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  • हम हारे नहीं, हराए गए, ममता बनर्जी का बड़ा आरोप, चुनाव आयोग पर उठाए सवाल; बंगाल में सियासी संग्राम तेज

    हम हारे नहीं, हराए गए, ममता बनर्जी का बड़ा आरोप, चुनाव आयोग पर उठाए सवाल; बंगाल में सियासी संग्राम तेज



    नई दिल्ली। ममता बनर्जी ने विधानसभा चुनाव नतीजों के बाद तीखा हमला बोलते हुए कहा कि उनकी पार्टी चुनाव नहीं हारी, बल्कि उन्हें हराया गया है। प्रेस कॉन्फ्रेंस में उन्होंने चुनाव प्रक्रिया पर गंभीर सवाल खड़े किए।ममता बनर्जी ने भारत निर्वाचन आयोग की भूमिका पर सवाल उठाते हुए आरोप लगाया कि चुनाव निष्पक्ष तरीके से नहीं कराए गए। उन्होंने कहा कि पूरी प्रक्रिया में कई अनियमितताएं देखने को मिलीं।

    ‘सीटों में गड़बड़ी’ का दावा
    TMC प्रमुख ने आरोप लगाया कि कई सीटों पर नतीजे प्रभावित किए गए। उनका कहना है कि विपक्ष के वोटों को व्यवस्थित तरीके से कमजोर किया गया, हालांकि इन दावों की स्वतंत्र पुष्टि अभी नहीं हुई है।

    मतदाता सूची को लेकर विवाद
    ममता ने SIR (स्पेशल रिवीजन) के दौरान बड़ी संख्या में मतदाताओं के नाम हटाए जाने का आरोप लगाया। उन्होंने कहा कि इससे चुनाव परिणामों पर असर पड़ा। इस मुद्दे पर चुनाव आयोग की आधिकारिक प्रतिक्रिया आना बाकी है।

    विपक्ष का समर्थन
    उन्होंने बताया कि राहुल गांधी, अरविंद केजरीवाल, उद्धव ठाकरे और अखिलेश यादव जैसे नेताओं ने उनसे बातचीत कर समर्थन जताया है।कोलकाता की एक महत्वपूर्ण सीट पर मतों की दोबारा गिनती जारी है। अधिकारियों के अनुसार, अंतिम नतीजे पुनर्गणना पूरी होने के बाद ही घोषित किए जाएंगे।

    ED की कार्रवाई से बढ़ा सियासी तापमान
    इस बीच प्रवर्तन निदेशालय (ED) की कार्रवाई ने भी माहौल को और गरमा दिया है। एक पुलिस अधिकारी के खिलाफ लुकआउट नोटिस जारी किया गया है।

    भाजपा का पलटवार
    भाजपा ने इन आरोपों को खारिज करते हुए कहा कि यह जनता का स्पष्ट जनादेश है। पार्टी नेताओं का दावा है कि जीत संगठन की मेहनत और रणनीति का नतीजा है। कुल मिलाकर, पश्चिम बंगाल के चुनाव नतीजों के बाद राजनीतिक टकराव अपने चरम पर है। एक ओर विपक्ष चुनाव प्रक्रिया पर सवाल उठा रहा है, तो दूसरी ओर सत्ताधारी पक्ष इसे लोकतांत्रिक जनादेश बता रहा है। आने वाले दिनों में यह विवाद और गहराने के संकेत हैं।

  • SIR पर ममता बनर्जी का तीखा हमला: अगर नाम हटाएँ, तो किचन में रखे सामानों के साथ तैयार रहें

    SIR पर ममता बनर्जी का तीखा हमला: अगर नाम हटाएँ, तो किचन में रखे सामानों के साथ तैयार रहें


    नई दिल्ली। पश्चिम बंगाल में स्टैंडर्डाइज्ड इलेक्टोरल रजिस्टर (SIR) को लेकर राजनीतिक तापमान लगातार बढ़ रहा है। इसी बीच मुख्यमंत्री ममता बनर्जी ने कृष्णानगर में एक रैली के दौरान बेहद तीखा और विवादित बयान देते हुए महिलाओं से आह्वान किया कि यदि वोटर लिस्ट की समीक्षा में उनके नाम हटाए जाएँ, तो वे किचन में मौजूद सामानों के साथ तैयार रहें।

    अगर नाम काटे जाएँ… महिलाएँ आगे बढ़ें, पुरुष पीछे खड़े रहें

    कृष्णानगर की सभा में ममता बनर्जी ने कहा,
    अगर चुनाव के दौरान दिल्ली से पुलिस बुलाकर माताओं-बहनों को डराया जाएगा और आपके नाम वोटर लिस्ट से हटाए जाएँगे, तो इसे सहन मत करो। आपके किचन में हथियार हैं… महिलाएँ आगे बढ़ेंगी और पुरुष उनके पीछे खड़े होंगे।

    उनके इस बयान को भाजपा ने भड़काऊ करार दिया है, जबकि तृणमूल समर्थक इसे जन अधिकार की लड़ाई बता रहे हैं।

    बीजेपी पर सांप्रदायिक राजनीति का आरोप

    सभा में ममता ने भाजपा पर तीखे शब्दों में हमला बोला। उन्होंने कहा,
    बीजेपी हर चुनाव में पैसे और बाहरी लोगों का इस्तेमाल कर जनता को बांटती है। मैं धर्मनिरपेक्षता में विश्वास करती हूं। धर्म का मतलब पवित्रता, मानवता और शांति है-हिंसा या भेदभाव नहीं।

    उन्होंने धार्मिक आयोजनों पर भी टिप्पणी की और कहा कि लोग जब घर में गीता का पाठ करते हैं या दिल में अल्लाह से दुआ करते हैं, तब इसका दिखावा करने की जरूरत नहीं होती।

    क्या मुझे दंगाइयों की पार्टी को अपनी नागरिकता साबित करनी होगी?

    NRC और SIR को लेकर केंद्र पर हमला बोलते हुए ममता बोलीं,
    क्या अब मुझे दंगाइयों की पार्टी (बीजेपी) को अपनी नागरिकता साबित करनी पड़ेगी?

    उन्होंने आरोप लगाया कि केंद्रीय गृह मंत्री बंगालियों को बांग्लादेशी बताकर डिटेंशन सेंटर भेजने की कोशिश कर सकते हैं।

    किसी को बंगाल से बाहर नहीं जाने देंगे

    उन्होंने जोर देकर कहा,
    हम किसी को पश्चिम बंगाल से बाहर नहीं निकालने देंगे। अगर किसी को जबरन निकाला गया, तो उसे वापस लाने का तरीका हम जानते हैं।

    राजनीतिक माहौल गरम, SIR पर टकराव बढ़ा

    SIR को लेकर पहले से ही विवाद चल रहा है। तृणमूल कांग्रेस कहती है कि यह बंगालियों को वोटर लिस्ट से हटाने की साजिश है, जबकि बीजेपी इसे पारदर्शिता और फर्जी वोटिंग खत्म करने की प्रक्रिया बताती है।
    ममता का यह बयान आग में घी डालने जैसा माना जा रहा है।