शहर के वार्ड 35 के तलावली चांदा गांव बजरंग नगर रविदास नगर और निरंजनपुर झाडू बस्ती सहित कई इलाकों में लंबे समय से नियमित जलापूर्ति की शिकायतें सामने आ रही हैं। स्थानीय लोगों का कहना है कि कुछ क्षेत्रों में चार साल से पानी की समस्या बनी हुई है। शिकायतों के बावजूद स्थायी समाधान नहीं होने से लोगों की परेशानी बढ़ती जा रही है। संगीता केरोल के मुताबिक वे छह महीने से पानी की समस्या झेल रही हैं। वहीं गोलू केरोद का कहना है कि उनके क्षेत्र में चार साल से पर्याप्त पानी नहीं मिल रहा और निजी बोरिंग से पानी खरीदना पड़ता है। टैंकर बुलाने पर करीब 2000 रुपए खर्च करने होते हैं।
सुभाषचंद्र मेरु की परेशानी भी गंभीर है। वह रिक्शे में बर्तन रखकर करीब तीन से चार किलोमीटर दूर अरंडिया गांव से पानी लाते हैं। उनका कहना है कि टैंकर भी उनकी गली तक नहीं पहुंचते। मनोरमा जैन ने भी करीब एक साल से जलसंकट झेलने की बात कही है। जरूरत पड़ने पर उन्हें महंगे टैंकर से पानी मंगवाना पड़ता है। इन हालात ने शहर में जलापूर्ति की व्यवस्था और प्रभावित इलाकों तक पानी पहुंचाने की चुनौती को उजागर किया है।
क्षेत्र में पानी की टंकी होने के बावजूद आपूर्ति नहीं मिलने का मुद्दा भी उठाया गया है। कांग्रेस नेता सुभाष सोलंकी के मुताबिक इलाके में 2015 से 2018 के बीच टंकी बनाई गई थी और वर्ष 2020 से उसमें पानी आने लगा। उनका दावा है कि टंकी में करीब 35 लाख लीटर पानी पहुंच रहा है लेकिन स्थानीय रहवासियों को इसका लाभ नहीं मिल रहा। उन्होंने पानी के वितरण की जांच कराने की मांग की है। हालांकि टंकी में उपलब्ध पानी और उसकी आपूर्ति को लेकर संबंधित विभाग की ओर से विस्तृत स्थिति सामने आना बाकी है।
शहर के तालाबों की स्थिति भी चिंता बढ़ा रही है। उपलब्ध आंकड़ों के अनुसार यशवंत सागर में 19 फीट की क्षमता के मुकाबले 16.4 फीट पानी है। पिपल्यापाला में 22 फीट की क्षमता के मुकाबले जलस्तर 7.2 फीट रह गया है। बड़ी बिलावली में 34 फीट की क्षमता के मुकाबले 11.9 फीट पानी दर्ज किया गया है। छोटी बिलावली में पानी नहीं बचा है जबकि लिंबोदी तालाब भी लगभग सूख चुका है। बड़ा सिरपुर में 10.9 फीट और छोटा सिरपुर में करीब 13 फीट पानी बताया गया है। तालाबों में पानी घटने से भूजल स्तर और आने वाले महीनों में बोरिंग की उपलब्धता पर भी असर पड़ सकता है।
सामाजिक कार्यकर्ता किशोर कोडवानी के मुताबिक बीते 60 साल में इंदौर में दूसरी बार इस तरह का जलसंकट सामने आया है। उनका कहना है कि वर्ष 1965 में सामान्य से 15.8 इंच कम बारिश हुई थी जबकि इस साल बारिश में करीब 14 इंच की कमी रही। उन्होंने बिलावली और लिंबोदी तालाबों के कैचमेंट क्षेत्र में जरूरी काम नहीं होने पर भी सवाल उठाए हैं।
दूसरी ओर नगर निगम जलसंकट से निपटने के लिए तैयारियां कर रहा है। जलकार्य प्रभारी अभिषेक शर्मा बबलू के मुताबिक यशवंत सागर से करीब 30 एमएलडी पानी की आपूर्ति होती है जिससे 20 हजार से अधिक लोगों को लाभ मिलता है। निगम मालवा-गंभीर लाइन के जरिए पानी लाने की तैयारी कर रहा है। इसके अलावा 85 वार्डों में हाइड्रेंट लगाने 100 नए टैंकर खरीदने करीब छह हजार सरकारी बोरिंग की सर्विसिंग कराने और चार नई पानी की टंकियां शुरू करने की योजना है। हाई कोर्ट की इंदौर बेंच ने भी सूख रहे तालाबों तक नर्मदा का पानी पहुंचाने के प्रस्ताव पर राज्य सरकार से दो सप्ताह में निर्देश लेने को कहा है। अब सबसे बड़ी चुनौती इन योजनाओं को समय पर जमीन पर उतारने और प्रभावित इलाकों में नियमित जलापूर्ति सुनिश्चित करने की है।




