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  • SIR पूरा, लेकिन सियासत जारी: दिग्विजय ने चुनाव आयोग में मतदाता गड़बड़ी का आरोप लगाया

    SIR पूरा, लेकिन सियासत जारी: दिग्विजय ने चुनाव आयोग में मतदाता गड़बड़ी का आरोप लगाया


    भोपाल । भोपाल में एसआईआर यानी विशेष गहन पुनरीक्षण का काम पूरा हो गया है लेकिन सियासत थमने का नाम नहीं ले रही। सोमवार को पूर्व मुख्यमंत्री और वर्तमान राज्यसभा सांसद दिग्विजय सिंह चुनाव आयोग पहुंचे। उन्होंने मतदाता सूची में गड़बड़ी के सबूत प्रस्तुत किए और गंभीर आरोप लगाए कि एसआईआर में फर्जी नाम जोड़े गए और कुछ नाम हटा दिए गए। उनका कहना है कि यह बीजेपी सरकार के दबाव में हुआ।

    दिग्विजय सिंह के साथ पूर्व मंत्री पीसी शर्मा समेत कई वरिष्ठ नेता भी मौजूद थे। उन्होंने चुनाव आयोग से मुलाकात कर शिकायत की और आश्वासन प्राप्त किया कि मामले की जांच की जाएगी। दिग्विजय ने चुनाव आयोग का आभार व्यक्त किया कि उन्होंने उनकी बात सुनी और गड़बड़ी के दस्तावेजों को स्वीकार किया।

    विशेष रूप से उन्होंने तीन अलग अलग घरों में 30 से अधिक मतदाता होने की शिकायत दी। मकान मालिकों ने बताया कि उनके घर में वास्तविक तौर पर केवल 6 या 7 सदस्य हैं लेकिन एसआईआर प्रक्रिया के बाद जारी हुई मतदाता सूची में एक मकान नंबर पर 30 से अधिक सदस्य दर्शाए गए।
    दिग्विजय सिंह ने यह शिकायत भोपाल की नरेला विधानसभा क्षेत्र से लेकर गए थे।

    उनका कहना है कि यह गंभीर अनियमितता है और इससे चुनाव प्रक्रिया की पारदर्शिता प्रभावित होती है।चुनाव आयोग ने इस मामले में जांच का आश्वासन दिया है और कहा है कि शिकायत का उचित समाधान किया जाएगा। इस घटनाक्रम ने मध्यप्रदेश में मतदाता सूची सुधार और उसकी वैधता पर नए सवाल खड़े कर दिए हैं।

  • मध्य प्रदेश: 10 दिन में 11 लाख वोटर्स को हटाने की साजिश? कांग्रेस का बड़ा आरोप, EC के दरवाज़े पर PCC चीफ

    मध्य प्रदेश: 10 दिन में 11 लाख वोटर्स को हटाने की साजिश? कांग्रेस का बड़ा आरोप, EC के दरवाज़े पर PCC चीफ


    नई दिल्ली। मध्य प्रदेश में स्पेशल इंटेंसिव रिवीजन (SIR) के तहत वोटर लिस्ट में नाम जोड़ने, काटने और सुधार की प्रक्रिया 23 जनवरी को खत्म हो रही है। इसी बीच कांग्रेस ने बीजेपी पर वोटर लिस्ट से नाम हटाने की सुनियोजित साजिश का आरोप लगाया है।कांग्रेस का दावा है कि सिर्फ 10 दिनों में लगभग 11 लाख वोटरों के नाम काटने के लिए बीजेपी ने बूथ लेवल ऑफिसर्स (BLOs) को बड़े पैमाने पर फॉर्म-7 उपलब्ध कराए हैं।

    कांग्रेस का मुख्य आरोप: “प्रिंटेड फॉर्म-7” से वोटर हटाए जा रहे हैं
    कांग्रेस का कहना है कि जिन फॉर्म-7 के जरिए नाम हटाए जा रहे हैं, वे प्री-प्रिंटेड (पहले से भरे हुए) हैं।

    इन फॉर्मों में विधानसभा क्रमांक,विधानसभा का नाम,हटाने वाले मतदाता का नाम और विवरण पहले से दर्ज है।
    लेकिन आवेदक का नाम और हस्ताक्षर कहीं नहीं है।कांग्रेस इसे चुनाव आयोग की प्रक्रिया का उल्लंघन और लोकतंत्र पर हमला करार दे रही है।

    जीतू पटवारी ने चुनाव आयोग पर साधा निशाना
    प्रदेश कांग्रेस अध्यक्ष जीतू पटवारी ने कहा, बीजेपी चुनाव हारने के डर से मैदान में नहीं, वोटर लिस्ट में खेल रही है।
    बिना आवेदक के नाम और हस्ताक्षर वाले प्री-प्रिंटेड फॉर्म-7 लोकतंत्र की हत्या का प्रमाण हैं।
    SC, ST, अल्पसंख्यक और गरीब वर्ग के मताधिकार को छीनने की यह सोची-समझी साजिश है।”उन्होंने चेतावनी दी कि अगर चुनाव आयोग ने तत्काल हस्तक्षेप नहीं किया, तो कांग्रेस सड़कों से लेकर अदालत तक यह मुद्दा ले जाएगी।हम एक भी मतदाता का नाम गलत तरीके से कटने नहीं देंगे।

    कांग्रेस की मांग: EC तुरंत कार्रवाई करे
    कांग्रेस ने चुनाव आयोग से निम्नलिखित कार्रवाई की मांग की है
    सभी प्री-प्रिंटेड फॉर्म-7 की तुरंत जांच
    बिना वैध आवेदन और हस्ताक्षर वाले फॉर्मों को निरस्त
    दोषी अधिकारियों और राजनीतिक संरक्षण देने वालों पर कड़ी कार्रवाई
    कांग्रेस का कहना है कि यह सिर्फ राजनीतिक मुद्दा नहीं, बल्कि संविधान और मताधिकार की रक्षा का मामला है।

    एक व्यक्ति ने 25-25 आपत्तियां”कांग्रेस का नया आरोप
    पटवारी ने कहा कि नियमों के अनुसार एक व्यक्ति केवल एक ही आपत्ति दर्ज करा सकता है, लेकिन बीजेपी कार्यकर्ताओं ने एक ही व्यक्ति द्वारा 25-25 आपत्तियां दर्ज कराई हैं।उन्होंने कहा कि इसके प्रमाण चुनाव आयोग को सौंप दिए गए हैं।

    BLO को चेतावनी: अनियमितता मिली तो FIR
    पटवारी ने BLOs को चेतावनी दी कि, यदि किसी भी बूथ पर अनियमितता पाई गई, तो संबंधित BLO के खिलाफ FIR दर्ज कराई जाएगी।
    उन्होंने कहा कि कुछ BLO ईमानदारी से काम कर रहे हैं, लेकिन कुछ भाजपा नेताओं के दबाव में काम कर रहे हैं, जिससे उनकी सर्विस रिकॉर्ड (CR) खराब हो सकती है।

    फर्जी आपत्तियों का आरोप
    पटवारी ने आरोप लगाया कि कई मतदाताओं को जानकारी तक नहीं है, और उनके नाम से ऑनलाइन फर्जी आपत्तियां दर्ज की जा रही हैं।

    यह खासकर अल्पसंख्यक और आदिवासी क्षेत्रों में हो रहा है।उन्होंने कहा:वोट चोरी करके चुनाव जीतने की कोशिश की जा रही है।

    मंत्री विश्वास सारंग पर भी सवाल
    पटवारी ने कहा कि मंत्री विश्वास सारंग पिछले चुनाव हार चुके थे।
    उनकी सीट और दक्षिण-पश्चिम विधानसभा क्षेत्रों से करीब एक-एक लाख वोट कम हुए हैं, जहाँ जीत-हार का अंतर अक्सर इतना ही रहता है।उन्होंने मुख्य निर्वाचन आयुक्त से मांग की कि इन गड़बड़ियों पर तत्काल रोक लगाई जाए।कांग्रेस ने SIR प्रक्रिया पर भारी आरोप लगाए हैं और इसे लोकतंत्र पर हमला बताया है।अब सवाल यह है कि चुनाव आयोग इस मामले में कब और क्या कार्रवाई करता है, क्योंकि 23 जनवरी तक समय बहुत कम है।

  • SIR में धांधली का डर: MP कांग्रेस अलर्ट मोड में, 19 से 22 जनवरी तक रोज दावे-आपत्ति पर नजर रखने के निर्देश

    SIR में धांधली का डर: MP कांग्रेस अलर्ट मोड में, 19 से 22 जनवरी तक रोज दावे-आपत्ति पर नजर रखने के निर्देश


    भोपाल । मध्य प्रदेश में मतदाता सूची के विशेष गहन पुनरीक्षण (स्पेशल इंटेंसिव रिवीजन–SIR को लेकर सियासी माहौल गरमा गया है। दावे-आपत्ति की प्रक्रिया के दौरान संभावित गड़बड़ियों को लेकर मध्य प्रदेश कांग्रेस ने गंभीर आशंका जताई है और पार्टी संगठन को पूरी तरह अलर्ट मोड पर रहने के निर्देश जारी किए हैं। कांग्रेस का आरोप है कि भाजपा इस प्रक्रिया के जरिए मतदाता सूची में हेरफेर कर वोट चोरी की कोशिश कर सकती है, इसलिए हर स्तर पर सतर्कता बेहद जरूरी है।

    प्रदेश कांग्रेस कमेटी की ओर से जारी निर्देशों में साफ कहा गया है कि 19 जनवरी से 22 जनवरी तक दावे-आपत्ति की प्रक्रिया पर रोजाना नजर रखी जाए। पार्टी ने सभी जिला, ब्लॉक, मंडल और बूथ स्तर के पदाधिकारियों को निर्देशित किया है कि वे अपने-अपने क्षेत्रों में फॉर्म भरने की स्थिति, नाम जोड़ने या काटने की गतिविधियों की प्रतिदिन जानकारी जुटाएं और उसे संगठन के वरिष्ठ स्तर तक पहुंचाएं। कांग्रेस का कहना है कि किसी भी कीमत पर यह सुनिश्चित किया जाए कि न तो कोई गलत नाम मतदाता सूची में जोड़ा जाए और न ही किसी योग्य मतदाता का नाम गलत तरीके से हटाया जाए।

    कांग्रेस ने विशेष रूप से फॉर्म-7 को लेकर सतर्क रहने को कहा है। पार्टी ने स्पष्ट किया है कि निर्वाचन आयोग द्वारा जारी आधिकारिक फॉर्म-7 ही मान्य है। यदि कहीं भी बाहर छपे हुए या अनधिकृत फॉर्म-7 का इस्तेमाल होता दिखाई दे, तो उस पर तत्काल आपत्ति दर्ज कराई जाए और इसकी सूचना संबंधित निर्वाचन अधिकारी के साथ-साथ पार्टी संगठन को भी दी जाए। कांग्रेस का आरोप है कि पूर्व में भी इसी तरह के फॉर्म का दुरुपयोग कर मतदाता सूची से नाम हटाने के प्रयास किए गए हैं। पार्टी ने अपने कार्यकर्ताओं से अपील की है कि वे बूथ स्तर पर सक्रिय भूमिका निभाएं और आम मतदाताओं, खासकर कमजोर, वंचित और अल्पसंख्यक वर्ग के लोगों की मदद करें। यदि किसी मतदाता का नाम गलत तरीके से काटा गया हो या काटने का प्रयास हो रहा हो, तो तुरंत दावे-आपत्ति की प्रक्रिया के तहत कार्रवाई कराई जाए। कांग्रेस नेताओं का कहना है कि यह केवल एक प्रशासनिक प्रक्रिया नहीं, बल्कि लोकतंत्र की रक्षा की लड़ाई है।

    ये निर्देश ऐसे समय जारी किए गए हैं, जब SIR के तहत जारी ड्राफ्ट मतदाता सूची में लाखों नाम कटने को लेकर प्रदेशभर में राजनीतिक विवाद खड़ा हो गया है। कांग्रेस इसे लोकतांत्रिक व्यवस्था पर सीधा हमला बता रही है, जबकि चुनाव आयोग का कहना है कि पूरी प्रक्रिया पारदर्शी है और नियमों के तहत की जा रही है। बावजूद इसके कांग्रेस का मानना है कि सतर्कता में ही सुरक्षा है और किसी भी स्तर पर ढिलाई भारी पड़ सकती है। कांग्रेस ने साफ किया है कि 22 जनवरी 2026 दावे-आपत्ति की अंतिम तिथि है। इसके बाद अंतिम मतदाता सूची जारी की जाएगी। पार्टी ने चेतावनी दी है कि यदि इस दौरान किसी भी तरह की गड़बड़ी सामने आती है, तो वह सड़क से लेकर आयोग तक हर स्तर पर आवाज उठाएगी।

  • SIR प्रक्रिया से डर या प्रशासनिक दबाव? ममता बनर्जी का दावा, 77 मौतें हो चुकीं

    SIR प्रक्रिया से डर या प्रशासनिक दबाव? ममता बनर्जी का दावा, 77 मौतें हो चुकीं


    नई दिल्ली । पश्चिम बंगाल में मतदाता सूची के स्पेशल इंटेंसिव रिवीजन SIR प्रक्रिया के कारण हुई मौतों के आरोप अब बढ़ते जा रहे हैं। राज्य के विभिन्न इलाकों से यह खबरें सामने आ रही हैं कि इस प्रक्रिया से जुड़े मानसिक दबाव और तनाव के कारण कुछ लोगों की मौत हो गई है। मुख्यमंत्री ममता बनर्जी ने इस मामले पर बड़ा बयान देते हुए कहा कि SIR से जुड़ी चिंता के कारण राज्य में अब तक 77 मौतें हो चुकी हैं। उनके मुताबिक, यह स्थिति गंभीर होती जा रही है, और इससे लोगों के जीवन पर गहरा असर पड़ रहा है।

    कोलकाता के विभिन्न हिस्सों और अन्य जिलों से सामने आई रिपोर्टों में दावा किया गया है कि SIR के नोटिस मिलने के बाद मानसिक तनाव और चिंता की वजह से दो लोगों की मौत हो गई। इनमें से एक मामला उत्तर दिनाजपुर जिले के कालियागंज क्षेत्र का है जहां 50 वर्षीय लक्ष्मीकांत राय की सोमवार को अचानक मौत हो गई। उनके परिजनों का कहना है कि उन्हें हाल ही में SIR के तहत सुनवाई के लिए नोटिस मिला था जिसके बाद वे गहरे मानसिक दबाव में थे। राय के बेटे हीरू राय ने कहा नोटिस मिलने के बाद से पापा खाना-पीना छोड़ चुके थे और काम पर भी नहीं जा रहे थे। उन्हें डर था कि उनका नाम मतदाता सूची से हट सकता है और इस कारण उनका वोटिंग अधिकार छिन सकता है।

    दूसरी घटना उत्तर 24 परगना जिले के बसीरहाट इलाके की है जहां अनीता बिस्वास नामक बुजुर्ग महिला की स्ट्रोक के कारण मौत हो गई। उनके परिवार का आरोप है कि SIR प्रक्रिया के तहत सुनवाई में शामिल होने के बाद वह मानसिक रूप से परेशान हो गई थीं। अनीता की मौत के बाद उनके बेटे काशीनाथ बिस्वास ने बताया कि उनकी मां का नाम 1995 की मतदाता सूची में था लेकिन 2002 की सूची में उनका नाम गायब था। 5 जनवरी को दस्तावेज जमा करने के बावजूद कोई स्पष्ट जवाब नहीं मिलने से वह तनाव में रहने लगीं और अंतत स्ट्रोक के कारण उनकी मौत हो गई।

    इस पूरे मामले पर राजनीति भी गर्मा गई है। तृणमूल कांग्रेस के नेता निताई वैश्य ने चुनाव आयोग को जिम्मेदार ठहराया और इस प्रक्रिया को निरर्थक और दमनकारी बताया। वहीं बीजेपी युवा नेता गौरांग दास ने इन आरोपों को राजनीति से प्रेरित करार दिया और कहा कि यह सिर्फ राजनीतिक विरोध का हिस्सा है। पुलिस ने बताया कि इन मौतों का वास्तविक कारण पोस्टमार्टम रिपोर्ट के बाद ही स्पष्ट हो पाएगा, लेकिन फिलहाल प्रशासन इस मुद्दे को लेकर कोई ठोस कदम उठाने में विफल नजर आ रहा है।

    कोलकाता में बूथ लेवल ऑफिसर कर्मचारियों ने भी प्रदर्शन किया है और आरोप लगाया है कि अत्यधिक काम के दबाव के कारण कई कर्मचारियों की भी मौत हो चुकी है। प्रदर्शन के दौरान पुलिस से झड़पों की भी खबरें आईं। इसने इस मुद्दे को और भी गंभीर बना दिया है और सवाल उठ रहे हैं कि क्या यह प्रशासनिक प्रक्रिया आम नागरिकों पर अत्यधिक दबाव डाल रही है।

  • भोपाल में 1.16 लाख वोटरों की अग्निपरीक्षा आज से मतदाता सूची शुद्धिकरण अभियान जारी

    भोपाल में 1.16 लाख वोटरों की अग्निपरीक्षा आज से मतदाता सूची शुद्धिकरण अभियान जारी


    भोपाल । भोपाल में मतदाता सूची शुद्धिकरण अभियान के तहत 116925 वोटर्स की पहचान की जा चुकी है जिनका डिजिटल नक्शे में कोई रिकॉर्ड नहीं है। इसका मतलब है कि ये मतदाता निर्वाचन आयोग के मानचित्र पर लापता हैं। सोमवार से इन वोटरों की नागरिकता और मतदान अधिकारों की सुनवाई शुरू हो रही है जिससे यह सुनिश्चित किया जाएगा कि कोई भी योग्य मतदाता वोट देने से वंचित न रहे।

    भोपाल के सभी 85 वार्ड कार्यालयों तहसील और नजूल दफ्तरों में सहायक निर्वाचक रजिस्ट्रीकरण अधिकारी सोमवार से इन नो-मैपिंग मतदाताओं की दलीलें सुनेंगे। अब तक जिला निर्वाचन कार्यालय 50000 से ज्यादा मतदाताओं को नोटिस भेज चुका है और बीएलओ बूथ लेवल ऑफिसर घर-घर जाकर भी नोटिस वितरित कर रहे हैं।

    इस प्रक्रिया के अंतर्गत 4.38 लाख फर्जी या अपात्र मतदाताओं के नाम सूची से काटे जा चुके हैं और अब ये वोटर अपनी सुनवाई में भाग न लेने पर चुनाव के दिन पोलिंग बूथ पर अपना नाम नहीं पाएंगे। इस बीच दो लाख नए मतदाताओं को जोड़ने का अनुमान है और फार्म-6 का वितरण जारी है।

    सुनवाई में जाने के लिए जरूरी दस्तावेज

    यदि आपको नोटिस मिला है तो अपनी नागरिकता और उम्र प्रमाणित करने के लिए आपको कुछ दस्तावेज साथ लाने होंगे जैसे,आधार कार्ड या पासपोर्ट,निवास प्रमाण पत्र बिजली बिल या राशन कार्ड,आयु प्रमाण पत्र,जारी किया गया नोटिस ।

    नो-मैपिंग की समस्या का कारण

    वोटर आईडी अपडेट न कराने के कारण कई लोग नो-मैपिंग समस्या का सामना कर रहे हैं खासकर वे लोग जिनका घर बदल चुका है। उप निर्वाचन अधिकारी भुवन गुप्ता ने कहा “यह सुनवाई आपके डिजिटल रूप से सुरक्षित होने का एक मौका है और यह लोकतंत्र की मजबूती के लिए जरूरी है। अगर आप नोटिस मिलने के बाद भी सुनवाई में नहीं जाते तो आप मतदान से बाहर हो सकते हैं। मतदान के दिन अपनी पहचान और लोकतांत्रिक अधिकारों को सुरक्षित रखने के लिए यह प्रक्रिया बेहद महत्वपूर्ण है।

  • SIR को चुनौती…. SC बोला- वोटर लिस्ट में गड़बड़ी पर क्या आंखें मूंद ले चुनाव आयोग?

    SIR को चुनौती…. SC बोला- वोटर लिस्ट में गड़बड़ी पर क्या आंखें मूंद ले चुनाव आयोग?


    नई दिल्ली।
    सुप्रीम कोर्ट (Supreme Court) ने गुरुवार को कहा कि विशेष गहन पुनरीक्षण (Special in-depth review-SIR) को लेकर जारी अधिसूचना में ‘माइग्रेशन’ शब्द की व्याख्या केवल देश के भीतर के प्रवासन तक सीमित नहीं मानी जा सकती, बल्कि इसमें सीमा पार प्रवासन भी शामिल हो सकता है। अदालत ने यह टिप्पणी उन याचिकाओं की सुनवाई के दौरान की जिनमें बिहार में SIR को चुनौती देते हुए आरोप लगाया गया है कि चुनाव आयोग (Election Commission- ECI) नागरिकता पर संदेह के आधार पर लोगों को मतदाता सूची से हटाकर मताधिकार छीन रहा है।

    सुप्रीम कोर्ट ने कहा कि SIR कोई नियमित प्रक्रिया नहीं है और बिहार में यह 2003 के बाद पहली बार किया जा रहा है। कोर्ट ने पूछा, “क्या चुनाव आयोग मतदाता सूची की शुचिता बनाए रखने के लिए किसी ‘शुद्धिकरण और छंटनी’ की प्रक्रिया नहीं अपना सकता? यदि गड़बड़ियां मिलें तो क्या आयोग को आंख मूंद लेनी चाहिए?”

    मुख्य न्यायाधीश सूर्यकांत और न्यायमूर्ति जॉयमाल्या बागची की पीठ ने कहा, “माइग्रेशन ट्रांस-कंट्री भी हो सकता है। यह केवल देश के भीतर का प्रवासन नहीं है। आजीविका और अन्य कारणों से लोग विदेशी सीमाएं पार करते हैं। ‘ब्रेन ड्रेन’ भी प्रवासन ही है।”

    पीठ की यह टिप्पणी वरिष्ठ अधिवक्ता राजू रामचंद्रन के उस तर्क के जवाब में आई, जिसमें उन्होंने कहा था कि यदि चुनाव आयोग नागरिकता की जांच करना चाहता था, तो उसे 24 जून के आदेश में स्पष्ट रूप से उल्लेख करना चाहिए था। आदेश में SIR का आधार केवल “तेजी से शहरीकरण” और “शिक्षा व आजीविका के लिए बार-बार होने वाला जनसंख्या का स्थानांतरण” बताया गया था।


    BLO के संदेह पर नाम हटाना खतरनाक— याचिकाकर्ता

    रामचंद्रन ने दलील दी कि SIR को विदेशी नागरिकों की पहचान से जोड़ना असंवैधानिक है, क्योंकि नागरिकता की जांच के लिए पहले से वैधानिक प्रक्रिया मौजूद है। उन्होंने कहा, “सिर्फ बूथ लेवल ऑफिसर के संदेह पर किसी को मतदाता सूची से हटाना बेहद खतरनाक है।” कोर्ट ने जवाब दिया कि उनकी टिप्पणियां अंतिम निष्कर्ष नहीं हैं बल्कि मुद्दे पर बेहतर तर्कों के लिए एक प्रयास हैं।

    याचिकाकर्ताओं ने आरोप लगाया कि यह प्रक्रिया ‘गलत संदेह’ पर आधारित है और बड़े पैमाने पर मतदाताओं को अयोग्य घोषित करने की कोशिश है। रामचंद्रन ने कहा, “ECI का कर्तव्य मतदाता को सक्षम बनाना है, निष्क्रिय करना नहीं।” उन्होंने यह भी कहा कि बिहार के बाद नौ राज्यों और तीन केंद्र शासित प्रदेशों में SIR को लागू करना “कॉपी-पेस्ट” जैसा है, जो चुनाव आयोग की “मस्तिष्क-प्रक्रिया की कमी” दर्शाता है।

    अदालत ने मामले की अगली सुनवाई 16 दिसंबर के लिए तय की है, जब चुनाव आयोग अपनी विस्तृत प्रतिक्रिया देगा। अगले सप्ताह उत्तर प्रदेश, तमिलनाडु, केरल, पुदुचेरी और पश्चिम बंगाल में SIR को चुनौती देने वाली याचिकाओं पर भी सुनवाई होगी।

  • SIR विवाद के बीच ममता बनर्जी का भड़काऊ बयान विपक्ष ने साधा निशाना

    SIR विवाद के बीच ममता बनर्जी का भड़काऊ बयान विपक्ष ने साधा निशाना


    नई दिल्ली । पश्चिम बंगाल में SIR प्रक्रिया को लेकर सियासी घमासान बढ़ता ही जा रहा है। मुख्यमंत्री ममता बनर्जी का हालिया बयान इस विवाद में नया मोड़ लेकर आया है। ममता ने महिलाओं से अपील की कि वे वोटर लिस्ट की समीक्षा के दौरान यदि किसी का नाम हटाने की कोशिश की जाए तो रसोई के सामान के साथ तैयार रहें। उनका कहना था कि यदि दिल्ली से पुलिस भेजकर महिलाओं को डराने की कोशिश की गई तो वे किचन को हथियार बना सकती हैं। इस बयान ने सियासी हलकों में हलचल पैदा कर दी है और SIR विवाद को और हवा दी है।

    ममता का बयान: महिलाओं को रसोई से चेतावनी

    कृष्णानगर में आयोजित एक जनसभा में ममता बनर्जी ने वोटर लिस्ट की समीक्षा के मुद्दे पर कड़ा रुख अपनाया। उन्होंने महिलाओं से कहा कि अगर चुनाव के दौरान दिल्ली से पुलिस भेजकर उन्हें डराने की कोशिश की गई तो महिलाएं रसोई के सामानों के साथ तैयार रहें क्योंकि आवश्यकता पड़ने पर किचन भी हथियार बन सकता है। ममता का यह बयान सीधे तौर पर बीजेपी की कथित दबावकारी राजनीति पर हमला माना जा रहा है।

    उनका कहना था कि महिलाएं इस लड़ाई में नेतृत्व करेंगी और पुरुष उनका समर्थन करेंगे। यह बयान उन आरोपों के संदर्भ में आया है जिसमें बीजेपी पर वोटर लिस्ट में गड़बड़ी और असहमति रखने वाले लोगों को डराने-धमकाने का आरोप लगाया जा रहा है। ममता बनर्जी का यह बयान बंगाल की राजनीतिक परिस्थितियों को और गर्म कर गया है जिससे राज्य में सियासी हलचल तेज हो गई है।

    बीजेपी और ममता के बीच तकरार

    ममता ने बीजेपी पर आरोप लगाया कि वह चुनावों में पैसे और बाहरी लोगों के सहारे समाज को बांटने की कोशिश करती है जो बंगाल की संस्कृति के खिलाफ है। उन्होंने कहा कि बंगाल सदियों से सौहार्द और भाईचारे का प्रतीक रहा है और यहां दुर्गा पूजा से लेकर रमजान तक दोनों त्योहार मिल-जुलकर मनाए जाते हैं। ममता ने बीजेपी पर सांप्रदायिक राजनीति फैलाने का आरोप भी लगाया और सवाल किया कि क्या वे सच में भगवान कृष्ण की शिक्षाओं का पालन करते हैं जो शांति और मानवता की बात करते हैं न कि हिंसा और भेदभाव की।

    केंद्र पर बड़ा आरोप: बंगालियों को बांग्लादेशी बताने की साजिश

    ममता बनर्जी ने केंद्र सरकार और केंद्रीय गृह मंत्री पर भी तीखे आरोप लगाए। उन्होंने कहा कि SIR प्रक्रिया के तहत बंगालियों को बांग्लादेशी घोषित किया जा रहा है और उन्हें डिटेंशन सेंटर भेजने की साजिश की जा रही है। ममता ने चेतावनी दी कि अगर किसी बंगाली को जबरन राज्य से बाहर किया गया तो उनकी सरकार उसे वापस लाने का तरीका जानती है।

    इस बयान ने राजनीतिक माहौल को और गर्म कर दिया है और ममता के आरोपों ने केंद्र सरकार को बैकफुट पर ला दिया है।ममता ने यह भी सवाल उठाया कि क्या अब उन्हें भी अपनी नागरिकता साबित करनी पड़ेगी जो राज्य में राजनीतिक तनाव को और गहरा करता है। उनके इस बयान ने SIR प्रक्रिया पर चल रही बहस को और तीव्र कर दिया है।

    SIR विवाद पर सियासी घमासान

    पश्चिम बंगाल में SIR प्रक्रिया को लेकर सियासी बयानबाजी तेज होती जा रही है। ममता बनर्जी इसे बंगालियों की पहचान और नागरिकता पर हमला मान रही हैं जबकि बीजेपी का कहना है कि यह केवल चुनावी पारदर्शिता और मतदाता सूची की शुद्धता सुनिश्चित करने के लिए आवश्यक है। ममता बनर्जी का यह बयान केंद्र सरकार और बीजेपी के खिलाफ तीखा पलटवार है जो इसे चुनावी प्रक्रिया में सुधार मानते हैं।

    सियासी विश्लेषकों का मानना है कि ममता के बयान ने SIR विवाद को और गहरा कर दिया है और अब यह मुद्दा केवल चुनावी पारदर्शिता तक सीमित नहीं रहेगा बल्कि राज्य में सांस्कृतिक और नागरिकता के सवालों से भी जुड़ जाएगा। ममता बनर्जी का यह बयान राजनीति में नई खींचतान का कारण बन सकता है और आने वाले दिनों में इस विवाद के और बढ़ने की संभावना है।

    SIR विवाद ने पश्चिम बंगाल की राजनीति को और उबाल दिया है और ममता बनर्जी के हालिया भड़काऊ बयान ने राजनीतिक तनाव को और बढ़ा दिया है। बीजेपी और ममता के बीच का यह टकराव अब एक नई दिशा की ओर बढ़ रहा है जिससे राज्य की राजनीति में और भी उतार चढ़ाव आ सकते हैं। ममता का बयान न केवल SIR प्रक्रिया के संदर्भ में है बल्कि यह बंगाल की सांस्कृतिक पहचान और नागरिकता से जुड़े बड़े मुद्दों को भी छेड़ता है। अब देखना यह होगा कि यह विवाद किस दिशा में जाता है और राज्य की राजनीति में क्या नया मोड़ आता है।