Tag: water conservation india

  • भोपाल में बड़ी समीक्षा बैठक: जल जीवन मिशन को 2028 तक पूरा करने का लक्ष्य, केंद्र से मिलेंगे 5000 करोड़

    भोपाल में बड़ी समीक्षा बैठक: जल जीवन मिशन को 2028 तक पूरा करने का लक्ष्य, केंद्र से मिलेंगे 5000 करोड़


    भोपाल । डॉ. मोहन यादव ने राजधानी भोपाल में लोक स्वास्थ्य यांत्रिकी विभाग की समीक्षा बैठक के दौरान अधिकारियों को सख्त निर्देश दिए कि प्रदेश में पेयजल आपूर्ति में किसी भी तरह की लापरवाही बर्दाश्त नहीं की जाएगी। उन्होंने कहा कि अब समय आ गया है कि जल प्रबंधन को केवल ट्यूबवेल आधारित व्यवस्था से आगे बढ़ाकर सतत जल स्रोतों की दिशा में मजबूत किया जाए।

    मुख्यमंत्री ने स्पष्ट किया कि राज्य में जल जीवन मिशन का लक्ष्य मार्च 2028 तक हर घर तक नल से जल पहुंचाना है। इसके लिए केंद्र सरकार से लगभग 5000 करोड़ रुपये की सहायता मिलने जा रही है, जिससे योजनाओं को नई रफ्तार मिलेगी।

    प्रदेश में 80% कार्य पूरा, 1.11 करोड़ परिवारों को मिला नल कनेक्शन
    बैठक में बताया गया कि मध्यप्रदेश में जल जीवन मिशन का लगभग 80 प्रतिशत कार्य पूर्ण हो चुका है। अब तक 1 करोड़ 11 लाख से अधिक परिवारों को घरेलू नल कनेक्शन दिए जा चुके हैं। राज्य के 14,200 गांवों को ‘हर घर जल’ घोषित किया गया है। दिसंबर 2023 से अब तक 16.50 लाख नए नल कनेक्शन जोड़े गए हैं, जबकि 15,238 नए नलकूप और हैंडपंप स्थापित किए गए हैं। उज्जैन संभाग सहित 11 जिलों में 100 प्रतिशत कार्य पूरा होने की उपलब्धि भी दर्ज की गई है।

    सीएम का सख्त संदेश: “सिर्फ आंकड़ों में नहीं, जमीन पर दिखे काम”
    मुख्यमंत्री ने अधिकारियों को चेताया कि योजनाओं की प्रगति केवल रिपोर्टों तक सीमित नहीं रहनी चाहिए। उन्होंने कहा—“हवा में मत रहिए, जमीन पर काम दिखना चाहिए।” उन्होंने विशेष रूप से सीवेज प्रबंधन पर ध्यान देने की बात कही और इंदौर में गंदगी की स्थिति को लेकर असंतोष भी जताया। उन्होंने कहा कि अब राज्य में जल संरक्षण के लिए तालाब, सरोवर निर्माण और जल रिचार्जिंग को प्राथमिकता दी जाएगी, ताकि भूजल स्तर स्थिर रहे और ट्यूबवेल पर निर्भरता घटे।

    नई योजना: जल निगम का नाम बदलेगा, सीवेज पर भी फोकस
    सरकार ने निर्णय लिया है कि मध्यप्रदेश जल निगम का नाम बदलकर “जल एवं सीवेज प्रबंधन निगम” किया जाएगा। इससे स्पष्ट होगा कि संस्था अब केवल पेयजल नहीं, बल्कि सीवेज प्रबंधन पर भी समान रूप से काम करेगी। इसके साथ ही इंदौर और इंदौर जैसे मेट्रोपॉलिटन क्षेत्रों के लिए सतही जल प्रबंधन योजना तैयार करने के निर्देश दिए गए हैं।

    नवाचार और जनभागीदारी पर जोर
    बैठक में बताया गया कि राज्य ने बोरवेल सुरक्षा के लिए कानून बनाकर देश में उदाहरण पेश किया है। साथ ही सौर और पवन ऊर्जा आधारित जल परियोजनाओं को भी बढ़ावा दिया जा रहा है। जल संरक्षण में बेहतर प्रदर्शन करने वाले गांवों और पंचायतों को सम्मानित किया जाएगा। अक्टूबर 2026 में राज्य स्तरीय जल उत्सव आयोजित करने की योजना भी तैयार है।

    वैज्ञानिक सहयोग और तकनीकी सुधार
    जल प्रबंधन में वैज्ञानिक सहयोग के लिए MAPCAST की विशेषज्ञता ली जाएगी। साथ ही 155 प्रयोगशालाओं को NABL प्रमाणन मिल चुका है, जिससे पानी की गुणवत्ता जांच प्रणाली मजबूत हुई है।

    प्रदेश सरकार का फोकस अब केवल जल आपूर्ति तक सीमित नहीं है, बल्कि दीर्घकालिक जल संरक्षण, सीवेज प्रबंधन और शहरी जल योजना पर भी है। केंद्र और राज्य के संयुक्त प्रयासों से जल जीवन मिशन को तय समय सीमा में पूरा करने की दिशा में तेजी से काम चल रहा है।

  • इंदौर में पानी बचाने की मुहिम तेज: कमिश्नर ने दिए सख्त निर्देश, टोटियां न लगाने पर भी कार्रवाई

    इंदौर में पानी बचाने की मुहिम तेज: कमिश्नर ने दिए सख्त निर्देश, टोटियां न लगाने पर भी कार्रवाई


    मध्यप्रदेश। इंदौर में बढ़ते जल संकट को देखते हुए नगर निगम ने सख्त रुख अपना लिया है। नगर निगम कमिश्नर क्षितिज सिंघल ने अधिकारियों को निर्देश दिए हैं कि शहर में किसी भी स्थिति में पानी की बर्बादी बर्दाश्त नहीं की जाएगी। अब फालतू पानी बहाने वालों को पहले समझाइश दी जाएगी और यदि इसके बाद भी सुधार नहीं होता है तो उन पर चालानी कार्रवाई की जाएगी।

    कमिश्नर ने सभी जोन के स्वास्थ्य अधिकारियों, प्रभारी मुख्य स्वच्छता निरीक्षकों और सहायक निरीक्षकों को नियमित रूप से अपने क्षेत्रों का निरीक्षण करने के निर्देश दिए हैं। खास तौर पर उन स्थानों पर ध्यान देने को कहा गया है जहां जल संयोजनों में टोटियां नहीं लगी हैं और पानी अनियंत्रित रूप से बहता रहता है।

    नगर निगम ने स्पष्ट किया है कि ऐसे मामलों में पहले नागरिकों को जागरूक किया जाएगा और उन्हें पानी की बचत के लिए प्रेरित किया जाएगा। लेकिन बार-बार चेतावनी के बावजूद लापरवाही पाए जाने पर संबंधित लोगों पर नियमानुसार जुर्माना लगाया जाएगा। साथ ही रोजाना की गई कार्रवाई की रिपोर्ट अपर आयुक्त को भेजने के निर्देश भी दिए गए हैं।

    अधिकारियों के अनुसार, शहर में निरीक्षण के दौरान यह सामने आया है कि कई इलाकों में नलों में टोटियां नहीं होने के कारण पानी सप्लाई के समय बड़ी मात्रा में पानी बर्बाद हो रहा है। इससे न केवल जल संकट और गहराता है, बल्कि कई जगह जलभराव और गंदगी की समस्या भी उत्पन्न होती है।

    नगर निगम ने नागरिकों से अपील की है कि वे पीने के पानी का उपयोग केवल आवश्यक कार्यों के लिए करें। गाड़ियों की धुलाई, आंगन और परिसर की सफाई जैसे कार्यों में पानी की बर्बादी से बचने की सलाह दी गई है।

    कमिश्नर ने कहा है कि जल संरक्षण आज की सबसे बड़ी जरूरत है और हर नागरिक का कर्तव्य है कि वह पानी की एक-एक बूंद का महत्व समझे और उसे बचाने में योगदान दे।

    गौरतलब है कि इंदौर में पिछले कुछ समय से जल संकट को लेकर लोगों में असंतोष देखने को मिला है। कई इलाकों में पानी की किल्लत को लेकर प्रदर्शन और चक्काजाम जैसी स्थितियां भी बन चुकी हैं। ऐसे में नगर निगम अब आपूर्ति प्रबंधन के साथ-साथ जल संरक्षण पर भी विशेष ध्यान दे रहा है।

  • बूंद-बूंद से बनी मिसाल: गोचा नदी स्टॉप डैम में लौटी जलधारा, ग्रामीणों ने रचा इतिहास

    बूंद-बूंद से बनी मिसाल: गोचा नदी स्टॉप डैम में लौटी जलधारा, ग्रामीणों ने रचा इतिहास


    भोपाल । मध्यप्रदेश में जल संरक्षण की दिशा में चल रहा जल गंगा संवर्धन अभियान अब एक जनआंदोलन का रूप लेता नजर आ रहा है। Mohan Yadav के नेतृत्व में 19 मार्च से 30 जून 2026 तक संचालित इस अभियान ने प्रदेश के गांवों में जल संरचनाओं के पुनर्जीवन को नई दिशा दी है। इसी कड़ी में Guna जिले के राघौगढ़ जनपद अंतर्गत ग्राम पंचायत मोररवास में एक प्रेरणादायक उदाहरण सामने आया है, जहां जनसहभागिता ने असंभव को संभव कर दिखाया।

    मोररवास गांव के पास बहने वाली गोचा नदी पर बना स्टॉप डैम लंबे समय से अपनी उपयोगिता खो चुका था। वर्षा का पानी यहां रुकने के बजाय बहकर निकल जाता था, जिससे आसपास के ग्रामीणों और पशुधन को पानी का लाभ नहीं मिल पाता था। जल संकट धीरे-धीरे गंभीर होता जा रहा था और यह डैम केवल एक सूखी संरचना बनकर रह गया था। लेकिन ग्रामीणों ने हार नहीं मानी और सामूहिक प्रयासों से इस स्थिति को बदलने का संकल्प लिया।

    स्थानीय ग्रामीणों, जनप्रतिनिधियों और स्वयंसेवी संस्थाओं के सहयोग से महज 50 हजार रुपये की जनसहयोग राशि एकत्रित की गई। 6 से 11 अप्रैल के बीच बोरी बंधान का कार्य पूरा किया गया। यह छोटा सा प्रयास बड़ा बदलाव लेकर आया। अब स्टॉप डैम में पानी का ठहराव बढ़ गया है और जल संग्रहण की स्थिति में उल्लेखनीय सुधार देखने को मिला है। जहां पहले सूखा नजर आता था, वहीं अब पानी की सतह स्पष्ट रूप से दिखाई देने लगी है।

    इस पूरे अभियान की सबसे खास बात रही ग्रामीणों की सक्रिय भागीदारी। गांव के लोगों ने श्रमदान कर न केवल इस कार्य को पूरा किया, बल्कि जल संरक्षण के प्रति अपनी जिम्मेदारी भी निभाई। यह पहल केवल एक निर्माण कार्य नहीं, बल्कि जागरूकता और सामूहिक जिम्मेदारी का प्रतीक बन गई है। हर व्यक्ति ने इसमें अपनी भूमिका निभाई और जल की हर बूंद को बचाने का संदेश दिया।

    इस प्रयास का सीधा लाभ अब पशुधन और वन्य जीवों को भी मिल रहा है। पहले जहां पानी के अभाव में मवेशियों को दूर-दूर तक भटकना पड़ता था, वहीं अब उन्हें स्थानीय स्तर पर ही पर्याप्त पानी उपलब्ध हो रहा है। इससे न केवल ग्रामीण जीवन आसान हुआ है, बल्कि पर्यावरण संतुलन को भी मजबूती मिली है।

    गोचा नदी स्टॉप डैम का यह सफल पुनर्जीवन पूरे प्रदेश के लिए एक प्रेरणादायक मॉडल बनकर उभरा है। यह उदाहरण बताता है कि यदि जनसहभागिता, सकारात्मक सोच और सामूहिक प्रयास हों, तो जल संकट जैसी बड़ी चुनौती का भी समाधान संभव है। जल गंगा संवर्धन अभियान के माध्यम से यह संदेश साफ है कि जब समाज और शासन मिलकर काम करते हैं, तो बदलाव निश्चित होता है।

  • विंध्य के विकास को मिलेगी नई गति उपाध्यक्ष बने डॉ पटेल को उप मुख्यमंत्री का आशीर्वाद

    विंध्य के विकास को मिलेगी नई गति उपाध्यक्ष बने डॉ पटेल को उप मुख्यमंत्री का आशीर्वाद


    भोपाल । मध्य प्रदेश की राजधानी भोपाल में प्रशासनिक और विकासात्मक गतिविधियों के बीच एक महत्वपूर्ण मुलाकात चर्चा में रही जब उप मुख्यमंत्री राजेन्द्र शुक्ल से विंध्य विकास प्राधिकरण के नवनियुक्त उपाध्यक्ष डॉ. अजय सिंह पटेल ने सौजन्य भेंट की

    मंत्रालय में हुई इस मुलाकात के दौरान उप मुख्यमंत्री ने डॉ पटेल को उनके नए दायित्व के लिए आत्मीय बधाई और शुभकामनाएं दी इस अवसर पर उन्होंने कहा कि विंध्य क्षेत्र के विकास के लिए यह नियुक्ति महत्वपूर्ण साबित होगी और उनसे क्षेत्र के सर्वांगीण विकास की अपेक्षा है

    उप मुख्यमंत्री राजेन्द्र शुक्ल ने डॉ पटेल के उज्ज्वल कार्यकाल की कामना करते हुए विश्वास जताया कि वे अपने अनुभव और नेतृत्व क्षमता के बल पर विंध्य क्षेत्र में विकास कार्यों को नई दिशा देंगे उन्होंने यह भी कहा कि सरकार का उद्देश्य क्षेत्रीय असंतुलन को दूर करना और हर क्षेत्र को समान रूप से विकसित करना है जिसमें विंध्य अंचल की भूमिका बेहद अहम है

    डॉ अजय सिंह पटेल ने भी इस अवसर पर उप मुख्यमंत्री का आभार व्यक्त किया और कहा कि उन्हें जो जिम्मेदारी सौंपी गई है उसे वे पूरी निष्ठा और ईमानदारी के साथ निभाएंगे उन्होंने विंध्य क्षेत्र के विकास को अपनी प्राथमिकता बताते हुए कहा कि बुनियादी ढांचे शिक्षा स्वास्थ्य और रोजगार के क्षेत्रों में ठोस काम किया जाएगा

    विंध्य विकास प्राधिकरण क्षेत्र के विकास के लिए बनाई गई एक महत्वपूर्ण संस्था है जिसका उद्देश्य विंध्य अंचल में बुनियादी सुविधाओं का विस्तार और विकास योजनाओं को गति देना है इस संस्था के माध्यम से क्षेत्र में सड़कों जल संसाधनों शिक्षा और स्वास्थ्य सेवाओं को मजबूत करने के लिए योजनाएं लागू की जाती हैं

    इस मुलाकात को विंध्य क्षेत्र के विकास के लिहाज से एक सकारात्मक संकेत माना जा रहा है जहां सरकार और प्राधिकरण मिलकर क्षेत्र को नई दिशा देने की कोशिश करेंगे आने वाले समय में यह देखना महत्वपूर्ण होगा कि इस नई जिम्मेदारी के साथ विंध्य क्षेत्र में विकास की रफ्तार किस तरह आगे बढ़ती है

  • जल गंगा संवर्धन अभियान से शहडोल में जल क्रांति ,पुराने तालाब और स्रोतों को मिल रहा नया जीवन

    जल गंगा संवर्धन अभियान से शहडोल में जल क्रांति ,पुराने तालाब और स्रोतों को मिल रहा नया जीवन


    भोपाल । मध्य प्रदेश के शहडोल जिले में जल गंगा संवर्धन अभियान एक बड़े जनआंदोलन के रूप में उभरता नजर आ रहा है मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव के नेतृत्व में शुरू इस पहल का उद्देश्य केवल जल संरक्षण तक सीमित नहीं है बल्कि लोगों में जल के महत्व को लेकर जागरूकता बढ़ाना भी है यही कारण है कि यह अभियान अब प्रशासनिक कार्यक्रम से आगे बढ़कर जनभागीदारी का उदाहरण बन चुका है

    जिले में इस अभियान के तहत पुराने जल स्रोतों को पुनर्जीवित करने पर विशेष जोर दिया जा रहा है वर्षों से उपेक्षित पड़े तालाबों कुओं और जल संरचनाओं की साफ सफाई और जीर्णोद्धार किया जा रहा है ताकि वर्षा जल का बेहतर संचयन हो सके और भूजल स्तर में सुधार आए प्रशासन के अनुसार यह पहल आने वाले समय में जल संकट को कम करने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाएगी

    कलेक्टर डॉ केदार सिंह और जिला पंचायत के मुख्य कार्यपालन अधिकारी शिवम प्रजापति के निर्देशन में जिले की ग्राम पंचायतों और नगरीय निकायों में बड़े पैमाने पर काम चल रहा है जल गंगा अभियान के तहत तालाबों की सफाई शोक पिट निर्माण रेन वाटर हार्वेस्टिंग और अन्य जल संरक्षण गतिविधियों को तेजी से पूरा किया जा रहा है

    आंकड़ों पर नजर डालें तो ग्रामीण विकास विभाग द्वारा जिले में 5613 कार्य स्वीकृत किए गए हैं जिनमें से 1006 कार्य पूरे हो चुके हैं जबकि 2834 कार्य अभी प्रगति पर हैं खेत तालाब निर्माण के तहत 3217 कार्य स्वीकृत हुए हैं जिनमें 722 पूर्ण और 1902 प्रगतिरत हैं ब्यौहारी बुढार गोहपारू जयसिंहनगर और सोहागपुर जैसे क्षेत्रों में भी बड़े स्तर पर काम हो रहा है जिससे ग्रामीण इलाकों में जल उपलब्धता बेहतर होने की उम्मीद है

    इसके अलावा डगवेल रिचार्जिंग अमृत सरोवर जल संरक्षण और वाटरशेड से जुड़े कई प्रोजेक्ट भी तेजी से आगे बढ़ रहे हैं जल संरचनाओं के जीर्णोद्धार के 105 कार्यों में से 53 पूरे हो चुके हैं जो इस अभियान की गति को दर्शाते हैं

    नगरीय निकायों में भी जल संरक्षण को लेकर विशेष पहल की जा रही है जहां जल ग्रहण संरचनाओं का निर्माण नाले नालियों की सफाई और सौंदर्यीकरण रेन वाटर हार्वेस्टिंग और प्याऊ की स्थापना जैसे कार्य पूरे किए जा चुके हैं यह प्रयास न केवल जल संरक्षण में मदद करेंगे बल्कि शहरी क्षेत्रों में जल प्रबंधन को भी मजबूत बनाएंगे

    उद्यानिकी विभाग द्वारा फलदार पौधों का रोपण और सूक्ष्म सिंचाई के विस्तार पर काम किया जा रहा है वहीं जन अभियान परिषद द्वारा जागरूकता कार्यक्रमों के माध्यम से लोगों को इस अभियान से जोड़ा जा रहा है प्रभात फेरियां जल चौपाल कलश यात्राएं और वृक्ष पूजन जैसे कार्यक्रमों ने इस पहल को सामाजिक आंदोलन का रूप दे दिया है

    कुल मिलाकर शहडोल में चल रहा यह अभियान एक सकारात्मक बदलाव की ओर इशारा करता है जहां प्रशासन और जनता मिलकर जल संरक्षण की दिशा में काम कर रहे हैं यदि इसी गति से प्रयास जारी रहे तो आने वाले समय में यह क्षेत्र जल संकट से काफी हद तक उबर सकता है और अन्य जिलों के लिए भी एक मिसाल बन सकता है