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  • शरद पूर्णिमा पर श्रीकृष्ण ने क्यों रचाया था महारास, गोपी बनने के बाद गोपेश्वर महादेव कैसे पड़े प्रसिद्ध

    शरद पूर्णिमा पर श्रीकृष्ण ने क्यों रचाया था महारास, गोपी बनने के बाद गोपेश्वर महादेव कैसे पड़े प्रसिद्ध

    नई दिल्ली । शरद पूर्णिमा का हिंदू धर्म में विशेष धार्मिक महत्व माना जाता है। धार्मिक मान्यताओं के अनुसार, द्वापर युग में इसी पूर्णिमा की चांदनी रात भगवान श्रीकृष्ण ने वृंदावन में गोपियों के साथ महारास रचाया था। श्रीकृष्ण की इस दिव्य लीला को देखने और उसमें शामिल होने के लिए देवता भी उत्सुक थे। ब्रज में प्रचलित एक कथा के मुताबिक, भगवान शिव भी माता पार्वती के साथ वृंदावन पहुंचे थे। महारास में प्रवेश करने के लिए उन्हें गोपी का रूप धारण करना पड़ा। इसी प्रसंग से भगवान शिव के गोपेश्वर महादेव के रूप में प्रसिद्ध होने की मान्यता जुड़ी है।

    शरद पूर्णिमा की रात वृंदावन की प्राकृतिक सुंदरता और चंद्रमा की चांदनी को महारास की कथा से जोड़ा जाता है। श्रीमद्भागवत महापुराण के दशम स्कंध में भगवान श्रीकृष्ण की रासलीला का विस्तार से वर्णन मिलता है। धार्मिक वर्णन के अनुसार, शरद ऋतु की एक रात आकाश में पूर्ण चंद्रमा चमक रहा था। वृंदावन में खिले फूलों और यमुना के किनारे बहती शीतल हवा के बीच भगवान श्रीकृष्ण ने अपनी बांसुरी बजाई।

    बांसुरी की मधुर धुन सुनकर गोपियां उनकी ओर आकर्षित हुईं और उनके पास पहुंच गईं। मान्यता है कि भगवान श्रीकृष्ण ने अपनी योगमाया से अनेक रूप धारण किए, जिससे प्रत्येक गोपी को अनुभव हुआ कि श्रीकृष्ण केवल उसी के साथ रास कर रहे हैं। इस लीला को भक्ति और भगवान के प्रति समर्पण के प्रतीक के रूप में देखा जाता है। ब्रज में शरद पूर्णिमा को रास पूर्णिमा भी कहा जाता है।

    भगवान शिव के गोपी रूप में महारास में शामिल होने की कथा भी ब्रज की प्रचलित धार्मिक मान्यताओं में महत्वपूर्ण स्थान रखती है। कथा के अनुसार, भगवान शिव श्रीकृष्ण की इस दिव्य लीला के दर्शन करना चाहते थे। वह माता पार्वती के साथ वृंदावन पहुंचे, लेकिन महारास मंडल में प्रवेश के समय उन्हें रोक दिया गया। मान्यता के अनुसार, वहां श्रीकृष्ण के साथ सखी भाव से लीला में शामिल होने के लिए गोपी रूप में होना आवश्यक था।

    महारास में प्रवेश पाने की इच्छा से भगवान शिव ने गोपी का रूप धारण करने का निर्णय लिया। कथा के अनुसार, उन्होंने यमुना में स्नान किया और गोपी का रूप लेकर महारास मंडल में प्रवेश किया। वह लीला में इतने मग्न हो गए कि उनका घूंघट हट गया और वहां मौजूद गोपियों को उनके वास्तविक स्वरूप का पता चल गया। भगवान शिव को देखकर गोपियां हंसने लगीं। भगवान श्रीकृष्ण भी उनकी भक्ति और लीला में शामिल होने की इच्छा से प्रसन्न हुए। इसके बाद भगवान शिव को गोपेश्वर नाम से संबोधित किए जाने की मान्यता प्रचलित हुई। वृंदावन में स्थित गोपेश्वर महादेव मंदिर इसी धार्मिक परंपरा से जुड़ा है।

    धार्मिक मान्यताओं के अनुसार, भगवान श्रीकृष्ण ने महारास के माध्यम से गोपियों की मनोकामना पूरी की थी। इस लीला को कामदेव के अहंकार पर विजय से भी जोड़ा जाता है। मान्यता है कि रास के दौरान भगवान श्रीकृष्ण की योगमाया से प्रत्येक गोपी को उनके साथ होने का अनुभव हुआ, लेकिन इस दिव्य प्रसंग में सांसारिक कामना के बजाय भक्ति और समर्पण का भाव प्रमुख रहा।

    कथा में यह भी बताया जाता है कि महारास के दौरान भगवान श्रीकृष्ण ने अनंत रूप धारण किए थे। चंद्रमा की चांदनी और उस रात के दिव्य वातावरण का वर्णन भी इस प्रसंग का हिस्सा है। शरद पूर्णिमा की रात को लेकर ब्रज में आज भी धार्मिक आयोजन और श्रीकृष्ण की लीलाओं का स्मरण किया जाता है।

    श्रीमद्भागवत महापुराण के दशम स्कंध के अध्याय 29 से 33 तक रासलीला का वर्णन मिलता है। इन पांच अध्यायों को रास पंचाध्यायी कहा जाता है। इनमें श्रीकृष्ण की बांसुरी सुनकर गोपियों का उनके पास पहुंचना, उनका अंतर्धान होना, गोपियों का विरह और फिर महारास का प्रसंग शामिल है। शरद पूर्णिमा पर कई श्रद्धालु रास पंचाध्यायी का पाठ या श्रवण करते हैं। धार्मिक विश्वास के अनुसार, श्रीकृष्ण की लीलाओं का स्मरण करने से भक्ति भाव और मानसिक शांति की अनुभूति होती है।

  • वृंदावन के निधिवन में रात होते ही क्यों बंद हो जाते हैं दरवाजे? राधा-कृष्ण की रासलीला और रंग महल से जुड़ी मान्यता

    वृंदावन के निधिवन में रात होते ही क्यों बंद हो जाते हैं दरवाजे? राधा-कृष्ण की रासलीला और रंग महल से जुड़ी मान्यता

    नई दिल्ली ।उत्तर प्रदेश के वृंदावन को भगवान श्रीकृष्ण की नगरी के रूप में जाना जाता है। यहां के मंदिरों, गलियों और धार्मिक स्थलों से जुड़ी अनेक मान्यताएं श्रद्धालुओं के बीच प्रचलित हैं। इन्हीं प्रमुख स्थलों में निधिवन का विशेष स्थान है। अपनी अनोखी बनावट, झुकी हुई झाड़ियों और राधा-कृष्ण की रासलीला से जुड़ी मान्यताओं के कारण यह स्थान लोगों के बीच आकर्षण का केंद्र बना हुआ है। दिन के समय यहां श्रद्धालु दर्शन करने पहुंचते हैं, लेकिन शाम होने से पहले परिसर खाली करा दिया जाता है और इसके द्वार बंद कर दिए जाते हैं।

    निधिवन से जुड़ी सबसे चर्चित मान्यता भगवान श्रीकृष्ण और राधा रानी की दिव्य रासलीला को लेकर है। स्थानीय धार्मिक विश्वास के अनुसार, रात के समय यहां श्रीकृष्ण राधा रानी और गोपियों के साथ रासलीला करते हैं। इसी आस्था के चलते सूर्यास्त से पहले लोगों को परिसर से बाहर कर दिया जाता है। रात में यहां किसी व्यक्ति के रुकने की अनुमति नहीं होती। स्थानीय लोगों के बीच ऐसी मान्यता भी प्रचलित है कि रात के समय निधिवन में ठहरने वाले व्यक्ति के साथ अनहोनी हो सकती है। ये बातें धार्मिक विश्वासों और लंबे समय से चली आ रही स्थानीय परंपराओं का हिस्सा हैं।

    निधिवन की एक और खास पहचान यहां मौजूद पेड़-पौधों की बनावट है। सामान्य पेड़ों की तरह सीधे और ऊंचे तनों के बजाय यहां छोटी-छोटी झाड़ियां दिखाई देती हैं। उनकी शाखाएं एक-दूसरे की ओर झुकी हुई नजर आती हैं, जिससे परिसर का दृश्य अलग दिखाई देता है। धार्मिक मान्यताओं में इन झाड़ियों को भगवान श्रीकृष्ण, राधा रानी और गोपियों की लीलाओं से जोड़कर देखा जाता है। श्रद्धालुओं का विश्वास है कि इनका संबंध निधिवन में होने वाली दिव्य गतिविधियों से है। यही अनोखी वनस्पति यहां आने वाले लोगों की जिज्ञासा भी बढ़ाती है।

    निधिवन परिसर में स्थित रंग महल का भी विशेष धार्मिक महत्व माना जाता है। इससे जुड़ी मान्यता के अनुसार, यह स्थान राधा रानी और भगवान श्रीकृष्ण की दिव्य लीलाओं से संबंधित है। निधिवन और रंग महल से जुड़ी धार्मिक कथाओं के कारण यहां आने वाले श्रद्धालु इन स्थलों के दर्शन करते हैं। कुछ लोग यहां की अनोखी झाड़ियों को देखने पहुंचते हैं, जबकि अन्य लोग इनसे जुड़ी परंपराओं और मान्यताओं को समझने में रुचि रखते हैं।

    निधिवन का संबंध वृंदावन के प्रसिद्ध बांके बिहारी मंदिर से भी जोड़ा जाता है। धार्मिक मान्यता के अनुसार, बांके बिहारी जी का विग्रह निधिवन से प्रकट हुआ था। इसी वजह से दोनों स्थलों के बीच विशेष आध्यात्मिक संबंध माना जाता है। बांके बिहारी मंदिर में प्रतिदिन बड़ी संख्या में श्रद्धालु दर्शन करने पहुंचते हैं।

    मंदिर में दर्शन की एक विशिष्ट परंपरा भी है। यहां ठाकुर जी के सामने कुछ-कुछ समय के अंतराल पर पर्दा लगाया जाता है। मान्यता है कि भगवान श्रीकृष्ण का मनमोहक स्वरूप इतना आकर्षक है कि भक्त उन्हें लगातार निहारते हुए उनमें खो सकते हैं। इसी धार्मिक विश्वास से पर्दा लगाने की परंपरा को जोड़ा जाता है।

    भगवान श्रीकृष्ण के बांके बिहारी नाम का भी धार्मिक अर्थ बताया जाता है। मान्यता के अनुसार, ‘बांके’ का अर्थ तीन स्थानों से मुड़ा हुआ और ‘बिहारी’ का अर्थ लीला करने वाला होता है। यह नाम उनकी त्रिभंग मुद्रा से जुड़ा है, जिसमें उनका शरीर तीन स्थानों से मुड़ा हुआ दिखाई देता है। इसी स्वरूप के दर्शन के लिए देश के अलग-अलग हिस्सों से श्रद्धालु वृंदावन पहुंचते हैं।

    निधिवन की पहचान केवल उसकी अनोखी बनावट तक सीमित नहीं है। यहां की धार्मिक मान्यताएं, रंग महल और बांके बिहारी मंदिर से जुड़ा संबंध इसे वृंदावन के प्रमुख आस्था स्थलों में शामिल करते हैं। रात में परिसर बंद करने की परंपरा भी इसी धार्मिक विश्वास से जुड़ी हुई है, जो आज तक श्रद्धालुओं और आगंतुकों की जिज्ञासा का विषय बनी हुई है।

  • विराट कोहली पर 5 करोड़ रुपये देने का दावा करने वाले दिनेश फलाहारी ने प्रेमानंद महाराज से मांगी माफी

    विराट कोहली पर 5 करोड़ रुपये देने का दावा करने वाले दिनेश फलाहारी ने प्रेमानंद महाराज से मांगी माफी

    नई दिल्ली: प्रेमानंद महाराज और भारतीय क्रिकेटर विराट कोहली को लेकर विवादित बयान देने वाले दिनेश शर्मा फलाहारी महाराज ने अपने बयान पर माफी मांग ली है। उन्होंने दावा किया था कि विराट कोहली को वृंदावन स्थित प्रेमानंद महाराज के आश्रम में बुलाने के लिए पांच करोड़ रुपये दिए गए थे। इस बयान के बाद विवाद बढ़ गया था। विराट कोहली की टीम ने इन आरोपों को खारिज करते हुए स्पष्ट किया था कि क्रिकेटर प्रेमानंद महाराज से अपनी व्यक्तिगत आस्था और श्रद्धा के कारण मिलने जाते हैं।

    दिनेश फलाहारी ने अपने बयान पर खेद जताते हुए प्रेमानंद महाराज से क्षमा मांगी। उन्होंने कहा कि प्रेमानंद महाराज उनके लिए पहले भी पूजनीय थे और आज भी हैं। यदि उनकी किसी बात से महाराज को दुख पहुंचा है, तो वह इसके लिए माफी मांगते हैं। उन्होंने महाराज के अनुयायियों और संत समाज से भी क्षमा मांगी। उनके इस रुख के बाद पांच करोड़ रुपये से जुड़े पुराने दावे और उस पर आई प्रतिक्रिया फिर चर्चा में आ गई।

    विवाद की शुरुआत तब हुई, जब दिनेश फलाहारी ने आरोप लगाया कि कुछ प्रॉपर्टी कारोबारियों ने विराट कोहली की प्रेमानंद महाराज से मुलाकात करवाने के लिए पांच करोड़ रुपये खर्च किए थे। उन्होंने इस मामले को वृंदावन में जमीन से जुड़े कथित विवादों से भी जोड़ा था। उनका दावा था कि कुछ लोग आध्यात्मिक हस्तियों की लोकप्रियता का इस्तेमाल अपने हितों के लिए कर रहे हैं। इन आरोपों के सामने आने के बाद प्रेमानंद महाराज और विराट कोहली से जुड़ा मामला चर्चा का विषय बन गया।

    विराट कोहली के प्रवक्ता ने इन आरोपों को पूरी तरह झूठा, निराधार और तथ्यात्मक रूप से गलत बताया था। उन्होंने कहा था कि विराट कोहली प्रेमानंद महाराज के प्रति अपनी आस्था और श्रद्धा के कारण उनसे मिलने जाते हैं। साथ ही, ऐसे दावों को आगे बढ़ाने से पहले तथ्यों की पुष्टि करने की बात कही गई थी। विराट कोहली और उनकी पत्नी अनुष्का शर्मा कई बार वृंदावन जाकर प्रेमानंद महाराज से मुलाकात कर चुके हैं। इन मुलाकातों को उनकी आध्यात्मिक आस्था से जुड़ा बताया गया है।

    इस विवाद के बीच दिनेश फलाहारी ने अपने पुराने बयान पर खेद जताया और प्रेमानंद महाराज से माफी मांगी। उन्होंने कहा कि उनका उद्देश्य महाराज का अपमान करना नहीं था। हालांकि, पांच करोड़ रुपये के कथित भुगतान को साबित करने वाला कोई प्रमाण उपलब्ध जानकारी में सामने नहीं आया है। विराट कोहली की टीम ने भी इस दावे का स्पष्ट खंडन किया था। ऐसे में इस कथित भुगतान को स्थापित तथ्य के रूप में प्रस्तुत नहीं किया जा सकता।

    प्रेमानंद महाराज के प्रति अपनी श्रद्धा दोहराते हुए दिनेश फलाहारी ने माफी मांगकर अपने बयान पर सफाई दी। वहीं, विराट कोहली की टीम का कहना रहा कि आश्रम में उनकी मुलाकातें निजी आस्था और श्रद्धा पर आधारित हैं। इस पूरे घटनाक्रम में विवादित दावे, उनका खंडन और उसके बाद मांगी गई माफी प्रमुख मुद्दे बने हुए हैं।

  • विराट-अनुष्का 2023 से 2026 तक आठ बार पहुंचे प्रेमानंद महाराज के आश्रम, 5 करोड़ रुपये के दावे को क्रिकेटर के प्रवक्ता ने बताया निराधार

    विराट-अनुष्का 2023 से 2026 तक आठ बार पहुंचे प्रेमानंद महाराज के आश्रम, 5 करोड़ रुपये के दावे को क्रिकेटर के प्रवक्ता ने बताया निराधार

    नई दिल्ली: क्रिकेटर विराट कोहली और अभिनेत्री अनुष्का शर्मा का संत प्रेमानंद महाराज से मिलने के लिए वृंदावन जाना एक बार फिर चर्चा में है। इसकी वजह विराट को आश्रम ले जाने के लिए पांच करोड़ रुपये खर्च किए जाने का दावा है। श्रीकृष्ण जन्मभूमि संघर्ष न्यास के अध्यक्ष दिनेश शर्मा, जिन्हें फलाहारी महाराज के नाम से भी जाना जाता है, ने यह दावा किया था। इस मामले को लेकर उत्तर प्रदेश के मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ को पत्र लिखे जाने की जानकारी भी सामने आई। हालांकि, विराट कोहली के प्रवक्ता ने इस दावे को गलत, निराधार और तथ्यहीन बताते हुए खारिज कर दिया। उनके मुताबिक, विराट प्रेमानंद महाराज के दर्शन गहरी आस्था और श्रद्धा के कारण करते हैं, न कि किसी आर्थिक समझौते के तहत। इस दावे को साबित करने वाला कोई सार्वजनिक भुगतान रिकॉर्ड या स्वतंत्र रूप से सत्यापित प्रमाण भी सामने नहीं आया है। विवाद के बीच विराट और अनुष्का की आध्यात्मिक यात्राओं का सिलसिला फिर चर्चा में आ गया है।

    विराट कोहली और अनुष्का शर्मा की प्रेमानंद महाराज से पहली सार्वजनिक रूप से सामने आई मुलाकात 4 जनवरी 2023 को हुई थी। दोनों अपनी बेटी वामिका के साथ वृंदावन पहुंचे थे। इस यात्रा के दौरान उन्होंने पहले बाबा नीम करोली के आश्रम में दर्शन किए और फिर प्रेमानंद महाराज के आश्रम जाकर सत्संग सुना और आशीर्वाद लिया। उस समय उनकी यात्रा निजी रखी गई थी, लेकिन बाद में तस्वीरें और वीडियो सामने आने के बाद यह जानकारी सार्वजनिक हुई। करीब दो साल बाद 10 जनवरी 2025 को दोनों अपने बच्चों वामिका और अकाय के साथ दोबारा आश्रम पहुंचे। उस समय विराट ऑस्ट्रेलिया दौरे पर अपने प्रदर्शन को लेकर चर्चा में थे। मुलाकात के दौरान प्रेमानंद महाराज ने उनसे पूछा कि क्या उनका मन प्रसन्न है। विराट ने मुस्कुराकर हां में जवाब दिया। अनुष्का ने भी महाराज से बातचीत में कहा कि उन्हें प्रेम भक्ति चाहिए। उन्होंने बताया कि पिछली मुलाकात में वह कुछ सवाल पूछना चाहती थीं, लेकिन दूसरे लोगों ने वही सवाल पहले पूछ लिए थे।

    13 मई 2025 को विराट और अनुष्का फिर प्रेमानंद महाराज के पास पहुंचे। इस बार दोनों ने उनके साथ एकांत में बातचीत की। यह मुलाकात विराट के टेस्ट क्रिकेट से संन्यास की घोषणा के ठीक बाद हुई थी। इसके बाद 16 दिसंबर 2025 को दोनों दोबारा आश्रम पहुंचे और जमीन पर बैठकर सत्संग सुना। इस दौरान अनुष्का भावुक नजर आईं। उन्होंने महाराज से कहा था कि वे उनके हैं। जवाब में महाराज ने समझाया कि सभी श्रीजी के हैं। फरवरी 2026 में दोनों फिर वृंदावन पहुंचे और आम श्रद्धालुओं के बीच बैठकर सत्संग में शामिल हुए। अप्रैल 2026 में भी उन्होंने आश्रम पहुंचकर महाराज का आशीर्वाद लिया। इन मुलाकातों में दोनों का सादगी से सत्संग में शामिल होना भी चर्चा में रहा।

    विराट कोहली की टीम रॉयल चैलेंजर्स बेंगलुरु के आईपीएल 2026 का खिताब जीतने के बाद 2 जून 2026 को विराट और अनुष्का फिर प्रेमानंद महाराज के आश्रम पहुंचे। दोनों ने वहां सत्संग सुना और आध्यात्मिक बातचीत में हिस्सा लिया। इसके बाद 22 जुलाई 2026 को दोनों श्रीहित राधा केली कुंज आश्रम पहुंचे। बारिश के कारण रास्तों पर कीचड़ था, फिर भी दोनों नंगे पैर आश्रम से बाहर निकलते दिखाई दिए। उनके हाथों में प्रसाद था और चेहरे पर मास्क लगा हुआ था। वहां मौजूद लोगों का उन्होंने ‘राधे-राधे’ कहकर अभिवादन किया। जनवरी 2023 से जुलाई 2026 तक दोनों की आठ सार्वजनिक रूप से सामने आई मुलाकातों की जानकारी सामने आ चुकी है। इन यात्राओं में कभी वे बच्चों के साथ पहुंचे, तो कभी सत्संग और एकांत बातचीत में शामिल हुए।

    पांच करोड़ रुपये के दावे के सामने आने के बाद विराट के प्रवक्ता ने स्पष्ट किया कि प्रेमानंद महाराज से मिलने के लिए किसी तरह की आर्थिक डील नहीं हुई थी। उन्होंने मीडिया से भी अपील की कि विराट से जुड़े ऐसे दावों को आगे बढ़ाने से पहले उनकी तथ्यात्मक जांच की जाए। फिलहाल इस कथित भुगतान के समर्थन में कोई स्वतंत्र रूप से सत्यापित प्रमाण सामने नहीं आया है। वहीं, विराट और अनुष्का की वृंदावन यात्राओं का सिलसिला पिछले साढ़े तीन वर्षों से सार्वजनिक रूप से चर्चा में रहा है। इस पूरे मामले में एक ओर पांच करोड़ रुपये खर्च किए जाने का दावा है, जबकि दूसरी ओर विराट की टीम ने इसे स्पष्ट रूप से नकारा है। ऐसे में इस दावे की स्वतंत्र पुष्टि के बिना इसे स्थापित तथ्य नहीं माना जा सकता।

  • विराट कोहली ने प्रेमानंद महाराज के आश्रम जाने पर लगे 5 करोड़ रुपये के आरोपों को बताया निराधार

    विराट कोहली ने प्रेमानंद महाराज के आश्रम जाने पर लगे 5 करोड़ रुपये के आरोपों को बताया निराधार

    नई दिल्ली । वृंदावन स्थित केलीकुंज आश्रम से जुड़े घटनाक्रम के बीच क्रिकेटर विराट कोहली ने उनके बारे में लगाए गए एक गंभीर आरोप को खारिज किया है। श्रीकृष्ण जन्मभूमि संघर्ष न्यास के अध्यक्ष फलाहारी महाराज ने दावा किया था कि विराट कोहली को पांच करोड़ रुपये देकर प्रेमानंद महाराज के आश्रम में दर्शन के लिए बुलाया गया था। कोहली के प्रवक्ता ने बुधवार को बयान जारी कर इन दावों को पूरी तरह झूठा, बेबुनियाद और तथ्यों के लिहाज से गलत बताया।

    विराट कोहली के प्रवक्ता ने कहा कि कोहली प्रेमानंद महाराज के प्रति गहरी आस्था और श्रद्धा रखते हैं और इसी वजह से उनसे मिलने जाते हैं। बयान में फलाहारी महाराज की ओर से लगाए गए आरोपों का स्पष्ट रूप से खंडन किया गया। साथ ही मीडिया से अपील की गई कि ऐसे दावों को आगे बढ़ाने या प्रकाशित करने से पहले तथ्यों की सावधानी से जांच की जाए और जिम्मेदारी के साथ रिपोर्टिंग की जाए।

    यह विवाद प्रेमानंद महाराज के शिष्य रसिक दुलारी शरण उर्फ दीपक लोदी की मौत के बाद सामने आया, जिसके बाद वृंदावन का केलीकुंज आश्रम चर्चा में आ गया। इसी बीच फलाहारी महाराज ने प्रेमानंद महाराज को पत्र लिखकर विराट कोहली से जुड़ा दावा किया। उन्होंने आरोप लगाया कि प्रेमानंद महाराज की टीम से जुड़े एक साधु गुट ने विराट कोहली को पांच करोड़ रुपये देकर उनके दरबार में दर्शन के लिए बुलाया था। फलाहारी महाराज के मुताबिक, ऐसा इसलिए किया गया ताकि प्रेमानंद महाराज को सेलिब्रिटी के तौर पर स्थापित किया जा सके।

    फलाहारी महाराज ने अपने पत्र में आश्रम और उससे जुड़े लोगों को लेकर अन्य गंभीर आरोप भी लगाए। उन्होंने दावा किया कि प्रेमानंद महाराज की टीम में साधु के भेष में कई भू-माफिया प्रवेश कर चुके हैं। उनके आरोप के मुताबिक, ऐसे लोग यमुना के डूब क्षेत्र की जमीनों की बिक्री में शामिल हैं। उन्होंने बच्चों की किडनी चोरी जैसे गंभीर अपराधों का भी दावा किया। हालांकि उपलब्ध जानकारी में इन आरोपों के समर्थन में कोई स्वतंत्र प्रमाण सामने नहीं बताया गया है।

    फलाहारी महाराज ने प्रेमानंद महाराज से गोवर्धन आने की अपील भी की थी। उन्होंने पूरे मामले की केंद्रीय जांच ब्यूरो यानी सीबीआई से जांच कराने की मांग रखी। पत्र में उन्होंने प्रेमानंद महाराज की सुरक्षा को लेकर भी चिंता जताते हुए कहा कि वह वहां सुरक्षित नहीं हैं। उन्होंने सरकार से प्रेमानंद महाराज को जेड प्लस सुरक्षा देने की मांग की।

    विराट कोहली के प्रवक्ता की ओर से जारी प्रतिक्रिया में पांच करोड़ रुपये लेकर आश्रम जाने के दावे को सीधे तौर पर अस्वीकार किया गया है। बयान में यह भी स्पष्ट किया गया कि कोहली और प्रेमानंद महाराज की मुलाकातों का कारण धार्मिक आस्था और श्रद्धा है। इस तरह फलाहारी महाराज के आरोपों और विराट कोहली के पक्ष की प्रतिक्रिया के बीच विवाद का केंद्र पांच करोड़ रुपये वाला दावा बना हुआ है।

  • प्रेमानंद महाराज के आश्रम पहुंचा मेरठ का परिवार, बेटे प्रिंस की फोटो लेकर मां ने लगाई वापसी की गुहार

    प्रेमानंद महाराज के आश्रम पहुंचा मेरठ का परिवार, बेटे प्रिंस की फोटो लेकर मां ने लगाई वापसी की गुहार


    नई दिल्ली: मेरठ का एक परिवार सोमवार को लापता बेटे प्रिंस की तलाश में वृंदावन स्थित संत प्रेमानंद महाराज के राधा केलि कुंज आश्रम के बाहर पहुंचा। नेत्रपाल अपनी पत्नी पूनम के साथ बेटे की फोटो हाथ में लेकर उसकी वापसी की गुहार लगाते नजर आए। परिजनों के मुताबिक, प्रिंस नीट परीक्षा देने के बाद 8 मई 2024 को अपने माता-पिता के साथ वृंदावन आया था। अगले दिन लाइन में लगने के बाद 10 मई को उसे एकांतिक वार्ता के लिए पास मिला। वार्ता के लिए प्रिंस अकेला आश्रम के अंदर गया, लेकिन इसके बाद वह बाहर नहीं आया। परिवार का कहना है कि उन्होंने आश्रम के साधकों से इसकी जानकारी मांगी, लेकिन प्रिंस का पता नहीं चल सका।

    पूनम ने बताया कि प्रिंस के वापस नहीं आने के बाद परिवार ने मामले की शिकायत मथुरा पुलिस से भी की थी। इसके बावजूद अब तक बेटे का पता नहीं चला है। परिजन लगातार मेरठ और वृंदावन के बीच आ-जा रहे हैं और उसकी तलाश कर रहे हैं। परिवार को उम्मीद है कि जिस तरह अनुज और मयंक की सकुशल बरामदगी हुई, उसी तरह उनका बेटा प्रिंस भी उन्हें मिल सकता है। इसी उम्मीद के साथ परिवार आश्रम के बाहर पहुंचा और लोगों से बेटे की वापसी में मदद की गुहार लगाई।

    वहीं, झारखंड से 17 वर्षीय एक किशोर भी बिना बताए वृंदावन पहुंच गया और प्रेमानंद महाराज के केलि कुंज आश्रम में जाकर संत से दीक्षा लेने की इच्छा जताई। किशोर की उम्र और परिस्थितियों को देखते हुए आश्रम प्रबंधन ने पुलिस को सूचना दी। पुलिस उसे सुरक्षित रमणरेती पुलिस चौकी ले गई और उसके परिजनों से संपर्क किया। आश्रम के बाहर पिछले कुछ दिनों से लापता बच्चों के परिजनों के पहुंचने का सिलसिला भी जारी है।

    सोमवार को प्रिंस की तलाश में आश्रम पहुंचे मेरठ के परिवार को बाहर मौजूद भक्तों की भीड़ से नोकझोंक का सामना भी करना पड़ा। मौके पर मौजूद पुलिस ने अभद्रता करने के आरोप में एक युवक को हिरासत में लिया। पिछले दो दिनों से आश्रम के बाहर इसी तरह का माहौल बना हुआ है। इस बीच संत प्रेमानंद महाराज के भक्तों ने डिजिटल प्लेटफॉर्म पर चैनल चलाने वाले एक पत्रकार का पुतला भी फूंका। भक्तों का आरोप है कि पत्रकार संत की छवि खराब करने का प्रयास कर रहे हैं। संत के दीक्षित साधक रसिक दुलारी शरण की मौत के बाद सामने आ रही खबरों को लेकर भक्तों में आक्रोश बताया गया है।

    आश्रम से जुड़े विवाद के बीच श्री कृष्ण जन्मभूमि संघर्ष न्यास के अध्यक्ष दिनेश शर्मा फलाहारी ने भी आरोप लगाए। उन्होंने दावा किया कि दो गुटों में बंटे आश्रम के शिष्य परिकर की ओर से प्रचार के लिए पैसे देकर एक मशहूर हस्ती को आश्रम बुलाया गया था। उन्होंने आश्रम से जुड़े लोगों की उच्चस्तरीय जांच की मांग की। इस पूरे घटनाक्रम के बीच मेरठ का परिवार अपने बेटे प्रिंस की तलाश में आश्रम पहुंचा और उसकी सकुशल वापसी की उम्मीद जताई।

  • प्रेमानंद महाराज के शिष्य दीपक लोधी की मौत पर सवाल, ग्राइंडर, मोबाइल और डायरी से जांच में सामने आएंगे कई राज

    प्रेमानंद महाराज के शिष्य दीपक लोधी की मौत पर सवाल, ग्राइंडर, मोबाइल और डायरी से जांच में सामने आएंगे कई राज

    नई दिल्ली ।वृंदावन में प्रेमानंद महाराज के शिष्य दीपक लोधी उर्फ रसिक दुलारी शरण की मौत का मामला जांच के घेरे में है। दीपक ने शुक्रवार सुबह करीब साढ़े 10 बजे गुरुकृपा कुंज अपार्टमेंट की चौथी मंजिल से छलांग लगा दी थी। पोस्टमार्टम रिपोर्ट में गंभीर चोट और अधिक रक्तस्राव के कारण मौत की बात सामने आई है। पुलिस मामले को आत्महत्या से जोड़कर जांच कर रही है।

    जांच के दौरान पुलिस को दीपक के कमरे से इलेक्ट्रिक ग्राइंडर, मोबाइल फोन, डायरी और अन्य सामान मिला है। इन वस्तुओं को कब्जे में लेकर जांच की जा रही है। पुलिस का कहना है कि पोस्टमार्टम रिपोर्ट और फोरेंसिक जांच के बाद मौत से जुड़ी परिस्थितियों को लेकर स्थिति अधिक स्पष्ट हो सकेगी।

    दीपक मध्य प्रदेश के जबलपुर के गौर इलाके के परसवाड़ा गांव का रहने वाला था। परिवार के अनुसार, वह पढ़ाई में काफी तेज था और पढ़-लिखकर नौकरी करना चाहता था। उसके रिश्तेदार बृजेश कुमार पटेल ने बताया कि दीपक स्वभाव से सीधा-सादा था और उसका अधिकांश ध्यान पढ़ाई पर रहता था। वह अपने पैरों पर खड़ा होने के लिए नौकरी की तैयारी कर रहा था।

    परिवार के मुताबिक, कॉलेज के दौरान दीपक की धार्मिक रुचि बढ़ने लगी। इसके बाद उसने भक्ति का मार्ग अपना लिया। नर्मदा परिक्रमा करने के बाद वह वृंदावन पहुंचा और प्रेमानंद महाराज के आश्रम से जुड़ गया। यहीं से उसे रसिक दुलारी शरण के नाम से भी जाना जाने लगा।

    परिजनों ने बताया कि दीपक वर्ष 2024 में आश्रम से जुड़ा था। इसके बाद उसका परिवार से संपर्क लगातार कम होता गया। एक बार वृंदावन से जबलपुर लौटने के बाद वह दोबारा वहां गया और करीब दो साल से घर नहीं आया था। परिवार का कहना है कि आश्रम में रहने के दौरान उसका संपर्क उनसे लगभग पूरी तरह खत्म हो गया था।

    दीपक के बहनोई सोनू पटेल ने भी बताया था कि वह परिवार में सबसे अच्छा लड़का था। उनके मुताबिक, आश्रम से जुड़ने के बाद दीपक के पास मोबाइल भी नहीं रहता था, इसलिए परिवार के लोग उससे बातचीत नहीं कर पाते थे। परिजनों का आरोप है कि वे आश्रम के बाहर घंटों इंतजार करते रहे, लेकिन उन्हें दीपक से मिलने का मौका नहीं मिला।

    दीपक की मौत की जानकारी मिलने के बाद परिवार के सदस्य वृंदावन पहुंचे। परिजनों का कहना है कि वे उसकी मौत की परिस्थितियों को लेकर संतुष्ट नहीं हैं। उनका दावा है कि मौत से जुड़े कई सवालों का जवाब जांच के बाद ही मिल सकेगा।

    मामले में सामने आए सीसीटीवी फुटेज के आधार पर पुलिस आत्महत्या के पहलू की जांच कर रही है। हालांकि, परिवार इस निष्कर्ष को स्वीकार करने के लिए तैयार नहीं है। परिजनों ने पूरे मामले की निष्पक्ष जांच के लिए सीबीआई जांच की मांग की है।

    पुलिस ने मौके से मिले मोबाइल, डायरी, इलेक्ट्रिक ग्राइंडर और अन्य सामान को जांच का हिस्सा बनाया है। अब फोरेंसिक जांच, पोस्टमार्टम रिपोर्ट और उपलब्ध साक्ष्यों के आधार पर मौत की परिस्थितियों की पड़ताल की जा रही है। जांच पूरी होने के बाद ही यह स्पष्ट हो सकेगा कि घटना के पीछे वास्तविक परिस्थितियां क्या थीं।

  • प्रेमानंद महाराज के शिष्य की मौत के बाद परिवार का दावा, दो साल से नहीं हुई मुलाकात और फोन पर भी संपर्क बंद था

    प्रेमानंद महाराज के शिष्य की मौत के बाद परिवार का दावा, दो साल से नहीं हुई मुलाकात और फोन पर भी संपर्क बंद था


    नई दिल्ली । वृंदावन में प्रसिद्ध कथावाचक प्रेमानंद महाराज के शिष्य दीपक लोधी उर्फ रसिक दुलारी शरण की मौत का मामला सामने आने के बाद कई सवाल उठ रहे हैं। शुक्रवार सुबह करीब साढ़े 10 बजे बाराह घाट मार्ग स्थित गुरु कृपा कुंज आश्रम की छत से गिरने के बाद दीपक गंभीर रूप से घायल हो गए थे। उन्हें तत्काल एक निजी अस्पताल ले जाया गया, जहां चिकित्सकों ने मृत घोषित कर दिया। शव को पोस्टमार्टम के लिए भेज दिया गया है। मौत की वास्तविक वजह अभी स्पष्ट नहीं हुई है और मामले की जांच जारी है।

    दीपक के बहनोई सोनू पटेल ने बताया कि घटना की जानकारी मिलने के बाद परिवार के लोग आनन-फानन में आश्रम पहुंचे थे। परिवार को शुरुआत में यह बताया गया कि दीपक गिर गए हैं और अस्पताल में उनका ऑपरेशन होना है। परिजन जब आश्रम पहुंचे तो उन्हें बाहर बैठने के लिए कहा गया। सोनू के मुताबिक, परिवार के सदस्य कई घंटे तक बाहर इंतजार करते रहे, लेकिन उन्हें घटना से जुड़ी पूरी जानकारी तत्काल नहीं दी गई।

    परिजनों के अनुसार, दीपक लोधी वर्ष 2024 से आश्रम से जुड़े हुए थे। सोनू पटेल का दावा है कि गुरु दक्षिणा लेने के बाद से दीपक की परिवार से मुलाकात नहीं हो पाई थी। परिवार का कहना है कि जब भी कोई सदस्य उनसे मिलने के लिए पहुंचता था, तो उसे काफी देर तक इंतजार करना पड़ता था। इस वजह से परिजनों का दीपक से संपर्क बेहद सीमित हो गया था।

    सोनू पटेल ने यह भी बताया कि दीपक पिछले करीब दो वर्षों से अपने पास मोबाइल फोन नहीं रखते थे। ऐसे में परिवार के लोग उनसे फोन पर भी बातचीत नहीं कर पाते थे। परिजनों के मुताबिक, लंबे समय से उनका दीपक से सीधा संपर्क नहीं था। मौत की खबर मिलने के बाद परिवार ने कई सवाल उठाए हैं और घटना की पूरी जानकारी सामने आने की मांग की है।

    उधर, घटना के बाद पुलिस ने मामले की जांच शुरू कर दी है। शुरुआती जांच में मामला आत्महत्या से जुड़ा बताया जा रहा है, लेकिन मौत की परिस्थितियों को लेकर जांच अभी जारी है। घटना की सूचना मिलने के बाद पुलिस टीम मौके पर पहुंची और आवश्यक जानकारी जुटाई। फॉरेंसिक टीम ने भी घटनास्थल से जरूरी साक्ष्य एकत्र किए हैं।

    दीपक के शरीर पर चोट के निशान मिलने की बात भी सामने आई है। ये चोटें छत से गिरने के कारण आईं या इससे पहले लगी थीं, इसका स्पष्ट पता जांच पूरी होने के बाद ही चल सकेगा। पुलिस इस पहलू की भी जांच कर रही है कि दीपक की मौत किन परिस्थितियों में हुई और घटना के पीछे आत्महत्या के अलावा कोई अन्य कारण तो नहीं है।

    फिलहाल पोस्टमार्टम रिपोर्ट और जांच से मिलने वाले साक्ष्यों का इंतजार है। पुलिस घटनास्थल, उपलब्ध साक्ष्यों और संबंधित लोगों से मिली जानकारी के आधार पर मौत की परिस्थितियों को समझने की कोशिश कर रही है। वहीं, दीपक के परिजन घटना को लेकर कई सवालों के जवाब चाहते हैं। जांच पूरी होने के बाद ही मौत की वास्तविक वजह और घटनाक्रम की तस्वीर स्पष्ट हो सकेगी।

  • वृंदावन पहुंचे पूर्व राष्ट्रपति रामनाथ कोविंद, ठाकुरजी के दर्शन कर विवेकानंद प्रतिमा पर चढ़ाए फूल

    वृंदावन पहुंचे पूर्व राष्ट्रपति रामनाथ कोविंद, ठाकुरजी के दर्शन कर विवेकानंद प्रतिमा पर चढ़ाए फूल


    वृंदावन।
    पूर्व राष्ट्रपति रामनाथ कोविंद अपने तीन दिवसीय प्रवास के तहत शनिवार सुबह वृंदावन पहुंचे। यहां उन्होंने रामकृष्ण मिशन सेवाश्रम हॉस्पिटल का दौरा किया। अस्पताल पहुंचने पर सेवाश्रम के सचिव स्वामी सुप्रकाशानंद और अस्पताल प्रभारी स्वामी काली कृष्णानंद ने पुष्पगुच्छ भेंट कर उनका स्वागत किया।

    अस्पताल परिसर में पूर्व राष्ट्रपति ने स्वामी विवेकानंद की आदमकद प्रतिमा पर वैदिक मंत्रोच्चार के बीच पुष्पांजलि अर्पित की। इसके बाद वह रामकृष्ण मठ पहुंचे और मंदिर में ठाकुरजी के दर्शन कर पूजा-अर्चना की।
    अस्पताल परिसर में पूर्व राष्ट्रपति ने स्वामी विवेकानंद की आदमकद प्रतिमा पर वैदिक मंत्रोच्चार के बीच पुष्पांजलि अर्पित की। इसके बाद वह रामकृष्ण मठ पहुंचे और मंदिर में ठाकुरजी के दर्शन कर पूजा-अर्चना की।

    ‘शारदा ब्लॉक’ का किया अवलोकन
    ठाकुरजी के दर्शन के बाद रामनाथ कोविंद ने अस्पताल के ‘शारदा ब्लॉक’ का भी अवलोकन किया। यह वही ब्लॉक है जिसका उनके राष्ट्रपति कार्यकाल के दौरान लोकार्पण हुआ था। इस दौरान उन्होंने रामकृष्ण मिशन सेवाश्रम के संतों से मुलाकात की और उनके साथ आत्मीय संवाद किया।

    सिग्नेचर वृंदावन धाम आश्रम का किया उद्घाटन
    रामकृष्ण मिशन सेवाश्रम के कार्यक्रम पूरे करने के बाद पूर्व राष्ट्रपति रुकमणि विहार स्थित ‘सिग्नेचर वृंदावन धाम आश्रम’ पहुंचे। यहां उन्होंने आश्रम का औपचारिक उद्घाटन किया। इस अवसर पर संतों और गणमान्य लोगों की मौजूदगी में रामनाथ कोविंद ने आश्रम परिसर में पौधरोपण भी किया। पौधरोपण के जरिए उन्होंने पर्यावरण संरक्षण का संदेश दिया।

  • वृंदावन पहुंचे पूर्व राष्ट्रपति रामनाथ कोविंद, आज बांकेबिहारी के करेंगे दर्शन, तीन दिन रहेंगे

    वृंदावन पहुंचे पूर्व राष्ट्रपति रामनाथ कोविंद, आज बांकेबिहारी के करेंगे दर्शन, तीन दिन रहेंगे


    मथुरा।
    पूर्व राष्ट्रपति रामनाथ कोविंद शुक्रवार दोपहर अपने निर्धारित कार्यक्रम के तहत वृंदावन पहुंचे। सड़क मार्ग से वृंदावन पहुंचने के बाद वे होटल विवांता गए, जहां कुछ देर विश्राम किया।

    पूर्व राष्ट्रपति के शुक्रवार शाम विश्व प्रसिद्ध ठाकुर श्री बांके बिहारी मंदिर में दर्शन-पूजन करने का कार्यक्रम है। उनके आगमन को लेकर जिला प्रशासन और पुलिस ने सुरक्षा के व्यापक इंतजाम किए हैं। मंदिर परिसर के साथ-साथ आसपास के क्षेत्रों में अतिरिक्त पुलिस बल तैनात किया गया है। यातायात व्यवस्था को सुचारु बनाए रखने के लिए भी विशेष प्रबंध किए गए हैं।

    रामनाथ कोविंद के दर्शन कार्यक्रम को देखते हुए मंदिर प्रशासन ने भी तैयारियां पूरी कर ली हैं। आम श्रद्धालुओं को किसी तरह की परेशानी न हो और सुरक्षा व्यवस्था बनी रहे, इसके लिए आवश्यक व्यवस्थाएं की गई हैं। बांकेबिहारी मंदिर में दर्शन-पूजन के बाद पूर्व राष्ट्रपति प्रेम मंदिर भी जाएंगे। रामनाथ कोविंद का वृंदावन में तीन दिन प्रवास प्रस्तावित है।