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  • कीव पर रूस का बड़ा हमला: ओरेशनिक हाइपरसोनिक मिसाइल से दहला यूक्रेन, 4 की मौत, 80 से ज्यादा घायल

    कीव पर रूस का बड़ा हमला: ओरेशनिक हाइपरसोनिक मिसाइल से दहला यूक्रेन, 4 की मौत, 80 से ज्यादा घायल

    नई दिल्ली(New Delhi)।
    यूक्रेन की राजधानी कीव एक बार फिर रूस के भीषण मिसाइल और ड्रोन हमलों से दहल उठी। शनिवार और रविवार की दरमियानी रात हुए इस हमले में कम से कम 4 लोगों की मौत हो गई, जबकि 80 से अधिक लोग घायल बताए जा रहे हैं। लगातार सायरन बजते रहे और पूरे शहर में धुएं का गुबार देखा गया, जिससे हालात बेहद तनावपूर्ण हो गए।

    यूक्रेन के राष्ट्रपति वोलोदिमिर जेलेंस्की ने दावा किया है कि रूस ने इस हमले में ओरेशनिक हाइपरसोनिक बैलिस्टिक मिसाइल का इस्तेमाल किया है। यह वही मिसाइल है जो परमाणु और पारंपरिक दोनों तरह के हथियार ले जाने में सक्षम मानी जाती है। जेलेंस्की के अनुसार, यह हमला कीव क्षेत्र के बिला त्सेर्कवा जिले में किया गया, हालांकि लक्ष्य को लेकर स्पष्ट जानकारी सामने नहीं आई है।

    यह तीसरी बार है जब रूस ने इस अत्याधुनिक ओरेशनिक मिसाइल का इस्तेमाल यूक्रेन युद्ध में किया है। इससे पहले नवंबर 2024 में निप्रो शहर और जनवरी में लवीव क्षेत्र पर इसी तरह के हमले किए जा चुके हैं।

    रूसी हमले के जवाब में यूक्रेन पर मिसाइलों और ड्रोन की बौछार की गई, जिससे कीव के कई सरकारी दफ्तर, आवासीय इमारतें, स्कूल और गोदाम क्षतिग्रस्त हो गए। कीव के सैन्य प्रशासन प्रमुख के अनुसार, शहर के कम से कम नौ जिलों में नुकसान दर्ज किया गया है।

    मेयर विटाली क्लिट्स्को ने बताया कि शेवचेंको जिले में एक स्कूल भवन पर भी हमला हुआ, जहां लोग शरण लिए हुए थे। वहीं कई सुपरमार्केट और औद्योगिक गोदाम भी इस हमले की चपेट में आ गए।

    विशेषज्ञों के अनुसार, ओरेशनिक मिसाइल रूस की सबसे खतरनाक हाइपरसोनिक बैलिस्टिक मिसाइलों में से एक है, जो मैक 10 यानी ध्वनि की गति से लगभग 10 गुना तेज गति से लक्ष्य पर हमला कर सकती है। इसकी क्षमता इतनी अधिक है कि यह जमीन के नीचे कई मंजिल गहराई में बने बंकरों को भी नष्ट करने में सक्षम मानी जाती है। इसकी मारक क्षमता करीब 5500 किलोमीटर तक बताई जाती है, जिससे यह परमाणु हमले के लिहाज से भी बेहद खतरनाक हथियार बन जाती है।

    कीव पर हुए इस हमले के बाद एक बार फिर रूस-यूक्रेन युद्ध में तनाव चरम पर पहुंच गया है और आगे और बड़े हमलों की आशंका जताई जा रही है।

  • कीव पर पुतिन का ‘ब्रह्मास्त्र’ हमला: रूस की ओरेशनिक हाइपरसोनिक मिसाइल से दहला यूक्रेन, दर्जनों हताहत

    कीव पर पुतिन का ‘ब्रह्मास्त्र’ हमला: रूस की ओरेशनिक हाइपरसोनिक मिसाइल से दहला यूक्रेन, दर्जनों हताहत




    नई दिल्ली(New Delhi)।
    रूस और यूक्रेन के बीच जारी युद्ध में एक बार फिर भारी तनाव देखने को मिला है, जब शनिवार और रविवार की दरमियानी रात रूस ने यूक्रेन की राजधानी कीव पर मिसाइलों और ड्रोन से बड़ा हमला किया। इस हमले में कम से कम 4 लोगों की मौत और 80 से अधिक लोगों के घायल होने की पुष्टि की गई है। पूरे शहर में रातभर हवाई हमले के सायरन गूंजते रहे और कई इलाकों में धुएं का गुबार देखा गया।

    यूक्रेन के राष्ट्रपति वोलोदिमिर जेलेंस्की ने दावा किया है कि इस हमले में रूस ने ओरेशनिक हाइपरसोनिक बैलिस्टिक मिसाइल का इस्तेमाल किया। उनके अनुसार, यह हमला कीव क्षेत्र के बिला त्सेर्कवा इलाके में किया गया, हालांकि लक्ष्य को लेकर स्पष्ट जानकारी नहीं दी गई है। यह इस मिसाइल का युद्ध में तीसरा उपयोग बताया जा रहा है।

    स्थानीय प्रशासन के मुताबिक, कीव के कम से कम नौ जिलों में आवासीय भवनों, स्कूलों, सुपरमार्केट और गोदामों को नुकसान पहुंचा है। मेयर विटाली क्लिट्स्को ने बताया कि एक स्कूल इमारत भी प्रभावित हुई, जहां लोग शरण लिए हुए थे। कई जगहों पर रिहायशी इलाकों में भारी तबाही की खबर है।

    रूस ने यह हमला यूक्रेन के ड्रोन हमलों के जवाब में किया है। हमले के दौरान राजधानी कीव के मध्य इलाकों सहित कई हिस्सों में लगातार मिसाइल और ड्रोन हमले जारी रहे, जिससे जनजीवन पूरी तरह प्रभावित हुआ।

    ओरेशनिक मिसाइल रूस की अत्याधुनिक हाइपरसोनिक बैलिस्टिक मिसाइल मानी जाती है, जो मैक 10 यानी ध्वनि की गति से लगभग 10 गुना तेज गति से उड़ान भरने में सक्षम है। यह मिसाइल परमाणु और पारंपरिक दोनों तरह के हथियार ले जाने में सक्षम है और इसे गहरे बंकरों और मजबूत सैन्य ढांचों को नष्ट करने के लिए डिजाइन किया गया बताया जाता है। इसकी मारक क्षमता लगभग 5500 किलोमीटर तक बताई जाती है।

    जानकारों के मुताबिक, इस तरह की मिसाइलों का इस्तेमाल युद्ध की दिशा और तीव्रता दोनों को और ज्यादा खतरनाक बना देता है। इससे रूस-यूक्रेन युद्ध में तनाव एक नए और गंभीर स्तर पर पहुंच गया है।

  • रूस-यूक्रेन युद्ध पर पुतिन का बड़ा संकेत, बोले- जंग अंत के करीब; जेलेंस्की से बातचीत के लिए भी छोड़े दरवाजे खुले

    रूस-यूक्रेन युद्ध पर पुतिन का बड़ा संकेत, बोले- जंग अंत के करीब; जेलेंस्की से बातचीत के लिए भी छोड़े दरवाजे खुले



    नई दिल्ली। रूस-यूक्रेन युद्ध  को लेकर रूसी राष्ट्रपति व्लादिमीर पुतिन  ने बड़ा बयान दिया है। पुतिन ने संकेत दिए हैं कि तीन साल से ज्यादा समय से जारी रूस-यूक्रेन युद्ध अब अपने अंतिम चरण की ओर बढ़ सकता है। उन्होंने कहा कि यदि यूक्रेन के राष्ट्रपति व्लादिमीर पुतिन बातचीत करना चाहते हैं तो मॉस्को आने का रास्ता खुला है।

    मीडिया से बातचीत में पुतिन ने स्पष्ट किया कि उन्होंने जेलेंस्की के साथ किसी औपचारिक बैठक का प्रस्ताव नहीं दिया है, लेकिन वह ऐसी मुलाकात से इनकार भी नहीं कर रहे हैं। उनके इस बयान को युद्ध खत्म करने की संभावित कूटनीतिक पहल के तौर पर देखा जा रहा है।

    रूसी राष्ट्रपति ने अमेरिका के पूर्व राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रम्प  और उनकी टीम की भी तारीफ की। पुतिन ने कहा कि ट्रंप प्रशासन यूक्रेन संकट को समाप्त कराने और शांति समझौते की दिशा में ईमानदारी से प्रयास कर रहा है। उन्होंने दावा किया कि रूस ने युद्धविराम बढ़ाने और युद्धबंदियों की अदला-बदली जैसे प्रस्तावों को तुरंत स्वीकार किया था।

    पुतिन ने यूक्रेन पर आरोप लगाते हुए कहा कि विक्ट्री डे से पहले कीव प्रशासन कैदियों की अदला-बदली के लिए तैयार नहीं था। उन्होंने यह भी कहा कि रूस किसी देश के साथ रिश्ते खराब नहीं करना चाहता, लेकिन उकसावे वाली घटनाओं के कारण हालात और तनावपूर्ण हो सकते थे।

    युद्ध की शुरुआत पर बोलते हुए पुतिन ने कहा कि यूक्रेन के यूरोपीय संघ की ओर बढ़ते कदम, राजनीतिक उथल-पुथल और क्रीमिया विवाद के बाद हालात बिगड़ते गए, जिसके बाद रूस ने सैन्य अभियान शुरू किया।

    गौरतलब है कि रूस और यूक्रेन के बीच जारी यह युद्ध अब चौथे साल में पहुंच चुका है। इस संघर्ष में हजारों लोगों की जान जा चुकी है, जबकि लाखों लोग विस्थापित हुए हैं। दुनिया के कई देश और अंतरराष्ट्रीय संगठन लगातार युद्ध समाप्त कराने और शांति बहाल करने की कोशिशों में जुटे हुए हैं।

  • यूक्रेन-रूस युद्ध: यूक्रेन की ‘रोबोट फोर्स’ से बदलेगा युद्ध का तरीका, 25,000 UGV तैनाती की तैयारी

    यूक्रेन-रूस युद्ध: यूक्रेन की ‘रोबोट फोर्स’ से बदलेगा युद्ध का तरीका, 25,000 UGV तैनाती की तैयारी



    नई दिल्ली। रूस-यूक्रेन युद्ध के बीच यूक्रेन अब युद्ध के मैदान में एक नई तकनीकी रणनीति अपना रहा है। रिपोर्ट्स के मुताबिक, यूक्रेन 2026 तक लगभग 25,000 अनमैन्ड ग्राउंड व्हीकल (UGV) यानी बिना चालक वाले जमीनी रोबोट तैनात करने की योजना पर काम कर रहा है। यह कदम आधुनिक युद्ध में मानव सैनिकों की सुरक्षा और तकनीकी बढ़त को ध्यान में रखकर उठाया जा रहा है।

    जानकारी के अनुसार, इन रोबोटिक वाहनों का इस्तेमाल सप्लाई पहुंचाने, घायल सैनिकों को निकालने, बारूदी सुरंगें लगाने और कुछ मामलों में सीमित हमले करने के लिए किया जा रहा है। यूक्रेनी राष्ट्रपति Volodymyr Zelenskyy पहले ही यह संकेत दे चुके हैं कि युद्ध में मानव नुकसान को कम करने के लिए ड्रोन और रोबोटिक सिस्टम पर निर्भरता तेजी से बढ़ाई जा रही है।

    रिपोर्टों में यह भी सामने आया है कि यूक्रेन की कुछ विशेष सैन्य इकाइयाँ, जैसे K-2 ब्रिगेड, पहले से ही इन UGV सिस्टम का इस्तेमाल कर रही हैं। युद्ध के दौरान रूसी ड्रोन और भारी गोलाबारी के कारण कई इलाकों को ‘नो-गो ज़ोन’ माना जा रहा है, जहां रोबोटिक सिस्टम को ज्यादा सुरक्षित और प्रभावी विकल्प के रूप में देखा जा रहा है।

    सैन्य विशेषज्ञों का मानना है कि अगर इतनी बड़ी संख्या में UGV मैदान में उतारे जाते हैं, तो यह युद्ध के तरीके को पूरी तरह बदल सकता है। हालांकि, यह तकनीक अभी भी विकास और परीक्षण के चरण में है और इसका वास्तविक प्रभाव आने वाले समय में ही स्पष्ट होगा।

  • रूस-यूक्रेन युद्ध में बड़ा मोड़: विक्ट्री डे से पहले अस्थायी सीजफायर का ऐलान, सुरक्षा को लेकर सख्त अलर्ट

    रूस-यूक्रेन युद्ध में बड़ा मोड़: विक्ट्री डे से पहले अस्थायी सीजफायर का ऐलान, सुरक्षा को लेकर सख्त अलर्ट


    नई दिल्ली। जारी संघर्ष के बीच रूस और यूक्रेन ने विक्ट्री डे से पहले अलग-अलग समय पर अस्थायी युद्धविराम (सीजफायर) की घोषणा की है। यह कदम 9 मई को मनाए जाने वाले द्वितीय विश्व युद्ध विजय दिवस से पहले तनाव कम करने की कोशिश माना जा रहा है।

    क्या है रूस का फैसला?
    रूस ने घोषणा की है कि वह विक्ट्री डे के मौके पर सीमित अवधि के लिए सैन्य कार्रवाई रोक देगा। यह फैसला द्वितीय विश्व युद्ध में नाजी जर्मनी पर जीत की 81वीं वर्षगांठ को ध्यान में रखते हुए लिया गया है।हालांकि रूस की तरफ से यह भी स्पष्ट किया गया है कि अगर किसी तरह का हमला या बाधा उत्पन्न होती है तो जवाबी कार्रवाई की जाएगी।

    🇺🇦 यूक्रेन की स्थिति
    यूक्रेन के राष्ट्रपति वोलोदिमिर जेलेंस्की ने भी युद्धविराम की सहमति का संकेत दिया है और कहा है कि उनका देश निर्धारित समय से संघर्ष रोकने को तैयार है, लेकिन किसी भी हमले का जवाब देने की पूरी क्षमता रखता है।

    सुरक्षा और तनाव बरकरार
    रिपोर्ट्स के अनुसार, विक्ट्री डे परेड को लेकर रूस में सुरक्षा बेहद कड़ी कर दी गई है। संभावित ड्रोन हमलों के खतरे को देखते हुए कई सैन्य तैयारियों में बदलाव किया गया है और कुछ भारी हथियारों की प्रदर्शनी भी सीमित कर दी गई है।

    विक्ट्री डे का महत्व
    विक्ट्री डे रूस के लिए एक बेहद अहम राष्ट्रीय दिवस है, जिसे देशभक्ति और सैन्य शक्ति के प्रतीक के रूप में देखा जाता है। इस बार पहली बार वर्षों में परेड का स्वरूप पहले से अलग और सीमित नजर आएगा।हालांकि दोनों देशों ने अस्थायी सीजफायर की घोषणा की है, लेकिन पिछले अनुभव बताते हैं कि ऐसे युद्धविराम अक्सर टिकाऊ साबित नहीं हुए हैं। इसलिए अंतरराष्ट्रीय समुदाय की नजर इस घटनाक्रम पर टिकी हुई है।

  • .भारत-यूक्रेन के बीच जल्‍द होगा रक्षा और सुरक्षा को लेकर अहम समझौता, जेलेंस्की ने दी जानकारी

    .भारत-यूक्रेन के बीच जल्‍द होगा रक्षा और सुरक्षा को लेकर अहम समझौता, जेलेंस्की ने दी जानकारी


    नई दिल्ली। भारत और यूक्रेन के बीच रक्षा और सुरक्षा सहयोग को लेकर एक अहम समझौता जल्द ही आधिकारिक रूप ले सकता है। यूक्रेन के राष्ट्रपति वोलोदिमिर जेलेंस्की ने सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म ‘एक्स’ पर जानकारी देते हुए बताया कि दोनों देश इस समझौते को अंतिम रूप देने की प्रक्रिया में हैं। यह घोषणा यूक्रेन के राष्ट्रीय सुरक्षा परिषद के सचिव रुस्तम उमेरोव की हालिया भारत यात्रा के बाद सामने आई, जहां उन्होंने एनएसए अजीत डोभाल और विदेश मंत्री एस. जयशंकर के साथ उच्च स्तरीय बातचीत की।

    सैन्य अनुभव साझा करने पर जोर

    रूस के साथ जारी युद्ध के पांचवें वर्ष में पहुंच चुके यूक्रेन ने ड्रोन तकनीक और वायु रक्षा प्रणाली में महत्वपूर्ण अनुभव हासिल किए हैं। अब वह इन अनुभवों को साझेदार देशों के साथ साझा कर रहा है। भारत भी यूक्रेन की इस विशेषज्ञता से लाभ उठाने में रुचि दिखा रहा है।

    भारत का रुख: संवाद से समाधान

    बैठक के दौरान राष्ट्रीय सुरक्षा सलाहकार अजीत डोभाल ने एक बार फिर भारत की उस नीति को दोहराया, जिसमें किसी भी विवाद का समाधान बातचीत और कूटनीति के जरिए निकालने पर बल दिया जाता है।

    शांति प्रयासों में सहयोग की उम्मीद
    रुस्तम उमेरोव ने स्थायी शांति की दिशा में भारत की भूमिका और समझ की सराहना की। फरवरी 2022 से जारी रूस-यूक्रेन संघर्ष के दौरान भारत ने संतुलित कूटनीतिक रुख अपनाया है। प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी भी अपनी रूस और यूक्रेन यात्राओं के दौरान यह स्पष्ट कर चुके हैं कि भारत शांति स्थापित करने के प्रयासों में हरसंभव सहयोग देने के लिए तैयार है।

  • युद्ध का नया चेहरा: यूक्रेन के रोबोटों के सामने रूसी सैनिकों ने डाले हथियार, जेलेंस्की का बड़ा दावा

    युद्ध का नया चेहरा: यूक्रेन के रोबोटों के सामने रूसी सैनिकों ने डाले हथियार, जेलेंस्की का बड़ा दावा

    कीव। रूस-यूक्रेन युद्ध अब ऐसे दौर में पहुंच चुका है, जहां विज्ञान-कथा जैसी बातें हकीकत बनती नजर आ रही हैं। यूक्रेन के राष्ट्रपति वोलोदिमीर जेलेंस्की ने बताया कि उनकी सेना के ग्राउंड रोबोटिक सिस्टम और ड्रोन ने मिलकर एक रूसी सैन्य ठिकाने पर कब्जा कर लिया।

    रोबोटों के आगे झुके दुश्मन सैनिक
    सबसे चौंकाने वाली बात यह रही कि इस पूरे ऑपरेशन में यूक्रेन का कोई भी सैनिक सीधे तौर पर शामिल नहीं था। दुश्मन सैनिकों को रोबोटिक सिस्टम्स के सामने आत्मसमर्पण करना पड़ा। माना जा रहा है कि दुनिया के किसी भी युद्ध में इस तरह की यह पहली घटना है। हालांकि ऑपरेशन की लोकेशन का खुलासा नहीं किया गया है।

    भविष्य की जंग का संकेत
    अगर जेलेंस्की का दावा सही साबित होता है, तो यह युद्ध के बदलते स्वरूप का बड़ा उदाहरण बन सकता है। उनके सलाहकार अलेक्जेंडर कामिशिन के अनुसार आने वाले समय में अनमैन्ड ग्राउंड व्हीकल युद्ध की रणनीति को पूरी तरह बदल सकते हैं। फिलहाल यूक्रेन अपनी करीब 30 प्रतिशत पैदल सेना को रोबोट से बदलने की क्षमता रखता है।

    बिना सैनिक नुकसान के ऑपरेशन सफल
    राष्ट्रपति जेलेंस्की ने एक्स पर जानकारी देते हुए कहा कि यह पूरा मिशन पूरी तरह मानव रहित प्लेटफॉर्म के जरिए अंजाम दिया गया। इस दौरान किसी भी यूक्रेनी सैनिक की जान जोखिम में नहीं पड़ी और बिना किसी नुकसान के दुश्मन के ठिकाने पर कब्जा कर लिया गया।

    हजारों मिशन पूरे कर चुके रोबोट
    जेलेंस्की के मुताबिक यूक्रेन के रेटेल टर्मिट, अर्दल और जमी जैसे रोबोटिक सिस्टम्स ने पिछले तीन महीनों में 22,000 से अधिक मिशनों को सफलतापूर्वक अंजाम दिया है। उन्होंने बताया कि जहां पहले सैनिकों को खतरनाक इलाकों में भेजा जाता था, अब वहां रोबोट तैनात किए जा रहे हैं, जिससे हजारों सैनिकों की जान बचाई जा रही है।

  • महाजंग के अंत की उम्मीद: 100% तैयार हुआ अमेरिकी सुरक्षा गारंटी दस्तावेज, जेलेंस्की बोले- अब बस हस्ताक्षर का इंतजार

    महाजंग के अंत की उम्मीद: 100% तैयार हुआ अमेरिकी सुरक्षा गारंटी दस्तावेज, जेलेंस्की बोले- अब बस हस्ताक्षर का इंतजार


    नई दिल्ली । चार साल से जारी भीषण रक्तपात के बीच रूस और यूक्रेन के बीच समझौते की सुगबुगाहट तेज हो गई है। यूक्रेन के राष्ट्रपति वोलोदिमीर जेलेंस्की ने रविवार को लिथुआनिया की राजधानी विलनियस में एक प्रेस कॉन्फ्रेंस के दौरान बड़ी जानकारी साझा की। उन्होंने बताया कि संयुक्त अरब अमीरात की राजधानी अबू धाबी में दो दिनों तक चली सघन त्रिपक्षीय वार्ता के बाद अमेरिकी सुरक्षा गारंटी से जुड़ा ऐतिहासिक दस्तावेज अब 100 प्रतिशत तैयार’ है।

    जेलेंस्की ने इस वार्ता को ऐतिहासिक बताया क्योंकि इसमें पहली बार यूक्रेन, रूस और अमेरिका के न केवल राजनयिक, बल्कि सैन्य अधिकारी भी आमने-सामने बैठे थे। उन्होंने कहा यह दस्तावेज हमारे देश के सुरक्षित भविष्य की नींव है। अब हमें बस अपने साझेदारों अमेरिका द्वारा हस्ताक्षर की तारीख और स्थान तय किए जाने का इंतजार है। हस्ताक्षर के बाद इस प्रस्ताव को कानूनी अमलीजामा पहनाने के लिए अमेरिकी कांग्रेस और यूक्रेनी संसद वेरखोव्ना राडा की मंजूरी के लिए भेजा जाएगा।

    20-सूत्रीय शांति योजना और चुनौतियां रिपोर्ट्स के मुताबिक, अमेरिका ने इस शांति प्रक्रिया के लिए 20-सूत्रीय एक विस्तृत योजना पेश की है। जेलेंस्की ने माना कि पहले कई विवादित मुद्दे थे, लेकिन हालिया बातचीत के बाद उनकी संख्या कम हुई है। हालांकि, सबसे बड़ा पेंच अब भी क्षेत्रीय अखंडता को लेकर फंसा हुआ है। जहाँ रूस पूर्वी डोनबास क्षेत्र से यूक्रेनी सेना की पूरी वापसी की मांग कर रहा है, वहीं जेलेंस्की ने स्पष्ट किया कि यूक्रेन अपनी क्षेत्रीय अखंडता पर कोई समझौता नहीं करेगा।

    आर्थिक सुरक्षा और भविष्य का विजन सुरक्षा गारंटी के साथ-साथ जेलेंस्की ने यूक्रेन की आर्थिक स्थिरता पर भी जोर दिया। उन्होंने दोहराया कि उनका लक्ष्य 2027 तक यूरोपीय संघ की पूर्ण सदस्यता हासिल करना है। उन्होंने इसे ‘आर्थिक सुरक्षा की गारंटी’ करार दिया। अबू धाबी में अगली दौर की बातचीत आगामी रविवार 1 फरवरी को होने की संभावना है, जिसमें अमेरिकी मध्यस्थ और दोनों देशों के सैन्य प्रतिनिधि शेष तकनीकी और राजनीतिक मतभेदों को सुलझाने का प्रयास करेंगे।