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  • मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव 25 जुलाई को दतिया प्रवास पर

    मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव 25 जुलाई को दतिया प्रवास पर


    भोपाल,। मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव 25 जुलाई, शनिवार को दतिया विधानसभा क्षेत्र के प्रवास पर रहेंगे। प्रवास के दौरान आप विभिन्न आमसभाओं, प्रबुद्धजन बैठक, प्रमुख कार्यकर्ताओं से भेंटकर व्यापारी सम्मेलन को संबोधित करेंगे।

    मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव 25 जुलाई को दोपहर 2 बजे दतिया के उदगवां एवं सायं 4 बजे सीतापुर मंडल के ग्राम उपरायं में विशाल जनसभा को संबोधित करेंगे। आप सायं 6ः30 बजे दतिया चुनाव कार्यालय, होटल रतन रॉयल में आयोजित प्रबुद्धजन बैठक को संबोधित करने के पश्चात् दतिया नगर व ग्रामीण के प्रमुख कार्यकर्ताओं से भेंट करेंगे। मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव सायं 7ः45 बजे होटल एमपीटी मोटेल में व्यापारी सम्मेलन को संबोधित करेंगे।
  • हूती संकट के बीच भारत की ऊर्जा सुरक्षा पर फोकस, सऊदी दौरे पर NSA डोवल ने तेज की रणनीतिक कवायद

    हूती संकट के बीच भारत की ऊर्जा सुरक्षा पर फोकस, सऊदी दौरे पर NSA डोवल ने तेज की रणनीतिक कवायद


    नई दिल्ली। पश्चिम एशिया में बढ़ते तनाव और तेल आपूर्ति को लेकर पैदा हुई अनिश्चितता के बीच भारत ने अपनी ऊर्जा और समुद्री सुरक्षा को लेकर सक्रिय रणनीति अपनाई है। राष्ट्रीय सुरक्षा सलाहकार (NSA) अजित डोवल ने सऊदी अरब के विदेश मंत्री प्रिंस फैसल बिन रहमान से मुलाकात कर दोनों देशों के बीच रणनीतिक सहयोग, ऊर्जा सुरक्षा और समुद्री मार्गों की सुरक्षा को मजबूत बनाने पर चर्चा की।

    ईरान से जुड़े तनाव और होर्मुज जलडमरूमध्य पर संकट की आशंकाओं के बीच भारत के लिए कच्चे तेल की निर्बाध आपूर्ति अहम मुद्दा बन गई है। इसी कारण डोवल की सऊदी यात्रा में ऊर्जा सुरक्षा प्रमुख प्राथमिकताओं में शामिल रही।

    सऊदी से बढ़ी भारत की तेल निर्भरता
    वर्तमान में भारत के कुल कच्चे तेल आयात का करीब 17 प्रतिशत हिस्सा सऊदी अरब से आता है। होर्मुज मार्ग प्रभावित होने के बाद सऊदी अरब ने बाब-अल-मंदेब मार्ग के जरिए भारत को तेल भेजना जारी रखा। हालांकि अब यमन के हूती विद्रोहियों द्वारा इस समुद्री मार्ग को भी बाधित करने की चेतावनी दिए जाने से नई चुनौती सामने आ गई है। इसी संभावित संकट से निपटने के लिए भारत कूटनीतिक और रणनीतिक स्तर पर सक्रिय हो गया है।

    क्या है ‘डोवल डॉक्ट्रिन’?
    राष्ट्रीय सुरक्षा से जुड़े जटिल मामलों में अजित डोवल की कार्यशैली को अक्सर ‘डोवल डॉक्ट्रिन’ के रूप में देखा जाता है। डोवल कई बार कह चुके हैं कि चुनौतीपूर्ण परिस्थितियों में केवल निर्णय लेना पर्याप्त नहीं होता, बल्कि उन फैसलों को सही साबित करना अधिक महत्वपूर्ण होता है। इसी सोच के तहत भारत पश्चिम एशिया में अपने रणनीतिक संबंधों को लगातार मजबूत कर रहा है।

    ऑपरेशन राहत बना था मिसाल
    साल 2015 में यमन गृहयुद्ध के दौरान भारत ने ‘ऑपरेशन राहत’ चलाकर लगभग 4,741 भारतीय नागरिकों को सुरक्षित निकाला था। इसके साथ ही करीब 2 हजार विदेशी नागरिकों को भी वहां से बाहर निकालने में मदद की गई थी। उस समय हूती गुट से भारत के औपचारिक संबंध नहीं थे, लेकिन अजित डोवल के नेतृत्व में भारतीय खुफिया एजेंसियों ने बैक-चैनल संवाद स्थापित किया। खुफिया तंत्र ने भारतीय नागरिकों के ठिकानों और सुरक्षित निकासी मार्गों की जानकारी जुटाई, जबकि नौसेना और वायुसेना ने अभियान को सफल बनाने में अहम भूमिका निभाई।

    हूती गुट से संवाद की रणनीति
    ऑपरेशन राहत के बाद भी भारत ने हूती गुट को आधिकारिक मान्यता नहीं दी, लेकिन यमन को भेजी जाने वाली मानवीय सहायता जारी रखी। खाद्य सामग्री और दवाओं के रूप में भेजी जाने वाली राहत का एक हिस्सा हूती प्रभाव वाले क्षेत्रों तक भी पहुंचता रहा है। माना जाता है कि यही मानवीय पहल भविष्य में संवाद की संभावनाओं को बनाए रखने में सहायक हो सकती है।

    भारतीय नौसेना भी सतर्क
    भारत की नौसेना के 2 से 4 युद्धपोत लगातार यमन के आसपास के समुद्री क्षेत्र में गश्त करते रहते हैं। ऐसे में यदि समुद्री मार्गों पर कोई खतरा पैदा होता है, तो भारत तेल आपूर्ति की सुरक्षा के लिए नौसैनिक सहयोग भी बढ़ा सकता है।

    रक्षा सहयोग भी बढ़ सकता है
    ऊर्जा सहयोग के साथ-साथ भारत और सऊदी अरब रक्षा क्षेत्र में भी साझेदारी मजबूत करने पर विचार कर रहे हैं। मीडिया रिपोर्टों के अनुसार, सऊदी अरब उन छह देशों में शामिल है जिन्होंने भारत की ‘अस्त्र’ मिसाइल में रुचि दिखाई है। भारतीय वायुसेना के अनुसार, ऑपरेशन सिंदूर के दौरान अस्त्र मिसाइल का सफल इस्तेमाल किया गया था। इसके बाद इंडोनेशिया ने भी इस स्वदेशी मिसाइल की खरीद का समझौता किया है और अब सऊदी अरब भी इसमें दिलचस्पी दिखा रहा है।

    चाणक्य नीति से जोड़कर देखा जा रहा सहयोग
    विशेषज्ञ इस रणनीतिक सहयोग की तुलना आचार्य चाणक्य की ‘समाश्रय नीति’ से भी करते हैं। इस नीति के अनुसार मित्र देशों के साथ केवल कूटनीतिक और आर्थिक ही नहीं, बल्कि सैन्य सहयोग भी विकसित किया जाना चाहिए, ताकि दोनों देशों के हित सुरक्षित रह सकें।

    डोवल को मिलेगा राष्ट्रीय सम्मान
    राष्ट्रीय सुरक्षा के क्षेत्र में योगदान के लिए अजित डोवल को लोकमान्य तिलक राष्ट्रीय पुरस्कार से सम्मानित किया जाएगा। 1 अगस्त को पुणे में आयोजित समारोह में केंद्रीय गृह मंत्री अमित शाह उन्हें यह सम्मान प्रदान करेंगे।

    1983 में शुरू हुए इस प्रतिष्ठित पुरस्कार से देश और समाज के लिए उल्लेखनीय योगदान देने वाली हस्तियों को सम्मानित किया जाता है। इससे पहले पूर्व राष्ट्रपति प्रणब मुखर्जी और समाजवादी चिंतक एस. एम. जोशी जैसी हस्तियों को भी यह सम्मान मिल चुका है।

  • CM योगी ने दी 574 करोड़ की 57 परियोजनाओं की सौगात, बोले- 'अब न कर्फ्यू, न दंगा, बुलंदशहर चंगा'

    CM योगी ने दी 574 करोड़ की 57 परियोजनाओं की सौगात, बोले- 'अब न कर्फ्यू, न दंगा, बुलंदशहर चंगा'


    बुलंदशहर। मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ ने शनिवार को बुलंदशहर दौरे के दौरान जिले को 574 करोड़ रुपये की विकास परियोजनाओं की सौगात दी। उन्होंने नुमाइश ग्राउंड में आयोजित जनसभा में बुलंदशहर और सिकंदराबाद विधानसभा क्षेत्रों की 57 विकास परियोजनाओं का शिलान्यास और लोकार्पण किया। इस दौरान मुख्यमंत्री ने प्रदेश में कानून-व्यवस्था और विकास कार्यों को लेकर सरकार की उपलब्धियां भी गिनाईं।

    सभा को संबोधित करते हुए मुख्यमंत्री ने कहा कि वर्ष 2017 से पहले उत्तर प्रदेश में कानून-व्यवस्था की स्थिति खराब थी, जबकि अब प्रदेश विकास और सुशासन की दिशा में तेजी से आगे बढ़ रहा है। उन्होंने कहा, “आज न कर्फ्यू है, न दंगा है, अब बुलंदशहर चंगा है।”

    किसानों के लिए मुआवजा बढ़ाने और रिंग रोड की घोषणा
    मुख्यमंत्री ने गंगा एक्सप्रेसवे और जेवर एयरपोर्ट को जोड़ने वाले लिंक एक्सप्रेसवे के लिए अधिग्रहित किसानों की भूमि का मुआवजा बढ़ाने की घोषणा की। इसके साथ ही बुलंदशहर नगर में रिंग रोड निर्माण को भी मंजूरी देने का ऐलान किया।

    रज्जू भैया सैनिक विद्या मंदिर पहुंचे मुख्यमंत्री
    जनसभा से पहले मुख्यमंत्री शिकारपुर स्थित रज्जू भैया सैनिक विद्या मंदिर पहुंचे। यहां उन्होंने कहा कि अयोध्या में श्रीराम मंदिर और काशी विश्वनाथ कॉरिडोर का निर्माण प्रदेश की जनता के विश्वास और समर्थन का परिणाम है। विद्यालय में छात्राओं के प्रवेश की सराहना करते हुए मुख्यमंत्री ने उनके लिए प्रदेश सरकार की ओर से छात्रावास बनवाने की घोषणा की। साथ ही उन्होंने रज्जू भैया की माताजी के नाम पर छात्रों के लिए भी छात्रावास बनाने की बात कही।

    2047 तक विकसित भारत का लिया संकल्प
    मुख्यमंत्री ने वर्ष 2047 तक भारत को विकसित और समृद्ध राष्ट्र बनाने का संकल्प दोहराया। उन्होंने कहा कि देशवासियों को अपनी सांस्कृतिक विरासत और महापुरुषों पर गर्व होना चाहिए। सामाजिक समरसता पर जोर देते हुए उन्होंने कहा कि छुआछूत, जाति, क्षेत्र और भाषा जैसे भेदभाव से ऊपर उठकर कार्य करने से ही राष्ट्र का समग्र विकास संभव है।

    अपने संबोधन में मुख्यमंत्री ने राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ (आरएसएस) को दुनिया का सबसे बड़ा सामाजिक संगठन बताया और रज्जू भैया के योगदान को याद करते हुए कहा कि शिक्षा, संस्कार और सामाजिक एकता राष्ट्र निर्माण की मजबूत नींव हैं, जिन पर प्रदेश सरकार निरंतर कार्य कर रही है।

  • विदेश मंत्री एस. जयशंकर आज 6 देशों की यात्रा पर होंगे रवाना….देखें पूरा शेड्यूल

    विदेश मंत्री एस. जयशंकर आज 6 देशों की यात्रा पर होंगे रवाना….देखें पूरा शेड्यूल


    नई दिल्ली।
    विदेश मंत्री एस जयशंकर (External Affairs Minister S. Jaishankar) रविवार से छह देशों के दौरे (Six-Nation Tour) पर रवाना होंगे। वह कतर, बहरीन, कुवैत, ओमान, बेल्जियम और अमेरिका का दौरा करेंगे।

    विदेश मंत्रालय (एमईए) के अनुसार, यह यात्रा 5 जुलाई से 10 जुलाई तक खाड़ी देशों की होगी। यह दौरा ऐसे समय में हो रहा है, जब क्षेत्र में अमेरिका और ईरान के बीच शांति समझौते के बाद राजनीतिक हालात तेजी से बदल रहे हैं।

    खाड़ी देशों की यात्रा पूरी करने के बाद विदेश मंत्री न्यूयॉर्क जाएंगे। वहां वह 13 जुलाई को संयुक्त राष्ट्र सुरक्षा परिषद (यूएनएससी) में भारत के 2028-29 कार्यकाल के लिए आधिकारिक अभियान की शुरुआत करेंगे। इसके बाद यात्रा के अंतिम चरण में वह ब्रसेल्स जाएंगे, जहां वह भारत-यूरोपीय संघ व्यापार और प्रौद्योगिकी परिषद की तीसरी बैठक में शामिल होंगे।


    विदेश मंत्रालय ने क्या बताया जयशंकर का कार्यक्रम?

    विदेश मंत्री जयशंकर 5 जुलाई से 10 जुलाई तक कतर, बहरीन, कुवैत और ओमान की आधिकारिक यात्रा पर रहेंगे। यात्रा के दौरान जयशंकर इन देशों के समकक्षों और शीर्ष नेतृत्व से मुलाकात करेंगे। इस यात्रा का मुख्य उद्देश्य द्विपक्षीय संबंधों को मजबूत करना है और साथ ही क्षेत्रीय घटनाक्रमों और साझा हितों पर विचारों का आदान-प्रदान करना है।

    विदेश मंत्री 13 जुलाई को न्यूयॉर्क में भारत की यूएनएससी 2028-29 की आधिकारिक उम्मीदवारी की शुरुआत करेंगे। इसके बाद वह 14 और 15 जुलाई को ब्रसेल्स में होने वाली तीसरी भारत-ईयू व्यापार और प्रौद्योगिकी परिषद बैठक (भारत-ईयू टीटीसी) में शामिल होंगे और यूरोपीय संघ तथा बेल्जियम के प्रतिनिधियों से बातचीत करेंगे।


    टीटीसी की शुरुआत कब हुई और इसका मकसद क्या है?

    मंत्रालय के अनुसार, टीटीसी की शुरुआत 2022 में हुई थी, जिसका मकसद आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस, क्वांटम कंप्यूटिंग, सेमीकंडक्टर और साइबर सुरक्षा जैसे अहम क्षेत्रों में तकनीकी सहयोग बढ़ाना है।

  • चार दिवसीय फ्रांस दौरे पर रवाना हुईं निर्मला सीतारमण, द्विपक्षीय साझेदारी पर होगा फोकस

    चार दिवसीय फ्रांस दौरे पर रवाना हुईं निर्मला सीतारमण, द्विपक्षीय साझेदारी पर होगा फोकस


    नई दिल्ली। केंद्रीय वित्त एवं कॉर्पोरेट मामलों की मंत्री निर्मला सीतारमण चार दिवसीय आधिकारिक यात्रा पर बुधवार को फ्रांस के लिए रवाना हो गईं। इस दौरे का उद्देश्य भारत और फ्रांस के बीच रणनीतिक साझेदारी को मजबूत करना, आर्थिक सहयोग को नई गति देना तथा निवेश, प्रौद्योगिकी और नवाचार के क्षेत्र में संबंधों को और विस्तार देना है।

    यात्रा के दौरान वित्त मंत्री कई उच्चस्तरीय द्विपक्षीय बैठकों में भाग लेंगी। इस दौरे का प्रमुख आकर्षण भारत-फ्रांस आर्थिक एवं वित्तीय संवाद (Economic and Financial Dialogue-EFD) होगा, जिसकी सह-अध्यक्षता वह फ्रांस के अर्थव्यवस्था, वित्त तथा औद्योगिक एवं ऊर्जा संप्रभुता मंत्री रोलैंड लेस्क्योर के साथ ऐक्स-एन-प्रोवेंस में करेंगी। इस बैठक में दोनों देश आर्थिक सहयोग के नए अवसरों और द्विपक्षीय संबंधों को मजबूत करने पर विचार-विमर्श करेंगे।

    निर्मला सीतारमण वैश्विक कंपनियों के प्रमुख अधिकारियों (सीईओ) के साथ अलग-अलग बैठकें भी करेंगी। इसके अलावा वह प्रमुख उद्योगपतियों के साथ आयोजित एक राउंडटेबल चर्चा में शामिल होकर भारत की मजबूत आर्थिक स्थिति, जारी संरचनात्मक सुधारों, निवेश की संभावनाओं और दीर्घकालिक विकास के अवसरों को प्रस्तुत करेंगी।

    वित्त मंत्रालय के अनुसार, वित्त मंत्री यूरोप के प्रतिष्ठित वार्षिक मंच ‘लेस रेन्कॉन्ट्रेस इकोनॉमिक्स डी’एक्स-एन-प्रोवेंस’ में “नए मध्यम वर्ग के विकास को कैसे बढ़ावा दें” विषय पर आयोजित पैनल चर्चा में भी हिस्सा लेंगी। इस सम्मेलन में दुनिया भर के नीति-निर्माता, केंद्रीय बैंक प्रमुख, उद्योग जगत के प्रतिनिधि, अर्थशास्त्री और अंतरराष्ट्रीय संगठनों के विशेषज्ञ वैश्विक आर्थिक चुनौतियों पर विचार साझा करेंगे।

    अपने दौरे के दौरान सीतारमण फ्रांस के कैडाराश स्थित इंटरनेशनल थर्मोन्यूक्लियर एक्सपेरिमेंटल रिएक्टर (ITER) परियोजना का भी दौरा करेंगी। यह परमाणु संलयन (न्यूक्लियर फ्यूजन) ऊर्जा से जुड़ी दुनिया की सबसे बड़ी अंतरराष्ट्रीय वैज्ञानिक परियोजनाओं में शामिल है, जिसमें भारत और फ्रांस सहित 30 से अधिक देशों की भागीदारी है।

    इसके अलावा वित्त मंत्री ‘कैंपस साइबर’ का भी दौरा करेंगी, जो फ्रांस में साइबर सुरक्षा, अनुसंधान, नवाचार और कौशल विकास का प्रमुख केंद्र है। इस यात्रा के जरिए दोनों देशों के बीच साइबर सुरक्षा, डिजिटल अर्थव्यवस्था और तकनीकी सहयोग को और मजबूत करने की दिशा में अनुभवों एवं सर्वोत्तम कार्यप्रणालियों के आदान-प्रदान की उम्मीद है।

    यात्रा के दौरान सीतारमण प्रोवेंस-आल्प्स-कोटे डी’अजूर (PACA) क्षेत्र के अध्यक्ष रेनॉड म्यूसेलियर से भी मुलाकात करेंगी। इस बैठक में निवेश, स्वच्छ ऊर्जा, नवाचार, प्रौद्योगिकी और क्षेत्रीय आर्थिक साझेदारी जैसे क्षेत्रों में सहयोग बढ़ाने पर चर्चा होगी।

    अपने चार दिवसीय दौरे के अंतिम चरण में वित्त मंत्री फ्रांस में रह रहे भारतीय समुदाय के सदस्यों के साथ आयोजित एक सामुदायिक कार्यक्रम में भी हिस्सा लेंगी।

  • शांति वार्ता फिर विफल…! ईरानी विदेश मंत्री बिना बातचीत लौटे…. US डेलिगेट्स का दौरा भी रद्द

    शांति वार्ता फिर विफल…! ईरानी विदेश मंत्री बिना बातचीत लौटे…. US डेलिगेट्स का दौरा भी रद्द


    इस्लामाबाद।
    ईरान और अमेरिका (Iran and America) के बीच जंग और तनाव के बीच शनिवार को नई उम्मीद की किरण दिखी थी. लेकिन अब वह उम्मीद टूट गई है. ईरान के विदेश मंत्री अब्बास अराघची (Iran’s Foreign Minister Abbas Araghchi) अपनी एक बड़ी टीम के साथ पाकिस्तान (Pakistan) की राजधानी इस्लामाबाद (Islamabad.) में थे. पाकिस्तान (Pakistan) दोनों देशों के बीच बिचौलिया यानी मध्यस्थ की भूमिका निभाने वाला था. लेकिन, ईरान का डेलिगेशन बिना अमेरिकी प्रतिनिधित्व के इस्लामाबाद में आए हुए ही पाकिस्तान से चले गए. अब अमेरिकी प्रतिनिधित्व ने भी पाकिस्तान का दौरा रद्द करने का ऐलान किया है।

    ईरान सीधे अमेरिका से बात करने को तैयार नहीं है इसलिए पाकिस्तान दोनों के बीच संदेश पहुंचाने का काम कर रहा. अमेरिका से भी स्पेशल दूत इस्लामाबाद आने वाले थे. लेकिन ईरानी प्रतिनिधित्व चले गए हैं तो उन्होंने भी अपने दौरे को रद्द कर दिया है. ये ऐलान राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने किया है।

    अराघची और पाकिस्तान के प्रधानमंत्री शहबाज शरीफ की मुलाकात हुई. इस मीटिंग में पाकिस्तान के उप प्रधानमंत्री और विदेश मंत्री इशाक डार और सेना प्रमुख जनरल सैयद आसिम मुनीर भी मौजूद थे. इस मुलाकात के बाद तेहरान के प्रतिनिधत्व पाकिस्तान से ओमान चले गए.

    अराघची इस्लामाबाद के बाद मस्कट यानी ओमान पहुंचे हैं. इसके बाद वह मॉस्को यानी रूस भी जाएंगे. यानी ईरान एक साथ कई देशों से संपर्क करके रास्ता निकालने की कोशिश कर रहा है।


    ईरान ने सीधी बात से किया इनकार

    ईरान के विदेश मंत्रालय के प्रवक्ता इस्माइल बगाई ने साफ कहा कि इस दौर में ईरान और अमेरिका के बीच कोई सीधी मीटिंग नहीं होगी. ईरान पाकिस्तान के जरिए अपनी बात और अपनी चिंताएं अमेरिका तक पहुंचाएगा. उन्होंने अमेरिका के इस पूरे कदम को ‘अमेरिका का थोपा हुआ हमलावर युद्ध’ बताया और कहा कि पाकिस्तान शांति बहाल करने की कोशिश में जुटा है.


    ईरान के विदेश मंत्री अराघची ने क्या कहा?

    ईरान के विदेश मंत्री अराघची ने पाकिस्तान दौरे के बाद बड़ा बयान दिया है. उन्होंने कहा कि उनका पाकिस्तान दौरा ‘काफी फलदायी’ रहा. यानी बातचीत अच्छी रही और कई अहम मुद्दों पर चर्चा हुई. उन्होंने यह भी बताया कि ईरान ने युद्ध खत्म करने के लिए एक व्यावहारिक फ्रेमवर्क पेश किया है. यानी ऐसा प्लान दिया गया है, जिससे स्थायी तौर पर संघर्ष खत्म किया जा सके. लेकिन साथ ही उन्होंने एक बड़ी बात भी कही. अभी तक यह साफ नहीं है कि अमेरिका सच में बातचीत को लेकर गंभीर है या नहीं.

    ईरान के फैसले पर डोनाल्ड ट्रंप ने क्या कहा?
    अमेरिका के राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने अमेरिका-ईरान बातचीत को लेकर बड़ा बयान दिया है. उन्होंने कहा कि मौजूदा हालात में 18 घंटे की लंबी यात्रा करके बातचीत करने का कोई मतलब नहीं है. उनके मुताबिक, फोन पर भी बातचीत उतनी ही अच्छी तरह हो सकती है. उन्होंने यह भी कहा कि अगर ईरान बात करना चाहता है, तो वह खुद फोन कर सकता है. अमेरिका सिर्फ बैठकर बेकार की बातचीत के लिए यात्रा नहीं करेगा.

    जब उनसे पूछा गया कि क्या इसका मतलब है कि अमेरिका फिर से युद्ध शुरू करने जा रहा है, तो ट्रंप ने साफ किया कि ऐसा नहीं है. उन्होंने कहा कि अभी इस बारे में कोई फैसला नहीं लिया गया है. ट्रंप ने यह भी कहा कि अमेरिका मजबूत स्थिति में है. उनके शब्दों में, ‘हमारे पास सारे पत्ते हैं’ यानी अमेरिका के पास बातचीत में बढ़त है. उन्होंने कहा कि वे बेकार की चर्चा में समय नहीं गंवाना चाहते.

    पाकिस्तान के प्रधानमंत्री ने क्या कहा?
    पाकिस्तान के प्रधानमंत्री शहबाज शरीफ ने इस्लामाबाद में ईरान के विदेश मंत्री अब्बास अराघची और उनके प्रतिनिधियों से मुलाकात के बाद सोशल मीडिया एक्स पर पोस्ट किया है. उन्होंने कहा कि यह मुलाकात काफी अच्छी और पॉजिटिव रही. दोनों नेताओं के बीच मौजूदा क्षेत्रीय परिस्थितियों पर खुलकर चर्चा हुई. साथ ही, पाकिस्तान और ईरान के आपसी संबंधों को और मजबूत करने पर भी बात हुई. यानी सिर्फ मौजूदा तनाव ही नहीं, बल्कि दोनों देशों के बीच सहयोग बढ़ाने के मुद्दों पर भी बातचीत हुई.

  • PM मोदी अगले माह जाएंगे एक सप्ताह के विदेश दौरे पर…. इन देशों की करेंगे यात्रा

    PM मोदी अगले माह जाएंगे एक सप्ताह के विदेश दौरे पर…. इन देशों की करेंगे यात्रा


    नई दिल्ली।
    प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी (Prime Minister Narendra Modi) अगले महीने यानी मई (May) के मध्य में यूरोप की एक सप्ताह की महत्वपूर्ण यात्रा पर जाने वाले हैं। इस दौरे का मुख्य उद्देश्य यूरोपीय संघ (European Union-EU) के साथ व्यापारिक और रणनीतिक संबंधों को और अधिक मजबूत करना तथा महाद्वीप के साथ भारत की बढ़ती भागीदारी को नई दिशा देना है। इस यात्रा के दौरान प्रधानमंत्री ताबड़तोड़ विदेश दौरा करेंगे। वे नॉर्वे, नीदरलैंड और इटली जाएंगे।


    नॉर्वे का दौरा: तीसरा भारत-नॉर्डिक शिखर सम्मेलन और EFTA पर जोर

    WION की रिपोर्ट के मुताबिक, प्रधानमंत्री मोदी की यात्रा का एक प्रमुख पड़ाव नॉर्वे की राजधानी ओस्लो होगा, जहां वे तीसरे ‘भारत-नॉर्डिक शिखर सम्मेलन’ में भाग लेंगे। इस सम्मेलन में स्वीडन, डेनमार्क, फिनलैंड और आइसलैंड के नेता भी शामिल होंगे। इससे पहले यह सम्मेलन 2018 में स्टॉकहोम और 2022 में कोपेनहेगन में आयोजित हो चुका है।

    नॉर्वे ‘यूरोपीय मुक्त व्यापार संघ’ (EFTA) का एक महत्वपूर्ण सदस्य है। अक्टूबर 2025 में लागू हुए ‘भारत-EFTA व्यापार और आर्थिक भागीदारी समझौते’ के बाद इस दौरे की अहमियत काफी बढ़ गई है।


    भारत को क्या मिलेगा?

    इस समझौते के तहत EFTA देशों ने अगले 15 वर्षों में भारत में 100 अरब डॉलर का निवेश करने का वादा किया है, जिससे देश में लगभग 10 लाख नए रोजगार पैदा होने का लक्ष्य है। साथ ही, इससे कपड़ा, चमड़ा और खाद्य उत्पादों के क्षेत्र में भारतीय निर्यातकों के लिए नए बाजार खुलेंगे।

    ओस्लो में होने वाली द्विपक्षीय वार्ताओं में हरित ऊर्जा (ग्रीन एनर्जी), जलवायु परिवर्तन, ‘ब्लू इकॉनमी’, इनोवेशन, डिजिटलीकरण और आर्कटिक क्षेत्र में सहयोग पर विस्तार से चर्चा होगी।


    नीदरलैंड दौरा: कृषि और तकनीक पर फोकस

    ओस्लो के बाद प्रधानमंत्री मोदी नीदरलैंड जाएंगे। यहां उनकी पिछली यात्रा 2017 में हुई थी। द हेग (नीदरलैंड) जल प्रबंधन, कृषि, तकनीक और आतंकवाद विरोधी प्रयासों में भारत का एक प्रमुख भागीदार रहा है। पिछले साल कुछ कारणों से टल गए कार्यक्रमों और बैठकों की तारीखों को अंतिम रूप दिया जा रहा है, ताकि दोनों देशों के बीच द्विपक्षीय संबंधों को और मजबूत किया जा सके।


    इटली और वेटिकन सिटी: पहली द्विपक्षीय यात्रा

    प्रधानमंत्री मोदी के कार्यक्रम में इटली भी शामिल है। यह उनकी इटली की पहली द्विपक्षीय यात्रा होगी। हालांकि वे 2021 में G20 शिखर सम्मेलन और 2024 में G7 आउटरीच के लिए रोम जा चुके हैं। इटली की प्रधानमंत्री जॉर्जिया मेलोनी के साथ उनकी चर्चा का मुख्य केंद्र रक्षा, ऊर्जा और निवेश से जुड़े मुद्दे होंगे।


    पोप से मुलाकात संभव

    इस बात की भी प्रबल संभावना है कि पीएम मोदी वेटिकन सिटी का दौरा करें और ईसाई धर्मगुरु पोप से मुलाकात करें।


    ऐतिहासिक भारत-यूरोपीय संघ शिखर सम्मेलन

    मई का यह यूरोप दौरा 27 जनवरी 2026 को नई दिल्ली में आयोजित हुए 16वें भारत-यूरोपीय संघ शिखर सम्मेलन के ठीक बाद हो रहा है। उस सम्मेलन की सह-अध्यक्षता पीएम मोदी, यूरोपीय परिषद के अध्यक्ष एंटोनियो कोस्टा और यूरोपीय आयोग की अध्यक्ष उर्सुला वॉन डेर लेयेन ने की थी।

    उसमें ‘भारत-ईयू मुक्त व्यापार समझौते (FTA)’ पर बातचीत पूरी होने की ऐतिहासिक घोषणा की गई थी। साथ ही, एक नई ‘सुरक्षा एवं रक्षा साझेदारी’ और ‘टुवर्ड्स 2030’ संयुक्त रणनीतिक एजेंडा भी तय किया गया था।


    मई यात्रा का लक्ष्य

    इस दौरे से FTA को तेजी से लागू करने, सप्लाई चेन को विविधतापूर्ण बनाने और स्वच्छ तकनीक (क्लीन टेक) के क्षेत्र में सहयोग बढ़ाने में मदद मिलेगी।


    आगामी कार्यक्रम: फ्रांस में G7 सम्मेलन

    यूरोप के साथ इस सघन कूटनीति के क्रम में, प्रधानमंत्री मोदी जून के महीने में फ्रांस भी जाएंगे, जहां वे G7 शिखर सम्मेलन में हिस्सा लेंगे। भारत को 2019 से लगातार इस प्रभावशाली समूह के आउटरीच कार्यक्रमों में आमंत्रित किया जाता रहा है, जो वैश्विक स्तर पर भारत के बढ़ते कद को दर्शाता है।

  • मप्र के मुख्यमंत्री डॉ. यादव आज परमहंस आश्रम शक्तेशगढ़ के दौरे पर

    मप्र के मुख्यमंत्री डॉ. यादव आज परमहंस आश्रम शक्तेशगढ़ के दौरे पर


    भोपाल।
    मध्य प्रदेश के मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव आज रविवार को उत्तर प्रदेश के मीरजापुर जिले के प्रवास पर रहेंगे। वे यहां परमहंस आश्रम शक्तेशगढ़ में एक कार्यक्रम में शामिल होंगे।

    निर्धारित कार्यक्रम के अनुसार, मुख्यमंत्री डॉ. यादव दोपहर में अस्प प्रवास पर रीवा पहुंचेंगे और यहां से हेलीकाप्टर द्वारा अपरान्ह 1.40 बजे मिर्जापुर (उत्तर प्रदेश) जिले के परमहंस आश्रम शक्तेशगढ़ के लिए रवाना होंगे।

    मुख्यमंत्री दोपहर 2:15 बजे शक्तेशगढ़ स्थित परमहंस आश्रम हेलीपैड पर पहुंचेंगे। यहां वे स्थानीय कार्यक्रमों में शामिल होंगे। कार्यक्रम के उपरांत मुख्यमंत्री शाम 4:30 बजे शक्तेशगढ़ से हेलीकॉप्टर द्वारा रवाना होंगे और 5:05 बजे रीवा एयरपोर्ट पहुंचेंगे और यहां से विमान द्वारा भोपाल के लिए प्रस्थान करेंगे।