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  • चुनावी भाषण मामले में अभिषेक बनर्जी को कोर्ट का निर्देश, 8 जुलाई को देना होगा वॉयस सैंपल

    चुनावी भाषण मामले में अभिषेक बनर्जी को कोर्ट का निर्देश, 8 जुलाई को देना होगा वॉयस सैंपल


    नई दिल्ली। तृणमूल कांग्रेस (TMC) के सांसद अभिषेक बनर्जी को चुनावी भाषण से जुड़े मामले में अदालत से झटका लगा है। पश्चिम बंगाल की एक अदालत ने उन्हें 8 जुलाई को वॉयस सैंपल देने का निर्देश दिया है। यह आदेश विधानसभा चुनाव प्रचार के दौरान दिए गए कथित धमकी भरे भाषण की जांच के सिलसिले में जारी किया गया है।

    अप्रैल में दर्ज हुई थी FIR
    यह मामला अप्रैल में दिए गए कथित भाषण से जुड़ा है, जिसके बाद बिधाननगर नॉर्थ थाने में एफआईआर दर्ज की गई थी। मामले की जांच कर रही पुलिस ने अदालत से अभिषेक बनर्जी का वॉयस सैंपल लेने की अनुमति मांगी थी। इस पर उत्तर 24 परगना जिले की अदालत ने उन्हें 8 जुलाई को अदालत में उपस्थित होकर अपनी आवाज का नमूना देने का आदेश दिया।

    मजिस्ट्रेट के सामने लिया जाएगा वॉयस सैंपल
    सूत्रों के अनुसार, सरकारी वकील मोहम्मद सबीर अली ने बताया कि अदालत के निर्देश के मुताबिक अभिषेक बनर्जी बिधाननगर कोर्ट में मजिस्ट्रेट के समक्ष अपना वॉयस सैंपल देंगे। इसके बाद पुलिस जांच को आगे बढ़ाएगी और वॉयस सैंपल का उपयोग साक्ष्यों के सत्यापन के लिए किया जाएगा।

    BNSS की धारा 349 के तहत पुलिस ने मांगी थी अनुमति
    पुलिस ने भारतीय नागरिक सुरक्षा संहिता (BNSS) की धारा 349 के तहत अदालत से वॉयस सैंपल लेने की अनुमति मांगी थी। इस प्रावधान के अनुसार, मजिस्ट्रेट किसी भी व्यक्ति को जांच या आपराधिक मामले की सुनवाई के लिए हस्ताक्षर, लिखावट या वॉयस सैंपल देने का निर्देश दे सकता है। इसी आधार पर अदालत ने यह आदेश पारित किया।

    हाईकोर्ट में दी थी चुनौती
    अभिषेक बनर्जी ने पुलिस के वॉयस सैंपल संबंधी नोटिस को कलकत्ता हाईकोर्ट में चुनौती दी थी। उन्होंने एफआईआर रद्द करने की भी मांग की थी। हालांकि, हाईकोर्ट ने नोटिस पर रोक लगाने से इनकार करते हुए कोई अंतरिम राहत नहीं दी।

    जस्टिस तीर्थंकर घोष ने यह कहते हुए याचिका दूसरी पीठ को स्थानांतरित कर दी कि इसी प्रकार का मामला पहले से हाईकोर्ट की दूसरी बेंच के समक्ष लंबित है।

    31 जुलाई तक कठोर कार्रवाई से मिली है राहत
    मामले की सुनवाई फिलहाल जस्टिस सौगत भट्टाचार्य की पीठ के समक्ष चल रही है। अदालत ने 21 मई को अभिषेक बनर्जी को इस एफआईआर के संबंध में 31 जुलाई तक किसी भी कठोर कार्रवाई से अंतरिम राहत प्रदान की थी। हालांकि, वॉयस सैंपल देने के ताजा निर्देश के बाद मामले की जांच अब अगले चरण में प्रवेश करेगी।

  • दिल्ली विधानसभा विवाद मामले में AAP का जवाब, आतिशी के वॉइस सैंपल की नहीं जरूरत, बस कान चाहिए!

    दिल्ली विधानसभा विवाद मामले में AAP का जवाब, आतिशी के वॉइस सैंपल की नहीं जरूरत, बस कान चाहिए!


    नई दिल्ली।  दिल्ली विधानसभा में नेता विपक्ष और AAP की नेता आतिशी को लेकर जारी विवाद अब सियासी घमासान का रूप ले चुका है। भाजपा नेता और दिल्ली सरकार के मंत्री मनजिंदर सिंह सिरसा ने सवाल उठाया कि जब आतिशी का वॉइस सैंपल लिया ही नहीं गया, तो वीडियो की फॉरेंसिक जांच कैसे संभव हुई। सिरसा का आरोप है कि आतिशी ने गुरुओं का अपमान किया, लेकिन पंजाब पुलिस मामले में उनके झूठ को छुपाने का काम कर रही है।
    उन्होंने कहा कि दिल्ली में उनके एक अधिकारी की ऑडियो जांच इस आधार पर रोकी गई थी कि वॉइस सैंपल नहीं मिला, जबकि पंजाब पुलिस बिना वॉइस सैंपल के ही जांच कर रही है।

    इस पर AAP ने शुक्रवार को जवाब दिया। पार्टी के संयोजक और पूर्व मंत्री सौरभ भारद्वाज ने प्रेस कॉन्फ्रेंस में स्पष्ट कहा कि वीडियो में विवादित गुरु शब्द का इस्तेमाल नहीं हुआ, इसलिए किसी वॉइस सैंपल की जरूरत ही नहीं थी। उन्होंने कहा, “सिरसा जी कह रहे थे कि आतिशी का वॉइस सैंपल लिया नहीं गया, लेकिन इसमें वॉइस सैंपल की क्या जरूरत? किसी के वॉइस में गुरु शब्द ही नहीं आ रहा है। इसके लिए सिर्फ कान चाहिए। अगर सिरसा जी ध्यान से सुनेंगे, तो उन्हें भी सुनाई दे जाएगा।

    सौरभ भारद्वाज ने प्रिवलेज कमिटी के लेटर के मीडिया तक लीक होने पर भी सवाल उठाया। उन्होंने कहा कि यदि यह लीक उनके दफ्तर से हुआ है, तो कार्रवाई होनी चाहिए। उन्होंने आरोप लगाया कि यह मीडिया के लिए किया जा रहा है, न कि प्रिवलेज कमिटी के लिए।

    विश्लेषकों का कहना है कि इस मामले में सियासी टकराव और बढ़ गया है। BJP और AAP दोनों ने अपने-अपने पक्ष में बयान जारी किए हैं। सिरसा का आरोप है कि AAP अपने झूठ और विवाद को छुपाने के लिए फॉरेंसिक जांच का राजनीतिक इस्तेमाल कर रही है, जबकि AAP का जवाब है कि जांच साफ-सुथरी और कानूनी तौर पर वैध है, क्योंकि वीडियो में विवादित शब्द मौजूद ही नहीं है।

    इस विवाद ने दिल्ली विधानसभा में राजनीतिक माहौल को और गरम कर दिया है। जनता और विपक्ष दोनों ही इस मुद्दे पर निगाह बनाए हुए हैं, और सियासी घमासान अब और तेज होने की संभावना है।