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  • महाकाल मंदिर में गर्भगृह प्रवेश पर फिर विवाद, डिजिटल क्रिएटर की तस्वीरों से उठा VIP कल्चर का मुद्दा; सांसद फिरोजिया ने जताई नाराजगी

    महाकाल मंदिर में गर्भगृह प्रवेश पर फिर विवाद, डिजिटल क्रिएटर की तस्वीरों से उठा VIP कल्चर का मुद्दा; सांसद फिरोजिया ने जताई नाराजगी


    मध्यप्रदेश ।उज्जैन स्थित विश्व प्रसिद्ध महाकालेश्वर मंदिर एक बार फिर गर्भगृह प्रवेश को लेकर विवादों में घिर गया है। सोशल मीडिया पर वायरल हुई कुछ तस्वीरों ने मंदिर प्रशासन की व्यवस्था और आम श्रद्धालुओं के साथ किए जा रहे व्यवहार को लेकर बहस छेड़ दी है। तस्वीरों में दिल्ली निवासी डिजिटल क्रिएटर अक्षय आनंद अपनी पत्नी और मित्रों के साथ महाकाल मंदिर के गर्भगृह में दर्शन करते दिखाई दे रहे हैं। इन तस्वीरों के सामने आने के बाद सोशल मीडिया पर लोगों ने वीआईपी संस्कृति और दोहरे मापदंडों को लेकर सवाल उठाने शुरू कर दिए हैं।

    जानकारी के अनुसार यह तस्वीरें 15 जून की बताई जा रही हैं। उस दिन सोमवती अमावस्या होने के कारण महाकाल मंदिर में श्रद्धालुओं की भारी भीड़ थी। इसी दौरान अक्षय आनंद ने अपने सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म्स पर गर्भगृह में दर्शन करते हुए तस्वीरें साझा कीं। तस्वीरों में वे पारंपरिक धोती-सोला पहनकर गर्भगृह में मौजूद नजर आ रहे हैं। इतना ही नहीं, गर्भगृह परिसर में फोटो भी खिंचवाई गईं, जबकि मंदिर परिसर में फोटोग्राफी पर प्रतिबंध लागू है।

    तस्वीरें वायरल होने के बाद श्रद्धालुओं में नाराजगी देखने को मिली। लोगों का कहना है कि जब आम भक्तों को वर्षों से गर्भगृह में प्रवेश की अनुमति नहीं है, तो कुछ चुनिंदा लोगों को विशेष सुविधा कैसे दी जा रही है। सोशल मीडिया पर कई यूजर्स ने मंदिर प्रशासन की कार्यप्रणाली पर सवाल उठाते हुए इसे वीआईपी कल्चर का उदाहरण बताया।

    विवाद बढ़ने के बाद महाकाल मंदिर प्रशासन की ओर से सफाई भी सामने आई। मंदिर प्रशासक ने बताया कि अक्षय आनंद और उनके साथ मौजूद अन्य लोग हाईकोर्ट के न्यायाधीशों के साथ मंदिर पहुंचे थे। इसी वजह से उन्हें गर्भगृह में प्रवेश की अनुमति दी गई थी। हालांकि इस स्पष्टीकरण के बाद भी लोगों की नाराजगी कम होती दिखाई नहीं दे रही है।

    मामले में उज्जैन सांसद अनिल फिरोजिया ने भी खुलकर प्रतिक्रिया दी है। उन्होंने कहा कि महाकाल मंदिर में वीआईपी संस्कृति का बढ़ता प्रभाव चिंता का विषय है और वे इसके घोर विरोधी हैं। सांसद ने कहा कि वे स्वयं आज भी सामान्य श्रद्धालुओं की तरह लाइन में लगकर भगवान महाकाल के दर्शन करते हैं। उन्होंने यह भी बताया कि उनकी माताजी पिछले कई दशकों से नियमित रूप से महाकाल मंदिर जाती हैं और कभी किसी विशेष सुविधा का लाभ नहीं लेतीं।

    सांसद फिरोजिया ने कहा कि भगवान के दरबार में सभी समान हैं। यहां किसी राजा और रंक में कोई अंतर नहीं होना चाहिए। उन्होंने अधिकारियों को भी चेताते हुए कहा कि उन्हें यह नहीं भूलना चाहिए कि अंततः सभी को भगवान महाकाल की शरण में ही जाना है।

    उन्होंने मांग की कि प्रतिदिन कम से कम दो घंटे के लिए महाकाल मंदिर का गर्भगृह आम श्रद्धालुओं के लिए खोला जाए, ताकि भक्त स्वयं जलाभिषेक और पूजन कर सकें। उन्होंने बताया कि इस विषय पर वे मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव से भी चर्चा कर चुके हैं।

    गौरतलब है कि महाकाल मंदिर का गर्भगृह जुलाई 2023 में श्रावण मास के दौरान बढ़ती भीड़ को देखते हुए आम श्रद्धालुओं के लिए बंद किया गया था। उस समय इसे अस्थायी व्यवस्था बताया गया था, लेकिन लंबे समय बीत जाने के बाद भी गर्भगृह आम भक्तों के लिए नहीं खोला गया। अब वायरल तस्वीरों ने एक बार फिर मंदिर में वीआईपी व्यवस्था और श्रद्धालुओं के अधिकारों को लेकर बहस को तेज कर दिया है।

  • मुंबई मेयर की गाड़ी से हटाईं लाल-नीली फ्लैश लाइट, वीआईपी कल्चर विवाद पर BMC ने दी कार्रवाई

    मुंबई मेयर की गाड़ी से हटाईं लाल-नीली फ्लैश लाइट, वीआईपी कल्चर विवाद पर BMC ने दी कार्रवाई


    नई दिल्ली। मुंबई में हाल ही में हुए विवाद के बाद मेयर ऋतु तावड़े की आधिकारिक गाड़ी और उनके साथ चलने वाली एस्कॉर्ट वाहन से लाल-नीली फ्लैश लाइटें हटा दी गई हैं। यह मामला सबसे पहले सोशल मीडिया पर तब सुर्खियों में आया जब एक पोस्ट में सवाल उठाया गया कि क्या मेयर की गाड़ी को पुलिस जैसी फ्लैश लाइट लगाने की अनुमति है। इस विवाद के बाद आरटीआई कार्यकर्ता अनिल गलगली ने मेयर को पत्र लिखकर इस विषय पर आपत्ति जताई और केंद्र सरकार के नियमों के अनुसार ऐसी लाइटों का उपयोग केवल आपातकालीन सेवाओं के लिए ही किया जा सकता है, इसलिए इसे गंभीरता से लिया जाना चाहिए, यह स्पष्ट किया।

    विवाद का केंद्र मेयर की गाड़ी के बोनट पर लगी लाल-नीली फ्लैशिंग लाइट थी, जबकि उनके साथ चल रही एस्कॉर्ट स्कॉर्पियो वाहन में भी ऐसी लाइटें थीं। इस वाहन में मेयर के निजी सहायक और प्रोटोकॉल अधिकारी मौजूद थे। लाइटें देखकर लोगों ने यह सवाल उठाया कि क्या मेयर की गाड़ी को विशेष अधिकार दिया गया है।

    इस मामले पर प्रतिक्रिया देते हुए मेयर ऋतु तावड़े ने कहा कि उन्हें अपनी गाड़ी पर बीकन या फ्लैश लाइट लगाने में कोई रुचि नहीं है और यह प्रशासन की गलती थी। उन्होंने बताया कि जब उन्हें आधिकारिक वाहन दिया गया, तब प्रशासन को यह सुनिश्चित करना चाहिए था कि किन लाइटों का प्रयोग किया जा सकता है और किनका नहीं।

    महाराष्ट्र के मुख्यमंत्री देवेंद्र फडणवीस ने भी इस विवाद पर कहा कि जांच में पता चला कि लाल-नीली फ्लैश लाइट गाड़ी की छत पर नहीं बल्कि बोनट पर लगी थी। उन्होंने मेयर को दोषी नहीं ठहराया और कहा कि बिना वजह उन्हें निशाना बनाना उचित नहीं है।

    नगर निगम के अधिकारियों ने बताया कि इसी तरह की फ्लैशिंग लाइटें मेयर, डिप्टी मेयर और हाउस लीडर की गाड़ियों पर भी लगी थीं, जिन्हें शनिवार को हटा दिया गया। इस विवाद के बाद विपक्ष की नेता और पूर्व मेयर किशोरी पेडणेकर ने सवाल उठाया कि यह कदम वीआईपी कल्चर के खिलाफ है और केंद्र सरकार ने 2017 में ही सरकारी वाहनों पर लाल बत्ती और विशेष प्रतीकों का उपयोग रोक दिया था।

    2017 में केंद्र सरकार ने सरकारी वाहनों पर लाल बत्ती और वीआईपी कल्चर के प्रतीकों के उपयोग पर रोक लगाई थी। तब से मुंबई की मेयर की गाड़ी से लाल बत्ती हटा दी गई थी। इस विवाद ने शहर में फिर से चर्चा छेड़ दी है कि क्या नए नियमों का सही पालन किया जा रहा है और क्या मेयर अपने पद का अनुचित लाभ उठा रही हैं।

    कुल मिलाकर, मुंबई मेयर की गाड़ी पर लगी लाल-नीली फ्लैश लाइट हटाने के बाद विवाद समाप्त हुआ, लेकिन यह मुद्दा वीआईपी कल्चर, प्रशासनिक नियमों और पारदर्शिता पर एक बार फिर ध्यान खींचता है।

  • गणतंत्र दिवस परेड 2026: वीआईपी कल्चर पर विराम , नदियों के नाम पर दर्शक दीर्घाएं; ‘वंदे मातरम’ थीम ,मेट्रो सफर रहेगा फ्री

    गणतंत्र दिवस परेड 2026: वीआईपी कल्चर पर विराम , नदियों के नाम पर दर्शक दीर्घाएं; ‘वंदे मातरम’ थीम ,मेट्रो सफर रहेगा फ्री


    नई दिल्ली । गणतंत्र दिवस परेड 2026 को पहले से कहीं अधिक समावेशी सांस्कृतिक और जन-केंद्रित बनाने की दिशा में रक्षा मंत्रालय ने बड़ा और प्रतीकात्मक फैसला लिया है। 26 जनवरी को दिल्ली के कर्तव्य पथ पर आयोजित होने वाली गणतंत्र दिवस परेड में इस बार दर्शक दीर्घाओं को नदियों के नाम दिए जाएंगे। गंगा यमुना ब्रह्मपुत्र सहित देश की प्रमुख नदियों के नाम पर दर्शक खंडों का नामकरण कर वीआईपी नॉन वीआईपी के फर्क को खत्म करने की पहल की गई है।

    अब तक गणतंत्र दिवस परेड में दर्शक दीर्घाओं की पहचान ए बी सी या अंकों के आधार पर होती थी जिससे वीआईपी संस्कृति की झलक दिखाई देती थी। रक्षा सचिव राजेश कुमार सिंह ने शुक्रवार को आयोजित प्रेस कॉन्फ्रेंस में कहा कि यह व्यवस्था बदलने का उद्देश्य हर नागरिक को समान सम्मान का अनुभव कराना है। नदियों के नाम भारतीय संस्कृति सभ्यता और एकता के प्रतीक हैं और इनके जरिए राष्ट्रीय पहचान को और मजबूत किया जाएगा।

    इस वर्ष गणतंत्र दिवस समारोह की समग्र थीम वंदे मातरम की 150वीं वर्षगांठ पर केंद्रित रखी गई है। इसी भावना को परेड झांकियों आमंत्रण पत्रों टिकटों और कर्तव्य पथ की सजावट में प्रमुखता से दिखाया जाएगा। रक्षा सचिव ने बताया कि परेड में सेना की तैयारियों को बैटल ऐरे के रूप में प्रस्तुत किया जाएगा ताकि सशस्त्र बलों की ऑपरेशनल क्षमता और युद्ध तत्परता को प्रभावी तरीके से देश और दुनिया के सामने रखा जा सके।

    गणतंत्र दिवस परेड देखने के लिए इस बार कुल 77 हजार दर्शकों के बैठने की व्यवस्था की गई है। इनमें 10 हजार विशेष आमंत्रित अतिथि होंगे जिन्हें विभिन्न सरकारी योजनाओं के सफल क्रियान्वयन और जनसेवा में योगदान के लिए बुलाया गया है। आम जनता के लिए 32 हजार टिकट बिक्री पर रखे गए हैं। टिकट ऑनलाइन के साथ-साथ ऑफलाइन भी उपलब्ध हैं जिन्हें राजीव चौक सहित कुछ चुनिंदा मेट्रो स्टेशनों से खरीदा जा सकता है।

    दर्शकों की सुविधा को ध्यान में रखते हुए 26 जनवरी को मेट्रो यात्रा पूरी तरह निःशुल्क रहेगी। दिल्ली मेट्रो की सेवाएं सुबह 3 बजे से शुरू होंगी ताकि लोग समय पर कर्तव्य पथ पहुंच सकें। यह कदम खासतौर पर आम नागरिकों को परेड से जोड़ने के उद्देश्य से उठाया गया है। इस बार गणतंत्र दिवस समारोह में अंतरराष्ट्रीय रंग भी देखने को मिलेगा। यूरोपीय संघ EU परिषद और यूरोपीय आयोग की अध्यक्ष मुख्य अतिथि होंगी। साथ ही यूरोपीय संघ की नौसेना का एक मार्चिंग दस्ता भी परेड में हिस्सा लेगा जो भारत और यूरोप के मजबूत होते रणनीतिक संबंधों का प्रतीक होगा।

    परेड में कुल 30 झांकियां शामिल की जाएंगी। इनमें 17 झांकियां विभिन्न राज्यों की और 13 झांकियां केंद्रीय मंत्रालयों व विभागों की होंगी। सभी झांकियों की थीम स्वतंत्रता का मंत्र वंदे मातरम रखी गई है जो देश की सांस्कृतिक विरासत विविधता और राष्ट्रभक्ति को दर्शाएगी। सेना के मार्च पास्ट में नवगठित भैरव बटालियन और लद्दाख स्काउट्स विशेष आकर्षण होंगी वहीं पशु दस्ता भी परंपरागत रंग जोड़ेगा। गणतंत्र दिवस परेड की रिहर्सल को लेकर 19 20 और 21 जनवरी को सुबह 10:15 से दोपहर 12:30 बजे तक कर्तव्य पथ और आसपास के इलाकों में यातायात प्रभावित रहेगा। दिल्ली ट्रैफिक पुलिस ने लोगों से वैकल्पिक मार्ग अपनाने की अपील की है।