Tag: vitamin B12 deficiency

  • रात में अचानक पैर में उठता है तेज दर्द? विटामिन D कैल्शियम और B12 की कमी हो सकती है कारण

    रात में अचानक पैर में उठता है तेज दर्द? विटामिन D कैल्शियम और B12 की कमी हो सकती है कारण


    नई दिल्ली । पैरों में दर्द और ऐंठन की समस्या अक्सर लोगों को सामान्य लगती है। लंबे समय तक खड़े रहने या लगातार बैठे रहने के बाद पैरों में दर्द होना आम बात है और कई बार थोड़े आराम के बाद यह परेशानी खुद ही ठीक भी हो जाती है। लेकिन अगर बिना किसी चोट के या ज्यादा मेहनत किए बिना ही पैरों में अचानक दर्द होने लगे और यह समस्या बार बार सामने आए तो इसे नजरअंदाज नहीं करना चाहिए। कई मामलों में शरीर में जरूरी विटामिन और मिनरल्स की कमी भी पैरों में दर्द कमजोरी ऐंठन और झनझनाहट का कारण बन सकती है। ऐसे में शरीर के संकेतों को समझना और अपने खानपान पर ध्यान देना बेहद जरूरी हो जाता है।

    पैरों में दर्द की एक वजह शरीर में विटामिन D की कमी भी हो सकती है। विटामिन D शरीर की हड्डियों के साथ मांसपेशियों और नसों के सामान्य कामकाज के लिए जरूरी माना जाता है। इसकी कमी होने पर शरीर में कमजोरी और दर्द महसूस हो सकता है। कुछ लोगों में इसका असर खासतौर पर कमर पीठ और पैरों में दिखाई देता है। शरीर को विटामिन D का प्रमुख प्राकृतिक स्रोत सूर्य की रोशनी से मिलता है। हालांकि अगर शरीर में इसकी कमी है तो इसे पूरा करने के लिए डॉक्टर की सलाह लेना जरूरी है।

    कैल्शियम की कमी को भी पैरों में होने वाली ऐंठन और खिंचाव से जोड़कर देखा जाता है। आमतौर पर कैल्शियम को सिर्फ हड्डियों की मजबूती के लिए जरूरी माना जाता है लेकिन इसका संबंध मांसपेशियों के सामान्य कामकाज से भी है। शरीर में कैल्शियम का स्तर कम होने पर मांसपेशियों में खिंचाव या ऐंठन जैसी समस्या हो सकती है। अपनी डाइट में दूध दही पनीर और तिल जैसे कैल्शियम युक्त खाद्य पदार्थ शामिल किए जा सकते हैं।

    विटामिन B12 की कमी भी पैरों से जुड़ी परेशानियों की वजह बन सकती है। यह विटामिन नसों के सामान्य स्वास्थ्य के लिए महत्वपूर्ण है। इसकी कमी होने पर हाथ और पैरों में सुन्नपन झनझनाहट खिंचाव या असामान्य संवेदनाएं महसूस हो सकती हैं। कुछ लोगों में रात के समय पैरों में ऐंठन की शिकायत भी देखने को मिलती है। अगर इस तरह की समस्या लगातार बनी हुई है तो केवल घरेलू उपाय करने के बजाय विशेषज्ञ से सलाह लेना बेहतर होता है।

    पैरों के दर्द और ऐंठन से बचने के लिए संतुलित और पौष्टिक आहार लेना जरूरी है। खाने में हरी सब्जियां दूध दही अंडे मौसमी फल और दूसरे पोषक तत्वों से भरपूर खाद्य पदार्थ शामिल किए जा सकते हैं। पर्याप्त पानी पीना और नियमित रूप से हल्की शारीरिक गतिविधि करना भी शरीर को सक्रिय रखने में मदद करता है। हालांकि हर बार पैर में दर्द का मतलब विटामिन या मिनरल्स की कमी ही हो ऐसा जरूरी नहीं है। अगर दर्द बार बार हो रहा है लंबे समय तक बना रहता है या इसके साथ सुन्नपन कमजोरी सूजन जैसी समस्या भी दिखाई देती है तो डॉक्टर से जांच कराना जरूरी है। बिना जांच के किसी विटामिन या मिनरल का सप्लीमेंट लेना भी उचित नहीं है।

  • रात में अचानक पैर पकड़ लेता है दर्द तो न करें नजरअंदाज, इन पोषक तत्वों की कमी हो सकती है वजह

    रात में अचानक पैर पकड़ लेता है दर्द तो न करें नजरअंदाज, इन पोषक तत्वों की कमी हो सकती है वजह


    नई दिल्ली। पैरों में दर्द होना आम समस्या है लेकिन अगर बिना किसी चोट या ज्यादा मेहनत के अचानक पैर में दर्द ऐंठन या खिंचाव होने लगे तो इसे सिर्फ सामान्य थकान समझकर नजरअंदाज नहीं करना चाहिए। कई बार शरीर में जरूरी विटामिन और मिनरल्स की कमी का असर मांसपेशियों और नसों पर पड़ सकता है। खासतौर पर बार बार होने वाली ऐंठन या दर्द शरीर में पोषण से जुड़ी किसी कमी की ओर इशारा कर सकता है। हालांकि पैर में दर्द के कई दूसरे कारण भी हो सकते हैं इसलिए लगातार परेशानी रहने पर डॉक्टर की सलाह लेना जरूरी है।

    विटामिन डी शरीर में हड्डियों के साथ मांसपेशियों और नसों के सामान्य कामकाज के लिए भी जरूरी माना जाता है। इसकी कमी होने पर शरीर में कमजोरी और दर्द जैसी शिकायत हो सकती है। कुछ लोगों में पैरों के अलावा कमर और पीठ में भी दर्द महसूस हो सकता है। शरीर को विटामिन डी का एक प्रमुख स्रोत सूर्य की रोशनी है। इसके अलावा डाइट और जरूरत पड़ने पर डॉक्टर की सलाह से सप्लीमेंट के जरिए इसकी कमी को दूर किया जा सकता है। बिना जांच के खुद से हाई डोज सप्लीमेंट लेना उचित नहीं है।

    कैल्शियम को आमतौर पर हड्डियों की मजबूती से जोड़कर देखा जाता है लेकिन इसका संबंध मांसपेशियों के सामान्य संकुचन और तंत्रिका तंत्र के कामकाज से भी है। शरीर में कैल्शियम का स्तर कम होने पर कुछ लोगों को मांसपेशियों में खिंचाव ऐंठन या असहजता महसूस हो सकती है। डाइट में दूध दही पनीर तिल और कैल्शियम से भरपूर अन्य खाद्य पदार्थ शामिल किए जा सकते हैं। अगर किसी व्यक्ति में लगातार कमी बनी हुई है तो डॉक्टर उचित जांच के बाद इसकी वजह और उपचार तय कर सकते हैं।

    विटामिन बी12 की कमी भी नसों से जुड़ी परेशानियों का कारण बन सकती है। इसकी कमी होने पर हाथ पैर में झनझनाहट सुन्नपन कमजोरी या असामान्य संवेदनाएं महसूस हो सकती हैं। कुछ लोगों को पैरों में खिंचाव या दर्द की शिकायत भी हो सकती है। खासकर लंबे समय से बनी रहने वाली ऐसी समस्या को नजरअंदाज करने के बजाय इसकी सही वजह पता करना जरूरी है। विटामिन बी12 मुख्य रूप से दूध अंडे मांस और मछली जैसे खाद्य पदार्थों में पाया जाता है। शाकाहारी लोगों में इसके स्रोत सीमित होने के कारण डॉक्टर की सलाह से इसकी जांच और जरूरत के अनुसार सप्लीमेंट की सलाह दी जा सकती है।

    पैरों में अचानक ऐंठन और दर्द का कारण सिर्फ विटामिन या मिनरल्स की कमी ही नहीं होता। शरीर में पानी की कमी लंबे समय तक एक ही स्थिति में रहना अधिक शारीरिक गतिविधि मांसपेशियों पर दबाव या कुछ दवाओं के प्रभाव से भी ऐसी परेशानी हो सकती है। इसलिए केवल लक्षण देखकर किसी एक पोषक तत्व की कमी मान लेना सही नहीं है।

    शरीर को जरूरी पोषक तत्व देने के लिए संतुलित आहार लेना सबसे महत्वपूर्ण है। खाने में हरी सब्जियां मौसमी फल दूध दही अंडे दालें सूखे मेवे और अन्य पौष्टिक खाद्य पदार्थ शामिल करें। पर्याप्त पानी पीना और नियमित हल्की एक्सरसाइज भी शरीर को सक्रिय रखने में मदद कर सकती है। अगर पैर का दर्द बार बार हो रहा है रात में लगातार ऐंठन होती है पैर में सुन्नपन या कमजोरी रहती है या दर्द काफी ज्यादा है तो डॉक्टर से संपर्क करना बेहतर होगा। जरूरत पड़ने पर जांच के जरिए विटामिन और मिनरल्स के स्तर के साथ समस्या की दूसरी संभावित वजहों का भी पता लगाया जा सकता है।

  • बार-बार थकान बाल झड़ना और घाव देर से भरना नहीं है सामान्य, शरीर में इन पोषक तत्वों की कमी का हो सकता है संकेत

    बार-बार थकान बाल झड़ना और घाव देर से भरना नहीं है सामान्य, शरीर में इन पोषक तत्वों की कमी का हो सकता है संकेत

    नई दिल्ली । शरीर को स्वस्थ रखने के लिए विटामिन और मिनरल्स की जरूरत होती है। इन पोषक तत्वों की मात्रा भले ही कम चाहिए होती है लेकिन शरीर के कई जरूरी काम इन्हीं पर निर्भर करते हैं। खून बनाने से लेकर नसों की कार्यप्रणाली प्रतिरोधक क्षमता त्वचा बालों और ऊर्जा के स्तर को बनाए रखने में इनका महत्वपूर्ण योगदान होता है। यही वजह है कि जब शरीर में आयरन जिंक या विटामिन B12 जैसे पोषक तत्वों की कमी होने लगती है तो कुछ बदलाव दिखाई दे सकते हैं। कई बार लोग इन संकेतों को सामान्य कमजोरी तनाव या नींद की कमी मानकर नजरअंदाज कर देते हैं।

    लगातार थकान और कमजोरी पोषण की कमी से जुड़ा एक आम संकेत हो सकता है। अगर पर्याप्त नींद लेने और सामान्य दिनचर्या के बावजूद शरीर में हर समय ऊर्जा की कमी महसूस हो रही है तो इसकी वजह जानना जरूरी है। आयरन की कमी से एनीमिया हो सकता है जिसमें थकान कमजोरी और एकाग्रता में परेशानी जैसी समस्याएं हो सकती हैं। विटामिन B12 की कमी में भी कमजोरी और थकान महसूस हो सकती है। हालांकि केवल थकान के आधार पर यह तय नहीं किया जा सकता कि शरीर में किस पोषक तत्व की कमी है क्योंकि इसके कई अन्य कारण भी हो सकते हैं।

    आयरन की कमी बढ़ने पर कुछ लोगों में त्वचा का रंग सामान्य से फीका दिखाई दे सकता है। चक्कर आना या थोड़ा काम करने पर सांस फूलना भी एनीमिया से जुड़ा हो सकता है। ऐसी स्थिति में बिना सलाह के आयरन की दवा शुरू करने के बजाय डॉक्टर से जांच कराना बेहतर होता है। जरूरत पड़ने पर रक्त जांच के माध्यम से हीमोग्लोबिन और आयरन की स्थिति का पता लगाया जा सकता है।

    बालों का लगातार झड़ना भी कई कारणों से हो सकता है। तनाव हार्मोन में बदलाव भोजन की कमी और कुछ स्वास्थ्य समस्याएं बालों के झड़ने की वजह बन सकती हैं। आयरन की कमी या एनीमिया भी कुछ मामलों में बालों की सेहत को प्रभावित कर सकता है। इसलिए केवल बाल झड़ने को देखकर किसी एक विटामिन या मिनरल की कमी मान लेना सही नहीं है।

    जिंक शरीर के लिए जरूरी मिनरल्स में शामिल है। यह प्रतिरोधक क्षमता और घाव भरने जैसी प्रक्रियाओं में भूमिका निभाता है। जिंक की कमी होने पर घाव सामान्य से देर से भरने की समस्या दिखाई दे सकती है। बार बार संक्रमण होना या बालों से जुड़ी परेशानियां भी कुछ मामलों में जिंक की कमी से संबंधित हो सकती हैं। हालांकि इन लक्षणों के पीछे अन्य स्वास्थ्य कारण भी हो सकते हैं।

    विटामिन B12 शरीर की नसों और लाल रक्त कोशिकाओं के लिए महत्वपूर्ण है। इसकी कमी लंबे समय तक रहने पर कमजोरी के साथ हाथ पैरों में झनझनाहट या सुन्नपन जैसी समस्याएं भी हो सकती हैं। कुछ लोगों में एकाग्रता और याददाश्त से जुड़ी परेशानियां भी देखी जा सकती हैं। इसलिए ऐसे लक्षण लगातार बने रहने पर चिकित्सकीय सलाह लेना जरूरी है।

    पोषक तत्वों की कमी से बचने के लिए संतुलित और विविध आहार लेना महत्वपूर्ण है। भोजन में दालें हरी सब्जियां साबुत अनाज दूध और उससे बने खाद्य पदार्थ अंडे मांस या अन्य उपलब्ध पोषक स्रोतों को शामिल किया जा सकता है। यदि किसी व्यक्ति को लंबे समय से कमजोरी बाल झड़ने घाव देर से भरने चक्कर या हाथ पैरों में झनझनाहट जैसी समस्या हो रही है तो खुद से सप्लीमेंट लेने के बजाय डॉक्टर से सलाह लेकर जरूरी जांच कराना बेहतर है। सही कारण की पहचान के बाद ही उचित उपचार और पोषण की योजना बनाई जानी चाहिए।

  • बार-बार थकान बाल झड़ना और घाव देर से भरना नहीं है सामान्य, शरीर में इन पोषक तत्वों की कमी का हो सकता है संकेत

    बार-बार थकान बाल झड़ना और घाव देर से भरना नहीं है सामान्य, शरीर में इन पोषक तत्वों की कमी का हो सकता है संकेत

    नई दिल्ली । शरीर को स्वस्थ रखने के लिए विटामिन और मिनरल्स की जरूरत होती है। इन पोषक तत्वों की मात्रा भले ही कम चाहिए होती है लेकिन शरीर के कई जरूरी काम इन्हीं पर निर्भर करते हैं। खून बनाने से लेकर नसों की कार्यप्रणाली प्रतिरोधक क्षमता त्वचा बालों और ऊर्जा के स्तर को बनाए रखने में इनका महत्वपूर्ण योगदान होता है। यही वजह है कि जब शरीर में आयरन जिंक या विटामिन B12 जैसे पोषक तत्वों की कमी होने लगती है तो कुछ बदलाव दिखाई दे सकते हैं। कई बार लोग इन संकेतों को सामान्य कमजोरी तनाव या नींद की कमी मानकर नजरअंदाज कर देते हैं।

    लगातार थकान और कमजोरी पोषण की कमी से जुड़ा एक आम संकेत हो सकता है। अगर पर्याप्त नींद लेने और सामान्य दिनचर्या के बावजूद शरीर में हर समय ऊर्जा की कमी महसूस हो रही है तो इसकी वजह जानना जरूरी है। आयरन की कमी से एनीमिया हो सकता है जिसमें थकान कमजोरी और एकाग्रता में परेशानी जैसी समस्याएं हो सकती हैं। विटामिन B12 की कमी में भी कमजोरी और थकान महसूस हो सकती है। हालांकि केवल थकान के आधार पर यह तय नहीं किया जा सकता कि शरीर में किस पोषक तत्व की कमी है क्योंकि इसके कई अन्य कारण भी हो सकते हैं।

    आयरन की कमी बढ़ने पर कुछ लोगों में त्वचा का रंग सामान्य से फीका दिखाई दे सकता है। चक्कर आना या थोड़ा काम करने पर सांस फूलना भी एनीमिया से जुड़ा हो सकता है। ऐसी स्थिति में बिना सलाह के आयरन की दवा शुरू करने के बजाय डॉक्टर से जांच कराना बेहतर होता है। जरूरत पड़ने पर रक्त जांच के माध्यम से हीमोग्लोबिन और आयरन की स्थिति का पता लगाया जा सकता है।

    बालों का लगातार झड़ना भी कई कारणों से हो सकता है। तनाव हार्मोन में बदलाव भोजन की कमी और कुछ स्वास्थ्य समस्याएं बालों के झड़ने की वजह बन सकती हैं। आयरन की कमी या एनीमिया भी कुछ मामलों में बालों की सेहत को प्रभावित कर सकता है। इसलिए केवल बाल झड़ने को देखकर किसी एक विटामिन या मिनरल की कमी मान लेना सही नहीं है।

    जिंक शरीर के लिए जरूरी मिनरल्स में शामिल है। यह प्रतिरोधक क्षमता और घाव भरने जैसी प्रक्रियाओं में भूमिका निभाता है। जिंक की कमी होने पर घाव सामान्य से देर से भरने की समस्या दिखाई दे सकती है। बार बार संक्रमण होना या बालों से जुड़ी परेशानियां भी कुछ मामलों में जिंक की कमी से संबंधित हो सकती हैं। हालांकि इन लक्षणों के पीछे अन्य स्वास्थ्य कारण भी हो सकते हैं।

    विटामिन B12 शरीर की नसों और लाल रक्त कोशिकाओं के लिए महत्वपूर्ण है। इसकी कमी लंबे समय तक रहने पर कमजोरी के साथ हाथ पैरों में झनझनाहट या सुन्नपन जैसी समस्याएं भी हो सकती हैं। कुछ लोगों में एकाग्रता और याददाश्त से जुड़ी परेशानियां भी देखी जा सकती हैं। इसलिए ऐसे लक्षण लगातार बने रहने पर चिकित्सकीय सलाह लेना जरूरी है।

    पोषक तत्वों की कमी से बचने के लिए संतुलित और विविध आहार लेना महत्वपूर्ण है। भोजन में दालें हरी सब्जियां साबुत अनाज दूध और उससे बने खाद्य पदार्थ अंडे मांस या अन्य उपलब्ध पोषक स्रोतों को शामिल किया जा सकता है। यदि किसी व्यक्ति को लंबे समय से कमजोरी बाल झड़ने घाव देर से भरने चक्कर या हाथ पैरों में झनझनाहट जैसी समस्या हो रही है तो खुद से सप्लीमेंट लेने के बजाय डॉक्टर से सलाह लेकर जरूरी जांच कराना बेहतर है। सही कारण की पहचान के बाद ही उचित उपचार और पोषण की योजना बनाई जानी चाहिए।

  • पानी में हाथ रखते ही क्यों सिकुड़ जाती हैं उंगलियां? जानें इसके पीछे का विज्ञान और सेहत से जुड़े संकेत

    पानी में हाथ रखते ही क्यों सिकुड़ जाती हैं उंगलियां? जानें इसके पीछे का विज्ञान और सेहत से जुड़े संकेत


    नई दिल्ली । अक्सर नहाते समय कपड़े धोते समय या स्विमिंग पूल में घंटों बिताने के बाद हम देखते हैं कि हमारे हाथ और पैरों की उंगलियों की त्वचा अजीब तरह से सिकुड़ गई है। इसे देखकर मन में सवाल उठना लाजिमी है कि आखिर पानी के संपर्क में आते ही शरीर ऐसा व्यवहार क्यों करता है मेडिकल भाषा में फिंगर्स प्रून कही जाने वाली यह स्थिति ज्यादातर सामान्य होती है, लेकिन कभी-कभी यह आपके शरीर के भीतर पनप रही किसी बीमारी का अलार्म भी हो सकती है।

    क्यों आती हैं उंगलियों पर झुर्रियां

    वैज्ञानिकों का मानना है कि पानी में उंगलियों का सिकुड़ना केवल एक भौतिक क्रिया नहीं बल्कि हमारे स्वायत्त तंत्रिका तंत्र की एक सोची-समझी प्रतिक्रिया है। जब हम लंबे समय तक पानी में रहते हैं तो मस्तिष्क नसों को संकेत भेजता है जिससे त्वचा के नीचे की रक्त कोशिकाएं सिकुड़ जाती हैं। ऐसा होने से उंगलियों की सतह पर झुर्रियां बन जाती हैं। दिलचस्प बात यह है कि यह झुर्रियां पानी के भीतर गीली चीजों पर बेहतर पकड़ बनाने में मदद करती हैं ठीक उसी तरह जैसे टायरों की ग्रिप सड़क पर फिसलने से बचाती है।

    कब यह चिंता का विषय है

    हालांकि पानी से बाहर आने के कुछ देर बाद उंगलियां सामान्य हो जाती हैं लेकिन अगर यह समस्या बिना पानी के भी हो रही है या लंबे समय तक बनी रहती है तो यह नीचे दी गई स्वास्थ्य समस्याओं का संकेत हो सकती है डायबिटीज हाई ब्लड शुगर के कारण शरीर की पसीने की ग्रंथियां और तंत्रिकाएं प्रभावित होती हैं। इससे त्वचा की प्राकृतिक नमी खत्म हो जाती है और उंगलियों में समय से पहले या बार-बार सिकुड़न दिखने लगती है। यदि इसके साथ आपको अधिक प्यास लगना, धुंधली नजर या बार-बार पेशाब आने जैसी शिकायत है, तो शुगर की जांच जरूर कराएं।

    विटामिन B12 की कमी: शरीर में विटामिन B12 की कमी नसों के कामकाज को प्रभावित करती है। इसकी कमी से उंगलियों में बेवजह सिकुड़न हाथों-पैरों में झुनझुनी, थकान और एनीमिया जैसी समस्याएं हो सकती हैं। शाकाहारी लोग इसकी पूर्ति के लिए दूध दही और पनीर का सेवन बढ़ा सकते हैं। डिहाइड्रेशन और थायराइड शरीर में पानी की भारी कमी होने पर त्वचा अपनी लोच खो देती है, जिससे वह झुर्रीदार दिखने लगती है। वहीं थायराइड विकार भी त्वचा के मेटाबॉलिज्म को प्रभावित कर उसे ड्राई और सिकुड़ा हुआ बना सकते हैं।

    सावधानी कब बरतें

    यदि उंगलियों के सिकुड़ने के साथ आपको निम्नलिखित लक्षण महसूस हों तो डॉक्टर से परामर्श लेना अनिवार्य है हाथों-पैरों में तेज दर्द या जकड़न। त्वचा का असामान्य रूप से मोटा होना। बिना पानी के संपर्क में आए ही उंगलियों का बार-बार सिकुड़ना। घाव भरने में देरी या बार-बार त्वचा संक्रमण।