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  • नेपाल-चीन सीमा पर बनी बैरियर लेक से बढ़ी चिंता, भारत से 120-140 किमी दूर झील को लेकर अलर्ट

    नेपाल-चीन सीमा पर बनी बैरियर लेक से बढ़ी चिंता, भारत से 120-140 किमी दूर झील को लेकर अलर्ट


    नई दिल्ली। नेपाल में भोटेकोशी नदी की विनाशकारी बाढ़ के बाद अब नेपाल-चीन सीमा क्षेत्र में बनी एक विशाल बैरियर लेक (प्राकृतिक झील) को लेकर वैज्ञानिकों और प्रशासन की चिंता बढ़ गई है। चीन के जल संसाधन मंत्रालय ने अगले 72 घंटों को बेहद महत्वपूर्ण बताते हुए इलाके में निगरानी और फ्लड सिमुलेशन शुरू कर दिया है। आशंका जताई जा रही है कि यदि झील को रोक रहा प्राकृतिक बांध कमजोर पड़ता है या टूट जाता है तो बड़ी मात्रा में पानी तेजी से निचले इलाकों की ओर बह सकता है।

    यह झील छोछेन खोला और पुरेपू त्सांगपो नदियों के संगम पर बनी है। प्रारंभिक आकलन के अनुसार यह क्षेत्र भारतीय सीमा से लगभग 120 से 140 किलोमीटर उत्तर में स्थित है। वहीं नेपाल-चीन सीमा पर स्थित रसुवागढ़ी-ग्यिरोंग बॉर्डर क्रॉसिंग से इसकी दूरी करीब 18 किलोमीटर बताई जा रही है। भौगोलिक रूप से भारत से दूरी अधिक नहीं होने के बावजूद चिंता का कारण इसका नदी तंत्र से जुड़ाव है, क्योंकि यहां का पानी आगे चलकर नेपाल होते हुए गंडक नदी के जरिए भारत तक पहुंचता है।

    झील में करोड़ों लीटर पानी जमा
    चीन की ओर से जारी चेतावनी के मुताबिक बैरियर लेक का जलस्तर लगातार बढ़ रहा है। हाइड्रोजियोलॉजिस्ट के अनुमान के अनुसार झील में करीब 20 लाख क्यूबिक मीटर पानी पहले ही जमा हो चुका है, जबकि लगभग 30 लाख क्यूबिक मीटर अतिरिक्त पानी और जमा होने की संभावना जताई गई है। यानी कुल मिलाकर 50 लाख क्यूबिक मीटर तक पानी प्राकृतिक बांध के पीछे इकट्ठा हो सकता है।

    विशेषज्ञों का कहना है कि यदि पानी का दबाव बढ़ने से प्राकृतिक अवरोध टूटता है तो यह ग्लेशियल या भूस्खलन से बनी झील के अचानक फटने (लेक आउटबर्स्ट फ्लड) जैसी स्थिति पैदा कर सकता है। ऐसी घटनाओं में पानी बेहद तेज गति से नीचे की ओर बढ़ता है और अपने साथ चट्टानें, मिट्टी, पेड़ तथा भारी मात्रा में मलबा भी बहाकर ले जाता है।

    अगले 72 घंटे क्यों अहम
    खतरे को देखते हुए चीन ने रियल-टाइम मॉनिटरिंग और फ्लड मॉडलिंग शुरू की है। वैज्ञानिक यह आकलन कर रहे हैं कि यदि प्राकृतिक बांध में दरार बढ़ती है या वह टूटता है तो पानी की दिशा, मात्रा और गति क्या होगी। 27 अगस्त को जारी चेतावनी के बाद से पूरे क्षेत्र पर लगातार नजर रखी जा रही है।

    विशेषज्ञों के मुताबिक फिलहाल सबसे बड़ा सवाल यह है कि झील का पानी धीरे-धीरे बाहर निकलेगा या अचानक बांध टूटने जैसी स्थिति बनेगी। यदि जल निकासी नियंत्रित रहती है तो निचले इलाकों को तैयारी का पर्याप्त समय मिल सकता है, लेकिन अचानक बांध टूटने की स्थिति में बाढ़ की लहर बेहद कम समय में नीचे पहुंच सकती है।

    बिहार और उत्तर प्रदेश पर क्यों नजर
    छोछेन खोला और पुरेपू त्सांगपो का पानी आगे नेपाल की नदियों में मिलकर भोटेकोशी और फिर त्रिशूली नदी तंत्र का हिस्सा बनता है। त्रिशूली आगे चलकर नारायणी नदी में समाहित होती है, जिसे भारत में गंडक नदी के नाम से जाना जाता है। यही वजह है कि ऊपरी क्षेत्र में किसी भी असामान्य जलप्रवाह का असर बिहार और उत्तर प्रदेश के गंडक बेसिन वाले इलाकों पर पड़ सकता है।

    हालांकि विशेषज्ञों ने स्पष्ट किया है कि फिलहाल भारत में बड़ी बाढ़ की कोई निश्चित आशंका नहीं है, लेकिन नदी तंत्र के आपसी जुड़ाव को देखते हुए निगरानी और सतर्कता बेहद जरूरी है।

    नेपाल में पहले ही मची है तबाही
    यह चेतावनी ऐसे समय आई है जब नेपाल में हाल की बाढ़ ने भारी नुकसान पहुंचाया है। रसुवा, नुवाकोट और धादिंग जिलों में सड़कें, पुल और मकान प्रभावित हुए हैं। कई क्षेत्रों में नदी के साथ बहकर आए मलबे ने जनजीवन अस्त-व्यस्त कर दिया है और अनेक लोगों के लापता होने की भी खबरें हैं।

    ऐसे में अब प्रशासन की नजर केवल बैरियर लेक पर नहीं, बल्कि पूरे नदी तंत्र पर है। आने वाले 72 घंटे यह तय करेंगे कि झील स्थिर रहती है या फिर उसके जलस्तर में बढ़ोतरी नई चुनौती खड़ी करती है।

  • ईरान के खिलाफ आर्थिक युद्ध छेड़ेगा अमेरिका…. अब तक के सबसे कड़े प्रतिबंधों की दी चेतावनी!

    ईरान के खिलाफ आर्थिक युद्ध छेड़ेगा अमेरिका…. अब तक के सबसे कड़े प्रतिबंधों की दी चेतावनी!


    वॉशिंगटन।
    अमेरिका और ईरान (America and Iran) के बीच तनाव अब आर्थिक मोर्चे (Economic front) पर और गहराता दिख रहा है। अमेरिकी वित्त मंत्री स्कॉट बेसेंट (US Treasury Secretary Scott Bessent) ने ईरान के खिलाफ इतिहास के सबसे कड़े प्रतिबंध लगाने की चेतावनी दी है। उन्होंने कहा कि अमेरिका तेहरान को आर्थिक रूप से अलग-थलग करने की कोशिश करेगा और ईरान की सरकार पर दबाव बढ़ाएगा। बेसेंट ने यह भी कहा कि अधिकतम आर्थिक दबाव का मतलब फिलहाल सैन्य कार्रवाई दोबारा शुरू करना नहीं है।


    अमेरिका ईरान पर क्या बड़ी कार्रवाई करने वाला है?

    बेसेंट के मुताबिक अमेरिका ऐसे कदम उठाएगा, जिससे ईरान की आर्थिक क्षमता और उसके सहयोगी सशस्त्र समूहों तक पहुंच सीमित हो सके। उन्होंने कहा कि ईरान के साथ कारोबार जारी रखने वाले देशों पर भी अमेरिकी कार्रवाई हो सकती है। बेसेंट ने संकेत दिया कि सोमवार को होने वाली एक मीडिया बैठक में ईरान के खिलाफ उठाए जाने वाले कदमों की विस्तृत जानकारी दी जाएगी। यानी अमेरिका की नई रणनीति केवल प्रतिबंध लगाने तक सीमित नहीं रह सकती है।

    चीन को अमेरिका ने क्यों दी चेतावनी?
    ईरान के साथ चीन के व्यापारिक संबंधों को लेकर भी अमेरिका ने दबाव बढ़ाया है। बेसेंट ने चीन से अमेरिकी कार्यक्रम के साथ आने और होर्मुज जलडमरूमध्य को फिर से खोलने के प्रयासों में सहयोग करने को कहा। उन्होंने कहा कि चीन अपनी ऊर्जा जरूरतों का बड़ा हिस्सा खाड़ी क्षेत्र से पूरा करता है। इसलिए होर्मुज का खुला रहना चीन के अपने हित में भी है। अमेरिका ने चीन पर संभावित कार्रवाई के सवाल पर साफ जवाब नहीं दिया, लेकिन कहा कि कुछ बातचीत निजी स्तर पर बेहतर होती है।


    ट्रंप ने ईरान पर क्या ऐलान किया था?

    अमेरिका के राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने एक दिन पहले ईरान के खिलाफ अब तक की सबसे बड़ी आर्थिक कार्रवाई करने का ऐलान किया था। उन्होंने इसे अभूतपूर्व आर्थिक युद्ध और अलगाव की रणनीति बताया। ट्रंप ने ईरान के तेल तस्करी नेटवर्क, वित्तीय लेनदेन, मुद्रा विनिमय केंद्रों, जहाज पंजीकरण और फर्जी कंपनियों को निशाना बनाने की बात कही। उन्होंने सहयोगी देशों से भी ईरान को अलग-थलग करने में अमेरिका का साथ देने की अपील की।

    होर्मुज जलडमरूमध्य इस पूरे विवाद में क्यों अहम है?
    अमेरिका और ईरान के बीच बढ़ते तनाव में होर्मुज जलडमरूमध्य सबसे अहम मुद्दों में से एक बन गया है। यह दुनिया के प्रमुख ऊर्जा मार्गों में शामिल है। ट्रंप का कहना है कि जलडमरूमध्य खुला है और अमेरिकी नौसैनिक नाकाबंदी प्रभावी रही है। दूसरी ओर ईरान की ओर से इसे लेकर सख्त रुख सामने आया है। ईरानी संसद के अध्यक्ष मोहम्मद बाघेर गालिबाफ पहले कह चुके हैं कि अमेरिका की ओर से अपनी प्रतिबद्धताएं पूरी किए जाने तक तेहरान इसे फिर से खोलने पर सहमत नहीं होगा।


    ईरान ने अमेरिकी प्रतिबंधों को क्या बताया?

    ईरान के विदेश मंत्रालय ने अमेरिका के नए प्रतिबंधों की कड़ी निंदा की है। ईरान ने इन्हें ‘आर्थिक आतंकवाद’ और मानवता के खिलाफ अपराध बताया है। तेहरान का आरोप है कि अमेरिका दशकों से ईरानी लोगों के खिलाफ शत्रुतापूर्ण नीति अपना रहा है। ईरान ने कहा कि आर्थिक प्रतिबंध और दबाव युद्ध और सैन्य हमले के ही दूसरे रूप हैं। साथ ही उसने साफ किया कि अमेरिकी दबाव के बावजूद वह अपनी सुरक्षा, स्वतंत्रता और राष्ट्रीय हितों की रक्षा करता रहेगा।


    क्या आर्थिक दबाव के बाद सैन्य कार्रवाई का खतरा टल गया?

    बेसेंट ने कहा है कि अधिकतम आर्थिक दबाव का मतलब संभवतः सैन्य कार्रवाई दोबारा शुरू करना नहीं है। इससे संकेत मिलता है कि फिलहाल अमेरिका आर्थिक और वित्तीय दबाव को प्राथमिकता दे रहा है। हालांकि, ट्रंप ने ईरान को परमाणु हथियार हासिल नहीं करने देने की बात दोहराई है। ऐसे में सैन्य विकल्प को पूरी तरह खत्म माना नहीं जा सकता। होर्मुज में तनाव और ईरान की प्रतिक्रिया आने वाले दिनों में स्थिति की दिशा तय कर सकती है।


    क्या अमेरिका-ईरान टकराव में चीन भी खिंच सकता है?

    फिलहाल अमेरिका और ईरान के बीच सीधा आर्थिक टकराव है, लेकिन चीन का मुद्दा इसे और बड़ा बना सकता है। चीन के ईरान के साथ व्यापारिक संबंध हैं और उसकी ऊर्जा जरूरतों का संबंध खाड़ी क्षेत्र से है। अमेरिका चाहता है कि चीन ईरान पर दबाव बढ़ाने में सहयोग करे। वहीं ईरान अमेरिकी प्रतिबंधों को स्वीकार करने के संकेत नहीं दे रहा है। ऐसे में अगर अमेरिका ईरान के साथ कारोबार करने वाले देशों पर भी कार्रवाई करता है तो वैश्विक व्यापार, ऊर्जा कीमतों और कूटनीतिक संबंधों पर इसका असर पड़ सकता है।

  • जॉर्डन मिसाइल हमले के बाद अमेरिका का पलटवार, ईरान पर फिर शुरू हुई एयरस्ट्राइक

    जॉर्डन मिसाइल हमले के बाद अमेरिका का पलटवार, ईरान पर फिर शुरू हुई एयरस्ट्राइक


    नई दिल्ली। जॉर्डन में अमेरिकी सैन्य अड्डे को निशाना बनाने की कथित कोशिश के बाद अमेरिका ने ईरान के खिलाफ एक बार फिर हवाई हमले शुरू कर दिए हैं। अमेरिकी मीडिया रिपोर्टों के अनुसार, गुरुवार रात ईरान के भीतर कई सैन्य ठिकानों पर एयरस्ट्राइक की गई, जिससे कुछ समय के लिए रुका सैन्य अभियान दोबारा शुरू हो गया।

    रिपोर्ट के मुताबिक, एक वरिष्ठ अमेरिकी अधिकारी ने पुष्टि की कि ईरान के भीतर कई रणनीतिक ठिकानों को निशाना बनाया गया। इससे पहले इस सप्ताह ईरान की ओर से जॉर्डन स्थित अमेरिकी सैन्य अड्डे पर बैलिस्टिक मिसाइलें दागे जाने का दावा किया गया था।

    मिसाइल हमले के जवाब में सैन्य कार्रवाई
    अमेरिकी सेंट्रल कमांड (CENTCOM) के अनुसार, ईरान से दागी गई सभी मिसाइलों को बीच रास्ते में ही निष्क्रिय कर दिया गया और किसी तरह का नुकसान नहीं हुआ। अमेरिकी सेना ने इसे मध्य-पूर्व में तैनात अपने सैनिकों पर हमला करने की कोशिश बताया। CENTCOM ने सोशल मीडिया पर जानकारी दी कि गुरुवार रात (अमेरिकी समयानुसार) ईरान के खिलाफ जवाबी हवाई अभियान शुरू किया गया। सेना का कहना है कि यह कार्रवाई अमेरिकी ठिकानों पर कथित मिसाइल हमले के जवाब में की गई है।

    ट्रंप ने दी थी कड़ी चेतावनी
    एयरस्ट्राइक शुरू होने से कुछ घंटे पहले अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने स्पष्ट किया था कि अमेरिकी सैनिकों पर किसी भी हमले का कड़ा जवाब दिया जाएगा। उन्होंने कहा था कि यदि अमेरिकी हितों को निशाना बनाया गया तो जिम्मेदार पक्ष को इसकी भारी कीमत चुकानी पड़ेगी।

    इराक में भी संयुक्त अभियान
    इस बीच अमेरिका और सऊदी अरब ने इराक में ईरान समर्थित मिलिशिया के खिलाफ संयुक्त हवाई अभियान भी चलाया। पॉपुलर मोबिलाइजेशन फोर्सेज (PMF) के अनुसार, इन हमलों में कम से कम 20 लोगों की मौत हुई है।

    अमेरिकी सेंट्रल कमांड का कहना है कि कार्रवाई के दौरान पूर्वी इराक में मिलिशिया के हथियार भंडार और लॉजिस्टिक ठिकानों को निशाना बनाया गया। अमेरिका का आरोप है कि पिछले तीन दिनों में उसके सैन्य ठिकानों और सऊदी अरब के ऊर्जा प्रतिष्ठानों पर 30 से अधिक ड्रोन हमलों के पीछे ईरान समर्थित इस्लामिक रिवोल्यूशनरी गार्ड कॉर्प्स (IRGC) का हाथ है।

    कूटनीतिक प्रयासों के बीच बढ़ा तनाव
    हाल के दिनों में अमेरिका और ईरान के बीच मध्यस्थों के जरिए अप्रत्यक्ष बातचीत की खबरें भी सामने आई थीं। इसी वजह से अमेरिका ने पिछले सप्ताह अपने हवाई अभियान को अस्थायी रूप से रोक दिया था, ताकि कूटनीतिक समाधान की संभावनाओं का आकलन किया जा सके। हालांकि, जॉर्डन में अमेरिकी सैन्य अड्डे पर कथित मिसाइल हमले के बाद दोनों देशों के बीच तनाव फिर बढ़ गया और अमेरिका ने दोबारा सैन्य कार्रवाई शुरू कर दी।

    नेतन्याहू से मुलाकात के बाद तेज हुई रणनीति
    अमेरिका की ताजा कार्रवाई ऐसे समय हुई है, जब राष्ट्रपति ट्रंप ने हाल ही में व्हाइट हाउस में इजरायल के प्रधानमंत्री बेंजामिन नेतन्याहू से मुलाकात की थी। दोनों नेताओं के बीच ईरान को लेकर व्यापक चर्चा हुई थी। मीडिया रिपोर्टों के अनुसार, बैठक में कूटनीति, आर्थिक प्रतिबंध और सैन्य विकल्पों सहित कई संभावित रणनीतियों पर विचार किया गया।

  • ट्रंप बोले- US के खिलाफ जंग में ईरान की मदद नहीं करेंगे चीन-रूस… चेतावनी भी दी

    ट्रंप बोले- US के खिलाफ जंग में ईरान की मदद नहीं करेंगे चीन-रूस… चेतावनी भी दी


    वाशिंगटन।
    अमेरिका और ईरान (America and Iran) के बीच संघर्ष जारी है. इस बीच अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप (American President Donald Trump) ने कहा कि उन्हें भरोसा है कि चीन और रूस इस संघर्ष में ईरान की मदद नहीं करेंगे. हालांकि, उन्होंने यह भी चेतावनी दी कि अगर दोनों देश इसमें शामिल होते हैं, तो इसके गंभीर परिणाम होंगे।

    डोनाल्ड ट्रंप ने कहा कि बीजिंग में हाल ही में हुई मुलाकात के दौरान चीनी राष्ट्रपति शी जिनपिंग (Chinese President Xi Jinping) ने उन्हें भरोसा दिलाया था कि चीन ईरान को हथियार नहीं देगा या बेचेगा, और न ही चीनी कंपनियों के जरिए ऐसा किया जाएगा. उन्होंने आगे कहा कि रूसी राष्ट्रपति व्लादिमीर पुतिन (Russian President Vladimir Putin) ने भी उनसे कहा था कि रूस तेहरान को हथियार नहीं बेचेगा।

    व्हाइट हाउस में पत्रकारों से बात करते हुए ट्रंप ने कहा, ‘मुझे लगता है कि मैं उन पर भरोसा करता हूं.’ उन्होंने कहा कि उन्हें नहीं लगता कि दोनों में से कोई भी देश इस टकराव में ईरान की मदद कर रहा है।

    रॉयटर्स के अनुसार, ट्रंप की यह टिप्पणी रक्षा मंत्री पीट हेगसेथ के सांसदों को यह बताने के कुछ दिनों बाद आई है कि रूस और चीन ऐसे मामलों में शामिल थे, जो ईरान की कुछ गतिविधियों को बढ़ावा दे रहे थे. हालांकि उन्होंने इस बारे में कोई और जानकारी नहीं दी।

    बताया जा रहा है कि गल्फ में CIA के ठिकानों पर हुए ईरानी हमलों के बाद अमेरिकी खुफिया एजेंसियां इस बात की भी जांच कर रही हैं कि क्या रूस ने टारगेटिंग इंफॉर्मेशन या ड्रोन तकनीक के जरिए ईरान की मदद की है. हालांकि, क्रेमलिन ने इस रिपोर्ट पर कोई भी कमेंट करने से इनकार कर दिया है।

  • ट्रंप की चेतावनी पर ईरान का पलटवार, बोला- हमारा तेल रुका तो दुनिया की सप्लाई भी ठप होगी

    ट्रंप की चेतावनी पर ईरान का पलटवार, बोला- हमारा तेल रुका तो दुनिया की सप्लाई भी ठप होगी


    नई दिल्ली। अमेरिका के राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप की कड़ी चेतावनी के बाद ईरान ने भी तीखी प्रतिक्रिया दी है। ईरान के प्रमुख वार्ताकार और संसद के स्पीकर मोहम्मद बागेर गालिबाफ ने कहा कि यदि ईरान को अपना तेल निर्यात करने से रोका गया, तो क्षेत्र में कोई भी देश आसानी से तेल नहीं बेच पाएगा। साथ ही उन्होंने दोहराया कि हॉर्मुज जलडमरूमध्य (Hormuz Strait) में हालात अब युद्ध से पहले जैसे नहीं होंगे।

    ‘या सब बेचेंगे, या कोई नहीं’
    मोहम्मद बागेर गालिबाफ ने सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म एक्स पर लिखा कि मौजूदा हालात का संदेश बिल्कुल साफ है—”या तो सभी तेल बेचेंगे या फिर कोई नहीं।” उन्होंने कहा कि यदि ईरान की ऊर्जा आपूर्ति प्रभावित होती है, तो क्षेत्र के अन्य देशों की तेल आपूर्ति भी सुरक्षित नहीं रह पाएगी।

    उन्होंने यह भी कहा कि अगर ईरान की सुरक्षा खतरे में होगी तो किसी अन्य देश का महत्वपूर्ण बुनियादी ढांचा भी सुरक्षित नहीं रहेगा। गालिबाफ ने यह भी दोहराया कि हॉर्मुज जलडमरूमध्य की सुरक्षा अमेरिकी सैन्य मौजूदगी के बिना ही संभव है और यह समुद्री मार्ग अब पहले जैसी स्थिति में नहीं लौटेगा।

    ट्रंप ने दी थी सख्त चेतावनी
    इससे पहले अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने अपने सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म ट्रुथ सोशल पर ईरान को सीधी चेतावनी देते हुए कहा था कि यदि हॉर्मुज जलडमरूमध्य में किसी जहाज पर मिसाइल, ड्रोन, रॉकेट या अन्य हथियार से हमला किया गया, तो अमेरिका ईरान के अहम बुनियादी ढांचे को निशाना बनाएगा।

    ट्रंप ने लिखा कि यदि ईरान समुद्री मार्ग में जहाजों पर हमला करता है, तो अमेरिका जवाबी कार्रवाई में पुलों, बिजली संयंत्रों और अन्य महत्वपूर्ण प्रतिष्ठानों को निशाना बनाएगा। उन्होंने संकेत दिया कि ऐसे हमलों के दायरे में तेहरान के आसपास स्थित महत्वपूर्ण ठिकाने भी आ सकते हैं।

    तनाव का सबसे बड़ा केंद्र बना हॉर्मुज स्ट्रेट
    अमेरिका और ईरान के बीच बढ़ते तनाव के बीच हॉर्मुज जलडमरूमध्य सबसे संवेदनशील मुद्दा बन गया है। शुरुआती युद्धविराम समझौता टूटने के बाद दोनों देशों के बीच लगातार सैन्य कार्रवाई और जवाबी हमलों का दौर जारी है। अमेरिका कई बार ईरानी ठिकानों पर कार्रवाई कर चुका है, जबकि ईरान ने खाड़ी क्षेत्र में अमेरिकी सैन्य ठिकानों को निशाना बनाकर जवाब दिया है।

    दुनिया की तेल सप्लाई पर पड़ सकता है असर
    हॉर्मुज जलडमरूमध्य वैश्विक ऊर्जा आपूर्ति के लिए बेहद अहम समुद्री मार्ग माना जाता है। दुनिया के कुल तेल निर्यात का करीब 20 प्रतिशत हिस्सा इसी रास्ते से गुजरता है। ईरान इस क्षेत्र को अपनी रणनीतिक सुरक्षा का हिस्सा मानता है, जबकि अमेरिका इसे अंतरराष्ट्रीय समुद्री मार्ग बताते हुए निर्बाध आवाजाही बनाए रखने की वकालत करता है। ऐसे में दोनों देशों के बीच बढ़ता तनाव वैश्विक तेल बाजार और ऊर्जा आपूर्ति पर भी असर डाल सकता है।

  • रियलिटी शो में रणनीति वाली चिट पर विवाद, धीरज धूपर ने मांगी माफी, रितेश देशमुख बोले- दोबारा हुई गलती तो होगी कार्रवाई

    रियलिटी शो में रणनीति वाली चिट पर विवाद, धीरज धूपर ने मांगी माफी, रितेश देशमुख बोले- दोबारा हुई गलती तो होगी कार्रवाई

    नई दिल्ली । रियलिटी शो ‘लॉक अप: सच या सजा’ के हालिया एपिसोड में अभिनेता धीरज धूपर एक विवाद के कारण सुर्खियों में आ गए। शो के होस्ट रितेश देशमुख ने उन पर और उनके परिवार पर शो के नियमों का उल्लंघन करने का आरोप लगाया। रितेश ने खुलासा किया कि धीरज के परिवार की ओर से कथित तौर पर गेम से जुड़ी रणनीति वाले हस्तलिखित नोट शो के अंदर भेजने की कोशिश की गई थी। इस घटना को शो के नियमों के विरुद्ध बताते हुए उन्होंने धीरज को कड़ी चेतावनी दी और भविष्य में ऐसी किसी भी घटना पर सख्त कार्रवाई की बात कही।

    हालिया एपिसोड में रितेश देशमुख ने इस मुद्दे को खुलकर उठाया और धीरज धूपर से सीधे सवाल किए। उन्होंने बताया कि शो की टीम को कई बार ऐसी जानकारी मिली कि धीरज के परिवार की ओर से छोटे-छोटे हस्तलिखित नोट्स शो के भीतर पहुंचाने का प्रयास किया गया। इन नोट्स में गेम को बेहतर ढंग से खेलने और आगे बढ़ने से जुड़ी रणनीतियां लिखी गई थीं। रितेश ने स्पष्ट किया कि इस तरह की बाहरी सहायता शो की निष्पक्षता के खिलाफ है और किसी भी प्रतियोगी के लिए स्वीकार्य नहीं हो सकती।

    रितेश देशमुख ने बातचीत के दौरान यह भी बताया कि पहले भी एक अवसर पर धीरज के बेटे को मानवीय आधार पर उनसे मिलने की अनुमति दी गई थी। उस दौरान भी कथित रूप से परिवार की ओर से एक चिट भेजने की कोशिश हुई थी। हालांकि उस समय शो की टीम ने मामले को अधिक तूल नहीं दिया, लेकिन हाल में दोबारा ऐसी कोशिश सामने आने के बाद इसे गंभीरता से लिया गया। उन्होंने कहा कि किसी भी प्रतियोगी को अपने खेल के लिए बाहरी सलाह या रणनीति लेना शो के नियमों का स्पष्ट उल्लंघन है।

    होस्ट ने धीरज को अंतिम चेतावनी देते हुए कहा कि सभी प्रतिभागियों को अपनी समझ, क्षमता और निर्णय के आधार पर खेलना चाहिए। यदि भविष्य में इस तरह की कोई भी घटना दोहराई जाती है तो शो के नियमों के अनुसार कड़ी कार्रवाई की जाएगी। उन्होंने यह भी कहा कि प्रतियोगिता की निष्पक्षता बनाए रखना शो की सबसे बड़ी प्राथमिकता है और किसी भी प्रकार का पक्षपात या बाहरी हस्तक्षेप स्वीकार नहीं किया जाएगा।

    पूरा मामला सामने आने के बाद धीरज धूपर ने अपनी प्रतिक्रिया देते हुए कहा कि उन्हें इस कथित घटना की कोई जानकारी नहीं थी। उन्होंने स्पष्ट किया कि उन्होंने कभी भी अपने परिवार से किसी प्रकार की बाहरी मदद या रणनीति भेजने के लिए नहीं कहा। अभिनेता ने रितेश देशमुख से माफी मांगते हुए भरोसा दिलाया कि वह अपने दम पर खेलना चाहते हैं और प्रतियोगिता को पूरी ईमानदारी के साथ आगे बढ़ाएंगे।

    धीरज ने कैमरे के माध्यम से अपने परिवार से भी अपील की कि भविष्य में इस तरह की कोई कोशिश न करें। उन्होंने कहा कि वह अपनी क्षमता और प्रदर्शन के आधार पर शो में आगे बढ़ना चाहते हैं और उन्हें किसी बाहरी सहायता की आवश्यकता नहीं है। इस घटनाक्रम के बाद शो में नियमों के पालन और निष्पक्ष प्रतियोगिता को लेकर चर्चा तेज हो गई है। दर्शकों की नजर अब इस बात पर रहेगी कि आने वाले एपिसोड में यह विवाद किस तरह आगे बढ़ता है और धीरज धूपर अपने प्रदर्शन से इस विवाद के बाद कैसी वापसी करते हैं।

  • सपा सांसद दरोगा प्रसाद सरोज पर जमीन कब्जाने के आरोप, ग्रामीणों ने दी आत्मदाह करने की चेतावनी

    सपा सांसद दरोगा प्रसाद सरोज पर जमीन कब्जाने के आरोप, ग्रामीणों ने दी आत्मदाह करने की चेतावनी


    आजमगढ़। जिले के लालगंज तहसील क्षेत्र स्थित मोहनपुर पटवास गांव में सार्वजनिक तालाब और ग्रामीणों की जमीन पर कथित अवैध कब्जे को लेकर विवाद गहरा गया है। गांव के कई लोगों ने मंडलायुक्त को शिकायत पत्र सौंपते हुए समाजवादी पार्टी के सांसद दरोगा प्रसाद सरोज और उनके परिजनों पर गंभीर आरोप लगाए हैं। वहीं, सांसद ने सभी आरोपों को पूरी तरह निराधार बताते हुए किसी भी स्तर की जांच कराने की बात कही है।

    ग्रामीणों की ओर से शिकायत करने वाली गीता सरोज ने चेतावनी दी है कि यदि उन्हें न्याय नहीं मिला तो वह मुख्यमंत्री आवास के सामने आत्मदाह करने के लिए मजबूर होंगी।

    तालाब और ग्रामीणों की जमीन पर कब्जे का आरोप
    शिकायतकर्ताओं का आरोप है कि गांव की आराजी संख्या 137, जिसका क्षेत्रफल 7.798 हेक्टेयर है और जो राजस्व अभिलेखों में तालाब के रूप में दर्ज है, उस पर फार्म हाउस बना दिया गया है। उनका कहना है कि वहां खेती और मछली पालन किया जा रहा है, जबकि पहले इस तालाब का उपयोग ग्रामीण और पशु करते थे। गीता सरोज का आरोप है कि सांसद ने करीब 50 बीघे तालाब क्षेत्र के साथ-साथ आसपास के गरीब ग्रामीणों की जमीनों पर भी कब्जा कर लिया है।

    धमकी और अवैध गतिविधियों के भी आरोप
    शिकायत में यह भी दावा किया गया है कि फार्म हाउस के चारों ओर बिजली के तार लगाए गए हैं, कई बोरिंग कराई गई हैं तथा वहां अवैध मछली पालन और पेड़ों की कटाई की जा रही है। ग्रामीणों ने सांसद के बेटे मनोज सरोज, प्रमोद सरोज और पोते अभिषेक सरोज पर शराब के नशे में हंगामा करने और लोगों को धमकाने का भी आरोप लगाया है।

    गीता सरोज का कहना है कि उनकी एक बीघा जमीन पर भी कब्जा कर पोखरा पाट दिया गया। उन्होंने एसडीएम, तहसीलदार समेत अन्य अधिकारियों से कई बार शिकायत की, लेकिन अब तक कोई प्रभावी कार्रवाई नहीं हुई।

    सांसद ने आरोपों को बताया बेबुनियाद
    सांसद दरोगा प्रसाद सरोज ने सभी आरोपों से इनकार किया है। उनका कहना है कि उन्होंने संबंधित जमीन का बैनामा शारदा विश्वकर्मा से करीब 3.5 से 4 बीघा कराया था और प्रशासन द्वारा कराई गई पैमाइश में उनकी भूमि सही पाई गई है। उन्होंने बताया कि अन्य जमीनें भी उन्होंने संबंधित मालिकों से नियमानुसार खरीदी हैं और किसी की भूमि पर अवैध कब्जा नहीं किया है।

    सांसद ने अपने परिजनों पर लगाए गए मारपीट और धमकी के आरोपों को भी झूठा बताया। उन्होंने कहा कि जिला प्रशासन, मंडलायुक्त या तहसील प्रशासन निष्पक्ष जांच कराए। उनका दावा है कि यदि एक इंच भी अवैध कब्जा साबित होता है तो वे लाखों रुपये का जुर्माना भरने के लिए तैयार हैं।

  • उत्तराखंड समेत पूर्वोत्तर के राज्यों में आज भारी बारिश की चेतावनी…. अन्य हिस्सों में कमजोर पड़ा मॉनसून

    उत्तराखंड समेत पूर्वोत्तर के राज्यों में आज भारी बारिश की चेतावनी…. अन्य हिस्सों में कमजोर पड़ा मॉनसून


    नई दिल्ली।
    देश के कई हिस्सों में मॉनसून (Monsoon) की गतिविधियां अभी कमजोर हैं, लेकिन उत्तराखंड, हिमाचल, पश्चिम बंगाल, ओडिशा और पूर्वोत्तर राज्यों में भारी बारिश (Heavy rain) की चेतावनी है. वहीं, राजस्थान में धूल भरी तेज आंधी चलने की संभावना है. भारतीय मौसम विभाग (IMD) के अनुसार, उत्तराखंड (Uttarakhand) में भारी से बहुत भारी बारिश का रेड अलर्ट जारी है।

    भारतीय मौसम विभाग (IMD) के मुताबिक, अगले 2-3 दिनों में पूर्वोत्तर भारत, पश्चिम बंगाल और बिहार में कहीं-कहीं भारी से बहुत भारी बारिश हो सकती है. जबकि पूर्वी उत्तर प्रदेश में 4-5 दिन बाद बारिश होने की संभावना है. हालांकि, अगले 5-6 दिनों में उत्तर-पश्चिम, पश्चिम मध्य और दक्षिण प्रायद्वीपीय भारत में कमजोर मॉनसून और कम बारिश का अनुमान है।


    उत्तराखंड में बारिश का रेड अलर्ट

    उत्तराखंड में IMD ने भारी से बहुत भारी बारिश के लिए रेड अलर्ट जारी किया है. राज्य में बीते दिन भी बारिश के कारण कई जगहों पर भूस्खलन हुआ है. उत्तराखंड में भारी बारिश और भूस्खलन की वजह से 126 सड़कें बंद हैं, जिसमें दो नेशनल हाईवे भी शामिल हैं. यमुनोत्री राजमार्ग पर भी यातायात प्रभावित है. स्याना चट्टी में भूस्खलन के कारण ऋषिकेश-यमुनोत्री नेशनल हाईवे पर यातायात ठप हुआ है।


    राजस्थान में धूल भरी हवाएं

    मौसम विभाग (IMD) के अपने पूर्वानुमान ने बताया कि अगले 5-6 दिनों में पूर्वी राजस्थान में सूखा रहेगा. हालांकि, 13 से 15 जुलाई के बीच शेखावाटी, जयपुर और भरतपुर संभाग में हल्की बारिश हो सकती है. जबकि पश्चिमी राजस्थान में 30-40 किलोमीटर प्रति घंटे की रफ्तार से धूल भरी तेज हवाएं चलने और धूल भरी आंधी आने की चेतावनी है.


    पश्चिम बंगाल में भारी बारिश

    पश्चिम बंगाल में बीते दिन अच्छी बारिश दर्ज की गई है. कोचबिहार जिले के पुंडिबारी में सबसे ज्यादा 89 मिमी बारिश हुई. IMD ने 14 जुलाई तक राज्य के कई जिलों में भारी बारिश का अलर्ट जारी किया है. उप-हिमालयी इलाकों और दक्षिणी जिलों (बांकुरा, बर्दवान, नदिया, मुर्शिदाबाद आदि) में भारी बारिश की संभावना है।


    ओडिशा में चार दिन बारिश का अलर्ट

    ओडिशा में अगले चार दिन तक कई जिलों में गरज-चमक के साथ बारिश होने की संभावना है. सोमवार को बालासोर, भद्रक, केंद्रापड़ा, सुंदरगढ़, झारसुगुड़ा, बरगढ़, संबलपुर, केवझर, मयूरभंज, कालाहांडी, कंधमाल और रायगड़ा जिलों में भारी बारिश हो सकती है. IMD ने इन जिलों के लिए येलो अलर्ट जारी किया है. IMD के मुताबिक, इस मॉनसून सीजन में ओडिशा में अब तक 348.1 मिमी बारिश हो चुकी है, जो सामान्य से 8% ज्यादा है।


    दिल्ली और यूपी के मौसम की जानकारी

    राष्ट्रीय राजधानी दिल्ली में अधिकतम तापमान सामान्य से थोड़ा ऊपर दर्ज किया जा रहा है. मौसम विभाग (IMD) ने अगले 7 दिनों में तापमान में कोई बड़ा बदलाव नहीं होने का अनुमान लगाया है. दिल्ली में अधिकतम तापमान 35-36 डिग्री सेल्सियस और न्यूनतम तापमान 26-28 डिग्री सेल्सियस रह सकता है।

    वहीं, उत्तर प्रदेश में अगले 3-4 दिन बारिश की संभावना नहीं है.लखनऊ में आंशिक रूप से बादल छाए रहने के साथ साफ मौसम रहने की संभावना है. मौसम विभाग के मुताबिक, उत्तर प्रदेश में इस सीजन में अब तक मॉनसून सामान्य से 17% कम रहा है. 1 जून से 12 जुलाई तक 158.8 मिमी बारिश हुई, जबकि सामान्य 190.9 मिमी है।


    हिमाचल में भी हल्की से मध्यम बारिश

    हिमाचल प्रदेश में भी लगातार हल्की से मध्यम बारिश हो रही है. पिछले 24 घंटों में मंडी जिले के जोगिंदरनगर में सबसे ज्यादा 60 मिमी बारिश दर्ज की गई. वहीं, मनाली में 45 मिमी, सराहन में 38.5 मिमी, रोहड़ू में 25 मिमी और शिमला में 19 मिमी बारिश हुई है।

  • न्यूयॉर्क में AC पर 'बैन' का खतरा मंडराया, मेयर Mamdani ने दी चेतावनी, मचा हड़कंप

    न्यूयॉर्क में AC पर 'बैन' का खतरा मंडराया, मेयर Mamdani ने दी चेतावनी, मचा हड़कंप


    नई दिल्‍ली । New York इस समय इतिहास की सबसे भीषण गर्मी से जूझ रहा है. तापमान 100 डिग्री और हीट इंडेक्स 112 डिग्री तक पहुंचने का अनुमान है. इस बीच, शहर के नए मेयर ज़ोहरान मम्दानी (Zohran Mamdani) ने न्यू यॉर्कर्स के लिए एक बेहद जरूरी और कड़ा संदेश जारी किया है. यूरोप में हाल ही में आए AC नियमों के बाद अब न्यू यॉर्क का पावर ग्रिड भी खतरे में है. मेयर ने साफ कहा है कि अगर ग्रिड को बचाना है और लोगों की जान सुरक्षित रखनी है, तो AC चलाने के तरीकों में तुरंत बदलाव करना होगा.

    Europe का AC नियम और New York का संकट
    यूरोपियन कमीशन ने हाल ही में एक नया प्रस्ताव पेश किया है, जिसके तहत AC इंस्टॉल करने वालों को ग्राहकों को एनर्जी एफिशिएंसी की पूरी जानकारी देनी होगी. फ्रांस और स्पेन जैसे देशों में रिकॉर्ड गर्मी के कारण AC की बिक्री अचानक बहुत बढ़ गई है. अब ठीक वैसा ही संकट न्यू यॉर्क के सामने खड़ा हो गया है. न्यू यॉर्क का पावर ग्रिड इस समय शहर को ठंडा रखने के लिए अपनी क्षमता से ज्यादा काम कर रहा है.

    Mayor Mamdani का ’78 डिग्री रूल’
    मेयर ज़ोहरान मम्दानी ने अपने सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म X पर एक पोस्ट के जरिए लोगों से अपील की है. उन्होंने लिखा कि न्यू यॉर्क में बाहर बहुत गर्मी है और हमारा पावर ग्रिड ओवरटाइम काम कर रहा है. मेयर ने सभी नागरिकों से अपने AC को 78 डिग्री पर सेट करने की अपील की है. इसके साथ ही उन्होंने इस्तेमाल में न आने वाली लाइटों और इलेक्ट्रॉनिक्स को बंद करने और प्लग निकालने के लिए कहा है. मेयर का मानना है कि ग्रिड स्थिर रहेगा तो AC चलता रहेगा और लोगों की जान बचाई जा सकेगी.

    सरकार खुद कर रही है नियमों का पालन
    इस संकट से निपटने के लिए सिर्फ आम जनता ही नहीं, बल्कि खुद न्यू यॉर्क प्रशासन भी कड़े कदम उठा रहा है. मेयर ने बताया कि सभी सरकारी इमारतों में भी 78 डिग्री का नियम लागू कर दिया गया है. पीक ऑवर्स के दौरान सरकारी दफ्तरों की लाइटें डिम या पूरी तरह बंद की जा रही हैं. गैर-जरूरी उपकरणों को पावर डाउन किया जा रहा है. प्रशासन ने न्यू यॉर्क की प्राइवेट कंपनियों से भी अपील की है कि वे इस संकट में शहर का साथ दें और बिजली की खपत कम करें.

    112 डिग्री का टॉर्चर और हीट इमरजेंसी
    नेशनल वेदर सर्विस ने न्यू यॉर्क सिटी के लिए ‘एक्सट्रीम हीट वॉर्निंग’ जारी की है. मौसम वैज्ञानिकों के मुताबिक, यह पिछले एक दशक की सबसे खतरनाक हीटवेव हो सकती है. गर्मी का अहसास (Heat Index) 112 डिग्री तक जा सकता है. इसके लिए शहर में ‘हीट इमरजेंसी प्लान’ एक्टिव कर दिया गया है. प्रशासन ने उन लोगों के लिए कूलिंग सेंटर्स खोले हैं, जिनके घरों में AC की सुविधा नहीं है. बुजुर्गों, बच्चों और सांस के मरीजों को घरों के अंदर ही रहने की सलाह दी गई है.

    मेयर की कार्यशैली पर खड़े हुए सवाल
    एक तरफ जहां मेयर मम्दानी शहर को गर्मी से बचाने में जुटे हैं, वहीं दूसरी तरफ न्यू यॉर्क का बिजनेस माहौल गरमा गया है. दुनिया के सबसे अमीर कारोबारियों में शामिल जेफ बेजोस (Jeff Bezos) ने न्यू यॉर्क के स्कूल सिस्टम पर सवाल उठाए हैं, जिसके बाद मेयर के साथ उनकी बहस छिड़ गई है. शार्क टैंक के केविन ओ’लेरी ने भी बेजोस का समर्थन करते हुए न्यू यॉर्क को ‘कम्पलीट डिजास्टर’ करार दिया है. ब्लैकरॉक के लैरी फिंक ने भी चेतावनी दी है कि भारी टैक्स और खराब माहौल के कारण अमीर लोग न्यू यॉर्क छोड़ सकते हैं, जिससे शहर को बड़ा आर्थिक नुकसान होगा.

  • MP: दिग्विजय सिंह ने CM मोहन यादव को दी चेतावनी… बोले- अपने पास दर्जनभर विभाग रखोगे तो फंस जाओगे

    MP: दिग्विजय सिंह ने CM मोहन यादव को दी चेतावनी… बोले- अपने पास दर्जनभर विभाग रखोगे तो फंस जाओगे


    भोपाल।
    कांग्रेस (Congress) के वरिष्ठ नेता दिग्विजय सिंह (Senior leader Digvijaya Singh) ने मध्य प्रदेश (Madhya Pradesh) के सीएम मोहन यादव (CM Mohan Yadav) को चेतावनी दी है। उन्होंने कहा है कि उन्हें दर्जनभर विभाग अपने पास नहीं रखने चाहिए, नहीं तो किसी दिन फंस जाएंगे।

    उन्होंने शनिवार को मुख्यमंत्री यादव एक मिल मजदूर के बेटे हैं लेकिन वह अगर गड़बड़ी करेंगे तो उन्हें बख्शा भी नहीं जाएगा। कांग्रेस ने एक खबर का हवाला देते हुए मुख्यमंत्री यादव पर उज्जैन में कथित तौर पर जमीन घोटाले का आरोप लगाया है। पार्टी ने इसे ‘महाकाल’ की जमीन की लूट’ करार दिया था और मुख्यमंत्री यादव के इस्तीफे और आरोपों की न्यायिक जांच की मांग की है।

    इसी मुद्दे पर पत्रकारों से चर्चा के दौरान मध्यप्रदेश के पूर्व मुख्यमंत्री ने कहा, मोहन यादव जी, आपने 12-12 विभाग अपने पास रख रखे हैं। बहुत गलती कर रहे हो। फंस जाओगे। गलती करेगा अधिकारी, पैसा खाएगा अधिकारी और फंसोगे आप। मुख्यमंत्री मोहन यादव के पास वर्तमान में सामान्य प्रशासन, गृह, जेल, औद्योगिक नीति एवं निवेश प्रोत्साहन, जनसंपर्क, नर्मदा घाटी विकास, विमानन, खनिज साधन, लोक सेवा प्रबंधन, प्रवासी भारतीय, एवं ऐसे अन्य समस्त विभाग हैं जो किसी अन्य मंत्री को न सौंपा गया है।

    सिंह ने कहा कि वह भी 10 साल तक मध्य प्रदेश के मुख्यमंत्री रहे हैं लेकिन कभी उन पर कोई आरोप नहीं लगा। उन्होंने कहा कि मुख्यमंत्री बनने के बाद शिवराज सिंह चौहान (केंद्रीय कृषि मंत्री) ने एक-एक फाइल ढूंढी लेकिन उन्हें कुछ नहीं मिला। उन्होंने कहा, मोहन यादव जी आप भी उसकी जांच कर लें, मुझे कोई फर्क नहीं पड़ता। क्योंकि मेरे पास कोई विभाग ही नहीं था। कांग्रेस के वरिष्ठ नेता ने कहा कि वह इस पूरे मामले की जांच-पड़ताल कर रहे हैं ताकि पता चल सके कि इसमें इनकी कौन-कौन सी कंपनियां हैं और कौन-कौन लोग इनके इस कथित भूमि घोटाले में शामिल हैं।


    दिग्विजय सिंह बोले- हम बख्शेंगे नहीं

    उन्होंने आगे कहा,मैं तो मोहन यादव जी को राय-मशविरा देने के लिए आया हूं। ऐसा मत करो! आप एक मिल मजदूर के बेटे हो। मुख्यमंत्री बने हो, नाम कमाओ! पैसा जो कमा रहे हो न, जिसका हिसाब पता नहीं किस-किस को देना पड़ रहा है आपको। हमारी सहानुभूति है इस मामले में। दिग्विजय सिंह ने कहा, मुख्यमंत्री पर यदि आरोप लगते हैं तो हम लोग आपको बख्शेंगे नहीं।

    उन्होंने कहा, यह मत समझना कि हमको आप खरीद लोगे। हम कोई बिकाऊ माल नहीं हैं, हम टिकाऊ माल हैं। बिकाऊ माल जो था, गया भाजपा में। ये सब कांग्रेसी जो यहां बैठे हैं, सब टिकाऊ माल हैं। लड़ाई लड़ने के लिए हम तैयार हैं और लड़ाई लड़ेंगे।