Tag: VishnuPuja

  • भगवान विष्णु की कृपा के लिए अप्रैल एकादशी 2026: पूरी जानकारी

    भगवान विष्णु की कृपा के लिए अप्रैल एकादशी 2026: पूरी जानकारी


    नई दिल्ली । हिंदू धर्म में एकादशी व्रत भगवान विष्णु की भक्ति और कृपा प्राप्त करने का अत्यंत शुभ अवसर माना जाता है। एकादशी का पालन करने से जीवन की परेशानियां कम होती हैं और पाप नष्ट होते हैं। अप्रैल 2026 में दो विशेष एकादशी पड़ रही हैं – वरुथिनी एकादशी और मोहिनी एकादशी, और खास बात यह है कि दोनों सोमवार को पड़ रही हैं। इस कारण भगवान विष्णु और भगवान शिव की पूजा का भी शुभ संयोग बन रहा है।

    वरुथिनी एकादशी 2026

    तारीख: 13 अप्रैल 2026

    समय: 13 अप्रैल सुबह 1:16 स 14 अप्रैल सुबह 1:08 तक

    पूजा का शुभ मुहूर्त: सुबह 5:58 से 7:34

    राहुकाल: सुबह 7:34 से 9:10

    शुभ चौघड़िया: सुबह 9:10 से 10:46

    व्रत पारण: 14 अप्रैल सुबह 6:54 से 8:31

    महत्व

    वरुथिनी एकादशी का व्रत रखने से हजारों साल की तपस्या का फल प्राप्त होता है। यह व्रत पापों को दूर करके जीवन में सुख-समृद्धि लाता है। विशेष रूप से विवाहित महिलाओं के लिए यह व्रत अत्यंत शुभ माना जाता है, जिससे सौभाग्य और परिवार में शांति बनी रहती है।

    मोहिनी एकादशी 2026

    तारीख: 27 अप्रैल 2026

    समय: 26 अप्रैल शाम 6:06 से 27 अप्रैल शाम 6:15 तक

    पूजा का शुभ मुहूर्त: सुबह 9:02 से 10:40

    राहुकाल: सुबह 7:23 से 9:02

    व्रत पारण: 28 अप्रैल सुबह 5:43 से 8:21

    महत्व:

    मोहिनी एकादशी का व्रत रखने से मन के दुख और परेशानियां दूर होती हैं। यह व्रत पापों से मुक्ति दिलाता है और जीवन में शांति और सुख की प्राप्ति कराता है। पौराणिक मान्यता के अनुसार, भगवान राम ने भी कठिन समय में इस व्रत का पालन किया था।

    अप्रैल 2026 की ये दोनों एकादशियां विशेष रूप से भगवान विष्णु की भक्ति के लिए महत्वपूर्ण हैं। इन व्रतों का पालन करने से सकारात्मक ऊर्जा, मानसिक शांति, और जीवन में समृद्धि प्राप्त होती है।

  • कामदा एकादशी 2026: चैत्र महीने की अंतिम एकादशी का व्रत कब और कैसे रखें

    कामदा एकादशी 2026: चैत्र महीने की अंतिम एकादशी का व्रत कब और कैसे रखें


    नई दिल्ली । सनातन धर्म में एकादशी तिथि को अत्यंत पवित्र और पुण्यदायी माना गया है। वर्ष भर में आने वाली प्रत्येक एकादशी का अपना विशेष महत्व है। चैत्र माह की पहली एकादशी पापमोचनी बीत चुकी है। अब इस माह की दूसरी एकादशी यानी कामदा एकादशी 2026 रविवार, 29 मार्च को रखी जाएगी।

    कामदा एकादशी का आध्यात्मिक महत्व

    कामदा एकादशी का नाम ही यह दर्शाता है कि यह व्रत भक्तों की इच्छाओं और कामनाओं को पूर्ण करने वाला है। हिन्दू शास्त्रों में कहा गया है कि इस दिन भगवान विष्णु की भक्ति और श्रद्धा से पूजा करने पर जीवन के पाप नष्ट होते हैं और व्यक्ति को मानसिक शांति, सुख और समृद्धि प्राप्त होती है।

    कामदा एकादशी कब रखी जाएगी

    ज्योतिषीय गणना के अनुसार, चैत्र शुक्ल पक्ष की एकादशी तिथि 28 मार्च सुबह 8:45 बजे से शुरू होकर 29 मार्च सुबह 7:46 बजे तक रहेगी। इसी आधार पर कामदा एकादशी का व्रत 29 मार्च, रविवार को रखा जाएगा।

    कामदा एकादशी का शुभ मुहूर्त

    भगवान विष्णु की पूजा का विशेष महत्व होता है। इस वर्ष पूजा का मुख्य शुभ मुहूर्त 29 मार्च सुबह 6:00 बजे से 7:30 बजे तक रहेगा। इसके अलावा, अभिजीत मुहूर्त में पूजा करना भी अत्यंत फलदायी माना गया है।

    कामदा एकादशी की पूजा विधि

    प्रातः ब्रह्ममुहूर्त में उठकर स्नान करें और स्वच्छ वस्त्र धारण करें।

    भगवान विष्णु की प्रतिमा या चित्र को स्वच्छ आसन पर स्थापित करें।

    उन्हें पीले पुष्प, तुलसी दल, धूप, दीप और नैवेद्य अर्पित करें।

    ॐ नमो भगवते वासुदेवाय मंत्र का जप करें।

    दिन भर भगवान विष्णु के भजन, कथा और कीर्तन में मन लगाएं।

    रात्रि में जागरण करें और भक्ति भाव से भगवान का स्मरण करें।

    अगले दिन द्वादशी तिथि में विधिपूर्वक व्रत का पारण करें।

    कामदा एकादशी का व्रत भगवान विष्णु की भक्ति और श्रद्धा से करने से न केवल जीवन की कठिनाइयों का नाश होता है, बल्कि यह मानसिक शांति और सुख-समृद्धि की प्राप्ति का मार्ग भी प्रशस्त करता है।

  • सफला एकादशी 2025 के दिन करें ये खास उपाय, सुख-समृद्धि और धन लाभ के लिए

    सफला एकादशी 2025 के दिन करें ये खास उपाय, सुख-समृद्धि और धन लाभ के लिए


    नई दिल्ली । सफला एकादशी का व्रत हिंदू पंचांग के अनुसार हर साल पौष माह के कृष्ण पक्ष की एकादशी को मनाया जाता है। इस वर्ष यह व्रत 15 दिसंबर 2025 को पड़ रहा है। इस दिन विशेष रूप से भगवान विष्णु की पूजा करने के साथ-साथ कुछ खास ज्योतिषीय उपायों का पालन करना भी लाभकारी माना जाता है। इन उपायों से ना केवल जीवन में सुख-समृद्धि आती है बल्कि स्वास्थ्य धन और वैवाहिक जीवन में भी सुधार होता है। आइए जानते हैं सफला एकादशी पर किए जाने वाले प्रभावी उपायों के बारे में।

    स्वास्थ्य में सुधार के लिए

    सफला एकादशी के दिन भगवान विष्णु की पूजा करते समय उन्हें पीले रंग के फूल अर्पित करें और साथ ही 108 बार “ऊँ नमो भगवते वासुदेवाय मंत्र का जप करें। यह उपाय शारीरिक स्वास्थ्य को बेहतर बनाने में मदद करता है और स्वास्थ्य संबंधी समस्याएं दूर हो सकती हैं।

    व्यापार में सफलता के लिए

    यदि आप अपने व्यापार में सफलता की कामना रखते हैं तो सफला एकादशी के दिन भगवान विष्णु के साथ मां लक्ष्मी की पूजा करें। विष्णु जी को पीले रंग के वस्त्र अर्पित करें और मां लक्ष्मी को लाल रंग के वस्त्र अर्पित करें। ऐसा करने से व्यापार में चौगुनी वृद्धि और सफलता प्राप्त होती है।

    घर में सुख-शांति और संपन्नता के लिए

    सफला एकादशी पर घर में सुख-शांति बनाए रखने के लिए 9 मुखी दीपक जलाएं और विष्णु-लक्ष्मी की पूजा करें। साथ ही सहस्त्रनाम का पाठ करें। यह उपाय घर में नकारात्मक ऊर्जा को समाप्त करता है और घर में शांति सुख और समृद्धि बनी रहती है।

    विवाह में रुकावटें दूर करने के लिए

    अगर आपके विवाह में कोई बाधाएं आ रही हैं तो सफला एकादशी के दिन एक लोटे में हल्दी मिला जल लेकर उसे केले के पौधे की जड़ में अर्पित करें। इससे विवाह संबंधी परेशानियों का समाधान होता है और साथ ही आपकी कुंडली में गुरु बृहस्पति की स्थिति भी मजबूत होती है।

     धन प्राप्ति के लिए

    मां लक्ष्मी की कृपा प्राप्त करने के लिए भगवान विष्णु का अभिषेक करना अत्यंत शुभ माना जाता है। जल से अभिषेक करते समय दक्षिणावर्ती शंख का उपयोग करें जो धन की प्राप्ति के लिए विशेष रूप से लाभकारी है। इसके अतिरिक्त शाम को तुलसी के पौधे के पास घी का दीपक जलाएं। यह उपाय घर में समृद्धि और धन के आगमन का कारण बनता है।

    सफला एकादशी पर किए गए इन ज्योतिषीय उपायों से जीवन में न केवल धन और सुख-समृद्धि की वृद्धि होती है बल्कि मानसिक शांति और शारीरिक स्वास्थ्य में भी सुधार होता है। इस दिन विष्णु जी और लक्ष्मी जी की पूजा से आपके जीवन में हर क्षेत्र में सफलता और समृद्धि की आशीर्वाद प्राप्त होती है।

  • Saphala Ekadashi 2025: जानें सफला एकादशी के व्रत का महत्व, तारीख और जरूरी नियम

    Saphala Ekadashi 2025: जानें सफला एकादशी के व्रत का महत्व, तारीख और जरूरी नियम


    नई दिल्ली। हिंदू धर्म में एकादशी तिथि को विशेष और पवित्र माना गया है। भगवान विष्णु को समर्पित यह दिन भक्तों के लिए कल्याणकारी माना गया है। साल में कुल 24 एकादशी आती हैं और हर एकादशी आध्यात्मिक दृष्टि से अत्यंत शुभ मानी जाती है। इन्हीं में से एक है-सफला एकादशी, जिसे पौष मास के कृष्ण पक्ष में रखा जाता है। माना जाता है कि इस दिन व्रत व पूजा करने से व्यक्ति के जीवन में सफलता, सुख और समृद्धि आती है। 2025 में सफला एकादशी का व्रत शुभ योग में पड़ रहा है, इसलिए इसका महत्व और बढ़ जाता है।

    सफला एकादशी 2025 की तिथि और समय

    हिंदू पंचांग के अनुसार पौष मास की कृष्ण पक्ष एकादशी तिथि

    14 दिसंबर 2025 को रात 08:46 बजे शुरू होगी,

    और 15 दिसंबर 2025 को रात 10:09 बजे समाप्त होगी।

    पंचांग गणना के अनुसार सफला एकादशी व्रत 15 दिसंबर 2025 (सोमवार) को रखा जाएगा। द्वादशी तिथि में उपवास का पारण किया जाएगा।

    सफला एकादशी का महत्व

    सफला एकादशी का अर्थ है-“सफलता देने वाली एकादशी।” मान्यता है कि इस दिन किया गया व्रत और पूजा जीवन में रुके हुए कार्यों को गति देता है और हर प्रकार के अशुभ प्रभाव दूर होते हैं। कहा जाता है कि जो व्यक्ति नियमित रूप से एकादशी का व्रत रखता है, उसे भगवान विष्णु की विशेष कृपा प्राप्त होती है।
    इस दिन भगवान विष्णु के पूजन का फल अनेक यज्ञों के समान बताया गया है। साथ ही यह व्रत साधक को मानसिक शांति, आर्थिक समृद्धि और आध्यात्मिक उन्नति प्रदान करता है।

    क्या करें सफला एकादशी के दिन?

    सफला एकादशी के दिन कुछ खास नियमों का पालन करना अत्यंत आवश्यक माना गया है। इनका पालन करने से व्रत का पूरा फल मिलता है-

    1. स्नान और संकल्प

    सुबह जल्दी उठकर स्नान करें और स्वच्छ वस्त्र धारण करें। इसके बाद भगवान विष्णु के समक्ष व्रत का संकल्प लें।

    2. भगवान विष्णु की पूजा

    विष्णु भगवान की प्रतिमा या चित्र के सामने घी का दीपक जलाएं।

    पीले फूल, फल, चंदन और तुलसी अर्पित करें।

    घर के पूजा स्थल में शांति और पवित्रता बनाए रखें।

    3. तुलसी पूजा

    तुलसी माता को भगवान विष्णु के पूजन का अनिवार्य अंग माना गया है।

    तुलसी चालीसा का पाठ करें।

    भगवान के भोग में तुलसी दल अवश्य शामिल करें।

    4. मंत्र जाप

    सफला एकादशी के दिन निम्न मंत्रों का जाप अत्यंत शुभ माना गया है-

    “ॐ नमो भगवते वासुदेवाय”

    या फिर

    “हरे कृष्ण हरे कृष्ण, कृष्ण कृष्ण हरे हरे…”

    5. ब्रह्मचर्य और संयम

    इस दिन ब्रह्मचर्य का पालन करें और मन, वाणी तथा व्यवहार से शुद्ध बने रहें।

    6. द्वादशी पर पारण

    व्रत का पारण द्वादशी तिथि में शुभ मुहूर्त पर ही किया जाना चाहिए।
    पारण से पहले –

    ब्राह्मणों, जरूरतमंदों या गरीबों को भोजन कराएं।

    अनाज, फल, तिल, वस्त्र आदि का दान करना अत्यंत शुभ माना गया है।

    क्या न करें सफला एकादशी को?

    व्रत का पूरा फल पाने के लिए इस दिन कुछ बातों का खास ध्यान रखना जरूरी है-

    1. चावल का सेवन न करें

    एकादशी पर चावल खाना धार्मिक रूप से वर्जित है।

    2. तामसिक भोजन से दूर रहें

    लहसुन, प्याज, मांसाहार, शराब आदि का सेवन वर्जित है।

    3. तुलसी पत्ती न तोड़ें

    एकादशी के दिन तुलसी के पत्ते तोड़ना दोषकारी माना जाता है।

    4. साफ-सफाई से संबंधित कार्य न करें

    बाल, नाखून या दाढ़ी न कटवाएं।

    5. झूठ, निंदा और कलह से बचें

    किसी की बुराई न करें, झूठ न बोलें और विवाद से दूर रहें।

    निष्कर्ष

    सफला एकादशी आध्यात्मिक और धार्मिक दृष्टि से अत्यंत फलदायी दिन है। इस दिन भगवान विष्णु की आराधना, व्रत और दान करने से जीवन में सफलता, शांति और समृद्धि का मार्ग खुलता है। सही नियमों का पालन करने से यह व्रत मनोवांछित फल प्रदान करता है।