Tag: vrat tyohar

  • Adhik Maas 2026: पूजा-पाठ और दान का बढ़ेगा महत्व, मिलेगा विशेष फल

    Adhik Maas 2026: पूजा-पाठ और दान का बढ़ेगा महत्व, मिलेगा विशेष फल


    नई दिल्ली।  हिंदू पंचांग के अनुसार इस वर्ष ज्येष्ठ माह में अधिकमास का संयोग बन रहा है। अधिकमास, जिसे पुरुषोत्तम मास भी कहा जाता है, 17 मई 2026 से शुरू होकर 15 जून 2026 तक रहेगा। धार्मिक मान्यताओं के अनुसार इस महीने के स्वामी भगवान विष्णु माने जाते हैं। स्कंद पुराण और पद्म पुराण में अधिकमास को अत्यंत पुण्यदायी बताया गया है। इस दौरान विवाह, गृह प्रवेश, मुंडन और अन्य मांगलिक कार्यों से परहेज किया जाता है।

    क्यों खास माना जाता है पुरुषोत्तम मास?
    मान्यता है कि अधिकमास में जप, तप, दान, कथा, गीता पाठ, भजन-कीर्तन और तीर्थ यात्रा करने से सामान्य दिनों की तुलना में कई गुना अधिक पुण्य फल प्राप्त होता है। इसी वजह से इस महीने आने वाले व्रत और त्योहारों का महत्व भी काफी बढ़ जाता है। भक्त पूरे महीने भगवान विष्णु की विशेष पूजा-अर्चना करते हैं।

    अधिकमास 2026 व्रत-त्योहार कैलेंडर
    17 मई – अधिकमास प्रारंभ
    19 मई – बड़ा मंगल
    20 मई – वरदा चतुर्थी
    21 मई – अधिक स्कंद षष्ठी, गुरु पुष्य नक्षत्र
    23 मई – अधिक मासिक दुर्गाष्टमी
    25 मई – गंगा दशहरा
    26 मई – बड़ा मंगल
    27 मई – अधिक रामलक्ष्मण द्वादशी, पद्मिनी एकादशी
    28 मई – गुरु प्रदोष व्रत
    31 मई – अधिकमास पूर्णिमा व्रत
    3 जून – विभुवन संकष्टी चतुर्थी
    6 जून – मृत्यु पंचक
    8 जून – अधिक कालाष्टमी
    11 जून – परम एकादशी
    12 जून – शुक्र प्रदोष व्रत
    13 जून – अधिक मासिक शिवरात्रि
    15 जून – ज्येष्ठ अधिकमास अमावस्या, मिथुन संक्रांति, अधिकमास समाप्त

    अधिकमास में तीर्थ यात्रा का विशेष महत्व
    धार्मिक ग्रंथों के अनुसार अधिकमास आत्मचिंतन, साधना और भक्ति का समय माना जाता है। इस दौरान सांसारिक कार्यों से दूरी बनाकर ईश्वर भक्ति में मन लगाने की सलाह दी जाती है। पद्म पुराण के अनुसार इस महीने बद्रीनाथ, जगन्नाथ पुरी, द्वारका, वृंदावन, हरिद्वार और प्रयागराज जैसे तीर्थों की यात्रा करने से भगवान विष्णु की विशेष कृपा प्राप्त होती है।

    इन दिनों करें भगवान विष्णु की पूजा
    अधिकमास में प्रतिदिन भगवान विष्णु की पूजा करना शुभ माना गया है। यदि प्रतिदिन संभव न हो, तो पद्मिनी एकादशी, परम एकादशी, गुरु प्रदोष, पूर्णिमा और अमावस्या के दिन श्रीहरि की विशेष आराधना करनी चाहिए।