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  • भोपाल के कटारा हिल्स में नगर निगम के खिलाफ फूटा गुस्सा! जलभराव और गड्ढों से परेशान लोगों ने फूंका पुतला

    भोपाल के कटारा हिल्स में नगर निगम के खिलाफ फूटा गुस्सा! जलभराव और गड्ढों से परेशान लोगों ने फूंका पुतला


    भोपाल । भोपाल के कटारा हिल्स इलाके में बारिश के बीच मूलभूत सुविधाओं की बदहाल स्थिति को लेकर रहवासियों का गुस्सा रविवार को सड़क पर देखने को मिला। अमलतास चौराहे पर बड़ी संख्या में लोगों ने नगर निगम के खिलाफ प्रदर्शन करते हुए पुतला दहन किया। रहवासियों का आरोप है कि इलाके में जलभराव सड़कों पर गड्ढे गंदगी और बंद स्ट्रीट लाइट जैसी समस्याएं लंबे समय से बनी हुई हैं। बारिश के दौरान हालात और ज्यादा खराब हो जाते हैं जिससे लोगों को रोजाना परेशानी का सामना करना पड़ रहा है।

    प्रदर्शनकारियों ने नगर निगम की कार्यप्रणाली पर सवाल उठाते हुए कहा कि उनसे नियमित रूप से टैक्स वसूला जा रहा है लेकिन उसके बदले जरूरी सुविधाएं नहीं मिल रही हैं। रहवासियों के मुताबिक कटारा हिल्स की मुख्य सड़कों से लेकर कॉलोनियों के अंदर की सड़कों तक जगह जगह बड़े गड्ढे हैं। बारिश होने के बाद इन गड्ढों में पानी भर जाता है और सड़क की स्थिति का अंदाजा लगाना मुश्किल हो जाता है। इससे दोपहिया वाहन चालकों के साथ पैदल राहगीरों को भी परेशानी होती है और हादसे का खतरा बना रहता है।

    इलाके के लोगों का कहना है कि रात के समय स्थिति और गंभीर हो जाती है क्योंकि कई जगहों पर स्ट्रीट लाइटें बंद रहती हैं। अंधेरे और खराब सड़कों के कारण वाहन चालकों को गड्ढे दिखाई नहीं देते। ऐसे में दुर्घटना की आशंका बनी रहती है। रहवासियों ने मांग की है कि खराब स्ट्रीट लाइटों को जल्द दुरुस्त कराया जाए और सड़कों की मरम्मत कराकर जलभराव की समस्या का स्थायी समाधान किया जाए।

    प्रदर्शन के दौरान कांग्रेस कार्यकर्ता भी लोगों के साथ मौजूद रहे। युवक कांग्रेस के अनिकेत द्विवेदी ने वार्ड 85 के कई इलाकों में मूलभूत सुविधाओं की कमी का मुद्दा उठाया। उन्होंने कहा कि वार्ड में समस्याओं का अंबार लगा हुआ है। मुख्य सड़क से लेकर अंदरूनी मार्ग तक गड्ढों की वजह से लोगों का निकलना मुश्किल हो गया है। उन्होंने नगर निगम प्रशासन से तत्काल कार्रवाई की मांग की।

    रहवासियों ने बताया कि तेज बारिश के दौरान इलाके के कई हिस्सों में पानी जमा हो जाता है। कॉलोनियों के आसपास जलभराव के साथ कीचड़ फैलने से लोगों की मुश्किलें बढ़ जाती हैं। सफाई व्यवस्था भी संतोषजनक नहीं होने का आरोप लगाया गया। लोगों का कहना है कि जल निकासी की व्यवस्था बेहतर नहीं होने के कारण बारिश का पानी लंबे समय तक जमा रहता है और रोजमर्रा की आवाजाही प्रभावित होती है।

    प्रदर्शन के दौरान पुलिस बल भी मौके पर मौजूद रहा। पुलिस की मौजूदगी में ही प्रदर्शनकारियों ने नगर निगम का पुतला जलाया। इस दौरान लोगों ने निगम प्रशासन के खिलाफ नारेबाजी करते हुए अपनी नाराजगी जताई। प्रदर्शनकारियों ने साफ चेतावनी दी कि यदि वार्ड की मूलभूत समस्याओं का जल्द समाधान नहीं किया गया तो आंदोलन को चरणबद्ध तरीके से और व्यापक किया जाएगा।

    प्रदर्शन में मध्य प्रदेश कांग्रेस झुग्गी झोपड़ी प्रकोष्ठ के अध्यक्ष निकेश सिंह चौहान भोपाल युवा कांग्रेस ग्रामीण के अध्यक्ष राहुल मंडलोई रोहित राजोरिया शिवी शर्मा लोकेंद्र शर्मा अनिल मीणा और राजकुमार सिंह समेत कई लोग मौजूद रहे। फिलहाल कटारा हिल्स में रहवासियों के प्रदर्शन ने बारिश के दौरान शहर की जल निकासी सड़क और सफाई व्यवस्था से जुड़े सवालों को एक बार फिर सामने ला दिया है।

  • MP: .ग्वालियर में बारिश से सड़कों पर भरा घुटनों तक पानी… उसी में धरने पर बैठे विधायक

    MP: .ग्वालियर में बारिश से सड़कों पर भरा घुटनों तक पानी… उसी में धरने पर बैठे विधायक


    ग्वालियर।
    मध्य प्रदेश (Madhya Pradesh) के ग्वालियर (Gwalior) के शंकरपुर में बारिश के बाद घुटनों तक पानी भर गया। जलभराव के विरोध में कांग्रेस विधायक साहब सिंह गुर्जर (Congress MLA Sahib Singh Gurjar) पानी से भरी सड़क पर धरने पर बैठ गए। उन्होंने नगर निगम पर नालियों की सफाई और जल निकासी में लापरवाही का आरोप लगाते हुए स्थायी समाधान की मांग की।

    दरअसल, ग्वालियर शहर में झमाझम बारिश ने एक बार फिर नगर निगम के जल निकासी के दावों पर सवाल खड़े कर दिए। बारिश के बाद वार्ड क्रमांक 64 के शंकरपुर इलाके में हालात ऐसे हो गए कि सड़कें घुटनों तक पानी में डूब गईं। जलभराव के कारण स्थानीय लोगों को आने-जाने में भारी परेशानी का सामना करना पड़ा।

    बारिश के बीच जलभराव की समस्या का विरोध करने के लिए कांग्रेस के ग्रामीण विधायक साहब सिंह गुर्जर मौके पर पहुंचे। उन्होंने पानी से लबालब सड़क पर ही धरना शुरू कर दिया। विधायक के धरने में स्थानीय नागरिक भी शामिल हो गए और नगर निगम प्रशासन के खिलाफ जमकर नारेबाजी की।

    विधायक साहब सिंह गुर्जर ने मौके से फेसबुक लाइव किया और नगर निगम की कार्यप्रणाली पर नाराजगी जताई। उन्होंने कहा कि शंकरपुर में जलभराव की समस्या आज की नहीं है, बल्कि पिछले दो साल से लगातार बनी हुई है। इस समस्या को कई बार अधिकारियों के सामने उठाया गया, लेकिन इसके बावजूद अब तक इसका स्थायी समाधान नहीं किया गया। विधायक का आरोप है कि इलाके में नालियों की पर्याप्त सफाई नहीं होने और जल निकासी की उचित व्यवस्था नहीं होने के कारण बारिश होते ही सड़कें पानी में डूब जाती हैं। स्थानीय लोगों को हर बार इसी परेशानी का सामना करना पड़ता है।

    बारिश के बीच विधायक के धरने के दौरान लोगों ने ‘नगर निगम होश में आओ’ के नारे लगाए। जलभराव के बीच किया गया यह विरोध प्रदर्शन अब सोशल मीडिया पर भी चर्चा का विषय बना हुआ है। स्थानीय नागरिकों का कहना है कि बारिश के दौरान सड़क पर इतना पानी भर जाता है कि लोगों के लिए घरों से निकलना मुश्किल हो जाता है। स्कूली बच्चों, बुजुर्गों और वाहन चालकों को सबसे ज्यादा परेशानी होती है। लोगों का कहना है कि हर साल बारिश से पहले जल निकासी की व्यवस्था दुरुस्त करने के दावे किए जाते हैं, लेकिन जमीनी स्थिति बारिश के बाद सामने आ जाती है।

    विधायक और स्थानीय लोगों ने मांग की है कि शंकरपुर की जलभराव की समस्या का स्थायी समाधान किया जाए। उनका कहना है कि जब तक इलाके में बेहतर जल निकासी व्यवस्था नहीं बनाई जाती, तब तक हर बारिश में लोगों को इसी तरह परेशानी झेलनी पड़ेगी। बारिश थमी तो पानी भी धीरे-धीरे उतर गया, लेकिन शंकरपुर में जलभराव को लेकर नगर निगम की तैयारियों और दावों पर सवाल जरूर खड़े हो गए।

  • बारिश में भोपाल की सड़कें बनीं डांसिंग स्पॉट, कहीं तालाब तो कहीं गड्ढों का राज; रोज हादसों के साए में सफर

    बारिश में भोपाल की सड़कें बनीं डांसिंग स्पॉट, कहीं तालाब तो कहीं गड्ढों का राज; रोज हादसों के साए में सफर


    भोपाल । भोपाल में इस बार बारिश ने शहर की सड़कों की हालत पूरी तरह बिगाड़ दी है। राजधानी की मुख्य सड़कों से लेकर कॉलोनियों की अंदरूनी गलियों तक जगह जगह बड़े गड्ढे दिखाई दे रहे हैं। हालात ऐसे हैं कि कई जगह सड़क और गड्ढे में अंतर करना मुश्किल हो गया है। बारिश होते ही यही गड्ढे पानी से भरकर छोटे तालाब का रूप ले लेते हैं और वाहन चालकों के लिए खतरा बढ़ जाता है। ऐशबाग में तो थाने के सामने करीब 80 मीटर तक सड़क की हालत इतनी खराब है कि वहां सड़क कम और गड्ढे ज्यादा नजर आते हैं। इन रास्तों से गुजरते समय वाहन हिचकोले खाते हैं और ऐसा लगता है जैसे सड़कें डांसिंग स्पॉट बन गई हों।

    ऐशबाग थाने के सामने सड़क पर जगह जगह गड्ढे होने से स्थानीय लोगों को रोज परेशानी का सामना करना पड़ रहा है। सामान्य दिनों में किसी तरह वाहन निकल जाते हैं लेकिन बारिश के दौरान मुश्किल कई गुना बढ़ जाती है। पानी भर जाने के कारण गड्ढों की गहराई का अंदाजा नहीं लग पाता। दोपहिया वाहन चालकों के लिए स्थिति सबसे ज्यादा खतरनाक है क्योंकि अचानक गड्ढे में पहिया जाने से बाइक या स्कूटी फिसलने और पलटने का खतरा बना रहता है। स्थानीय लोगों के मुताबिक कई बार दोपहिया वाहन चालक यहां दुर्घटना का शिकार भी हो चुके हैं।

    सड़क की बदहाली का असर केवल निजी वाहन चालकों पर ही नहीं बल्कि ऑटो और अन्य सार्वजनिक परिवहन से जुड़े लोगों पर भी पड़ रहा है। ऑटो चालकों का कहना है कि बारिश के दौरान पानी और गड्ढों के बीच वाहन निकालना मुश्किल हो जाता है। यात्रियों को भी सफर के दौरान झटकों और दुर्घटना का डर बना रहता है। स्थानीय लोगों का कहना है कि सड़क की समस्या नई नहीं है और लंबे समय से मरम्मत की जरूरत महसूस की जा रही है लेकिन स्थायी समाधान नहीं हुआ।

    भोपाल के पॉश और व्यस्त इलाकों की स्थिति भी इससे अलग नहीं है। अटल पथ लिंक रोड नंबर 2 एमपी नगर न्यू मार्केट और रोशनपुरा जैसे प्रमुख इलाकों में भी कई जगह सड़क की ऊपरी परत उखड़ चुकी है और बड़े गड्ढे बन गए हैं। बारिश के दौरान इन गड्ढों में पानी जमा होने से राहगीरों और वाहन चालकों को यह पता लगाना मुश्किल होता है कि आगे सड़क कितनी गहरी है। बारिश थमने के बाद यही सड़कें धूल उड़ाती नजर आती हैं जिससे राहगीरों की परेशानी और बढ़ जाती है।

    रायसेन रोड पर भी स्थिति चिंताजनक बनी हुई है। सुभाषनगर से रत्नागिरी चौराहे तक मेट्रो का काम चलने के कारण सड़क के दोनों ओर कई स्थानों पर गड्ढे हो गए हैं। बड़ी संख्या में वाहन और लोग इस मार्ग से रोज गुजरते हैं लेकिन खराब सड़क के कारण उन्हें बेहद धीमी रफ्तार से सफर करना पड़ रहा है। रात के समय समस्या और गंभीर हो जाती है क्योंकि अंधेरे में पानी से भरे गड्ढे दिखाई नहीं देते और अचानक वाहन का संतुलन बिगड़ सकता है।

    स्थानीय लोगों का कहना है कि राजधानी की सड़कों पर बढ़ते गड्ढे केवल परेशानी नहीं बल्कि सुरक्षा का गंभीर मुद्दा हैं। लोगों ने संबंधित विभागों से बारिश के दौरान अस्थायी तौर पर गड्ढे भरने के साथ ही सड़क की स्थायी मरम्मत कराने की मांग की है। सवाल यह है कि हर साल बारिश के बाद सामने आने वाली इस समस्या का स्थायी समाधान आखिर कब होगा। फिलहाल भोपाल की सड़कों पर सफर करने वालों को गड्ढों से बचते हुए ही अपनी मंजिल तक पहुंचना पड़ रहा है।

  • एक घंटे की बारिश में डूबा बैकुंठपुर, दर्जनों दुकानों में घुसा पानी; नगर परिषद की तैयारियों की खुली पोल

    एक घंटे की बारिश में डूबा बैकुंठपुर, दर्जनों दुकानों में घुसा पानी; नगर परिषद की तैयारियों की खुली पोल


    रीवा । रीवा जिले के बैकुंठपुर नगर में सोमवार सुबह हुई करीब एक घंटे की तेज बारिश ने नगर परिषद की तैयारियों की हकीकत सामने ला दी। बारिश का दौर ज्यादा लंबा नहीं चला लेकिन इतनी ही देर में नगर के कई हिस्सों में जलभराव की स्थिति बन गई। सबसे अधिक प्रभावित वार्ड क्रमांक 10 रहा जहां केपी तिहारी के पास स्थित करीब एक दर्जन दुकानों में बारिश का पानी घुस गया। दुकानों में पानी भरने से व्यापारियों को अपना सामान सुरक्षित रखने के लिए काफी मशक्कत करनी पड़ी जबकि कई स्थानों पर बारिश रुकने के बाद भी पानी लंबे समय तक जमा रहा।

    बारिश का सबसे ज्यादा असर ज्वेलर्स बर्तन जनरल स्टोर और रेडीमेड कपड़ों की दुकानों पर देखने को मिला। दुकानदारों ने जल्दबाजी में सामान ऊंची जगहों पर रखा ताकि नुकसान कम हो सके। अचानक हुए जलभराव के कारण ग्राहकों की आवाजाही भी प्रभावित हुई और कारोबार पर असर पड़ा। स्थानीय लोगों को सड़क पर जमा पानी के बीच आवाजाही करने में भी भारी परेशानी का सामना करना पड़ा।

    स्थानीय नागरिकों का कहना है कि बैकुंठपुर में जलभराव की समस्या कोई नई बात नहीं है। हर वर्ष मानसून के दौरान यही हालात बनते हैं लेकिन इसके बावजूद स्थायी समाधान की दिशा में कोई प्रभावी कदम नहीं उठाया गया। लोगों का आरोप है कि नगर परिषद नियमित रूप से नालियों की सफाई नहीं कराती जिसके कारण उनमें कचरा जमा रहता है और बारिश का पानी आसानी से नहीं निकल पाता। परिणामस्वरूप सड़कें तालाब में बदल जाती हैं और पानी दुकानों तथा घरों तक पहुंच जाता है।

    वार्डवासियों का कहना है कि स्वच्छता और नालियों की सफाई के नाम पर हर साल लाखों रुपये खर्च किए जाते हैं लेकिन जमीनी स्तर पर उसका असर दिखाई नहीं देता। उनका कहना है कि अभी मानसून की शुरुआत ही हुई है और यदि समय रहते जल निकासी व्यवस्था को दुरुस्त नहीं किया गया तो आने वाले दिनों में हालात और गंभीर हो सकते हैं। लगातार होने वाली बारिश से लोगों को आर्थिक नुकसान के साथ दैनिक जीवन में भी कठिनाइयों का सामना करना पड़ेगा।

    स्थानीय निवासी केपी तिहारी ने बताया कि महज एक घंटे की बारिश में ही उनकी सहित आसपास की कई दुकानों में पानी भर गया। उन्होंने कहा कि इस समस्या को लेकर कई बार नगर परिषद से शिकायत की जा चुकी है लेकिन नालियों की नियमित सफाई नहीं होने के कारण हर वर्ष यही स्थिति बन जाती है। वहीं निवासी राजेश गुप्ता ने बताया कि वार्ड की कई नालियां लंबे समय से जाम हैं जिससे पानी की निकासी बाधित होती है और बारिश का पानी सीधे घरों तथा दुकानों में पहुंच जाता है।

    दूसरी ओर नगर परिषद का कहना है कि तेज बारिश के कारण कुछ स्थानों पर अस्थायी जलभराव हुआ है। अधिकारियों के मुताबिक जहां भी नालियों में रुकावट की सूचना मिली है वहां सफाई दल भेजकर तत्काल सफाई कराई जा रही है। परिषद का दावा है कि पूरे बारिश के मौसम में जल निकासी व्यवस्था पर लगातार नजर रखी जा रही है और आवश्यकता अनुसार सफाई अभियान चलाया जाएगा। हालांकि स्थानीय लोग स्थायी समाधान की मांग कर रहे हैं ताकि हर मानसून में उन्हें इसी परेशानी का सामना न करना पड़े।

  • मुंबई-दक्षिण गुजरात में बारिश बनी रेल संकट की वजह, पश्चिम रेलवे की 40 से अधिक ट्रेनें प्रभावित; हजारों यात्रियों को झेलनी पड़ी परेशानी

    मुंबई-दक्षिण गुजरात में बारिश बनी रेल संकट की वजह, पश्चिम रेलवे की 40 से अधिक ट्रेनें प्रभावित; हजारों यात्रियों को झेलनी पड़ी परेशानी

    नई दिल्ली। मुंबई और दक्षिण गुजरात में मानसून की तेज बारिश ने सोमवार को पश्चिम रेलवे के रेल परिचालन को गंभीर रूप से प्रभावित कर दिया। कई स्थानों पर रेल पटरियों पर जलभराव होने से लंबी दूरी की ट्रेनों की आवाजाही बाधित हो गई। इसके चलते 40 से अधिक ट्रेन सेवाएं प्रभावित हुईं और हजारों यात्रियों को देरी, रद्दीकरण तथा मार्ग परिवर्तन जैसी समस्याओं का सामना करना पड़ा। स्थिति को देखते हुए रेलवे प्रशासन ने राहत एवं सहायता कार्य तेज करते हुए प्रमुख स्टेशनों पर यात्रियों के लिए भोजन, पेयजल और सहायता केंद्रों की व्यवस्था की है।

    सबसे अधिक असर वसई रोड-विरार तथा सफाले-पालघर रेलखंड पर देखने को मिला, जहां भारी जलभराव के कारण ट्रेनों की आवाजाही प्रभावित हुई। दोपहर तक विरार, वाणगांव, पालघर, दहानू रोड और वलसाड सहित कई स्टेशनों पर लंबी दूरी की अनेक ट्रेनों को रोकना पड़ा। जलभराव के कारण कई रेलगाड़ियों की गति धीमी करनी पड़ी, जबकि कुछ ट्रेनों को सुरक्षा कारणों से निर्धारित मार्ग पर आगे बढ़ने की अनुमति नहीं दी गई।

    रेलवे अधिकारियों के अनुसार, दिनभर में 40 से अधिक ट्रेन सेवाएं किसी न किसी रूप में प्रभावित रहीं। इनमें कई ट्रेनों का समय बदला गया, कुछ को रद्द करना पड़ा और कई रेलगाड़ियों को उनके निर्धारित गंतव्य तक पहुंचने से पहले ही समाप्त कर दिया गया। इससे देश के विभिन्न हिस्सों से आने-जाने वाले यात्रियों को भारी असुविधा का सामना करना पड़ा।

    महाराष्ट्र के पालघर जिले में स्थिति सबसे अधिक चुनौतीपूर्ण रही, जहां सुबह कुछ ही घंटों के भीतर अत्यधिक वर्षा दर्ज की गई। लगातार बारिश के कारण रेल पटरियां जलमग्न हो गईं, जिससे परिचालन सामान्य बनाए रखना मुश्किल हो गया। इसके प्रभाव से कई प्रमुख एक्सप्रेस ट्रेनें रास्ते में फंस गईं। वहीं, गुजरात की ओर से आने वाली कुछ ट्रेनों को एहतियातन वापी और सूरत जैसे स्टेशनों पर रोक दिया गया ताकि प्रभावित रेलखंड पर अतिरिक्त दबाव न बढ़े।

    यात्रियों की सुविधा के लिए पश्चिम रेलवे ने राहत व्यवस्था भी शुरू की। विभिन्न स्वयंसेवी संगठनों के सहयोग से फंसे यात्रियों को भोजन और पेयजल उपलब्ध कराया गया। प्रमुख स्टेशनों पर सहायता केंद्र स्थापित किए गए, जहां यात्रियों को ट्रेन संचालन से जुड़ी जानकारी और आवश्यक सहयोग दिया जा रहा है। रेलवे अधिकारियों ने बताया कि यात्रियों की सुरक्षा सर्वोच्च प्राथमिकता है और मौसम की स्थिति पर लगातार निगरानी रखी जा रही है।

    भारी बारिश का असर केवल लंबी दूरी की ट्रेनों तक सीमित नहीं रहा। मुंबई की उपनगरीय लोकल रेल सेवाएं भी प्रभावित हुईं। बोरीवली और चर्चगेट के बीच लोकल ट्रेनें निर्धारित समय से देरी से चलीं, जबकि विरार-दहानू खंड पर परिचालन सबसे अधिक प्रभावित रहा। इससे दैनिक यात्रियों को भी कार्यालय और अन्य गंतव्यों तक पहुंचने में कठिनाइयों का सामना करना पड़ा।

    रेलवे प्रशासन ने यात्रियों से अपील की है कि वे यात्रा पर निकलने से पहले अपनी ट्रेन की ताजा स्थिति की जानकारी अवश्य प्राप्त करें। अधिकारियों का कहना है कि मौसम की परिस्थितियों के अनुसार परिचालन में आवश्यक बदलाव किए जा रहे हैं और जैसे ही जलभराव की स्थिति सामान्य होगी, ट्रेन सेवाओं को पूरी तरह बहाल करने का प्रयास किया जाएगा। फिलहाल प्रभावित रेलखंडों पर लगातार निगरानी रखी जा रही है और आवश्यक तकनीकी एवं राहत दल मौके पर तैनात हैं।

  • पहली बारिश में ही खुली करोड़ों की परियोजना की पोल, अटल भवन में जलभराव से निर्माण और निगरानी व्यवस्था पर सवाल

    पहली बारिश में ही खुली करोड़ों की परियोजना की पोल, अटल भवन में जलभराव से निर्माण और निगरानी व्यवस्था पर सवाल


    मध्य प्रदेश:
    की राजधानी भोपाल में हाल ही में तैयार किए गए नगर निगम के नए मुख्यालय अटल भवन की निर्माण गुणवत्ता पहली ही बारिश में सवालों के घेरे में आ गई। करोड़ों रुपये की लागत से निर्मित इस भवन में वर्षा का पानी प्रवेश कर जाने से कार्यालय परिसर के भीतर जलभराव की स्थिति बन गई। घटना के सामने आने के बाद निर्माण कार्य की गुणवत्ता, तकनीकी मानकों के पालन और निगरानी व्यवस्था को लेकर गंभीर सवाल उठने लगे हैं।

    करीब 73 करोड़ रुपये की लागत से तैयार किए गए इस भवन को आधुनिक सुविधाओं से लैस प्रशासनिक केंद्र के रूप में विकसित किया गया था। उद्देश्य यह था कि नगर निगम की विभिन्न शाखाओं को एक ही परिसर में बेहतर सुविधाओं के साथ संचालित किया जा सके। लेकिन पहली ही बारिश के दौरान भवन के भीतर पानी पहुंचने की घटना ने इस परियोजना की गुणवत्ता पर बहस छेड़ दी है।

    बारिश के दौरान भवन के विभिन्न हिस्सों में पानी जमा होने से कर्मचारियों और अधिकारियों को कामकाज में कठिनाइयों का सामना करना पड़ा। कार्यालय के भीतर जलभराव की स्थिति बनने से यह सवाल भी उठने लगा कि क्या भवन के निर्माण में जल निकासी और वर्षा प्रबंधन से जुड़े आवश्यक मानकों का पर्याप्त ध्यान रखा गया था।

    इस घटना ने निर्माण एजेंसियों की कार्यप्रणाली के साथ-साथ परियोजना की तकनीकी निगरानी पर भी प्रश्नचिह्न लगा दिए हैं। आमतौर पर इस स्तर की सार्वजनिक परियोजनाओं में निर्माण के दौरान गुणवत्ता परीक्षण, निरीक्षण और तकनीकी मूल्यांकन की कई प्रक्रियाएं अपनाई जाती हैं। ऐसे में पहली ही बारिश में सामने आई यह स्थिति इन व्यवस्थाओं की प्रभावशीलता पर भी सवाल खड़े करती है।

    विशेषज्ञों का मानना है कि किसी भी नए सरकारी भवन में वर्षा जल निकासी, छत की सीलिंग, ड्रेनेज नेटवर्क और जलरोधक व्यवस्था का विशेष महत्व होता है। यदि इन पहलुओं में किसी स्तर पर कमी रह जाए तो शुरुआती बारिश में ही ऐसी समस्याएं सामने आ सकती हैं। इसलिए तकनीकी कारणों की विस्तृत जांच आवश्यक मानी जा रही है।

    घटना के बाद भवन की गुणवत्ता को लेकर लोगों के बीच भी चर्चा तेज हो गई है। सार्वजनिक धन से निर्मित बड़ी परियोजनाओं से उच्च गुणवत्ता और दीर्घकालिक उपयोग की अपेक्षा की जाती है। ऐसे में निर्माण के तुरंत बाद सामने आई इस तरह की समस्या ने जवाबदेही और गुणवत्ता नियंत्रण को लेकर नए सवाल खड़े कर दिए हैं।

    अब निगाहें इस बात पर टिकी हैं कि संबंधित विभाग निर्माण कार्य की तकनीकी जांच कराता है या नहीं और यदि किसी स्तर पर लापरवाही या मानकों की अनदेखी पाई जाती है तो उसके लिए जिम्मेदार पक्षों के खिलाफ क्या कार्रवाई की जाती है। फिलहाल यह घटना सार्वजनिक निर्माण परियोजनाओं में गुणवत्ता नियंत्रण और प्रभावी निगरानी व्यवस्था की आवश्यकता को एक बार फिर प्रमुखता से सामने लेकर आई है।

  • मानसून से पहले भोपाल की बड़ी पोल खुली! एक साल से धंसी सड़क नहीं हुई दुरुस्त, एमपी नगर में घुटनों तक भर रहा पानी

    मानसून से पहले भोपाल की बड़ी पोल खुली! एक साल से धंसी सड़क नहीं हुई दुरुस्त, एमपी नगर में घुटनों तक भर रहा पानी


    भोपाल  मानसून की आमद से पहले राजधानी भोपाल में तैयारियों की वास्तविक तस्वीर सामने आने लगी है। शहर के सबसे व्यस्त इलाकों में शामिल एमपी नगर में एक साल पहले धंसी सड़क आज भी पूरी तरह दुरुस्त नहीं हो सकी है। नतीजा यह है कि थोड़ी सी बारिश होते ही सड़क पर घुटनों तक पानी भर जाता है और हजारों वाहन चालकों व राहगीरों को भारी परेशानियों का सामना करना पड़ता है। यह स्थिति तब है जब मानसून अभी पूरी तरह सक्रिय भी नहीं हुआ है।

    एमपी नगर स्थित बोर्ड ऑफिस चौराहे और एमपी नगर चौराहे के बीच की सड़क 17 जुलाई 2025 को अचानक धंस गई थी। जांच में सामने आया था कि यह सड़क एक पुराने नाले के ऊपर बनी हुई थी। शुरुआती स्तर पर सड़क की मरम्मत की गई, लेकिन कुछ ही दिनों बाद आसपास का हिस्सा भी कमजोर पड़ने लगा और फिर सड़क के दूसरे हिस्से में भी धंसाव की आशंका पैदा हो गई। इसके बाद लोक निर्माण विभाग (पीडब्ल्यूडी) ने स्थायी समाधान के लिए बड़े स्तर पर काम शुरू करने का निर्णय लिया।

    बताया जाता है कि जिस नाले के ऊपर सड़क बनी हुई है, वह लगभग 50 साल पुराना है। इसे मजबूत बनाने के लिए पीडब्ल्यूडी ने रेलवे अंडरपास की तर्ज पर प्री-कास्ट तकनीक से नया स्ट्रक्चर तैयार करने की योजना बनाई। हालांकि यह परियोजना शुरुआत से ही बाधाओं में घिरी रही। दो बार टेंडर जारी किए गए, लेकिन किसी एजेंसी ने काम में रुचि नहीं दिखाई। दोनों बार टेंडर निरस्त करने पड़े। तीसरी बार प्रक्रिया पूरी होने के बाद निर्माण कार्य शुरू हो सका।

    पिछले चार महीनों से चल रहे इस काम ने क्षेत्र की यातायात व्यवस्था को बुरी तरह प्रभावित किया है। ज्योति टॉकीज चौराहे से बोर्ड ऑफिस चौराहे तक आने-जाने वाले लोगों को रोज लंबा चक्कर लगाना पड़ रहा है। सड़क की एक लेन बंद होने के कारण ट्रैफिक का दबाव दूसरी सड़कों पर बढ़ गया है। चेतक ब्रिज से आने वाले वाहन चालकों को वैकल्पिक मार्ग अपनाना पड़ रहा है, जिससे समय और ईंधन दोनों की बर्बादी हो रही है।

    स्थिति तब और गंभीर हो जाती है जब बारिश होती है। हाल ही में हुई बारिश के दौरान निर्माणाधीन क्षेत्र में इतना पानी भर गया कि पैदल चलना मुश्किल हो गया। सड़क पर घुटनों तक पानी जमा हो गया और वाहन रेंगते हुए निकलते दिखाई दिए। कई कारें पानी में फंस गईं और लोगों को घंटों जाम तथा अव्यवस्था का सामना करना पड़ा।

    चिंता की बात यह है कि जिस नई तकनीक के जरिए इस समस्या का स्थायी समाधान खोजा जा रहा था, उसके बावजूद जलभराव की समस्या बरकरार दिखाई दे रही है। सड़क की जिस लेन का निर्माण कार्य पूरा बताया जा रहा है, वहां भी पानी भरने की शिकायतें सामने आई हैं। इससे परियोजना की गुणवत्ता और प्रभावशीलता पर सवाल उठने लगे हैं।

    एमपी नगर जैसे महत्वपूर्ण व्यावसायिक क्षेत्र में रोजाना लाखों लोगों की आवाजाही होती है। अनुमान है कि करीब पांच लाख लोग प्रतिदिन इस मार्ग का उपयोग करते हैं। ऐसे में सड़क निर्माण की धीमी गति और जलनिकासी व्यवस्था की खामियां नागरिकों के लिए बड़ी परेशानी बन चुकी हैं। मानसून शुरू होने से पहले यदि स्थिति में सुधार नहीं हुआ तो आने वाले दिनों में समस्या और गंभीर रूप ले सकती है।

  • पहली बारिश में डूबा भोपाल! सड़कों पर तालाब, फ्लाइओवर पर जाम और खुले नालों ने बढ़ाया खतरा

    पहली बारिश में डूबा भोपाल! सड़कों पर तालाब, फ्लाइओवर पर जाम और खुले नालों ने बढ़ाया खतरा


    मध्यप्रदेश । मध्यप्रदेश की राजधानी भोपाल में मानसून के आगमन से पहले हुई बारिश ने शहर की व्यवस्थाओं की हकीकत उजागर कर दी है। नगर निगम और प्रशासन की ओर से नाले-नालियों की सफाई, ड्रेनेज व्यवस्था को दुरुस्त करने और जलभराव वाले क्षेत्रों में विशेष इंतजाम के दावे किए गए थे, लेकिन पहली ही तेज बारिश में ये दावे धरातल पर कमजोर नजर आए। शहर के कई हिस्सों में सड़कें तालाब में तब्दील हो गईं, जबकि जलभराव के कारण यातायात व्यवस्था चरमरा गई।

    बारिश का सबसे ज्यादा असर शहर के व्यस्त मार्गों और प्रमुख चौराहों पर देखने को मिला। बोर्ड ऑफिस से ज्योति टॉकीज तक का मार्ग महज कुछ मिनटों की बारिश में पानी से भर गया। सड़क पर इतना पानी जमा हो गया कि वाहन चालकों को रास्ता पहचानने में भी परेशानी हुई। स्थानीय लोगों का कहना है कि हर साल बारिश के दौरान इस इलाके में यही स्थिति बनती है, लेकिन स्थायी समाधान आज तक नहीं निकल पाया है।

    रानी कमलापति रेलवे स्टेशन से एम्स की ओर जाने वाले फ्लाइओवर पर भी भारी जलभराव देखने को मिला। सड़क पर पानी भरने के कारण लंबा ट्रैफिक जाम लग गया। इस दौरान एक एम्बुलेंस भी वाहनों की कतार में फंस गई, जिससे आपातकालीन सेवाओं पर भी असर पड़ा। कई स्थानों पर वाहन रेंगते हुए नजर आए और लोगों को अपने गंतव्य तक पहुंचने में काफी समय लगा।

    शहर के पॉश इलाकों में शामिल रानी कमलापति स्टेशन रोड, एमपी नगर, अरेरा कॉलोनी और सात नंबर क्षेत्र भी जलभराव से अछूते नहीं रहे। इन क्षेत्रों में सड़कों पर घंटों पानी जमा रहा। कई जगहों पर जल निकासी की व्यवस्था नाकाफी साबित हुई, जिसके कारण लोगों को आवागमन में दिक्कतों का सामना करना पड़ा।

    भोपाल में अधूरी सड़क परियोजनाएं भी बारिश के दौरान बड़ी समस्या बनकर सामने आई हैं। कई इलाकों में सीवेज पाइपलाइन और अन्य निर्माण कार्यों के लिए महीनों पहले सड़कें खोदी गई थीं, लेकिन अब तक उनका पुनर्निर्माण नहीं किया गया। रचना नगर समेत कई कॉलोनियों में सड़कें गड्ढों में तब्दील हो चुकी हैं। बारिश के कारण ये गड्ढे पानी से भर गए, जिससे दुर्घटनाओं का खतरा और बढ़ गया है।

    वहीं खुले नाले भी शहरवासियों के लिए गंभीर खतरा बने हुए हैं। बागसेवनियां से कटारा हिल्स मार्ग और दस नंबर मार्केट सहित कई क्षेत्रों में नालों को अब तक ढंका नहीं गया है। बारिश के दौरान नाले और सड़क के बीच का अंतर मिट जाता है, जिससे लोगों के गिरने की आशंका बनी रहती है। स्थानीय निवासियों का कहना है कि कई बार बच्चे और राहगीर नालों में गिर चुके हैं। क्षेत्रवासियों के अनुसार पहले भी एक बच्चे की जान नाले में गिरने से जा चुकी है, लेकिन इसके बावजूद समस्या का समाधान नहीं हुआ।

    नगर निगम ने मानसून से पहले विशेष सफाई अभियान चलाने और जलभराव की समस्या को नियंत्रित करने का दावा किया था। हालांकि पहली ही बारिश ने इन तैयारियों की प्रभावशीलता पर सवाल खड़े कर दिए हैं। शहरवासियों का कहना है कि यदि मानसून की शुरुआत में ही यह स्थिति है, तो आगामी दिनों में भारी बारिश के दौरान हालात और गंभीर हो सकते हैं।

    अब लोगों की नजर प्रशासन और नगर निगम पर है कि वे मानसून के दौरान जलभराव, खुले नालों और अधूरी सड़कों जैसी समस्याओं का समाधान कितनी तेजी से कर पाते हैं। राजधानी के नागरिक उम्मीद कर रहे हैं कि इस बार बारिश उनके लिए राहत लेकर आए, परेशानी नहीं।