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  • ढाई करोड़ की कार से 45 रुपये का गमला चोरी! सीएम योगी ने सुनाया लखनऊ का दिलचस्प किस्सा

    ढाई करोड़ की कार से 45 रुपये का गमला चोरी! सीएम योगी ने सुनाया लखनऊ का दिलचस्प किस्सा



    नई दिल्ली। उत्तर प्रदेश के मुख्यमंत्री Yogi Adityanath ने मंगलवार को लखनऊ में आयोजित एक कार्यक्रम के दौरान सरकारी संपत्ति को नुकसान पहुंचाने वालों पर तीखा कटाक्ष किया। उन्होंने एक मजेदार लेकिन गंभीर उदाहरण देते हुए बताया कि लोग महंगी कारों में घूमते हैं, लेकिन नगर निगम द्वारा लगाए गए 45 रुपये के गमले तक चोरी कर ले जाते हैं। सीएम योगी की यह टिप्पणी सुनकर कार्यक्रम में मौजूद लोग भी मुस्कुरा उठे।

    दरअसल, मुख्यमंत्री लखनऊ नगर निगम के “स्वच्छ-सुंदर-समर्थ लखनऊ” अभियान के तहत आयोजित कार्यक्रम को संबोधित कर रहे थे। इस दौरान उन्होंने 413 करोड़ रुपये की विभिन्न जनकल्याणकारी परियोजनाओं का लोकार्पण और शिलान्यास भी किया। अपने संबोधन में उन्होंने साफ-सफाई और शहर की सुंदरता बनाए रखने में नागरिकों की जिम्मेदारी पर विशेष जोर दिया।

    सीएम योगी ने कहा कि शहर को साफ और सुंदर बनाए रखना सिर्फ नगर निगम, महापौर, पार्षद या सफाई कर्मचारियों की जिम्मेदारी नहीं है, बल्कि इसमें आम नागरिकों की भागीदारी भी जरूरी है। उन्होंने लोगों से अपील की कि घर का कूड़ा कूड़ेदान में डालें, प्लास्टिक का इस्तेमाल कम करें, नालियों में कचरा न फेंकें और सार्वजनिक संपत्ति को नुकसान न पहुंचाएं।

    इसी दौरान मुख्यमंत्री ने एक घटना का जिक्र करते हुए कहा कि नगर निगम द्वारा लगाए गए गमलों को लोग चोरी कर ले जाते हैं। उन्होंने बताया, “हमने देखा कि एक बहुत महंगी कार आई और उसमें बैठे लोग 45 रुपये का गमला उठाकर ले गए। सीसीटीवी कैमरों में सब रिकॉर्ड हो गया। जितना पैसा उस कार में तेल भराने में लग रहा होगा, उतने में कई नए गमले आ जाते।”

    मुख्यमंत्री ने हंसते हुए कहा कि एक समय उनके मन में आया कि गमला चोरी करने वालों की तस्वीर चौराहे पर लगवा दी जाए, ताकि लोगों को समझ में आए कि छोटी लालच की वजह से शहर की सुंदरता को नुकसान पहुंचाना ठीक नहीं है।

    उन्होंने यह भी कहा कि सरकार जो पैसा विकास कार्यों पर खर्च करती है, वह किसी व्यक्ति विशेष का नहीं बल्कि जनता का पैसा होता है। इसलिए उसकी रक्षा करना और सही उपयोग सुनिश्चित करना हर नागरिक की जिम्मेदारी है। मुख्यमंत्री ने कहा कि प्रधानमंत्री Narendra Modi के विजन के अनुसार जनता का पैसा जनता के हित में खर्च किया जा रहा है और इसी वजह से प्रदेश में विकास साफ दिखाई दे रहा है।

    सीएम योगी का यह बयान सोशल मीडिया पर भी तेजी से चर्चा में आ गया, जहां लोग इसे मजेदार अंदाज में साझा कर रहे हैं, लेकिन साथ ही सरकारी संपत्ति की सुरक्षा और नागरिक जिम्मेदारी पर गंभीर संदेश भी बता रहे हैं।

  • छुट्टी कैंसिल तो GenZ का काउंटर अटैक! एयरपोर्ट से बोलीं अब 10 दिन बाद ही खुलेगा लैपटॉप

    छुट्टी कैंसिल तो GenZ का काउंटर अटैक! एयरपोर्ट से बोलीं अब 10 दिन बाद ही खुलेगा लैपटॉप


    नई दिल्ली । कल्पना कीजिए आप बोर्डिंग गेट पर खड़े हों बैग पैक हो चुका हो दोस्त डेस्टिनेशन पर पहुंच चुके हों और तभी फोन पर मैसेज आए कि आपकी छुट्टी रद्द कर दी गई है। आमतौर पर ऐसी स्थिति में लोग या तो गुस्से में कॉल मिलाते हैं या मैनेजर से बहस कर समाधान निकालने की कोशिश करते हैं। लेकिन एक GenZ कर्मचारी ने इस पूरे मामले को अलग ही अंदाज में संभाला। बहस करने के बजाय उन्होंने एयरपोर्ट से ही वीडियो रिकॉर्ड किया और साफ शब्दों में कहा अब मेरा लैपटॉप 10 दिन बाद ही खुलेगा। यही वीडियो अब सोशल मीडिया पर तेजी से वायरल हो रहा है और वर्क-लाइफ बैलेंस पर नई बहस छेड़ चुका है।

    पहले से दी थी सूचना फिर भी रद्द हुई छुट्टी

    वायरल वीडियो में सिमरन नाम की कर्मचारी एयरपोर्ट से अपनी बात रखती नजर आती हैं। उनका कहना है कि उन्होंने 22 जनवरी को ही अपने मैनेजर को सूचित कर दिया था कि 19 फरवरी से वह वियतनाम यात्रा पर रहेंगी। उस समय कोई आपत्ति नहीं जताई गई। टिकट बुक हो चुकी थी दोस्त पहले ही पहुंच चुके थे और वह खुद फ्लाइट पकड़ने के लिए तैयार थीं। तभी आखिरी समय पर मैसेज आया कि उनकी छुट्टी कैंसिल कर दी गई है।

    सिमरन ने वीडियो में स्पष्ट कहा कि वह काम इसलिए करती हैं ताकि जिंदगी को खुलकर जी सकें। उनका बयान मैं सिर्फ काम करने के लिए नहीं कमाती मैं अपनी आजादी महसूस करने के लिए कमाती हूं कई युवाओं को छू गया। उन्होंने अपने माता-पिता से मिली आजादी का जिक्र करते हुए कहा कि जब परिवार ने भरोसा दिया है तो वह बेवजह डरकर अपने प्लान नहीं बदलेंगी। उनके शब्द मैनेजर हैं मैनेजर ही रहेंगे… क्या अब उनसे भी डरूं? सोशल मीडिया पर खूब शेयर किए जा रहे हैं।

    सोशल मीडिया पर छिड़ी बहस

    वीडियो वायरल होते ही इंटरनेट दो हिस्सों में बंट गया। एक पक्ष का कहना है कि नौकरी में प्रोफेशनलिज्म और जिम्मेदारी सर्वोपरि होती है। अगर कंपनी को जरूरत हो तो कर्मचारी को सहयोग करना चाहिए। वहीं दूसरा पक्ष मानता है कि अगर छुट्टी पहले से स्वीकृत थी या समय रहते सूचना दी गई थी तो आखिरी वक्त पर बदलाव करना अनुचित है।

    कई यूजर्स ने लिखा कि GenZ अपनी प्राथमिकताओं को लेकर स्पष्ट है और मी टाइम को महत्व देना सीख चुका है। वहीं कुछ लोगों ने इसे कम्युनिकेशन गैप बताया संभव है कि छुट्टी की औपचारिक मंजूरी स्पष्ट न हुई हो या टीम में समन्वय की कमी रही हो।

    बदलती कार्यसंस्कृति की झलक

    यह घटना सिर्फ एक वायरल वीडियो भर नहीं है बल्कि बदलती कार्यसंस्कृति की झलक भी दिखाती है। नई पीढ़ी जहां काम के प्रति प्रतिबद्ध है वहीं वह मानसिक संतुलन और निजी जीवन को भी बराबर महत्व देती है। कंपनियों के लिए भी यह संकेत है कि पारदर्शी संवाद और स्पष्ट छुट्टी नीति कितनी जरूरी है।

  • अनिरुद्धाचार्य का विवादित हमला: मीडिया को बताया ‘मंथरा का अपडेट वर्जन’, साजिश और धमकी तक का आरोप

    अनिरुद्धाचार्य का विवादित हमला: मीडिया को बताया ‘मंथरा का अपडेट वर्जन’, साजिश और धमकी तक का आरोप


    नई दिल्ली। कथावाचक और धार्मिक वक्ता अनिरुद्धाचार्य एक बार फिर अपने तीखे और विवादित बयानों को लेकर चर्चा में आ गए हैं। हाल ही में एक सार्वजनिक मंच से उन्होंने मीडिया के एक वर्ग पर जोरदार हमला बोलते हुए उसे मंथरा का अपडेट वर्जन और धृतराष्ट्र तक कह दिया। अनिरुद्धाचार्य का आरोप है कि कुछ मीडिया संस्थान और पत्रकार टीआरपी की दौड़ में उनके खिलाफ झूठी खबरें फैलाने और साजिश रचने का काम कर रहे हैं। अपने बयान में अनिरुद्धाचार्य ने कहा कि आज का मीडिया सच दिखाने के बजाय सनसनी फैलाने में ज्यादा दिलचस्पी ले रहा है। उन्होंने आरोप लगाया कि कुछ चैनल और पत्रकार लगातार उनके नाम को विवादों से जोड़कर पेश करते हैं, जबकि उनके सामाजिक और धार्मिक कार्यों को पूरी तरह नजरअंदाज कर दिया जाता है। उन्होंने कहा कि वे सनातन धर्म के प्रचार के साथ-साथ वृद्धाश्रम, शिक्षा और गौसेवा जैसे कार्यों में वर्षों से सक्रिय हैं, लेकिन मीडिया इन पहलुओं को कभी प्रमुखता से नहीं दिखाती।

    अपनी उम्र और सेवा कार्यों का जिक्र करते हुए अनिरुद्धाचार्य ने बताया कि वे 35 वर्ष के हैं और महज 25 साल की उम्र से ही समाजसेवा में लगे हुए हैं। उनका कहना है कि इसके बावजूद मीडिया उनके काम की बजाय उनके बयानों को तोड़-मरोड़कर पेश करती है। उन्होंने उदाहरण देते हुए कहा कि जिस तरह कभी-कभी मीडिया बिना पुष्टि के गलत खबरें चला देता है, उसी का नतीजा है कि एक बार अभिनेता धर्मेंद्र के जीवित रहते हुए उनकी मौत की खबर फैला दी गई थी। यह मीडिया की जल्दबाजी और गैर-जिम्मेदारी को दिखाता है। लिव-इन रिलेशनशिप को लेकर दिए गए अपने पुराने बयान का जिक्र करते हुए अनिरुद्धाचार्य ने कहा कि उन्होंने केवल भारतीय संस्कृति के संदर्भ में अपनी राय रखी थी। उनके अनुसार, लिव-इन रिलेशनशिप भारतीय सांस्कृतिक मूल्यों का हिस्सा नहीं है। इस विषय पर राय रखने के बाद ही मीडिया का एक वर्ग उनके पीछे पड़ गया और लगातार उनके खिलाफ रिपोर्टिंग करने लगा। उन्होंने आरोप लगाया कि टीआरपी के लिए उनके बयान को गलत ढंग से पेश किया गया और जानबूझकर विवाद खड़ा किया गया।

    अनिरुद्धाचार्य ने यह भी दावा किया कि उनके खिलाफ झूठी एफआईआर और अफवाहें तक फैलाई गईं। उन्होंने कहा कि उन्होंने आज तक किसी का नुकसान नहीं किया, न ही किसी को भड़काने का काम किया, इसके बावजूद उन्हें बार-बार विवादों में घसीटा जाता है। उनका आरोप है कि कुछ पत्रकार और मीडिया संस्थान सनातन धर्म के खिलाफ पूर्वाग्रह के साथ काम कर रहे हैं।अपने सबसे तीखे शब्दों में उन्होंने मीडिया की तुलना रामायण की मंथरा से करते हुए कहा कि जैसे मंथरा ने साजिश कर परिवारों में फूट डाली थी, वैसे ही आज का मीडिया समाज को बांटने का काम कर रहा है। उन्होंने कहा कि पहले मंथरा हिंदुओं को आपस में लड़वाती थी और अब वही भूमिका मीडिया निभा रहा है। इसके साथ ही उन्होंने मीडिया को धृतराष्ट्र बताते हुए कहा कि यह सच देखने के बावजूद आंखें मूंद लेता है।

    अनिरुद्धाचार्य ने यहां तक कहा कि टीआरपी की होड़ में मीडिया किसी की जान को भी खतरे में डाल सकता है। उन्होंने आरोप लगाया कि सनातन धर्म की सेवा करने वालों के खिलाफ साजिशें रची जा सकती हैं और उन्हें बदनाम करने या नुकसान पहुंचाने की कोशिश हो सकती है। उनके इस बयान को कई लोग धमकी भरे लहजे के तौर पर भी देख रहे हैं। गौरतलब है कि यह पहली बार नहीं है जब अनिरुद्धाचार्य अपने बयानों को लेकर विवादों में आए हों। इससे पहले भी उनके कुछ वक्तव्यों पर सोशल मीडिया पर तीखी प्रतिक्रियाएं देखने को मिली हैं और कुछ मामलों में कानूनी नोटिस तक की नौबत आई है। उनका ताजा बयान एक बार फिर सोशल मीडिया और मीडिया जगत में बहस का मुद्दा बन गया है। जहां उनके समर्थक इसे सच बोलने की हिम्मत बता रहे हैं, वहीं आलोचक इसे गैर-जिम्मेदाराना और भड़काऊ करार दे रहे हैं।