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  • Bangladesh: राष्ट्रपति चुनाव के लिए आज हो रहा मतदान….35 साल बाद सीधे संसद में वोटिंग

    Bangladesh: राष्ट्रपति चुनाव के लिए आज हो रहा मतदान….35 साल बाद सीधे संसद में वोटिंग


    ढाका।
    बांग्लादेश (Bangladesh) में गुरुवार को नया राष्ट्रपति (New President) चुनने के लिए मतदान होने जा रहा है. 35 सालों के लंबे समय के बाद ये पहली बार है जब देश के राष्ट्रपति पद के लिए सीधे संसद में वोट डाले जाएंगे। राष्ट्रपति पद की रेस में मुख्य मुकाबला सत्ताधारी बांग्लादेश नेशनलिस्ट पार्टी (BNP) के दिग्गज नेता मिर्जा फखरुल इस्लाम आलमगीर (Mirza Fakhrul Islam Alamgir) और 11 दलीय विपक्षी गठबंधन के प्रत्याशी कर्नल (रिटायर्ड) ओली अहमद (Oli Ahmed) के बीच है.

    चुनाव आयोग के मुताबिक, मतदान जातीय संसद (संसद भवन) में दोपहर 2 बजे से शाम 5 बजे तक चलेगा. निर्वाचन आयोग ने 16 अगस्त को ही दोनों उम्मीदवारों के नामांकन पत्रों को वैध करार दिया था।

    मिर्जा फखरुल इस्लाम आलमगीर बीएनपी का प्रमुख चेहरा हैं, जबकि लिबरल डेमोक्रेटिक पार्टी (LDP) के अध्यक्ष कर्नल (सेवानिवृत्त) ओली अहमद बीर बिक्रम जमात-ए-इस्लामी के नेतृत्व वाले 11 दलीय विपक्षी मोर्चे के उम्मीदवार हैं.


    BNP की बैठक में भावुक हुए फखरुल

    बुधवार को BNP संसदीय दल की बैठक के दौरान फखरुल ने अपनी ही पार्टी के सांसदों से समर्थन की अपील की. लंबे समय तक पार्टी के महासचिव रहे फखरुल बैठक में बेहद भावुक हो गए और उनकी आंखों में आंसू आ गए.

    उन्होंने सांसदों से कहा, ‘अगर मेरे कार्यकाल के दौरान मुझसे कोई भूल हुई हो या अनजाने में किसी का दिल दुखा हो, तो मैं माफी मांगता हूं. उन्होंने देश की स्वतंत्रता और संप्रभुता से कभी समझौता न करने का संकल्प भी लिया.


    शुक्रवार को नए राष्ट्रपति लेंगे शपथ

    चुनावी नतीजों के तुरंत बाद नए राष्ट्रपति शुक्रवार शाम बंगभवन के दरबार हॉल में बांग्लादेश के 23वें राष्ट्रपति के रूप में शपथ लेंगे.

    बता दें कि पूर्व राष्ट्रपति मोहम्मद शहाबुद्दीन के स्वास्थ्य कारणों से इस्तीफा देने के बाद ये पद खाली हुआ था. संविधान के तहत पद खाली होने के 90 दिनों के भीतर चुनाव कराना अनिवार्य है. फिलहाल सभपति (स्पीकर) हाफिज उद्दीन अहमद कार्यवाहक राष्ट्रपति पद पर हैं।


    BNP का पलड़ा भारी

    इस साल 12 फरवरी को हुए आम चुनावों में बीएनपी ने सत्ता में वापसी की थी. संसद में बीएनपी के पास दो-तिहाई से ज्यादा का बहुमत है. ऐसे में प्रधानमंत्री तारिक रहमान के घोषित उम्मीदवार मिर्जा फखरुल इस्लाम आलमगीर की जीत लगभग तय मानी जा रही है। पेशे से अर्थशास्त्री रहे फखरुल 1990 के दशक में बीएनपी में शामिल हुए थे. वो पहले कृषि राज्य मंत्री और स्थानीय सरकार मंत्री भी रह चुके हैं।

  • दतिया विधानसभा उपचुनाव में 71.44% मतदान, लोकतंत्र के पर्व में मतदाताओं ने बढ़-चढ़कर निभाई भागीदारी

    दतिया विधानसभा उपचुनाव में 71.44% मतदान, लोकतंत्र के पर्व में मतदाताओं ने बढ़-चढ़कर निभाई भागीदारी


    दतिया। मध्य प्रदेश की दतिया विधानसभा सीट पर हुए उपचुनाव के लिए गुरुवार को शांतिपूर्ण और व्यवस्थित माहौल में मतदान संपन्न हो गया। लोकतंत्र के इस महापर्व में मतदाताओं ने उत्साह के साथ अपने मताधिकार का प्रयोग किया। जिला निर्वाचन कार्यालय के अनुसार, पूरे विधानसभा क्षेत्र में 71.44 प्रतिशत मतदान दर्ज किया गया।

    सुबह मतदान शुरू होते ही विभिन्न मतदान केंद्रों पर मतदाताओं की लंबी कतारें देखने को मिलीं। युवाओं, महिलाओं, वरिष्ठ नागरिकों और दिव्यांग मतदाताओं ने भी बड़ी संख्या में मतदान कर लोकतांत्रिक प्रक्रिया में अपनी सक्रिय भागीदारी दर्ज कराई।

    निर्वाचन आयोग के दिशा-निर्देशों के अनुरूप कलेक्टर एवं जिला निर्वाचन अधिकारी स्वप्निल वानखड़े तथा पुलिस अधीक्षक मयूर खंडेलवाल के नेतृत्व में सभी मतदान केंद्रों पर सुरक्षा और आवश्यक सुविधाओं की समुचित व्यवस्था की गई थी। मतदाताओं के लिए पेयजल, छाया, चिकित्सा सहायता और दिव्यांगजनों के लिए व्हीलचेयर जैसी सुविधाएं उपलब्ध कराई गईं। प्रशासन और पुलिस ने पूरे दिन मतदान प्रक्रिया पर लगातार निगरानी रखी, जिससे मतदान शांतिपूर्ण ढंग से संपन्न हुआ।

    निर्वाचन कार्यालय के आंकड़ों के अनुसार, विधानसभा क्षेत्र के 2,20,410 मतदाताओं ने मतदान किया। इनमें 1,16,116 पुरुष मतदाताओं का मतदान प्रतिशत 74.09, जबकि 1,04,284 महिला मतदाताओं का मतदान प्रतिशत 68.48 रहा। वहीं 10 अन्य मतदाताओं में से 40 प्रतिशत ने अपने मताधिकार का उपयोग किया।

    मतदान समाप्त होने के बाद सभी मतदान दल कड़ी सुरक्षा व्यवस्था के बीच ईवीएम और निर्वाचन सामग्री लेकर सुरक्षित रूप से संग्रहण केंद्र पहुंचे, जहां सामग्री जमा कराने की प्रक्रिया व्यवस्थित ढंग से पूरी कराई गई।

    जिला निर्वाचन अधिकारी स्वप्निल वानखड़े ने मतदान प्रक्रिया को सफल बनाने में सहयोग देने वाले सभी मतदाताओं, निर्वाचन ड्यूटी में लगे अधिकारियों-कर्मचारियों, पुलिस एवं केंद्रीय सुरक्षा बल, मीडिया प्रतिनिधियों और अन्य सहयोगियों का आभार व्यक्त किया।

  • Datia by-election: दतिया विधानसभा उपचुनाव में शाम 5 बजे तक 69.36% मतदान

    Datia by-election: दतिया विधानसभा उपचुनाव में शाम 5 बजे तक 69.36% मतदान

    भोपाल/दतिया। मध्य प्रदेश के दतिया विधानसभा उपचुनाव के लिए गुरुवार को सुबह 7 बजे से मतदान जारी है। जिला निर्वाचन कार्यालय के अनुसार, शाम 5 बजे तक 69.36 प्रतिशत मतदान दर्ज किया गया। मतदान केंद्रों पर सुबह से ही मतदाताओं की लंबी कतारें देखने को मिलीं और पूरे क्षेत्र में मतदान को लेकर उत्साह बना रहा। मतदान शाम 6 बजे तक जारी रहेगा।

    दतिया विधानसभा क्षेत्र के 291 मतदान केंद्रों पर वोट डाले जा रहे हैं। निर्वाचन आयोग ने स्वतंत्र, निष्पक्ष और शांतिपूर्ण मतदान सुनिश्चित करने के लिए व्यापक सुरक्षा व्यवस्था की है। अतिरिक्त पुलिस बल की तैनाती के साथ संवेदनशील और अति संवेदनशील मतदान केंद्रों पर विशेष निगरानी रखी गई।

    मतदान के दौरान कांग्रेस ने सिरोल और जिगना क्षेत्रों में फर्जी मतदान की आशंका जताते हुए शिकायत दर्ज कराई। कांग्रेस प्रत्याशी घनश्याम सिंह स्वयं मौके पर पहुंचे और अधिकारियों से चर्चा की। वहीं, पूर्व गृहमंत्री नरोत्तम मिश्रा ने इन आरोपों को खारिज करते हुए कहा कि चुनाव में हार की आशंका होने पर कांग्रेस इस तरह के आरोप लगाती है और यह उसकी हताशा को दर्शाता है।

    उधर, बसई क्षेत्र के लखनपुर गांव में मुख्य सड़क निर्माण की मांग को लेकर ग्रामीणों ने पहले मतदान का बहिष्कार किया और “सड़क नहीं तो वोट नहीं” के नारे लगाए। बाद में एसडीएम अशोक अवस्थी की समझाइश के बाद करीब 50 ग्रामीणों ने मतदान किया।

    इसी बीच रामसागर गांव के एक मतदान केंद्र से पुलिस कांग्रेस के एक पोलिंग एजेंट को अपने साथ ले गई। उस पर मतदाताओं से बातचीत करने का आरोप लगाया गया था। कांग्रेस नेताओं के थाने पहुंचने और विरोध दर्ज कराने के बाद पुलिस ने एजेंट को छोड़ दिया।

    इस उपचुनाव में 23 उम्मीदवार मैदान में हैं, हालांकि सीधा मुकाबला कांग्रेस के घनश्याम सिंह और भाजपा के आशुतोष तिवारी के बीच माना जा रहा है। निर्वाचन आयोग के कार्यक्रम के अनुसार 3 अगस्त को मतगणना होगी और उसी दिन परिणाम घोषित किए जाएंगे।

    गौरतलब है कि दतिया विधानसभा सीट कांग्रेस विधायक राजेंद्र भारती को सहकारी ग्रामीण विकास बैंक फर्जीवाड़ा मामले में एमपी-एमएलए कोर्ट से दो वर्ष की सजा मिलने के बाद रिक्त हुई थी। वर्ष 2023 के विधानसभा चुनाव में इस सीट पर 80.2 प्रतिशत मतदान हुआ था। तब राजेंद्र भारती ने भाजपा के नरोत्तम मिश्रा को 7,742 मतों से पराजित किया था। उन्हें 88,977 और नरोत्तम मिश्रा को 81,235 वोट मिले थे, जबकि NOTA को 1,452 मत प्राप्त हुए थे।

  • दतिया उपचुनाव में सुबह 10 बजे तक 16.33% मतदान, वोटिंग को लेकर मतदाताओं में उत्साह

    दतिया उपचुनाव में सुबह 10 बजे तक 16.33% मतदान, वोटिंग को लेकर मतदाताओं में उत्साह

    दतिया। दतिया विधानसभा उपचुनाव के लिए गुरुवार सुबह 7 बजे से मतदान शांतिपूर्ण माहौल में जारी है। मतदान को लेकर मतदाताओं में उत्साह देखने को मिल रहा है। सुबह 10 बजे तक 16.33 प्रतिशत मतदान दर्ज किया गया। ग्रामीण इलाकों सहित कई मतदान केंद्रों पर सुबह से ही मतदाताओं की लंबी कतारें लगी रहीं। मतदान प्रक्रिया शाम 6 बजे तक जारी रहेगी।

    मतदान शुरू होने से पहले तीन मतदान केंद्रों पर ईवीएम से जुड़े उपकरणों में तकनीकी खराबी सामने आई। मतदान केंद्र क्रमांक 186 पर वीवीपैट, 108 पर बैलेटिंग यूनिट (BU) और 290 पर कंट्रोल यूनिट (CU) में समस्या आने पर मॉक पोल के दौरान सभी एजेंटों और कैमरों की मौजूदगी में उपकरण बदल दिए गए। इसके बाद निर्धारित समय पर मतदान शुरू कराया गया। कलेक्टर एवं जिला निर्वाचन अधिकारी स्वप्निल वानखेड़े ने बताया कि तकनीकी खामी का समय रहते समाधान कर लिया गया था, जिससे मतदान प्रक्रिया प्रभावित नहीं हुई।

    इधर, बसई क्षेत्र के लखनपुर गांव में मुख्य सड़क निर्माण की मांग को लेकर ग्रामीणों ने “सड़क नहीं तो वोट नहीं” का नारा लगाते हुए मतदान का बहिष्कार किया। सूचना मिलने पर एसडीएम अशोक अवस्थी मौके पर पहुंचे और ग्रामीणों से चर्चा की। समझाइश के बाद करीब 50 ग्रामीणों ने मतदान किया।

    कांग्रेस प्रत्याशी घनश्याम सिंह ने मतदान करने के बाद अपनी जीत का दावा करते हुए कहा कि जनता भाजपा के अहंकार का जवाब देगी। वहीं भाजपा उम्मीदवार आशुतोष तिवारी ने मतदान से पहले पीतांबरा पीठ में दर्शन कर प्रदेश और दतिया के विकास, युवाओं को रोजगार तथा भयमुक्त वातावरण की कामना की। इसके बाद उन्होंने मतदान केंद्र क्रमांक 158 पहुंचकर पोलिंग एजेंटों से मुलाकात की और भाजपा के पक्ष में भारी मतदान होने का दावा किया।

    दतिया विधानसभा क्षेत्र के 291 मतदान केंद्रों पर 2 लाख 20 हजार 400 मतदाता अपने मताधिकार का प्रयोग कर रहे हैं। स्वतंत्र, निष्पक्ष और शांतिपूर्ण मतदान सुनिश्चित करने के लिए सुरक्षा के व्यापक इंतजाम किए गए हैं। अतिरिक्त पुलिस अधीक्षक मंजीत सिंह चावला ने विभिन्न मतदान केंद्रों का निरीक्षण किया। वहीं, जिला निर्वाचन अधिकारी स्वप्निल वानखेड़े ने बताया कि सभी केंद्रों पर मतदान शांतिपूर्ण और व्यवस्थित ढंग से संचालित हो रहा है। इस दौरान पूर्व गृहमंत्री नरोत्तम मिश्रा और कांग्रेस प्रत्याशी घनश्याम सिंह ने भी अपने मताधिकार का प्रयोग किया।

  • दतिया विधानसभा उपचुनावः मतदान की तैयारियां पूर्ण, प्रशासन ने किए व्यापक इंतजाम

    दतिया विधानसभा उपचुनावः मतदान की तैयारियां पूर्ण, प्रशासन ने किए व्यापक इंतजाम


    भोपाल।
    मध्य प्रदेश के दतिया विधानसभा उपचुनाव की तैयारियां पूरी हो गई हैं। यहां 30 जुलाई को मतदान होना है। क्षेत्र में स्वतंत्र, निष्पक्ष, शांतिपूर्ण एवं पारदर्शी ढंग से मतदान संपन्न कराने के लिए जिला निर्वाचन कार्यालय द्वारा सभी आवश्यक तैयारियां सुनिश्चित कर ली गई हैं।

    दतिया विधानसभा क्षेत्र में मंगलवार शाम 6 बजे चुनाव प्रचार समाप्त होने के बाद जिला प्रशासन और पुलिस ने शहर में फ्लैग मार्च निकाला। कलेक्टर एवं जिला निर्वाचन अधिकारी स्वप्निल वानखड़े तथा पुलिस अधीक्षक मयूर खंडेलवाल के नेतृत्व में निकाले गए फ्लैग मार्च में पुलिस बल के जवानों ने भाग लिया। फ्लैग मार्च का उद्देश्य मतदाताओं में सुरक्षा एवं विश्वास का वातावरण स्थापित करना तथा असामाजिक तत्वों को कानून-व्यवस्था बनाए रखने का संदेश देना रहा।

    फ्लैग मार्च भैरव मंदिर से प्रारंभ होकर तिगैलिया, टाउन हॉल, बड़ा बाजार, पटवा तिराहा, किला चौक, दारूगर की पुलिया, बिहारी जी मंदिर तिगैलिया, भैरव मंदिर, राजगढ़ चौराहा, सीता सागर, पुरानी कलेक्ट्रेट, सिविल लाइन और झांसी चुंगी पुल होते हुए देर रात पुलिस लाइन दतिया पहुंचकर संपन्न हुआ। इस दौरान प्रशासनिक अधिकारियों ने स्पष्ट किया कि विधानसभा उप निर्वाचन को निष्पक्ष, शांतिपूर्ण और भयमुक्त वातावरण में संपन्न कराने के लिए सभी आवश्यक व्यवस्थाएं सुनिश्चित की गई हैं। जिले में सुरक्षा व्यवस्था को और अधिक सुदृढ़ किया गया है तथा कानून-व्यवस्था बनाए रखने के लिए पुलिस और प्रशासन पूरी तरह सतर्क एवं मुस्तैद है।

    आज शासकीय पॉलीटेक्निक कॉलेज से होगा सामग्री का वितरण

    जिला निर्वाचन कार्यालय द्वारा जानकारी दी गई दतिया विधानसभा उप निर्वाचन 2026 अंतर्गत 30 जुलाई को मतदान सम्पन्न कराने के लिए आज बुधवार को प्रातः 5 बजे से शासकीय पॉलीटेक्निक कॉलेज दतिया से सामग्री का वितरण किया जाएगा। मतदान सामग्री के सुचारु वितरण एवं प्राप्ति के लिए पॉलीटेक्निक कॉलेज परिसर में अलग-अलग काउंटर बनाए गए हैं। प्रत्येक काउंटर से 10 से 12 मतदान केंद्रों की सामग्री का वितरण एवं वापसी होगी, जिससे प्रक्रिया तेज एवं सुव्यवस्थित रहे। वर्षा ऋतु को ध्यान में रखते हुए परिसर में पर्याप्त टेंट लगाने, बसों की क्रमबद्ध पार्किंग, वाहनों के बीच पर्याप्त दूरी बनाए रखने तथा आवश्यकता पड़ने पर क्रेन की उपलब्धता सुनिश्चित की गई है। मतदान दलों से निर्धारित समय का पालन करने एवं अपने साथ छाता रखने के लिए भी कहा गया है।

    स्ट्रांग रूम एवं निर्वाचन व्यवस्थाओं का सतत निरीक्षण

    शासकीय पॉलीटेक्निक कॉलेज में बनाए गए स्ट्रांग रूम सहित निर्वाचन से संबंधित विभिन्न व्यवस्थाओं का सतत स्थल निरीक्षण किया गया। निरीक्षण के दौरान स्ट्रांग रूम, मतगणना कक्ष, सामग्री वितरण एवं सामग्री जमा करने के कक्षों की तैयारियों का बारीकी से अवलोकन किया गया है। साथ ही सीसीटीवी कैमरे, सुरक्षा व्यवस्था एवं बैरीकेडिंग की समीक्षा कर कार्य निर्वाचन आयोग के निर्देशों के अनुरूप समयबद्ध रूप से पूर्ण किया गया है।

    सभी मूलभूत सुविधाएं समय पर उपलब्ध कराने के निर्देश

    निर्वाचन कार्य से जुड़े अधिकारियों को विद्युत आपूर्ति, पेयजल, चिकित्सा सुविधा, स्वच्छता, बैरीकेडिंग एवं निर्बाध बिजली सहित सभी मूलभूत व्यवस्थाएं समय पर पूर्ण करने के निर्देश दिए गए हैं। स्पष्ट किया गया कि निर्वाचन कार्य में किसी भी प्रकार की लापरवाही या उदासीनता स्वीकार नहीं की जाएगी तथा सभी अधिकारी अपने दायित्वों का निष्ठा एवं समयबद्धता के साथ निर्वहन करेंगे।

    निर्वाचन प्रबंधन की सभी व्यवस्थाएं सुनिश्चित

    जिला निर्वाचन प्रशासन द्वारा परिवहन व्यवस्था एवं रूट चार्ट, ईवीएम एवं वीवीपैट की उपलब्धता, मतदान दलों का प्रशिक्षण, सामग्री वितरण एवं प्राप्ति, आदर्श आचरण संहिता के पालन, रैंडमाइजेशन, कानून व्यवस्था, एमसीएमसी, कम्युनिकेशन प्लान, स्वीप गतिविधियां, शिकायत एवं कंट्रोल रूम, ईटीबीपीएस, वेबकास्टिंग, विद्युत एवं चिकित्सा व्यवस्था, वीडियोग्राफी, फूड पैकेट्स, टेलीफोन एवं इंटरनेट तथा निर्वाचन कार्मिकों के पहचान पत्र वितरण सहित सभी आवश्यक व्यवस्थाएं सुनिश्चित की गई हैं।

    वर्षा को लेकर विशेष सतर्कता

    मानसून को देखते हुए निर्वाचन प्रशासन ने विशेष तैयारियां की हैं। मतदान दलों के वाहनों के लिए सुरक्षित पार्किंग, वैकल्पिक मार्ग, टेंट की व्यवस्था तथा चिकित्सा दलों की तैनाती सुनिश्चित की गई है। यदि किसी पुल पर पानी बहने की स्थिति बनेगी तो वहां से किसी भी मतदान दल का वाहन नहीं निकाला जाएगा तथा पूर्व निर्धारित वैकल्पिक मार्ग का उपयोग किया जाएगा। प्रत्येक मतदान केंद्र पर पेयजल, व्हीलचेयर एवं प्राथमिक उपचार जैसी आवश्यक सुविधाएं उपलब्ध रहेंगी।

    माइक्रो ऑब्जर्वरों को दिया गया प्रशिक्षण
    दतिया विधानसभा उपनिर्वाचन-2026 को निष्पक्ष एवं पारदर्शी ढंग से संपन्न कराने के उद्देश्य से शासकीय पॉलीटेक्निक कॉलेज में माइक्रो ऑब्जर्वरों का प्रशिक्षण आयोजित किया गया। प्रशिक्षण में निर्वाचन प्रेक्षक श्री विजय भारती की उपस्थिति में मतदान केंद्रों पर निष्पक्षता बनाए रखने, निर्वाचन आयोग के दिशा-निर्देशों का पालन करने तथा प्रत्येक गतिविधि पर सतर्क निगरानी रखने के संबंध में आवश्यक जानकारी दी गई।

    अंतरराज्यीय सीमा पर कड़ी सुरक्षा

    विधानसभा उपनिर्वाचन को निष्पक्ष एवं शांतिपूर्ण ढंग से संपन्न कराने के लिए उनाव थाना क्षेत्र स्थित मध्यप्रदेश-उत्तरप्रदेश अंतरराज्यीय सीमा पर सुरक्षा व्यवस्था सुदृढ़ कर दी गई है। पुलिस एवं सुरक्षा बलों द्वारा चौबीसों घंटे निगरानी रखी जा रही है तथा सीमा से गुजरने वाले प्रत्येक वाहन की सघन जांच की जा रही है। नकदी, शराब एवं अन्य संदिग्ध सामग्री की विशेष जांच की जा रही है ताकि निर्वाचन प्रक्रिया प्रभावित न हो।

    एसएसटी की कार्रवाई में नकदी एवं आभूषण जप्त

    एसएसटी टीम द्वारा विभिन्न नाको पर वाहन जांच के दौरान कुल 98 लाख 80 हजार 800 रुपये नकद जब्त किए गए। संबंधित व्यक्तियों द्वारा कोई वैध दस्तावेज प्रस्तुत नहीं किए जाने पर राशि को जिला कोषालय में जमा कराया गया। वहीं बसई चेकिंग प्वाइंट पर एक अन्य वाहन से 1685 ग्राम चांदी एवं 8.5 ग्राम सोने के आभूषण जब्त किए गए, जिनके संबंध में भी कोई प्रमाणिक दस्तावेज प्रस्तुत नहीं किए गए। आभूषणों को भी सुरक्षार्थ जिला कोषालय में जमा कराया गया।

    सामान्य प्रेक्षक ने मतदान केंद्रों का किया निरीक्षण
    सामान्य प्रेक्षक विजय भारती ने बसई क्षेत्र के विभिन्न मतदान केंद्रों का निरीक्षण कर मतदाता सूची, मूलभूत सुविधाओं एवं निर्वाचन तैयारियों की समीक्षा की। उन्होंने अधिकारियों को निर्देश दिए कि मतदान केंद्रों पर पेयजल, बिजली, शौचालय सहित सभी आवश्यक सुविधाएं समय पर उपलब्ध कराई जाएं तथा निर्वाचन आयोग के दिशा-निर्देशों का पूर्ण पालन सुनिश्चित किया जाए।

    घर-घर पहुंचाई जा रही वोटर पर्चियां

    मतदान प्रतिशत बढ़ाने के उद्देश्य से बूथ लेवल अधिकारियों (बीएलओ) द्वारा घर-घर जाकर मतदाताओं को वोटर पर्चियों का वितरण किया जा रहा है। साथ ही मतदाताओं से अपील की जा रही है कि वे मतदान दिवस पर अपनी वोटर स्लिप तथा पहचान के लिए आयोग द्वारा निर्धारित कोई एक दस्तावेज़ साथ लेकर आएं तथा लोकतंत्र के इस महापर्व में अधिक से अधिक संख्या में भागीदारी करें।

    वरिष्ठ नागरिकों एवं दिव्यांगों के लिए होम वोटिंग

    निर्वाचन आयोग के निर्देशानुसार 85 वर्ष से अधिक आयु के वरिष्ठ नागरिकों एवं पात्र दिव्यांग मतदाताओं को डाक मतपत्र के माध्यम से घर पर ही मतदान की सुविधा प्रदान की गई। निर्वाचन दल निर्धारित प्रक्रिया के अनुसार मतदाताओं के घर पहुंचकर गोपनीय एवं निष्पक्ष वातावरण में मतदान संपन्न कराई गई। यह व्यवस्था ऐसे मतदाताओं के लिए अत्यंत उपयोगी सिद्ध हो रही है जो शारीरिक कारणों से मतदान केंद्र तक नहीं पहुंच सकते है।

    विधानसभा स्तरीय कंट्रोल रूम स्थापित

    दतिया विधानसभा उपनिर्वाचन-2026 के सफल संचालन के लिए न्यू कलेक्ट्रेट कार्यालय के कक्ष क्रमांक-4 में विधानसभा स्तरीय कंट्रोल रूम स्थापित किया गया है। किसी भी निर्वाचन संबंधी जानकारी अथवा शिकायत के लिए मोबाइल नंबर 8305199022 जारी किया गया है। जिला निर्वाचन प्रशासन ने नागरिकों से आवश्यकता पड़ने पर इस नंबर पर संपर्क करने की अपील की है।

  • 2027 के विधानसभा चुनावों में कितना असर दिखाएंगे Gen Z, युवाओं की बढ़ती ताकत पर टिकी राजनीतिक दलों की नजर

    2027 के विधानसभा चुनावों में कितना असर दिखाएंगे Gen Z, युवाओं की बढ़ती ताकत पर टिकी राजनीतिक दलों की नजर

    नई दिल्ली । हाल के वर्षों में देश में युवाओं की राजनीतिक भागीदारी और सामाजिक मुद्दों पर उनकी सक्रियता ने नई बहस को जन्म दिया है। विशेष रूप से हालिया छात्र आंदोलनों और सोशल मीडिया अभियानों के बाद अब यह सवाल उठने लगा है कि क्या 2027 के विधानसभा चुनावों में Gen Z मतदाता चुनावी समीकरणों को प्रभावित कर सकते हैं। राजनीतिक दल भी इस वर्ग को अपनी रणनीति का महत्वपूर्ण हिस्सा मानते हुए अलग-अलग स्तर पर युवाओं तक पहुंच बनाने की कोशिश कर रहे हैं।

    Gen Z में वर्ष 1997 से 2012 के बीच जन्मे युवाओं को शामिल किया जाता है। वर्ष 2026 के हिसाब से इस वर्ग की उम्र लगभग 14 से 29 वर्ष के बीच है। देश में इनकी आबादी करीब 37 करोड़ बताई जाती है, जबकि 18 वर्ष से अधिक आयु वाले मतदाताओं में भी इस वर्ग की हिस्सेदारी उल्लेखनीय है। यही कारण है कि आने वाले चुनावों में युवा मतदाता राजनीतिक दलों के लिए एक महत्वपूर्ण समूह बनकर उभरे हैं।

    उत्तर प्रदेश, पंजाब, उत्तराखंड, गुजरात और गोवा जैसे राज्यों में वर्ष 2027 के दौरान विधानसभा चुनाव प्रस्तावित हैं। इन राज्यों में बड़ी संख्या में युवा मतदाता चुनावी प्रक्रिया का हिस्सा होंगे। उत्तर प्रदेश में 18 से 29 वर्ष आयु वर्ग के लगभग चार करोड़ मतदाता हैं, जो कुल मतदाताओं का करीब 30 प्रतिशत माने जा रहे हैं। इसके अलावा पहली बार मतदान करने वाले युवाओं की संख्या में भी उल्लेखनीय वृद्धि दर्ज की गई है।

    पंजाब में भी बड़ी संख्या में युवा मतदाताओं की मौजूदगी को देखते हुए राजनीतिक दल उन्हें साधने की तैयारी में हैं। कई दल युवा उम्मीदवारों को अधिक अवसर देने और युवाओं से जुड़े मुद्दों को प्रमुखता देने की रणनीति पर काम कर रहे हैं। वहीं उत्तराखंड में भी युवा मतदाता कुल मतदाताओं का महत्वपूर्ण हिस्सा हैं, जिससे चुनावी मुकाबले में उनकी भूमिका अहम मानी जा रही है।

    गुजरात में भी युवा मतदाताओं की संख्या लगातार बढ़ रही है। राज्य में 20 से 29 वर्ष आयु वर्ग के मतदाताओं की बड़ी संख्या को देखते हुए विभिन्न राजनीतिक दल संगठन और नेतृत्व स्तर पर युवाओं को अधिक जिम्मेदारियां देने की दिशा में कदम उठा रहे हैं। वहीं गोवा में भी नए मतदाताओं की संख्या में बढ़ोतरी दर्ज की गई है, जिससे युवा वर्ग का चुनावी महत्व और बढ़ गया है।

    राजनीतिक विश्लेषकों का मानना है कि Gen Z की कार्यशैली पारंपरिक राजनीति से अलग है। यह वर्ग सोशल मीडिया, डिजिटल प्लेटफॉर्म और ऑनलाइन संवाद के माध्यम से अपनी राय व्यक्त करने में अधिक सक्रिय रहता है। कई सामाजिक और शैक्षणिक मुद्दों पर डिजिटल अभियानों में युवाओं की भागीदारी ने यह संकेत दिया है कि वे केवल ऑनलाइन चर्चा तक सीमित नहीं रहना चाहते, बल्कि सार्वजनिक विमर्श में भी अपनी मौजूदगी दर्ज करा रहे हैं।

    विशेषज्ञों का यह भी मानना है कि युवा मतदाता किसी एक राजनीतिक दल का स्थायी समर्थन आधार नहीं माने जा सकते। यह वर्ग रोजगार, शिक्षा, पारदर्शिता, अवसर और शासन से जुड़े मुद्दों को प्राथमिकता देता है तथा परिस्थितियों के अनुसार अपना चुनावी निर्णय बदल सकता है। इसी कारण अधिकांश राजनीतिक दल युवाओं से जुड़े विषयों को अपने चुनावी एजेंडे में प्रमुख स्थान देने की तैयारी कर रहे हैं।

    हालांकि यह कहना अभी जल्दबाजी होगी कि Gen Z अकेले चुनावी परिणाम तय कर देगा, लेकिन इतना स्पष्ट है कि कई राज्यों में युवा मतदाता मुकाबले को प्रभावित करने की क्षमता रखते हैं। ऐसे में वर्ष 2027 के विधानसभा चुनाव इस बात की महत्वपूर्ण परीक्षा होंगे कि युवाओं की बढ़ती राजनीतिक भागीदारी किस हद तक चुनावी नतीजों और राजनीतिक रणनीतियों को प्रभावित करती है।

  • RS चुनावः झारखंड से 2 सीट और 3 उम्मीदवार… आज मतदान के बाद शाम तक साफ हो जाएगी तस्वीर

    RS चुनावः झारखंड से 2 सीट और 3 उम्मीदवार… आज मतदान के बाद शाम तक साफ हो जाएगी तस्वीर


    रांची।
    झारखंड में राज्यसभा की 2 सीटों के लिए आज वोटिंग होनी है. मतदान सुबह 9 बजे से शाम 4 बजे तक विधानसभा परिसर में बने मतदान केंद्र पर होगा. शाम तक रिजल्ट भी आ जाएगा. झारखंड की दो सीटों पर तीन उम्मीदवार होने की वजह से चुनाव दिलचस्प हो गया है।

    तीसरे निर्दलीय उम्मीदवार के रूप में परिमल नाथवानी है, जिनका समर्थन एनडीए कर रहा है. एनडीए के पास 24 विधायक हैं. इनमें बीजेपी के 21, AJSU, जेडीयू और LJP(R) का 1-1 विधायक है. वहीं, झारखंड मुक्ति मोर्चा (JMM) के पास 34 विधायक हैं।

    राज्यसभा की सीट जीतने के लिए 28 विधायकों का समर्थन चाहिए. पहली सीट पर JMM उम्मीदवार बैद्यनाथ राम की जीत तय है. लेकिन असली लड़ाई दूसरी सीट के लिए है. दूसरी सीट पर कांग्रेस उम्मीदवार प्रणव झा और एनडीए समर्थित निर्दलीय उम्मीदवार परिमल नाथवानी हैं. एनडीए को जीत के लिए सिर्फ 4 वोट और चाहिए, जबकि कांग्रेस के पास 14 वोट कम पड़ रहे हैं।

    राज्यसभा चुनाव के लिए इंडिया और एनडीए के बीच अपना कुनबा बचाना सबसे बड़ी चुनौती है. सोमवार को सीएम आवास पर कांग्रेस प्रभारी के राजू ने मुख्यमंत्री हेमंत सोरेन से मुलाकात के बाद साफ कर दिया था कि गठबंधन की सरकार को समर्थन दे रहे सभी 56 विधायकों को 16 और 17 जून को सीएम हाउस में हाजिरी लगानी होगी. के राजू ने बताया था कि वहां डिनर के दौरान मॉक पोल भी होगा. विधायकों को भी शहर में ही रहने का निर्देश दिया गया है.

    इधर NDA ने भी अपने विधायकों को एकजुट रखने के लिए सभी 24 विधायकों को एक साथ रांची के रेडिसन ब्लू में रहने के निर्देश दिए है. दो दिन से विधायक यहीं हैं और यहीं से वोटिंग के लिए जाएंगे. यानी पॉलिटिक्स होटल में शिफ्ट हो गई है.

    जाहिर है ऐसा इसलिए किया गया है कि पोचिंग की संभावना न हो. एनडीए के नेता भी बीजेपी प्रदेश कार्यालय में सोमवार को आयोजित गठबंधन के बैठक के बाद चौंकन्ना हो गए हैं. बैठक से 7विधायक नदारद थे. चंपई सोरेन समेत सरयू राय सरीखे नेता बैठक में नहीं थे।

    कांग्रेस के नेता भी आग में घी का काम ये कहकर डालते रहे कि NDA के तीन विधायक संपर्क में है. हालांकि बाद में चंपई सोरेन के साथ नाथवानी की तस्वीर सामने सोशल मीडिया पर आई और सरयू राय की भी तस्वीर देखने को मिली।


    इंडिया ब्लॉक के 56 विधायक, फिर क्यों चिंता?

    वहीं, कांग्रेस और JMM के दावे हैं कि जब हेमंत सरकार को 56 विधायकों का समर्थन है तो कहां चिंता का विषय है? 2सीट के लिए जीत के लिए 56 विधायकों की ही जरूरत है. लिहाजा दोनों सीट पर उनके ही उम्मीदवार जीतेंगे।

    दोनों गठबंधन ने बैठके की है. दोनों ने मॉक पोल भी किया है. संसदीय कार्य मंत्री राधा कृष्णा किशोर ने मंगलवार रात सीएम हाउस में बैठक के बाद बताया था कि दोनों सीट पर उनकी जीत होगी. मॉक पोल में कांग्रेस को 27 और JMM को 27 मत मिले थे.


    एनडीए को क्रॉस वोटिंग से उम्मीद

    इस बीच NDA की उम्मीदें कोर्स वोटिंग पर टिकी है और इंडिया ब्लॉक क्रॉस वोटिंग रोकने के लिए हर कोशिश कर रहा है. इसी कोशिश पर उसकी जीत का दारोमदार है. एनडीए समर्थित परिमल नाथवानी का कहना है कि भले ही 4 वोट कम है लेकिन झारखंड से वो 2008 और 2014 में भी राज्यसभा जा चुके हैं और सभी ने उनका काम देखा है. उनका कहना है कि अंतरात्मा की आवाज पर उन्हें जीत के लिए 28 वोट मिल जाएंगे।


    दो सीटों पर क्यों हो रहे हैं चुनाव?

    बीजेपी के सांसद दीपक प्रकाश का कार्यकाल खत्म हो रहा. दूसरी सीट शिबू सोरेन की थी, जिनका निधन हो चुका है. हालांकि, शिबू सोरेन अगर होते तो उनका कार्यकाल भी खत्म हो जाता।

  • 10 राज्यों की 24 राज्यसभा सीटों के लिए 18 जून को मतदान…

    10 राज्यों की 24 राज्यसभा सीटों के लिए 18 जून को मतदान…


    नई दिल्ली।
    भारत (India) के 10 राज्यों की 24 सीटों पर राज्यसभा चुनाव (Rajya Sabha elections) होने जा रहे हैं। 18 जून को मतदान (Voting June 18) होगा और संभावनाएं हैं कि एक ही दिन में नतीजे भी घोषित कर दिए जाएं। खास बात है कि यह चुनाव केंद्र में सत्तारूढ़ गठबंधन NDA के लिए बेहद अहम होने जा रहा है। आंकड़े बता रहे हैं कि उच्च सदन में एनडीए दो तिहाई के आंकड़े से महज 15 सांसद दूर है। अब सवाल है कि गठबंधन का सबसा बड़ा सदस्य भारतीय जनता पार्टी कितनी सीटें जीत सकती है।


    समझें राज्यसभा का गणित

    245 सदस्यों वाले राज्यसभा में एनडीए के पास कुल 148 सांसद हैं। इनमें से सबसे बड़ी पार्टी भाजपा के पास 113 सांसद हैं। अब इस गठबंधन को दो तिहाई का जादुई आंकड़ा छूने के लिए 15 और सांसदों की जरूरत है। खास बात है कि कोई भी संविधान संशोधन बिल पार कराने के लिए सरकार को दो तिहाई बहुमत की जरूरत होती है। हालांकि, कहा जा रहा है कि इस चुनाव में एनडीए का इस आंकड़े तक पहुंचना तय नहीं है, लेकिन भाजपा कई राज्यों में बढ़त बना सकती है।


    कहां कितनी सीटें हो रही हैं खाली

    आंध्र प्रदेश और गुजरात में 4-4 सीटों पर चुनाव होने हैं। जबकि, मध्य प्रदेश और राजस्थान में प्रत्येक में 3 सीटों पर चुनाव हैं। इसके अलावा मणिपुर, मेघालाय में 1-1, झारखंड में 2, अरुणाचल प्रदेश में 1, कर्नाटक में 4 और मिजोरम की 1 सीट पर चुनाव होगा। साथ ही 2 राज्यसभा सीट पर उपचुनाव के लिए भी वोट डाले जाएंगे।


    कर्नाटक

    कर्नाटक में एनडीए के खाते में 1 सीट आना तय है। जबकि, कांग्रेस 2 सीटें अपने नाम कर सकती है। कहा जा रहा है कि चौथी सीट इस बात पर निर्भर करेगा कि विधायक किस ओर अपना वोट डाल रहे हैं।


    आंध्र प्रदेश

    175 विधायकों वाले आंध्र प्रदेश में टीडीपी के पास 135 और जन सेना पार्टी के पास 21 विधायक हैं। जबकि, भाजपा के पास 8 और YSRCP के 11 विधायक हैं। इस लिहाज से 164 सीटों वाली एनडीए यहां चारों राज्यसभा सीट जीत सकती है।


    गुजरात

    गुजरात की 182 सीटों वाली विधानसभा में भाजपा के पास 161 विधायकों का भारी बहुमत है। इस मजबूत आंकड़े के दम पर पार्टी को 18 जून को होने वाले राज्यसभा चुनाव में सभी चारों सीटों पर अपनी आसान और पक्की जीत का पूरा भरोसा है।


    राजस्थान

    राजस्थान विधानसभा में सदस्यों की संख्या 200 है। यहां भाजपा के पास 115 और कांग्रेस के 69 विधायक हैं। इस लिहाज से माना जा रहा है कि भाजपा 2 और कांग्रेस 1 सीट जीत सकती है।


    मध्य प्रदेश

    मध्य प्रदेश के नतीजे चौंकाने वाले साबित हो सकते हैं। 163 विधायकों वाली भाजपा यहां 2 सीटें अपने नाम कर सकती है। वहीं, एक सीट कांग्रेस के खाते में जा सकती है।


    झारखंड

    INDIA गठबंधन के शासन वाले राज्य में दोनों ही सीटें सत्तारूढ़ गठबंधन को मिल सकती हैं। हालांकि, कहा जा रहा है कि रणनीति के तहत एनडीए एक सीट हासिल कर सकता है। यहां कुल 81 विधायक हैं, जिनमें 56 INDIA गठबंधन और 24 एनडीए के हैं।

  • राज्यसभा चुनाव कार्यक्रम घोषित, बीरेन सिंह, रवनीत बिट्टू और नरोत्तम मिश्रा समेत कई नेताओं पर सबकी नजर

    राज्यसभा चुनाव कार्यक्रम घोषित, बीरेन सिंह, रवनीत बिट्टू और नरोत्तम मिश्रा समेत कई नेताओं पर सबकी नजर

    नई दिल्ली । देश में राज्यसभा की 24 रिक्त सीटों पर चुनाव की घोषणा के बाद राजनीतिक माहौल तेजी से गर्म हो गया है। चुनाव आयोग की ओर से जारी कार्यक्रम के अनुसार यह मतदान 10 राज्यों में कराया जाएगा, जिससे संसद के उच्च सदन में प्रतिनिधित्व और शक्ति संतुलन पर महत्वपूर्ण असर पड़ने की संभावना है। विभिन्न राजनीतिक दलों ने अपने-अपने स्तर पर रणनीति बनानी शुरू कर दी है और संभावित उम्मीदवारों के नामों पर मंथन तेज हो गया है। इस चुनाव को आगामी संसदीय समीकरणों के लिहाज से बेहद अहम माना जा रहा है, क्योंकि इससे राज्यसभा में दलों की स्थिति में बदलाव संभव है।

    सूत्रों और राजनीतिक चर्चाओं के अनुसार कई राज्यों में वरिष्ठ और प्रभावशाली नेताओं के नाम संभावित उम्मीदवारों की सूची में शामिल किए जा रहे हैं। इनमें पूर्वोत्तर के प्रमुख नेता बीरेन सिंह, पंजाब के नेता रवनीत बिट्टू और मध्य प्रदेश के वरिष्ठ नेता नरोत्तम मिश्रा जैसे नाम प्रमुखता से चर्चा में हैं। हालांकि अंतिम निर्णय संबंधित दलों के केंद्रीय नेतृत्व द्वारा राज्यवार राजनीतिक परिस्थितियों और विधायकों की संख्या के आधार पर लिया जाएगा। उम्मीदवार चयन में क्षेत्रीय संतुलन, जातीय समीकरण और संगठनात्मक अनुभव जैसे कारक महत्वपूर्ण भूमिका निभा रहे हैं।

    चुनाव कार्यक्रम के अनुसार नामांकन प्रक्रिया से लेकर मतदान और मतगणना तक की प्रक्रिया चरणबद्ध तरीके से पूरी की जाएगी। कुछ राज्यों में जहां एक दल का स्पष्ट बहुमत है, वहां निर्विरोध निर्वाचन की संभावना जताई जा रही है, जबकि कुछ अन्य राज्यों में कड़ा मुकाबला देखने को मिल सकता है। विशेष रूप से उन राज्यों में जहां विधानसभा में बहुदलीय संतुलन है, वहां क्रॉस वोटिंग और रणनीतिक मतदान के कारण परिणाम अनिश्चित रह सकते हैं।

    राजनीतिक दलों ने इस चुनाव को गंभीरता से लेते हुए अपने विधायकों के साथ लगातार बैठकें शुरू कर दी हैं। विधायकों की संख्या और वोटिंग गणित को ध्यान में रखते हुए हर पार्टी अपनी स्थिति मजबूत करने में जुटी है। इस प्रक्रिया में पार्टी अनुशासन और व्हिप जारी करने जैसे कदम भी अहम साबित हो सकते हैं।

    विश्लेषकों का मानना है कि यह चुनाव केवल रिक्त सीटों को भरने तक सीमित नहीं है, बल्कि इससे राज्यसभा में सत्ता संतुलन पर भी असर पड़ेगा। आने वाले समय में विधेयकों की मंजूरी और संसदीय बहसों में दलों की भूमिका इसी परिणाम से प्रभावित हो सकती है। यही कारण है कि सभी प्रमुख दल इस चुनाव को लेकर बेहद सतर्क और सक्रिय नजर आ रहे हैं।

    इसके अलावा कई राज्यों में स्थानीय राजनीतिक समीकरण भी इस चुनाव को प्रभावित कर सकते हैं। क्षेत्रीय दलों की भूमिका उन राज्यों में खास तौर पर महत्वपूर्ण होगी जहां किसी भी दल को स्पष्ट बहुमत प्राप्त नहीं है। ऐसे में छोटे दल और निर्दलीय विधायक भी चुनावी परिणामों को प्रभावित करने की क्षमता रखते हैं।

    कुल मिलाकर राज्यसभा की 24 सीटों के लिए घोषित यह चुनाव देश की राजनीति में एक महत्वपूर्ण मोड़ के रूप में देखा जा रहा है। उम्मीदवारों की अंतिम सूची सामने आने के बाद राजनीतिक हलचल और भी तेज होने की संभावना है और सभी की नजर अब मतदान प्रक्रिया और उसके परिणामों पर टिकी हुई है।

  • UN में ब्रिटेन के खिलाफ किस प्रस्ताव पर भारत ने किया वोट? लंदन की बढ़ी टेंशन

    UN में ब्रिटेन के खिलाफ किस प्रस्ताव पर भारत ने किया वोट? लंदन की बढ़ी टेंशन


    संयुक्त राष्ट्र : संयुक्त राष्ट्र में ब्रिटेन को एक बड़ा झटका लगा है. अफ्रीकी देशों की मांग पर UN जनरल असेंबली में एक प्रस्ताव पास किया गया है, जिसमें ब्रिटेन और अन्य पूर्व उपनिवेशवादी देशों से ट्रांसअटलांटिक गुलाम व्यापार के लिए मुआवजा देने की मांग की गई है. इस प्रस्ताव में गुलाम व्यापार को मानवता के खिलाफ सबसे गंभीर अपराध बताया गया है.

    यह प्रस्ताव अफ्रीकी देश घाना की ओर से अफ्रीकी संघ के तत्वावधान में पेश किया गया था. इस पर हुए वोटिंग में 124 देशों ने समर्थन किया, जिसमें भारत भी शामिल है. इस प्रस्ताव का तीन देशों ने विरोध किया और 52 देशों ने वोटिंग में हिस्सा नहीं लिया.

    इस बिल का विरोध करने वाले देशों में अमेरिका, इजराइल और अर्जेंटीना शामिल हैं. वहीं ब्रिटेन के साथ फ्रांस और यूरोपीय संघ (European Union) के कई देशों ने वोटिंग से परहेज किया है. ब्रिटेन ने साफ कर दिया कि वह इस प्रस्ताव से सहमत नहीं है. ब्रिटेन के प्रतिनिधि ने कहा कि उन्हें प्रस्ताव में इस्तेमाल की गई कानूनी भाषा पर आपत्ति है. ब्रिटेन के विदेश कार्यालय के प्रवक्ता ने साफ शब्दों में कहा, “ब्रिटेन का रुख साफ है, हम मुआवजा नहीं देंगे.”

    यह प्रस्ताव कानूनी रूप से बाध्यकारी नहीं है, लेकिन यह अफ्रीकी देशों के लिए एक बड़ी राजनयिक जीत है. अब अफ्रीकी देश इस मामले को अंतरराष्ट्रीय न्यायालय में ले जाने की तैयारी कर रहे हैं. उनका तर्क है कि गुलाम व्यापार की वजह से अफ्रीका का विकास रुका और आज भी इसकी वजह से नस्लभेद की समस्या बनी हुई है.

    अमेरिका ने इस प्रस्ताव का विरोध करते हुए कहा कि वह मानवता के खिलाफ अपराधों की रैंकिंग बनाने का विरोध करता है. अमेरिका ने उन मुस्लिम देशों के गुलाम व्यापार का भी मुद्दा उठाया जो 20वीं सदी तक जारी रहा. UN में ब्रिटेन के खिलाफ पारित इस प्रस्ताव में मुआवजे की मांग की गई है. भारत ने इसके समर्थन में वोट किया, जिससे ब्रिटेन की मुश्किलें बढ़ गई हैं. अब अगला दौर अंतरराष्ट्रीय अदालत में लड़ा जा सकता है.