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  • देश की सबसे लंबी वाटर टनल 98% पूरी, विंध्य में नर्मदा जल पहुंचाने का सपना अंतिम चरण में

    देश की सबसे लंबी वाटर टनल 98% पूरी, विंध्य में नर्मदा जल पहुंचाने का सपना अंतिम चरण में

    मध्य प्रदेश । मध्य प्रदेश के लिए एक ऐतिहासिक जल परियोजना अपने अंतिम चरण में पहुंच चुकी है। विंध्य क्षेत्र तक नर्मदा जल पहुंचाने की 17 साल पुरानी महत्वाकांक्षी योजना अब लगभग पूरी होने वाली है। कटनी जिले के स्लीमनाबाद में बन रही 11.95 किलोमीटर लंबी देश की सबसे बड़ी वाटर टनल अब 98 प्रतिशत तक तैयार हो चुकी है, और केवल 108 मीटर की खुदाई बाकी रह गई है।

    इस परियोजना के पूरा होने के बाद बरगी बांध से पानी पहली बार सीधे रीवा, सतना, मैहर और पन्ना जिलों तक पहुंचेगा, जिससे करीब 1.85 लाख हेक्टेयर कृषि भूमि सिंचित होने की उम्मीद है। इसके साथ ही कटनी जिले को पीने के पानी की बड़ी राहत भी मिलेगी।

    यह महत्वाकांक्षी परियोजना पिछले 17 वर्षों से कई तकनीकी और प्राकृतिक चुनौतियों से जूझती रही है। कभी खुदाई के दौरान चट्टानी परतें और बड़े बोल्डर सामने आए, तो कभी मशीनों ने काम करना बंद कर दिया। कई बार मीथेन गैस के रिसाव और भूजल के तेज प्रवाह ने काम को रोक दिया।

    परियोजना के दौरान करोड़ों रुपये के टनल कटर भी बदलने पड़े, और करीब 100 करोड़ रुपये की अमेरिकी मशीन भी इस कठिन भूगर्भीय स्थिति में सफल नहीं हो सकी। कुल मिलाकर यह परियोजना भारत की सबसे जटिल जल सुरंग परियोजनाओं में गिनी जा रही है।

    फिलहाल अंतिम चरण में एक जर्मन टनल बोरिंग मशीन (TBM) लगातार 100 मीटर से ज्यादा हिस्से की खुदाई कर रही है। यह मशीन सुरंग को अंतिम आकार देने का काम भी कर रही है। अत्यधिक तापमान और नमी के कारण यहां काम करने वाले तकनीशियन केवल सीमित समय तक ही कार्य कर पा रहे हैं, और उनकी लगातार मेडिकल मॉनिटरिंग की जा रही है।

    सुरंग के भीतर काम की स्थिति बेहद चुनौतीपूर्ण है। अंदर करीब तीन फीट पानी के बीच लोको ट्रेन केवल 3–4 किलोमीटर प्रति घंटे की रफ्तार से चल पाती है। हर दिन हजारों लीटर भूजल को निकालने के लिए पांच डीवाटरिंग स्टेशन लगातार काम कर रहे हैं।

    टनल का व्यास 10.14 मीटर है, जो किसी तीन मंजिला इमारत की ऊंचाई के बराबर है। सुरक्षा के लिए M-50 ग्रेड सीमेंट से बने भारी कंक्रीट रिंग्स का उपयोग किया गया है, जिनका वजन लगभग 1420 किलो है।

    जल संसाधन विभाग के अधिकारियों के अनुसार यह परियोजना 30 जून 2026 तक पूरी होने की संभावना है। इसके बाद विंध्य क्षेत्र में कृषि उत्पादन और जल उपलब्धता में बड़ा बदलाव आने की उम्मीद जताई जा रही है।

  • मॉनिटरिंग में ढिलाई नहीं चलेगी ,रीवा की जल और सीवरेज योजनाओं पर ,उप मुख्यमंत्री का बड़ा एक्शन

    मॉनिटरिंग में ढिलाई नहीं चलेगी ,रीवा की जल और सीवरेज योजनाओं पर ,उप मुख्यमंत्री का बड़ा एक्शन


    भोपाल । मध्यप्रदेश सरकार शहरी विकास और बुनियादी सुविधाओं को मजबूत करने के लिए लगातार प्रयासरत है और इसी कड़ी में उप मुख्यमंत्री राजेन्द्र शुक्ल ने रीवा शहर में चल रही जल प्रदाय योजना और सीवरेज सिस्टम के कार्यों की गहन समीक्षा करते हुए स्पष्ट संदेश दिया है कि किसी भी प्रकार की लापरवाही अब बर्दाश्त नहीं की जाएगी। मंत्रालय में आयोजित इस उच्चस्तरीय बैठक में उन्होंने कार्यों की प्रगति गुणवत्ता समय सीमा और वित्तीय प्रबंधन पर विस्तार से चर्चा की और अधिकारियों को सख्त निर्देश दिए कि सभी परियोजनाएं तय समय में हर हाल में पूरी हों।

    उप मुख्यमंत्री ने कहा कि इन योजनाओं का सीधा संबंध आम जनता की रोजमर्रा की जिंदगी से है इसलिए कार्यों में देरी या गुणवत्ता में कमी किसी भी स्थिति में स्वीकार्य नहीं है। उन्होंने विशेष रूप से जल प्रदाय व्यवस्था से जुड़े लंबित कार्यों पर ध्यान केंद्रित करते हुए निर्देश दिए कि ओवरहेड वाटर टैंक का निर्माण और जल वितरण नेटवर्क का विस्तार आगामी वर्षा ऋतु से पहले हर स्थिति में पूरा किया जाए। उनका स्पष्ट कहना था कि यदि समय पर यह कार्य पूरे नहीं हुए तो नागरिकों को असुविधा होगी और सरकार की मंशा भी प्रभावित होगी।

    बैठक में मौजूद वरिष्ठ अधिकारियों को यह भी निर्देशित किया गया कि कार्यों की नियमित मॉनिटरिंग सुनिश्चित की जाए ताकि हर चरण पर प्रगति का आकलन किया जा सके और किसी भी समस्या का तत्काल समाधान निकाला जा सके। उन्होंने कहा कि योजनाओं का क्रियान्वयन केवल कागजों तक सीमित न रहे बल्कि जमीनी स्तर पर उसकी गुणवत्ता और प्रभाव भी नजर आना चाहिए।

    उप मुख्यमंत्री ने निर्माण कार्यों के दौरान आमजन को होने वाली असुविधाओं पर भी विशेष चिंता जताई। उन्होंने अधिकारियों को निर्देश दिए कि कार्यों को इस तरह चरणबद्ध और सुनियोजित तरीके से किया जाए जिससे शहरवासियों की दैनिक जीवनचर्या प्रभावित न हो। साथ ही सुरक्षा के सभी मानकों का पालन सुनिश्चित करने पर भी उन्होंने जोर दिया।

    सीवरेज सिस्टम की समीक्षा करते हुए उन्होंने स्पष्ट किया कि शहरी स्वच्छता और जन स्वास्थ्य के लिए यह परियोजना अत्यंत महत्वपूर्ण है। उन्होंने शेष पाइपलाइन बिछाने और हाउस सर्विस कनेक्शन के कार्यों को प्राथमिकता के आधार पर जल्द पूरा करने के निर्देश दिए। इसके साथ ही सीवरेज ट्रीटमेंट प्लांट यानी एसटीपी के निर्माण कार्य को भी समय पर पूरा करने के लिए आवश्यक कदम उठाने को कहा गया। बैठक में अपर मुख्य सचिव नगरीय विकास एवं आवास संजय दुबे और आयुक्त संकेत भोंडवे सहित अन्य विभागीय अधिकारी उपस्थित रहे जिन्होंने परियोजनाओं की वर्तमान स्थिति और प्रगति की जानकारी दी।

    उप मुख्यमंत्री ने अंत में दोहराया कि सरकार का उद्देश्य केवल योजनाएं शुरू करना नहीं बल्कि उन्हें तय समय में पूरा कर नागरिकों को उनका वास्तविक लाभ पहुंचाना है। उन्होंने अधिकारियों को चेतावनी भरे लहजे में कहा कि मॉनिटरिंग और जवाबदेही में किसी भी प्रकार की ढिलाई नहीं होनी चाहिए।

    यह समीक्षा बैठक स्पष्ट संकेत देती है कि राज्य सरकार अब शहरी विकास परियोजनाओं में गति और गुणवत्ता दोनों पर बराबर ध्यान दे रही है और जनता को बेहतर बुनियादी सुविधाएं उपलब्ध कराने के लिए पूरी तरह प्रतिबद्ध है।