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  • बैतूल के घोघरा में चार साल से बंद नल-जल योजना, ग्रामीण नदी और कुएं पर निर्भर

    बैतूल के घोघरा में चार साल से बंद नल-जल योजना, ग्रामीण नदी और कुएं पर निर्भर

    बैतूल । बैतूल जिले के आदिवासी बहुल भीमपुर विकासखंड के ग्राम पंचायत चोहटा पोपटी के अंतर्गत आने वाले ग्राम घोघरा में नल-जल योजना पिछले चार वर्षों से ठप पड़ी हुई है। इस वजह से ग्रामीणों को पीने और घरेलू उपयोग के लिए आज भी प्राकृतिक स्रोतों नदी और कुएं पर निर्भर रहना पड़ रहा है।

    स्थानीय ग्रामीणों ने बताया कि योजना के तहत बोरवेल और ट्यूबवेल का निर्माण पूरा हो चुका है। इसके साथ ही पाइपलाइन बिछा दी गई है और संपवेल का निर्माण भी तैयार है। बावजूद इसके योजना को शुरू नहीं किया गया है जिससे गांव के लोग अब भी कठिन परिस्थितियों में जलापूर्ति के लिए प्रयासरत हैं।

    ग्रामीणों का कहना है कि पानी की कमी खासकर गर्मियों में गंभीर रूप ले लेती है। बच्चों और बुजुर्गों के लिए सुरक्षित पेयजल की उपलब्धता एक बड़ी चुनौती बन गई है। पंचायत और स्थानीय प्रशासन से बार-बार संपर्क के बावजूद समस्या का कोई स्थायी समाधान नहीं निकल पाया है।

    वहीं ग्रामीणों ने उम्मीद जताई है कि संबंधित विभाग जल्द ही इस योजना को चालू करके गांव में सुरक्षित और नियमित पेयजल की सुविधा सुनिश्चित करे। उनका कहना है कि योजना शुरू होने से ग्रामीणों का जीवन आसान होगा और स्वास्थ्य संबंधी कई समस्याओं से भी राहत मिलेगी।

  • इंदौर: भागीरथपुरा में 11 जनवरी से मिलेगा पीने योग्य नर्मदा जल

    इंदौर: भागीरथपुरा में 11 जनवरी से मिलेगा पीने योग्य नर्मदा जल


    इंदौर । इंदौर के भागीरथपुरा क्षेत्र में दूषित पानी से हो रही बीमारियों और मौतों के मामलों के बाद प्रशासन ने नर्मदा पेयजल आपूर्ति को सुनिश्चित करने का दावा किया है। कलेक्टर शिवम वर्मा ने बताया कि 11 जनवरी से इस क्षेत्र के नागरिकों को पीने योग्य नर्मदा पानी मिलना शुरू हो जाएगा। नर्मदा जल की लाइनों को पूरी तरह से साफ किया जा चुका है और पानी के सैंपल लेकर उनकी गुणवत्ता की जांच भी की जा रही है।

    कलेक्टर के अनुसार, गुरुवार रात को भागीरथपुरा में नर्मदा पेयजल पाइपलाइन को प्रेशर से क्लोरीन द्वारा फ्लश किया गया था। इसके बाद पानी के सैंपल लिए गए और उनका परीक्षण किया जा रहा है। परीक्षण की रिपोर्ट मिलने के बाद 11 जनवरी से लोगों को नर्मदा जल पीने के लिए उपलब्ध होगा।कलेक्टर ने यह भी कहा कि फिलहाल क्षेत्र के सभी बोरिंग में क्लोरीन डाला जा चुका है और इन्हें केवल घरेलू उपयोग के लिए ही इस्तेमाल किया जा सकता है। इस बीच, प्रशासन द्वारा टैंकरों के माध्यम से पानी की सप्लाई भी की जा रही है ताकि लोगों को पानी की समस्या से राहत मिल सके।

    भागीरथपुरा में नर्मदा जल आपूर्ति की व्यवस्था को लेकर स्थानीय निवासियों में उम्मीद जगी है। लंबे समय से यहां के लोग दूषित पानी से हो रही स्वास्थ्य समस्याओं से जूझ रहे थे और अब प्रशासन की ओर से सुधार के प्रयासों से उम्मीद जताई जा रही है कि जल समस्या जल्द हल हो जाएगी।नर्मदा जल की आपूर्ति से पहले, भागीरथपुरा क्षेत्र में पानी की गुणवत्ता को सुधारने के लिए पाइप लाइनों की मरम्मत और सफाई का काम जोरों से चल रहा है। फिलहाल, कलेक्टर और प्रशासन का कहना है कि 11 जनवरी तक नर्मदा जल क्षेत्रवासियों को सुरक्षित, शुद्ध और पीने योग्य पानी उपलब्ध करवा दिया जाएगा।

  • इंदौर में दूषित पानी से मौतों का मामला हाईकोर्ट की कड़ी टिप्पणी दोषियों पर कार्रवाई के संकेत

    इंदौर में दूषित पानी से मौतों का मामला हाईकोर्ट की कड़ी टिप्पणी दोषियों पर कार्रवाई के संकेत


    इंदौर । मध्य प्रदेश हाईकोर्ट की इंदौर बेंच ने मंगलवार को दूषित पेयजल के कारण होने वाली मौतों और बीमारियों को लेकर गंभीर टिप्पणी की। कोर्ट ने यह कहा कि इस घटना ने इंदौर की छवि को बुरी तरह से नुकसान पहुंचाया है। जो शहर देश का सबसे स्वच्छ माना जाता था आज वही दूषित पानी के कारण पूरे देश में चर्चा का विषय बन गया है। अदालत ने यह भी स्पष्ट किया कि स्वच्छ पेयजल सिर्फ इंदौर के लिए नहीं बल्कि पूरे राज्य का मौलिक अधिकार है और इसे किसी भी स्थिति में नकारा नहीं जा सकता।

    कोर्ट ने राज्य सरकार और नगर निगम को निर्देश दिया कि इस मामले में जवाब दाखिल कर स्थिति की रिपोर्ट पेश करें। इसके साथ ही यह भी कहा कि अगर भविष्य में दोषी अधिकारियों के खिलाफ सिविल और क्रिमिनल जिम्मेदारी तय करनी पड़ी तो अदालत इसमें कोई संकोच नहीं करेगी। यदि पीड़ितों को मुआवजा कम दिया गया है तो अदालत उचित निर्देश भी जारी करेगी।

    उधर कांग्रेस पार्टी के प्रदेश अध्यक्ष जीतू पटवारी और नेता प्रतिपक्ष उमंग सिंघार की अगुवाई में पार्टी कार्यकर्ता मंगलवार को भागीरथपुरा पहुंचे। पुलिस की तगड़ी सुरक्षा के बीच कांग्रेसी नेता वहां मृतकों के परिजनों से मिले और सरकार के खिलाफ अपना आक्रोश व्यक्त किया। पटवारी ने इंदौर के प्रभारी मंत्री महापौर और अन्य नेताओं से इस्तीफा भी मांगा।

    अब तक 17 लोगों की जान जा चुकी है और 110 से अधिक लोग अस्पताल में भर्ती हैं। बीमार होने वाले 421 लोगों में से 311 मरीजों को अस्पताल से छुट्टी मिल चुकी है जबकि 15 मरीज आईसीयू में हैं। अस्पतालों में उल्टी-दस्त के 38 नए मामले सामने आए हैं।

    कांग्रेस नेताओं ने आरोप लगाया कि प्रशासन ने पहले से की गई शिकायतों पर ध्यान नहीं दिया जिससे यह संकट उत्पन्न हुआ। याचिकाकर्ताओं के वकील ने कोर्ट में बताया कि 2022 में महापौर द्वारा नई पाइपलाइन बिछाने का प्रस्ताव पारित किया गया था लेकिन फंड न मिलने के कारण इस काम में देरी हो रही है। इसके अलावा 2017-18 में किए गए पानी के 60 सैंपल टेस्ट में से 59 पीने योग्य नहीं पाए गए थे लेकिन इस पर कोई ठोस कार्रवाई नहीं की गई।

    हाईकोर्ट ने राज्य सरकार और नगर निगम को 15 जनवरी को एक नई स्टेटस रिपोर्ट पेश करने के निर्देश दिए हैं। कोर्ट ने यह भी कहा कि संविधान के अनुच्छेद 21 के तहत जीवन के अधिकार में स्वच्छ पेयजल का अधिकार शामिल है और इसे नज़रअंदाज़ करना गंभीर मामला है।

    अगली सुनवाई 15 जनवरी को होगी जिसमें मुख्य सचिव को वीडियो कॉन्फ्रेंसिंग के माध्यम से उपस्थित रहने के निर्देश दिए गए हैं। इस मामले से जुड़े मुद्दों को सात श्रेणियों में बांटा गया है जिनमें प्रभावित लोगों के लिए तत्काल निर्देश सुधारात्मक उपाय जिम्मेदारी तय करना अनुशासनात्मक कार्रवाई मुआवजा स्थानीय निकायों को निर्देश और जन-जागरूकता और पारदर्शिता शामिल हैं।

  • सागर में निगमायुक्त ने जलस्रोतों की गुणवत्ता जांच करवाई कुएं और हैंडपंप का जल पीने योग्य नहीं

    सागर में निगमायुक्त ने जलस्रोतों की गुणवत्ता जांच करवाई कुएं और हैंडपंप का जल पीने योग्य नहीं


    सागर । सागर नगर निगम आयुक्त राजकुमार खत्री ने सोमवार को नगर निगम टाटा प्रोजेक्ट लिमिटेड सीवर प्रोजेक्ट और एमपीयूडीसी के अधिकारियों के साथ नगर के जलस्रोतों की जांच की। इस दौरान वे जवाहरगंज भीतर बाजार स्थित शीतला माता मंदिर के पास पहुंचे जहां पानी की गुणवत्ता की जांच कराई गई। जांच में पाया गया कि इन जलस्रोतों में बड़ी मात्रा में अम्लीय गंदा पानी मिल चुका था जो पीने के लिए सुरक्षित नहीं है।

    अधिकांश नागरिक इन कुओं और हैंडपंप का पानी पीने के लिए उपयोग कर रहे थे। इसलिए निगमायुक्त ने तत्काल कदम उठाते हुए इन कुओं और हैंडपंपों पर लाल रंग से यह चेतावनी लिखवाने का आदेश दिया कि इस जल का उपयोग न करें यह पीने योग्य नहीं है। निगमायुक्त ने अधिकारियों को निर्देश दिए कि जो भी जलस्रोत गुणवत्ता में सही न पाए जाएं उन पर इस तरह की चेतावनी तत्काल लिखवाई जाए। उन्होंने कहा जब तक इन जलस्रोतों का पानी वैज्ञानिक तरीके से टेस्ट न हो जाए तब तक इन्हें पीने योग्य नहीं माना जाएगा।

    स्वास्थ्य सुरक्षा को प्राथमिकता

    राजकुमार खत्री ने स्पष्ट किया कि नागरिकों के स्वास्थ्य की सुरक्षा सर्वोच्च प्राथमिकता है और किसी भी प्रकार की लापरवाही बर्दाश्त नहीं की जाएगी। वर्तमान में टाटा प्रोजेक्ट लिमिटेड द्वारा राजघाट जलप्रदाय योजना के तहत प्रत्येक घर तक शुद्ध पेयजल की आपूर्ति की जा रही है। इस जल की नियमित गुणवत्ता जांच कराई जा रही है और मानकों के अनुरूप पाए जाने पर ही इसकी आपूर्ति की जा रही है।

    नागरिकों से अपील

    नगर निगम आयुक्त ने नागरिकों से अपील की है कि वे तब तक कुओं और हैंडपंप के पानी का उपयोग पेयजल के रूप में न करें जब तक उसकी गुणवत्ता जांच पूरी न हो जाए।

  • कैग ने 2019 में दूषित पानी को लेकर सरकार को चेताया था फिर भी सरकार ने नहीं उठाए जरूरी कदम 906 करोड़ का कर्ज लिया

    कैग ने 2019 में दूषित पानी को लेकर सरकार को चेताया था फिर भी सरकार ने नहीं उठाए जरूरी कदम 906 करोड़ का कर्ज लिया


    भोपाल । मध्य प्रदेश में दूषित पानी से हुई मौतों को लेकर विधानसभा में नेता प्रतिपक्ष उमंग सिंघार ने राज्य सरकार पर निशाना साधा है। उन्होंने सोशल मीडिया पर पोस्ट करके आरोप लगाया कि 2019 में भारत के नियंत्रक एवं महालेखा परीक्षक कैग ने मध्य प्रदेश सरकार को इंदौर और भोपाल में दूषित पानी की आपूर्ति को लेकर पहले ही चेतावनी दी थी लेकिन सरकार ने कोई ठोस कदम नहीं उठाया।

    कैग की 2019 की रिपोर्ट में साफ तौर पर दोनों शहरों की जल आपूर्ति में गंभीर कमियों का खुलासा किया गया था। रिपोर्ट के अनुसार इंदौर और भोपाल में जल आपूर्ति व्यवस्था में भारी गड़बड़ियां थीं जिनमें पानी के नमूनों का परीक्षण भी सही नहीं किया गया था और कई नमूनों में गंदगी और मल कोलिफॉर्म पाए गए थे जो कि मानव स्वास्थ्य के लिए अत्यधिक खतरे का कारण हैं। इस रिपोर्ट के बावजूद सरकार ने कोई प्रभावी कदम नहीं उठाया जिससे अब इंदौर में गंदा पानी पीने से 15 लोगों की मौत हो गई है।

    उमंग सिंघार ने आरोप लगाया कि 2004 में एशियन डेवलपमेंट बैंक एडीबी से 906 करोड़ रुपये का कर्ज लिया गया था ताकि भोपाल इंदौर जबलपुर और ग्वालियर में पानी की आपूर्ति और गुणवत्ता में सुधार किया जा सके। हालांकि इस कर्ज का इस्तेमाल किया गया था लेकिन कैग की रिपोर्ट में यह साफ सामने आया कि इन शहरों में पानी का प्रबंधन अपर्याप्त था और भ्रष्टाचार के कारण पानी की गुणवत्ता में सुधार नहीं हुआ।कैग की रिपोर्ट में कई महत्वपूर्ण बिंदुओं को उजागर किया गया था:

    इंदौर में सिर्फ चार जोनों और भोपाल में पांच जोनों को ही नियमित पानी की आपूर्ति हो रही है। शहरों के 9.41 लाख परिवारों में से केवल 5.30 लाख परिवारों को नल कनेक्शन मिल पाए हैं।2013 से 2018 तक 4,481 पानी के नमूने पीने योग्य नहीं पाए गए थे।दोनों शहरों में 5.45 लाख जलजनित बीमारियों के मामले सामने आए थे।नगर निगमों ने रिसाव को ठीक करने में बेहद लंबा समय लिया था 22 से 182 दिन ।पानी के 30 से 70 प्रतिशत हिस्से का कोई हिसाब नहीं था जो पानी बिना कारण बर्बाद हो रहा था।

    उमंग सिंघार ने इस मुद्दे को उठाते हुए कहा कि यह एक गंभीर समस्या है जिस पर सरकार ने ध्यान नहीं दिया। उन्होंने कहा कि कैग ने 2019 में ही इन मुद्दों को उठाया था लेकिन सरकार तब भी सोती रही और अब जब बड़ा हादसा हो चुका है तब सरकार जागी है। सिंघार का कहना था कि बिना किसी बड़ी त्रासदी के सरकार कोई कार्रवाई नहीं करती और अब सरकार को इस गंभीर लापरवाही पर जवाब देना चाहिए।इस मुद्दे को लेकर विपक्षी दलों ने भी सरकार को घेरा है और पानी की गुणवत्ता सुधारने के लिए ठोस कदम उठाने की मांग की है।