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  • रूस से डीजल खरीदेंगे ट्रंप, जेलेंस्की भड़के, बोले- पुतिन को फायदा देना युद्ध में निवेश जैसा

    रूस से डीजल खरीदेंगे ट्रंप, जेलेंस्की भड़के, बोले- पुतिन को फायदा देना युद्ध में निवेश जैसा


    वॉशिंगटन। अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने दावा किया है कि रूस अमेरिका और वैश्विक बाजार को तत्काल 3 लाख मीट्रिक टन से अधिक डीजल की आपूर्ति करने पर सहमत हो गया है। ट्रंप के मुताबिक, नवंबर में रूस 5 लाख मीट्रिक टन डीजल और देगा, जिसके बाद 10 लाख मीट्रिक टन की अतिरिक्त आपूर्ति की जाएगी। ईंधन की बढ़ती कीमतों पर काबू पाने की कोशिशों के बीच हुए इस ऐलान पर यूक्रेन के राष्ट्रपति वोलोडिमिर जेलेंस्की ने तीखी प्रतिक्रिया दी है। उन्होंने इसे रूस के खिलाफ युद्ध रोकने के प्रयासों को कमजोर करने वाला फैसला बताते हुए कहा कि मॉस्को को पेट्रोलियम उत्पाद बेचने से मिलने वाला पैसा यूक्रेन के खिलाफ जंग जारी रखने में इस्तेमाल हो सकता है।

    ट्रंप ने पुतिन से बातचीत के बाद किया समझौते का ऐलान
    ट्रंप ने रूसी राष्ट्रपति व्लादिमीर पुतिन के साथ बातचीत के बाद इस समझौते की घोषणा की। उन्होंने सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म ‘ट्रुथ सोशल’ पर पोस्ट कर कहा कि रूस अमेरिका और वैश्विक बाजार को डीजल की आपूर्ति करेगा। उनके मुताबिक, शुरुआती खेप के बाद नवंबर में 5 लाख मीट्रिक टन और फिर 10 लाख मीट्रिक टन डीजल दिया जाएगा।

    यह घोषणा ऐसे समय में हुई है, जब ट्रंप प्रशासन 3 नवंबर को होने वाले मिडटर्म चुनाव से पहले ईंधन की बढ़ती कीमतों को कम करने की कोशिश कर रहा है। हालांकि, इस आपूर्ति समझौते की शर्तों और इसे लागू करने की समयसीमा को लेकर विस्तृत जानकारी सामने नहीं आई है।

    जेलेंस्की बोले- रूस को पैसा देना युद्ध में निवेश जैसा
    यूक्रेन के राष्ट्रपति वोलोडिमिर जेलेंस्की ने रूस के साथ हुए इस समझौते की आलोचना की। उनका कहना है कि मॉस्को को पेट्रोलियम उत्पाद बेचने का अवसर देने से उसे यूक्रेन के खिलाफ युद्ध जारी रखने के लिए अतिरिक्त आर्थिक संसाधन मिल सकते हैं।

    जेलेंस्की ने सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म X पर लिखा कि पुतिन को इस तरह का लाभ देने से सभ्य दुनिया को न तो शांति मिलेगी और न ही कोई फायदा होगा। उन्होंने आरोप लगाया कि रूस इस डीजल से मिलने वाले पैसे का इस्तेमाल और अधिक हिंसा तथा धोखे के लिए करेगा।

    जेलेंस्की के मुताबिक, रूस की आमदनी बढ़ाने वाला ऐसा फैसला युद्ध खत्म करने के लिए चल रही कूटनीतिक कोशिशों को कमजोर कर सकता है। उन्होंने कहा कि मौजूदा समय में मॉस्को पर दबाव बढ़ाने की जरूरत है, ताकि वह युद्ध समाप्त करने के लिए तैयार हो।

    अमेरिका में मौजूद यूक्रेनी प्रतिनिधिमंडल के बीच हुआ ऐलान
    इस समझौते की घोषणा उस समय की गई, जब यूक्रेन का एक प्रतिनिधिमंडल रूस के साथ जारी संघर्ष का समाधान तलाशने के लिए अमेरिका में मौजूद था। ऐसे में ट्रंप के ऐलान ने यूक्रेन की चिंताएं बढ़ा दी हैं।

    जेलेंस्की ने इस फैसले को मजबूत साझेदारों की ओर से लिया गया कमजोर निर्णय बताया। उन्होंने यह भी आशंका जताई कि यूक्रेनी प्रतिनिधिमंडल का इस्तेमाल केवल एक मोहरे के रूप में किया जा रहा है।

    उन्होंने कहा, “मुझे लगता है कि हमारी टीम का इस्तेमाल सिर्फ एक मोहरे के रूप में किया जा रहा है। यह सही नहीं है और साझेदारों को एक-दूसरे के साथ ऐसा व्यवहार नहीं करना चाहिए।”

    ईंधन की कीमतें घटाने की कोशिश और रूस को मिलने वाला आर्थिक लाभ
    ट्रंप प्रशासन के सामने ईंधन की बढ़ती कीमतों को नियंत्रित करने की चुनौती है। रूस से डीजल की आपूर्ति बढ़ने पर अमेरिकी बाजार को अतिरिक्त ईंधन मिल सकता है, लेकिन इस कदम का भू-राजनीतिक असर भी महत्वपूर्ण है।

    जेलेंस्की की आपत्ति का मुख्य आधार यही है कि रूस को पेट्रोलियम उत्पादों की बिक्री से मिलने वाली कमाई उसके युद्ध संबंधी खर्चों में मदद कर सकती है। उनके मुताबिक, रूस को आर्थिक लाभ देने के बजाय उस पर दबाव बनाना चाहिए, ताकि युद्ध समाप्त करने की संभावनाएं मजबूत हों।

    इस तरह डीजल आपूर्ति का यह प्रस्ताव एक ओर अमेरिकी ईंधन बाजार से जुड़ा है, तो दूसरी ओर रूस-यूक्रेन युद्ध और शांति वार्ता पर इसके संभावित प्रभाव को लेकर विवाद खड़ा कर रहा है।

  • भारत पर 100% टैरिफ का रास्ता साफ, जेलेंस्की ने अमेरिका के फैसले का किया खुलकर समर्थन

    भारत पर 100% टैरिफ का रास्ता साफ, जेलेंस्की ने अमेरिका के फैसले का किया खुलकर समर्थन


    नई दिल्ली । अमेरिका की ओर से रूस से तेल खरीदने वाले देशों पर भारी टैरिफ लगाने का रास्ता साफ होने के बाद भारत से जुड़ी इस खबर ने अंतरराष्ट्रीय स्तर पर चर्चा तेज कर दी है। अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने Lindsey O Graham Sanctioning Russia and Iran Act of 2026 पर हस्ताक्षर कर इसे कानून का रूप दे दिया है। इस कानून के तहत रूस से बड़ी मात्रा में तेल और गैस खरीदने वाले देशों पर 100 फीसदी तक अतिरिक्त टैरिफ लगाने का अधिकार अमेरिकी राष्ट्रपति को दिया गया है। भारत और चीन जैसे बड़े रूसी तेल खरीदार इस प्रावधान के दायरे में आ सकते हैं। हालांकि अभी यह कहना सही नहीं होगा कि भारत पर 100 फीसदी टैरिफ लागू हो चुका है। कानून अमेरिकी प्रशासन को ऐसा कदम उठाने का अधिकार देता है।

    इस पूरे घटनाक्रम के बीच यूक्रेन के राष्ट्रपति वोलोडिमिर जेलेंस्की ने अमेरिकी कदम का समर्थन किया है। न्यूयॉर्क में अमेरिकी सांसदों से मुलाकात के दौरान जेलेंस्की ने रूस पर दबाव बढ़ाने वाले इस कानून को लेकर आभार जताया। उन्होंने कहा कि इस तरह के कदम युद्ध को खत्म करने और शांति तथा सुरक्षा की दिशा में आगे बढ़ने में मदद कर सकते हैं। जेलेंस्की की प्रतिक्रिया ऐसे समय में आई है जब अमेरिका रूस की अर्थव्यवस्था पर दबाव बढ़ाने के लिए अलग अलग आर्थिक उपायों पर जोर दे रहा है।

    इस कानून का मुख्य निशाना रूस है। इसमें रूस के खिलाफ प्रतिबंधों को मजबूत करने के साथ उसके ऊर्जा क्षेत्र और उससे जुड़े कारोबार पर दबाव बढ़ाने का प्रावधान है। कानून के तहत रूस से बड़ी मात्रा में ऊर्जा खरीदने वाले देशों पर भी टैरिफ लगाया जा सकता है। अमेरिकी संसद के दोनों सदनों से पारित होने के बाद राष्ट्रपति ट्रंप ने 18 सितंबर को इस पर हस्ताक्षर किए। व्हाइट हाउस के अनुसार कानून रूस के खिलाफ वैधानिक प्रतिबंधों और टैरिफ संबंधी अधिकारों का विस्तार करता है।

    भारत के लिए इस कानून का महत्व इसलिए अधिक है क्योंकि रूस लंबे समय से भारत के प्रमुख कच्चे तेल आपूर्तिकर्ताओं में शामिल है। भारत अपनी ऊर्जा जरूरतों को पूरा करने के लिए कई देशों से कच्चा तेल खरीदता है और रूस भी इसमें महत्वपूर्ण हिस्सेदारी रखता है। हालिया आंकड़ों के अनुसार अगस्त 2026 में भारत का रूस से तेल आयात करीब 16.5 फीसदी घटकर लगभग 21 लाख बैरल प्रतिदिन रहा। इसके बावजूद रूस भारत का प्रमुख तेल आपूर्तिकर्ता बना हुआ है।

    अमेरिका का तर्क है कि रूस से तेल खरीदने वाले देशों के खिलाफ आर्थिक दबाव बढ़ाकर मॉस्को पर यूक्रेन युद्ध को लेकर दबाव बनाया जा सकता है। वहीं भारत ने अपनी ऊर्जा सुरक्षा को प्राथमिकता देने की बात कही है। भारतीय पक्ष पहले ही संकेत दे चुका है कि ऐसे अमेरिकी कदमों का असर भारत अमेरिका संबंधों और वैश्विक ऊर्जा बाजार पर पड़ सकता है। भारत ने यह भी स्पष्ट किया है कि देश की ऊर्जा जरूरतों और राष्ट्रीय हितों को ध्यान में रखते हुए फैसले लिए जाएंगे।

    इस घटनाक्रम में अब सबसे महत्वपूर्ण बात यह होगी कि अमेरिकी प्रशासन कानून में मिले अधिकारों का इस्तेमाल किस तरह करता है। फिलहाल कानून लागू हो चुका है लेकिन भारत पर 100 फीसदी टैरिफ लगाए जाने की घोषणा नहीं हुई है। इसलिए आने वाले दिनों में अमेरिकी प्रशासन के फैसले और भारत की प्रतिक्रिया पर पूरी दुनिया की नजर रहेगी। साथ ही इसका असर कच्चे तेल की कीमतों वैश्विक ऊर्जा आपूर्ति और भारत अमेरिका व्यापार संबंधों पर भी पड़ सकता है।

  • ट्रंप से न्यूयॉर्क में मिलेंगे जेलेंस्की, फोन पर बातचीत के बाद बोले- यह मुलाकात बहुत कुछ बदल सकती है

    ट्रंप से न्यूयॉर्क में मिलेंगे जेलेंस्की, फोन पर बातचीत के बाद बोले- यह मुलाकात बहुत कुछ बदल सकती है


    नई दिल्ली। रूस-यूक्रेन युद्ध के बीच यूक्रेन के राष्ट्रपति वोलोडिमिर जेलेंस्की ने अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप से फोन पर बातचीत की है। बातचीत के बाद जेलेंस्की ने इसे अहम बताते हुए कहा कि दोनों देशों के बीच शांति की दिशा में कई जरूरी कदमों पर काम चल रहा है। उन्होंने बताया कि वह जल्द ही ट्रंप से न्यूयॉर्क में मुलाकात करेंगे। जेलेंस्की के मुताबिक, यह बैठक मौजूदा हालात में काफी कुछ बदल सकती है और इस समय मजबूत कूटनीतिक गतिविधियां चल रही हैं।

    ट्रंप से बातचीत को बताया अहम

    जेलेंस्की ने सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म एक्स पर ट्रंप के साथ हुई बातचीत की जानकारी साझा की। उन्होंने कहा कि दोनों नेताओं के बीच कई महत्वपूर्ण मुद्दों पर चर्चा हुई। उन्होंने यह भी बताया कि बातचीत के दौरान न्यूयॉर्क में आमने-सामने मुलाकात करने पर सहमति बनी है।

    जेलेंस्की ने कहा कि मौजूदा समय में कूटनीतिक स्तर पर गतिविधियां तेज हैं और दोनों पक्ष शांति से जुड़े मुद्दों पर आगे बढ़ने के रास्ते तलाश रहे हैं।

    अमेरिकी प्रतिनिधिमंडल के कीव दौरे का किया जिक्र

    यूक्रेनी राष्ट्रपति ने हाल ही में अमेरिकी प्रतिनिधिमंडल के कीव दौरे का भी उल्लेख किया। उन्होंने ट्रंप को इसके लिए धन्यवाद देते हुए कहा कि स्टीव विटकॉफ और जेरेड कुशनर की कीव यात्रा से अमेरिकी पक्ष को यूक्रेन के जमीनी हालात को करीब से देखने और समझने का अवसर मिला।

    जेलेंस्की के अनुसार, इस दौरान सुरक्षा और शांति से जुड़े विभिन्न मुद्दों पर विस्तार से चर्चा हुई। उनका कहना है कि दोनों पक्षों के बीच बातचीत को आगे बढ़ाने के लिए यूक्रेनी और अमेरिकी टीमें मिलकर काम कर रही हैं।

    शांति का रास्ता तलाशना यूक्रेन की पहली प्राथमिकता

    जेलेंस्की ने कहा कि यूक्रेन के लिए शांति का रास्ता तलाशना सबसे बड़ी प्राथमिकता है। उन्होंने बताया कि तनाव कम करने और सुरक्षा से जुड़े मुद्दों के समाधान के लिए कई प्रस्तावों पर काम किया जा रहा है।

    इनमें ऊर्जा सुरक्षा, खाद्य सुरक्षा और लोगों की जान की सुरक्षा को प्रमुख मुद्दों में शामिल किया गया है। जेलेंस्की ने कहा कि यूक्रेन की टीम अमेरिकी टीम के साथ मिलकर काम कर रही है और देश इस दिशा में कड़े कदम उठाने के लिए तैयार है।

    लिंडसे ग्राहम विधेयक को कानून बनाने पर ट्रंप को धन्यवाद

    बातचीत के दौरान जेलेंस्की ने लिंडसे ग्राहम विधेयक को कानून का रूप देने के लिए भी अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप का आभार जताया। उन्होंने कहा कि सभी पक्ष इस बात पर सहमत हैं कि शांति स्थापित की जानी चाहिए।

    यूक्रेनी राष्ट्रपति ने रूस-यूक्रेन संकट के दौरान यूक्रेन का समर्थन करने वाले वैश्विक सहयोगियों और मदद के लिए आगे आने वाले लोगों को भी धन्यवाद दिया।

    अब इस बातचीत के बाद दोनों नेताओं की न्यूयॉर्क में होने वाली मुलाकात पर नजर है। जेलेंस्की ने जिस तरह इस बैठक को ‘बहुत कुछ बदलने’ वाली मुलाकात बताया है, उससे शांति प्रयासों को लेकर इस बैठक को महत्वपूर्ण माना जा रहा है। हालांकि, बैठक के बाद क्या ठोस कदम सामने आते हैं, यह आगे की बातचीत पर निर्भर करेगा।

  • पुतिन के बड़े सैन्य प्लान से मचा हड़कंप, 5 लाख सैनिकों की तैयारी के बीच यूक्रेन युद्ध में परमाणु हमले का खतरा?

    पुतिन के बड़े सैन्य प्लान से मचा हड़कंप, 5 लाख सैनिकों की तैयारी के बीच यूक्रेन युद्ध में परमाणु हमले का खतरा?


    नई दिल्ली। यूक्रेन और रूस के बीच जारी युद्ध अब एक बार फिर बेहद खतरनाक मोड़ की ओर बढ़ता दिखाई दे रहा है। यूक्रेनी राष्ट्रपति वोलोदिमिर जेलेंस्की ने खुफिया रिपोर्टों के हवाले से दावा किया है कि रूस बड़े पैमाने पर नए लड़ाकों को जुटाने की तैयारी कर रहा है। बताया जा रहा है कि आने वाले कुछ हफ्तों में करीब पांच लाख लोगों को सैन्य अभियान में शामिल करने की योजना बनाई जा सकती है। अगर यह दावा सही साबित होता है तो युद्ध की दिशा और उसकी तीव्रता दोनों में बड़ा बदलाव देखने को मिल सकता है।

    जेलेंस्की के मुताबिक रूसी राष्ट्रपति व्लादिमीर पुतिन युद्ध रोकने की तैयारी में नहीं हैं बल्कि संघर्ष को आगे बढ़ाने के लिए बड़े स्तर पर मोबिलाइजेशन की योजना बना रहे हैं। यूक्रेनी खुफिया एजेंसियों की रिपोर्ट के अनुसार यह प्रक्रिया सितंबर में होने वाले रूसी संसदीय चुनावों के बाद शुरू की जा सकती है। जेलेंस्की का दावा है कि रूस इस बार खुले तौर पर बड़ी संख्या में लोगों की भर्ती करने से बच सकता है क्योंकि इससे रूसी समाज में असंतोष बढ़ने का खतरा है।

    यूक्रेनी राष्ट्रपति ने यह भी चेतावनी दी है कि इतनी बड़ी संख्या में लोगों को कम समय में पर्याप्त सैन्य प्रशिक्षण देना मुश्किल होगा। ऐसे में बड़ी संख्या में कम प्रशिक्षित सैनिकों को युद्ध के मैदान में भेजे जाने की आशंका है। इससे संघर्ष और ज्यादा खूनी हो सकता है और दोनों पक्षों में जनहानि बढ़ सकती है। जेलेंस्की के अनुसार रूस की ऐसी तैयारी इस बात का संकेत है कि मॉस्को फिलहाल युद्ध को समाप्त करने के बजाय सैन्य दबाव बढ़ाने की रणनीति पर काम कर रहा है।

    इसी बीच तुर्की के विदेश मंत्री हाकन फिदान ने भी यूक्रेन युद्ध को लेकर बेहद गंभीर चेतावनी दी है। उन्होंने आशंका जताई है कि अगर यूक्रेन रूसी क्षेत्र के भीतर लंबी दूरी के हमलों को और प्रभावी बनाता है और युद्ध की पारंपरिक सीमाएं लगातार टूटती जाती हैं तो रूस अपने सबसे खतरनाक विकल्पों पर विचार कर सकता है। फिदान ने परमाणु हथियारों की आशंका का जिक्र करते हुए कहा कि ऐसी स्थिति बेहद खतरनाक हो सकती है।

    रूस और यूक्रेन के बीच हाल के दिनों में लंबी दूरी के ड्रोन और मिसाइल हमलों में भी तेजी देखी गई है। रूस के तातारस्तान क्षेत्र में हुए एक यूक्रेनी ड्रोन हमले में कई लोगों के मारे जाने की खबर सामने आई है। इसे रूस के भीतर हुए गंभीर हमलों में से एक माना जा रहा है। दूसरी ओर यूक्रेन के खार्किव क्षेत्र में रूसी हमले में भी लोगों की मौत की जानकारी सामने आई है।

    रूस और यूक्रेन दोनों ही एक दूसरे के इलाकों में लगातार ड्रोन हमले कर रहे हैं। रूसी रक्षा मंत्रालय ने बड़े पैमाने पर यूक्रेनी ड्रोन को मार गिराने का दावा किया है जबकि यूक्रेन ने भी रूस की ओर से बड़ी संख्या में ड्रोन दागे जाने की बात कही है। दोनों पक्षों के इन दावों के बीच जमीन से लेकर आसमान तक संघर्ष लगातार तेज होता जा रहा है।

    अगर रूस वास्तव में पांच लाख नए लड़ाकों को जुटाने की दिशा में आगे बढ़ता है तो इसका असर केवल यूक्रेन तक सीमित नहीं रहेगा। इससे यूरोप की सुरक्षा व्यवस्था पर दबाव बढ़ सकता है और पश्चिमी देशों की सैन्य रणनीति में भी बदलाव की जरूरत पड़ सकती है। सबसे बड़ी चिंता यह है कि यदि युद्ध और ज्यादा गहरा हुआ तो परमाणु हथियारों की आशंका भी अंतरराष्ट्रीय तनाव को खतरनाक स्तर तक पहुंचा सकती है। फिलहाल पांच लाख सैनिकों की संभावित लामबंदी का दावा यूक्रेनी खुफिया रिपोर्टों पर आधारित है और इसकी स्वतंत्र पुष्टि जरूरी है लेकिन इस खबर ने रूस यूक्रेन युद्ध को लेकर पूरी दुनिया की चिंता जरूर बढ़ा दी है।

  • कीव पर रूस का बड़ा हमला: ओरेशनिक हाइपरसोनिक मिसाइल से दहला यूक्रेन, 4 की मौत, 80 से ज्यादा घायल

    कीव पर रूस का बड़ा हमला: ओरेशनिक हाइपरसोनिक मिसाइल से दहला यूक्रेन, 4 की मौत, 80 से ज्यादा घायल

    नई दिल्ली(New Delhi)।
    यूक्रेन की राजधानी कीव एक बार फिर रूस के भीषण मिसाइल और ड्रोन हमलों से दहल उठी। शनिवार और रविवार की दरमियानी रात हुए इस हमले में कम से कम 4 लोगों की मौत हो गई, जबकि 80 से अधिक लोग घायल बताए जा रहे हैं। लगातार सायरन बजते रहे और पूरे शहर में धुएं का गुबार देखा गया, जिससे हालात बेहद तनावपूर्ण हो गए।

    यूक्रेन के राष्ट्रपति वोलोदिमिर जेलेंस्की ने दावा किया है कि रूस ने इस हमले में ओरेशनिक हाइपरसोनिक बैलिस्टिक मिसाइल का इस्तेमाल किया है। यह वही मिसाइल है जो परमाणु और पारंपरिक दोनों तरह के हथियार ले जाने में सक्षम मानी जाती है। जेलेंस्की के अनुसार, यह हमला कीव क्षेत्र के बिला त्सेर्कवा जिले में किया गया, हालांकि लक्ष्य को लेकर स्पष्ट जानकारी सामने नहीं आई है।

    यह तीसरी बार है जब रूस ने इस अत्याधुनिक ओरेशनिक मिसाइल का इस्तेमाल यूक्रेन युद्ध में किया है। इससे पहले नवंबर 2024 में निप्रो शहर और जनवरी में लवीव क्षेत्र पर इसी तरह के हमले किए जा चुके हैं।

    रूसी हमले के जवाब में यूक्रेन पर मिसाइलों और ड्रोन की बौछार की गई, जिससे कीव के कई सरकारी दफ्तर, आवासीय इमारतें, स्कूल और गोदाम क्षतिग्रस्त हो गए। कीव के सैन्य प्रशासन प्रमुख के अनुसार, शहर के कम से कम नौ जिलों में नुकसान दर्ज किया गया है।

    मेयर विटाली क्लिट्स्को ने बताया कि शेवचेंको जिले में एक स्कूल भवन पर भी हमला हुआ, जहां लोग शरण लिए हुए थे। वहीं कई सुपरमार्केट और औद्योगिक गोदाम भी इस हमले की चपेट में आ गए।

    विशेषज्ञों के अनुसार, ओरेशनिक मिसाइल रूस की सबसे खतरनाक हाइपरसोनिक बैलिस्टिक मिसाइलों में से एक है, जो मैक 10 यानी ध्वनि की गति से लगभग 10 गुना तेज गति से लक्ष्य पर हमला कर सकती है। इसकी क्षमता इतनी अधिक है कि यह जमीन के नीचे कई मंजिल गहराई में बने बंकरों को भी नष्ट करने में सक्षम मानी जाती है। इसकी मारक क्षमता करीब 5500 किलोमीटर तक बताई जाती है, जिससे यह परमाणु हमले के लिहाज से भी बेहद खतरनाक हथियार बन जाती है।

    कीव पर हुए इस हमले के बाद एक बार फिर रूस-यूक्रेन युद्ध में तनाव चरम पर पहुंच गया है और आगे और बड़े हमलों की आशंका जताई जा रही है।

  • कीव पर पुतिन का ‘ब्रह्मास्त्र’ हमला: रूस की ओरेशनिक हाइपरसोनिक मिसाइल से दहला यूक्रेन, दर्जनों हताहत

    कीव पर पुतिन का ‘ब्रह्मास्त्र’ हमला: रूस की ओरेशनिक हाइपरसोनिक मिसाइल से दहला यूक्रेन, दर्जनों हताहत




    नई दिल्ली(New Delhi)।
    रूस और यूक्रेन के बीच जारी युद्ध में एक बार फिर भारी तनाव देखने को मिला है, जब शनिवार और रविवार की दरमियानी रात रूस ने यूक्रेन की राजधानी कीव पर मिसाइलों और ड्रोन से बड़ा हमला किया। इस हमले में कम से कम 4 लोगों की मौत और 80 से अधिक लोगों के घायल होने की पुष्टि की गई है। पूरे शहर में रातभर हवाई हमले के सायरन गूंजते रहे और कई इलाकों में धुएं का गुबार देखा गया।

    यूक्रेन के राष्ट्रपति वोलोदिमिर जेलेंस्की ने दावा किया है कि इस हमले में रूस ने ओरेशनिक हाइपरसोनिक बैलिस्टिक मिसाइल का इस्तेमाल किया। उनके अनुसार, यह हमला कीव क्षेत्र के बिला त्सेर्कवा इलाके में किया गया, हालांकि लक्ष्य को लेकर स्पष्ट जानकारी नहीं दी गई है। यह इस मिसाइल का युद्ध में तीसरा उपयोग बताया जा रहा है।

    स्थानीय प्रशासन के मुताबिक, कीव के कम से कम नौ जिलों में आवासीय भवनों, स्कूलों, सुपरमार्केट और गोदामों को नुकसान पहुंचा है। मेयर विटाली क्लिट्स्को ने बताया कि एक स्कूल इमारत भी प्रभावित हुई, जहां लोग शरण लिए हुए थे। कई जगहों पर रिहायशी इलाकों में भारी तबाही की खबर है।

    रूस ने यह हमला यूक्रेन के ड्रोन हमलों के जवाब में किया है। हमले के दौरान राजधानी कीव के मध्य इलाकों सहित कई हिस्सों में लगातार मिसाइल और ड्रोन हमले जारी रहे, जिससे जनजीवन पूरी तरह प्रभावित हुआ।

    ओरेशनिक मिसाइल रूस की अत्याधुनिक हाइपरसोनिक बैलिस्टिक मिसाइल मानी जाती है, जो मैक 10 यानी ध्वनि की गति से लगभग 10 गुना तेज गति से उड़ान भरने में सक्षम है। यह मिसाइल परमाणु और पारंपरिक दोनों तरह के हथियार ले जाने में सक्षम है और इसे गहरे बंकरों और मजबूत सैन्य ढांचों को नष्ट करने के लिए डिजाइन किया गया बताया जाता है। इसकी मारक क्षमता लगभग 5500 किलोमीटर तक बताई जाती है।

    जानकारों के मुताबिक, इस तरह की मिसाइलों का इस्तेमाल युद्ध की दिशा और तीव्रता दोनों को और ज्यादा खतरनाक बना देता है। इससे रूस-यूक्रेन युद्ध में तनाव एक नए और गंभीर स्तर पर पहुंच गया है।

  • रूस-यूक्रेन युद्ध पर पुतिन का बड़ा संकेत, बोले- जंग अंत के करीब; जेलेंस्की से बातचीत के लिए भी छोड़े दरवाजे खुले

    रूस-यूक्रेन युद्ध पर पुतिन का बड़ा संकेत, बोले- जंग अंत के करीब; जेलेंस्की से बातचीत के लिए भी छोड़े दरवाजे खुले



    नई दिल्ली। रूस-यूक्रेन युद्ध  को लेकर रूसी राष्ट्रपति व्लादिमीर पुतिन  ने बड़ा बयान दिया है। पुतिन ने संकेत दिए हैं कि तीन साल से ज्यादा समय से जारी रूस-यूक्रेन युद्ध अब अपने अंतिम चरण की ओर बढ़ सकता है। उन्होंने कहा कि यदि यूक्रेन के राष्ट्रपति व्लादिमीर पुतिन बातचीत करना चाहते हैं तो मॉस्को आने का रास्ता खुला है।

    मीडिया से बातचीत में पुतिन ने स्पष्ट किया कि उन्होंने जेलेंस्की के साथ किसी औपचारिक बैठक का प्रस्ताव नहीं दिया है, लेकिन वह ऐसी मुलाकात से इनकार भी नहीं कर रहे हैं। उनके इस बयान को युद्ध खत्म करने की संभावित कूटनीतिक पहल के तौर पर देखा जा रहा है।

    रूसी राष्ट्रपति ने अमेरिका के पूर्व राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रम्प  और उनकी टीम की भी तारीफ की। पुतिन ने कहा कि ट्रंप प्रशासन यूक्रेन संकट को समाप्त कराने और शांति समझौते की दिशा में ईमानदारी से प्रयास कर रहा है। उन्होंने दावा किया कि रूस ने युद्धविराम बढ़ाने और युद्धबंदियों की अदला-बदली जैसे प्रस्तावों को तुरंत स्वीकार किया था।

    पुतिन ने यूक्रेन पर आरोप लगाते हुए कहा कि विक्ट्री डे से पहले कीव प्रशासन कैदियों की अदला-बदली के लिए तैयार नहीं था। उन्होंने यह भी कहा कि रूस किसी देश के साथ रिश्ते खराब नहीं करना चाहता, लेकिन उकसावे वाली घटनाओं के कारण हालात और तनावपूर्ण हो सकते थे।

    युद्ध की शुरुआत पर बोलते हुए पुतिन ने कहा कि यूक्रेन के यूरोपीय संघ की ओर बढ़ते कदम, राजनीतिक उथल-पुथल और क्रीमिया विवाद के बाद हालात बिगड़ते गए, जिसके बाद रूस ने सैन्य अभियान शुरू किया।

    गौरतलब है कि रूस और यूक्रेन के बीच जारी यह युद्ध अब चौथे साल में पहुंच चुका है। इस संघर्ष में हजारों लोगों की जान जा चुकी है, जबकि लाखों लोग विस्थापित हुए हैं। दुनिया के कई देश और अंतरराष्ट्रीय संगठन लगातार युद्ध समाप्त कराने और शांति बहाल करने की कोशिशों में जुटे हुए हैं।

  • यूक्रेन-रूस युद्ध: यूक्रेन की ‘रोबोट फोर्स’ से बदलेगा युद्ध का तरीका, 25,000 UGV तैनाती की तैयारी

    यूक्रेन-रूस युद्ध: यूक्रेन की ‘रोबोट फोर्स’ से बदलेगा युद्ध का तरीका, 25,000 UGV तैनाती की तैयारी



    नई दिल्ली। रूस-यूक्रेन युद्ध के बीच यूक्रेन अब युद्ध के मैदान में एक नई तकनीकी रणनीति अपना रहा है। रिपोर्ट्स के मुताबिक, यूक्रेन 2026 तक लगभग 25,000 अनमैन्ड ग्राउंड व्हीकल (UGV) यानी बिना चालक वाले जमीनी रोबोट तैनात करने की योजना पर काम कर रहा है। यह कदम आधुनिक युद्ध में मानव सैनिकों की सुरक्षा और तकनीकी बढ़त को ध्यान में रखकर उठाया जा रहा है।

    जानकारी के अनुसार, इन रोबोटिक वाहनों का इस्तेमाल सप्लाई पहुंचाने, घायल सैनिकों को निकालने, बारूदी सुरंगें लगाने और कुछ मामलों में सीमित हमले करने के लिए किया जा रहा है। यूक्रेनी राष्ट्रपति Volodymyr Zelenskyy पहले ही यह संकेत दे चुके हैं कि युद्ध में मानव नुकसान को कम करने के लिए ड्रोन और रोबोटिक सिस्टम पर निर्भरता तेजी से बढ़ाई जा रही है।

    रिपोर्टों में यह भी सामने आया है कि यूक्रेन की कुछ विशेष सैन्य इकाइयाँ, जैसे K-2 ब्रिगेड, पहले से ही इन UGV सिस्टम का इस्तेमाल कर रही हैं। युद्ध के दौरान रूसी ड्रोन और भारी गोलाबारी के कारण कई इलाकों को ‘नो-गो ज़ोन’ माना जा रहा है, जहां रोबोटिक सिस्टम को ज्यादा सुरक्षित और प्रभावी विकल्प के रूप में देखा जा रहा है।

    सैन्य विशेषज्ञों का मानना है कि अगर इतनी बड़ी संख्या में UGV मैदान में उतारे जाते हैं, तो यह युद्ध के तरीके को पूरी तरह बदल सकता है। हालांकि, यह तकनीक अभी भी विकास और परीक्षण के चरण में है और इसका वास्तविक प्रभाव आने वाले समय में ही स्पष्ट होगा।

  • रूस-यूक्रेन युद्ध में बड़ा मोड़: विक्ट्री डे से पहले अस्थायी सीजफायर का ऐलान, सुरक्षा को लेकर सख्त अलर्ट

    रूस-यूक्रेन युद्ध में बड़ा मोड़: विक्ट्री डे से पहले अस्थायी सीजफायर का ऐलान, सुरक्षा को लेकर सख्त अलर्ट


    नई दिल्ली। जारी संघर्ष के बीच रूस और यूक्रेन ने विक्ट्री डे से पहले अलग-अलग समय पर अस्थायी युद्धविराम (सीजफायर) की घोषणा की है। यह कदम 9 मई को मनाए जाने वाले द्वितीय विश्व युद्ध विजय दिवस से पहले तनाव कम करने की कोशिश माना जा रहा है।

    क्या है रूस का फैसला?
    रूस ने घोषणा की है कि वह विक्ट्री डे के मौके पर सीमित अवधि के लिए सैन्य कार्रवाई रोक देगा। यह फैसला द्वितीय विश्व युद्ध में नाजी जर्मनी पर जीत की 81वीं वर्षगांठ को ध्यान में रखते हुए लिया गया है।हालांकि रूस की तरफ से यह भी स्पष्ट किया गया है कि अगर किसी तरह का हमला या बाधा उत्पन्न होती है तो जवाबी कार्रवाई की जाएगी।

    🇺🇦 यूक्रेन की स्थिति
    यूक्रेन के राष्ट्रपति वोलोदिमिर जेलेंस्की ने भी युद्धविराम की सहमति का संकेत दिया है और कहा है कि उनका देश निर्धारित समय से संघर्ष रोकने को तैयार है, लेकिन किसी भी हमले का जवाब देने की पूरी क्षमता रखता है।

    सुरक्षा और तनाव बरकरार
    रिपोर्ट्स के अनुसार, विक्ट्री डे परेड को लेकर रूस में सुरक्षा बेहद कड़ी कर दी गई है। संभावित ड्रोन हमलों के खतरे को देखते हुए कई सैन्य तैयारियों में बदलाव किया गया है और कुछ भारी हथियारों की प्रदर्शनी भी सीमित कर दी गई है।

    विक्ट्री डे का महत्व
    विक्ट्री डे रूस के लिए एक बेहद अहम राष्ट्रीय दिवस है, जिसे देशभक्ति और सैन्य शक्ति के प्रतीक के रूप में देखा जाता है। इस बार पहली बार वर्षों में परेड का स्वरूप पहले से अलग और सीमित नजर आएगा।हालांकि दोनों देशों ने अस्थायी सीजफायर की घोषणा की है, लेकिन पिछले अनुभव बताते हैं कि ऐसे युद्धविराम अक्सर टिकाऊ साबित नहीं हुए हैं। इसलिए अंतरराष्ट्रीय समुदाय की नजर इस घटनाक्रम पर टिकी हुई है।

  • .भारत-यूक्रेन के बीच जल्‍द होगा रक्षा और सुरक्षा को लेकर अहम समझौता, जेलेंस्की ने दी जानकारी

    .भारत-यूक्रेन के बीच जल्‍द होगा रक्षा और सुरक्षा को लेकर अहम समझौता, जेलेंस्की ने दी जानकारी


    नई दिल्ली। भारत और यूक्रेन के बीच रक्षा और सुरक्षा सहयोग को लेकर एक अहम समझौता जल्द ही आधिकारिक रूप ले सकता है। यूक्रेन के राष्ट्रपति वोलोदिमिर जेलेंस्की ने सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म ‘एक्स’ पर जानकारी देते हुए बताया कि दोनों देश इस समझौते को अंतिम रूप देने की प्रक्रिया में हैं। यह घोषणा यूक्रेन के राष्ट्रीय सुरक्षा परिषद के सचिव रुस्तम उमेरोव की हालिया भारत यात्रा के बाद सामने आई, जहां उन्होंने एनएसए अजीत डोभाल और विदेश मंत्री एस. जयशंकर के साथ उच्च स्तरीय बातचीत की।

    सैन्य अनुभव साझा करने पर जोर

    रूस के साथ जारी युद्ध के पांचवें वर्ष में पहुंच चुके यूक्रेन ने ड्रोन तकनीक और वायु रक्षा प्रणाली में महत्वपूर्ण अनुभव हासिल किए हैं। अब वह इन अनुभवों को साझेदार देशों के साथ साझा कर रहा है। भारत भी यूक्रेन की इस विशेषज्ञता से लाभ उठाने में रुचि दिखा रहा है।

    भारत का रुख: संवाद से समाधान

    बैठक के दौरान राष्ट्रीय सुरक्षा सलाहकार अजीत डोभाल ने एक बार फिर भारत की उस नीति को दोहराया, जिसमें किसी भी विवाद का समाधान बातचीत और कूटनीति के जरिए निकालने पर बल दिया जाता है।

    शांति प्रयासों में सहयोग की उम्मीद
    रुस्तम उमेरोव ने स्थायी शांति की दिशा में भारत की भूमिका और समझ की सराहना की। फरवरी 2022 से जारी रूस-यूक्रेन संघर्ष के दौरान भारत ने संतुलित कूटनीतिक रुख अपनाया है। प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी भी अपनी रूस और यूक्रेन यात्राओं के दौरान यह स्पष्ट कर चुके हैं कि भारत शांति स्थापित करने के प्रयासों में हरसंभव सहयोग देने के लिए तैयार है।