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  • वृंदावन पहुंचे पूर्व राष्ट्रपति रामनाथ कोविंद, ठाकुरजी के दर्शन कर विवेकानंद प्रतिमा पर चढ़ाए फूल

    वृंदावन पहुंचे पूर्व राष्ट्रपति रामनाथ कोविंद, ठाकुरजी के दर्शन कर विवेकानंद प्रतिमा पर चढ़ाए फूल


    वृंदावन।
    पूर्व राष्ट्रपति रामनाथ कोविंद अपने तीन दिवसीय प्रवास के तहत शनिवार सुबह वृंदावन पहुंचे। यहां उन्होंने रामकृष्ण मिशन सेवाश्रम हॉस्पिटल का दौरा किया। अस्पताल पहुंचने पर सेवाश्रम के सचिव स्वामी सुप्रकाशानंद और अस्पताल प्रभारी स्वामी काली कृष्णानंद ने पुष्पगुच्छ भेंट कर उनका स्वागत किया।

    अस्पताल परिसर में पूर्व राष्ट्रपति ने स्वामी विवेकानंद की आदमकद प्रतिमा पर वैदिक मंत्रोच्चार के बीच पुष्पांजलि अर्पित की। इसके बाद वह रामकृष्ण मठ पहुंचे और मंदिर में ठाकुरजी के दर्शन कर पूजा-अर्चना की।
    अस्पताल परिसर में पूर्व राष्ट्रपति ने स्वामी विवेकानंद की आदमकद प्रतिमा पर वैदिक मंत्रोच्चार के बीच पुष्पांजलि अर्पित की। इसके बाद वह रामकृष्ण मठ पहुंचे और मंदिर में ठाकुरजी के दर्शन कर पूजा-अर्चना की।

    ‘शारदा ब्लॉक’ का किया अवलोकन
    ठाकुरजी के दर्शन के बाद रामनाथ कोविंद ने अस्पताल के ‘शारदा ब्लॉक’ का भी अवलोकन किया। यह वही ब्लॉक है जिसका उनके राष्ट्रपति कार्यकाल के दौरान लोकार्पण हुआ था। इस दौरान उन्होंने रामकृष्ण मिशन सेवाश्रम के संतों से मुलाकात की और उनके साथ आत्मीय संवाद किया।

    सिग्नेचर वृंदावन धाम आश्रम का किया उद्घाटन
    रामकृष्ण मिशन सेवाश्रम के कार्यक्रम पूरे करने के बाद पूर्व राष्ट्रपति रुकमणि विहार स्थित ‘सिग्नेचर वृंदावन धाम आश्रम’ पहुंचे। यहां उन्होंने आश्रम का औपचारिक उद्घाटन किया। इस अवसर पर संतों और गणमान्य लोगों की मौजूदगी में रामनाथ कोविंद ने आश्रम परिसर में पौधरोपण भी किया। पौधरोपण के जरिए उन्होंने पर्यावरण संरक्षण का संदेश दिया।

  • वृंदावन पहुंचे पूर्व राष्ट्रपति रामनाथ कोविंद, आज बांकेबिहारी के करेंगे दर्शन, तीन दिन रहेंगे

    वृंदावन पहुंचे पूर्व राष्ट्रपति रामनाथ कोविंद, आज बांकेबिहारी के करेंगे दर्शन, तीन दिन रहेंगे


    मथुरा।
    पूर्व राष्ट्रपति रामनाथ कोविंद शुक्रवार दोपहर अपने निर्धारित कार्यक्रम के तहत वृंदावन पहुंचे। सड़क मार्ग से वृंदावन पहुंचने के बाद वे होटल विवांता गए, जहां कुछ देर विश्राम किया।

    पूर्व राष्ट्रपति के शुक्रवार शाम विश्व प्रसिद्ध ठाकुर श्री बांके बिहारी मंदिर में दर्शन-पूजन करने का कार्यक्रम है। उनके आगमन को लेकर जिला प्रशासन और पुलिस ने सुरक्षा के व्यापक इंतजाम किए हैं। मंदिर परिसर के साथ-साथ आसपास के क्षेत्रों में अतिरिक्त पुलिस बल तैनात किया गया है। यातायात व्यवस्था को सुचारु बनाए रखने के लिए भी विशेष प्रबंध किए गए हैं।

    रामनाथ कोविंद के दर्शन कार्यक्रम को देखते हुए मंदिर प्रशासन ने भी तैयारियां पूरी कर ली हैं। आम श्रद्धालुओं को किसी तरह की परेशानी न हो और सुरक्षा व्यवस्था बनी रहे, इसके लिए आवश्यक व्यवस्थाएं की गई हैं। बांकेबिहारी मंदिर में दर्शन-पूजन के बाद पूर्व राष्ट्रपति प्रेम मंदिर भी जाएंगे। रामनाथ कोविंद का वृंदावन में तीन दिन प्रवास प्रस्तावित है।

  • मथुरा: ब्रज की बढ़ती आध्यात्मिक लोकप्रियता: हर वर्ष मथुरा-वृंदावन में 7.5 करोड़ से अधिक श्रद्धालु-पर्यटक पहुंच रहे

    मथुरा: ब्रज की बढ़ती आध्यात्मिक लोकप्रियता: हर वर्ष मथुरा-वृंदावन में 7.5 करोड़ से अधिक श्रद्धालु-पर्यटक पहुंच रहे


    मथुरा। दक्षिण भारत के मदुरै को लंबे समय से देश की प्रमुख टेंपल सिटी के रूप में जाना जाता है, लेकिन अब उत्तर भारत में भगवान श्रीकृष्ण की जन्मभूमि मथुरा-वृंदावन भी तेजी से नए ‘टेंपल कैपिटल’ के रूप में उभर रहा है। काशी विश्वनाथ धाम के पुनर्विकास और अयोध्या में श्रीराम मंदिर निर्माण के बाद ब्रज क्षेत्र धार्मिक पर्यटन और आर्थिक विकास का बड़ा केंद्र बनता दिखाई दे रहा है।

    मंदिरों की संख्या के लिहाज से भी ब्रज की पहचान लगातार मजबूत हो रही है। तमिलनाडु के मदुरै में मीनाक्षी अम्मन मंदिर सहित करीब 100 से 150 प्रमुख मंदिर हैं, जबकि मथुरा जनपद में 5 हजार से अधिक पंजीकृत और पौराणिक मंदिर मौजूद हैं। इनमें अकेले वृंदावन में ही लगभग 4 हजार मंदिर हैं, जिससे यह दुनिया के सबसे सघन मंदिर क्षेत्रों में शामिल हो गया है। तुलना करें तो वाराणसी में 3 हजार से अधिक और अयोध्या में करीब 4 हजार मंदिर एवं मठ हैं।

    श्रद्धालुओं की संख्या भी ब्रज की बढ़ती लोकप्रियता का प्रमाण है। उत्तर प्रदेश पर्यटन विभाग के अनुसार, वाराणसी में हर वर्ष 8.5 से 10 करोड़, अयोध्या में 5.5 से 6.5 करोड़ और मथुरा-वृंदावन में 7.5 करोड़ से अधिक श्रद्धालु एवं पर्यटक पहुंच रहे हैं। दिल्ली-एनसीआर से बेहतर सड़क संपर्क और वीकेंड पर्यटन ने यहां आने वालों की संख्या में लगातार बढ़ोतरी की है।

    ब्रज क्षेत्र में चल रही कई महत्वाकांक्षी परियोजनाएं इसकी धार्मिक और आर्थिक पहचान को नई ऊंचाई दे रही हैं। काशी की तर्ज पर प्रस्तावित बांके बिहारी कॉरिडोर, दुनिया का सबसे ऊंचा 70 मंजिला चंद्रोदय मंदिर, यमुना एक्सप्रेसवे के पास प्रस्तावित 9 हजार हेक्टेयर की राया हेरिटेज सिटी और जेवर अंतरराष्ट्रीय हवाई अड्डे की निकटता इस क्षेत्र को वैश्विक धार्मिक पर्यटन के बड़े केंद्र के रूप में स्थापित करने की दिशा में अहम मानी जा रही है।

    इन परियोजनाओं के चलते ब्रज में निवेश भी तेजी से बढ़ रहा है। बड़े होटल समूह यहां अपने प्रोजेक्ट विकसित कर रहे हैं, जबकि जमीनों की कीमतों में पिछले कुछ वर्षों में 200 से 300 प्रतिशत तक की बढ़ोतरी दर्ज की गई है। धार्मिक पर्यटन, आधारभूत ढांचे और निवेश के बढ़ते दायरे के साथ ब्रज अब उत्तर भारत के नए ‘टेंपल कैपिटल’ के रूप में अपनी मजबूत पहचान बना रहा है।

  • गुरु पूर्णिमा पर काशी में मुस्लिमों ने उतारी संत की आरती, वृंदावन में प्रेमानंद महाराज के स्वागत में बिछे फूल

    गुरु पूर्णिमा पर काशी में मुस्लिमों ने उतारी संत की आरती, वृंदावन में प्रेमानंद महाराज के स्वागत में बिछे फूल

    अयोध्या। गुरु पूर्णिमा के अवसर पर बुधवार को उत्तर प्रदेश के प्रमुख धार्मिक स्थलों पर श्रद्धा और भक्ति का अनूठा संगम देखने को मिला। मथुरा, वाराणसी, प्रयागराज, अयोध्या और गोरखपुर समेत कई शहरों में हजारों श्रद्धालुओं ने अपने गुरुओं का पूजन कर आशीर्वाद प्राप्त किया। जगह-जगह धार्मिक अनुष्ठान, भजन-कीर्तन और विशेष कार्यक्रम आयोजित किए गए।

    मथुरा में संत प्रेमानंद महाराज के दर्शन के लिए बड़ी संख्या में श्रद्धालु पहुंचे। शिष्यों ने उनके स्वागत में करीब 50 मीटर लंबे मार्ग पर फूल बिछाए और दंडवत प्रणाम कर गुरु के प्रति अपनी श्रद्धा व्यक्त की।

    गोरखपुर में मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ ने गोरखनाथ मंदिर पहुंचकर महायोगी गुरु गोरखनाथ की पूजा-अर्चना की। इसके बाद उन्होंने अपने गुरु ब्रह्मलीन महंत अवेद्यनाथ की समाधि पर पुष्पांजलि अर्पित कर श्रद्धांजलि दी।

    अयोध्या में गुरु पूर्णिमा के अवसर पर 100 से अधिक मंदिरों को आकर्षक फूलों से सजाया गया। सुबह से ही सरयू घाटों पर स्नान के लिए श्रद्धालुओं की भीड़ उमड़ पड़ी। अनुमान है कि दो लाख से अधिक श्रद्धालु दर्शन और पूजा-अर्चना के लिए पहुंचे।

    वाराणसी में सांप्रदायिक सौहार्द की मिसाल देखने को मिली। यहां मुस्लिम समुदाय के लोगों ने जगद्गुरु बाबा बालक दास की आरती उतारकर उनका आशीर्वाद लिया। वहीं, गंगा घाटों पर भी श्रद्धालुओं ने पवित्र स्नान कर गुरु पूर्णिमा का पर्व मनाया।

    प्रयागराज में सनातनी किन्नर अखाड़े की ओर से गुरु वंदना यात्रा निकाली गई। आचार्य महामंडलेश्वर कौशल्या नंद गिरि रथ पर सवार रहीं, जबकि किन्नर समुदाय के सदस्य भजनों की धुन पर नृत्य करते हुए यात्रा में शामिल हुए। छत्तीसगढ़ से करीब 600 किलोमीटर की यात्रा कर पहुंचीं सोनिया अपने परिवार और लड्डू गोपाल की प्रतिमा के साथ संगम में स्नान करने पहुंचीं। उन्होंने कहा कि लड्डू गोपाल के घर आने के बाद उनके जीवन में सकारात्मक बदलाव आए हैं।
    प्रयागराज में सनातनी किन्नर अखाड़े की ओर से गुरु वंदना यात्रा निकाली गई। आचार्य महामंडलेश्वर कौशल्या नंद गिरि रथ पर सवार रहीं, जबकि किन्नर समुदाय के सदस्य भजनों की धुन पर नृत्य करते हुए यात्रा में शामिल हुए। छत्तीसगढ़ से करीब 600 किलोमीटर की यात्रा कर पहुंचीं सोनिया अपने परिवार और लड्डू गोपाल की प्रतिमा के साथ संगम में स्नान करने पहुंचीं। उन्होंने कहा कि लड्डू गोपाल के घर आने के बाद उनके जीवन में सकारात्मक बदलाव आए हैं।

    गुरु पूर्णिमा के अवसर पर प्रसिद्ध कथावाचक देवकी नंदन महाराज के दर्शन और पूजन के लिए 10 हजार से अधिक श्रद्धालु पहुंचे। भजन-कीर्तन और धार्मिक आयोजनों के बीच भक्तों ने गुरु का आशीर्वाद लिया और गुरु-शिष्य परंपरा के महत्व को आत्मसात किया।

    वात्सल्य ग्राम आश्रम में पद्म भूषण साध्वी ऋतम्भरा के शिष्यों ने श्रद्धापूर्वक उनका पूजन किया। इस दौरान उन्होंने आध्यात्मिक जीवन, सेवा और संस्कारों का संदेश दिया। उधर, काशी विश्वनाथ मंदिर में मध्य आरती के दौरान बाबा विश्वनाथ का विशेष श्रृंगार कर उन्हें राम नाम की माला अर्पित की गई, जिसने श्रद्धालुओं का मन मोह लिया।

  • इंग्लैंड दौरे के बाद आध्यात्मिक यात्रा पर विराट, अनुष्का संग प्रेमानंद महाराज के दर्शन

    इंग्लैंड दौरे के बाद आध्यात्मिक यात्रा पर विराट, अनुष्का संग प्रेमानंद महाराज के दर्शन


    उत्तर प्रदेश । भारतीय क्रिकेट स्टार Virat Kohli और अभिनेत्री Anushka Sharma बुधवार तड़के वृंदावन पहुंचे, जहां उन्होंने Premanand Maharaj के नए आश्रम यमुना विहार कुंज में दर्शन कर आशीर्वाद लिया। दोनों सुबह करीब चार बजे आश्रम पहुंचे और सादगी के साथ नंगे पैर भीतर गए। लगातार बारिश के कारण रास्ते में कीचड़ था, ऐसे में विराट पूरे रास्ते अनुष्का का हाथ थामे चलते दिखाई दिए।

    आश्रम पहुंचने पर प्रेमानंद महाराज के शिष्यों ने दोनों का स्वागत किया। विराट और अनुष्का करीब एक घंटे तक आश्रम में रहे। बाहर निकलते समय विराट के माथे पर चंदन का तिलक था और उनके हाथ में प्रसाद भी दिखाई दिया। इसके बाद दोनों कार से लगभग 15 किलोमीटर दूर महाराज के गुरु हित गोविंद शरण महाराज के आश्रम पहुंचे और वहां भी दर्शन कर आशीर्वाद प्राप्त किया।

    आश्रम के बाहर दोनों को देखने के लिए श्रद्धालुओं और प्रशंसकों की भीड़ उमड़ पड़ी। विराट और अनुष्का ने चेहरे पर मास्क पहन रखा था तथा हाथ जोड़कर लोगों का अभिवादन किया। सुरक्षा व्यवस्था के चलते किसी को उनके पास जाने की अनुमति नहीं दी गई।

    यह पहली बार नहीं है जब यह दंपती वृंदावन पहुंचा हो। दोनों अब तक आठ बार प्रेमानंद महाराज से मुलाकात कर चुके हैं। इस वर्ष यह उनकी चौथी यात्रा है। इससे पहले आईपीएल जीतने के बाद 2 जून को भी दोनों आश्रम पहुंचे थे, जहां उन्होंने करीब दो घंटे तक समय बिताया था।

    विराट कोहली हाल ही में इंग्लैंड के खिलाफ वनडे सीरीज खेलने के बाद भारत लौटे हैं। तीन मैचों की सीरीज में उन्होंने 144 रन बनाए, जिसमें निर्णायक मुकाबले में 74 रन की महत्वपूर्ण पारी भी शामिल रही। क्रिकेट व्यस्तताओं के बीच उनकी यह आध्यात्मिक यात्रा चर्चा का विषय बनी हुई है।

  • कॉकरोच जनता पार्टी के समर्थन में उतरा वैष्णव किन्नर अखाड़ा, प्रमुख बोलीं- ‘सच से क्यों डरना?’

    कॉकरोच जनता पार्टी के समर्थन में उतरा वैष्णव किन्नर अखाड़ा, प्रमुख बोलीं- ‘सच से क्यों डरना?’

    मथुरा। वृंदावन में वैष्णव किन्नर अखाड़ा की प्रमुख हिमांगी सखी ने ‘कॉकरोच जनता पार्टी’ के समर्थन में बयान देकर नई चर्चा छेड़ दी। पुरुषोत्तम मास के दौरान ठाकुर बांके बिहारी मंदिर में दर्शन और पूजा-अर्चना के लिए पहुंचीं हिमांगी सखी ने कहा कि यह ऑनलाइन समूह देश में फैले भ्रष्टाचार और सामाजिक अव्यवस्थाओं को उजागर करने का काम कर रहा है।

    मीडिया से बातचीत में उन्होंने कहा कि समाज को सच दिखाने वालों से घबराने की बजाय उनका सामना करना चाहिए। उनके मुताबिक, डर केवल उन्हीं लोगों को लगता है जिनके भीतर गलत काम छिपे होते हैं, जबकि ईमानदार व्यक्ति को किसी प्रकार का भय नहीं होना चाहिए।

    हिमांगी सखी ने कहा कि ‘कॉकरोच जनता पार्टी’ युवाओं द्वारा बनाई गई एक पहल है, जिसका उद्देश्य भ्रष्टाचार और सामाजिक गंदगी के खिलाफ आवाज उठाना है। उन्होंने कहा कि आज का युवा सामाजिक और राजनीतिक मुद्दों को लेकर पहले से अधिक जागरूक है और सोशल मीडिया के माध्यम से अपनी बात प्रभावी ढंग से सामने रख रहा है।

    उन्होंने इस पहल को लोकतंत्र को मजबूत करने की दिशा में सकारात्मक कदम बताते हुए कहा कि भ्रष्टाचार के खिलाफ खुलकर बोलना जरूरी है। हिमांगी सखी ने सार्वजनिक रूप से इस संगठन का समर्थन करते हुए कहा कि वह किन्नर जगद्गुरु शंकराचार्य के रूप में इस मुहिम के साथ खड़ी हैं।

    उन्होंने यह भी दावा किया कि कम समय में इस संगठन ने वैश्विक स्तर पर पहचान बनाई है, जो इस बात का संकेत है कि लोग बदलाव और नई सोच को स्वीकार कर रहे हैं।

    हिमांगी सखी के बयान के बाद सोशल मीडिया पर प्रतिक्रियाएं तेज हो गई हैं। कुछ लोगों ने इसे भ्रष्टाचार के खिलाफ साहसिक पहल बताया, जबकि कुछ ने इसे राजनीतिक और सामाजिक विवादों से जोड़कर देखा। हालांकि उन्होंने स्पष्ट किया कि उनका समर्थन किसी राजनीतिक लाभ के लिए नहीं, बल्कि सामाजिक जागरूकता और पारदर्शिता के समर्थन में है।

    वृंदावन में दिए गए इस बयान के बाद ‘कॉकरोच जनता पार्टी’ को लेकर चर्चाएं और तेज हो गई हैं। आने वाले दिनों में इस मुद्दे पर राजनीतिक और सामाजिक स्तर पर और प्रतिक्रियाएं देखने को मिल सकती हैं।

  • वृंदावन में हिमांगी सखी का बड़ा बयान: प्रेमानंद महाराज के लिए भावुक अपील, CJP और धार्मिक मुद्दों पर भी रखी खुली राय

    वृंदावन में हिमांगी सखी का बड़ा बयान: प्रेमानंद महाराज के लिए भावुक अपील, CJP और धार्मिक मुद्दों पर भी रखी खुली राय






    नई दिल्ली। मथुरा के वृंदावन में मंगलवार को वैष्णव किन्नर अखाड़ा की जगद्गुरु शंकराचार्य हिमांगी सखी ने बांके बिहारी मंदिर में दर्शन किए और परिक्रमा कर आस्था प्रकट की। दर्शन के बाद उन्होंने मीडिया से बातचीत में संत प्रेमानंद महाराज के प्रति अपनी गहरी श्रद्धा व्यक्त की और उन्हें वर्तमान समय का एक प्रभावशाली भक्ति संत बताया। उन्होंने कहा कि प्रेमानंद महाराज कम समय में जिस तरह लोगों के बीच लोकप्रिय हुए हैं, वह भक्ति और आध्यात्मिक चेतना का बड़ा उदाहरण है।

    हिमांगी सखी ने भावुक होते हुए कहा कि वे अपने ठाकुर जी से प्रार्थना करेंगी कि संत प्रेमानंद महाराज की उम्र उन्हें मिल जाए, ताकि वे लंबे समय तक समाज को भक्ति मार्ग पर प्रेरित कर सकें। उन्होंने कहा कि ऐसे संतों की आज के समय में बहुत आवश्यकता है जो लोगों को आध्यात्मिकता और सकारात्मक दिशा दे सकें। उन्होंने यह भी कहा कि सोशल मीडिया पर संत प्रेमानंद महाराज के वीडियो देखकर उनका मन भावुक हो जाता है और भक्ति भाव और मजबूत होता है।

    इस दौरान उन्होंने हाल के दिनों में चर्चित कॉकरोच जनता पार्टी (CJP) को लेकर भी अपनी राय रखी। हिमांगी सखी ने कहा कि यह युवाओं द्वारा उठाया गया एक प्रतीकात्मक आंदोलन है, जिसका उद्देश्य समाज में व्याप्त गंदगी, भ्रष्टाचार और कमियों को उजागर करना बताया जा रहा है। उन्होंने कहा कि कॉकरोच जैसे जीव जिस तरह गंदगी की मौजूदगी का संकेत देते हैं, उसी तरह यह आंदोलन भी व्यवस्था में सुधार की ओर इशारा करता है।

    उन्होंने यह भी कहा कि समाज में बदलाव के लिए आलोचना और सवाल जरूरी हैं, और यदि कोई समूह कमियों को उजागर कर रहा है तो उसे सकारात्मक तरीके से देखा जाना चाहिए। हालांकि उन्होंने यह भी स्पष्ट किया कि किसी भी आंदोलन को मर्यादा और कानून के दायरे में रहकर ही आगे बढ़ना चाहिए।

    इसके बाद उन्होंने धार्मिक और सामाजिक मुद्दों पर भी अपनी राय रखी। हिमांगी सखी ने कहा कि देश में कई धार्मिक मामलों को लेकर लंबे समय से विवाद चल रहे हैं, जिन्हें संवाद और न्यायिक प्रक्रिया के जरिए हल किया जाना चाहिए। उन्होंने ज्ञानवापी, भोजशाला और अन्य विवादों का जिक्र करते हुए कहा कि इन मामलों का समाधान समयबद्ध तरीके से होना चाहिए ताकि समाज में अनावश्यक तनाव न बढ़े।

    उन्होंने यह भी कहा कि यदि प्रशासन और न्याय व्यवस्था मिलकर काम करें तो ऐसे संवेदनशील मुद्दों को आसानी से सुलझाया जा सकता है। उन्होंने उदाहरण देते हुए कहा कि कुछ मामलों में अदालत के फैसले आ चुके हैं, लेकिन कई मुद्दे अब भी लंबित हैं, जिन पर जल्द निर्णय की आवश्यकता है।

    अपने बयान के अंतिम हिस्से में उन्होंने कहा कि वे सनातन परंपरा और धार्मिक आस्था के लिए हमेशा आवाज उठाती रहेंगी और जरूरत पड़ने पर आगे भी अपने विचार व्यक्त करेंगी। उन्होंने कहा कि उनका उद्देश्य किसी विवाद को बढ़ाना नहीं, बल्कि समाज में जागरूकता और आध्यात्मिक चेतना को बढ़ाना है।

    वृंदावन में उनके इस दौरे और बयानों के बाद स्थानीय स्तर पर चर्चा तेज हो गई है। कुछ लोगों ने उनके विचारों का समर्थन किया है, जबकि कुछ ने इसे अलग-अलग नजरिए से देखा है। हालांकि प्रशासनिक स्तर पर किसी तरह की कोई प्रतिक्रिया सामने नहीं आई है और स्थिति सामान्य बनी हुई है।

  • संत प्रेमानंद महाराज का भावुक संदेश सुन श्रद्धालु हुए भावुक, बोले– मैं रहूं या न रहूं, आपका साथ कभी नहीं छोड़ूंगा

    संत प्रेमानंद महाराज का भावुक संदेश सुन श्रद्धालु हुए भावुक, बोले– मैं रहूं या न रहूं, आपका साथ कभी नहीं छोड़ूंगा

    नई दिल्ली । देश-दुनिया में करोड़ों श्रद्धालुओं की आस्था का केंद्र बने संत प्रेमानंद महाराज के स्वास्थ्य को लेकर इन दिनों भक्तों के बीच चिंता का माहौल बना हुआ है। पिछले कई दिनों से अस्वस्थ चल रहे महाराज जी की नियमित धार्मिक गतिविधियां स्थगित हैं, जिसके बाद उनके अनुयायियों के बीच लगातार बेचैनी बढ़ रही थी। इसी बीच संत प्रेमानंद महाराज ने अपने भक्तों के लिए एक बेहद भावुक और आध्यात्मिक संदेश जारी किया है, जिसने लाखों श्रद्धालुओं को भावुक कर दिया है।

    काफी समय से गंभीर स्वास्थ्य समस्याओं से जूझ रहे संत प्रेमानंद महाराज ने अपने संदेश में भक्तों से विशेष आग्रह करते हुए कहा कि उन्हें लेकर किसी प्रकार की चिंता करने की आवश्यकता नहीं है। उन्होंने कहा कि यह शरीर नश्वर है और जीवन का नियम परिवर्तन है, लेकिन आत्मिक संबंध कभी समाप्त नहीं होते। उन्होंने अपने श्रद्धालुओं को आश्वस्त करते हुए कहा कि चाहे वह इस शरीर में रहें या न रहें, उनका स्नेह, आशीर्वाद और आध्यात्मिक उपस्थिति हमेशा उनके साथ बनी रहेगी। उन्होंने भक्तों से अपनी चिंता छोड़कर पूरी श्रद्धा के साथ श्रीजी के नाम का स्मरण और भजन करने की अपील की।

    बताया जा रहा है कि पिछले कई दिनों से संत प्रेमानंद महाराज की तबीयत ठीक नहीं चल रही है, जिसके कारण उनकी प्रसिद्ध पदयात्रा और नियमित दर्शन कार्यक्रम अस्थायी रूप से स्थगित कर दिए गए हैं। यह निर्णय उनके स्वास्थ्य को ध्यान में रखते हुए लिया गया। उनके दर्शन के लिए प्रतिदिन बड़ी संख्या में श्रद्धालु पहुंचते रहे हैं और उनकी एक झलक पाने के लिए लोग घंटों इंतजार किया करते हैं। लेकिन स्वास्थ्य में आई गिरावट के बाद परिस्थितियों में बदलाव देखने को मिला है।

    गौरतलब है कि संत प्रेमानंद महाराज लंबे समय से गंभीर स्वास्थ्य चुनौतियों का सामना कर रहे हैं। कठिन शारीरिक परिस्थितियों के बावजूद उन्होंने अपनी धार्मिक दिनचर्या और भक्तों से जुड़ाव को कभी कम नहीं होने दिया। शारीरिक कष्ट के बावजूद उनकी आध्यात्मिक ऊर्जा और भक्तों के प्रति समर्पण हमेशा लोगों के लिए प्रेरणा का विषय रहा है। यही कारण है कि उनके स्वास्थ्य को लेकर भक्तों की चिंता स्वाभाविक रूप से लगातार बढ़ती रही।

    अपने संदेश में उन्होंने एकांतवास को लेकर भी स्थिति स्पष्ट की। उन्होंने कहा कि उनका यह एकांत किसी निजी कारण या व्यक्तिगत लाभ के लिए नहीं है, बल्कि यह उनके आश्रितों और भक्तों के कल्याण से जुड़ा हुआ है। उन्होंने कहा कि अब उनका जीवन पूरी तरह अपने अनुयायियों की आध्यात्मिक उन्नति और कल्याण के लिए समर्पित है। साथ ही उन्होंने सभी श्रद्धालुओं से निर्भय और निश्चिंत रहने की अपील की।

    संत प्रेमानंद महाराज का यह भावुक संदेश केवल स्वास्थ्य अपडेट नहीं बल्कि एक गहरा आध्यात्मिक संदेश भी माना जा रहा है। उनके शब्दों ने एक बार फिर यह दिखाया कि संतों का रिश्ता केवल शारीरिक उपस्थिति तक सीमित नहीं होता, बल्कि वह श्रद्धा, विश्वास और आत्मिक जुड़ाव से जुड़ा होता है। यही कारण है कि उनके इस संदेश ने भक्तों के मन को भावुक भी किया और उन्हें आध्यात्मिक रूप से मजबूत होने का संदेश भी दिया।

  • भक्ति और संगीत का संगम: वृंदावन में गूंजा “बम लहरी”, प्रेमानंद महाराज हुए भावविभोर

    भक्ति और संगीत का संगम: वृंदावन में गूंजा “बम लहरी”, प्रेमानंद महाराज हुए भावविभोर



    नई दिल्ली। वृंदावन में भक्ति, संगीत और आध्यात्मिक ऊर्जा का अद्भुत संगम देखने को मिला जब प्रसिद्ध सूफी एवं भजन गायक Kailash Kher ने केलीकुंज आश्रम में संत Premanand Maharaj से भेंट की। इस मुलाकात के दौरान पूरा वातावरण भक्ति भाव और आनंद से भर गया। कैलाश खेर ने महाराज का पारंपरिक तरीके से स्वागत किया और उन्हें मोरपंखी हार पहनाकर सम्मान प्रकट किया।

    आश्रम में बातचीत के दौरान प्रेमानंद महाराज ने सबसे पहले कैलाश खेर का हाल-चाल पूछा, जिस पर गायक ने सहज भाव से कहा कि वे पूरी तरह “मस्त” हैं। इसके बाद कैलाश खेर ने माइक लेकर अपने प्रसिद्ध भजन “बम लहरी” का गायन शुरू किया। अपने खास अंदाज में उन्होंने न केवल भजन प्रस्तुत किया बल्कि भावपूर्ण नृत्य भी किया, जिससे वहां मौजूद श्रद्धालु और संतगण भी भावविभोर हो उठे। यह भजन लगभग डेढ़ मिनट तक चला, लेकिन इस दौरान वातावरण पूरी तरह भक्तिमय हो गया।

    भजन समाप्त होते ही Premanand Maharaj मुस्कुराए और उन्होंने कैलाश खेर की प्रस्तुति की प्रशंसा करते हुए कहा कि यह बहुत सुंदर और अत्यंत प्रभावशाली था। उनके चेहरे की मुस्कान ने वहां मौजूद सभी लोगों को और भी उत्साहित कर दिया। इसके बाद कैलाश खेर ने एक और भजन प्रस्तुत करने की इच्छा जताई, जिस पर महाराज ने सहमति दी।

    इसके बाद उन्होंने “5 वर्ष की मीरा लाडली हो…” और “सखियां में खेला जाए री…” जैसे भावपूर्ण भजन अपनी विशेष शैली में सुनाए। इन भजनों ने आश्रम के वातावरण को और अधिक आध्यात्मिक बना दिया। प्रेमानंद महाराज ने उनकी आवाज की प्रशंसा करते हुए कहा कि उनकी गायकी अत्यंत प्रभावशाली है और इसमें भक्ति का गहरा भाव झलकता है।

    इससे पहले कैलाश खेर ने वृंदावन स्थित Banke Bihari Temple में भगवान श्री बांके बिहारी जी के दर्शन किए। मंदिर में उन्होंने लगभग 30 मिनट बिताए और फूल बंगले में विराजमान भगवान की छवि को एकटक निहारते रहे। उन्होंने मंदिर की देहरी पर इत्र भी अर्पित किया और श्रद्धा भाव से पूजा-अर्चना की। इस दौरान सेवायत मोहित गोस्वामी ने उन्हें भगवान का प्रसाद और अंगवस्त्र भेंट किया।

    कैलाश खेर के आगमन से वृंदावन में भक्ति का माहौल और अधिक गहरा हो गया। उनके भजन और प्रेमानंद महाराज के साथ संवाद ने यह संदेश दिया कि संगीत और आध्यात्मिकता एक-दूसरे के पूरक हैं। इस पूरे आयोजन ने श्रद्धालुओं को भक्ति के नए अनुभव से जोड़ा और वातावरण को दिव्यता से भर दिया।

  • वृंदावन में भक्ति का रंग: ग्लैमर जगत के सितारों की राधा-कृष्ण भक्ति यात्रा ने बढ़ाई रौनक

    वृंदावन में भक्ति का रंग: ग्लैमर जगत के सितारों की राधा-कृष्ण भक्ति यात्रा ने बढ़ाई रौनक


    नई दिल्ली । चमक-दमक और ग्लैमर की दुनिया छोड़कर कई फिल्मी और टीवी सितारे अब वृंदावन की भक्ति और सादगी की ओर आकर्षित हो रहे हैं। ‘राधे-राधे’ के जयकारे के साथ आध्यात्मिक शांति की तलाश में बड़ी संख्या में लोग ब्रज की ओर रुख कर रहे हैं, जिससे धार्मिक पर्यटन और स्थानीय कारोबार में तेज़ उछाल देखा जा रहा है।

    कभी फिल्मी पर्दे की चकाचौंध, रेड कार्पेट और करोड़ों के सेट जिनकी पहचान हुआ करते थे, आज वही दुनिया कई कलाकारों को आकर्षित नहीं कर पा रही। हाल के वर्षों में वृंदावन और ब्रजभूमि का आध्यात्मिक माहौल कई सेलेब्रिटीज़ को अपनी ओर खींच रहा है। अब ‘राधे-राधे’ का जयघोष और तुलसी की माला कई कलाकारों की नई पहचान बनती दिख रही है।

    वृंदावन बना आस्था और सुकून का केंद्र
    मथुरा-वृंदावन में श्रद्धालुओं की संख्या लगातार बढ़ रही है। पर्यटन विभाग के अनुसार रोजाना करीब 1 से 1.5 लाख लोग यहां पहुंच रहे हैं। त्योहारों और वीकेंड पर यह आंकड़ा कई गुना बढ़ जाता है। बरसाना, गोवर्धन और बांके बिहारी मंदिर जैसे स्थान अब सिर्फ धार्मिक ही नहीं बल्कि आत्मिक शांति के प्रमुख केंद्र बन चुके हैं।
    एना जयसिंघानी: टीवी की दुनिया से साध्वी जीवन तक
    ग्वालियर की रहने वाली एना जयसिंघानी ने मुंबई में टीवी इंडस्ट्री में पहचान बनाई थी। ‘देखा एक ख्वाब’ और ‘फियर फाइल्स’ जैसे शोज़ से लोकप्रियता हासिल करने के बाद उन्होंने अचानक ग्लैमर की दुनिया से दूरी बना ली। उनका कहना है कि वृंदावन आने के बाद उन्हें जीवन की नई दिशा मिली। अब वह भक्ति मार्ग पर चल रही हैं और साध्वी जीवन अपना चुकी हैं।
    अनुष्का शर्मा और आध्यात्मिक जुड़ाव की चर्चा
    बॉलीवुड अभिनेत्री अनुष्का शर्मा के भी वृंदावन और प्रेमानंद महाराज से जुड़ाव की चर्चाएं लगातार सुर्खियों में रही हैं। रिपोर्ट्स के अनुसार, वे कई बार आश्रम पहुंची हैं और आध्यात्मिक प्रवचनों से जुड़ी रही हैं।
    अन्य सितारे भी भक्ति में हुए शामिल
    शिल्पा शेट्टी, हेमा मालिनी, मीका सिंह, बादशाह और कुमार सानू जैसे कई कलाकार भी समय-समय पर वृंदावन और संतों के संपर्क में आए हैं। इन मुलाकातों में अधिकांश ने मानसिक शांति और जीवन संतुलन की बात को प्रमुखता दी है।
    प्रेमानंद महाराज का बढ़ता प्रभाव
    वृंदावन के प्रेमानंद महाराज की शिक्षाएं ‘राधा नाम जप’ और सरल जीवन पर आधारित हैं। उनके आश्रम में आने वाले श्रद्धालु बताते हैं कि यहां जीवन की जटिलताओं का समाधान भक्ति और नामस्मरण में बताया जाता है। यही कारण है कि युवा वर्ग भी बड़ी संख्या में यहां आकर्षित हो रहा है।
    ग्लैमर की दुनिया से भक्ति की ओर बढ़ता यह रुझान केवल व्यक्तिगत बदलाव नहीं, बल्कि समाज में आध्यात्मिकता की बढ़ती तलाश को भी दर्शाता है। वृंदावन अब केवल धार्मिक स्थल नहीं, बल्कि मानसिक शांति और जीवन संतुलन का एक बड़ा केंद्र बनता जा रहा है।