के मामले लंबित हैं, इसलिए वे ट्रायल में हिस्सा नहीं ले सकतीं।

    WFI ने इससे पहले दिल्ली हाई कोर्ट के उस आदेश को चुनौती दी थी, जिसमें विनेश को ट्रायल में भाग लेने की अनुमति दी गई थी। हाई कोर्ट ने अपने आदेश में WFI को नोटिस प्रक्रिया में देरी और पारदर्शिता की कमी पर फटकार भी लगाई थी।

    हाई कोर्ट के निर्देश और पारदर्शिता पर जो
    हाई कोर्ट ने आदेश दिया था कि चयन ट्रायल की पूरी प्रक्रिया की वीडियो रिकॉर्डिंग अनिवार्य होगी। इसके साथ ही भारतीय खेल प्राधिकरण (SAI) और भारतीय ओलंपिक संघ (IOA) के स्वतंत्र पर्यवेक्षकों की मौजूदगी भी सुनिश्चित की जाएगी ताकि चयन प्रक्रिया पूरी तरह निष्पक्ष रहे। कोर्ट ने यह भी कहा था कि खेल में खिलाड़ियों के अधिकार और उनके करियर को ध्यान में रखना जरूरी है, और चयन प्रक्रिया में पारदर्शिता से समझौता नहीं किया जा सकता।

    WFI का पक्ष और लगाए गए आरो
    WFI ने विनेश फोगाट को कारण बताओ नोटिस जारी करते हुए कई सवालों के जवाब मांगे थे। फेडरेशन ने उन पर अनुशासनहीनता और डोपिंग रोधी नियमों के उल्लंघन के आरोप लगाए थे। इसके बाद उन्हें 26 जून 2026 तक किसी भी घरेलू प्रतियोगिता में हिस्सा लेने से रोक दिया गया था।

    फेडरेशन का तर्क था कि संन्यास से वापसी करने वाले खिलाड़ियों को नियमों के अनुसार निर्धारित अवधि का पालन करना जरूरी होता है। इसी आधार पर उन्हें ट्रायल से बाहर रखा गया था।

    कोर्ट में पहुंचा मामला, फिर मिली राहत
    WFI के फैसले के खिलाफ विनेश फोगाट ने कोर्ट का दरवाजा खटखटाया। हाई कोर्ट ने मामले में हस्तक्षेप करते हुए उन्हें ट्रायल में भाग लेने की अनुमति दी। इसके बाद यह मामला सुप्रीम कोर्ट पहुंचा, जहां अंतिम सुनवाई में अदालत ने उनकी भागीदारी को मंजूरी दे दी।

    खेल करियर के लिए अहम मोड
    सुप्रीम कोर्ट का यह फैसला विनेश फोगाट के लिए एक महत्वपूर्ण अवसर माना जा रहा है। अब सबकी नजरें 30-31 मई को होने वाले ट्रायल पर टिकी हैं, जहां उनका प्रदर्शन यह तय करेगा कि वे एशियन गेम्स 2026 में भारत का प्रतिनिधित्व कर पाएंगी या नहीं।

  • दिल्ली हाईकोर्ट ने WFI से मांगा जवाब, विनेश फोगाट केस में बढ़ी हलचल

    दिल्ली हाईकोर्ट ने WFI से मांगा जवाब, विनेश फोगाट केस में बढ़ी हलचल


    नई दिल्ली। भारतीय महिला कुश्ती की स्टार पहलवान Vinesh Phogat को अयोग्य घोषित किए जाने के मामले में दिल्ली हाईकोर्ट ने सख्त रुख अपनाते हुए Wrestling Federation of India को कड़ी फटकार लगाई है। कोर्ट ने साफ कहा कि भारत जैसे देश में मातृत्व का सम्मान सर्वोपरि माना जाता है और ऐसे समय में किसी खिलाड़ी के साथ संवेदनशीलता और न्यायपूर्ण व्यवहार होना चाहिए। हाईकोर्ट की यह टिप्पणी उस समय आई जब विनेश फोगाट ने मातृत्व अवकाश के बाद वापसी करते हुए एशियन गेम्स ट्रायल में शामिल होने की अनुमति मांगी थी, लेकिन डब्ल्यूएफआई ने उन्हें अयोग्य घोषित कर दिया था।

    दिल्ली हाईकोर्ट ने इस पूरे मामले को गंभीरता से लेते हुए केंद्र सरकार को निर्देश दिए कि विनेश फोगाट के मामले की निष्पक्ष समीक्षा के लिए एक विशेषज्ञ समिति गठित की जाए। साथ ही अदालत ने कहा कि आगामी एशियन गेम्स चयन ट्रायल में उनकी भागीदारी सुनिश्चित की जाए ताकि उन्हें खुद को साबित करने का निष्पक्ष अवसर मिल सके। कोर्ट ने यह भी संकेत दिया कि डब्ल्यूएफआई द्वारा पुराने चयन मानदंडों के आधार पर फैसला लेना कई सवाल खड़े करता है।

    दरअसल, डब्ल्यूएफआई ने विनेश फोगाट को कारण बताओ नोटिस जारी करते हुए उन पर अनुशासनहीनता और डोपिंग रोधी नियमों के उल्लंघन के आरोप लगाए थे। इसके साथ ही फेडरेशन ने उन्हें 26 जून 2026 तक किसी भी घरेलू प्रतियोगिता में भाग लेने से रोक दिया था। यही कारण रहा कि वह नेशनल ओपन रैंकिंग टूर्नामेंट में हिस्सा नहीं ले सकीं। विनेश ने ट्रायल में खेलने की अनुमति के लिए कई बार फेडरेशन से संपर्क किया, लेकिन उनकी अपील को नजरअंदाज कर दिया गया।

    डब्ल्यूएफआई ने अपने फैसले के पीछे वाडा के नियम 5.6.1 का हवाला दिया था। फेडरेशन का कहना था कि संन्यास या लंबे ब्रेक के बाद वापसी करने वाले खिलाड़ियों को किसी भी प्रतियोगिता में भाग लेने से पहले छह महीने का नोटिस पीरियड पूरा करना जरूरी होता है। हालांकि, विनेश की ओर से यह दलील दी गई कि वह मातृत्व अवकाश के बाद वापसी कर रही हैं और इस स्थिति को सामान्य नियमों से अलग दृष्टिकोण से देखा जाना चाहिए।

    जब फेडरेशन ने उनकी मांग नहीं मानी, तब विनेश फोगाट ने दिल्ली हाईकोर्ट का दरवाजा खटखटाया। उन्होंने कोर्ट से अनुरोध किया कि उन्हें 30 और 31 मई को होने वाले एशियन गेम्स ट्रायल में हिस्सा लेने की अनुमति दी जाए। शुरुआती सुनवाई में अदालत ने तत्काल राहत देने से इनकार करते हुए कहा था कि बिना डब्ल्यूएफआई का पक्ष सुने कोई आदेश जारी नहीं किया जा सकता। लेकिन बाद की सुनवाई में कोर्ट ने फेडरेशन के रवैये पर सवाल उठाए और स्पष्ट किया कि खिलाड़ियों के अधिकारों और सम्मान की अनदेखी नहीं की जा सकती।

    इस मामले ने भारतीय खेल जगत में खिलाड़ी अधिकार, मातृत्व और खेल संस्थाओं की संवेदनशीलता को लेकर नई बहस छेड़ दी है। अब सभी की नजरें इस बात पर टिकी हैं कि विशेषज्ञ समिति की रिपोर्ट और आगे की सुनवाई में क्या फैसला सामने आता है।