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  • ‘मेरा बेटा जिंदा लौटेगा सोचा था, अब उसकी लाश मिली’, मां का छलका दर्द, आश्रम से 10 बार लौटाए जाने का दावा, परिवार में पसरा मातम

    ‘मेरा बेटा जिंदा लौटेगा सोचा था, अब उसकी लाश मिली’, मां का छलका दर्द, आश्रम से 10 बार लौटाए जाने का दावा, परिवार में पसरा मातम


    जबलपुर । जबलपुर के परसवाड़ा निवासी 27 वर्षीय दीपक उर्फ रसिक दुलारी शरण की वृंदावन में मौत के बाद परिवार गहरे सदमे में है। परिवार ने घटना को लेकर कई सवाल उठाते हुए उच्चस्तरीय जांच की मांग की है। दीपक की मां उमा पटेल का कहना है कि उनका बेटा करीब दो साल पहले वृंदावन गया था और उसके बाद परिवार उसकी एक झलक के लिए भी तरसता रहा। परिवार का दावा है कि वे कई बार वृंदावन पहुंचे लेकिन उन्हें दीपक से मिलने नहीं दिया गया। अब उसकी मौत की खबर ने पूरे परिवार को तोड़ दिया है।

    परिवार के मुताबिक दीपक पढ़ाई पूरी करने के बाद सेना में भर्ती की तैयारी कर रहा था। उसने लिखित परीक्षा और दौड़ में सफलता हासिल की थी लेकिन शारीरिक परीक्षा में वह चयनित नहीं हो सका। इसके बाद उसका झुकाव धार्मिक गतिविधियों की ओर बढ़ने लगा। वह गांव में भजन और धार्मिक आयोजनों में सक्रिय रहने लगा था। साल 2023 में वह भय्याजी सरकार दादा गुरु की नर्मदा परिक्रमा सेवा टोली से भी जुड़ा था।

    करीब आठ महीने बाद जब दीपक जबलपुर लौटा तो उसके व्यवहार में बदलाव दिखाई देने लगा। वह बार बार वृंदावन जाने की इच्छा जताता था। परिवार की ओर से आपत्ति के बावजूद फरवरी 2024 में वह वृंदावन चला गया और वहां आश्रम में सेवा करने लगा। कुछ समय बाद उसने अपने माता पिता को फोन कर गुरु दीक्षा लेने की जानकारी दी। उसने परिवार से कहा था कि उसका जबलपुर में मन नहीं लगता और वह आश्रम में रहकर सेवा करना चाहता है।

    परिवार का कहना है कि उन्होंने बेटे की इच्छा का सम्मान किया। बाद में दीपक कुछ समय के लिए जबलपुर भी आया लेकिन धीरे धीरे परिवार से उसका संपर्क कम होता गया। उसके पास मोबाइल नहीं रहता था और करीब चार महीने बाद संपर्क पूरी तरह बंद हो गया। जुलाई 2024 में माता पिता और उसका छोटा भाई वृंदावन पहुंचे लेकिन परिवार के अनुसार उन्हें दीपक से मिलने नहीं दिया गया।

    परिजनों का दावा है कि इसके बाद वे कई बार वृंदावन गए। परिवार के मुताबिक 10 से ज्यादा बार आश्रम पहुंचने के बावजूद उन्हें गेट से ही वापस लौटना पड़ा। जून 2026 में 17 से अधिक परिजन एक साथ वृंदावन पहुंचे थे लेकिन तब भी दीपक से मुलाकात नहीं हो सकी। इस दौरान परिवार को जानकारी मिली कि आश्रम में दीपक का नाम रसिक दुलारी शरण हो गया है। परिवार का कहना है कि यह नाम कब बदला गया इसकी जानकारी उन्हें नहीं दी गई।

    दीपक की मौत की सूचना मिलने के बाद परिवार की परेशानी और बढ़ गई। परिजनों के मुताबिक उन्हें फोन पर बताया गया कि दीपक के साथ हादसा हुआ है और वह इमारत से गिर गया है। इसके बाद परिवार वृंदावन के लिए रवाना हुआ। परिवार का आरोप है कि वहां पहुंचने के बाद उन्हें यह पता लगाने में भी काफी परेशानी हुई कि दीपक को किस अस्पताल में ले जाया गया है और उसका शव कहां रखा है।

    काफी तलाश के बाद परिजन अस्पताल पहुंचे जहां उन्हें दीपक का शव मिला। परिवार का कहना है कि शुरुआत में उन्हें केवल हादसे और उपचार की जानकारी दी गई थी। बाद में सामने आई मौत की जानकारी ने परिवार को झकझोर दिया। दीपक की मां का कहना है कि उनका बेटा सेना में जाना चाहता था लेकिन बाद में भक्ति की राह पर चला गया और अब परिवार के पास उसकी यादें ही बची हैं।

    परिवार ने पूरे घटनाक्रम की विस्तृत जांच की मांग की है। उनका कहना है कि दीपक दो साल से परिवार से दूर था और कई बार वृंदावन जाने के बावजूद उनसे मुलाकात नहीं हो सकी। अब वे यह जानना चाहते हैं कि उसके साथ आखिर क्या हुआ और उसकी मौत से पहले की पूरी परिस्थितियां क्या थीं। मामले में जांच के बाद ही घटनाक्रम की वास्तविक स्थिति स्पष्ट हो सकेगी।

  • IPL जीत के बाद आध्यात्मिक सफर पर विराट कोहली, पहुंचे वृंदावन आश्रम

    IPL जीत के बाद आध्यात्मिक सफर पर विराट कोहली, पहुंचे वृंदावन आश्रम


    मथुरा । आईपीएल 2026 में शानदार जीत दर्ज करने के बाद Virat Kohli एक बार फिर आध्यात्मिक यात्रा पर नजर आए। मंगलवार सुबह वे अपनी पत्नी Anushka Sharma के साथ वृंदावन पहुंचे, जहां उन्होंने केली कुंज आश्रम में संत Premanand Maharaj के दर्शन किए।

    दोनों सुबह करीब 7 बजे आश्रम पहुंचे और मास्क पहनकर कार से उतरने के बाद नंगे पैर आश्रम परिसर में प्रवेश किया। संत प्रेमानंद महाराज के शिष्यों ने उनका स्वागत किया। विराट और अनुष्का लगभग दो घंटे तक आश्रम में रुके और संत से मुलाकात की। बाहर निकलने पर विराट के माथे पर चंदन और त्रिपुंड लगा हुआ था, जबकि उनके हाथ में एक धार्मिक पुस्तक भी दिखाई दी।

    आश्रम दर्शन के बाद दोनों ने लगभग 150 मीटर की दूरी पर स्थित गुरु हित गोविंद शरण महाराज के आश्रम का भी दौरा किया। खास बात यह रही कि इस दौरान भी वे नंगे पैर पैदल ही चलते नजर आए। इस यात्रा के दौरान उनकी सादगी और आध्यात्मिक जुड़ाव की झलक देखने को मिली।

    इससे पहले भी विराट और अनुष्का कई बार वृंदावन आ चुके हैं। इसी साल 20 अप्रैल को अक्षय तृतीया के अवसर पर भी दोनों ने संत प्रेमानंद महाराज के दर्शन किए थे और सत्संग में शामिल हुए थे। बताया जा रहा है कि पिछले तीन वर्षों में यह उनकी सातवीं मुलाकात है, जिसमें इस वर्ष की यह तीसरी यात्रा शामिल है।

    गौरतलब है कि हाल ही में Royal Challengers Bengaluru ने अहमदाबाद में खेले गए फाइनल में जीत दर्ज कर खिताब अपने नाम किया था। इस मुकाबले में विराट कोहली ने अहम भूमिका निभाई थी और अपनी टीम के लिए सबसे ज्यादा रन भी बनाए थे।

    आईपीएल में लगातार शानदार प्रदर्शन के बाद कोहली का यह आध्यात्मिक दौरा एक बार फिर चर्चा में है, जहां क्रिकेट की सफलता के बाद उन्होंने धार्मिक और आध्यात्मिक संतुलन को प्राथमिकता दी।

  • प्रेमानंद महाराज की तबीयत में सुधार, दूर-दूर से पहुंचे भक्त बोले- ‘गुरुदेव स्वस्थ होने तक इंतजार करेंगे’

    प्रेमानंद महाराज की तबीयत में सुधार, दूर-दूर से पहुंचे भक्त बोले- ‘गुरुदेव स्वस्थ होने तक इंतजार करेंगे’




    नई दिल्ली। प्रेमानंद महाराज की तबीयत बिगड़ने के बाद देशभर से वृंदावन पहुंचे भक्त लगातार उनके जल्द स्वस्थ होने की प्रार्थना कर रहे हैं। पिछले 10 दिनों से पदयात्रा और सार्वजनिक दर्शन बंद होने के बावजूद श्रद्धालुओं का उत्साह कम नहीं हुआ है। भक्तों का कहना है कि उन्हें अपने गुरुदेव और राधारानी पर पूरा भरोसा है और वे स्वस्थ होकर फिर से भक्तों के बीच लौटेंगे।

    करीब 1400 किलोमीटर दूर Kolkata से वृंदावन पहुंचीं श्रद्धालु जूही भावनी ने कहा कि महाराज जी अभी दर्शन नहीं दे रहे हैं तो भी कोई बात नहीं, वे यहीं रुककर इंतजार करेंगी। उन्होंने भावुक होकर कहा कि उन्हें विश्वास है कि राधारानी की कृपा से प्रेमानंद महाराज जल्द स्वस्थ होंगे और फिर भक्तों को आशीर्वाद देंगे। इसी तरह राजस्थान, असम, बिहार, हरियाणा और उत्तराखंड समेत कई राज्यों से भक्त वृंदावन पहुंच रहे हैं।

    हाल ही में प्रेमानंद महाराज का एक भावुक वीडियो सामने आया, जिसमें उन्होंने कहा कि “हम मिलें न मिलें, बोलें न बोलें, हम आप सबको बहुत प्यार करते हैं। चिंता मत करिए, खूब नाम जप करो।” इस संदेश के बाद भक्तों और शिष्यों में चिंता और भावुकता दोनों बढ़ गई। हालांकि आश्रम से जुड़े सूत्रों के मुताबिक अब उनकी तबीयत में धीरे-धीरे सुधार हो रहा है और वे केवल चुनिंदा शरणागत शिष्यों से ही मुलाकात कर रहे हैं।

    बताया जा रहा है कि प्रेमानंद महाराज लंबे समय से गंभीर किडनी बीमारी से जूझ रहे हैं। वर्ष 2006 में उन्हें पॉलीसिस्टिक किडनी डिजीज का पता चला था। उनकी दोनों किडनियां प्रभावित हैं और सप्ताह में दो से तीन बार डायलिसिस किया जाता है। वृंदावन स्थित उनके फ्लैट में ही डायलिसिस की विशेष व्यवस्था बनाई गई है। कई बार उनकी डायलिसिस प्रक्रिया 4 से 5 घंटे तक चलती है।

    Vrindavan स्थित केली कुंज आश्रम के सेवादारों ने ऑन कैमरा कुछ भी बोलने से इनकार किया, लेकिन ऑफ कैमरा उन्होंने बताया कि महाराज जी फिलहाल एकांत भजन और साधना में लीन हैं। उन्होंने भक्तों से अपील की कि महाराज जी के पूरे संदेश को ध्यान से सुनें और उनके भाव को समझें।

    राजस्थान के पाली से आए श्रद्धालु जालम सिंह ने कहा कि गुरुदेव शरीर से दूर हो सकते हैं, लेकिन उनके बताए मार्ग पर चलने से वे हर भक्त के हृदय में हमेशा मौजूद रहेंगे। वहीं असम से आए भक्त ओमप्रकाश ने कहा कि प्रेमानंद महाराज उनके लिए सर्वस्व हैं और सभी भक्त उनके जल्द स्वस्थ होने की प्रार्थना कर रहे हैं।

    17 मई से प्रेमानंद महाराज की प्रसिद्ध रात्रि पदयात्रा भी स्थगित है। हर रोज हजारों श्रद्धालु उनके दर्शन के लिए पहुंचते थे। सामान्य दिनों में करीब 20 हजार भक्त पदयात्रा में शामिल होते थे, जबकि बड़े आयोजनों में यह संख्या लाखों तक पहुंच जाती थी। हालांकि कुछ दिन पहले वे अपने आश्रम से निकलकर वराह घाट स्थित संत गोविंद शरण महाराज के दर्शन करने भी पहुंचे थे, जिससे भक्तों को उनके स्वास्थ्य में सुधार की उम्मीद मिली है।

    प्रेमानंद महाराज का जीवन भी बेहद प्रेरणादायक माना जाता है। कानपुर के अखरी गांव में जन्मे अनिरुद्ध कुमार पांडे ने महज 13 वर्ष की उम्र में घर छोड़ दिया था। बाद में वे वृंदावन पहुंचे और राधा-कृष्ण भक्ति में लीन होकर राधावल्लभी परंपरा के प्रमुख संतों में शामिल हो गए। आज देशभर में करोड़ों लोग उन्हें आध्यात्मिक मार्गदर्शक के रूप में मानते हैं।