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  • पीलीभीत में वोटर लिस्ट की गड़बड़ी पर चुनाव आयोग का एक्शन, SDM रैंक के दो अधिकारी सस्पेंड

    पीलीभीत में वोटर लिस्ट की गड़बड़ी पर चुनाव आयोग का एक्शन, SDM रैंक के दो अधिकारी सस्पेंड


    पीलीभीत। उत्तर प्रदेश के पीलीभीत में मतदाता सूची में गड़बड़ी का मामला सामने आने के बाद चुनाव आयोग ने सख्त रुख अपनाया है। आयोग ने निर्वाचक रजिस्ट्रीकरण अधिकारी मयंक गोस्वामी और हेमंत चौधरी को तत्काल प्रभाव से निलंबित करने का निर्देश दिया है। साथ ही स्पष्ट किया है कि उसकी अनुमति के बिना दोनों अधिकारियों को बहाल नहीं किया जाएगा।

    मामला पीलीभीत की सदर विधानसभा क्षेत्र की मतदाता सूची में सामने आई अनियमितताओं से जुड़ा है। आयोग ने इस प्रकरण की गंभीरता को देखते हुए न केवल संबंधित अधिकारियों के खिलाफ कार्रवाई के निर्देश दिए हैं, बल्कि पूरे जिले की मतदाता सूचियों की दोबारा जांच कराने का भी फैसला किया है।

    कंप्यूटर ऑपरेटर के खिलाफ FIR में बढ़ेगी एक और धारा

    चुनाव आयोग ने मतदाता पंजीकरण केंद्र में तैनात कंप्यूटर ऑपरेटर अनिल कुमार के खिलाफ पहले से दर्ज एफआईआर में भारतीय न्याय संहिता (BNS) की धारा 198 जोड़ने का निर्देश दिया है। इस मामले में मयंक गोस्वामी और हेमंत चौधरी के नाम भी एफआईआर में दर्ज हैं। आयोग ने संबंधित अधिकारियों को निर्देश दिया है कि इस आदेश का पालन सुनिश्चित किया जाए।

    चारों विधानसभा क्षेत्रों की वोटर लिस्ट का होगा सत्यापन

    सदर विधानसभा क्षेत्र की मतदाता सूची में गड़बड़ी सामने आने के बाद आयोग ने पीलीभीत जिले की सभी चार विधानसभा सीटों की वोटर लिस्ट का दोबारा सत्यापन कराने को कहा है। इसके लिए जिला निर्वाचन अधिकारी को निर्देश जारी किए गए हैं।

    आयोग ने इस पूरी प्रक्रिया की रिपोर्ट एक सप्ताह के भीतर सौंपने को कहा है। वहीं, मतदाता सूची में गड़बड़ी के मामले में दोषी पाए गए कर्मचारियों और अधिकारियों के खिलाफ की गई कार्रवाई की रिपोर्ट तीन दिन में देने के निर्देश दिए हैं।

    चुनाव आयोग की इस कार्रवाई के बाद अब जांच में यह सामने आना बाकी है कि मतदाता सूची में हुई गड़बड़ी के पीछे किन लोगों की भूमिका थी। चारों विधानसभा क्षेत्रों की सूचियों के दोबारा सत्यापन से मामले से जुड़े अन्य तथ्य भी सामने आ सकते हैं।

  • MP: मतदाता सूची में नाम जुड़वाने की मची होड़…. अक्टूबर के शुरुआती 13 दिन में 4 लाख से ज्यादा आवेदन

    MP: मतदाता सूची में नाम जुड़वाने की मची होड़…. अक्टूबर के शुरुआती 13 दिन में 4 लाख से ज्यादा आवेदन


    भोपाल।
    मध्य प्रदेश (Madhya Pradesh) में मतदाता सूची (Voter List) में नाम जुड़वाने के लिए 1 अक्टूबर से अब तक Form 6 के 4,06,338 आवेदन प्राप्त हुए हैं. इनमें 18 से 19 वर्ष की उम्र के युवाओं के 1,92,851 आवेदन शामिल हैं. मुख्य निर्वाचन पदाधिकारी (CEO) संजीव कुमार झा ने यह जानकारी दी।

    मुख्य निर्वाचन पदाधिकारी संजीव कुमार झा (Chief Electoral Officer Sanjeev Kumar Jha) के अनुसार, भारत निर्वाचन आयोग (Election Commission of India) के निर्देशों के तहत प्रदेशभर में बूथ लेवल ऑफिसर (BLO) Form 6 के आवेदन एकत्र कर रहे हैं. पात्र नागरिकों को मतदाता सूची में शामिल करने के लिए मध्य प्रदेश के अलग-अलग स्थानों पर विशेष शिविर भी आयोजित किए जा रहे हैं। इन शिविरों का उद्देश्य पात्र नागरिकों को आवेदन जमा करने में मदद करना और उनका नाम मतदाता सूची में जुड़वाने की प्रक्रिया को आसान बनाना है।


    क्या है Form 6 और कौन कर सकता है आवेदन?

    Form 6 भारतीय नागरिकों के लिए मतदाता सूची में नए मतदाता के रूप में नाम दर्ज कराने का निर्धारित आवेदन पत्र है. इसके लिए आवेदक की उम्र निर्धारित अर्हता तिथि पर कम से कम 18 वर्ष होनी चाहिए. साथ ही, उसे उस निर्वाचन क्षेत्र का सामान्य निवासी होना जरूरी है, जहां वह मतदाता के रूप में पंजीकरण कराना चाहता है।

    ऑनलाइन और ऑफलाइन दोनों तरीकों से कर सकते हैं आवेदन
    भारत निर्वाचन आयोग के अनुसार, पात्र नागरिक Form 6 के लिए ऑनलाइन और ऑफलाइन दोनों माध्यमों से आवेदन कर सकते हैं.
    ऑनलाइन: निर्वाचन आयोग के Voter Services Portal के माध्यम से.
    ऑफलाइन: संबंधित निर्वाचन रजिस्ट्रीकरण अधिकारी (ERO), सहायक निर्वाचन रजिस्ट्रीकरण अधिकारी (AERO) या बूथ लेवल ऑफिसर (BLO) के पास आवेदन जमा करके।

    Form 6 पर सुप्रीम कोर्ट ने क्या कहा?
    इस बीच, बिहार में मतदाता सूची के विशेष गहन पुनरीक्षण (Special Intensive Revision यानी SIR) से जुड़े मामले की सुनवाई के दौरान सुप्रीम कोर्ट ने Form 6 को लेकर महत्वपूर्ण टिप्पणी की. सोमवार को मुख्य न्यायाधीश सूर्यकांत और न्यायमूर्ति जॉयमाल्य बागची तथा न्यायमूर्ति वी. मोहना की पीठ ने स्पष्ट किया कि अदालत ने नए Form 6 को न तो मंजूरी दी है और न ही उसे खारिज किया है। पीठ के अनुसार, बिहार में SIR से संबंधित मामले की सुनवाई के दौरान इस मुद्दे पर न्यायिक निर्णय नहीं दिया गया था.

    दरअसल, निर्वाचन आयोग ने 26 सितंबर को जारी एक प्रेस विज्ञप्ति में संकेत दिया था कि सुप्रीम कोर्ट ने मई 2026 के बिहार SIR से संबंधित फैसले में Form 6 के घोषणा-पत्र को बरकरार रखा था. अब शीर्ष अदालत ने स्पष्ट किया है कि उस सुनवाई में नए Form 6 की वैधता या स्वीकार्यता पर फैसला नहीं हुआ था।

    युवाओं के लिए मतदाता बनने का अवसर
    मध्य प्रदेश में 1 अक्टूबर से अब तक मिले कुल 4,06,338 आवेदनों में करीब 47.45 प्रतिशत आवेदन 18 से 19 वर्ष के युवाओं के हैं. यह आंकड़ा नए मतदाताओं के रजिस्ट्रेशन की प्रक्रिया में युवाओं की भागीदारी को दर्शाता है. पात्र नागरिक Form 6 के माध्यम से मतदाता सूची में अपना नाम शामिल कराने के लिए आवेदन कर सकते हैं. आवेदन करने से पहले निर्धारित पात्रता और जरूरी दस्तावेजों की जानकारी निर्वाचन आयोग के आधिकारिक पोर्टल से प्राप्त की जा सकती है।

  • दिल्ली में मतदाता सूची में नाम जोड़ने का एक और मौका मिलेगा…. SIR में छूटे वोटरों की टेंशन हुई कम

    दिल्ली में मतदाता सूची में नाम जोड़ने का एक और मौका मिलेगा…. SIR में छूटे वोटरों की टेंशन हुई कम


    नई दिल्ली।
    दिल्ली (Delhi) के मुख्य निर्वाचन अधिकारी अशोक कुमार (Chief Electoral Officer Ashok Kumar) ने सोमवार को कहा कि एसआईआर प्रक्रिया (SIR Process) के दौरान मतदाता सूची से छूटे पात्र मतदाताओं के लिए 18 और 25 अक्तूबर को विशेष शिविर लगाए जाएंगे। इनमें जवाब दाखिल कर निस्तारण करा सकेंगे, वहीं पात्र लोग फॉर्म-6 भरकर जमा कर सकेंगे। उन्होंने बताया कि फॉर्म-6 (Form-6) के साथ जरूरी दस्तावेज जमा करने वाले सभी पात्र मतदाताओं के नाम मतदाता सूची (Voter List) में शामिल किए जाएंगे। कोई भी पात्र मतदाता सूची से बाहर नहीं छूटेगा।

    दिल्ली के मुख्य निर्वाचन अधिकारी (CEO) के कार्यालय के मुताबिक 33 लाख नोटिस पाने वाले मतदाताओं में से करीब 20 लाख मतदाताओं के नोटिस का निस्तारण किया जा चुका है। सोमवार को हुई समीक्षा बैठक में सभी एसडीएम ने अपने-अपने क्षेत्रों में जारी नोटिस के निस्तारित हो चुके मामलों की जानकारी दी।

    सीईओ कार्यालय का कहना है कि तार्किक विसंगतियों और नो-मैपिंग के कारण जिन मतदाताओं को नोटिस जारी हुए थे, उनकी ओर से दस्तावेज जमा कराकर नोटिस का निस्तारण कराया जा रहा है। अब तक ऐसे चार विशेष कैंप लगाए जा चुके हैं।


    पिछले हफ्ते मिले थे विपक्षी दल

    इससे पहले इंडिया गठबंधन के नेताओं ने बीते बुधवार को दिल्ली के मुख्य निर्वाचन अधिकारी से मुलाकात की थी और एसआईआर को रद्द करने और राष्ट्रीय राजधानी की मसौदा मतदाता सूची से हटाए गए 47.56 लाख लोगों के नाम पुनः जोड़ने की मांग की थी। विपक्षी दलों द्वारा जारी एक बयान के अनुसार, कश्मीरी गेट से दिल्ली निर्वाचन कार्यालय तक मार्च निकालने के बाद कांग्रेस, राष्ट्रीय जनता दल, भारतीय कम्युनिस्ट पार्टी, मार्क्सवादी कम्युनिस्ट पार्टी, माले और तृणमूल कांग्रेस (ममता गुट) के नेताओं के एक प्रतिनिधिमंडल ने सीईओ अशोक कुमार को एक ज्ञापन सौंपा।

    जानकारी के मुताबिक एसआईआर के दौरान तैयार की गई मसौदा सूची से 47 लाख से अधिक नाम बाहर कर दिए गए हैं, जबकि रिकॉर्ड में विसंगतियां होने के कारण 33 लाख से अधिक लोगों को नोटिस जारी किए गए हैं। बयान में कहा गया था कि विपक्षी गठबंधन के नेताओं ने नोटिस वापस लेने और उन सभी पात्र मतदाताओं के नाम मतदाता सूची में बहाल करने की मांग की, जिनके नाम हटा दिए गए हैं।

  • वोटर लिस्ट में नाम नहीं है तो तुरंत करें आवेदन, भोपाल में 8-9 अक्टूबर को शिविर, युवाओं के लिए भी शुरू हुई प्रक्रिया

    वोटर लिस्ट में नाम नहीं है तो तुरंत करें आवेदन, भोपाल में 8-9 अक्टूबर को शिविर, युवाओं के लिए भी शुरू हुई प्रक्रिया


    भोपाल । भोपाल में मतदाता सूची को लेकर महत्वपूर्ण प्रक्रिया शुरू हो गई है। स्पेशल इंटेंसिव रिवीजन यानी SIR के दौरान सूची से बाहर हुए नामों की दोबारा जांच की जा रही है। इसके लिए भोपाल में 8 और 9 अक्टूबर को विशेष शिविर लगाए जा रहे हैं। बूथ लेवल ऑफिसर यानी BLO घर घर जाकर भी जानकारी जुटा रहे हैं और यह पता किया जा रहा है कि जिन लोगों के नाम मतदाता सूची से हटे हैं उनमें कितने लोग वास्तव में पात्र मतदाता हैं। भोपाल में ऐसे करीब 3.88 लाख नामों की जांच की जा रही है। जिन लोगों के नाम जांच के दौरान पात्र पाए जाएंगे उनके नाम दोबारा मतदाता सूची में जोड़े जा सकेंगे। नागरिक ऑनलाइन माध्यम से भी आवेदन कर सकते हैं।

    करीब 11 महीने पहले SIR की प्रक्रिया के दौरान भोपाल की मतदाता संख्या में बड़ा बदलाव हुआ था। उस समय जिले में कुल 21 लाख 25 हजार 908 मतदाता दर्ज थे। प्रक्रिया पूरी होने के बाद यह संख्या घटकर करीब 16.87 लाख रह गई। इस सूची में करीब 1 लाख 503 मतदाता ऐसे बताए गए हैं जो अनुपस्थित पाए गए थे जबकि 2 लाख 86 हजार 661 मतदाताओं को स्थायी रूप से स्थानांतरित यानी परमानेंट शिफ्टेड श्रेणी में रखा गया था। अब इन नामों का दोबारा सत्यापन किया जा रहा है ताकि पात्र मतदाताओं के नाम सूची में बनाए रखे जा सकें।

    भोपाल की सभी सात विधानसभा सीटों बैरसिया हुजूर भोपाल उत्तर भोपाल मध्य दक्षिण पश्चिम गोविंदपुरा और नरेला में विशेष शिविर लगाए जा रहे हैं। 7 अक्टूबर को भी शिविरों में लोग पहुंचे और अपने नाम से जुड़ी जानकारी की जांच कराई। गुरुवार और शुक्रवार को भी नागरिक इन शिविरों में पहुंचकर प्रक्रिया पूरी कर सकते हैं। इसके साथ ही BLO की ओर से तैयार की गई सूचियों को मान्यता प्राप्त राजनीतिक दलों के बूथ लेवल एजेंटों के साथ भी साझा किया जाएगा। इसका उद्देश्य पूरी प्रक्रिया में पारदर्शिता बनाए रखना है।

    मतदाता सूची में ऐसे नाम भी शामिल हैं जिनकी मृत्यु हो चुकी है या जिनके नाम एक से अधिक स्थानों पर दर्ज पाए गए हैं। ऐसे मामलों की भी जांच की जा रही है। वहीं जो लोग स्थायी रूप से कहीं और चले गए हैं उनके नाम हटाए जाने की प्रक्रिया जारी रहेगी। दूसरी ओर ऐसे वास्तविक मतदाता जो अपने पते पर नहीं मिले थे या SIR के दौरान किसी कारण से सूची से बाहर हो गए थे उनकी पात्रता की पुष्टि होने पर नाम फिर जोड़े जा सकेंगे।

    खास बात यह है कि 1 जनवरी 2027 को 18 वर्ष की उम्र पूरी करने वाले युवाओं के लिए भी मतदाता सूची में नाम जोड़ने की प्रक्रिया शुरू कर दी गई है। ऐसे युवा एडवांस में फॉर्म 6 भर सकते हैं। इसके लिए पहले जरूरी डिक्लेरेशन की अनिवार्यता भी समाप्त कर दी गई है। प्रशासन का उद्देश्य अनुपस्थित स्थानांतरित मृत और दोहराए गए नामों की जांच के साथ यह सुनिश्चित करना है कि कोई वास्तविक और पात्र नागरिक अपने मताधिकार से वंचित न रहे। इसके अलावा नाइट शेल्टर मजदूर बस्तियों और बेघर लोगों के लिए भी विशेष कैंप लगाए जा रहे हैं ताकि अधिक से अधिक पात्र लोगों को मतदाता सूची से जोड़ा जा सके।

  • SIR प्रक्रिया पर बॉम्बे हाईकोर्ट की चुनाव आयोग को फटकार, बिना सुनवाई नाम हटाने पर कानून का पालन करने को कहा

    SIR प्रक्रिया पर बॉम्बे हाईकोर्ट की चुनाव आयोग को फटकार, बिना सुनवाई नाम हटाने पर कानून का पालन करने को कहा


    नई दिल्ली। मतदाता सूची के विशेष गहन पुनरीक्षण यानी SIR की प्रक्रिया को लेकर बॉम्बे हाईकोर्ट ने चुनाव आयोग की कार्यप्रणाली पर कड़ी टिप्पणी की है। गोवा में SIR के दौरान एक ही परिवार के छह सदस्यों के नाम मतदाता सूची से हटाए जाने के मामले की सुनवाई करते हुए अदालत ने कहा कि किसी मतदाता का नाम हटाने से पहले उसे अपना पक्ष रखने का अवसर दिया जाना चाहिए। हाईकोर्ट ने चुनाव आयोग से यह भी पूछा कि किस कानून के तहत किसी व्यक्ति को सुनवाई का मौका दिए बिना मतदाता सूची से उसका नाम हटाया जा सकता है। अदालत ने चुनाव आयोग की जिम्मेदारी पर जोर देते हुए कहा कि यह सुनिश्चित किया जाना चाहिए कि कोई भी मतदाता सूची से छूट न जाए।

    मामला गोवा में SIR के दौरान एक परिवार के छह सदस्यों के नाम मतदाता सूची से हटाए जाने से जुड़ा है। इस मामले में परिवार का नाम हटाने से पहले उन्हें सुनवाई का अवसर नहीं दिया गया। इसी बिंदु पर सुनवाई के दौरान अदालत ने चुनाव आयोग की प्रक्रिया पर सवाल उठाए। हाईकोर्ट ने कहा कि यदि किसी व्यक्ति का नाम मतदाता सूची से हटाया जाना है तो उससे पहले उसे अपना पक्ष रखने का अवसर मिलना चाहिए। अदालत ने बिना सुनवाई के नाम हटाए जाने को लेकर चुनाव आयोग से संबंधित कानूनी आधार स्पष्ट करने को कहा।

    सुनवाई के दौरान बॉम्बे हाईकोर्ट ने चुनाव आयोग से तकनीक के बजाय कानून और नियमों के अनुसार प्रक्रिया अपनाने को कहा। अदालत ने SIR के दौरान इस्तेमाल की जा रही प्रक्रिया को लेकर भी सवाल उठाए। कोर्ट की टिप्पणी थी कि मौजूदा प्रक्रिया को देखने पर ऐसा लग रहा है कि कानून और नियमों को कुछ समय के लिए किनारे कर दिया गया है और काम सॉफ्टवेयर के हिसाब से किया जा रहा है। इस टिप्पणी के जरिए अदालत ने मतदाता सूची के पुनरीक्षण में तकनीकी प्रक्रिया के साथ कानूनी प्रावधानों के पालन के महत्व पर सवाल उठाया।

    अदालत ने मामले की सुनवाई के दौरान संबंधित चुनाव अधिकारी को भी कोर्ट में बुलाया है। हाईकोर्ट की सुनवाई का केंद्र यह रहा कि मतदाता सूची से किसी व्यक्ति या परिवार के सदस्यों के नाम हटाने की कार्रवाई किस कानूनी प्रक्रिया के तहत की गई और क्या संबंधित लोगों को अपना पक्ष रखने का अवसर दिया गया। अदालत ने स्पष्ट रूप से चुनाव आयोग से उस कानून का आधार बताने को कहा जिसके तहत बिना सुनवाई के किसी व्यक्ति का नाम मतदाता सूची से हटाया जा सकता है। मामले में गोवा के परिवार के छह सदस्यों के नाम हटाए जाने की कार्रवाई इसी प्रक्रिया के संदर्भ में जांच के दायरे में है।

    बॉम्बे हाईकोर्ट की इस सुनवाई में SIR के दौरान मतदाता सूची में नाम हटाने की प्रक्रिया, सुनवाई का अवसर और कानून के पालन से जुड़े सवाल प्रमुख रहे। अदालत ने कहा कि तकनीकी व्यवस्था के आधार पर प्रक्रिया चलाने के बजाय संबंधित कानूनी प्रावधानों का पालन किया जाना चाहिए। साथ ही, मतदाता सूची के पुनरीक्षण के दौरान यह सुनिश्चित करने की जिम्मेदारी चुनाव आयोग की है कि किसी मतदाता का नाम अनावश्यक रूप से छूट न जाए। मामले में संबंधित चुनाव अधिकारी को अदालत के समक्ष बुलाए जाने के बाद अब नाम हटाने की प्रक्रिया और उसके कानूनी आधार से जुड़े पहलुओं पर सुनवाई आगे बढ़ेगी।

  • मल्लिकार्जुन खड़गे ने CEC ज्ञानेश कुमार पर लगाए गंभीर आरोप, कहा- लोकतंत्र को कमजोर कर रही चुनाव प्रक्रिया

    मल्लिकार्जुन खड़गे ने CEC ज्ञानेश कुमार पर लगाए गंभीर आरोप, कहा- लोकतंत्र को कमजोर कर रही चुनाव प्रक्रिया

    नई दिल्ली। कांग्रेस अध्यक्ष मल्लिकार्जुन खड़गे ने मंगलवार को कांग्रेस कार्य समिति की बैठक में मुख्य चुनाव आयुक्त ज्ञानेश कुमार और केंद्र की मोदी सरकार पर गंभीर आरोप लगाए। दिल्ली के इंदिरा भवन में हुई बैठक में चुनाव आयोग की कार्यप्रणाली और मुख्य चुनाव आयुक्त को पद से हटाने की मांग को लेकर चर्चा की गई। खड़गे ने आरोप लगाया कि मुख्य चुनाव आयुक्त ज्ञानेश कुमार मोदी सरकार की कठपुतली बन गए हैं और मतदाता सूची से नाम हटाकर लोकतंत्र को कमजोर किया जा रहा है। उन्होंने चुनाव प्रक्रिया से जुड़े मामलों में पारदर्शिता की जरूरत पर जोर दिया।

    खड़गे ने आरोप लगाया कि मोदी सरकार ने देश के पूर्वजों द्वारा बनाई गई मजबूत लोकतांत्रिक नींव को योजनाबद्ध तरीके से कमजोर किया है। कांग्रेस कार्य समिति की बैठक में उन्होंने कहा कि पूरा देश अब जानता है कि मुख्य चुनाव आयुक्त का उद्देश्य भाजपा को लाभ पहुंचाना है। खड़गे ने ज्ञानेश कुमार से तत्काल इस्तीफा देने की मांग की। साथ ही उन्होंने कहा कि जिनके दबाव में मुख्य चुनाव आयुक्त ने कथित तौर पर ऐसा किया, प्रधानमंत्री मोदी को भी नैतिक आधार पर इस्तीफा देना चाहिए। उन्होंने चुनाव आयोग की भूमिका और उसकी कार्यप्रणाली को लेकर पार्टी की चिंताओं को बैठक में रखा।

    कांग्रेस अध्यक्ष ने मतदाता सूची से हटाए गए नामों को लेकर भी अपनी मांग सामने रखी। उन्होंने कहा कि जिन मतदाताओं के नाम वोटर लिस्ट से हटाए गए हैं, उन्हें इसकी पूरी जानकारी दी जानी चाहिए। साथ ही प्रभावित लोगों को अपना पक्ष रखने और अपील करने का अवसर भी मिलना चाहिए। खड़गे ने चुनाव प्रक्रिया से जुड़े महत्वपूर्ण डेटा और फैसलों में पारदर्शिता की मांग की। उनका कहना है कि मतदाता सूची में बदलाव और चुनाव से जुड़े निर्णयों के संबंध में पर्याप्त जानकारी उपलब्ध कराई जानी चाहिए, ताकि प्रक्रिया को लेकर स्पष्टता बनी रहे।

    खड़गे ने कहा कि देश के लोकतंत्र और संविधान की रक्षा की जिम्मेदारी एक बार फिर कांग्रेस के कंधों पर है। उन्होंने आरोप लगाया कि मोदी सरकार ने पिछले 12 वर्षों के दौरान देश की मजबूत लोकतांत्रिक नींव को योजनाबद्ध तरीके से कमजोर किया है। उनके अनुसार, चुनावी प्रक्रिया और संस्थाओं से जुड़े मामलों में पारदर्शिता बनाए रखना जरूरी है। इसी मुद्दे को लेकर कांग्रेस कार्य समिति की बैठक में मुख्य चुनाव आयुक्त के खिलाफ कार्रवाई की मांग और चुनाव आयोग की कार्यप्रणाली पर चर्चा की गई।

    मंगलवार की बैठक में खड़गे के बयानों के केंद्र में चुनाव आयोग की भूमिका, मुख्य चुनाव आयुक्त ज्ञानेश कुमार, मतदाता सूची से नाम हटाने की प्रक्रिया और चुनावी फैसलों में पारदर्शिता के मुद्दे रहे। खड़गे ने अपने आरोपों के साथ मुख्य चुनाव आयुक्त के इस्तीफे की मांग दोहराई और प्रधानमंत्री मोदी से भी नैतिक आधार पर इस्तीफा देने की मांग की। उन्होंने कहा कि लोकतंत्र और संविधान की रक्षा के लिए चुनाव प्रक्रिया में पारदर्शिता और मतदाताओं के अधिकारों की सुरक्षा जरूरी है।

  • वोटर लिस्ट और धार्मिक स्थलों के मुद्दे पर प्रदर्शन 29 सितंबर को जंतर-मंतर पहुंचने की महबूबा की अपील

    वोटर लिस्ट और धार्मिक स्थलों के मुद्दे पर प्रदर्शन 29 सितंबर को जंतर-मंतर पहुंचने की महबूबा की अपील


    नई दिल्ली । पीपुल्स डेमोक्रेटिक पार्टी यानी PDP प्रमुख महबूबा मुफ्ती ने 29 सितंबर को दिल्ली के जंतर-मंतर पर होने वाले प्रदर्शन में लोगों से शामिल होने की अपील की है। उन्होंने सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म एक्स पर एक वीडियो संदेश जारी करते हुए धर्मनिरपेक्ष सोच रखने वाले लोगों से प्रदर्शन में पहुंचने को कहा है। यह प्रदर्शन मॉनिटरिंग कमिटी फॉर इंडियन मुस्लिम्स की ओर से आयोजित किए जाने की जानकारी सामने आई है। प्रदर्शन का समय दोपहर 2 बजे से शाम 5 बजे तक बताया गया है।

    महबूबा मुफ्ती ने अपने वीडियो संदेश में देश में धार्मिक स्थलों और मतदाता सूचियों से जुड़े कई मुद्दे उठाए। उन्होंने आरोप लगाया कि देश में मस्जिदों दरगाहों और चर्चों को गिराया जा रहा है। उन्होंने यह भी दावा किया कि तैयार की जा रही मतदाता सूचियों में विपक्षी समर्थकों धर्मनिरपेक्ष सोच रखने वाले लोगों और खास तौर पर मुस्लिम मतदाताओं के नाम हटाए जा रहे हैं। इन आरोपों को महबूबा मुफ्ती ने प्रदर्शन के प्रमुख मुद्दों से जोड़ते हुए लोगों से जंतर-मंतर पहुंचने की अपील की है।

    PDP प्रमुख ने कहा कि मॉनिटरिंग कमिटी फॉर इंडियन मुस्लिम्स ने इन मुद्दों को लेकर 29 सितंबर को प्रदर्शन करने का फैसला किया है। उन्होंने धर्मनिरपेक्ष सोच रखने वाले लोगों से इसमें भाग लेने की अपील की। अपने संदेश में उन्होंने लोकतंत्र भाईचारे और देश की समावेशी सांस्कृतिक परंपरा से जुड़े मूल्यों का भी उल्लेख किया। उनके मुताबिक ऐसे मुद्दों पर लोगों को अपनी आवाज उठानी चाहिए।

    महबूबा मुफ्ती की यह अपील ऐसे समय आई है जब मतदाता सूचियों के विशेष गहन पुनरीक्षण यानी SIR को लेकर राजनीतिक बहस चल रही है। चुनाव आयोग ने अलग-अलग राज्यों और केंद्र शासित प्रदेशों के लिए SIR की प्रक्रिया और समयसीमा तय की है। आयोग के आधिकारिक दस्तावेज में दिल्ली और महाराष्ट्र समेत कई राज्यों के लिए SIR से जुड़ी प्रक्रिया का कार्यक्रम दर्ज है। हालांकि किसी मतदाता का नाम हटाया जाना या जोड़े जाना संबंधित चुनावी प्रक्रिया और दावे-आपत्तियों के निपटारे के तहत तय होता है।

    महबूबा मुफ्ती ने अपने संदेश में लोगों से अपील करते हुए कहा कि जो भारतीय देश के लोकतांत्रिक और धर्मनिरपेक्ष मूल्यों को महत्व देते हैं उन्हें 29 सितंबर को जंतर-मंतर पहुंचना चाहिए। उन्होंने कहा कि प्रदर्शन के जरिए देश के लोकतंत्र भाईचारे और गंगा-जमुनी तहजीब से जुड़े मूल्यों के लिए आवाज उठाई जाएगी।

    इस प्रदर्शन में किन संगठनों और कितने लोगों की भागीदारी होगी इसकी अंतिम तस्वीर 29 सितंबर को ही स्पष्ट होगी। फिलहाल महबूबा मुफ्ती की अपील के बाद यह कार्यक्रम दिल्ली में मतदाता सूची धार्मिक स्थलों और लोकतांत्रिक मूल्यों से जुड़े मुद्दों पर राजनीतिक चर्चा का एक और केंद्र बन गया है। प्रदर्शन के दौरान उठाए जाने वाले मुद्दों और आयोजकों की मांगों पर आगे की स्थिति सामने आने की उम्मीद है।

  • SIR पर चुनाव आयोग का बड़ा फैसला दिल्ली और महाराष्ट्र में बढ़ी डेडलाइन नोटिस वाले वोटरों को घर बैठे मिलेगी मदद

    SIR पर चुनाव आयोग का बड़ा फैसला दिल्ली और महाराष्ट्र में बढ़ी डेडलाइन नोटिस वाले वोटरों को घर बैठे मिलेगी मदद


    नई दिल्ली । चुनाव आयोग ने मतदाता सूची के विशेष गहन पुनरीक्षण यानी SIR को लेकर दिल्ली और महाराष्ट्र के मतदाताओं को राहत दी है। आयोग ने दावे और आपत्तियां दाखिल करने की समयसीमा बढ़ाने के साथ नोटिस पाने वाले मतदाताओं के लिए प्रक्रिया को भी आसान बनाने का फैसला किया है। अब ऐसे कई मामलों में मतदाताओं को व्यक्तिगत सुनवाई के लिए चुनाव कार्यालय जाने की जरूरत नहीं होगी। बूथ लेवल ऑफिसर यानी BLO मतदाताओं के घर जाकर जरूरी दस्तावेज जुटाएंगे और उन्हें ECINET सिस्टम पर अपलोड करने में मदद करेंगे। इसके बाद संबंधित निर्वाचन अधिकारी उपलब्ध दस्तावेजों के आधार पर मामले पर फैसला करेगा।

    दिल्ली में SIR के तहत दावे और आपत्तियां दाखिल करने की अंतिम तारीख अब 30 अक्टूबर 2026 कर दी गई है। वहीं नोटिस दावे और आपत्तियों के निपटारे की समयसीमा 30 नवंबर 2026 तक बढ़ाई गई है। आयोग के इस फैसले से उन मतदाताओं को अतिरिक्त समय मिलेगा जिन्हें मतदाता सूची में किसी तरह की विसंगति को लेकर नोटिस मिला है या जो निर्धारित अवधि में अपनी आपत्ति दर्ज नहीं करा सके थे।

    महाराष्ट्र के मतदाताओं के लिए भी समयसीमा बढ़ाई गई है। यहां दावे और आपत्तियां दाखिल करने की अंतिम तारीख 12 अक्टूबर 2026 निर्धारित की गई है। वहीं इन मामलों के निपटारे की प्रक्रिया 10 नवंबर 2026 तक चल सकती है। महाराष्ट्र की अंतिम मतदाता सूची 16 नवंबर 2026 को प्रकाशित किए जाने की जानकारी भी सामने आई है।

    आयोग ने यह भी स्पष्ट किया है कि नोटिस पाने वाले मतदाताओं को सामान्य मामलों में व्यक्तिगत सुनवाई के लिए बुलाने की जरूरत नहीं होगी। केवल असाधारण परिस्थितियों में ही उन्हें व्यक्तिगत रूप से उपस्थित होना पड़ सकता है। इसका उद्देश्य SIR प्रक्रिया में दस्तावेज जमा करने और सुनवाई से जुड़ी परेशानी को कम करना है।

    BLO की भूमिका इस प्रक्रिया में अहम होगी। जिन मतदाताओं से दस्तावेज मांगे गए हैं उनके घर जाकर अधिकारी जरूरी कागजात प्राप्त करेंगे और उन्हें ECINET पर अपलोड करेंगे। इससे खास तौर पर बुजुर्गों दिव्यांगों मजदूरों और ऐसे लोगों को सुविधा मिल सकती है जिनके लिए चुनाव कार्यालय या निर्धारित केंद्र तक पहुंचना मुश्किल होता है। चुनाव आयोग ने बेघर लोगों मजदूरों और रैन बसेरों में रहने वाले लोगों के लिए विशेष हेल्प डेस्क और कैंप लगाने के निर्देश भी दिए हैं।

    SIR के दौरान मतदाता सूची में नाम और विवरण की जांच करना महत्वपूर्ण है। चुनाव आयोग की वोटर सर्विसेज सुविधा के जरिए मतदाता अपनी जानकारी और संबंधित सेवाओं को ऑनलाइन देख सकते हैं।

    इस पूरे बदलाव का मकसद यह है कि मतदाता सूची के पुनरीक्षण की प्रक्रिया में पात्र मतदाताओं को अपनी बात रखने का पर्याप्त अवसर मिले और दस्तावेज जमा करने या सुनवाई के लिए अनावश्यक भागदौड़ न करनी पड़े। दिल्ली और महाराष्ट्र के मतदाताओं को अब अपनी संबंधित नई समयसीमा का ध्यान रखते हुए दावे या आपत्तियां दर्ज करनी होंगी।

  • ज्ञानेश कुमार के इस्तीफे पर अड़ी कॉकरोच जनता पार्टी, शनिवार की डेडलाइन के बाद तय होगा आंदोलन का अगला कदम

    ज्ञानेश कुमार के इस्तीफे पर अड़ी कॉकरोच जनता पार्टी, शनिवार की डेडलाइन के बाद तय होगा आंदोलन का अगला कदम


    नई दिल्ली। SIR प्रक्रिया को लेकर चुनाव आयोग और मुख्य चुनाव आयुक्त ज्ञानेश कुमार पर उठ रहे सवालों के बीच कॉकरोच जनता पार्टी ने एक बार फिर अपना अल्टिमेटम दोहरा दिया है। पार्टी ने कहा है कि अगर शनिवार तक मुख्य चुनाव आयुक्त ज्ञानेश कुमार अपने पद से इस्तीफा नहीं देते हैं तो 2 अक्टूबर से देशव्यापी आंदोलन शुरू किया जाएगा। पार्टी की ओर से यह चेतावनी ऐसे समय में दी गई है जब चुनाव आयोग के भीतर ही मुख्य चुनाव आयुक्त और अन्य चुनाव आयुक्तों के बीच मतभेद की खबर सामने आने के बाद राजनीतिक हलचल तेज हो गई है।

    कॉकरोच जनता पार्टी लंबे समय से SIR यानी विशेष गहन पुनरीक्षण प्रक्रिया को लेकर चुनाव आयोग पर सवाल उठा रही है। पार्टी का आरोप है कि इस प्रक्रिया के दौरान बड़ी संख्या में मतदाताओं के नाम प्रारूप मतदाता सूचियों से बाहर किए गए हैं। संगठन ने मुख्य निर्वाचन आयुक्त के तत्काल इस्तीफे की मांग के साथ SIR से जुड़े फैसलों की स्वतंत्र जांच कराने की भी मांग रखी है। पार्टी के मुताबिक अगर शनिवार तक उनकी मांग पूरी नहीं होती है तो 2 अक्टूबर यानी गांधी जयंती के दिन से आंदोलन को देशव्यापी स्तर पर शुरू किया जाएगा।

    पार्टी ने सोशल मीडिया पर जंतर मंतर पर जुट रहे युवाओं का वीडियो साझा करते हुए अपने समर्थकों से आंदोलन की तैयारी करने को कहा है। इससे पहले संगठन ने CEC ज्ञानेश कुमार को 48 घंटे का अल्टिमेटम दिया था लेकिन बाद में आंदोलन की तारीख बदलकर 2 अक्टूबर कर दी गई। पार्टी के संयोजक अभिजीत दीपके और सह संयोजक सौरव दास तथा आशुतोष रांका ने इलेक्शन कमीशन ठीक करो अभियान के तहत अपनी मांगें सामने रखी हैं।

    पार्टी का दावा है कि SIR प्रक्रिया के कारण 30 राज्यों और केंद्र शासित प्रदेशों की प्रारूप मतदाता सूचियों से 13 करोड़ से अधिक वैध नाम बाहर हो गए हैं। संगठन ने चुनाव आयोग से मांग की है कि वह यह स्पष्ट करे कि मतदाता सूची से हटाए गए प्रत्येक नाम के संबंध में कानूनी और पारदर्शी प्रक्रिया का पालन किया गया है या नहीं। साथ ही पार्टी ने नाम हटाने की प्रक्रिया पर तत्काल रोक लगाने और सत्यापन पूरा होने तक जनवरी 2025 की मतदाता सूची बहाल करने की मांग की है।

    कॉकरोच जनता पार्टी ने यह भी मांग रखी है कि SIR से संबंधित सभी रिकॉर्ड सुप्रीम कोर्ट या किसी स्वतंत्र न्यायिक समिति को सौंपे जाएं ताकि पूरी प्रक्रिया की स्वतंत्र समीक्षा हो सके। इसके अलावा पार्टी मुख्य निर्वाचन आयुक्त और अन्य चुनाव आयुक्तों की नियुक्ति से जुड़े 2023 के कानून को निरस्त कर अधिक पारदर्शी नियुक्ति व्यवस्था बनाने की मांग कर रही है।

    इसी बीच चुनाव आयोग को लेकर राजनीतिक बयानबाजी भी तेज हुई है। एक रिपोर्ट में दावा किया गया कि पिछले 10 महीनों के दौरान दो चुनाव आयुक्तों ने मुख्य चुनाव आयुक्त के कुछ फैसलों पर आपत्ति जताई थी। दूसरी ओर चिराग पासवान ने भी कहा कि यदि चुनाव आयोग पर आरोप लगाए जा रहे हैं तो मुख्य चुनाव आयुक्त को सामने आकर अपना पक्ष रखना चाहिए। कांग्रेस ने भी इस मुद्दे को लेकर कई शहरों में प्रदर्शन किया है। ऐसे में शनिवार की समयसीमा और 2 अक्टूबर को प्रस्तावित आंदोलन के कारण SIR विवाद आने वाले दिनों में और चर्चा में रह सकता है।

  • वोटर लिस्ट से नाम कटा तो भड़के राघव चड्ढा: बोले- ‘AAP छोड़ने के बाद बौखलाई पार्टी’, आप ने भी किया पलटवार

    वोटर लिस्ट से नाम कटा तो भड़के राघव चड्ढा: बोले- ‘AAP छोड़ने के बाद बौखलाई पार्टी’, आप ने भी किया पलटवार


    चंडीगढ़। पंजाब में चुनाव आयोग के SIR अभियान के तहत जारी ड्राफ्ट वोटर लिस्ट से राज्यसभा सांसद राघव चड्ढा का नाम हटाए जाने को लेकर राजनीतिक विवाद खड़ा हो गया है। 13 अगस्त 2026 को जारी ड्राफ्ट सूची में चड्ढा के नाम के आगे ‘स्थायी रूप से स्थानांतरित’ (Permanently Shifted) दर्ज है। उनका नाम ‘अनुपस्थित, स्थानांतरित, मृत और डुप्लिकेट’ (ASDD) सूची में शामिल किया गया है।

    चड्ढा ने इसे राजनीतिक बदले की कार्रवाई बताते हुए पंजाब की आम आदमी पार्टी सरकार पर प्रशासन और पुलिस के दुरुपयोग का आरोप लगाया है। वहीं आम आदमी पार्टी ने आरोपों को खारिज करते हुए कहा है कि SIR की प्रक्रिया चुनाव आयोग के अधीन है और राज्य सरकार की इसमें कोई भूमिका नहीं है।

    चड्ढा बोले- यह कोई लिपिकीय गलती नहीं
    मोहाली से पंजीकृत अपने वोटर आईडी का जिक्र करते हुए राघव चड्ढा ने कहा कि उन्हें ‘स्थायी रूप से स्थानांतरित’ के तौर पर किसने चिह्नित किया और इसकी पुष्टि किसने की, इन सभी प्रक्रियाओं में पंजाब सरकार के अधिकारी शामिल रहे हैं।

    उन्होंने आरोप लगाया कि बूथ लेवल ऑफिसर (BLO) से लेकर मुख्य निर्वाचन अधिकारी (CEO) तक प्रक्रिया में राज्य के कर्मचारी और अधिकारी जुड़े हैं। चड्ढा के मुताबिक चुनावी ड्यूटी के बाद अधिकारियों के तबादले, पोस्टिंग और करियर पर राज्य सरकार का नियंत्रण रहता है और इसी प्रशासनिक दबाव के जरिए उनके खिलाफ राजनीतिक बदला लिया जा रहा है।

    ‘AAP छोड़ने वाले नेताओं को बनाया जा रहा निशाना’
    चड्ढा ने आरोप लगाया कि उनके और अन्य नेताओं के आम आदमी पार्टी छोड़कर भाजपा में शामिल होने के बाद से पार्टी नेतृत्व बौखलाया हुआ है। उनका कहना है कि जो नेता चुप रहने को तैयार नहीं हैं, उनके खिलाफ पंजाब पुलिस और प्रशासनिक तंत्र का इस्तेमाल किया जा रहा है। उन्होंने दावा किया कि दूसरे पूर्व आप सांसदों और नेताओं को भी इसी तरह निशाना बनाया जा रहा है।

    SIR की गाइडलाइन का भी दिया हवाला
    राघव चड्ढा ने चुनाव आयोग की SIR गाइडलाइंस के पैरा 4(d) का हवाला देते हुए कहा कि जनप्रतिनिधियों के लिए ‘संरक्षित सूची’ का प्रावधान है। उनके मुताबिक इसमें सांसदों, विधायकों और न्यायाधीशों जैसे जनप्रतिनिधियों के नाम शामिल हैं।

    चड्ढा का दावा है कि यदि किसी जनप्रतिनिधि का नाम डेटाबेस में फ्लैग भी होता है, तब भी उसे ड्राफ्ट वोटर लिस्ट में शामिल रखा जाना चाहिए, ताकि दावे और आपत्तियों की अवधि में जरूरी दस्तावेज जमा किए जा सकें। उनका आरोप है कि वर्तमान सांसद होने के बावजूद उनके मामले में इन निर्देशों का जानबूझकर पालन नहीं किया गया।

    अंतिम सूची अक्टूबर में होगी जारी
    चड्ढा ने कहा कि अभी यह ड्राफ्ट वोटर लिस्ट है और अंतिम सूची अक्टूबर 2026 में जारी होगी। उन्होंने बताया कि SIR के तहत दावे और आपत्तियां दर्ज कराने की प्रक्रिया के जरिए वह अपना नाम दोबारा सही कराने की कानूनी प्रक्रिया पूरी कर रहे हैं।

    SIR के तहत पंजाब में अब तक 20.66 लाख मतदाताओं के नाम हटाए गए हैं। यह पुनरीक्षण से पहले राज्य के कुल मतदाताओं का करीब 9.7% है। चड्ढा भी हटाए गए नामों में शामिल हैं।

    AAP का पलटवार- SIR में राज्य सरकार का कोई दखल नहीं
    आम आदमी पार्टी ने राघव चड्ढा के आरोपों को खारिज करते हुए कहा कि SIR की पूरी प्रक्रिया चुनाव आयोग यानी ECI कराता है। पार्टी के मुताबिक मतदाता सूची में किसका नाम जोड़ा या हटाया जाएगा, इसमें पंजाब सरकार की कोई भूमिका नहीं है।

    AAP ने दावा किया कि चड्ढा दिल्ली में रह रहे हैं और पंजाब में नहीं। ऐसे में पंजाब की मतदाता सूची में अपना पंजीकरण बनाए रखना या उसे दूसरी जगह ट्रांसफर कराना उनकी व्यक्तिगत जिम्मेदारी थी। पार्टी ने कहा कि इसके लिए पंजाब सरकार या AAP को जिम्मेदार ठहराना गलत है।

    AAP का दावा- दिल्ली में बैकडेट से वोट बनवाने की कोशिश
    AAP ने यह भी आरोप लगाया कि राघव चड्ढा दिल्ली के राजेंद्र नगर से बैकडेट प्रक्रिया के जरिए अपना नाम मतदाता सूची में जुड़वाने की कोशिश कर रहे हैं। पार्टी ने कहा कि यदि किसी तरह की गैरकानूनी या बैकडेट एंट्री कराई गई है तो इसकी निष्पक्ष जांच होनी चाहिए और सच्चाई जनता के सामने आनी चाहिए। AAP नेताओं ने चेतावनी दी कि यदि भाजपा या किसी अन्य व्यक्ति ने ऐसी बैकडेट एंट्री में मदद की है तो पार्टी मामले को उसके अंजाम तक पहुंचाएगी।

    2022 में पंजाब से राज्यसभा पहुंचे, अप्रैल 2026 में BJP में शामिल हुए
    राघव चड्ढा वर्ष 2022 में आम आदमी पार्टी के टिकट पर पंजाब से राज्यसभा सांसद चुने गए थे। इसके बाद अप्रैल 2026 में उन्होंने भाजपा की सदस्यता ले ली।

    चुनाव आयोग के मुताबिक ड्राफ्ट वोटर लिस्ट जारी होने के बाद अभी दावे और आपत्तियां दर्ज कराने की प्रक्रिया चल रही है। जिन मतदाताओं के नाम सूची से हटाए गए हैं, वे 12 सितंबर 2026 तक फॉर्म-6 भरकर अपना नाम दोबारा मतदाता सूची में शामिल कराने के लिए आवेदन कर सकते हैं।