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  • MP: दिग्विजय सिंह ने CM मोहन यादव को दी चेतावनी… बोले- अपने पास दर्जनभर विभाग रखोगे तो फंस जाओगे

    MP: दिग्विजय सिंह ने CM मोहन यादव को दी चेतावनी… बोले- अपने पास दर्जनभर विभाग रखोगे तो फंस जाओगे


    भोपाल।
    कांग्रेस (Congress) के वरिष्ठ नेता दिग्विजय सिंह (Senior leader Digvijaya Singh) ने मध्य प्रदेश (Madhya Pradesh) के सीएम मोहन यादव (CM Mohan Yadav) को चेतावनी दी है। उन्होंने कहा है कि उन्हें दर्जनभर विभाग अपने पास नहीं रखने चाहिए, नहीं तो किसी दिन फंस जाएंगे।

    उन्होंने शनिवार को मुख्यमंत्री यादव एक मिल मजदूर के बेटे हैं लेकिन वह अगर गड़बड़ी करेंगे तो उन्हें बख्शा भी नहीं जाएगा। कांग्रेस ने एक खबर का हवाला देते हुए मुख्यमंत्री यादव पर उज्जैन में कथित तौर पर जमीन घोटाले का आरोप लगाया है। पार्टी ने इसे ‘महाकाल’ की जमीन की लूट’ करार दिया था और मुख्यमंत्री यादव के इस्तीफे और आरोपों की न्यायिक जांच की मांग की है।

    इसी मुद्दे पर पत्रकारों से चर्चा के दौरान मध्यप्रदेश के पूर्व मुख्यमंत्री ने कहा, मोहन यादव जी, आपने 12-12 विभाग अपने पास रख रखे हैं। बहुत गलती कर रहे हो। फंस जाओगे। गलती करेगा अधिकारी, पैसा खाएगा अधिकारी और फंसोगे आप। मुख्यमंत्री मोहन यादव के पास वर्तमान में सामान्य प्रशासन, गृह, जेल, औद्योगिक नीति एवं निवेश प्रोत्साहन, जनसंपर्क, नर्मदा घाटी विकास, विमानन, खनिज साधन, लोक सेवा प्रबंधन, प्रवासी भारतीय, एवं ऐसे अन्य समस्त विभाग हैं जो किसी अन्य मंत्री को न सौंपा गया है।

    सिंह ने कहा कि वह भी 10 साल तक मध्य प्रदेश के मुख्यमंत्री रहे हैं लेकिन कभी उन पर कोई आरोप नहीं लगा। उन्होंने कहा कि मुख्यमंत्री बनने के बाद शिवराज सिंह चौहान (केंद्रीय कृषि मंत्री) ने एक-एक फाइल ढूंढी लेकिन उन्हें कुछ नहीं मिला। उन्होंने कहा, मोहन यादव जी आप भी उसकी जांच कर लें, मुझे कोई फर्क नहीं पड़ता। क्योंकि मेरे पास कोई विभाग ही नहीं था। कांग्रेस के वरिष्ठ नेता ने कहा कि वह इस पूरे मामले की जांच-पड़ताल कर रहे हैं ताकि पता चल सके कि इसमें इनकी कौन-कौन सी कंपनियां हैं और कौन-कौन लोग इनके इस कथित भूमि घोटाले में शामिल हैं।


    दिग्विजय सिंह बोले- हम बख्शेंगे नहीं

    उन्होंने आगे कहा,मैं तो मोहन यादव जी को राय-मशविरा देने के लिए आया हूं। ऐसा मत करो! आप एक मिल मजदूर के बेटे हो। मुख्यमंत्री बने हो, नाम कमाओ! पैसा जो कमा रहे हो न, जिसका हिसाब पता नहीं किस-किस को देना पड़ रहा है आपको। हमारी सहानुभूति है इस मामले में। दिग्विजय सिंह ने कहा, मुख्यमंत्री पर यदि आरोप लगते हैं तो हम लोग आपको बख्शेंगे नहीं।

    उन्होंने कहा, यह मत समझना कि हमको आप खरीद लोगे। हम कोई बिकाऊ माल नहीं हैं, हम टिकाऊ माल हैं। बिकाऊ माल जो था, गया भाजपा में। ये सब कांग्रेसी जो यहां बैठे हैं, सब टिकाऊ माल हैं। लड़ाई लड़ने के लिए हम तैयार हैं और लड़ाई लड़ेंगे।

  • एमपी के 45 जिलों में आज आंधी-बारिश का अलर्ट, 3-4 दिन में मानसून आगे बढ़ने के आसार

    एमपी के 45 जिलों में आज आंधी-बारिश का अलर्ट, 3-4 दिन में मानसून आगे बढ़ने के आसार


    भोपाल। मध्य प्रदेश में अगले तीन से चार दिनों के भीतर मानसून के आगे बढ़ने की संभावना जताई गई है। मौसम विभाग के अनुसार, फिलहाल मानसून 15 जिलों तक पहुंचने के बाद ठहर गया है। हालांकि, इसके बावजूद प्रदेश के अधिकांश हिस्सों में आंधी और बारिश का सिलसिला जारी रहने के आसार हैं। रविवार को भोपाल समेत 45 जिलों में तेज हवा और बारिश का अलर्ट जारी किया गया है।

    मौसम विभाग के अनुसार भोपाल, रायसेन, सीहोर, राजगढ़, विदिशा, इंदौर, झाबुआ, अलीराजपुर, धार, बुरहानपुर, बड़वानी, खंडवा, खरगोन, उज्जैन, नीमच, मंदसौर, रतलाम, आगर-मालवा, शाजापुर, देवास, नर्मदापुरम, बैतूल, हरदा, जबलपुर, कटनी, नरसिंहपुर, छिंदवाड़ा, पांढुर्णा, सिवनी, बालाघाट, मंडला, डिंडौरी, रीवा, सतना, सीधी, सिंगरौली, मऊगंज, मैहर, शहडोल, उमरिया, अनूपपुर, सागर, पन्ना, दमोह और छतरपुर में आंधी और बारिश की संभावना है।

    वहीं, ग्वालियर, श्योपुर, मुरैना, भिंड, दतिया, शिवपुरी, गुना, अशोकनगर, निवाड़ी और टीकमगढ़ में हल्की बारिश के आसार हैं। इन जिलों में दिन के समय धूप रहने की संभावना है, लेकिन शाम के बाद मौसम का मिजाज बदल सकता है।

    ग्वालियर-चंबल में अब भी गर्मी का असर

    ग्वालियर-चंबल संभाग सहित प्रदेश के कई हिस्सों में मानसून अभी तक नहीं पहुंचा है। इसके चलते यहां गर्मी का असर बना हुआ है। ग्वालियर में अधिकतम तापमान 40 डिग्री सेल्सियस के पार दर्ज किया गया है।

    भोपाल समेत कई जिलों में बारिश का असर

    शनिवार रात राजधानी भोपाल में गरज-चमक के साथ बारिश हुई, जिससे कई इलाकों में बिजली आपूर्ति प्रभावित रही। उधर, शिवपुरी में मानसून की पहली तेज बारिश और आंधी ने व्यापक नुकसान पहुंचाया। तेज हवाओं के कारण कई स्थानों पर पेड़ और बिजली के खंभे उखड़ गए। रतलाम में भारी बारिश से सड़कें और अंडरब्रिज जलमग्न हो गए, जबकि झाबुआ में भी कई इलाकों में जोरदार बारिश दर्ज की गई। विदिशा में दिनभर की उमस और गर्मी के बाद शाम को गरज-चमक के साथ बारिश होने से लोगों को राहत मिली।

    सामान्य से अब भी 41 फीसदी कम बारिश

    प्रदेश में पिछले चार दिनों से लगातार बारिश का दौर जारी है। कई जिलों में चार इंच से अधिक वर्षा रिकॉर्ड की गई है, जिससे प्रदेश के कुल वर्षा आंकड़ों में सुधार हुआ है। 1 जून से अब तक प्रदेश में औसतन 107.3 मिमी (4.2 इंच) बारिश होनी चाहिए थी, जबकि अब तक 63.5 मिमी (2.5 इंच) वर्षा दर्ज की गई है, जो सामान्य से 41 प्रतिशत कम है।

    हालांकि, 24 जून तक बारिश की कमी 50 प्रतिशत थी, जिसमें अब 9 प्रतिशत का सुधार हुआ है। प्रदेश के पूर्वी हिस्से में औसत से 67 प्रतिशत कम बारिश हुई है, जबकि पश्चिमी हिस्से में वर्षा की कमी घटकर 16 प्रतिशत रह गई है।

  • एमपी में मानसून की रफ्तार थमी, एंट्री के बाद ठहरा, 43 जिलों में आज बारिश की चेतावनी

    एमपी में मानसून की रफ्तार थमी, एंट्री के बाद ठहरा, 43 जिलों में आज बारिश की चेतावनी


    भोपाल। मध्य प्रदेश में 24 जून को दक्षिण-पूर्वी हिस्से के 15 जिलों में दस्तक देने के बाद मानसून की रफ्तार फिलहाल थम गई है। पिछले तीन दिनों से मानसून आगे नहीं बढ़ा है और मौसम विभाग के अनुसार इसके अगले 2 से 3 दिन तक भी इसी स्थिति में रहने की संभावना है। भारतीय मौसम विभाग (IMD) का कहना है कि अनुकूल परिस्थितियां बनने पर मानसून सबसे पहले भोपाल और उज्जैन संभाग में आगे बढ़ेगा, जबकि ग्वालियर-चंबल क्षेत्र में इसकी एंट्री सबसे आखिर में होगी।

    24 जून को मानसून के प्रदेश में प्रवेश के साथ आलीराजपुर, इंदौर, हरदा, धार, बैतूल, खंडवा, बुरहानपुर, छिंदवाड़ा, पांढुर्णा, खरगोन, सिवनी, बालाघाट, मंडला, बड़वानी और डिंडौरी जिलों में इसके पहुंचने की घोषणा की गई थी। इसके बाद से मानसून की प्रगति रुकी हुई है। हालांकि मौसम विभाग ने अगले दो से तीन दिनों में प्रदेश के अन्य हिस्सों में मानसून के आगे बढ़ने के लिए परिस्थितियां अनुकूल होने की संभावना जताई है।

    आज 43 जिलों में बारिश के आसार
    शनिवार को भोपाल, रायसेन, सीहोर, राजगढ़, विदिशा, इंदौर, झाबुआ, आलीराजपुर, धार, बुरहानपुर, बड़वानी, खंडवा, खरगोन, उज्जैन, रतलाम, आगर-मालवा, शाजापुर, देवास, नर्मदापुरम, बैतूल, हरदा, जबलपुर, कटनी, नरसिंहपुर, छिंदवाड़ा, पांढुर्णा, सिवनी, बालाघाट, मंडला, डिंडौरी, रीवा, सतना, सीधी, सिंगरौली, मऊगंज, मैहर, शहडोल, उमरिया, अनूपपुर, सागर, पन्ना, दमोह और छतरपुर में बारिश का पूर्वानुमान है। वहीं ग्वालियर, श्योपुर, मुरैना, भिंड, दतिया, शिवपुरी, गुना, अशोकनगर, नीमच, मंदसौर, निवाड़ी और टीकमगढ़ जिलों में कहीं-कहीं हल्की बारिश होने की संभावना जताई गई है।

    शुक्रवार को कई जिलों में झमाझम बारिश
    शुक्रवार को प्रदेश के कई हिस्सों में तेज आंधी और बारिश का दौर देखने को मिला। सिवनी में करीब 2 इंच बारिश दर्ज की गई। शाजापुर जिले के शुजालपुर, अकोदिया और आसपास के क्षेत्रों में अच्छी बारिश हुई, जबकि उज्जैन में डेढ़ इंच से अधिक पानी बरसा। इसके अलावा दतिया, इंदौर, राजगढ़, शिवपुरी, मंडला, रीवा, सागर, बालाघाट, खंडवा, शाजापुर, आगर-मालवा और मंदसौर समेत कई जिलों में भी आंधी और बारिश का असर रहा।

    तापमान में आई गिरावट
    बारिश और तेज हवाओं के कारण प्रदेश के अधिकांश हिस्सों में दिन के तापमान में उल्लेखनीय कमी दर्ज की गई। खरगोन का अधिकतम तापमान 30 डिग्री सेल्सियस रहा। इसके अलावा खंडवा में 30.1, सागर में 31.1, छिंदवाड़ा में 31.8, बैतूल में 32.7, सिवनी और उमरिया में 33.2, धार में 33.4 तथा नर्मदापुरम में 33.8 डिग्री सेल्सियस तापमान रिकॉर्ड किया गया। प्रदेश के प्रमुख शहरों में भोपाल और इंदौर का अधिकतम तापमान 33.8 डिग्री, उज्जैन में 33.5 डिग्री, जबलपुर में 36.7 डिग्री और ग्वालियर में 41.8 डिग्री सेल्सियस दर्ज किया गया।

    बारिश के आंकड़ों में सुधार
    पिछले 72 घंटे से प्रदेश के विभिन्न जिलों में लगातार बारिश होने से वर्षा के आंकड़ों में सुधार दर्ज किया गया है। कई स्थानों पर 4 इंच से अधिक बारिश रिकॉर्ड की गई। 1 जून से अब तक प्रदेश में औसतन 99 मिमी (करीब 4 इंच) बारिश होनी चाहिए थी, जबकि अब तक 58.5 मिमी (करीब 2.1 इंच) वर्षा हुई है। यह सामान्य से 41 प्रतिशत कम है। 24 जून तक यह कमी 50 प्रतिशत थी, यानी हालिया बारिश से करीब 9 प्रतिशत का सुधार हुआ है। फिलहाल प्रदेश के पूर्वी हिस्से में सामान्य से 68 प्रतिशत कम और पश्चिमी हिस्से में 15 प्रतिशत कम बारिश दर्ज की गई है।

  • लेक सिटी नैनीताल की प्राकृतिक सुंदरता पर मंडरा रहा खतरा… NGT ने दी चेतावनी

    लेक सिटी नैनीताल की प्राकृतिक सुंदरता पर मंडरा रहा खतरा… NGT ने दी चेतावनी


    नैनीताल।
    उत्तराखंड (Uttarakhand) की सरोवर नगरी नैनीताल (Lake City Nainital) पर बढ़ते पर्यावरणीय खतरे को लेकर राष्ट्रीय हरित अधिकरण (National Green Tribunal-NGT) ने बड़ा अलर्ट जारी किया है. मंगलवार को नैनीताल क्लब में आयोजित हाई लेवल समीक्षा बैठक में NGT के माननीय सदस्य और न्यायमूर्ति डॉ. अफरोज अहमद ने साफ शब्दों में कहा कि यदि नदी-नाले, प्राकृतिक जलस्रोत और जलधाराएं नहीं बचीं तो पहाड़ों की प्राकृतिक सुंदरता और पारिस्थितिकी को बचा पाना मुश्किल हो जाएगा.

    बैठक में नैनीताल के सामने खड़ी कई गंभीर पर्यावरणीय चुनौतियों पर विस्तार से चर्चा हुई. इनमें नैनीझील का लगातार घटता जलस्तर, झील में बढ़ता प्रदूषण, कचरा प्रबंधन की समस्या, ड्रेनेज और सीवरेज नेटवर्क की स्थिति तथा जलस्रोतों पर बढ़ते अतिक्रमण जैसे मुद्दे प्रमुख रहे।

    बैठक के दौरान विशेषज्ञों ने बताया कि नैनीझील का जलस्तर लगातार प्रभावित हो रहा है. इसके पीछे सबसे बड़ा कारण उन प्राकृतिक जलस्रोतों का कमजोर होना है जो सालों से झील को पानी उपलब्ध कराते रहे हैं. यदि समय रहते इन स्रोतों को संरक्षित नहीं किया गया तो आने वाले वर्षों में स्थिति और गंभीर हो सकती है.


    वॉटर बॉडी और वेटलैंड से हटेगा अतिक्रमण

    अधिकारियों ने जानकारी दी कि नैनीताल शहर में कुल 13 वॉटर बॉडी और वेटलैंड मौजूद हैं. ये सभी बरसात के पानी को जमा करके धीरे-धीरे नैनीझील तक पहुंचाते हैं. यही जलस्रोत सर्दियों के मौसम में भी झील के जलस्तर को बनाए रखने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाते हैं.

    हालांकि समय के साथ इन वॉटर बॉडी और वेटलैंड पर अतिक्रमण बढ़ गया है. कई स्थानों पर पानी का प्राकृतिक प्रवाह और भराव भी बाधित हो गया है. विशेषज्ञों का मानना है कि नैनीझील का घटता जलस्तर इसी समस्या से जुड़ा हुआ है.

    मामले की गंभीरता को देखते हुए NGT सदस्य सचिव ने कुमाऊं आयुक्त दीपक रावत और जिलाधिकारी ललित मोहन रयाल को सभी वॉटर बॉडी और वेटलैंड को अतिक्रमण मुक्त कराने के निर्देश दिए हैं. माना जा रहा है कि आने वाले दिनों में इस दिशा में विशेष अभियान चलाया जा सकता है.

    बैठक में पर्यटन से जुड़े पर्यावरणीय प्रभावों पर भी चर्चा की गई. अधिकारियों ने बताया कि पर्यटन सीजन के दौरान नैनीताल में लाखों लोग पहुंचते हैं. इससे शहर की अर्थव्यवस्था को लाभ मिलता है, लेकिन कचरे और प्रदूषण का दबाव भी कई गुना बढ़ जाता है. NGT ने अधिकारियों को निर्देश दिए हैं कि शहर में 100 प्रतिशत डोर-टू-डोर कूड़ा संग्रहण सुनिश्चित किया जाए. साथ ही पर्यटन सीजन के लिए विशेष कचरा प्रबंधन योजना तैयार की जाए ताकि झील और आसपास के पर्यावरण को नुकसान न पहुंचे.


    लाइट और ध्वनि प्रदूषण भी चिंता का विषय

    बैठक में कुमाऊं आयुक्त दीपक रावत ने लाइट पॉल्यूशन और ध्वनि प्रदूषण का मुद्दा भी उठाया. विशेषज्ञों के अनुसार अत्यधिक कृत्रिम रोशनी और लगातार बढ़ता शोर वन्यजीवों, पक्षियों और पहाड़ की प्राकृतिक जीवनशैली पर प्रतिकूल प्रभाव डाल रहा है. इसलिए इन दोनों समस्याओं पर भी गंभीरता से काम करने की जरूरत बताई गई.


    कचरा निस्तारण को लेकर तैयारी

    अधिकारियों ने बताया कि जिले के नगरीय क्षेत्रों से प्रतिदिन लगभग 230 मीट्रिक टन कूड़ा गोलापार ट्रंचिंग ग्राउंड भेजा जा रहा है. वहां जल्द ही आधुनिक कचरा निस्तारण मशीन स्थापित की जाएगी. इसके अलावा पुराने कूड़े के बड़े हिस्से का निस्तारण भी किया जा चुका है.


    सिर्फ सरकार नहीं, जनता की भी जिम्मेदारी

    बैठक के अंत में डॉ. अफरोज अहमद ने कहा कि पर्यावरण संरक्षण सिर्फ सरकारी योजनाओं से संभव नहीं है. इसके लिए आम लोगों की भागीदारी और जागरूकता सबसे अधिक जरूरी है. उन्होंने कहा कि यह केवल नैनीताल की खूबसूरती बचाने का सवाल नहीं है, बल्कि आने वाली पीढ़ियों के भविष्य से भी जुड़ा मुद्दा है.

    विशेषज्ञों का मानना है कि यदि पहाड़ों के जलस्रोत सूख गए, झीलें प्रदूषित हो गईं और जंगलों को नुकसान पहुंचा तो आने वाले समय में पहाड़ों की पहचान और प्राकृतिक विरासत दोनों पर संकट गहरा सकता है. इसी वजह से NGT ने प्रशासन और समाज दोनों को मिलकर पर्यावरण संरक्षण की दिशा में प्रभावी कदम उठाने की जरूरत पर जोर दिया है.

  • IEA की चेतावनी…. वैश्विक तेल भंडार में रिकॉर्ड गिरावट, कीमतों में आ सकता है भारी उछाल

    IEA की चेतावनी…. वैश्विक तेल भंडार में रिकॉर्ड गिरावट, कीमतों में आ सकता है भारी उछाल


    वाशिंगटन।
    मिडिल ईस्ट (Middle East) में जारी तनाव और होर्मुज संकट (Hormuz Crisis.) के बीच अंतर्राष्ट्रीय ऊर्जा एजेंसी (International Energy Agency.- IEA) ने बुधवार को गंभीर चेतावनी जारी करते हुए कहा है कि प्रमुख समुद्री मार्गों में एक होर्मुज के 10 सप्ताह से अधिक समय से प्रभावी रूप से अवरुद्ध रहने के कारण वैश्विक तेल भंडार में रिकॉर्ड गिरावट दर्ज की जा रही है।

    एजेंसी ने अनुमान लगाया है कि 2026 तक वैश्विक तेल आपूर्ति में 39 लाख बैरल प्रतिदिन की भारी कमी आ सकती है। आईईए ने कहा कि रणनीतिक रूप से अत्यंत महत्वपूर्ण होर्मुज स्ट्रेट के लंबे समय तक बंद रहने से विश्व के तेल भंडार ‘अभूतपूर्व’ और ‘रिकॉर्ड’ गति से समाप्त हो रहे हैं। खाड़ी क्षेत्र से कच्चे तेल और गैस की आपूर्ति ठप्प होने के कारण वैश्विक ऊर्जा परिदृश्य में बड़ा बदलाव आ रहा है, जो भविष्य में तेल कीमतों में भारी उछाल और जेट ईंधन की कमी का कारण बन सकता है।

    एजेंसी की रिपोर्ट के अनुसार, लगातार अस्थिरता के चलते 2026 तक वैश्विक तेल आपूर्ति में 3.9 मिलियन बैरल प्रतिदिन (BPD) की कमी आने की आशंका है। हालांकि आर्थिक मंदी के कारण मांग में कुछ कमी आने की उम्मीद है, लेकिन आईईए ने स्पष्ट किया कि मांग में गिरावट आपूर्ति की भारी कमी को पूरा करने के लिए पर्याप्त नहीं होगी। अमेरिका, इजरायल और ईरान के बीच बढ़ते सैन्य तनाव के कारण उत्पन्न इस आपूर्ति संकट से निपटने के लिए विभिन्न देशों ने अपने वाणिज्यिक और रणनीतिक पेट्रोलियम भंडारों का आक्रामक दोहन शुरू कर दिया है। रिपोर्ट में चौंकाने वाले आंकड़े सामने आए हैं। आकंड़ों के अनुसार, मार्च में 129 मिलियन बैरल की कमी के बाद अप्रैल में अकेले 117 मिलियन बैरल का रिकॉर्ड नुकसान हुआ है।

    वहीं, स्थिति को नियंत्रित करने के लिए आईईए के सदस्य देशों ने आपातकालीन भंडार से 400 मिलियन बैरल तेल जारी करने की योजना बनाई है, जिसमें से लगभग 164 मिलियन बैरल पहले ही बाजार में पहुंच चुका है। हालांकि एजेंसी ने माना कि स्थिति अभी भी बेहद नाजुक बनी हुई है। उच्च कीमतें, बिगड़ता आर्थिक माहौल और मांग घटाने के उपाय वैश्विक तेल खपत पर अतिरिक्त दबाव डाल रहे हैं।

    गौरतलब है कि होर्मुज मार्ग के बंद रहने से वैश्विक ऊर्जा क्षेत्र एक संकट के मोड़ पर पहुंच गया है, ठीक उसी समय जब गर्मियों का पीक ट्रैवल सीजन शुरू हो रहा है। एयरलाइंस पहले ही जेट ईंधन की संभावित कमी को लेकर चिंतित हैं। आईईए ने चेतावनी दी है कि यह संकट जितना लंबा चलेगा, वैश्विक ऊर्जा और वित्तीय बाजारों में उतनी ही अधिक अस्थिरता फैलेगी।

  • ईरान के मुद्दे पर US-जर्मनी आमने-सामने….. ट्रंप की चेतावनी के बाद जर्मन विदेश मंत्री का पलटवार

    ईरान के मुद्दे पर US-जर्मनी आमने-सामने….. ट्रंप की चेतावनी के बाद जर्मन विदेश मंत्री का पलटवार


    बर्लिन।
    जर्मनी (Germany) ने अमेरिका (America) द्वारा अपने सैनिकों की संख्या घटाने की किसी भी संभावना के लिए खुद को पूरी तरह ‘तैयार’ बताया है। जर्मन विदेश मंत्री जोहान वाडेफुल (German Foreign Minister Johann Wadephul) ने गुरुवार को कहा कि उनकी सरकार राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप (President Donald Trump) की धमकी के बावजूद नाटो और ट्रांसअटलांटिक साझेदारी को मजबूत बनाए रखने के लिए प्रतिबद्ध है। बता दें कि ट्रंप ने बुधवार को ईरान मुद्दे पर चांसलर फ्रेडरिक मर्ज के साथ विवाद के बीच जर्मनी में तैनात हजारों अमेरिकी सैनिकों को कम करने का संकेत दिया था।

    जर्मन विदेश मंत्री जोहान वाडेफुल ने मोरक्को की यात्रा के दौरान कहा कि हम इसके लिए तैयार हैं। हम नाटो के सभी निकायों में इस मुद्दे पर गहन और विश्वासपूर्ण चर्चा कर रहे हैं तथा अमेरिका से निर्णय की प्रतीक्षा कर रहे हैं। उन्होंने कहा कि किसी भी फैसले पर सहयोगियों के साथ उचित परामर्श किया जाएगा। इससे पहले चांसलर फ्रेडरिक मर्ज ने भी कहा था कि मिडिल ईस्ट में चल रहे युद्ध को लेकर जर्मनी का रुख एक मजबूत और एकीकृत नाटो तथा विश्वसनीय ट्रांसअटलांटिक साझेदारी पर केंद्रित है। मर्ज ने ट्रंप के बयान का सीधा जिक्र किए बिना कहा कि बर्लिन वाशिंगटन समेत अपने सभी सहयोगियों के साथ लगातार संपर्क में है।


    जर्मनी का भरोसा: पुराना मुद्दा, कोई नई चिंता नहीं

    विदेश मंत्री वाडेफुल ने कहा कि अमेरिकी सैनिकों की संख्या घटाने का विचार ईमानदारी से कहें तो बिल्कुल नया नहीं है। उन्होंने याद दिलाया कि पिछले अमेरिकी राष्ट्रपतियों के समय भी यह मुद्दा उठ चुका है। वाडेफुल ने जर्मनी में बड़े अमेरिकी सैन्य अड्डों पर किसी भी तरह की चर्चा से इनकार किया। उन्होंने रामस्टीन एयर बेस का उदाहरण देते हुए कहा कि यह अमेरिका और जर्मनी दोनों के लिए अपूरणीय है। उन्होंने कहा कि जर्मनी इस पूरे मामले पर पूरी तरह निश्चिंत है।

    ट्रंप का गुस्सा और सैनिकों की तैनाती पर सवाल
    अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने बुधवार को कहा था कि ईरान संबंधी मुद्दे पर चांसलर मर्ज के साथ विवाद के चलते अमेरिका जर्मनी में तैनात हजारों सैनिकों में से कुछ को वापस बुलाने या फिर से तैनात करने पर विचार कर रहा है। ट्रंप ने मर्ज पर आरोप लगाया था कि उन्हें ईरान के परमाणु कार्यक्रम की सही जानकारी नहीं है। ट्रंप ने अपने ट्रुथ सोशल प्लेटफॉर्म पर पोस्ट करते हुए इस बात की पुष्टि की। इससे पहले मंगलवार को उन्होंने कहा था कि ईरान वाशिंगटन को अपमानित कर रहा है।

  • भारत में आग बरसा रहा सुपर अल नीनो….IMD ने दी इस राज्य में भारी बारिश की चेतावनी

    भारत में आग बरसा रहा सुपर अल नीनो….IMD ने दी इस राज्य में भारी बारिश की चेतावनी


    नई दिल्ली।
    मौसम के बदलते मिजाज (Changing Weather patterns) और रिकॉर्ड तोड़ गर्मी (Record Breaking Heat) ने इस साल चिंताएं बढ़ा दी हैं। इसका सबसे बड़ा कारण ‘अल नीनो’ (Super El Nino) का वह खतरनाक रूप है, जो इस साल पूरी दुनिया के मौसम चक्र को प्रभावित कर रहा है। प्रशांत महासागर के भूमध्यरेखीय हिस्से में समुद्र की सतह का पानी जब असामान्य रूप से गर्म हो जाता है, तो उस मौसमी घटना को ‘अल नीनो’ कहते हैं। इसका असर भारत (India) पर अभी से देखने को मिल रहा है।

    हालांकि दक्षिणी राज्य केरल के लिए अच्छी खबर है। भारत मौसम विज्ञान विभाग (IMD) ने केरल के कई हिस्सों में आगामी दिनों में भारी बारिश की चेतावनी देते हुए अगले 5 दिनों का विस्तृत मौसम पूर्वानुमान जारी किया है। मौसम में हो रहे अचानक बदलाव को देखते हुए अधिकारियों ने लोगों को सतर्क रहने की सलाह दी है।


    इन जिलों में जारी हुआ ‘येलो अलर्ट’

    IMD के 5-दिवसीय पूर्वानुमान के अनुसार, 29 अप्रैल, 2026 के लिए केरल के चार प्रमुख जिलों में येलो अलर्ट घोषित किया गया है:- पथानामथिट्टा, इडुक्की, कुन्नूर, कासरगोड।

    मौसम विभाग के अनुसार, ‘येलो अलर्ट’ का अर्थ है कि लोगों को सतर्क रहना चाहिए क्योंकि इन क्षेत्रों में 24 घंटों के भीतर 64.5 मिमी से 115.5 मिमी के बीच भारी बारिश होने की पूरी संभावना है।


    ‘सुपर अल नीनो’ क्या है?

    जब समुद्र की सतह का तापमान अपने दीर्घकालिक औसत से 2°C (या उससे अधिक) ऊपर चला जाता है, तो यह एक असाधारण और विनाशकारी रूप ले लेता है, जिसे वैज्ञानिक ‘सुपर अल नीनो’ कहते हैं। विश्व मौसम विज्ञान संगठन (WMO) और कई ग्लोबल क्लाइमेट मॉडल्स ने चेतावनी दी है कि 2026 में मई-जुलाई तक यह स्थिति हावी हो सकती है। कुछ विशेषज्ञ इसे पिछले 140 सालों के सबसे ताकतवर चक्रों में से एक मान रहे हैं। इसका सीधा असर वैश्विक तापमान में वृद्धि और मौसम के चरम रूप के तौर पर सामने आता है।

    मॉनसून और अल नीनो (El Nino) से इसका संबंध

    गर्मियों के मौसम में अचानक होने वाली यह भारी बारिश जलवायु परिवर्तन और विशेष रूप से अल नीनो प्रभाव का परिणाम है, जिसका सीधा असर भारत के मॉनसून चक्र पर पड़ता है। इसे ऐसे समझा जा सकता है।

    प्री-मॉनसून गतिविधियां: अल नीनो में प्रशांत महासागर के पानी का तापमान सामान्य से अधिक गर्म हो जाता है। भले ही अल नीनो आमतौर पर भारत में मुख्य ‘दक्षिण-पश्चिम मॉनसून’ (जून से सितंबर) को कमजोर कर देता है, लेकिन मॉनसून से ठीक पहले (प्री-मॉनसून) के चरण में यह बहुत ही अस्थिर मौसम उत्पन्न कर सकता है।

    ला नीना से अल नीनो का संक्रमण: साल 2026 की शुरुआत में ‘ला नीना’ का प्रभाव कमजोर हुआ है और यह ‘अल नीनो’ की तरफ बढ़ रहा है। समुद्र के बढ़ते तापमान और स्थानीय वायुमंडलीय दबाव के इस जटिल टकराव के कारण ही केरल में एकाएक बेमौसम भारी बारिश और तूफान देखने को मिल रहे हैं।

    मॉनसून के मौसम पर ‘छाया’: यह अप्रत्याशित बारिश इस बात का संकेत है कि इस साल मुख्य मॉनसून चक्र में काफी उतार-चढ़ाव देखने को मिल सकते हैं। मॉनसून की शुरुआत से पहले ही कहीं अचानक तीव्र बारिश तो कहीं लू (हीटवेव) चलने जैसी स्थितियां बन रही हैं।


    भारत में अभी से इतनी ‘आग’ क्यों बरस रही है?

    अप्रैल 2026 में ही उत्तर प्रदेश (बांदा, फतेहपुर, इटावा जैसे जिले), मध्य प्रदेश और कई अन्य हिस्सों में तापमान 45-46°C को पार कर गया है। इसके पीछे कई भौगोलिक और मौसमी कारण एक साथ काम कर रहे हैं। साल की शुरुआत में ला नीना (ठंडा चरण) खत्म हो गया है और पृथ्वी तेजी से ‘अल नीनो’ के गर्म चरण में जा रही है। इससे वायुमंडल में गर्माहट काफी तेजी से बढ़ रही है।

    उत्तर और मध्य भारत के ऊपर बादलों का कोई कवर नहीं है। साफ आसमान के कारण सूरज की किरणें बिना किसी रुकावट के सीधे धरती पर पड़ रही हैं, जिससे हवा का एक ‘गर्म गुंबद’ बन गया है जो गर्मी को बाहर नहीं निकलने दे रहा। उत्तर-पश्चिमी मैदानी इलाकों की मिट्टी पूरी तरह सूख चुकी है। हवा में नमी न के बराबर है और वहां से आने वाली सूखी महाद्वीपीय हवाएं तापमान को सीधे बढ़ा रही हैं, जिससे शहरों का माहौल किसी भट्टी जैसा हो गया है।


    इस साल कैसा रहेगा मॉनसून और कब होगी बारिश?

    भारत में कृषि और अर्थव्यवस्था की धुरी माने जाने वाले मॉनसून पर इस साल ‘अल नीनो’ की स्पष्ट छाया मंडरा रही है। भारतीय मौसम विज्ञान विभाग (IMD) ने 13 अप्रैल 2026 को जारी अपने लंबी अवधि के पूर्वानुमान में यह तस्वीर साफ कर दी है। IMD के अनुसार, इस साल दक्षिण-पश्चिम मॉनसून (जून से सितंबर) के “सामान्य से नीचे” रहने की संभावना सबसे अधिक है। देश भर में इस बार औसतन मात्र 92% बारिश (LPA का) होने का अनुमान है।

    कब आएगा मॉनसून?

    आमतौर पर मॉनसून 1 जून को केरल तट से टकराता है। हालांकि मानसून अपने समय पर दस्तक दे सकता है, लेकिन जुलाई-अगस्त तक अल नीनो पूरी तरह हावी हो जाएगा। इससे मॉनसून की रफ्तार धीमी पड़ सकती है और बारिश के वितरण में भारी असमानता देखने को मिल सकती है। बारिश कम होने और तापमान अधिक रहने से धान, दलहन और गन्ने जैसी खरीफ फसलों की पैदावार प्रभावित हो सकती है, जो एक बड़ी आर्थिक चिंता का विषय है।

  • पश्चिम बंगाल में गरजे मोदी, घुसपैठियों को दी चेतावनी…… बोले- दूसरे फेज से पहले देश छोड़ दो वरना….

    पश्चिम बंगाल में गरजे मोदी, घुसपैठियों को दी चेतावनी…… बोले- दूसरे फेज से पहले देश छोड़ दो वरना….


    कोलकाता।
    प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी (Prime Minister Narendra Modi) ने रविवार को पश्चिम बंगाल (West Bengal) के दूसरे चरण के मतदान से पहले घुसपैठियों को चेतावनी दी। उन्होंने कहा कि मैं घुसपैठियों को चेतावनी देता हूं कि वे बंगाल चुनाव के दूसरे चरण से पहले देश को छोड़ दें, वरना परिणाम आने के बाद उन्हें बाहर निकाल दिया जाएगा। उन्होंने कहा कि बंगाल चुनाव के पहले चरण में तृणमूल कांग्रेस (Trinamool Congress) का अहंकार चकनाचूर हो गया, दूसरे चरण में भाजपा की जीत सुनिश्चित होगी।

    पीएम मोदी ने चुनावी रैली में कहा, ”तृणमूल कांग्रेस के शासन में छोटे से छोटा नेता और गुंडे भी खुद को सरकार समझते हैं। भाजपा को वोट दीजिए, मैं आपको तृणमूल कांग्रेस के ‘महा जंगलराज’ से मुक्ति दिलाऊंगा। तृणमूल कांग्रेस की ‘निर्मम सरकार’ बंगाल की महिलाओं पर अत्याचार करने वाले गुंडों के साथ खड़ी है। अब यह कहने का समय आ गया है कि इसे और बर्दाश्त नहीं किया जाएगा।

    प्रधानमंत्री मोदी ने कहा, ”संदेशखलि के पीड़ित एवं आर जी कर अस्पताल की पीड़िता की मां को चुनाव में टिकट देने के फैसले में बंगाल की महिलाओं के प्रति भाजपा की प्रतिबद्धता झलकती है। बंगाल की नई भाजपा सरकार महिलाओं के साथ बलात्कार और उन्हें प्रताड़ित करने वाले बदमाशों को चार मई के बाद न्याय के कठघरे में लाएगी।” वहीं, उन्होंने यह भी कहा कि मैं मतुआ नामशुद्र समुदाय के सदस्यों के समक्ष यह प्रतिज्ञा करता हूं कि उन्हें सीएए के माध्यम से नागरिकता प्राप्त होगी।

    इसके अलावा, प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी ने रविवार को आरोप लगाया कि पश्चिम बंगाल में तृणमूल कांग्रेस के नेतृत्व वाली सरकार राज्य सचिवालय से नहीं बल्कि पार्टी द्वारा संरक्षित गुंडों और अपराधियों द्वारा चलाई जा रही है। चुनाव प्रचार समाप्त होने से एक दिन पहले, हुगली जिले के आरामबाग में चुनावी रैली को संबोधित करते हुए मोदी ने कहा कि सरकार चलाने के लिए टीएमसी की ”असामाजिक तत्वों पर निर्भरता” के कारण अक्सर कलकत्ता उच्च न्यायालय या उच्चतम न्यायालय को हस्तक्षेप करना पड़ा है। मोदी ने कहा, ”टीएमसी की ‘निर्मम सरकार’ नबान्न (राज्य सचिवालय) से नहीं चलती। इसे गुंडे और अपराधी चलाते हैं, और सरकार को पटरी पर लाने के लिए उच्च न्यायालय और देश की शीर्ष अदालत के हस्तक्षेप की आवश्यकता पड़ी है।”

    उन्होंने वादा किया कि राज्य में भाजपा सरकार बनने पर पहली कैबिनेट बैठक में केंद्र की प्रमुख स्वास्थ्य बीमा योजना ‘आयुष्मान भारत-प्रधानमंत्री जन आरोग्य योजना’ के कार्यान्वयन को मंजूरी दी जाएगी। ममता बनर्जी प्रशासन की विश्वसनीयता ”पूरी तरह से खत्म” होने का आरोप लगाते हुए प्रधानमंत्री ने दावा किया कि केवल भाजपा ही ऐसी सरकार बना सकती है जो राज्य के लोगों को न्याय और सुरक्षा प्रदान करेगी। राज्य के आलू किसानों की ”दुर्दशा” के बारे में प्रधानमंत्री ने कहा कि टीएमसी सरकार से जुड़ा ‘सिंडिकेट राज’ उपज को कम दाम पर खरीदकर कहीं और ऊंचे दाम पर बेचता है। पीएम मोदी ने आरोप लगाया कि टीएमसी के शासनकाल में राज्य भर में महिलाओं के खिलाफ हिंसक अपराध अपने चरम पर पहुंच गए। उन्होंने सत्ताधारी पार्टी पर ”अपराधियों को संरक्षण देने” का आरोप लगाया, जिसके चलते अपराधी खुलेआम घूम रहे हैं।

  • ग्‍लोबल मार्केट में Crude Oil की कीमत में गिरावट… ट्रंप की चेतावनी भी बेअसर

    ग्‍लोबल मार्केट में Crude Oil की कीमत में गिरावट… ट्रंप की चेतावनी भी बेअसर


    नई दिल्ली।
    इंटरनेशनल मार्केट (International Market) में क्रूड ऑयल के दाम (Crude Oil Price) में उथल-पुथल मची हुई है. एक द‍िन पहले ज‍िस क्रूड के दाम में ग‍िरावट देखी जा रही थी, अगले द‍िन उसी में तेजी देखी जा रही है. दो द‍िन पहले की ही बात है जब ईरान ने कहा कि होर्मुज स्‍ट्रेट (Strait of Hormuz) को कमर्श‍ियल श‍िप के लि‍ए पूरी तरह खोल द‍िया गया है. इसके बाद क्रूड के दाम 9 प्रत‍िशत तक टूट गए. लेक‍िन डोनाल्ड ट्रंप (Donald Trump.) की तरफ से जब यह बयान आया क‍ि अमेरिकी नौसेना ने ईरानी झंडे वाला कार्गो जहाज को जब्‍त कर ल‍िया है. इसके बाद तेल की कीमत में तेजी देखी गई. अब फ‍िर क्रूड ऑयल के दाम में ग‍िरावट देखी जा रही है।

    मंगलवार सुबह क्रूड ऑयल के दाम में फ‍िर से ग‍िरावट देखी जा रही है. WTI क्रूड के रेट में 0.87 डॉलर प्रत‍ि बैरल की ग‍िरावट देखी गई और यह 86.63 डॉलर प्रत‍ि बैरल पर पहुंच गया. ब्रेंट क्रूड के दाम में भी नरमी देखी जा रही है और यह टूटकर 95.09 डॉलर प्रत‍ि बैरल पर पहुंच गया. ईरान और इजरायल के बीच 28 फरवरी से शुरू हुए युद्ध के बाद सीजफायर के बीच क्रूड के दाम में उठा-पटक बनी हुई है. आने वाले समय में तेल की कीमत में अस्थिरता बनी रहने उम्मीद है. होर्मुज बंद होने के बाद ग्लोबल सप्लाई चेन टूट चुकी है. दुन‍ियाभर के ऑयल मार्केट का 20 फीसदी इसी रास्ते से होकर गुजरता है।


    ट्रंप ने दी चेतावनी

    इससे पहले अमेर‍िका और ईरान की पाक‍िस्‍तान में सोमवार को होने वाली बातचीत से ईरान ने यह कहकर क‍िनारा कर ल‍िया क‍ि यूएस की लगातार बढ़ती मांगों और धमकी के आगे वह नहीं झुकेगा. इसके बाद दोनों देशों का तनाव फिर से चरम पर पहुंच गया है. दोनों पक्षों के बीच 8 अप्रैल को शुरू हुआ सीजफायद 22 अप्रैल को खत्म होने जा रहा है. ईरान के बातचीत से क‍िनारा क‍िये जाने से नाराज ट्रंप ने कहा कि यद‍ि सीजफायर बिना किसी समझौते के मंगलवार शाम को खत्म हो जाता है तो फिर बहुत सारे बम फटने लगेंगे।


    भारतीय बाजार में पेट्रोल-डीजल का हाल

    क्रूड के दाम में उठा-पटक का असर सीधे तौर पर पेट्रोल-डीजल के रेट पर देखा जाता है. प‍िछले द‍िनों क्रूड के दाम में तेजी आई तो तेल कंपन‍ियों के प्रॉफ‍िट पर सीधा असर पड़ा. इसे मैनेज करने के लि‍ए सरकार ने आम आदमी को राहत देते हुए एक्‍साइज ड्यूटी में कटौती कर तेल कंपन‍ियों के दबाव को कम क‍िया. अगर क्रूड के दाम लंबे समय तक 100 डॉलर के आसपास बने रहे तो इसका असर आम आदमी पर देखने को म‍िल सकता है।


    पेट्रोल-डीजल के रेट

    > दिल्ली : पेट्रोल 94.77, डीजल 87.67 रुपये प्रति लीटर
    > मुंबई: पेट्रोल 103.54, डीजल 90.03 रुपये प्रति लीटर
    > चेन्नई: पेट्रोल 100.84, डीजल 92.48 रुपये प्रति लीटर
    > कोलकाता: पेट्रोल 105.45, डीजल 91.81 रुपये प्रति लीटर

  • उत्तर भारत में इस साल पड़ेगी भीषण गर्मी… IMD की चेतावनी- सामान्य से ज्यादा रहेंगे लू के दिन

    उत्तर भारत में इस साल पड़ेगी भीषण गर्मी… IMD की चेतावनी- सामान्य से ज्यादा रहेंगे लू के दिन


    नई दिल्ली।
    भारतीय मौसम विज्ञान विभाग (Indian Meteorological Department) ने चेतावनी दी है कि इस साल उत्तर भारत (North India) के मैदानी इलाकों, पूर्वी तटीय राज्यों गुजरात, महाराष्ट्र और आसपास के इलाकों में हीटवेव (Heatwave.-लू) के दिन सामान्य से अधिक देखने को मिल सकते हैं। मौसम विभाग के महानिदेशक मृत्युंजय मोहापात्रा ने बताया कि कुछ क्षेत्र ऐसे हैं जहां जलवायु के लिहाज से तापमान 40 डिग्री सेल्सियस से ऊपर जाना सामान्य है। इसलिए हमें ऐसे उच्च तापमान वाले दिनों के लिए तैयार रहना चाहिए।


    उत्तरी मैदानी राज्यों में चलेगी भीषण लू

    मौसम विभाग के प्रमुख ने बताया कि हर साल अप्रैल, मई और जून के दौरान उच्च तापमान देखने को मिलता है, हालांकि इसमें साल-दर-साल कुछ भिन्नता होती है। तापमान में वार्षिक और दैनिक उतार-चढ़ाव से निपटने के लिए आईएमडी एक सीजन पहले ही हीटवेव का पूर्वानुमान जारी करता है। इसके बाद हर गुरुवार अगले चार सप्ताह के लिए विस्तारित पूर्वानुमान और गर्मियों में हर दिन जिला स्तर पर सात दिन की चेतावनी जारी की जाती है।

    आईएमडी ने फरवरी के अंत में मार्च, अप्रैल और मई के लिए पहला हीटवेव आउटलुक जारी किया था, जिसे मार्च के अंत में अप्रैल, मई और जून के लिए अपडेट किया गया। पूर्वानुमान के अनुसार, अप्रैल से जून के बीच उत्तर तटीय राज्यों—जैसे पश्चिम बंगाल के दक्षिणी हिस्से, ओडिशा, आंध्र प्रदेश और छत्तीसगढ़ और तेलंगाना जैसे पूर्वी क्षेत्रों में लू की स्थिति बन सकती है। इसके अलावा, मैदानी क्षेत्रों (हरियाणा, उत्तर प्रदेश, बिहार, झारखंड), राजस्थान के दक्षिणी हिस्सों, गुजरात के कुछ भागों, मध्य प्रदेश के दक्षिणी क्षेत्रों और महाराष्ट्र के उत्तरी हिस्सों में भी हीटवेव की आशंका जताई गई है।


    मजदूरों और रेहड़ी पटरी वालों को तापमान की सूचना दी जा रही

    संवेदनशील आबादी तक जानकारी पहुंचाने के उपायों पर उन्होंने बताया कि मौसम विभाग ने फील्ड में काम करने वाले मजदूरों और रेहड़ी-पटरी वालों तक सूचना पहुंचाने के लिए व्हाट्सएप ग्रुप बनाए हैं। साथ ही, सार्वजनिक स्थानों पर डिस्प्ले बोर्ड लगाकर गर्मी और उससे बचाव के उपायों की जानकारी दी जा रही है।

    मोहापात्रा ने कहा कि मौसम विभाग द्वारा जारी पूर्वानुमान को सरकारी माध्यमों से साझा किया जाता है, जिसमें राष्ट्रीय आपदा प्रबंधन प्राधिकरण के कॉमन अलर्ट प्रोटोकॉल का भी इस्तेमाल होता है, जिससे मोबाइल फोन रखने वाला कोई भी व्यक्ति यह जानकारी प्राप्त कर सकता है।नउन्होंने यह भी माना कि कुछ वर्ग ऐसे हैं जिन तक मोबाइल या अलर्ट की पहुंच नहीं है, इसलिए पारंपरिक और नवाचारपूर्ण तरीकों से उन्हें जागरूक करने की जरूरत है।