Tag: Voter List Controversy

  • MP में दशहरे पर कांग्रेस का अनोखा विरोध, ज्ञानेश कुमार के पुतले जलाने की तैयारी, गांव-गांव बांटे जाएंगे वोट चोरी के पर्चे

    MP में दशहरे पर कांग्रेस का अनोखा विरोध, ज्ञानेश कुमार के पुतले जलाने की तैयारी, गांव-गांव बांटे जाएंगे वोट चोरी के पर्चे


    भोपाल। मध्य प्रदेश में मतदाता सूची में कथित गड़बड़ी और वोट चोरी के आरोपों को लेकर कांग्रेस ने अपने आंदोलन को तेज करने की तैयारी कर ली है। अखिल भारतीय कांग्रेस कमेटी यानी AICC के दो महीने के वोट बचाओ देश बचाओ अभियान के तहत प्रदेश से लेकर जिला और ब्लॉक स्तर तक विभिन्न कार्यक्रम आयोजित किए जाएंगे। पार्टी ने दशहरे से लेकर नवंबर के आखिरी सप्ताह तक विरोध प्रदर्शन जनसंपर्क पदयात्रा और चौपालों का कार्यक्रम तय किया है। इसके जरिए कांग्रेस मतदाता सूची से जुड़े अपने आरोपों को जनता तक पहुंचाने और चुनावी प्रक्रिया में पारदर्शिता का मुद्दा उठाने की कोशिश करेगी।

    कांग्रेस की योजना के मुताबिक दशहरे के अवसर पर मध्य प्रदेश के सभी जिलों में विरोध प्रदर्शन किए जाएंगे। पार्टी कार्यकर्ता सार्वजनिक सभाओं और जनसंपर्क कार्यक्रमों के दौरान वोट चोरी के आरोपों से संबंधित जानकारी वाले पर्चे बांटेंगे। इसके बाद ब्लॉक स्तर पर पदयात्रा साइकिल रैली और बाइक रैलियां निकाली जाएंगी। इन कार्यक्रमों के जरिए पार्टी स्थानीय प्रशासन तक अपनी बात पहुंचाएगी। हालांकि उपलब्ध जानकारी के अनुसार AICC के परिपत्र में दशहरे पर रावण की जगह मुख्य चुनाव आयुक्त ज्ञानेश कुमार का पुतला जलाने का स्पष्ट निर्देश नहीं है। पुतला दहन को ब्लॉक स्तर पर आयोजित मार्च के समापन कार्यक्रम से जोड़ा गया है।

    आंदोलन के अगले चरण में ब्लॉक कांग्रेस कमेटियां महात्मा गांधी या डॉ. भीमराव आंबेडकर की प्रतिमा से एसडीएम कार्यालय अथवा स्थानीय प्रशासनिक मुख्यालय तक मार्च निकालेंगी। कार्यक्रम के समापन पर संविधान के अनुच्छेद 326 का पाठ किया जाएगा और राष्ट्रगान गाकर विरोध दर्ज कराया जाएगा। कांग्रेस इन गतिविधियों के माध्यम से मताधिकार और मतदाता सूची की विश्वसनीयता से जुड़े मुद्दों को प्रमुखता से उठाना चाहती है।

    पार्टी 25 अक्टूबर से 25 नवंबर तक वोट बचाओ देश बचाओ चौपाल अभियान भी चलाएगी। इसकी शुरुआत प्रदेश और जिला मुख्यालयों पर वरिष्ठ कांग्रेस नेताओं तथा जिला अध्यक्षों की प्रेस कॉन्फ्रेंस से होगी। इसके बाद जिला स्तर पर समन्वय बैठकें और ब्लॉक स्तर पर बूथ लेवल एजेंट यानी BLA के साथ बैठकें आयोजित की जाएंगी। इन बैठकों में मतदाता सूचियों की जांच और सत्यापन पर जोर रहेगा।

    अभियान के तहत बूथ लेवल एजेंट उन मतदाताओं की जानकारी जुटाएंगे जिनके नाम कथित तौर पर मतदाता सूची से हटाए गए हैं या जिनकी प्रविष्टियों में गड़बड़ी की आशंका है। सत्यापन के बाद संबंधित रिकॉर्ड और मतदाता डोजियर ब्लॉक कांग्रेस कार्यालयों में जमा किए जाएंगे। इसके बाद गांव-गांव में चौपाल लगाकर स्थानीय लोगों के साथ चर्चा की जाएगी। इन चौपालों में प्रभावित बताए जा रहे मतदाताओं बुजुर्गों पंचायत प्रतिनिधियों और अन्य नागरिकों को शामिल करने की योजना है। कांग्रेस कार्यकर्ता पर्चे बांटकर मतदाता सूची से जुड़े मामलों की जानकारी भी साझा करेंगे।

    इस आंदोलन का एक बड़ा चरण 1 नवंबर को प्रस्तावित है। कांग्रेस के कार्यक्रम के मुताबिक नई दिल्ली के रामलीला मैदान में INDIA गठबंधन के सहयोगी दलों के समन्वय से राष्ट्रीय रैली आयोजित की जाएगी। इसमें सांसदों विधायकों प्रदेश और जिला स्तर के पदाधिकारियों फ्रंटल संगठनों तथा जमीनी कार्यकर्ताओं की भागीदारी का आह्वान किया गया है। इस रैली के जरिए पार्टी मतदाता सूची और कथित वोट चोरी के मुद्दे को राष्ट्रीय स्तर पर उठाना चाहती है।

    नवंबर के अंतिम सप्ताह में कांग्रेस दिल्ली कूच की तैयारी भी कर रही है। 25 और 26 नवंबर को संविधान दिवस के अवसर पर दिल्ली चलो कार्यक्रम आयोजित किया जाएगा। तय रोडमैप के अनुसार मध्य प्रदेश के कार्यकर्ता 25 नवंबर को ग्वालियर में एकत्र होंगे और अगले दिन वाहनों से दिल्ली रवाना होंगे। अन्य राज्यों से भी अलग-अलग मार्गों के जरिए यात्राओं को दिल्ली पहुंचाने की योजना बनाई गई है।

    आंदोलन के सभी चरणों के लिए प्रदेश जिला और ब्लॉक इकाइयों को वाहनों यात्रियों तथा रूट कैप्टन की जानकारी केंद्रीय नियंत्रण कक्ष को उपलब्ध कराने के निर्देश दिए गए हैं। AICC कनेक्ट सेंटर और केंद्रीय नियंत्रण कक्ष अभियान की निगरानी तथा समीक्षा करेंगे। अब देखना होगा कि कांग्रेस का यह अभियान प्रदेश में कितना व्यापक होता है और मतदाता सूची से जुड़े आरोपों पर आगे क्या राजनीतिक तथा प्रशासनिक प्रतिक्रियाएं सामने आती हैं।

  • हम हारे नहीं, हराए गए, ममता बनर्जी का बड़ा आरोप, चुनाव आयोग पर उठाए सवाल; बंगाल में सियासी संग्राम तेज

    हम हारे नहीं, हराए गए, ममता बनर्जी का बड़ा आरोप, चुनाव आयोग पर उठाए सवाल; बंगाल में सियासी संग्राम तेज



    नई दिल्ली। ममता बनर्जी ने विधानसभा चुनाव नतीजों के बाद तीखा हमला बोलते हुए कहा कि उनकी पार्टी चुनाव नहीं हारी, बल्कि उन्हें हराया गया है। प्रेस कॉन्फ्रेंस में उन्होंने चुनाव प्रक्रिया पर गंभीर सवाल खड़े किए।ममता बनर्जी ने भारत निर्वाचन आयोग की भूमिका पर सवाल उठाते हुए आरोप लगाया कि चुनाव निष्पक्ष तरीके से नहीं कराए गए। उन्होंने कहा कि पूरी प्रक्रिया में कई अनियमितताएं देखने को मिलीं।

    ‘सीटों में गड़बड़ी’ का दावा
    TMC प्रमुख ने आरोप लगाया कि कई सीटों पर नतीजे प्रभावित किए गए। उनका कहना है कि विपक्ष के वोटों को व्यवस्थित तरीके से कमजोर किया गया, हालांकि इन दावों की स्वतंत्र पुष्टि अभी नहीं हुई है।

    मतदाता सूची को लेकर विवाद
    ममता ने SIR (स्पेशल रिवीजन) के दौरान बड़ी संख्या में मतदाताओं के नाम हटाए जाने का आरोप लगाया। उन्होंने कहा कि इससे चुनाव परिणामों पर असर पड़ा। इस मुद्दे पर चुनाव आयोग की आधिकारिक प्रतिक्रिया आना बाकी है।

    विपक्ष का समर्थन
    उन्होंने बताया कि राहुल गांधी, अरविंद केजरीवाल, उद्धव ठाकरे और अखिलेश यादव जैसे नेताओं ने उनसे बातचीत कर समर्थन जताया है।कोलकाता की एक महत्वपूर्ण सीट पर मतों की दोबारा गिनती जारी है। अधिकारियों के अनुसार, अंतिम नतीजे पुनर्गणना पूरी होने के बाद ही घोषित किए जाएंगे।

    ED की कार्रवाई से बढ़ा सियासी तापमान
    इस बीच प्रवर्तन निदेशालय (ED) की कार्रवाई ने भी माहौल को और गरमा दिया है। एक पुलिस अधिकारी के खिलाफ लुकआउट नोटिस जारी किया गया है।

    भाजपा का पलटवार
    भाजपा ने इन आरोपों को खारिज करते हुए कहा कि यह जनता का स्पष्ट जनादेश है। पार्टी नेताओं का दावा है कि जीत संगठन की मेहनत और रणनीति का नतीजा है। कुल मिलाकर, पश्चिम बंगाल के चुनाव नतीजों के बाद राजनीतिक टकराव अपने चरम पर है। एक ओर विपक्ष चुनाव प्रक्रिया पर सवाल उठा रहा है, तो दूसरी ओर सत्ताधारी पक्ष इसे लोकतांत्रिक जनादेश बता रहा है। आने वाले दिनों में यह विवाद और गहराने के संकेत हैं।

  • SIR पर ममता बनर्जी का तीखा हमला: अगर नाम हटाएँ, तो किचन में रखे सामानों के साथ तैयार रहें

    SIR पर ममता बनर्जी का तीखा हमला: अगर नाम हटाएँ, तो किचन में रखे सामानों के साथ तैयार रहें


    नई दिल्ली। पश्चिम बंगाल में स्टैंडर्डाइज्ड इलेक्टोरल रजिस्टर (SIR) को लेकर राजनीतिक तापमान लगातार बढ़ रहा है। इसी बीच मुख्यमंत्री ममता बनर्जी ने कृष्णानगर में एक रैली के दौरान बेहद तीखा और विवादित बयान देते हुए महिलाओं से आह्वान किया कि यदि वोटर लिस्ट की समीक्षा में उनके नाम हटाए जाएँ, तो वे किचन में मौजूद सामानों के साथ तैयार रहें।

    अगर नाम काटे जाएँ… महिलाएँ आगे बढ़ें, पुरुष पीछे खड़े रहें

    कृष्णानगर की सभा में ममता बनर्जी ने कहा,
    अगर चुनाव के दौरान दिल्ली से पुलिस बुलाकर माताओं-बहनों को डराया जाएगा और आपके नाम वोटर लिस्ट से हटाए जाएँगे, तो इसे सहन मत करो। आपके किचन में हथियार हैं… महिलाएँ आगे बढ़ेंगी और पुरुष उनके पीछे खड़े होंगे।

    उनके इस बयान को भाजपा ने भड़काऊ करार दिया है, जबकि तृणमूल समर्थक इसे जन अधिकार की लड़ाई बता रहे हैं।

    बीजेपी पर सांप्रदायिक राजनीति का आरोप

    सभा में ममता ने भाजपा पर तीखे शब्दों में हमला बोला। उन्होंने कहा,
    बीजेपी हर चुनाव में पैसे और बाहरी लोगों का इस्तेमाल कर जनता को बांटती है। मैं धर्मनिरपेक्षता में विश्वास करती हूं। धर्म का मतलब पवित्रता, मानवता और शांति है-हिंसा या भेदभाव नहीं।

    उन्होंने धार्मिक आयोजनों पर भी टिप्पणी की और कहा कि लोग जब घर में गीता का पाठ करते हैं या दिल में अल्लाह से दुआ करते हैं, तब इसका दिखावा करने की जरूरत नहीं होती।

    क्या मुझे दंगाइयों की पार्टी को अपनी नागरिकता साबित करनी होगी?

    NRC और SIR को लेकर केंद्र पर हमला बोलते हुए ममता बोलीं,
    क्या अब मुझे दंगाइयों की पार्टी (बीजेपी) को अपनी नागरिकता साबित करनी पड़ेगी?

    उन्होंने आरोप लगाया कि केंद्रीय गृह मंत्री बंगालियों को बांग्लादेशी बताकर डिटेंशन सेंटर भेजने की कोशिश कर सकते हैं।

    किसी को बंगाल से बाहर नहीं जाने देंगे

    उन्होंने जोर देकर कहा,
    हम किसी को पश्चिम बंगाल से बाहर नहीं निकालने देंगे। अगर किसी को जबरन निकाला गया, तो उसे वापस लाने का तरीका हम जानते हैं।

    राजनीतिक माहौल गरम, SIR पर टकराव बढ़ा

    SIR को लेकर पहले से ही विवाद चल रहा है। तृणमूल कांग्रेस कहती है कि यह बंगालियों को वोटर लिस्ट से हटाने की साजिश है, जबकि बीजेपी इसे पारदर्शिता और फर्जी वोटिंग खत्म करने की प्रक्रिया बताती है।
    ममता का यह बयान आग में घी डालने जैसा माना जा रहा है।