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  • MP में सियासत से सिस्टम तक सवाल ही सवाल! मंत्री ने राहुल गांधी को दिया रांची का टिकट ऑफर, उफनती नर्मदा में विधायक का स्टंट

    MP में सियासत से सिस्टम तक सवाल ही सवाल! मंत्री ने राहुल गांधी को दिया रांची का टिकट ऑफर, उफनती नर्मदा में विधायक का स्टंट


    भोपाल। मध्य प्रदेश की राजनीति और प्रशासन से जुड़ी घटनाएं इन दिनों कई सवाल खड़े कर रही हैं। कहीं देशभक्ति के नाम पर निकाली गई तिरंगा यात्रा में नेता और अधिकारी पैदल चलते नजर आए तो उनके पीछे खाली सरकारी और निजी वाहनों का काफिला चलता रहा। कहीं उफनती नर्मदा की लहरों के बीच भाजपा विधायक और अधिकारी बिना लाइफ जैकेट नाव में सवार दिखाई दिए। वहीं राहुल गांधी के मध्य प्रदेश दौरे से पहले मंत्री विश्वास सारंग ने उन्हें झारखंड के रांची जाने की सलाह देते हुए टिकट तक कराने का ऑफर दे दिया। इन घटनाओं ने राजनीतिक बयानबाजी से लेकर प्रशासनिक व्यवस्था और सुरक्षा इंतजामों तक कई सवाल खड़े कर दिए हैं।

    रतलाम में तिरंगा यात्रा के दौरान महापौर कलेक्टर और अन्य नेता अधिकारी करीब डेढ़ किलोमीटर तक हाथों में तिरंगा लेकर पैदल चले। प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी की ओर से पेट्रोल और डीजल बचाने की अपील के बीच इस यात्रा की एक तस्वीर चर्चा का विषय बन गई। वजह थी पैदल चल रहे नेताओं और अधिकारियों के पीछे चलता खाली वाहनों का काफिला। इन गाड़ियों में ड्राइवरों के अलावा कोई सवार नहीं था। ऐसे में सवाल उठना स्वाभाविक है कि जब अधिकारी और जनप्रतिनिधि खुद पैदल यात्रा कर रहे थे तो उनके खाली वाहनों को साथ चलाने की जरूरत क्यों पड़ी। लोगों का सवाल है कि क्या इस तरह ईंधन की खपत को कम किया जा सकता था।

    महेश्वर में तिरंगा यात्रा के दौरान सुरक्षा से जुड़ा मामला और ज्यादा गंभीर नजर आया। बारिश के मौसम में नर्मदा नदी उफान पर है और नदी की धार तेज होने के बावजूद भाजपा विधायक राजकुमार मेव टीआई समेत अन्य नेता और अधिकारी नाव में सवार हो गए। तस्वीरों के मुताबिक नाव पर सवार लोगों ने लाइफ जैकेट नहीं पहनी थी। ऐसे में सवाल उठ रहा है कि जब आम लोगों को नदी और जलाशयों में सुरक्षा नियमों का पालन करने की सलाह दी जाती है तो जनप्रतिनिधियों और अधिकारियों के लिए इन नियमों का पालन कितना जरूरी है। देशभक्ति का उत्साह अपनी जगह है लेकिन उफनती नदी में सुरक्षा से समझौता किसी बड़े हादसे का कारण बन सकता है।

    इधर कांग्रेस नेता राहुल गांधी के सितंबर में उज्जैन आने की संभावित चर्चा के बीच मध्य प्रदेश के मंत्री विश्वास सारंग ने उन पर राजनीतिक तंज कसा है। सारंग ने राहुल गांधी को मध्य प्रदेश आने से पहले रांची जाने की सलाह दी। उनका कहना है कि राहुल गांधी दिल्ली में जेन-जी के विरोध प्रदर्शन में शामिल हुए लेकिन झारखंड की राजधानी रांची में प्रदर्शन कर रहे छात्र-छात्राओं के खिलाफ कार्रवाई के दौरान वहां नहीं पहुंचे। इसी मुद्दे को लेकर मंत्री ने राहुल गांधी से पहले रांची जाने को कहा और यहां तक कहा कि वह उनकी दिल्ली से रांची की टिकट करा देंगे। हालांकि राहुल गांधी के मध्य प्रदेश दौरे की तारीख अभी तय नहीं हुई है। ऐसे में टिकट वाला बयान फिलहाल सियासी तंज के तौर पर ही देखा जा रहा है।

    अब बात प्रशासनिक व्यवस्था की। स्वतंत्रता दिवस से ठीक पहले मध्य प्रदेश के लाखों शिक्षक ई-अटेंडेंस की तकनीकी परेशानी से जूझते रहे। दिनभर स्कूल में ड्यूटी करने के बाद शिक्षकों को आउट-पंच करना था लेकिन ई-अटेंडेंस पोर्टल में तकनीकी समस्या के कारण पंच नहीं हो पा रहा था। शिक्षकों की चिंता इसलिए बढ़ गई क्योंकि अटेंडेंस दर्ज नहीं होने पर वेतन कटने का डर था। नियम के मुताबिक शिक्षकों को स्कूल के 200 मीटर के दायरे में रहकर अटेंडेंस लगानी होती है। लिहाजा कई शिक्षक घंटों तक स्कूल में बैठकर पोर्टल ठीक होने का इंतजार करते रहे।

    देर शाम जब पोर्टल की समस्या दूर हुई तो विभाग की ओर से शिक्षकों को संदेश भेजकर राहत दी गई कि वे जहां हैं वहीं से अटेंडेंस लगा सकते हैं। हालांकि शिक्षकों के लिए यह समस्या नई नहीं है। प्रदेश के कई हिस्सों में नेटवर्क और तकनीकी दिक्कतों के कारण ई-अटेंडेंस व्यवस्था को लेकर लगातार परेशानी सामने आती रही है। ऐसे में सवाल सिर्फ पोर्टल के कुछ घंटों तक ठप रहने का नहीं बल्कि ऐसी व्यवस्था का है जिसमें तकनीकी खामी का खामियाजा कर्मचारियों को भुगतने का डर बना रहता है।

    कुल मिलाकर तिरंगा यात्रा से लेकर नर्मदा की लहरों और ई-अटेंडेंस की तकनीकी दिक्कत तक मध्य प्रदेश की इन घटनाओं ने अलग-अलग मुद्दों पर बहस छेड़ दी है। कहीं ईंधन बचाने की जरूरत पर सवाल है तो कहीं सुरक्षा नियमों के पालन पर। वहीं राजनीतिक बयानबाजी ने राहुल गांधी के संभावित मध्य प्रदेश दौरे को भी सियासी रंग दे दिया है।

  • भोपाल का हड़कंप: पूर्व रेलकर्मी राजेश तिवारी का हिडन कैमरा वीडियो वायरल, मंत्री विश्वास सारंग और RSS पर लगाए गंभीर आरोप

    भोपाल का हड़कंप: पूर्व रेलकर्मी राजेश तिवारी का हिडन कैमरा वीडियो वायरल, मंत्री विश्वास सारंग और RSS पर लगाए गंभीर आरोप


    भोपाल। भोपाल के निशातपुरा थाना क्षेत्र में गिरफ्तार बर्खास्त रेलकर्मी राजेश तिवारी का मामला अब नया मोड़ ले चुका है। गिरफ्तारी के बाद सामने आए हिडन कैमरा वीडियो में राजेश कथित तौर पर कैबिनेट मंत्री विश्वास सारंग के खिलाफ बोलते नजर आ रहे हैं। वीडियो में वह यह कहता दिख रहा है कि किसी भी धरना-प्रदर्शन में असलम का नाम न आए, बल्कि मामला सीधे सारंग की तरफ डायवर्ट किया जाए। इसके अलावा वह बताता है कि अगर मंत्री पद से हटाया गया तो उसका नाम बदल देना। जब उससे पूछा गया कि क्या मंत्री से व्यक्तिगत दुश्मनी है, तो उसने जवाब दिया, “नहीं, पूरे RSS की है। वीडियो में यह भी दावा किया गया कि मंत्री पद से हटाने की तैयारी है और विस्तार के दौरान बदलाव होंगे।

    पुलिस ने राजेश का मोबाइल फोरेंसिक जांच के लिए जब्त कर लिया है। जांच का नया एंगल अब वायरल वीडियो और मोबाइल डेटा की पुष्टि पर केंद्रित है, यह पता लगाने के लिए कि वीडियो कब रिकॉर्ड हुआ, किसने रिकॉर्ड किया और क्या इसे एडिट किया गया।

    राजेश तिवारी पहले ही ब्लैकमेलिंग के आरोप में गिरफ्तार है। उसके पास से एमडी ड्रग और अवैध हथियार भी जब्त किए गए हैं। इसके अलावा उसके खिलाफ रेप और हत्या के प्रयास के मामले भी दर्ज हैं। 27 फरवरी को निशातपुरा पुलिस ने उसे 3 लाख रुपए की गैरकानूनी मांग के आरोप में पकड़ा था।

    राजनीतिक और साइबर जांच दोनों ही एंगल से यह मामला अब अहम बन गया है। वायरल हिडन कैमरा वीडियो और फोरेंसिक जांच की रिपोर्ट भविष्य में इसकी गुत्थी सुलझाने में निर्णायक साबित हो सकती है।

  • मध्य प्रदेश कैलेंडर विवाद: हिरण की तस्वीर पर दिग्विजय सिंह और भाजपा में जुबानी जंग

    मध्य प्रदेश कैलेंडर विवाद: हिरण की तस्वीर पर दिग्विजय सिंह और भाजपा में जुबानी जंग


    भोपाल। मध्य प्रदेश के सरकारी कैलेंडर पर छपी एक हिरण की तस्वीर ने राजनीतिक बहस को जन्म दे दिया है। कांग्रेस के वरिष्ठ नेता और पूर्व मुख्यमंत्री दिग्विजय सिंह ने सोशल मीडिया पर सवाल उठाया कि कैलेंडर पर जिस हिरण का चित्र लगाया गया है, वह इम्पाला है, जो केवल अफ्रीका में पाया जाता है और न तो मध्य प्रदेश में मिलता है और न ही पूरे भारत में। दिग्विजय ने पोस्ट में लिखा, मुख्यमंत्री जी, जिस हिरण का चित्र आपने एमपी के कैलेंडर पर लगाया है वह एमपी में ही नहीं बल्कि भारत में भी नहीं पाया जाता। कृपया सोच-समझ कर शासकीय कैलेंडर पर चित्र लगवाया करें। जय सिया राम।”

    पूर्व मुख्यमंत्री के इस पोस्ट के बाद उनके बेटे और कांग्रेस विधायक जयवर्धन सिंह ने भी समर्थन जताया। जयवर्धन ने कहा कि मध्य प्रदेश एक वाइल्डलाइफ स्टेट है, बावजूद इसके कैलेंडर में विदेशी हिरण की तस्वीर छापी जा रही है। उन्होंने अधिकारियों पर निशाना साधते हुए कहा कि उन्हें जमीनी स्तर की जानकारी नहीं है और इस कदम से बड़ी त्रुटि हुई है।

    भाजपा की ओर से पलटवार करते हुए प्रदेश के मंत्री विश्वास सारंग ने कहा कि कांग्रेस नेता बच्चों की पुलिस की तरह व्यवहार कर रहे हैं। सारंग ने आरोप लगाया कि कांग्रेस केवल विरोध के लिए विरोध कर रही है और नकारात्मक राजनीति में लिप्त है। उन्होंने कहा कि मूल मुद्दों पर ध्यान न देकर ऐसे तुच्छ विवाद उठाना उनकी आदत बन गई है।

    यह विवाद इस बात को उजागर करता है कि सरकारी कैलेंडर और प्रतीकों को लेकर राजनीतिक दल कितनी तेजी से प्रतिक्रियाशील हो जाते हैं। दिग्विजय और जयवर्धन का तर्क है कि राज्य की पहचान और प्राकृतिक विरासत को सही रूप में प्रस्तुत करना जरूरी है। दूसरी ओर भाजपा का कहना है कि ऐसे मुद्दों को राजनीतिक हथियार बनाना सही नहीं है।

    मध्य प्रदेश में वाइल्डलाइफ और जैवविविधता के संरक्षण को लेकर यह बहस एक नई दिशा में बढ़ सकती है। राज्य सरकार की ओर से अभी तक इस विवाद पर कोई आधिकारिक सफाई नहीं आई है। लेकिन इस विवाद ने यह स्पष्ट कर दिया है कि सामाजिक मीडिया पर एक छोटी सी छवि भी राजनीतिक बहस का केंद्र बन सकती है।

    राजनीतिक विश्लेषक मानते हैं कि यह मामला केवल कैलेंडर का नहीं, बल्कि सत्ता पक्ष और विपक्ष के बीच सांस्कृतिक प्रतीकों और स्थानीय पहचान को लेकर बढ़ते मतभेद का संकेत है। इस मामले में जनता और मीडिया की नजरें अब इस पर टिकी हुई हैं कि सरकार इस मुद्दे का समाधान कैसे करती है और क्या भविष्य में ऐसी गलतियों से बचने के लिए कदम उठाए जाते हैं।