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  • शिवपुरी में नवदुर्गा सांस्कृतिक समारोह मंडल का भव्य विसर्जन समारोह, आकर्षक झांकियों और बच्चों की प्रस्तुतियों ने जीता दिल

    शिवपुरी में नवदुर्गा सांस्कृतिक समारोह मंडल का भव्य विसर्जन समारोह, आकर्षक झांकियों और बच्चों की प्रस्तुतियों ने जीता दिल


    शिवपुरी: में श्री नवदुर्गा सांस्कृतिक समारोह मंडल की ओर से नवरात्रि के समापन पर देवी प्रतिमा विसर्जन समारोह भव्य रूप से आयोजित किया गया। माधव चौक चौराहे पर सजाए गए मंच से विभिन्न स्थानों से आईं देवी प्रतिमाओं की झांकियों और आकर्षक विमानों का स्वागत किया गया। कार्यक्रम में बच्चों की नृत्य प्रस्तुतियों, डांडिया, गरबा, योग प्रदर्शन और बाहर से आए कलाकारों की प्रस्तुतियों ने दर्शकों का ध्यान आकर्षित किया। चल झांकियों का भी भव्य प्रदर्शन किया गया। समारोह में बड़ी संख्या में शहरवासियों ने भाग लेकर धार्मिक और सांस्कृतिक आयोजन का आनंद लिया।

    कार्यक्रम में मुख्य अतिथि के रूप में आईटीबीपी शिवपुरी के डीआईजी राजीव लोचन शुक्ला उपस्थित रहे, जबकि अध्यक्षता शिवपुरी के डीएफओ सुधांशु यादव ने की। समारोह की शुरुआत अतिथियों और समिति के सदस्यों द्वारा माता की आरती तथा भगवान श्रीगणेश की वंदना के साथ हुई। इसके बाद समिति अध्यक्ष तरुण अग्रवाल ने स्वागत भाषण दिया। आयोजन में पहुंचे अतिथियों का समिति के सदस्यों ने स्वागत किया।

    समारोह में महामंडलेश्वर पुरुषोत्तम दास जी महाराज, प्रहलाद भारती, मंशापूर्णी माता मंदिर की महंत मंजू दीक्षित, सनातन सेना के राष्ट्रीय अध्यक्ष भगवती प्रसाद शुक्ल, राजू बाथम, डीपीसी दफेदार सिंह और महेंद्र सिंह वशिष्ठ विशिष्ट अतिथि के रूप में शामिल हुए। समिति के संरक्षकों रामविलास गुप्ता, अमन गोयल, राजेश कोचेटा और हरज्ञान प्रजापति सहित अन्य सदस्यों का भी स्वागत किया गया।

    आयोजन में सहयोग देने वाले प्रायोजकों को सम्मानित किया गया। इनमें सुमत गुप्ता, पुरुषोत्तम दास गर्ग, विनायक सेठ, उमा देवी शर्मा और सुषमा पांडेय शामिल रहे। हम फाउंडेशन की ओर से साधना गुप्ता, साधना शर्मा और अर्चना माहेश्वरी का भी सम्मान किया गया। विशेष सहयोगी के रूप में पटेल एंड संस के भूपेंद्र रावत का योगदान रहा।

    माधव चौक पर बनाए गए मंच से गुजरने वाले सभी विमान, झांकी मंडलों और समाजसेवी संस्थाओं का नवदुर्गा मंडल की ओर से शॉल, श्रीफल और माल्यार्पण कर स्वागत किया गया। देवी के स्वागत के लिए विभिन्न समितियों ने शहर के अलग-अलग स्थानों पर निःशुल्क हलवा-चना, शरबत, खिचड़ी और सब्जी-पूड़ी का वितरण किया। इस दौरान शहरवासियों ने प्रसादी ग्रहण की और आयोजन में सहभागिता की।

    सांस्कृतिक कार्यक्रम के दौरान बच्चों ने मंच पर नृत्य और योग की प्रस्तुतियां दीं। डांडिया और गरबा कार्यक्रम में भी प्रतिभागियों ने हिस्सा लिया। नृत्य प्रतियोगिता के निर्णायक मंडल में प्रियंका व्यास, नेत्रा जोशी, टीना गुप्ता और दीपा बंसल शामिल रहीं। बाहर से आए कलाकारों ने भी विशेष प्रस्तुतियां दीं। मंच पर विभिन्न सांस्कृतिक कार्यक्रमों के माध्यम से धार्मिक उत्सव का माहौल बना रहा।

    कार्यक्रम के संचालन में मणिका शर्मा, वरुण राजौरिया, शिखा मंगल और भोपाल की एंकर नम्रता शुक्ला की भूमिका रही। आयोजन को सफल बनाने में अध्यक्ष तरुण अग्रवाल, संयोजक संदीप वशिष्ठ, स्वागत अध्यक्ष डॉ. राजेंद्र गुप्ता, सह स्वागत अध्यक्ष बृजेश शर्मा, उपाध्यक्ष रामलखन मुढ़ौतिया और वरुण राजौरिया सहित समिति के पदाधिकारियों और सदस्यों ने योगदान दिया। सचिव अरुण शर्मा, सह सचिव हर्षित मंगल, कोषाध्यक्ष हृदेश गोयल, सह कोषाध्यक्ष रवि पाराशर, मंच प्रभारी संकेत शुक्ला और सह मंच प्रभारी देवेंद्र जैन खतौरा सहित अन्य सदस्य भी आयोजन की व्यवस्थाओं में शामिल रहे।

    कार्यक्रम संयोजक संदीप वशिष्ठ ने जिला पुलिस प्रशासन, नगरपालिका, विद्युत विभाग और शहर की धर्मप्रेमी जनता के प्रति आभार व्यक्त किया। उन्होंने शहरवासियों को दशहरा पर्व की शुभकामनाएं भी दीं। आयोजन के अंत में माता की महाआरती की गई और भावपूर्ण विदाई के साथ विसर्जन समारोह संपन्न हुआ।

    मुख्य समारोह से पहले नवदुर्गा सांस्कृतिक समारोह मंडल ने क्षत्रिय समाज की बाइक रैली और दशहरा मिलन चल समारोह का स्वागत किया था। दोपहर में खटीक समाज की काली माता रैली तथा शाम को पंजाबी परिषद और श्री नरसिंह मंदिर उत्सव समिति की ओर से निकाली गई राम बारात का भी स्वागत किया गया।

  • शिवपुरी की महारानी मां काली आज पालकी में निकलेंगी, हजारों भक्तों के साथ गणेश कुंड में होगा विसर्जन

    शिवपुरी की महारानी मां काली आज पालकी में निकलेंगी, हजारों भक्तों के साथ गणेश कुंड में होगा विसर्जन


    मध्य प्रदेश: के शिवपुरी शहर में मंगलवार, 20 अक्टूबर को दशहरे के अवसर पर धार्मिक उत्सव और प्रतिमा विसर्जन की गतिविधियां तेज रहेंगी। खटीक मोहल्ले में विराजमान मां काली की प्रतिमा को श्रद्धालु पालकी में बैठाकर भव्य शोभायात्रा के साथ विसर्जन स्थल गणेश कुंड तक ले जाएंगे। शिवपुरी की महारानी के नाम से प्रसिद्ध मां काली की इस यात्रा में हजारों भक्तों के शामिल होने की संभावना है। यात्रा का निर्धारित समय दोपहर 2 बजे से शाम 5 बजे तक रखा गया है। इस दौरान यात्रा मार्ग को वाहनों के लिए प्रतिबंधित क्षेत्र बनाया जाएगा।

    खटीक समाज द्वारा प्रतिवर्ष शारदीय नवरात्रि में खटीक मोहल्ले में मां काली की प्रतिमा स्थापित की जाती है। नवरात्रि के समापन पर दशहरे के दिन प्रतिमा को पालकी में विराजमान कर विसर्जन के लिए ले जाने की परंपरा है। इस शोभायात्रा की खास पहचान पालकी में मां काली की प्रतिमा का नगर भ्रमण और श्रद्धालुओं की बड़ी भागीदारी है। प्रतिमा की पालकी लगभग 2 किलोमीटर की दूरी करीब 30 से 35 मिनट में तय करती है। यात्रा को देखने और मां के दर्शन करने के लिए सड़क के दोनों ओर बड़ी संख्या में लोग एकत्र होते हैं।

    इस बार तिथियों के क्रम में बदलाव के कारण महाअष्टमी, महानवमी और दशहरे के आयोजन को लेकर अलग-अलग मान्यताएं देखने को मिलीं। शारदीय नवरात्रि में अष्टमी तिथि 18 अक्टूबर को सुबह 8 बजकर 28 मिनट के बाद शुरू हुई और 19 अक्टूबर को सुबह लगभग 10 बजकर 52 मिनट तक रही। इसके बाद नवमी तिथि शुरू हो गई। इसी कारण 19 अक्टूबर को महाअष्टमी और महानवमी दोनों पर्व मनाए गए, जबकि 20 अक्टूबर को दशहरा मनाया जा रहा है। कुछ श्रद्धालुओं ने नवरात्रि के नौ दिनों के अनुसार पूजा-अर्चना और विसर्जन का कार्यक्रम पहले ही पूरा कर लिया था। इसके चलते सोमवार को भी शहर के विभिन्न क्षेत्रों से प्रतिमाओं का विसर्जन किया गया।

    मंगलवार को शिवपुरी में मां काली के साथ अन्य देवी प्रतिमाओं की विसर्जन यात्राएं भी निकाली जाएंगी। शहर में आधा सैकड़ा से अधिक शोभायात्राएं निकलने की संभावना है। माधव चौक पर स्थापित वैष्णो देवी की झांकी का चल समारोह भी दशहरे के दिन निकाला जाएगा। यह शोभायात्रा शाम को शहर के विभिन्न मार्गों से गुजरेगी। इसके अलावा क्षत्रिय समाज का चल समारोह भी आयोजित होगा। प्रतिमाओं की शोभायात्राओं के चलते शहर में देर रात तक धार्मिक गतिविधियां जारी रहने की संभावना है।

    श्रद्धालुओं की भीड़ और शोभायात्राओं को व्यवस्थित रखने के लिए जिला प्रशासन तथा पुलिस ने यातायात प्रबंध किए हैं। मां काली की यात्रा के दौरान दोपहर 2 से शाम 5 बजे तक संबंधित मार्ग पर वाहनों का आवागमन प्रतिबंधित रहेगा। शाम 6 बजे से माधव चौक के चारों ओर के रास्ते कार्यक्रम समाप्त होने तक बंद रहेंगे। फिजिकल रोड से माधव चौक की ओर और गुरुद्वारा की तरफ से कोर्ट रोड पर अनावश्यक वाहनों का प्रवेश रोका जाएगा। लक्ष्मी निवास से सब्जी मंडी और हंस बिल्डिंग की ओर जाने वाला मार्ग शाम 7 बजे से अंतिम झांकी निकलने तक बंद रहेगा।

    यातायात प्रभारी रणवीर सिंह यादव ने बताया कि व्यवस्था बिगाड़ने वालों के खिलाफ कार्रवाई की जाएगी। माधव चौक पर वन-वे व्यवस्था लागू रहेगी। सुरवाया तिराहे पर मंगलवार रात 7 बजे से बुधवार सुबह 10 बजे तक हाईवे से शहर में भारी वाहनों का प्रवेश प्रतिबंधित रहेगा। प्रशासन का उद्देश्य अमोला में विसर्जन के दौरान संभावित हादसों को रोकना है। भीड़ कम होने के बाद मार्गों को चरणबद्ध तरीके से खोला जाएगा। श्रद्धालुओं और वाहन चालकों से निर्धारित यातायात व्यवस्था का पालन करने की अपेक्षा की गई है।

  • मां दुर्गा की बिंदी के नीचे क्यों बनाई जाती है मकड़ी और उसका जाल? जानिए महामाया, मोह-माया और इस अनोखी परंपरा का धार्मिक रहस्य

    मां दुर्गा की बिंदी के नीचे क्यों बनाई जाती है मकड़ी और उसका जाल? जानिए महामाया, मोह-माया और इस अनोखी परंपरा का धार्मिक रहस्य


    नई दिल्ली ।
    शारदीय नवरात्र का पावन पर्व श्रद्धा और भक्ति के साथ मनाया जा रहा है। नौ दिनों तक मां दुर्गा के विभिन्न स्वरूपों की पूजा-अर्चना करने के बाद विजयादशमी के दिन देवी की प्रतिमा का विसर्जन किया जाता है। इस अवसर पर श्रद्धालु भावुक मन से मां को विदाई देते हैं और अगले वर्ष फिर से उनके आगमन की प्रार्थना करते हैं। इस साल मां दुर्गा की प्रतिमाओं का विसर्जन 20 अक्टूबर को किया जाएगा। देश के विभिन्न हिस्सों में इस परंपरा को धार्मिक आस्था और पारंपरिक रीति-रिवाजों के साथ निभाया जाता है।

    मां दुर्गा की प्रतिमाओं में कई ऐसी विशेषताएं होती हैं, जिनका संबंध धार्मिक मान्यताओं और प्रतीकों से माना जाता है। इन्हीं में से एक है देवी के माथे पर बिंदी के ठीक नीचे दिखाई देने वाली मकड़ी और उसका जाल। कुछ पारंपरिक प्रतिमाओं में नजर आने वाली यह आकृति सामान्य सजावट भर नहीं मानी जाती, बल्कि इसके पीछे एक विशेष धार्मिक अर्थ जुड़ा हुआ है। यह परंपरा डाकर साज से जुड़ी प्रतिमाओं की सजावट में देखने को मिलती है। धार्मिक मान्यताओं के अनुसार, मकड़ी का जाल देवी की महामाया शक्ति का प्रतिनिधित्व करता है।

    महामाया का अर्थ उस दिव्य शक्ति से लगाया जाता है, जो अपनी माया के माध्यम से संसार का संचालन करती है। इस मान्यता में मकड़ी और उसके जाल को जीवन तथा संसार की जटिलताओं को समझाने वाले प्रतीक के रूप में देखा जाता है।

    मकड़ी को महामाया से क्यों जोड़ते हैं?
    धार्मिक मान्यताओं के अनुसार, मकड़ी अपने भीतर से जाल बनाती है और फिर उसी जाल के बीच रहती है। इसी उदाहरण के माध्यम से मनुष्य के जीवन को समझने का प्रयास किया जाता है। इंसान भी अपने जीवन में परिवार, रिश्तों, इच्छाओं और जिम्मेदारियों के बीच एक व्यवस्था बनाता है। समय बीतने के साथ वह इन्हीं संबंधों और इच्छाओं में इस तरह उलझ सकता है कि उसके लिए उनसे अलग होकर सोचना मुश्किल हो जाता है।

    मकड़ी के जाल को इसी सांसारिक उलझन का प्रतीक माना जाता है। मान्यता है कि जिस प्रकार मकड़ी जाल का निर्माण करती है, उसी तरह देवी की शक्ति से इस संसार की माया का संचालन होता है। इसलिए मकड़ी और उसके जाल को मां दुर्गा की महामाया शक्ति से जोड़कर देखा जाता है। प्रतिमा में यह प्रतीक मनुष्य को संसार की प्रकृति और मोह-माया के प्रभाव की याद दिलाता है।

    अपने जाल में कभी नहीं फंसती मकड़ी
    मकड़ी से जुड़ी इस धार्मिक व्याख्या का एक महत्वपूर्ण पहलू यह भी है कि वह अपना जाल बनाती है, लेकिन सामान्यतः उसमें स्वयं नहीं फंसती। इसी उदाहरण के माध्यम से मनुष्य को मोह-माया से बचने का संदेश दिया जाता है। पैसा, परिवार, रिश्ते और जिम्मेदारियां जीवन के आवश्यक हिस्से हैं, लेकिन इनके प्रति अत्यधिक मोह व्यक्ति को मानसिक रूप से उलझा सकता है।

    इस मान्यता के अनुसार, मनुष्य को अपने कर्तव्यों का पालन करते हुए जीवन में संतुलन बनाए रखना चाहिए। सांसारिक जिम्मेदारियों को निभाना जरूरी है, लेकिन उनमें इतना नहीं उलझना चाहिए कि व्यक्ति स्वयं को ही भूल जाए। इस प्रकार मकड़ी का प्रतीक जीवन में संतुलन, विवेक और मोह से दूरी बनाए रखने की सीख से जुड़ता है।

    दुर्गा विसर्जन कब और किस मुहूर्त में होगा?
    पंचांग के अनुसार, दशमी तिथि 20 अक्टूबर को दोपहर 12 बजकर 50 मिनट से शुरू होकर 21 अक्टूबर को दोपहर 2 बजकर 11 मिनट तक रहेगी। इस अवधि में विजयादशमी का पर्व मनाया जाएगा और मां दुर्गा की प्रतिमा के विसर्जन की परंपरा निभाई जाएगी।

    बताए गए शुभ मुहूर्त के अनुसार, 20 अक्टूबर को दोपहर 1 बजकर 14 मिनट से दोपहर 3 बजकर 30 मिनट तक दुर्गा विसर्जन किया जा सकेगा। इस अवधि में श्रद्धालु अपनी सुविधानुसार किसी भी समय देवी की प्रतिमा का विसर्जन कर सकते हैं। विसर्जन के दौरान भक्त मां दुर्गा को भावपूर्ण विदाई देते हैं और अगले वर्ष फिर से उनके आगमन की कामना करते हैं।

  • तेलंगाना में गणेश विसर्जन के दौरान कई हादसे, सब-इंस्पेक्टर समेत 13 लोगों की मौत, 26 घायल

    तेलंगाना में गणेश विसर्जन के दौरान कई हादसे, सब-इंस्पेक्टर समेत 13 लोगों की मौत, 26 घायल

    नई दिल्ली । तेलंगाना में गणेश उत्सव के समापन के बाद प्रतिमाओं के विसर्जन के दौरान अलग-अलग स्थानों पर कई हादसे सामने आए हैं। इन घटनाओं में अब तक 13 लोगों की मौत हो गई है, जबकि 26 लोग घायल हुए हैं। मृतकों में एक पुलिस सब-इंस्पेक्टर भी शामिल हैं। हादसों की पूरी परिस्थितियां अभी स्पष्ट नहीं हो सकी हैं और अलग-अलग घटनाओं की विस्तृत जानकारी जुटाई जा रही है।

    राज्य के पुलिस महानिदेशक सीवी आनंद ने विसर्जन के दौरान हुई इन घटनाओं की जानकारी दी है। उनके मुताबिक, पूरे राज्य में गणेश प्रतिमाओं के विसर्जन के दौरान अलग-अलग हादसे हुए। इनमें कई लोगों की जान चली गई और दर्जनों लोग घायल हुए हैं। घायलों को उपचार के लिए अस्पतालों में भर्ती कराया गया है। संबंधित घटनाओं के कारणों और परिस्थितियों की विस्तृत जानकारी सामने आने के बाद ही यह स्पष्ट हो सकेगा कि प्रत्येक हादसा किस वजह से हुआ।

    गणेश उत्सव के दौरान इस वर्ष तेलंगाना में बड़ी संख्या में प्रतिमाएं स्थापित की गई थीं। शहरों और कस्बों के अलावा घरों, अपार्टमेंट परिसरों और गेटेड सोसाइटी में भी गणेश प्रतिमाएं स्थापित की गई थीं। उत्सव समाप्त होने के बाद बड़ी संख्या में श्रद्धालु प्रतिमाओं को लेकर अलग-अलग विसर्जन स्थलों तक पहुंचे। कई स्थानों पर सामूहिक रूप से विसर्जन कार्यक्रम आयोजित किए गए, जिसके चलते बड़ी संख्या में लोगों की मौजूदगी रही।

    पुलिस और प्रशासन की ओर से विसर्जन के दौरान सुरक्षा व्यवस्था के लिए इंतजाम किए गए थे। भीड़ को नियंत्रित करने, यातायात व्यवस्था संभालने और लोगों की सुरक्षा सुनिश्चित करने के लिए पुलिसकर्मियों की तैनाती की गई थी। इसके बावजूद राज्य के अलग-अलग हिस्सों में हादसे हुए। इन घटनाओं में पुलिस विभाग से जुड़े एक सब-इंस्पेक्टर की भी मौत हुई है।

    पुलिस महानिदेशक के अनुसार, तेलंगाना में करीब 1.24 लाख गणेश प्रतिमाएं आधिकारिक रूप से स्थापित की गई थीं। इसके अतिरिक्त बड़ी संख्या में प्रतिमाएं लोगों ने अपने घरों, अपार्टमेंट और गेटेड सोसाइटी में स्थापित की थीं। इन सभी को मिलाकर राज्य में गणेश प्रतिमाओं की कुल संख्या करीब 3.5 लाख से 4 लाख तक होने का अनुमान लगाया गया है।

    इतनी बड़ी संख्या में प्रतिमाओं के विसर्जन के कारण राज्य के विभिन्न हिस्सों में लोगों की भारी भीड़ जुटी। कई स्थानों पर श्रद्धालु जुलूस के साथ प्रतिमाओं को विसर्जन के लिए लेकर पहुंचे। इस दौरान सुरक्षा और भीड़ प्रबंधन के लिए प्रशासन को अतिरिक्त सतर्कता बरतनी पड़ी।

    हादसों में घायल हुए 26 लोगों को इलाज के लिए अस्पताल पहुंचाया गया है। प्रशासन की ओर से घायलों को चिकित्सा सहायता उपलब्ध कराई जा रही है। वहीं, मृतकों की घटनाओं और हादसों के कारणों को लेकर पूरी जानकारी अभी सामने आना बाकी है।

    फिलहाल प्रशासन और पुलिस अलग-अलग घटनाओं से जुड़ी परिस्थितियों की जानकारी जुटा रहे हैं। विसर्जन कार्यक्रम के दौरान हुई इन घटनाओं के बाद सुरक्षा व्यवस्था और भीड़ प्रबंधन को लेकर भी स्थिति पर नजर रखी जा रही है। राज्य में बड़ी संख्या में गणेश प्रतिमाओं के विसर्जन के बीच हुए इन हादसों ने 13 लोगों की जान ले ली, जबकि 26 लोग घायल हुए हैं। आने वाले समय में जांच और विस्तृत जानकारी के बाद घटनाओं की वास्तविक परिस्थितियां स्पष्ट होने की उम्मीद है।

  • इंदौर में गणेश विसर्जन की हाईटेक व्यवस्था, पोकलेन, लिफ्ट और नावों से प्रतिमाओं का सुरक्षित विसर्जन

    इंदौर में गणेश विसर्जन की हाईटेक व्यवस्था, पोकलेन, लिफ्ट और नावों से प्रतिमाओं का सुरक्षित विसर्जन

    इंदौर में गणेश प्रतिमा विसर्जन को लेकर नगर निगम की ओर से इस बार विशेष और हाईटेक व्यवस्था की गई है। विसर्जन के दौरान होने वाले हादसों को रोकने के उद्देश्य से जवाहर टेकरी पर मानव रहित मशीनों के जरिए प्रतिमाओं का विसर्जन कराया जा रहा है। इसके लिए पोकलेन मशीन, बड़ी नाव और लिफ्ट सहित पांच प्रकार की मशीनों का इस्तेमाल किया जा रहा है।

    नगर निगम ने इस व्यवस्था के तहत 15 से 20 लाख गणेश प्रतिमाओं के विसर्जन का लक्ष्य रखा है। प्रतिमाओं को तालाब में विसर्जित करने के लिए श्रद्धालुओं को सीधे पानी में जाने की जरूरत नहीं होगी। मशीनों और अन्य साधनों की मदद से प्रतिमाओं को तालाब में सुरक्षित तरीके से विसर्जित किया जा रहा है।

    विसर्जन के दौरान लोगों के पानी में उतरने से होने वाली दुर्घटनाओं को रोकने पर विशेष ध्यान दिया गया है। जवाहर टेकरी पर प्रतिमाओं के विसर्जन के लिए ऐसी व्यवस्था की गई है, जिसमें श्रद्धालु तालाब के पानी से दूरी बनाए रखते हुए पूजा और विधि-विधान पूरा कर सकेंगे। इसके बाद प्रतिमा को निर्धारित व्यवस्था के माध्यम से विसर्जित किया जाएगा।

    शहर के अलग-अलग कॉलोनियों और वार्ड स्तर पर भी प्रतिमाओं के एकत्रीकरण की व्यवस्था की गई है। इसके लिए 140 से अधिक स्थान निर्धारित किए गए हैं। इन स्थानों पर प्रतिमाएं एकत्र की जा रही हैं और मौके पर ही जल कुंड बनाकर विसर्जन की व्यवस्था भी की गई है। इससे अलग-अलग क्षेत्रों से आने वाली प्रतिमाओं के विसर्जन को व्यवस्थित तरीके से पूरा करने का प्रयास किया जा रहा है।

    जवाहर टेकरी पर सुरक्षा व्यवस्था को भी मजबूत किया गया है। पुलिसकर्मियों के साथ एनडीआरएफ की टीम और पांच विशेष तैराकों को तैनात किया गया है। इनकी मौजूदगी का उद्देश्य विसर्जन के दौरान किसी भी संभावित आपात स्थिति में तत्काल कार्रवाई सुनिश्चित करना है।

    श्रद्धालुओं को भी तालाब के कुंड से दूर रखा जा रहा है। प्रतिमा विसर्जन के दौरान उन्हें पानी में प्रवेश करने की अनुमति नहीं होगी। प्रतिमाओं को मशीनों और अन्य निर्धारित माध्यमों से तालाब में कुछ दूरी से ही विसर्जित करने की व्यवस्था की गई है। इस तरह प्रतिमा विसर्जन की धार्मिक प्रक्रिया को बनाए रखते हुए लोगों की सुरक्षा पर ध्यान दिया जा रहा है।

    तालाब और विसर्जन स्थल के आसपास निगरानी के लिए ड्रोन कैमरों और सीसीटीवी कैमरों का भी इस्तेमाल किया जा रहा है। इनके जरिए आयोजन स्थल और आसपास की गतिविधियों पर नजर रखी जा रही है। सुरक्षा व्यवस्था के तहत मशीनों से होने वाले विसर्जन और श्रद्धालुओं की आवाजाही पर भी निगरानी रखी जा रही है।

    इस पूरी व्यवस्था का उद्देश्य गणेश प्रतिमा विसर्जन को सुरक्षित और व्यवस्थित तरीके से पूरा करना है। खासतौर पर पानी में उतरने से होने वाली दुर्घटनाओं को रोकने के लिए मानव रहित मशीनों और सुरक्षा दलों की मदद ली जा रही है। इसके साथ ही शहर के विभिन्न हिस्सों में बनाए गए एकत्रीकरण केंद्रों और जल कुंडों के जरिए विसर्जन व्यवस्था को स्थानीय स्तर पर भी संचालित किया जा रहा है।

    जवाहर टेकरी पर पोकलेन, लिफ्ट, नाव और अन्य मशीनों के इस्तेमाल के साथ सुरक्षा टीमों की तैनाती की गई है। श्रद्धालुओं को पानी से दूर रखकर प्रतिमाओं का विसर्जन कराने की व्यवस्था के जरिए इस धार्मिक आयोजन को सुरक्षित तरीके से पूरा करने का प्रयास किया जा रहा है।

  • खंडवा में गणेश विसर्जन की धूम, मंत्री विजय शाह ने की आरती, क्रेन पर चढ़कर कृत्रिम कुंड का निरीक्षण

    खंडवा में गणेश विसर्जन की धूम, मंत्री विजय शाह ने की आरती, क्रेन पर चढ़कर कृत्रिम कुंड का निरीक्षण

    मध्य प्रदेश: के खंडवा जिले में गणेश उत्सव के समापन के साथ भगवान गणेश की प्रतिमाओं के विसर्जन का सिलसिला धूमधाम से जारी है। विसर्जन स्थलों पर श्रद्धालुओं की भीड़ उमड़ रही है और गणपति बप्पा मोरया के जयकारों से वातावरण भक्तिमय बना हुआ है। इस दौरान प्रदेश सरकार के कैबिनेट मंत्री विजय शाह ने विसर्जन स्थल पहुंचकर भगवान गणेश की आरती की और पूजा-अर्चना कर आशीर्वाद लिया।

    मंत्री विजय शाह ने विसर्जन के लिए की गई व्यवस्थाओं का जायजा भी लिया। उनके साथ खंडवा की महापौर अमृता यादव सहित कई जनप्रतिनिधि और स्थानीय नेता मौजूद रहे। इस दौरान अधिकारियों से विसर्जन स्थल पर श्रद्धालुओं की सुविधा, सुरक्षा और प्रतिमाओं के विसर्जन की व्यवस्थाओं की जानकारी ली गई।

    खंडवा में गणेश प्रतिमाओं के सुरक्षित विसर्जन के लिए नगर निगम की ओर से शहर में तीन कृत्रिम कुंड तैयार किए गए हैं। इन कुंडों के माध्यम से प्रतिमाओं के विसर्जन की व्यवस्था की गई है, ताकि श्रद्धालुओं को सुविधा मिल सके और विसर्जन के दौरान आवश्यक प्रबंध सुनिश्चित किए जा सकें।

    मंत्री विजय शाह ने महापौर अमृता यादव और नगर निगम परिषद के सदस्यों के साथ भैरव तालाब परिसर में बनाए गए कृत्रिम विसर्जन कुंड का निरीक्षण किया। उन्होंने मौके पर मौजूद अधिकारियों और नगर निगम के प्रतिनिधियों से व्यवस्थाओं की जानकारी ली।

    निरीक्षण के दौरान मंत्री विजय शाह विसर्जन में इस्तेमाल की जा रही क्रेन पर भी चढ़े और वहां से कुंड की व्यवस्था का जायजा लिया। विसर्जन के लिए क्रेन के इस्तेमाल से प्रतिमाओं को निर्धारित स्थान तक पहुंचाने और विसर्जन की प्रक्रिया को व्यवस्थित तरीके से पूरा करने की व्यवस्था की गई है।

    गणेश प्रतिमाओं के विसर्जन के दौरान बड़ी संख्या में श्रद्धालुओं के पहुंचने को देखते हुए प्रशासन और नगर निगम की ओर से सुविधाओं का प्रबंध किया गया है। नगर निगम की टीम विसर्जन स्थलों पर व्यवस्था बनाए रखने और श्रद्धालुओं को सुविधाजनक तरीके से विसर्जन कराने में जुटी हुई है।

    मंत्री विजय शाह ने नगर निगम की ओर से बनाए गए कृत्रिम कुंडों की व्यवस्था पर संतोष जताया। उन्होंने कहा कि जनभावनाओं के अनुरूप भगवान गणेश के विसर्जन के लिए कुंड तैयार करना सराहनीय पहल है। उन्होंने खंडवा नगर निगम की पूरी टीम को इस व्यवस्था के लिए बधाई दी।

    मंत्री ने कहा कि नगर निगम ने लोगों की भावनाओं और विश्वास के अनुरूप व्यवस्था की है। उन्होंने भगवान गणेश के विसर्जन को सम्मानपूर्वक संपन्न कराने की पहल की सराहना करते हुए कहा कि श्रद्धालुओं की आस्था का सम्मान करते हुए विसर्जन की व्यवस्था की गई है।

    विजय शाह ने यह भी कहा कि भगवान गणेश का विसर्जन मां नर्मदा के पवित्र जल में सम्मानपूर्वक किया जा रहा है। गणेश उत्सव के अंतिम चरण में श्रद्धालु पूजा-अर्चना के बाद प्रतिमाओं को विसर्जन के लिए लेकर पहुंच रहे हैं।

    खंडवा में तीन कृत्रिम कुंडों की व्यवस्था और नगर निगम की तैयारियों के बीच गणेश प्रतिमाओं का विसर्जन लगातार जारी है। प्रशासन और नगर निगम की ओर से श्रद्धालुओं की सुविधा तथा विसर्जन प्रक्रिया को व्यवस्थित रखने पर ध्यान दिया जा रहा है।