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  • बड़वाह की बिजली लाइन में फॉल्ट का असर इंदौर की जलापूर्ति पर नर्मदा परियोजना के सभी पंप बंद

    बड़वाह की बिजली लाइन में फॉल्ट का असर इंदौर की जलापूर्ति पर नर्मदा परियोजना के सभी पंप बंद


    इंदौर । इंदौर में गुरुवार को कई क्षेत्रों के लोगों को पानी की सप्लाई में परेशानी का सामना करना पड़ सकता है। बड़वाह जलूद क्षेत्र में विद्युत आपूर्ति बाधित होने के कारण नर्मदा जल परियोजना के सभी प्रमुख पंप बंद हो गए हैं। इसका सीधा असर शहर की जलापूर्ति व्यवस्था पर पड़ा है और कई इलाकों में कम दबाव से पानी पहुंचने की संभावना जताई गई है।

    जानकारी के अनुसार 132 केवी बड़वाह विद्युत लाइन में तकनीकी खराबी आने के कारण नर्मदा परियोजना के फेज एक फेज दो और फेज तीन के सभी पंप अचानक बंद हो गए। इन पंपों के बंद होने से नर्मदा का पानी शहर की विभिन्न जल टंकियों तक नहीं पहुंच सका जिससे टंकियों का भराव प्रभावित हुआ है। इसी वजह से गुरुवार को होने वाली नियमित जलापूर्ति पर असर पड़ने की आशंका है।

    नगर निगम प्रशासन ने स्थिति को गंभीरता से लेते हुए तत्काल बिजली विभाग के अधिकारियों से संपर्क किया है। नगर निगम आयुक्त क्षितिज सिंघल ने बड़वाह क्षेत्र के मध्य प्रदेश विद्युत मंडल के अधिकारियों से चर्चा कर बिजली आपूर्ति जल्द से जल्द बहाल करने और तकनीकी खराबी दूर करने के निर्देश दिए हैं ताकि जलापूर्ति व्यवस्था सामान्य की जा सके।

    नगर निगम ने नागरिकों से अपील की है कि पानी का उपयोग आवश्यकता के अनुसार ही करें और अनावश्यक रूप से पानी की बर्बादी से बचें। जब तक बिजली आपूर्ति पूरी तरह बहाल नहीं हो जाती तब तक शहर के कुछ हिस्सों में पानी कम दबाव से पहुंच सकता है या निर्धारित समय से देरी भी हो सकती है।

    बिजली आपूर्ति सामान्य होते ही नर्मदा परियोजना के पंप दोबारा शुरू किए जाएंगे और जल टंकियों को भरने का कार्य तेजी से किया जाएगा। इसके बाद जल वितरण व्यवस्था भी धीरे धीरे सामान्य हो जाएगी। प्रशासन का कहना है कि तकनीकी समस्या दूर करने के लिए संबंधित विभाग लगातार काम कर रहा है ताकि लोगों को कम से कम असुविधा हो।

  • भोपाल को बड़ी राहत! कोलार पाइपलाइन सुधार के बाद 75 क्षेत्रों में जलापूर्ति शुरू

    भोपाल को बड़ी राहत! कोलार पाइपलाइन सुधार के बाद 75 क्षेत्रों में जलापूर्ति शुरू


    नई दिल्ली। नगर निगम आयुक्त संस्कृति जैन ने बताया कि बांसखेड़ी क्षेत्र में क्षतिग्रस्त कोलार लाइन की मरम्मत गुरुवार रात पूरी कर ली गई थी। इसके बाद रात में ही पंप चालू कर दिए गए और शुक्रवार सुबह 6 बजे से जलापूर्ति शुरू कर दी गई। निगम के अधीक्षण यंत्री उदित गर्ग के अनुसार चार इमली, शिवाजी नगर, तुलसी नगर, अरेरा कॉलोनी, ई-1, ई-5, ई-6, पीजीबीटी, नारियलखेड़ा, टीला जमालपुरा, जवाहर चौक और इब्राहिमपुरा सहित कई इलाकों में पानी पहुंचाया जा चुका है। शेष क्षेत्रों में चरणबद्ध तरीके से सप्लाई की जा रही है।

    टंकियां नहीं भरीं, सीधे घरों तक पहुंचाया पानी
    नगर निगम ने इस बार लोगों को तत्काल राहत देने के लिए सामान्य प्रक्रिया में बदलाव किया। आमतौर पर फिल्टर प्लांट से पहले जलाशयों और टंकियों को भरा जाता है, लेकिन इस बार सीधे फिल्टर प्लांट से सप्लाई शुरू कर दी गई। भोपाल में कोलार, नर्मदा, केरवा और बड़ा तालाब परियोजनाओं की कुल 173 पानी की टंकियां हैं। इनमें से कोलार परियोजना से जुड़ी 68 टंकियां सप्लाई पूरी होने के बाद भरी जाएंगी ताकि शनिवार से नियमित जलप्रदाय व्यवस्था सुचारू रूप से संचालित की जा सके।

    तीन दिन तक परेशान रही 40 फीसदी आबादी
    कोलार परियोजना की 1650 मिमी व्यास वाली ग्रेविटी पाइपलाइन में लीकेज होने के कारण पिछले तीन दिनों से शहर की लगभग 40 प्रतिशत आबादी प्रभावित थी। 75 से अधिक इलाकों में पानी की सप्लाई बंद रहने से लोगों को भारी परेशानी का सामना करना पड़ा। नगर निगम ने टैंकरों के जरिए जलापूर्ति की कोशिश की, लेकिन बढ़ती मांग के सामने यह व्यवस्था पर्याप्त साबित नहीं हुई। कई रहवासियों ने आरोप लगाया कि निजी टैंकर संचालकों ने 300 रुपए के टैंकर के लिए 1000 से 1200 रुपए तक वसूले।

    रातभर मौके पर रहीं कमिश्नर
    पाइपलाइन की मरम्मत के दौरान नगर निगम आयुक्त संस्कृति जैन स्वयं रातभर मौके पर मौजूद रहीं। उन्होंने कार्य की लगातार निगरानी की और अधिकारियों को निर्देश दिए कि रात में ही पंप चालू कर सुबह तक जलापूर्ति बहाल की जाए। प्रशासन की इसी सक्रियता के चलते शुक्रवार सुबह से पानी की सप्लाई दोबारा शुरू हो सकी।

    नर्मदा लाइन में भी लीकेज से नई चुनौती
    इधर कोलार लाइन की समस्या दूर होने के बीच शहर के कुछ हिस्सों में नर्मदा पाइपलाइन में भी लीकेज सामने आया है। अयोध्या बायपास पर सड़क निर्माण कार्य के दौरान कई स्थानों पर पाइपलाइन क्षतिग्रस्त हो गई। इसके कारण आसाराम तिराहे से रत्नागिरि तिराहे तक के क्षेत्रों में शुक्रवार को जलापूर्ति प्रभावित रहने की संभावना है। हालांकि कोलार लाइन की मरम्मत पूरी होने से शहर के अधिकांश प्रभावित इलाकों में राहत पहुंचनी शुरू हो गई है और शनिवार से जलापूर्ति पूरी तरह सामान्य होने की उम्मीद जताई जा रही है।

  • आसमान से बरस रही आग, जमीन पर बढ़ी मुश्किलें: गर्मी के साथ पानी और बिजली संकट ने बढ़ाई लोगों की परेशानी

    आसमान से बरस रही आग, जमीन पर बढ़ी मुश्किलें: गर्मी के साथ पानी और बिजली संकट ने बढ़ाई लोगों की परेशानी


    नई दिल्ली।देश के कई हिस्सों में पड़ रही भीषण गर्मी अब केवल मौसम की परेशानी नहीं रह गई है, बल्कि यह लोगों के दैनिक जीवन पर गहरा असर डालने लगी है। राजधानी सहित कई राज्यों में तापमान लगातार नए रिकॉर्ड छू रहा है और इसके साथ ही पानी तथा बिजली की बढ़ती समस्या ने आम लोगों की मुश्किलें और बढ़ा दी हैं। आसमान से बरसती आग और तपती सड़कों के बीच लोगों की दिनचर्या बुरी तरह प्रभावित होती दिखाई दे रही है। हालात ऐसे बन गए हैं कि कई क्षेत्रों में लोग राहत पाने के लिए संघर्ष करते नजर आ रहे हैं। गर्म हवाओं और तेज धूप ने शहरों से लेकर कस्बों तक लोगों की परेशानी को कई गुना बढ़ा दिया है।
    भीषण गर्मी के कारण पानी की खपत अचानक बढ़ी है, जिससे कई इलाकों में जल आपूर्ति पर दबाव साफ दिखाई देने लगा है। कुछ स्थानों पर लोगों को जरूरत के अनुसार पानी नहीं मिल पा रहा है, जिसके कारण लंबी कतारें और इंतजार की स्थिति बन रही है। सुबह से ही लोग पानी की व्यवस्था में जुट जाते हैं ताकि दिनभर की जरूरतें पूरी की जा सकें। लगातार बढ़ती गर्मी के बीच पानी की कमी ने लोगों की चिंता और बढ़ा दी है। कई परिवारों के लिए यह स्थिति रोजमर्रा की बड़ी चुनौती बन चुकी है।

    दूसरी तरफ बिजली की मांग में भी तेजी से बढ़ोतरी देखने को मिल रही है। एयर कंडीशनर, कूलर और अन्य उपकरणों के लगातार उपयोग से बिजली व्यवस्था पर दबाव बढ़ गया है। कई इलाकों में बिजली की अनियमित आपूर्ति लोगों की परेशानी का बड़ा कारण बन रही है। दिन के समय तेज गर्मी और रात में बिजली बाधित होने से लोगों की दिनचर्या और नींद दोनों प्रभावित हो रही हैं। बुजुर्गों, बच्चों और बीमार लोगों के लिए यह स्थिति और अधिक कठिन बनती जा रही है। लगातार गर्मी और बिजली की समस्या लोगों की सहनशक्ति की परीक्षा ले रही है।

    गर्मी का असर केवल शहरों तक सीमित नहीं है, बल्कि ग्रामीण क्षेत्रों में भी हालात चुनौतीपूर्ण होते जा रहे हैं। खेतों में काम करने वाले लोग तेज धूप के कारण लंबे समय तक बाहर नहीं रह पा रहे हैं। मजदूर वर्ग और रोजाना मेहनत करने वाले लोगों के लिए यह मौसम सबसे कठिन दौर साबित हो रहा है। सड़कों पर दोपहर के समय सामान्य दिनों की तुलना में काफी कम आवाजाही दिखाई दे रही है। लोग जरूरी काम होने पर ही घरों से बाहर निकलना पसंद कर रहे हैं।

    विशेषज्ञों का मानना है कि लगातार बढ़ता तापमान और बदलता मौसम भविष्य में और बड़ी चुनौतियां खड़ी कर सकता है। ऐसे हालात में स्वास्थ्य संबंधी सावधानी, पर्याप्त पानी का सेवन और धूप से बचाव बेहद जरूरी हो गया है। फिलहाल देश के कई हिस्सों में लोग गर्मी, पानी और बिजली की तिहरी चुनौती से जूझ रहे हैं और सभी की नजरें मौसम में राहत देने वाले बदलाव पर टिकी हुई हैं।

  • सिंधु जल संधि को लेकर वायरल दावों पर सच्चाई: क्या वाकई पाकिस्तान में पानी का संकट बढ़ा?

    सिंधु जल संधि को लेकर वायरल दावों पर सच्चाई: क्या वाकई पाकिस्तान में पानी का संकट बढ़ा?



    नई दिल्ली। हाल के दिनों में सोशल मीडिया और कुछ रिपोर्ट्स में यह दावा किया जा रहा है कि Indus Waters Treaty खत्म या स्थगित हो गई है, जिसके कारण पाकिस्तान में गंभीर जल संकट और कृषि संकट पैदा हो गया है। हालांकि, उपलब्ध आधिकारिक और ऐतिहासिक जानकारी के आधार पर यह दावा पूरी तरह सही नहीं पाया गया है।

    सिंधु जल संधि की वास्तविक स्थिति
    सिंधु जल संधि 1960 में भारत और पाकिस्तान के बीच विश्व बैंक की मध्यस्थता में हस्ताक्षरित एक अंतरराष्ट्रीय समझौता है। इसके तहत:

    भारत को पूर्वी नदियाँ (रावी, ब्यास, सतलुज) मिलीं

    पाकिस्तान को पश्चिमी नदियाँ (सिंधु, झेलम, चिनाब) मिलीं यह संधि आज भी कानूनी रूप से लागू है और इसे अब तक किसी आधिकारिक निर्णय द्वारा समाप्त नहीं किया गया है।

    पाकिस्तान में जल संकट की सच्चाई
    पाकिस्तान में जल संकट की समस्या वास्तविक है, लेकिन इसके पीछे कई आंतरिक और पर्यावरणीय कारण है

    पुरानी और कमजोर सिंचाई व्यवस्था

    जल संरक्षण की कमी और पानी की बर्बादी

    बढ़ती जनसंख्या का दबाव

    जलवायु परिवर्तन और बारिश में अनियमितता

    भूजल का अत्यधिक उपयोग

    विशेषज्ञों के अनुसार यह समस्या लंबे समय से बनी हुई संरचनात्मक (systemic) समस्या है, न कि केवल किसी एक संधि का परिणाम।

    कृषि पर प्रभाव
    पाकिस्तान की अर्थव्यवस्था में कृषि का बड़ा योगदान है, जो मुख्य रूप से सिंधु नदी प्रणाली पर निर्भर है। लेकिन, चावल, गेहूं और गन्ने की खेती पहले से जल संकट से प्रभावित हैसिंचाई प्रणाली में सुधार की आवश्यकता हैकुछ क्षेत्रों में किसानों को पानी की कमी का सामना करना पड़ता है हालांकि यह कहना कि संधि खत्म होने से अचानक कृषि ठप हो गई है, तथ्यात्मक रूप से सही नहीं है।

    भारत की भूमिका पर दावे
    कुछ रिपोर्ट्स में यह भी दावा किया गया है कि भारत ने किसी घटना के बाद संधि को स्थगित किया है। लेकिन अब तक किसी भी आधिकारिक सरकारी या अंतरराष्ट्रीय घोषणा में यह पुष्टि नहीं हुई है कि संधि स्थगित या समाप्त की गई हो।

    सिंधु जल संधि अभी भी एक सक्रिय अंतरराष्ट्रीय जल समझौता है। पाकिस्तान में जल संकट वास्तविक है, लेकिन इसका मुख्य कारण आंतरिक जल प्रबंधन और पर्यावरणीय चुनौतियाँ हैं, न कि संधि का समाप्त होना।

  • ग्वालियर में सनसनी: पानी की टंकी में मरा सांप मिलने से 19 हजार लोगों की सुरक्षा पर चिंता

    ग्वालियर में सनसनी: पानी की टंकी में मरा सांप मिलने से 19 हजार लोगों की सुरक्षा पर चिंता


    नई दिल्ली। ग्वालियर में एक चौंकाने वाला मामला सामने आया है, जिसने नगर निगम की कार्यप्रणाली पर गंभीर सवाल खड़े कर दिए हैं। वार्ड क्रमांक 10 के घासमंडी मिर्जापुर मस्जिद इलाके में स्थित पानी की टंकी में मरा हुआ सांप मिलने से पूरे क्षेत्र में हड़कंप मच गया है। यह वही टंकी है जिससे करीब 19 हजार लोगों को पेयजल की सप्लाई होती है।
    स्थानीय लोगों का आरोप है कि इस टंकी की लंबे समय से सफाई नहीं की गई थी, जिसके कारण अंदर गंदगी जमा हो गई और अंततः मरा हुआ सांप पानी में पाया गया। हैरान करने वाली बात यह है कि लोग कई दिनों से इसी पानी का उपयोग कर रहे थे, जिससे उनके स्वास्थ्य पर गंभीर खतरा पैदा होने की आशंका जताई जा रही है।
    वीडियो सामने आने के बाद बढ़ा विवाद
    इस घटना का एक वीडियो सोशल मीडिया पर वायरल हो गया है, जिसमें एक युवक लकड़ी की मदद से टंकी के अंदर से मरा हुआ सांप बाहर निकालता दिखाई दे रहा है। बताया जा रहा है कि यह घटना शनिवार की है, लेकिन इसका वीडियो रविवार को सामने आने के बाद मामला और गंभीर हो गया।
    वीडियो वायरल होते ही स्थानीय लोगों में गुस्सा फूट पड़ा और उन्होंने नगर निगम प्रशासन के खिलाफ लापरवाही के आरोप लगाए।
    नगर निगम पर गंभीर सवाल
    रहवासियों का कहना है कि उन्होंने कई बार टंकी की सफाई और पानी की गुणवत्ता को लेकर शिकायत की थी, लेकिन कोई ठोस कार्रवाई नहीं की गई। लोगों का आरोप है कि निगम की लापरवाही के कारण वे दूषित पानी पीने को मजबूर थे, जिससे बीमारियों का खतरा बढ़ सकता है।
    हालांकि इस मामले पर अभी तक नगर निगम की ओर से कोई आधिकारिक प्रतिक्रिया सामने नहीं आई है, जिससे लोगों की नाराजगी और बढ़ गई है।
    स्थानीय प्रतिनिधियों को भी नहीं जानकारी
    वार्ड क्रमांक 10 के पार्षद शकील मंसूरी ने बताया कि उन्हें इस घटना की जानकारी नहीं है। उन्होंने यह भी कहा कि हाल ही में उन पर हमला हुआ था और वे फिलहाल अस्पताल में भर्ती हैं। इसलिए वे क्षेत्र की स्थिति पर पूरी तरह अपडेट नहीं हैं।
    पहले भी सामने आ चुकी हैं ऐसी लापरवाहियां
    यह पहली बार नहीं है जब ग्वालियर में पानी की टंकी को लेकर सवाल उठे हों। दो महीने पहले भी मानपुर क्षेत्र में प्रधानमंत्री आवास योजना के तहत बनी टंकी में पांच मरी हुई छिपकलियां मिलने का मामला सामने आया था, जिससे हजारों लोग प्रभावित हुए थे।
    लोगों की मांग: जिम्मेदारों पर हो कार्रवाई
    घटना के बाद क्षेत्रीय लोगों ने टंकी की तुरंत सफाई, पानी की जांच और जिम्मेदार अधिकारियों पर सख्त कार्रवाई की मांग की है। लोगों ने चेतावनी दी है कि यदि जल्द समाधान नहीं हुआ तो वे आंदोलन करने को मजबूर होंगे।
  • इंदौर में जल संकट गहराया, कांग्रेस का उग्र प्रदर्शन, नगर निगम पर लापरवाही के आरोप

    इंदौर में जल संकट गहराया, कांग्रेस का उग्र प्रदर्शन, नगर निगम पर लापरवाही के आरोप

    इंदौर । मध्यप्रदेश के इंदौर शहर में बढ़ते जल संकट को लेकर राजनीतिक माहौल गर्म हो गया है। गुरुवार को कांग्रेस ने सड़क पर उतरकर नगर निगम के खिलाफ जोरदार विरोध प्रदर्शन किया और “हल्ला बोल, पोल खोल” अभियान के तहत मटका फोड़ कर अपनी नाराजगी जताई। यह प्रदर्शन मोती तबेला चौराहा और छत्रीबाग क्षेत्र में किया गया, जहां कार्यकर्ताओं ने खाली मटके फोड़कर नगर निगम के खिलाफ जमकर नारेबाजी की।

    इस प्रदर्शन का नेतृत्व शहर कांग्रेस कमेटी के कार्यवाहक अध्यक्ष देवेंद्र सिंह यादव और मध्यप्रदेश राजीव विकास केंद्र के प्रदेश प्रवक्ता मुकेश शाह ने किया। दोनों नेताओं ने आरोप लगाया कि शहर में पानी की समस्या लगातार गंभीर होती जा रही है, लेकिन प्रशासन इस ओर ध्यान नहीं दे रहा है।

    कांग्रेस नेताओं का कहना है कि नगर निगम आम जनता से पूरे महीने का पानी का बिल वसूल रहा है, जबकि सप्लाई केवल 15 दिन ही सही तरीके से हो रही है। कई इलाकों में नर्मदा पाइपलाइन अभी तक नहीं पहुंची है, जिसके कारण लोगों को पानी के लिए टैंकरों पर निर्भर रहना पड़ रहा है।

    प्रदर्शन के दौरान यह भी आरोप लगाया गया कि भगीरथपुरा, सुदामा नगर, मूसाखेड़ी, बाणगंगा और चंदन नगर जैसे क्षेत्रों में ड्रेनेज लीकेज की वजह से गंदा और बदबूदार पानी सप्लाई हो रहा है, जिससे लोगों के स्वास्थ्य पर खतरा बढ़ गया है।

    कांग्रेस ने गंभीर आरोप लगाते हुए कहा कि नगर निगम के टैंकरों का उपयोग आम जनता की बजाय होटलों और निर्माण कार्यों में किया जा रहा है, जबकि कई मोहल्लों में लोग पानी के लिए परेशान हैं। इससे शहर में असमान वितरण व्यवस्था का आरोप भी लगाया गया।

    प्रदर्शनकारियों ने यह भी कहा कि नई पाइपलाइन से जुड़े कई कार्य और फाइलें लंबित पड़ी हैं, जिससे कई वार्डों में जल संकट और गहरा गया है। शहर के कई हिस्सों में नर्मदा का पानी अंतिम छोर तक नहीं पहुंच पा रहा, जिससे स्थिति और खराब होती जा रही है। कांग्रेस नेताओं ने चेतावनी दी है कि यदि जल्द ही गंदे पानी की सप्लाई और टैंकरों की कमी जैसी समस्याओं का समाधान नहीं किया गया तो नगर निगम का उग्र घेराव किया जाएगा।

    इस प्रदर्शन ने शहर में जल संकट को लेकर प्रशासन पर दबाव बढ़ा दिया है। अब देखना यह होगा कि नगर निगम इन आरोपों पर क्या प्रतिक्रिया देता है और पानी की समस्या को लेकर क्या ठोस कदम उठाए जाते हैं।

  • फागुन में सिमटती गंगा से बढ़ी चिंता, बिहार में भीषण गर्मी और जल संकट के संकेत

    फागुन में सिमटती गंगा से बढ़ी चिंता, बिहार में भीषण गर्मी और जल संकट के संकेत


    नई दिल्ली ।बिहार में इस बार गर्मी ने समय से पहले ही अपने तेवर दिखाने शुरू कर दिए हैं। फागुन के महीने में ही गंगा का जलस्तर घटने लगा है जिससे आने वाले महीनों में भीषण गर्मी और संभावित जल संकट की आशंका गहरा गई है। आमतौर पर वैशाख और जेठ में गंगा की धारा सिमटती है लेकिन इस वर्ष फरवरी में ही शहरी इलाकों से नदी काफी दूर चली गई है। यह बदलाव सामान्य मौसमी चक्र से अलग माना जा रहा है और विशेषज्ञ इसे गंभीर संकेत के रूप में देख रहे हैं।

    भागलपुर के बरारी स्थित इंटकवेल की स्थिति हालात की गवाही दे रही है। वर्ष 2025 की फरवरी में जिस स्थान से गंगा की धारा से पानी मिल रहा था इस बार वहां से करीब 100 फीट आगे तक अतिरिक्त पाइप लगाकर पानी लेना पड़ रहा है। यानी नदी की धारा पीछे हट चुकी है। इंटकवेल प्रबंधन ने आगे और जलस्तर गिरने की आशंका को देखते हुए अतिरिक्त पाइप मंगाने की तैयारी शुरू कर दी है ताकि शहर की पेयजल आपूर्ति बाधित न हो।

    गर्मी के प्रारंभिक संकेत केवल नदी तक सीमित नहीं हैं। ग्रामीण क्षेत्रों में मवेशियों को सामान्य से अधिक प्यास लगना और भूख कम होना भी तापमान में संभावित वृद्धि का संकेत माना जा रहा है। यदि मार्च और अप्रैल में वर्षा सामान्य से कम रही तो हालात और बिगड़ सकते हैं। ऐसे में प्रशासनिक स्तर पर तैयारियां तेज कर दी गई हैं।

    संभावित पानी संकट को लेकर लोक स्वास्थ्य अभियंत्रण विभाग पीएचईडी विशेष सतर्कता बरत रहा है। विभागीय अभियंताओं से सभी क्षेत्रों के ग्राउंड वाटर लेवल की रिपोर्ट मांगी गई है। कार्यपालक अभियंता दिलीप कुमार ने जूनियर इंजीनियरों को साप्ताहिक अवलोकन के निर्देश दिए हैं ताकि भूजल स्तर में गिरावट की नियमित निगरानी की जा सके और जरूरत पड़ने पर सरकार से समय रहते मदद ली जा सके।

    इधर केंद्रीय भूमि जल बोर्ड सीजीडब्ल्यूबी की प्री मानसून बुलेटिन ने भी चिंता बढ़ा दी है। विभागीय सूत्रों के अनुसार जनवरी फरवरी में की गई ग्राउंड सुपरविजन के दौरान भागलपुर समेत गंगा किनारे बसे शहरों और गांवों में भूजल स्तर गिरने की पुष्टि हुई है। सीजीडब्ल्यूबी ने सभी प्रखंडों का जलस्तर रिकॉर्ड किया है और विस्तृत रिपोर्ट मई जून में प्रकाशित की जाएगी। प्रारंभिक संकेत बताते हैं कि भूजल भंडार पर दबाव बढ़ रहा है।

    गंगा से सटे जिलों के आंकड़े भी स्थिति की गंभीरता को दर्शाते हैं। बक्सर में भूजल स्तर 56138.3 से घटकर 30318.55 हेक्टेयर मीटर हो गया है। पटना में यह 98219.10 से घटकर 37595.63 लखीसराय में 37503.18 से 26462.36 और बेगूसराय में 50675.69 से घटकर 15692.38 हेक्टेयर मीटर रह गया है। इन आंकड़ों से स्पष्ट है कि जल संसाधनों पर दबाव लगातार बढ़ रहा है।

    विशेषज्ञों का मानना है कि यदि समय रहते वर्षा जल संचयन भूजल पुनर्भरण और जल संरक्षण के ठोस उपाय नहीं किए गए तो आने वाले महीनों में पेयजल संकट गहरा सकता है। फिलहाल प्रशासन सतर्क है लेकिन फागुन में ही सिमटती गंगा यह संकेत दे रही है कि इस बार की गर्मी सामान्य नहीं रहने वाली।

  • एक महीने से बीमार महिला की अस्पताल में मौत, परिवार ने दूषित पानी को जिम्मेदार ठहराया

    एक महीने से बीमार महिला की अस्पताल में मौत, परिवार ने दूषित पानी को जिम्मेदार ठहराया


    इंदौर।
    देश के सबसे स्वच्छ शहरों में शुमार है लेकिन भागीरथपुरा इलाके में दूषित पेयजल की वजह से लोगों की जान अब भी खतरे में है ताजा जानकारी के अनुसार 65 वर्षीय अनीता कुशवाह नाम की महिला, जो एक महीने से बीमार थीं, अस्पताल में इलाज के दौरान दम तोड़ गईं परिवार का आरोप है कि दूषित पानी पीने की वजह से उनकी सेहत बिगड़ी थी

    इस घटना के साथ दूषित पानी से जुड़ी मौतों का आंकड़ा बढ़कर 32 हो गया है इस मामले में अब तक 450 से ज्यादा मरीज ठीक होकर डिस्चार्ज हो चुके हैं लेकिन तीन मरीज अब भी अस्पताल में भर्ती हैं जिनमें से दो की हालत गंभीर है और वे आईसीयू में हैंभागीरथपुरा में पानी की समस्या अभी भी गंभीर बनी हुई है नगर निगम ने अब तक बस्ती के केवल 30 प्रतिशत हिस्से में नई नर्मदा लाइन बिछाई है जबकि बाकी लोग टैंकरों के भरोसे हैं दूषित पानी के डर से लोग नल या टैंकर का पानी पीने से कतराते हैं जो सक्षम हैं वे बाहर से बोतलबंद पानी खरीदकर पी रहे हैं वहीं कुछ लोग उबला या RO पानी का इस्तेमाल कर रहे हैं

    इस संकट ने इलाके के लोगों की जिंदगी कठिन बना दी है और स्वास्थ्य सुरक्षा पर गंभीर सवाल खड़े किए हैं नगर निगम और प्रशासन को जल्द ही पूरे इलाके में सुरक्षित पेयजल की व्यवस्था करना आवश्यक हो गया है ताकि और मौतों और बीमारियों को रोका जा सके स्थानीय लोग लगातार प्रशासन से मांग कर रहे हैं कि पूरे इलाके में नर्मदा लाइन की आपूर्ति पूरी की जाए और पानी की गुणवत्ता सुनिश्चित की जाए जिससे पीने योग्य पानी उपलब्ध हो सके वर्तमान हालात में जनता को टैंकर और बोतलबंद पानी पर निर्भर रहना पड़ रहा है

  • भोपाल के यूनियन कार्बाइड इलाके में 42 बस्तियों की बड़ी आबादी मल-मूत्र और रसायन मिला पानी पीने को मजबूर हालत बदतर

    भोपाल के यूनियन कार्बाइड इलाके में 42 बस्तियों की बड़ी आबादी मल-मूत्र और रसायन मिला पानी पीने को मजबूर हालत बदतर


    भोपाल । मध्य प्रदेश की राजधानी भोपाल में यूनियन कार्बाइड कारखाने के आसपास बसी 42 बस्तियों की एक बड़ी आबादी अब भी गंदा और दूषित पानी पीने को मजबूर है। यह पानी मल-मूत्र और घातक रसायनों से भरा हुआ है जो न केवल स्वास्थ्य के लिए हानिकारक है बल्कि जानलेवा भी साबित हो सकता है। नगर निगम ने 2017 में इन बस्तियों में पाइपलाइन के जरिए जलापूर्ति शुरू की थी लेकिन यह पाइपलाइन नालियों से होकर गुजरती है जिससे पानी की गुणवत्ता पूरी तरह से प्रभावित हो गई है।

    गैस त्रासदी से पीड़ित इन इलाकों के लोग अब तक बेहतर पानी की सुविधाओं के लिए संघर्ष कर रहे हैं। गैस पीड़ित संगठनों की शिकायतों पर सर्वोच्च न्यायालय ने मई 2012 में एक निगरानी समिति का गठन किया था। इस समिति ने इन बस्तियों में स्थित हैंडपंप और कुओं के पानी की जांच की और उसमें भारी मात्रा में हैवी मेटल डाइक्लोरोइथीन जैसे रसायन पाए गए।

    इसके बाद समिति ने नगर निगम को पेयजल के लिए पाइपलाइन डालने का निर्देश दिया। हालांकि यह पाइपलाइन नालियों से होकर गुजर रही थी जिसके कारण इसमें भारी मात्रा में ई. कोलाई बैक्टीरिया पाया गया। ई. कोलाई बैक्टीरिया सामान्यतः मलजल में पाया जाता है और यह इंसान के स्वास्थ्य के लिए बेहद खतरनाक होता है।

    2018 में किए गए पानी की जांच में यह खुलासा हुआ कि पाइपलाइन के पानी में ई. कोलाई बैक्टीरिया की मात्रा बहुत अधिक थी जो लोगों के लिए गंभीर संक्रमण का कारण बन सकता है। इसके बावजूद नगर निगम और प्रशासन की तरफ से कोई ठोस कदम नहीं उठाए गए और आज भी लोग इस गंदे पानी को पीने को मजबूर हैं।

    गैस त्रासदी के पीड़ितों के लिए यह स्थिति और भी दर्दनाक है क्योंकि पहले ही वे जानलेवा गैसों से प्रभावित हुए थे और अब उन्हें दूषित पानी पीने के कारण नए स्वास्थ्य संकटों का सामना करना पड़ रहा है। इन बस्तियों के निवासी बार-बार प्रशासन से मदद की गुहार लगा रहे हैं लेकिन अब तक कोई सार्थक समाधान नहीं निकल सका है।

    इस संकट की ओर ध्यान आकर्षित करने के लिए गैस पीड़ित संगठनों और स्थानीय नागरिकों ने कई बार प्रदर्शन भी किया है लेकिन शासन की ओर से कोई प्रभावी कदम नहीं उठाए गए हैं। 2017 में नगर निगम ने सर्वोच्च न्यायालय में एक शपथपत्र देकर जलापूर्ति में सुधार करने का वादा किया था लेकिन सात साल बाद भी स्थिति जस की तस बनी हुई है।

    यह संकट सिर्फ पानी की गुणवत्ता तक सीमित नहीं है बल्कि यह स्थानीय लोगों के स्वास्थ्य और जीवन के लिए भी खतरा बन चुका है। नागरिक समाज और विपक्षी दल इस मुद्दे को लेकर सरकार पर लगातार दबाव बना रहे हैं ताकि इन 42 बस्तियों के लोगों को साफ पानी मिल सके और उनका स्वास्थ्य सुधारने के लिए ठोस कदम उठाए जा सकें।