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  • कॉकरोच जनता पार्टी के समर्थन में उतरा वैष्णव किन्नर अखाड़ा, प्रमुख बोलीं- ‘सच से क्यों डरना?’

    कॉकरोच जनता पार्टी के समर्थन में उतरा वैष्णव किन्नर अखाड़ा, प्रमुख बोलीं- ‘सच से क्यों डरना?’

    मथुरा। वृंदावन में वैष्णव किन्नर अखाड़ा की प्रमुख हिमांगी सखी ने ‘कॉकरोच जनता पार्टी’ के समर्थन में बयान देकर नई चर्चा छेड़ दी। पुरुषोत्तम मास के दौरान ठाकुर बांके बिहारी मंदिर में दर्शन और पूजा-अर्चना के लिए पहुंचीं हिमांगी सखी ने कहा कि यह ऑनलाइन समूह देश में फैले भ्रष्टाचार और सामाजिक अव्यवस्थाओं को उजागर करने का काम कर रहा है।

    मीडिया से बातचीत में उन्होंने कहा कि समाज को सच दिखाने वालों से घबराने की बजाय उनका सामना करना चाहिए। उनके मुताबिक, डर केवल उन्हीं लोगों को लगता है जिनके भीतर गलत काम छिपे होते हैं, जबकि ईमानदार व्यक्ति को किसी प्रकार का भय नहीं होना चाहिए।

    हिमांगी सखी ने कहा कि ‘कॉकरोच जनता पार्टी’ युवाओं द्वारा बनाई गई एक पहल है, जिसका उद्देश्य भ्रष्टाचार और सामाजिक गंदगी के खिलाफ आवाज उठाना है। उन्होंने कहा कि आज का युवा सामाजिक और राजनीतिक मुद्दों को लेकर पहले से अधिक जागरूक है और सोशल मीडिया के माध्यम से अपनी बात प्रभावी ढंग से सामने रख रहा है।

    उन्होंने इस पहल को लोकतंत्र को मजबूत करने की दिशा में सकारात्मक कदम बताते हुए कहा कि भ्रष्टाचार के खिलाफ खुलकर बोलना जरूरी है। हिमांगी सखी ने सार्वजनिक रूप से इस संगठन का समर्थन करते हुए कहा कि वह किन्नर जगद्गुरु शंकराचार्य के रूप में इस मुहिम के साथ खड़ी हैं।

    उन्होंने यह भी दावा किया कि कम समय में इस संगठन ने वैश्विक स्तर पर पहचान बनाई है, जो इस बात का संकेत है कि लोग बदलाव और नई सोच को स्वीकार कर रहे हैं।

    हिमांगी सखी के बयान के बाद सोशल मीडिया पर प्रतिक्रियाएं तेज हो गई हैं। कुछ लोगों ने इसे भ्रष्टाचार के खिलाफ साहसिक पहल बताया, जबकि कुछ ने इसे राजनीतिक और सामाजिक विवादों से जोड़कर देखा। हालांकि उन्होंने स्पष्ट किया कि उनका समर्थन किसी राजनीतिक लाभ के लिए नहीं, बल्कि सामाजिक जागरूकता और पारदर्शिता के समर्थन में है।

    वृंदावन में दिए गए इस बयान के बाद ‘कॉकरोच जनता पार्टी’ को लेकर चर्चाएं और तेज हो गई हैं। आने वाले दिनों में इस मुद्दे पर राजनीतिक और सामाजिक स्तर पर और प्रतिक्रियाएं देखने को मिल सकती हैं।

  • वृंदावन में हिमांगी सखी का बड़ा बयान: प्रेमानंद महाराज के लिए भावुक अपील, CJP और धार्मिक मुद्दों पर भी रखी खुली राय

    वृंदावन में हिमांगी सखी का बड़ा बयान: प्रेमानंद महाराज के लिए भावुक अपील, CJP और धार्मिक मुद्दों पर भी रखी खुली राय






    नई दिल्ली। मथुरा के वृंदावन में मंगलवार को वैष्णव किन्नर अखाड़ा की जगद्गुरु शंकराचार्य हिमांगी सखी ने बांके बिहारी मंदिर में दर्शन किए और परिक्रमा कर आस्था प्रकट की। दर्शन के बाद उन्होंने मीडिया से बातचीत में संत प्रेमानंद महाराज के प्रति अपनी गहरी श्रद्धा व्यक्त की और उन्हें वर्तमान समय का एक प्रभावशाली भक्ति संत बताया। उन्होंने कहा कि प्रेमानंद महाराज कम समय में जिस तरह लोगों के बीच लोकप्रिय हुए हैं, वह भक्ति और आध्यात्मिक चेतना का बड़ा उदाहरण है।

    हिमांगी सखी ने भावुक होते हुए कहा कि वे अपने ठाकुर जी से प्रार्थना करेंगी कि संत प्रेमानंद महाराज की उम्र उन्हें मिल जाए, ताकि वे लंबे समय तक समाज को भक्ति मार्ग पर प्रेरित कर सकें। उन्होंने कहा कि ऐसे संतों की आज के समय में बहुत आवश्यकता है जो लोगों को आध्यात्मिकता और सकारात्मक दिशा दे सकें। उन्होंने यह भी कहा कि सोशल मीडिया पर संत प्रेमानंद महाराज के वीडियो देखकर उनका मन भावुक हो जाता है और भक्ति भाव और मजबूत होता है।

    इस दौरान उन्होंने हाल के दिनों में चर्चित कॉकरोच जनता पार्टी (CJP) को लेकर भी अपनी राय रखी। हिमांगी सखी ने कहा कि यह युवाओं द्वारा उठाया गया एक प्रतीकात्मक आंदोलन है, जिसका उद्देश्य समाज में व्याप्त गंदगी, भ्रष्टाचार और कमियों को उजागर करना बताया जा रहा है। उन्होंने कहा कि कॉकरोच जैसे जीव जिस तरह गंदगी की मौजूदगी का संकेत देते हैं, उसी तरह यह आंदोलन भी व्यवस्था में सुधार की ओर इशारा करता है।

    उन्होंने यह भी कहा कि समाज में बदलाव के लिए आलोचना और सवाल जरूरी हैं, और यदि कोई समूह कमियों को उजागर कर रहा है तो उसे सकारात्मक तरीके से देखा जाना चाहिए। हालांकि उन्होंने यह भी स्पष्ट किया कि किसी भी आंदोलन को मर्यादा और कानून के दायरे में रहकर ही आगे बढ़ना चाहिए।

    इसके बाद उन्होंने धार्मिक और सामाजिक मुद्दों पर भी अपनी राय रखी। हिमांगी सखी ने कहा कि देश में कई धार्मिक मामलों को लेकर लंबे समय से विवाद चल रहे हैं, जिन्हें संवाद और न्यायिक प्रक्रिया के जरिए हल किया जाना चाहिए। उन्होंने ज्ञानवापी, भोजशाला और अन्य विवादों का जिक्र करते हुए कहा कि इन मामलों का समाधान समयबद्ध तरीके से होना चाहिए ताकि समाज में अनावश्यक तनाव न बढ़े।

    उन्होंने यह भी कहा कि यदि प्रशासन और न्याय व्यवस्था मिलकर काम करें तो ऐसे संवेदनशील मुद्दों को आसानी से सुलझाया जा सकता है। उन्होंने उदाहरण देते हुए कहा कि कुछ मामलों में अदालत के फैसले आ चुके हैं, लेकिन कई मुद्दे अब भी लंबित हैं, जिन पर जल्द निर्णय की आवश्यकता है।

    अपने बयान के अंतिम हिस्से में उन्होंने कहा कि वे सनातन परंपरा और धार्मिक आस्था के लिए हमेशा आवाज उठाती रहेंगी और जरूरत पड़ने पर आगे भी अपने विचार व्यक्त करेंगी। उन्होंने कहा कि उनका उद्देश्य किसी विवाद को बढ़ाना नहीं, बल्कि समाज में जागरूकता और आध्यात्मिक चेतना को बढ़ाना है।

    वृंदावन में उनके इस दौरे और बयानों के बाद स्थानीय स्तर पर चर्चा तेज हो गई है। कुछ लोगों ने उनके विचारों का समर्थन किया है, जबकि कुछ ने इसे अलग-अलग नजरिए से देखा है। हालांकि प्रशासनिक स्तर पर किसी तरह की कोई प्रतिक्रिया सामने नहीं आई है और स्थिति सामान्य बनी हुई है।

  • संत प्रेमानंद महाराज का भावुक संदेश सुन श्रद्धालु हुए भावुक, बोले– मैं रहूं या न रहूं, आपका साथ कभी नहीं छोड़ूंगा

    संत प्रेमानंद महाराज का भावुक संदेश सुन श्रद्धालु हुए भावुक, बोले– मैं रहूं या न रहूं, आपका साथ कभी नहीं छोड़ूंगा

    नई दिल्ली । देश-दुनिया में करोड़ों श्रद्धालुओं की आस्था का केंद्र बने संत प्रेमानंद महाराज के स्वास्थ्य को लेकर इन दिनों भक्तों के बीच चिंता का माहौल बना हुआ है। पिछले कई दिनों से अस्वस्थ चल रहे महाराज जी की नियमित धार्मिक गतिविधियां स्थगित हैं, जिसके बाद उनके अनुयायियों के बीच लगातार बेचैनी बढ़ रही थी। इसी बीच संत प्रेमानंद महाराज ने अपने भक्तों के लिए एक बेहद भावुक और आध्यात्मिक संदेश जारी किया है, जिसने लाखों श्रद्धालुओं को भावुक कर दिया है।

    काफी समय से गंभीर स्वास्थ्य समस्याओं से जूझ रहे संत प्रेमानंद महाराज ने अपने संदेश में भक्तों से विशेष आग्रह करते हुए कहा कि उन्हें लेकर किसी प्रकार की चिंता करने की आवश्यकता नहीं है। उन्होंने कहा कि यह शरीर नश्वर है और जीवन का नियम परिवर्तन है, लेकिन आत्मिक संबंध कभी समाप्त नहीं होते। उन्होंने अपने श्रद्धालुओं को आश्वस्त करते हुए कहा कि चाहे वह इस शरीर में रहें या न रहें, उनका स्नेह, आशीर्वाद और आध्यात्मिक उपस्थिति हमेशा उनके साथ बनी रहेगी। उन्होंने भक्तों से अपनी चिंता छोड़कर पूरी श्रद्धा के साथ श्रीजी के नाम का स्मरण और भजन करने की अपील की।

    बताया जा रहा है कि पिछले कई दिनों से संत प्रेमानंद महाराज की तबीयत ठीक नहीं चल रही है, जिसके कारण उनकी प्रसिद्ध पदयात्रा और नियमित दर्शन कार्यक्रम अस्थायी रूप से स्थगित कर दिए गए हैं। यह निर्णय उनके स्वास्थ्य को ध्यान में रखते हुए लिया गया। उनके दर्शन के लिए प्रतिदिन बड़ी संख्या में श्रद्धालु पहुंचते रहे हैं और उनकी एक झलक पाने के लिए लोग घंटों इंतजार किया करते हैं। लेकिन स्वास्थ्य में आई गिरावट के बाद परिस्थितियों में बदलाव देखने को मिला है।

    गौरतलब है कि संत प्रेमानंद महाराज लंबे समय से गंभीर स्वास्थ्य चुनौतियों का सामना कर रहे हैं। कठिन शारीरिक परिस्थितियों के बावजूद उन्होंने अपनी धार्मिक दिनचर्या और भक्तों से जुड़ाव को कभी कम नहीं होने दिया। शारीरिक कष्ट के बावजूद उनकी आध्यात्मिक ऊर्जा और भक्तों के प्रति समर्पण हमेशा लोगों के लिए प्रेरणा का विषय रहा है। यही कारण है कि उनके स्वास्थ्य को लेकर भक्तों की चिंता स्वाभाविक रूप से लगातार बढ़ती रही।

    अपने संदेश में उन्होंने एकांतवास को लेकर भी स्थिति स्पष्ट की। उन्होंने कहा कि उनका यह एकांत किसी निजी कारण या व्यक्तिगत लाभ के लिए नहीं है, बल्कि यह उनके आश्रितों और भक्तों के कल्याण से जुड़ा हुआ है। उन्होंने कहा कि अब उनका जीवन पूरी तरह अपने अनुयायियों की आध्यात्मिक उन्नति और कल्याण के लिए समर्पित है। साथ ही उन्होंने सभी श्रद्धालुओं से निर्भय और निश्चिंत रहने की अपील की।

    संत प्रेमानंद महाराज का यह भावुक संदेश केवल स्वास्थ्य अपडेट नहीं बल्कि एक गहरा आध्यात्मिक संदेश भी माना जा रहा है। उनके शब्दों ने एक बार फिर यह दिखाया कि संतों का रिश्ता केवल शारीरिक उपस्थिति तक सीमित नहीं होता, बल्कि वह श्रद्धा, विश्वास और आत्मिक जुड़ाव से जुड़ा होता है। यही कारण है कि उनके इस संदेश ने भक्तों के मन को भावुक भी किया और उन्हें आध्यात्मिक रूप से मजबूत होने का संदेश भी दिया।

  • भक्ति और संगीत का संगम: वृंदावन में गूंजा “बम लहरी”, प्रेमानंद महाराज हुए भावविभोर

    भक्ति और संगीत का संगम: वृंदावन में गूंजा “बम लहरी”, प्रेमानंद महाराज हुए भावविभोर



    नई दिल्ली। वृंदावन में भक्ति, संगीत और आध्यात्मिक ऊर्जा का अद्भुत संगम देखने को मिला जब प्रसिद्ध सूफी एवं भजन गायक Kailash Kher ने केलीकुंज आश्रम में संत Premanand Maharaj से भेंट की। इस मुलाकात के दौरान पूरा वातावरण भक्ति भाव और आनंद से भर गया। कैलाश खेर ने महाराज का पारंपरिक तरीके से स्वागत किया और उन्हें मोरपंखी हार पहनाकर सम्मान प्रकट किया।

    आश्रम में बातचीत के दौरान प्रेमानंद महाराज ने सबसे पहले कैलाश खेर का हाल-चाल पूछा, जिस पर गायक ने सहज भाव से कहा कि वे पूरी तरह “मस्त” हैं। इसके बाद कैलाश खेर ने माइक लेकर अपने प्रसिद्ध भजन “बम लहरी” का गायन शुरू किया। अपने खास अंदाज में उन्होंने न केवल भजन प्रस्तुत किया बल्कि भावपूर्ण नृत्य भी किया, जिससे वहां मौजूद श्रद्धालु और संतगण भी भावविभोर हो उठे। यह भजन लगभग डेढ़ मिनट तक चला, लेकिन इस दौरान वातावरण पूरी तरह भक्तिमय हो गया।

    भजन समाप्त होते ही Premanand Maharaj मुस्कुराए और उन्होंने कैलाश खेर की प्रस्तुति की प्रशंसा करते हुए कहा कि यह बहुत सुंदर और अत्यंत प्रभावशाली था। उनके चेहरे की मुस्कान ने वहां मौजूद सभी लोगों को और भी उत्साहित कर दिया। इसके बाद कैलाश खेर ने एक और भजन प्रस्तुत करने की इच्छा जताई, जिस पर महाराज ने सहमति दी।

    इसके बाद उन्होंने “5 वर्ष की मीरा लाडली हो…” और “सखियां में खेला जाए री…” जैसे भावपूर्ण भजन अपनी विशेष शैली में सुनाए। इन भजनों ने आश्रम के वातावरण को और अधिक आध्यात्मिक बना दिया। प्रेमानंद महाराज ने उनकी आवाज की प्रशंसा करते हुए कहा कि उनकी गायकी अत्यंत प्रभावशाली है और इसमें भक्ति का गहरा भाव झलकता है।

    इससे पहले कैलाश खेर ने वृंदावन स्थित Banke Bihari Temple में भगवान श्री बांके बिहारी जी के दर्शन किए। मंदिर में उन्होंने लगभग 30 मिनट बिताए और फूल बंगले में विराजमान भगवान की छवि को एकटक निहारते रहे। उन्होंने मंदिर की देहरी पर इत्र भी अर्पित किया और श्रद्धा भाव से पूजा-अर्चना की। इस दौरान सेवायत मोहित गोस्वामी ने उन्हें भगवान का प्रसाद और अंगवस्त्र भेंट किया।

    कैलाश खेर के आगमन से वृंदावन में भक्ति का माहौल और अधिक गहरा हो गया। उनके भजन और प्रेमानंद महाराज के साथ संवाद ने यह संदेश दिया कि संगीत और आध्यात्मिकता एक-दूसरे के पूरक हैं। इस पूरे आयोजन ने श्रद्धालुओं को भक्ति के नए अनुभव से जोड़ा और वातावरण को दिव्यता से भर दिया।

  • वृंदावन में भक्ति का रंग: ग्लैमर जगत के सितारों की राधा-कृष्ण भक्ति यात्रा ने बढ़ाई रौनक

    वृंदावन में भक्ति का रंग: ग्लैमर जगत के सितारों की राधा-कृष्ण भक्ति यात्रा ने बढ़ाई रौनक


    नई दिल्ली । चमक-दमक और ग्लैमर की दुनिया छोड़कर कई फिल्मी और टीवी सितारे अब वृंदावन की भक्ति और सादगी की ओर आकर्षित हो रहे हैं। ‘राधे-राधे’ के जयकारे के साथ आध्यात्मिक शांति की तलाश में बड़ी संख्या में लोग ब्रज की ओर रुख कर रहे हैं, जिससे धार्मिक पर्यटन और स्थानीय कारोबार में तेज़ उछाल देखा जा रहा है।

    कभी फिल्मी पर्दे की चकाचौंध, रेड कार्पेट और करोड़ों के सेट जिनकी पहचान हुआ करते थे, आज वही दुनिया कई कलाकारों को आकर्षित नहीं कर पा रही। हाल के वर्षों में वृंदावन और ब्रजभूमि का आध्यात्मिक माहौल कई सेलेब्रिटीज़ को अपनी ओर खींच रहा है। अब ‘राधे-राधे’ का जयघोष और तुलसी की माला कई कलाकारों की नई पहचान बनती दिख रही है।

    वृंदावन बना आस्था और सुकून का केंद्र
    मथुरा-वृंदावन में श्रद्धालुओं की संख्या लगातार बढ़ रही है। पर्यटन विभाग के अनुसार रोजाना करीब 1 से 1.5 लाख लोग यहां पहुंच रहे हैं। त्योहारों और वीकेंड पर यह आंकड़ा कई गुना बढ़ जाता है। बरसाना, गोवर्धन और बांके बिहारी मंदिर जैसे स्थान अब सिर्फ धार्मिक ही नहीं बल्कि आत्मिक शांति के प्रमुख केंद्र बन चुके हैं।
    एना जयसिंघानी: टीवी की दुनिया से साध्वी जीवन तक
    ग्वालियर की रहने वाली एना जयसिंघानी ने मुंबई में टीवी इंडस्ट्री में पहचान बनाई थी। ‘देखा एक ख्वाब’ और ‘फियर फाइल्स’ जैसे शोज़ से लोकप्रियता हासिल करने के बाद उन्होंने अचानक ग्लैमर की दुनिया से दूरी बना ली। उनका कहना है कि वृंदावन आने के बाद उन्हें जीवन की नई दिशा मिली। अब वह भक्ति मार्ग पर चल रही हैं और साध्वी जीवन अपना चुकी हैं।
    अनुष्का शर्मा और आध्यात्मिक जुड़ाव की चर्चा
    बॉलीवुड अभिनेत्री अनुष्का शर्मा के भी वृंदावन और प्रेमानंद महाराज से जुड़ाव की चर्चाएं लगातार सुर्खियों में रही हैं। रिपोर्ट्स के अनुसार, वे कई बार आश्रम पहुंची हैं और आध्यात्मिक प्रवचनों से जुड़ी रही हैं।
    अन्य सितारे भी भक्ति में हुए शामिल
    शिल्पा शेट्टी, हेमा मालिनी, मीका सिंह, बादशाह और कुमार सानू जैसे कई कलाकार भी समय-समय पर वृंदावन और संतों के संपर्क में आए हैं। इन मुलाकातों में अधिकांश ने मानसिक शांति और जीवन संतुलन की बात को प्रमुखता दी है।
    प्रेमानंद महाराज का बढ़ता प्रभाव
    वृंदावन के प्रेमानंद महाराज की शिक्षाएं ‘राधा नाम जप’ और सरल जीवन पर आधारित हैं। उनके आश्रम में आने वाले श्रद्धालु बताते हैं कि यहां जीवन की जटिलताओं का समाधान भक्ति और नामस्मरण में बताया जाता है। यही कारण है कि युवा वर्ग भी बड़ी संख्या में यहां आकर्षित हो रहा है।
    ग्लैमर की दुनिया से भक्ति की ओर बढ़ता यह रुझान केवल व्यक्तिगत बदलाव नहीं, बल्कि समाज में आध्यात्मिकता की बढ़ती तलाश को भी दर्शाता है। वृंदावन अब केवल धार्मिक स्थल नहीं, बल्कि मानसिक शांति और जीवन संतुलन का एक बड़ा केंद्र बनता जा रहा है।
  • राधा रानी का दिव्य स्वरूप: शब्दों से परे सौंदर्य, जिसे केवल भक्ति से ही पाया जा सकता है

    राधा रानी का दिव्य स्वरूप: शब्दों से परे सौंदर्य, जिसे केवल भक्ति से ही पाया जा सकता है


    नई दिल्ली । भक्ति मार्ग में एक प्रश्न सदियों से लोगों के मन में उठता रहा है आखिर राधा रानी कैसी दिखती हैं? भक्त साधक और जिज्ञासु अक्सर संतों से इस रहस्य को जानने की इच्छा रखते हैं लेकिन संतों का स्पष्ट कहना है कि राधा रानी के वास्तविक स्वरूप को शब्दों में बांध पाना संभव नहीं है। उनका दिव्य रूप सामान्य दृष्टि से परे है और उसे देखने के लिए केवल भौतिक आंखें पर्याप्त नहीं हैं बल्कि इसके लिए दिव्य अनुभूति और गहन भक्ति की आवश्यकता होती है।

    संत प्रेमानंद जी महाराज के अनुसार मनुष्य जो कुछ भी इस संसार में देखता है वह उसकी भौतिक दृष्टि तक सीमित होता है जो माया से प्रभावित है। यही कारण है कि हम केवल भौतिक जगत को ही देख पाते हैं। जिस प्रकार महाभारत में अर्जुन को भगवान श्री कृष्ण के विराट स्वरूप के दर्शन के लिए दिव्य चक्षु प्रदान किए गए थे उसी प्रकार राधा रानी के वास्तविक स्वरूप को देखने के लिए भी दिव्य दृष्टि की आवश्यकता होती है। बिना इस आध्यात्मिक दृष्टि के उनके स्वरूप को समझ पाना असंभव है।

    संतों का कहना है कि राधा रानी सौंदर्य की पराकाष्ठा हैं। उनके रूप का वर्णन करना इतना कठिन है कि यदि किसी व्यक्ति के शरीर के प्रत्येक रोम में करोड़ों जिह्वाएं भी उत्पन्न हो जाएं तब भी उनके सौंदर्य की पूर्ण व्याख्या नहीं की जा सकती। यह भी कहा जाता है कि जिन भगवान श्री कृष्ण के सौंदर्य से करोड़ों कामदेव भी मोहित हो जाते हैं वही श्री कृष्ण स्वयं राधा रानी की रूप माधुरी के सामने आकर्षित हो जाते हैं। उनकी महिमा इतनी अद्भुत है कि वेद भी उनके वर्णन में असमर्थ होकर नेति-नेति कहकर मौन हो जाते हैं।

    ब्रज की गोपियों का सौंदर्य भी अद्वितीय बताया गया है। कहा जाता है कि ब्रज की प्रत्येक गोपी इतनी सुंदर है कि करोड़ों लक्ष्मी भी उनके सामने फीकी पड़ जाएं। लेकिन जब यही सखियां अपनी आराध्य राधा रानी के दर्शन करती हैं तो वे भी उनके सामने नतमस्तक हो जाती हैं। राधा रानी के प्रत्येक अंग में ऐसी मधुरता और दिव्यता विद्यमान है जिसकी तुलना तीनों लोकों में कहीं नहीं मिलती।

    संतों के अनुसार राधा रानी के स्वरूप का अनुभव करने का सबसे सरल और प्रभावी मार्ग भक्ति और नाम जप है। यदि कोई व्यक्ति सच्चे मन से राधा नाम का निरंतर जप करता है तो धीरे-धीरे उसके हृदय में राधा रानी का दिव्य स्वरूप प्रकट होने लगता है। इसके साथ ही वृंदावन की पवित्र रज को माथे पर धारण करना और संतों का संग करना भी इस आध्यात्मिक यात्रा में सहायक माना जाता है।

    भक्ति परंपरा में राधा और कृष्ण के प्रेम को अद्वितीय बताया गया है। उनका संबंध मछली और जल के समान है अलग होते ही अस्तित्व समाप्त हो जाता है। जब राधा और कृष्ण एक साथ होते हैं तो वृंदावन की पूरी प्रकृति उस दिव्य प्रेम में डूब जाती है। पशु-पक्षी तक शांत होकर उस अलौकिक आनंद का अनुभव करने लगते हैं।

    अंततः संतों का संदेश स्पष्ट है कि राधा रानी का स्वरूप देखने के लिए बाहरी नहीं बल्कि आंतरिक दृष्टि की आवश्यकता है। सच्ची भक्ति समर्पण और नाम जप के माध्यम से ही वह क्षण आता है जब भक्त इस दिव्य प्रेम और स्वरूप का अनुभव कर पाता है।

  • वृंदावन में बांकेबिहारी मंदिर के पास शुरू होगी मल्टीलेवल कार पार्किंग, श्रद्धालुओं को मिलेगी बड़ी राहत

    वृंदावन में बांकेबिहारी मंदिर के पास शुरू होगी मल्टीलेवल कार पार्किंग, श्रद्धालुओं को मिलेगी बड़ी राहत


    नई दिल्ली। वृंदावन में बांकेबिहारी मंदिर के दर्शन के लिए आने वाले श्रद्धालुओं के लिए खुशखबरी है। मंदिर के पास लंबे समय से पार्किंग की समस्या बनी हुई थी, जिससे श्रद्धालुओं को दर्शन में काफी परेशानी का सामना करना पड़ता था। भीड़भाड़ वाले समय में मंदिर के आसपास वाहन खड़े करने की जगह न मिल पाने के कारण स्थानीय प्रशासन और नगर निगम की ओर से मल्टीलेवल कार पार्किंग निर्माण की योजना बनाई गई थी।
    इस पार्किंग को तैयार कर लिया गया है, लेकिन रास्ते को लेकर कुछ विवाद चल रहा था।

    हाल ही में नगर निगम के अधिकारियों और प्रशासन ने इस विवाद को सुलझा लिया है। नगर आयुक्त ने स्थल का निरीक्षण किया और अधिकारियों को निर्देश दिए हैं कि पार्किंग को जल्द से जल्द चालू किया जाए। उन्होंने कहा कि यह पार्किंग श्रद्धालुओं के लिए बड़ी सुविधा साबित होगी और मंदिर आने वाले लोगों को पार्किंग की समस्या से निजात मिलेगी।

    मल्टीलेवल कार पार्किंग से न केवल वाहन सुरक्षा सुनिश्चित होगी, बल्कि मंदिर के आसपास ट्रैफिक जाम और भीड़-भाड़ को भी काफी हद तक कम किया जा सकेगा। नगर निगम के अधिकारियों का कहना है कि पार्किंग का संचालन शुरू होने के बाद, श्रद्धालुओं को दर्शन के लिए अधिक आरामदायक और सुरक्षित अनुभव मिलेगा। इससे पर्यटन और धार्मिक गतिविधियों को भी बढ़ावा मिलेगा, क्योंकि वृंदावन देशभर के श्रद्धालुओं के लिए एक महत्वपूर्ण तीर्थ स्थल है।

    नगर निगम ने बताया कि पार्किंग की क्षमता पर्याप्त है और इसे आधुनिक सुरक्षा मानकों के अनुसार बनाया गया है। पार्किंग में सीसीटीवी कैमरा, सुरक्षा गार्ड और व्यवस्थित वाहन प्रवेश एवं निकास व्यवस्था भी की गई है। इससे यह सुनिश्चित होगा कि श्रद्धालुओं के वाहन सुरक्षित रहें और उन्हें पार्किंग की वजह से किसी प्रकार की परेशानी का सामना न करना पड़े।

    स्थानीय निवासियों और व्यापारियों ने भी पार्किंग के निर्माण का स्वागत किया है। उनका कहना है कि इससे मंदिर के आसपास की सड़कें जाम नहीं होंगी और क्षेत्र में यातायात सुचारू रहेगा। साथ ही, यह पार्किंग आसपास के व्यवसाय और दुकानदारी के लिए भी फायदेमंद साबित होगी।

    विशेषज्ञों का कहना है कि धार्मिक स्थलों पर आधुनिक पार्किंग सुविधा उपलब्ध कराना जरूरी है, ताकि श्रद्धालुओं का अनुभव बेहतर हो और भीड़-भाड़ और अव्यवस्था की समस्या से छुटकारा मिल सके। बांकेबिहारी मंदिर जैसी प्रमुख धार्मिक जगहों पर यह कदम काफी सकारात्मक माना जा रहा है।

    इस पार्किंग के चालू होने से न केवल श्रद्धालुओं की सुविधा बढ़ेगी, बल्कि मंदिर आने वाले पर्यटकों और स्थानीय लोगों के लिए भी यह राहत का संकेत है। नगर निगम ने आश्वासन दिया है कि पार्किंग के संचालन और प्रबंधन को प्रभावी ढंग से किया जाएगा और समय-समय पर इसमें सुधार भी किया जाएगा।

    इस प्रकार, वृंदावन आने वाले श्रद्धालुओं को अब बड़ी राहत मिलने वाली है। पार्किंग के चालू होने से मंदिर दर्शन में आसानी होगी और श्रद्धालु अपनी यात्रा का आनंद आराम से ले सकेंगे। यह कदम न केवल मंदिर प्रशासन, बल्कि पूरे शहर के लिए लाभकारी साबित होगा।

  • रुपाली गांगुली पहली बार पहुंचीं वृंदावन, अनिरुद्धाचार्य के आश्रम में वृद्धाओं की आपबीती सुनकर रो पड़ीं; बताया-बंदर और सांप के बीच होती है शूटिंग

    रुपाली गांगुली पहली बार पहुंचीं वृंदावन, अनिरुद्धाचार्य के आश्रम में वृद्धाओं की आपबीती सुनकर रो पड़ीं; बताया-बंदर और सांप के बीच होती है शूटिंग


    नई दिल्ली । ‘अनुपमा’ फेम एक्ट्रेस रुपाली गांगुली पहली बार वृंदावन पहुंचीं, जहां उन्होंने कथावाचक अनिरुद्धाचार्य से मुलाकात की। आश्रम में रहने वाली वृद्ध महिलाओं की दर्दभरी कहानियां सुनकर रुपाली खुद को संभाल नहीं पाईं और उनकी आंखें नम हो गईं। इस दौरान उन्होंने अपनी शूटिंग लोकेशन से जुड़ा एक चौंकाने वाला खुलासा भी किया।

    आश्रम में पहुंचकर भावुक हुईं रुपाली

    रुपाली अपने बेटे के साथ अनिरुद्धाचार्य जी के आश्रम पहुंचीं। वहां उन्हें बताया गया कि आश्रम में सैकड़ों वृद्ध महिलाएं रहती हैं-वो महिलाएं जिन्हें उनके अपने परिवारों ने छोड़ दिया है।

    अनिरुद्धाचार्य ने एक घटना साझा की कि हाल ही में एक माता का देहांत हुआ। जब उनके बेटे को अंतिम संस्कार के लिए बुलाया गया तो उसने कहा कि “हम पहले ही अंतिम संस्कार कर चुके हैं।” यह सुनकर रुपाली की आंखों में आंसू आ गए।

    एक्ट्रेस ने वृद्धाओं से मिलकर उनका आशीर्वाद लिया। कई महिलाएं उन्हें ‘अनुपमा’ के नाम से ही पहचानती थीं, जिससे रुपाली बेहद भावुक हो उठीं। सभी ने उन्हें गले लगाकर आने के लिए धन्यवाद दिया।

    बांके बिहारी के दर्शन और अगली यात्रा का वादा

    आश्रम के बाद रुपाली ने बांके बिहारी के दर्शन किए और भक्तों में प्रसाद बांटा। विदा लेते हुए उन्होंने अनिरुद्धाचार्य जी के पैर छुए और वादा किया कि अगली बार वह गुरुकुल और गौशाला भी देखने आएंगी।

    “बंदर–सांप के बीच होती है शूटिंग” – रुपाली का खुलासा

    बातचीत के दौरान रुपाली ने बताया कि उनकी शूटिंग लोकेशन पर बंदर, कुत्ते और कई बार सांप तक दिखाई देते हैं।

    उन्होंने कहा-
    “जिस जगह हम शूट करते हैं, वहां बहुत बंदर हैं, कुत्ते हैं, कभी-कभी सांप भी आ जाते हैं। लेकिन सभी बहुत प्यार से पास आते हैं-कभी कोई नुकसान नहीं पहुंचाता।”

    उनके इस अनुभव पर अनिरुद्धाचार्य ने कहा कि जो बोल नहीं सकते, उनके लिए इंसान ही सहारा होता है। हर जीव में नारायण का वास है और सेवा करना ही सच्ची भक्ति है।