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  • पानी की बूंद-बूंद बचाने के लिए सनातन संस्कृति की पवित्र धारा का अभियान है जल गंगा संवर्धन: मुख्यमंत्री डॉ. यादव

    पानी की बूंद-बूंद बचाने के लिए सनातन संस्कृति की पवित्र धारा का अभियान है जल गंगा संवर्धन: मुख्यमंत्री डॉ. यादव


    भोपाल।
    मध्य प्रदेश के मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव ने कहा कि जल गंगा संवर्धन अभियान हमारी सनातन संस्कृति की सबसे पवित्र धारा का अभियान है। जल की महत्ता ऐसी है कि इसके बिना कोई जीवित नहीं रह सकता है। शरीर 5 तत्वों से मिलकर बना है। ये सभी तत्व कभी अकेले नहीं रह सकते हैं। पानी के बिना जीवन की कल्पना भी नहीं की जा सकती है।

    मुख्यमंत्री डॉ. यादव गुरुवार को इंदौर के इस्कॉन मंदिर में आयोजित राज्य स्तरीय जल गंगा संवर्धन अभियान के शुभारंभ कार्यक्रम को संबोधित कर रहे थे। उन्होंने गुड़ी पड़वा, विक्रम संवत्, चेटीचंड, चैत्र नवरात्रि की बधाई देते हुए प्रदेश में तीसरे चरण के जल गंगा संवर्धन अभियान का शुभारंभ किया। इस अवसर पर उन्होंने कहा कि मध्य प्रदेश नदियों का मायका है, जहां से 250 से अधिक नदियां निकलती हैं। मां नर्मदा के पवित्र जल से मध्य प्रदेश के साथ गुजरात में भी आनंद की धारा बह रही है। हमारी नदी जोड़ो परियोजनाओं का लाभ पड़ौसी राज्य राजस्थान और उत्तर प्रदेश को भी मिल रहा है।

    उन्होंने कहा कि जल संचय के अभियान में देशभर के जल स्त्रोतों के विकास कार्य करने का निर्णय लिया गया है। प्रदेश के तीसरे जल गंगा संवर्धन अभियान में 3 महीने तक लगातार जल संचय की गतिविधियां संचालित होंगी, जिसमें 2500 करोड़ की राशि से सभी विधानसभा, नगरीय निकायों और पंचायत स्तर पर जल संवर्धन और संचय के कार्य किए जाएंगे। हमारी सरकार ने पहले वर्ष में 30 दिन, दूसरे वर्ष में 120 दिन चलाया और मौजूदा तीसरे वर्ष में गुड़ी पड़वा से गंगा दशहरा तक 139 दिनों तक प्रदेश में जल गंगा संवर्धन अभियान चलाया जा रहा है।

    मुख्यमंत्री डॉ. यादव ने इंदौर में अमृत 2.0 परियोजना में सिंगल क्लिक से 12.72 करोड़ लागत से बिलावली तालाब, 4.89 करोड़ लागत से लिम्बोदी तालाब, 3.82 करोड़ लागत से छोटा सिरपुर तालाब के जीर्णोद्धार कार्यों के भूमि-पूजन सहित 22 करोड़ के विकास कार्यों की सौगात दी। उन्होंने कार्यक्रम में जल के अपव्यय को रोकने और एक-एक बूंद संग्रहण के लिए शपथ दिलाई। उन्होंने कहा कि ‘जल ही जीवन है, जल है तो कल है’ के मूल मंत्र के साथ जागरूकता फैलाना है। मुख्यमंत्री धार्मिक और पर्यावरणीय संदेशों से जुड़ी महत्वपूर्ण गतिविधियों में भी शामिल हुए। उन्होंने इस्कॉन मंदिर पहुंचकर विधिवत पूजन-अर्चन किया और गौ माता की पूजा कर उन्हें गौ-ग्रास खिलाया।


    प्रधानमंत्री मोदी के नेतृत्व में जल संरक्षण बन रहा है राष्ट्रीय अभियान

    मुख्यमंत्री ने कहा कि प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी के नेतृत्व में जल संरक्षण को राष्ट्रीय अभियान के रूप में चलाया जा रहा है। मध्य प्रदेश में जल गंगा संवर्धन अभियान इसी का हिस्सा है। पिछले वर्षों में प्रदेश में लाखों जल संरचनाओं पर कार्य किया गया है। इंदौर का उल्लेख करते हुए उन्होंने कहा कि अभियान के पहले वर्ष में इंदौर नगर निगम द्वारा बड़ी संख्या में पुरानी बावड़ियों और तालाबों के गहरीकरण और पुनरुद्धार का कार्य किया गया। साथ ही सैकड़ों कुओं का भी जीर्णोद्धार किया गया है। उन्होंने नागरिकों से जल संरक्षण में भागीदारी की अपील करते हुए कहा कि यह अभियान केवल सरकारी नहीं, बल्कि जन-जन का आंदोलन होना चाहिए।


    हमारी नदियां शरीर की रक्त धमनियों की तरह

    मुख्यमंत्री डॉ. यादव ने कहा कि इंदौर के जानापाव से निकली चंबल आगे बढ़कर यमुना में मिलकर गंगा जी की धारा को समृद्ध करती है। हमारी नदियां शरीर की रक्त धमनियों की तरह है, जो पृथ्वी माता को जीवन देती हैं। ब्रह्मांड में जल के महत्व से हम सभी परिचित हैं। उन्होंने कहा कि अगर जीवन को सफल करना है तो प्राचीन समय के उन कुएं, नदियां, तालाब, बावड़ी का जीर्णोद्धार करना होगा, जिनका सम्राट विक्रमादित्य, लोकमाता अहिल्या बाई होल्कर, महाराज सिंधिया ने निर्माण कराया था। उन्होंने बताया कि इंदौर में 21 बावड़ियों का जीर्णोद्धार कराया गया है। जल है तो कल है वाक्य की गंभीरता को हर व्यक्ति को स्वीकार करना होगा।


    भारतीय संस्कृति पराक्रम, पुरुषार्थ, आनंद और उत्सव की संस्कृति

    मुख्यमंत्री ने कहा कि आज विक्रम संवत् 2083 का शुभारंभ हो रहा है। आज का दिन सम्राट विक्रमादित्य का स्मरण करने का दिन है। सम्राट विक्रमादित्य ने अपनी वीरता, गंभीरता, दानवीरता और लोकप्रियता के बल पर दुनिया में अपनी अलग पहचान बनाई थी। भारतीय संस्कृति, पराक्रम, पुरुषार्थ, आनंद और उत्सव की संस्कृति है। प्रकृति में ऋतुओं का राजा बसंत है और भारतीय नववर्ष के मौके पर चारों ओर बसंत की आकर्षक छटा दिखाई देती है। सनातन संस्कृति में मौसम, ऋतुओं और मंगल तिथियों के आधार पर पर्व-त्यौहार मनाए जाते हैं। इन तिथियों पर मंगल कार्य संपन्न किए जाते हैं। इसलिए ऐसे त्योहारों की मंगलकामनाएं होनी चाहिए। जबकि शुभकामनाएं जन्मदिवस, यात्रा आरंभ, साक्षात्कार, परीक्षा जैसे अवसरों पर देनी चाहिए। नवरात्रि, रामनवमी, दशहरा जैसी मंगल तिथियां हैं, इसलिए मंगलकामनाओं का आदान-प्रदान ही उचित है।


    इलेक्ट्रिक व्हीकल चार्जिंग में बरतें विशेष सावधानी

    मुख्यमंत्री ने कहा कि वर्तमान समय में आधुनिक संसाधन जीवन को सुखद और आनंदमय बनाने के लिए हैं। बिजली से ए.सी. चलाते समय खिड़की-दरवाजे बंद रहने से संकट की स्थिति भी बन सकती है। इसलिए घरों में बिजली के सर्किट, कॉमर्शियल लाइनें और उपभोक्ताओं की लाइनों की समय-समय पर जांच होनी चाहिए। इलेक्ट्रिक व्हीकल की चार्जिंग के दौरान विशेष सावधानी बरतने की आवश्यकता है। रात में अपनी और परिवार की सुरक्षा की चिंता स्वयं करनी चाहिए। ऐसे सभी प्रयासों में सरकार हमेशा साथ खड़ी है। बुधवार को इंदौर में हुई अत्यंत दु:खद घटना में नागरिकों की असामयिक मृत्यु हुई है। राज्य सरकार विशेषज्ञों से चर्चा कर समस्या का सामाधान निकालने पर कार्य करेगी।

    कार्यक्रम को जल संसाधन मंत्री तुलसीराम सिलावट, इंदौर सांसद शंकर लालवानी और महापौर पुष्यमित्र भार्गव ने भी संबोधित किया। कार्यक्रम में जिला पंचायत अध्यक्ष रीना सतीश मालवीय, विधायक मधु वर्मा, मालिनी गौड़ और गोलू शुक्ला सहित जनप्रतिनिधि, संभागायुक्त डॉ. सुदाम खाड़े, पुलिस कमिश्नर संतोष कुमार सिंह और बड़ी संख्या में स्थानीय जन उपस्थित थे।

  • इंदौर के भागीरथपुरा में फूड पाइजनिंग के कुछ लोगों की तबीयत बिगड़ी,सभी की स्थित सामान्य

    इंदौर के भागीरथपुरा में फूड पाइजनिंग के कुछ लोगों की तबीयत बिगड़ी,सभी की स्थित सामान्य


    इंदौर। मध्य प्रदेश के इंदौर शहर के भागीरथपुरा में शनिवार की रात एक बच्चे की जन्मदिन पार्टी में आए मेहमान उल्टी-दस्त का शिकार हो गए। इसके बाद वे अलग-अलग स्वास्थ्य केन्द्रों में इलाज कराने गए। राहत की बात है कि कोई गंभीर बीमार नहीं हुआ। चार लोगों को एमवाय अस्पताल में भर्ती किया गया है।


    मुख्य चिकित्सा एवं स्वास्थ्य अधिकारी डॉ. माधव हासानी ने बताया कि शनिवार देर रात भागीरथपुरा क्षेत्र स्थित शर्मा गली में आयोजित एक जन्मदिन पार्टी में भोजन ग्रहण करने के बाद कुछ नागरिकों की तबीयत खराब हो गई थी। सभी 6 नागरिकों का स्वास्थ्य वर्तमान में पूरी तरह सामान्य एवं ठीक है।

    डॉ. हासानी ने बताया कि शनिवार को भागीरथपुरा में आयोजित जन्मदिन समारोह में लगभग 60 रिश्तेदार शामिल हुए थे, जिन्होंने रात करीब 11 बजे भोजन किया था। इसके बाद रविवार को कुछ लोगों में स्वास्थ्य संबंधी समस्या सामने आई। प्रभावित व्यक्तियों का उपचार किया गया तथा एहतियात के तौर पर उन्हें एम.वाय.अस्पताल में भर्ती कराया गया था। उन्होंने बताया कि सभी मरीजों की स्थिति सामान्य है और किसी प्रकार की गंभीरता नहीं है।

    सीएमएचओ डॉ. हासानी ने नागरिकों एवं मीडिया से अनुरोध किया है कि इस घटना को अनावश्यक रूप से बहुप्रसारित न करें तथा अफवाहों पर ध्यान न दें। स्वास्थ्य विभाग स्थिति पर सतत निगरानी बनाए हुए है।

    दरअसल, भागीरथपुरा की शुक्ला गली में आकाश मुक्शिया के बेटे का जन्मदिन शनिवार को मनाया गया। उन्होंने अपने रिश्तेदारों और परिचितों को बुलाया था। खाने में दाल-बाफलेँ, लड्डू और अन्य व्यंजन थे। रविवार सुबह कुछ लोगों को उल्टी-दस्त की शिकायत हुई। मुक्शिया के अनुसार 30 से ज्यादा लोग बीमार हुए। मामला भोजन से जुड़ा होने के कारण खाद्य विभाग की टीम भी मौके पर पहुंची। टीम ने भोजन के सैंपल लिए हैं। इसके अलावा नगर निगम ने भी पानी के सैंपल लिए हैं। अभी तक रिपोर्ट प्राप्त नहीं हुई।

    आकाश ने बताया कि घर पर ही खाना बनाया था। 60 से ज्यादा मेहमानों को बुलाया गया था। खाने में हमने बोरिंग का पानी उपयोग में लिया था। फिलहाल डॉक्टरों ने फूड पॉइजनिंग की बात कही है। आकाश ने कहा कि मेरी पत्नी, भाई और भाभी भी बीमार हैं। उन्हें भी हम सरकारी स्वास्थ्य केन्द्र में दिखाने ले गए थे।
  • MP: भोपाल भी पी रहा जहरीला पानी… 4 इलाकों के पानी में मिला ई-कोलाई बैक्टीरिया, स्लॉटर हाउस सील

    MP: भोपाल भी पी रहा जहरीला पानी… 4 इलाकों के पानी में मिला ई-कोलाई बैक्टीरिया, स्लॉटर हाउस सील


    भोपाल।
    मध्य प्रदेश (Madhya Pradesh) की राजधानी भोपाल (Bhopal) और आसपास के इलाकों में दूषित पानी (Contaminated water) को लेकर हड़कंप मचा हुआ है। इस बीच भोपाल नगर निगम की जांच में शहर के चार अलग-अलग स्थानों पर ई-कोलाई बैक्टीरिया (E. coli bacteria) की पुष्टि हुई है। नगर निगम द्वारा अब तक लिए गए कुल 1,810 सैंपलों में से ये चार नमूने फेल पाए गए, जो मुख्य रूप से ट्यूबवेल और ग्राउंड वॉटर से जुड़े थे। भोपाल की मेयर मालती राय ने साफ किया है कि यह दूषित पानी निगम की मुख्य पाइपलाइन से सप्लाई होने वाला पानी नहीं है, बल्कि कच्चा जल है। इस मामले में प्रशासन ने बड़ी कार्रवाई करते हुए एक स्लॉटर हाउस (बूचड़खाने) को भी सील कर दिया है क्योंकि वहां के नमूनों में गड़बड़ी पाई गई थी।

    राय ने कहा, नगर निगम को कई शिकायतें मिल रही हैं। नगर निगम के अधिकारी और कर्मचारी तुरंत संबंधित स्थानों पर जाकर जांच कर रहे हैं। शिकायत होने पर नगर निगम की टीम मौके पर पहुंचकर समस्या का समाधान कर रही है। रिसाव या सार्वजनिक शिकायतों की स्थिति में नगर निगम के अधिकारी और कर्मचारी जांच कर रहे हैं। वे लोगों की शिकायतों के आधार पर जांच कर रहे हैं और सैंपलों को संबंधित अधिकारियों को भेज रहे हैं।

    मेयर ने यह भी बताया कि शहर के एक स्लॉटर हाउस को उसके नमूनों में गड़बड़ी पाए जाने के बाद सील कर दिया गया है और दोषियों के खिलाफ कार्रवाई की जा रही है। उन्होंने कहा, प्राप्त जानकारी के अनुसार, स्लॉटर हाउस के सैंपल गलत पाए गए हैं। नमूने गलत पाए जाने पर उसके खिलाफ कार्रवाई की गई है। संबंधित अधिकारी, निजी विक्रेता या किसी अन्य व्यक्ति के खिलाफ कार्रवाई की जा रही है।

    दूसरी ओर, इस मुद्दे पर राजनीतिक घमासान भी तेज हो गया है। कांग्रेस नेताओं ने आरोप लगाया है कि सीवेज प्रोजेक्ट में हुई लापरवाही के कारण गंदा पानी पीने के पानी के स्रोतों में मिल रहा है, जिससे जनता का स्वास्थ्य खतरे में है। पूर्व मुख्यमंत्री दिग्विजय सिंह ने जबलपुर के ग्वारीघाट में सीवेज का पानी नर्मदा नदी में मिलने और वहां से पीने के पानी की आपूर्ति होने पर गहरी चिंता जताई है। हाल ही में इंदौर के भागीरथपुरा में दूषित पानी के कारण हुई मौतों के बाद, अब पूरे प्रदेश में जल संकट और स्वच्छता को लेकर प्रशासन पर भारी दबाव है और दोषियों के खिलाफ सख्त कदम उठाए जा रहे हैं।

  • बड़ा खुलासा… मप्र के गांवों में मिल रहा पानी लोगों के इस्तेमाल के लायक नहीं

    बड़ा खुलासा… मप्र के गांवों में मिल रहा पानी लोगों के इस्तेमाल के लायक नहीं


    भोपाल।
    इंदौर के भागीरथपुरा (Bhagirathpura, Indore) में काल बने पीने के पानी ने अब तक 20 लोगों की जिंदगियां लील ली हैं और जो इससे बच गए, उनका अस्पताल में इलाज जारी है। सरकार कटघरे में है तो विपक्ष भी इस मुद्दे पर हावी है। इस बीच मध्य प्रदेश (Madhya Pradesh) के गांवों (Villages) में पीने के पानी (Drinking water) पर आई एक रिपोर्ट आपको भी हैरान कर देगी। केंद्र सरकार के ‘जल जीवन मिशन’ (‘Jal Jeevan Mission’) की एक नई रिपोर्ट से पता चला है कि राज्य के ग्रामीण इलाकों में एक-तिहाई से अधिक पीने का पानी इंसानों के इस्तेमाल के लायक नहीं है, जिससे लाखों लोग अनदेखे लेकिन जानलेवा खतरों की चपेट में हैं।


    रिपोर्ट में चौंकाने वाले आंकड़े

    4 जनवरी 2026 को जारी ‘फंक्शनैलिटी असेसमेंट रिपोर्ट’ (कार्यक्षमता मूल्यांकन रिपोर्ट) के अनुसार मध्य प्रदेश में पानी के केवल 63.3% नमूने ही गुणवत्ता मानकों पर खरे उतरे, जबकि इसका राष्ट्रीय औसत 76% है। इसका मतलब है कि राज्य के ग्रामीण इलाकों में 36.7% पानी के नमूने असुरक्षित पाए गए हैं। इनमें हानिकारक बैक्टीरिया (कीटाणु) या रासायनिक मिलावट पाई गई है। ये नमूने सितंबर-अक्टूबर 2024 के दौरान मध्य प्रदेश के 15,000 से अधिक ग्रामीण घरों से इकट्ठा किए गए थे।

    यह स्थिति उन जगहों पर और भी अधिक चिंताजनक है जो सुरक्षा और इलाज के लिए बनी हैं। रिपोर्ट के मुताबिक सरकारी अस्पतालों में पानी के केवल 12% नमूने ही सूक्ष्मजीवविज्ञानी (microbiological) सुरक्षा जांच में पास हो पाए, जबकि इसका राष्ट्रीय औसत 83.1% है। इसका मतलब है कि मध्य प्रदेश के लगभग 88% अस्पतालों में मरीजों को असुरक्षित पानी दिया जा रहा है। स्कूलों में 26.7% नमूने माइक्रोबायोलॉजिकल टेस्ट में फेल हो गए, जिससे बच्चे हर दिन दूषित पानी पीने को मजबूर हैं।


    इन जिलों की हालत सबसे खराब

    अनूपपुर और डिंडोरी जैसे आदिवासी बहुल जिलों में स्थिति सबसे खराब है, जहां एक भी पानी का नमूना सुरक्षित नहीं पाया गया। बालाघाट, बैतुल और छिंदवाड़ा में 50% से अधिक पानी के नमूने दूषित मिले हैं। मध्य प्रदेश में केवल 31.5% घरों में नल के कनेक्शन हैं, जो कि 70.9% के राष्ट्रीय औसत से बहुत कम है। जहां पाइपलाइन बिछी भी है, वहां व्यवस्था पूरी तरह चरमराई हुई है; राज्य के 99.1% गांवों में पाइप से जलापूर्ति की व्यवस्था तो है, लेकिन केवल 76.6% घरों में ही चालू हालत में नल लगे हैं। इसका सीधा मतलब यह है कि हर चौथे घर में या तो नल खराब है या पानी ही नहीं आता।


    नल से पानी आने का मतलब सुरक्षित पानी होना नहीं….

    इससे भी बदतर बात यह है कि नल से पानी आने का मतलब सुरक्षित पानी होना नहीं है। इंदौर जिला, जिसे आधिकारिक तौर पर 100% नल कनेक्शन वाला घोषित किया गया है, वहां भी केवल 33% घरों को ही सुरक्षित पीने का पानी मिल रहा है। पूरे राज्य में 33% पानी के नमूने गुणवत्ता जांच में फेल हो गए, जो इस बात की पुष्टि करता है कि संकट केवल पानी की पहुंच का नहीं, बल्कि ‘जहरीली सप्लाई’ का है। केंद्र सरकार ने इस स्थिति को “सिस्टम की ओर से पैदा की गई आपदा” करार दिया है और चेतावनी दी है कि यदि पानी की गुणवत्ता में सुधार नहीं हुआ, तो इस साल फंड (बजट) में कटौती की जा सकती है।

    यह चेतावनी एक बड़ी त्रासदी के बाद आई है। इंदौर के भागीरथपुरा में दूषित पानी पीने से 20 लोगों की मौत हो गई। 429 लोगों को अस्पताल में भर्ती कराना पड़ा, जिनमें से 16 आईसीयू (ICU) में हैं और तीन वेंटिलेटर पर हैं। अब मध्य प्रदेश उच्च न्यायालय ने औपचारिक रूप से इस संकट को ‘पब्लिक हेल्थ इमरजेंसी’ (सार्वजनिक स्वास्थ्य आपातकाल) घोषित कर दिया है। अपने आदेश में अदालत ने कहा कि “अनुच्छेद 21 के तहत जीवन के अधिकार में साफ पीने का पानी पाने का अधिकार भी शामिल है” और वर्तमान स्थिति सार्वजनिक स्वास्थ्य आपातकाल के दायरे में आती है।

  • सागर में निगमायुक्त ने जलस्रोतों की गुणवत्ता जांच करवाई कुएं और हैंडपंप का जल पीने योग्य नहीं

    सागर में निगमायुक्त ने जलस्रोतों की गुणवत्ता जांच करवाई कुएं और हैंडपंप का जल पीने योग्य नहीं


    सागर । सागर नगर निगम आयुक्त राजकुमार खत्री ने सोमवार को नगर निगम टाटा प्रोजेक्ट लिमिटेड सीवर प्रोजेक्ट और एमपीयूडीसी के अधिकारियों के साथ नगर के जलस्रोतों की जांच की। इस दौरान वे जवाहरगंज भीतर बाजार स्थित शीतला माता मंदिर के पास पहुंचे जहां पानी की गुणवत्ता की जांच कराई गई। जांच में पाया गया कि इन जलस्रोतों में बड़ी मात्रा में अम्लीय गंदा पानी मिल चुका था जो पीने के लिए सुरक्षित नहीं है।

    अधिकांश नागरिक इन कुओं और हैंडपंप का पानी पीने के लिए उपयोग कर रहे थे। इसलिए निगमायुक्त ने तत्काल कदम उठाते हुए इन कुओं और हैंडपंपों पर लाल रंग से यह चेतावनी लिखवाने का आदेश दिया कि इस जल का उपयोग न करें यह पीने योग्य नहीं है। निगमायुक्त ने अधिकारियों को निर्देश दिए कि जो भी जलस्रोत गुणवत्ता में सही न पाए जाएं उन पर इस तरह की चेतावनी तत्काल लिखवाई जाए। उन्होंने कहा जब तक इन जलस्रोतों का पानी वैज्ञानिक तरीके से टेस्ट न हो जाए तब तक इन्हें पीने योग्य नहीं माना जाएगा।

    स्वास्थ्य सुरक्षा को प्राथमिकता

    राजकुमार खत्री ने स्पष्ट किया कि नागरिकों के स्वास्थ्य की सुरक्षा सर्वोच्च प्राथमिकता है और किसी भी प्रकार की लापरवाही बर्दाश्त नहीं की जाएगी। वर्तमान में टाटा प्रोजेक्ट लिमिटेड द्वारा राजघाट जलप्रदाय योजना के तहत प्रत्येक घर तक शुद्ध पेयजल की आपूर्ति की जा रही है। इस जल की नियमित गुणवत्ता जांच कराई जा रही है और मानकों के अनुरूप पाए जाने पर ही इसकी आपूर्ति की जा रही है।

    नागरिकों से अपील

    नगर निगम आयुक्त ने नागरिकों से अपील की है कि वे तब तक कुओं और हैंडपंप के पानी का उपयोग पेयजल के रूप में न करें जब तक उसकी गुणवत्ता जांच पूरी न हो जाए।

  • इंदौर में बोरिंग के पानी में घुला जहर 35 सैंपल फेल फीकल बैक्टीरिया से बढ़ा स्वास्थ्य संकट

    इंदौर में बोरिंग के पानी में घुला जहर 35 सैंपल फेल फीकल बैक्टीरिया से बढ़ा स्वास्थ्य संकट


    इंदौर । इंदौर में दूषित पानी का संकट गहरा गया है जिसमें अब बोरिंग के पानी में भी फीकल कोलिफार्म बैक्टीरिया पाया गया है। इस बैक्टीरिया के कारण हैजा टाइफाइड और हेपेटाइटिस-ए जैसी गंभीर बीमारियाँ फैल रही हैं। इस समस्या का मुख्य कारण सीवेज रिसाव माना जा रहा है जो पानी में मिलकर स्वास्थ्य के लिए बड़ा खतरा बन चुका है। कलेक्टर शिवम वर्मा के अनुसार नगर निगम ने बोरिंग के कुल 69 पानी के सैंपल लिए थे जिसमें से 35 सैंपल जांच में फेल हो गए। इन सैंपलों में फीकल कोलिफार्म बैक्टीरिया पाया गया जो सीधे तौर पर स्वास्थ्य के लिए खतरे का संकेत है।

    इस बैक्टीरिया का मुख्य स्रोत सीवेज ओवरफ्लो अनुपचारित सीवेज डिस्चार्ज और खराब सेप्टिक टैंक हो सकते हैं। विशेषज्ञों का कहना है कि पानी में यह बैक्टीरिया तब घुलता है जब ड्रेनेज चैंबरों से सीवेज लीक होता है और मल-मूत्र युक्त पानी बोरिंग के पानी में मिल जाता है। इस स्थिति से इंदौर शहर के भागीरथीपुरा क्षेत्र में विशेष रूप से संकट बढ़ा है। यहां 600 से अधिक बोरिंग की गई हैं जिनका पानी कई परिवारों की जीवनरेखा है। गंदे पानी के कारण अब तक 150 से ज्यादा लोग अस्पताल में भर्ती हो चुके हैं। इनमें से 20 लोगों की हालत गंभीर है और उन्हें ICU में रखा गया है।

    इस गंभीर स्वास्थ्य संकट का मुख्य कारण पानी में फीकल कोलिफार्म बैक्टीरिया का बढ़ना है जो आंतों किडनी लिवर और इम्यून सिस्टम पर प्रभाव डाल सकता है। लंबे समय तक यह बैक्टीरिया आंतों में सूजन और कोलाइटिस जैसी समस्याओं का कारण बन सकता है जिससे शरीर में गंभीर दिक्कतें हो सकती हैं। इंदौर नगर निगम ने इस समस्या के समाधान के लिए सख्त कदम उठाने की योजना बनाई है ताकि पानी की गुणवत्ता सुधारी जा सके और लोगों को स्वच्छ पानी मिल सके।

  • जबलपुर में नालियों से गुजर रहीं पेयजल आपूर्ति की लाइनों से बढ़ रही चिंता इंदौर जैसी घटना का खतरा

    जबलपुर में नालियों से गुजर रहीं पेयजल आपूर्ति की लाइनों से बढ़ रही चिंता इंदौर जैसी घटना का खतरा


    जबलपुर । हाल ही में इंदौर में दूषित पानी पीने से हुई 15 लोगों की मौत ने प्रदेशभर में चिंता की लहर दौड़ा दी है और अब जबलपुर के नागरिकों में भी जल आपूर्ति व्यवस्था को लेकर चिंता बढ़ गई है। जबलपुर में जल वितरण पाइपलाइनों की हालत बेहद खराब है क्योंकि शहर की करीब 80 प्रतिशत पेयजल आपूर्ति लाइनें नाली-नालियों के नीचे से होकर गुजर रही हैं।

    इन पाइपलाइनों का निर्माण आमतौर पर 20 साल पहले किया गया था लेकिन कई लाइनें 40 से 50 साल पुरानी हो चुकी हैं। समय के साथ इन पाइपलाइनों में क्षरण हो चुका है और इनसे लगातार नाली के पानी धूल और मिट्टी का संपर्क होता है। इस कारण पाइपलाइनों में लीकेज हो रहा है जिससे गंदगी और दूषित पानी वितरण के दौरान पेयजल में घुलने की संभावना बढ़ गई है।

    इंदौर में हुई घटना के बाद जबलपुर नगर निगम ने इस गंभीर समस्या को लेकर सक्रियता दिखाई और जल विभाग तथा स्वास्थ्य विभाग की संयुक्त टीमों का गठन किया। ये टीमें शहर के विभिन्न हिस्सों से पेयजल के सैंपल लेकर उसकी गुणवत्ता जांचने में जुट गईं। हालांकि एक दिन सैंपल लेने के बाद विभागीय टीम की गतिविधियां सुस्त पड़ गईं जिससे इस मुद्दे को लेकर नागरिकों के बीच और भी चिंता बढ़ गई है।

    विभागीय अधिकारियों का कहना है कि शहर में जल वितरण की पाइपलाइनों के रखरखाव और सही तरीके से मरम्मत की आवश्यकता है ताकि पानी की गुणवत्ता पर कोई असर न पड़े। यह समस्या इंदौर जैसी बड़ी घटनाओं को टालने के लिए जल्द सुलझाई जानी चाहिए।नागरिकों ने इस विषय पर नगर निगम और प्रशासन से जल्द ठोस कदम उठाने की अपील की है ताकि भविष्य में दूषित पानी से कोई स्वास्थ्य संकट उत्पन्न न हो।