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  • 18 हजार से ज्यादा जगहों पर फिटनेस का संदेश: BRICS Friendship Sunday on Cycle में शामिल हुए खेल मंत्री मांडविया

    18 हजार से ज्यादा जगहों पर फिटनेस का संदेश: BRICS Friendship Sunday on Cycle में शामिल हुए खेल मंत्री मांडविया

    नई दिल्ली।  विशाखापत्तनम में रविवार को फिटनेस और भारत की वैश्विक खेल पहल का अनोखा संगम देखने को मिला। भारत की 2026 की ब्रिक्स अध्यक्षता के तहत आयोजित बैठकों के बीच केंद्रीय खेल मंत्री मनसुख मांडविया ने BRICS Friendship Sunday on Cycle कार्यक्रम में हिस्सा लिया। इस खास आयोजन के जरिए फिटनेस के साथ पर्यावरण संरक्षण और स्वस्थ जीवनशैली का संदेश दिया गया। कार्यक्रम में साइकिल चलाकर लोगों को नियमित व्यायाम के लिए प्रेरित किया गया। मांडविया ने कहा कि प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के फिट इंडिया अभियान को देशभर में लगातार मजबूती मिल रही है और रविवार को आयोजित होने वाला यह साइकिलिंग अभियान युवाओं के बीच फिटनेस को जन आंदोलन बनाने में महत्वपूर्ण भूमिका निभा रहा है।

    कार्यक्रम के बाद मीडिया से बातचीत में मांडविया ने कहा कि विशाखापत्तनम में ब्रिक्स सम्मेलन के अवसर पर आयोजित BRICS Friendship Sunday on Cycle का यह संस्करण विशेष महत्व रखता है। उन्होंने बताया कि देशभर में 18000 से अधिक स्थानों पर Sunday on Cycle कार्यक्रम आयोजित किए जा रहे हैं। इन आयोजनों के जरिए युवाओं और आम लोगों को नियमित शारीरिक गतिविधियों के लिए प्रेरित किया जा रहा है। उनका कहना था कि साइकिल चलाना स्वास्थ्य के लिए बेहद प्रभावी व्यायाम है और इसे रोजमर्रा की जिंदगी का हिस्सा बनाया जा सकता है।

    मांडविया ने साइकिलिंग को केवल फिटनेस से जोड़कर नहीं देखा बल्कि इसे पर्यावरण संरक्षण और ईंधन बचत से भी जोड़ा। उन्होंने कहा कि साइकिल चलाने से शरीर स्वस्थ रहता है और प्रदूषण कम करने में भी मदद मिलती है। इससे ईंधन की बचत होती है और पर्यावरण को सुरक्षित रखने में योगदान मिलता है। उन्होंने कहा कि विकसित भारत के निर्माण के लिए देश के नागरिकों का स्वस्थ और फिट रहना जरूरी है। स्वस्थ व्यक्ति से स्वस्थ समाज बनता है और स्वस्थ समाज ही मजबूत और फिट राष्ट्र की नींव तैयार करता है।

    दरअसल भारत इस वर्ष ब्रिक्स की अध्यक्षता कर रहा है और इसी के तहत 22 और 23 अगस्त को आंध्र प्रदेश के विशाखापत्तनम में ब्रिक्स युवा मंत्रियों और खेल मंत्रियों की बैठकों का आयोजन किया जा रहा है। इन बैठकों में ब्रिक्स के सभी 11 सदस्य देशों के मंत्री और प्रतिनिधिमंडल हिस्सा ले रहे हैं। बैठकों का मुख्य उद्देश्य युवा मामलों और खेल के क्षेत्र में सदस्य देशों के बीच सहयोग को और मजबूत करना है।

    केंद्रीय खेल मंत्री डॉ. मनसुख मांडविया इन बैठकों की अध्यक्षता कर रहे हैं। युवा मामले और खेल राज्य मंत्री रक्षा खडसे भी इन महत्वपूर्ण बैठकों में शामिल हैं। 23 अगस्त को होने वाली ब्रिक्स खेल मंत्रियों की बैठक में सदस्य देशों के खेल मंत्री और प्रतिनिधिमंडल के प्रमुख हिस्सा ले रहे हैं। इस दौरान खेलों के माध्यम से सहयोग बढ़ाने और सदस्य देशों के बीच साझेदारी को मजबूत करने पर चर्चा की जा रही है।

    भारत की 2026 ब्रिक्स अध्यक्षता का विषय लचीलेपन नवाचार सहयोग और स्थिरता के लिए निर्माण रखा गया है। इस थीम में लोगों को केंद्र में रखते हुए मानवता को प्राथमिकता देने की सोच दिखाई देती है। ऐसे में BRICS Friendship Sunday on Cycle जैसे कार्यक्रम भारत की फिटनेस और स्वस्थ जीवनशैली की पहल को अंतरराष्ट्रीय मंच से जोड़ने का माध्यम भी बन रहे हैं। इससे फिट इंडिया अभियान को नई ऊर्जा मिलने के साथ युवाओं को खेल और शारीरिक गतिविधियों से जोड़ने की कोशिश को भी मजबूती मिलती है।

  • आईएनएस महेंद्रगिरी से बढ़ी भारत की समुद्री ताकत, राजनाथ सिंह बोले- आधुनिक तकनीक और पारंपरिक सैन्य क्षमता का संतुलन ही भविष्य की जीत तय करेगा

    आईएनएस महेंद्रगिरी से बढ़ी भारत की समुद्री ताकत, राजनाथ सिंह बोले- आधुनिक तकनीक और पारंपरिक सैन्य क्षमता का संतुलन ही भविष्य की जीत तय करेगा

    नई दिल्ली । भारतीय नौसेना के युद्धक बेड़े में स्वदेशी स्टील्थ फ्रिगेट आईएनएस महेंद्रगिरी के शामिल होने के साथ भारत की समुद्री सुरक्षा क्षमता को एक महत्वपूर्ण मजबूती मिली है। इस अवसर पर रक्षा मंत्री राजनाथ सिंह ने कहा कि भारत अब केवल समुद्र के माध्यम से अपनी रणनीतिक दिशा तय करने वाला देश नहीं रहेगा, बल्कि भविष्य में समुद्री क्षेत्र की दिशा निर्धारित करने की क्षमता भी विकसित कर रहा है। उन्होंने इसे भारत की बढ़ती सामरिक शक्ति, आत्मनिर्भर रक्षा निर्माण और वैश्विक समुद्री उपस्थिति का महत्वपूर्ण प्रतीक बताया।

    विशाखापट्टनम में आयोजित कमीशनिंग समारोह को संबोधित करते हुए रक्षा मंत्री ने कहा कि आईएनएस महेंद्रगिरी एक आधुनिक ब्लू-वाटर स्टील्थ फ्रिगेट है, जो तटीय क्षेत्रों तक सीमित न रहकर गहरे समुद्री क्षेत्रों में लंबे समय तक अभियान संचालित करने में सक्षम है। यह युद्धपोत समुद्री सीमाओं की सुरक्षा, रणनीतिक निगरानी और राष्ट्रीय हितों की रक्षा में महत्वपूर्ण भूमिका निभाएगा। उन्होंने कहा कि भारतीय नौसेना लगातार आधुनिक तकनीक और स्वदेशी रक्षा प्रणालियों के जरिए अपनी परिचालन क्षमता का विस्तार कर रही है।

    आईएनएस महेंद्रगिरी प्रोजेक्ट 17ए के तहत निर्मित छठा और अंतिम स्टील्थ फ्रिगेट है। यह परियोजना भारत के स्वदेशी युद्धपोत निर्माण कार्यक्रम की महत्वपूर्ण उपलब्धियों में शामिल है। युद्धपोत को आधुनिक हथियार प्रणालियों, लंबी दूरी की मिसाइल क्षमता, अत्याधुनिक रडार, इलेक्ट्रॉनिक युद्ध प्रणाली, पनडुब्बी रोधी हथियारों और उन्नत रक्षा उपकरणों से लैस किया गया है। इसके कारण यह समुद्र, आकाश और पानी के भीतर मौजूद संभावित खतरों का प्रभावी ढंग से मुकाबला करने में सक्षम माना जाता है।

    रक्षा मंत्री ने कहा कि वर्तमान वैश्विक परिस्थितियों में युद्ध का स्वरूप लगातार बदल रहा है। कृत्रिम बुद्धिमत्ता, ड्रोन और अन्य अत्याधुनिक तकनीकों का महत्व तेजी से बढ़ा है, लेकिन पारंपरिक सैन्य शक्ति की आवश्यकता आज भी उतनी ही महत्वपूर्ण बनी हुई है। उन्होंने कहा कि भविष्य के संघर्षों में आधुनिक तकनीक निर्णायक भूमिका निभाएगी, लेकिन किसी भी राष्ट्र की वास्तविक ताकत उसके प्रशिक्षित सैनिकों, मजबूत सैन्य ढांचे और विश्वसनीय रक्षा क्षमता से ही तय होगी।

    उन्होंने इस बात पर भी जोर दिया कि भारत भविष्य की तकनीकों में निवेश के साथ-साथ अपनी पारंपरिक सैन्य क्षमताओं को भी लगातार मजबूत बना रहा है। उनके अनुसार आधुनिक तकनीक और पारंपरिक सैन्य प्लेटफॉर्म एक-दूसरे के विकल्प नहीं बल्कि पूरक हैं। इतिहास यह प्रमाणित करता है कि जिन देशों ने नई तकनीकों के आकर्षण में अपनी पारंपरिक सैन्य शक्ति की उपेक्षा की, उन्हें गंभीर चुनौतियों का सामना करना पड़ा। इसलिए संतुलित रक्षा रणनीति ही राष्ट्रीय सुरक्षा का सबसे प्रभावी आधार बन सकती है।

    रक्षा मंत्री ने हाल के सुरक्षा अभियानों का उल्लेख करते हुए कहा कि भारतीय सशस्त्र बलों ने समय-समय पर यह साबित किया है कि देश की आधुनिक और पारंपरिक दोनों प्रकार की सैन्य क्षमताएं मिलकर प्रभावी परिणाम देने में सक्षम हैं। उन्होंने विश्वास व्यक्त किया कि भारतीय नौसेना आने वाले वर्षों में हिंद महासागर क्षेत्र में शांति, स्थिरता और समुद्री सुरक्षा सुनिश्चित करने में और अधिक प्रभावशाली भूमिका निभाएगी। आईएनएस महेंद्रगिरी का नौसेना में शामिल होना आत्मनिर्भर भारत अभियान, स्वदेशी रक्षा उत्पादन और समुद्री रणनीतिक क्षमता को नई ऊंचाई देने की दिशा में एक महत्वपूर्ण उपलब्धि माना जा रहा है। भारत लगातार अपने रक्षा ढांचे को आधुनिक बनाते हुए ऐसी सैन्य क्षमताओं का विकास कर रहा है जो राष्ट्रीय सुरक्षा के साथ-साथ वैश्विक समुद्री संतुलन में भी उसकी भूमिका को और अधिक सशक्त बनाएंगी।

  • वैश्विक सीफूड बाजार में हिस्सेदारी बढ़ाने की तैयारी, अगले पांच वर्षों में निर्यात को 30 अरब डॉलर तक पहुंचाने का रोडमैप

    वैश्विक सीफूड बाजार में हिस्सेदारी बढ़ाने की तैयारी, अगले पांच वर्षों में निर्यात को 30 अरब डॉलर तक पहुंचाने का रोडमैप

    नई दिल्ली । भारत के समुद्री उत्पाद निर्यात क्षेत्र ने पिछले एक दशक में उल्लेखनीय प्रगति दर्ज की है और अब देश इस क्षेत्र को नई ऊंचाइयों तक पहुंचाने की तैयारी में जुट गया है। केंद्र सरकार ने अगले पांच वर्षों में समुद्री उत्पादों के निर्यात को 30 अरब डॉलर तक पहुंचाने का महत्वाकांक्षी लक्ष्य तय किया है। इस दिशा में निर्यात क्षमता बढ़ाने, वैश्विक बाजारों तक पहुंच मजबूत करने और मूल्य संवर्धित उत्पादों को बढ़ावा देने पर विशेष जोर दिया जा रहा है।

    हाल ही में आयोजित राष्ट्रीय समुद्री उत्पाद निर्यात कार्यशाला के दौरान केंद्रीय वाणिज्य एवं उद्योग मंत्री पीयूष गोयल ने कहा कि भारत का समुद्री उत्पाद निर्यात पिछले दस वर्षों में लगभग 70 प्रतिशत बढ़ा है। उन्होंने बताया कि वर्तमान में वैश्विक सीफूड व्यापार में भारत की हिस्सेदारी करीब चार प्रतिशत है, जिसे आने वाले वर्षों में उल्लेखनीय रूप से बढ़ाने की आवश्यकता है। इसके लिए सरकार, उद्योग, निर्यातक और किसानों के बीच बेहतर समन्वय को महत्वपूर्ण माना जा रहा है।

    उन्होंने कहा कि केवल पारंपरिक निर्यात पर निर्भर रहने के बजाय रेडी-टू-ईट और रेडी-टू-कुक जैसे वैल्यू एडेड उत्पादों के उत्पादन और निर्यात को बढ़ावा देना समय की मांग है। अंतरराष्ट्रीय बाजारों में ऐसे उत्पादों की मांग लगातार बढ़ रही है और भारत के लिए यह एक बड़ा अवसर साबित हो सकता है। इसके साथ ही हाल के वर्षों में विभिन्न देशों के साथ हुए मुक्त व्यापार समझौतों से खुले नए बाजारों का लाभ उठाने की रणनीति पर भी बल दिया गया।

    मत्स्य पालन क्षेत्र के आंकड़े भी इस विकास यात्रा को मजबूत आधार प्रदान करते हैं। देश में मछली उत्पादन वर्ष 2012-13 के लगभग 95.8 लाख टन से बढ़कर 2024-25 में करीब 198 लाख टन तक पहुंच चुका है। उत्पादन में यह वृद्धि न केवल घरेलू मांग को पूरा करने में सहायक रही है बल्कि निर्यात क्षमता बढ़ाने में भी महत्वपूर्ण भूमिका निभा रही है। वैश्विक आर्थिक चुनौतियों और बाजार में उतार-चढ़ाव के बावजूद भारत का समुद्री उत्पाद निर्यात लगभग 8.46 अरब डॉलर तक पहुंच चुका है।

    समुद्री निर्यात में फ्रोजन झींगा अब भी सबसे प्रमुख उत्पाद बना हुआ है। अंतरराष्ट्रीय बाजारों में इसकी मांग लगातार बनी हुई है, जिससे भारत को विदेशी मुद्रा अर्जित करने में मदद मिल रही है। सरकार इस क्षेत्र में ट्रेसबिलिटी, गुणवत्ता नियंत्रण और टिकाऊ उत्पादन प्रणालियों को मजबूत बनाने के लिए विभिन्न योजनाओं के माध्यम से निवेश और सहायता उपलब्ध करा रही है।

    विशेषज्ञों का मानना है कि निर्यात वृद्धि के लिए केवल उत्पादन बढ़ाना पर्याप्त नहीं होगा। कोल्ड चेन नेटवर्क, आधुनिक लॉजिस्टिक्स, गुणवत्तापूर्ण बीजों की उपलब्धता, रोग प्रबंधन और अंतरराष्ट्रीय प्रमाणन मानकों का पालन जैसे क्षेत्रों में भी व्यापक सुधार आवश्यक हैं। इसी उद्देश्य से कार्यशाला में उद्योग प्रतिनिधियों, वैज्ञानिकों, स्टार्टअप्स और किसानों ने विभिन्न चुनौतियों और संभावित समाधानों पर विस्तार से चर्चा की।

    समुद्री उत्पादों के निर्यात को बढ़ावा देने में परिवहन और एयर कार्गो अवसंरचना की भूमिका भी महत्वपूर्ण मानी जा रही है। उच्च मूल्य वाले उत्पादों को तेजी से अंतरराष्ट्रीय बाजारों तक पहुंचाने के लिए मल्टीमॉडल कनेक्टिविटी और आधुनिक कार्गो सुविधाओं के विस्तार पर काम किया जा रहा है। सरकार का मानना है कि बेहतर बुनियादी ढांचा, तकनीकी नवाचार और टिकाऊ मत्स्य पालन पद्धतियां भारत को वैश्विक सीफूड व्यापार में अधिक प्रतिस्पर्धी बना सकती हैं।

    आने वाले वर्षों में यदि उत्पादन, प्रसंस्करण, गुणवत्ता नियंत्रण और बाजार विस्तार की योजनाएं प्रभावी ढंग से लागू होती हैं, तो भारत न केवल अपने निर्यात लक्ष्य को हासिल कर सकता है बल्कि वैश्विक समुद्री उत्पाद व्यापार में एक प्रमुख शक्ति के रूप में भी उभर सकता है।

  • इंटरनेशनल फ्लीट रिव्यू में भारत दिखाएगा INS विक्रांत की ताकत, विदेशी जहाज भी पहुंचे विशाखापत्तनम

    इंटरनेशनल फ्लीट रिव्यू में भारत दिखाएगा INS विक्रांत की ताकत, विदेशी जहाज भी पहुंचे विशाखापत्तनम


    विशाखापत्तनम। भारत अपनी समुद्री शक्ति और अंतरराष्ट्रीय कूटनीति का जोरदार प्रदर्शन करने के लिए तैयार है। विशाखापत्तनम में आयोजित होने वाले इंटरनेशनल फ्लीट रिव्यू (IFR 2026) और एक्सरसाइज मिलन (MILAN 2026) में विदेशी नौसैनिक जहाजों का आगमन शुरू हो गया है। सोमवार को भारतीय नौसेना ने इंडोनेशिया, संयुक्त अरब अमीरात और बांग्लादेश के युद्धपोतों का स्वागत किया।

    विदेशी जहाजों का आगमन
    इंडोनेशियाई नौसेना का फ्रिगेट KRI Bung Tomo-357 पहले ही विशाखापत्तनम पहुंच चुका है। पूर्वी नौसेना कमान ने इसे “सेलामल दातंग” कहकर अभिनंदन किया। संयुक्त अरब अमीरात का नौसैनिक कोर्वेट Al-Emarat भी अभ्यास में शामिल हुआ, जो भारत और UAE के मजबूत द्विपक्षीय संबंधों का प्रतीक है। वहीं, पड़ोसी बांग्लादेश का फ्रिगेट BNS Somudra Avijan भी बेड़े में शामिल हो गया।

    इससे पहले थाईलैंड, ऑस्ट्रेलिया और श्रीलंका के जहाज भी पोर्ट में पहुँच चुके हैं, जिससे यह आयोजन अंतरराष्ट्रीय स्तर पर और अधिक भव्य और विविधता पूर्ण बन गया है।

    IFR 2026: राष्ट्रपति करेंगी समीक्षा
    18 फरवरी को समुद्र में होने वाले इंटरनेशनल फ्लीट रिव्यू का निरीक्षण भारत की राष्ट्रपति द्रौपदी मुर्मू करेंगी। यह स्वतंत्र भारत के सबसे बड़े नौसैनिक आयोजनों में से एक माना जाता है। इस वर्ष कुल 71 जहाज इस आयोजन में हिस्सा लेंगे, जिनमें भारतीय नौसेना के 45 जहाज, 19 विदेशी युद्धपोत और शेष कोस्ट गार्ड, मर्चेंट नेवी और अनुसंधान जहाज शामिल हैं।

    मुख्य आकर्षण के रूप में भारतीय विमानवाहक पोत INS विक्रांत पहले ही विशाखापत्तनम में पहुंच चुका है। यह जहाज समारोह का केंद्रबिंदु होगा और दर्शकों का ध्यान सबसे अधिक खींचेगा। सभी जहाजों को छह पंक्तियों में व्यवस्थित किया जाएगा।

    मिलन अभ्यास: समुद्री सहयोग का बड़ा मंच
    1995 में महज चार देशों के साथ शुरू हुआ मिलन अभ्यास अब अंतरराष्ट्रीय स्तर पर एक विशाल मंच बन गया है। इस साल 65 देशों की नौसेनाएं इसमें भाग ले रही हैं। इसका उद्देश्य समुद्री सुरक्षा सहयोग को बढ़ावा देना और मित्र देशों के बीच पेशेवर बातचीत को मजबूत करना है। रक्षा मंत्रालय ने बताया कि इसके लिए ‘मिलन विलेज’ का उद्घाटन किया गया है, जो 70 से अधिक देशों के प्रतिनिधियों के लिए एक सांस्कृतिक और मैत्री केंद्र के रूप में कार्य करेगा।

    इंटरनेशनल सिटी परेड
    उत्सव के रूप में 19 फरवरी की शाम को विशाखापत्तनम में रोड पर भव्य इंटरनेशनल सिटी परेड आयोजित की जाएगी। इसमें 45 सैन्य दल हिस्सा लेंगे। मनोरंजन और सांस्कृतिक आदान-प्रदान के लिए 7 से 8 विदेशी बैंड अपनी प्रस्तुति देंगे, जिससे यह न केवल सैन्य ताकत बल्कि दोस्ताना संबंधों का उत्सव भी साबित होगा।

  • स्मृति मंधन की मैदन पर वपसीभरत और श्रीलंक के बीच टी20 सीरीज 21 दिसंबर से

    स्मृति मंधन की मैदन पर वपसीभरत और श्रीलंक के बीच टी20 सीरीज 21 दिसंबर से


    नई दिल्ली । भारतीय महिला क्रिकेट टीम की स्टार ओपनर स्मृति मंधाना जल्द ही मैदान पर वापसी करने वाली हैं। आगामी भारत और श्रीलंका के बीच होने वाली पांच मैचों की टी20 इंटरनेशनल सीरीज के साथ मंधाना क्रिकेट की दुनिया में अपना कदम वापस रख रही हैं। इस सीरीज के दौरान मंधाना पर विशेष ध्यान रहेगाक्योंकि वह भारतीय महिला टीम की उपकप्तान हैं और उनकी वापसी को लेकर फैन्स के बीच काफी उत्साह है।

    टीम इंडिया का ऐलान और सीरीज का शेड्यूल

    भारत और श्रीलंका के बीच होने वाली पांच मैचों की सीरीज के लिए भारतीय महिला क्रिकेट टीम का ऐलान कर दिया गया है। यह सीरीज 21 दिसंबर को विशाखापट्टनम में होने वाले पहले टी20 मैच से शुरू होगी और 30 दिसंबर तक चलेगी। इस सीरीज के शेड्यूल का पहले ही ऐलान हो चुका थालेकिन अब टीम का भी ऐलान कर दिया गया है। यह भारतीय महिला टीम का वनडे विश्व कप के बाद पहला अंतरराष्ट्रीय मुकाबला होगा। टीम की कमान हरमनप्रीत कौर के हाथों में रहेगीजबकि स्मृति मंधाना उपकप्तान के रूप में उनकी मदद करेंगी।

    स्मृति मंधाना का ध्यान आकर्षित करना व्यक्तिगत जीवन और क्रिकेट

    स्मृति मंधाना इस समय चर्चा का केंद्र बनी हुई हैंन केवल अपनी क्रिकेटिंग उपलब्धियों के लिएबल्कि उनके व्यक्तिगत जीवन के कारण भी। हाल ही मेंमंधाना अपनी शादी को लेकर सुर्खियों में थीं। हालांकिउनके पिता की अचानक तबीयत खराब हो जाने के कारण शादी की तारीख को टाल दिया गया था। बाद मेंमंधाना ने खुद सोशल मीडिया पर यह स्पष्ट किया कि अब उनकी शादी नहीं हो रही हैलेकिन इस घटनाक्रम ने मीडिया में काफी हलचल मचाई।

    टी20 इंटरनेशनल में स्मृति मंधाना के शानदार आंकड़े

    स्मृति मंधाना ने अब तक अपने टी20 इंटरनेशनल करियर में 154 मुकाबले खेले हैंजिसमें उन्होंने कुल 3984 रन बनाए हैं। इस दौरानउनके नाम एक शतक और 31 अर्धशतक दर्ज हैं। उनका औसत और स्ट्राइक रेट शानदार रहा हैजो उन्हें एक अंतरराष्ट्रीय क्रिकेट स्टार बनाता है। इस समयस्मृति मंधाना आईसीसी की टी20 रैंकिंग में तीसरे नंबर पर हैंऔर उनकी रेटिंग 767 है। अगर मंधाना इस सीरीज में शानदार प्रदर्शन करती हैंतो वह जल्द ही पहले नंबर पर भी काबिज हो सकती हैं।

    टी20 सीरीज का पूरा शेड्यूल

    पहला टी20 मैच 21 दिसंबरविशाखापट्टनम
    दूसरा टी20 मैच 23 दिसंबरविशाखापट्टनम
    तीसरा टी20 मैच 26 दिसंबरतिरुवनंतपुरम
    चौथा टी20 मैच 28 दिसंबरतिरुवनंतपुरम
    पांचवां टी20 मैच 30 दिसंबरतिरुवनंतपुरम

    भारतीय महिला टीम का स्क्वॉड

    भारतीय महिला टीम की कप्तान हरमनप्रीत कौर हैंजबकि उपकप्तान स्मृति मंधाना हैं। इसके अलावा टीम में दीप्ति शर्मास्नेह राणाजेमिमा रोड्रिग्सशेफाली वर्माहरलीन देयोलअमनजोत कौरअरुंधति रेड्डीक्रांति गौड़रेणुका सिंह ठाकुरऋचा घोष विकेटकीपर जी कमलिनी विकेटकीपर श्री चरणीऔर वैष्णवी शर्मा भी शामिल हैं।

    स्मृति मंधाना पर सबकी नजरें

    स्मृति मंधाना के लिए यह सीरीज एक महत्वपूर्ण अवसर हो सकती है। भारत की स्टार ओपनर पर सभी की नजरें रहेंगीखासकर उनकी व्यक्तिगत और क्रिकेटिंग उपलब्धियों के संदर्भ में। मंधाना की बल्लेबाजी में जो आकर्षण हैवह हर मैच में दर्शकों को अपने साथ जोड़े रखता है। अगर मंधाना अपनी शानदार फॉर्म जारी रखती हैंतो न केवल भारत को सीरीज जीतने में मदद मिल सकती हैबल्कि वह अपनी रैंकिंग में और ऊपर भी जा सकती हैं। टी20 सीरीज के दौरान भारत और श्रीलंका के बीच जबरदस्त मुकाबला देखने को मिलेगाजिसमें मंधाना की टीम के प्रति महत्वपूर्ण भूमिका होगी। यह सीरीज निश्चित ही महिला क्रिकेट के प्रशंसकों के लिए रोमांचक होने वाली है।