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  • चीन को अमेरिकी हथियार बेचने के दावे पर ट्रंप का यू-टर्न? अपने ही राजदूत के बयान से किया किनारा

    चीन को अमेरिकी हथियार बेचने के दावे पर ट्रंप का यू-टर्न? अपने ही राजदूत के बयान से किया किनारा

    वाशिंगटन। चीन को अमेरिकी हथियार बेचने के दावे को लेकर ट्रंप प्रशासन में ही विरोधाभासी बयान सामने आए हैं। अमेरिका में चीन के राजदूत डेविड पर्ड्यू ने कहा था कि राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने चीनी राष्ट्रपति शी जिनपिंग से पूछा था कि क्या चीन अमेरिका से हथियार खरीदना चाहेगा। हालांकि, ट्रंप ने इस दावे से अनभिज्ञता जताते हुए कहा कि उन्हें ऐसी किसी बातचीत की जानकारी नहीं है। बाद में उन्होंने यह जरूर कहा कि चीन अमेरिकी हथियार खरीदना चाहेगा, क्योंकि अमेरिका बेहतर हथियार बनाता है।

    ट्रंप से सोमवार को पत्रकारों ने पर्ड्यू के बयान को लेकर सवाल किया। ट्रंप ने कहा कि उन्होंने शी के साथ चीन को हथियार बेचने की बात नहीं की थी और संकेत दिया कि संभव है पर्ड्यू ताइवान से संबंधित बातचीत का जिक्र कर रहे हों। हालांकि, उन्होंने यह भी कहा कि चीन अमेरिकी हथियार खरीदना चाहे तो यह अच्छा विचार हो सकता है।

    विदेश विभाग बोला- चीन को हथियार बेचने की कोई योजना नहीं

    ट्रंप के बयान के बाद अमेरिकी विदेश विभाग ने भी स्थिति स्पष्ट की। विभाग ने कहा कि अमेरिकी कानून चीन को हथियारों की बिक्री पर रोक लगाता है और चीन को हथियार बेचने का न तो कोई प्रस्ताव है और न ही ऐसी कोई योजना। एक अमेरिकी अधिकारी ने भी कहा कि सरकार की चीन को हथियार बेचने की कोई योजना नहीं है।

    इससे पर्ड्यू के बयान और प्रशासन की आधिकारिक स्थिति के बीच अंतर साफ दिखाई देता है। पर्ड्यू ने यह नहीं बताया था कि ट्रंप ने शी से यह सवाल कब और किस संदर्भ में पूछा था। उन्होंने यह भी नहीं बताया कि शी ने इसके जवाब में क्या कहा।

    पर्ड्यू ने फॉक्स न्यूज पर किया था दावा

    अमेरिकी राजदूत डेविड पर्ड्यू ने रविवार को फॉक्स न्यूज के कार्यक्रम में ट्रंप-शी बैठक से जुड़े सवालों का जवाब देते हुए कहा था कि राष्ट्रपति ट्रंप दुनिया के दूसरे देशों को अमेरिकी हथियार बेचने की बात करते रहे हैं और उन्होंने एक मौके पर शी जिनपिंग से भी पूछा था कि क्या वह कुछ अमेरिकी हथियार खरीदना चाहेंगे।

    पर्ड्यू का यह बयान ऐसे समय आया जब ताइवान को अमेरिकी हथियारों की बिक्री को लेकर वाशिंगटन और बीजिंग के बीच तनाव बना हुआ है। पर्ड्यू ने साथ ही कहा था कि ट्रंप ताइवान के प्रति अमेरिकी नीति में बदलाव नहीं कर रहे हैं और ‘वन चाइना’ नीति पर उनका रुख कायम है।

    ताइवान को हथियारों की बिक्री पर चीन का विरोध

    ताइवान को अमेरिकी हथियारों की बिक्री लंबे समय से अमेरिका और चीन के बीच विवाद का मुद्दा रही है। बीजिंग वॉशिंगटन से ताइवान को हथियारों की बिक्री रोकने की मांग करता रहा है। दूसरी ओर, अमेरिका ताइवान को अपनी रक्षा क्षमता मजबूत करने के लिए सैन्य उपकरण उपलब्ध कराता रहा है।

    ट्रंप प्रशासन ने ताइवान के लिए करीब 14 अरब डॉलर के हथियार पैकेज पर फिलहाल रोक लगा रखी है। इस मुद्दे को ट्रंप ने चीन के साथ बातचीत में एक संभावित सौदेबाजी के विषय के रूप में भी पेश किया है।

    अगर चीन को हथियार बेचने की बात होती तो क्यों अहम होता मामला?

    अमेरिका और चीन के बीच सैन्य प्रतिस्पर्धा को देखते हुए चीन को अमेरिकी हथियारों की बिक्री अमेरिकी नीति में बड़ा बदलाव होती। रिपोर्टों के मुताबिक अमेरिका ने आखिरी बार 1980 के दशक में चीन को हथियार बेचे थे। मौजूदा समय में चीन को अमेरिका का प्रमुख रणनीतिक प्रतिस्पर्धी माना जाता है।

    फिलहाल अमेरिकी प्रशासन की आधिकारिक स्थिति स्पष्ट है कि चीन को हथियार बेचने का कोई प्रस्ताव या योजना नहीं है। वहीं, ट्रंप और उनके राजदूत डेविड पर्ड्यू के बयानों में अंतर ने इस मुद्दे को चर्चा में ला दिया है। चीन ने भी ट्रंप के कथित प्रस्ताव की पुष्टि नहीं की है।

  • भारतीय सेना की आर्मरी से हथियार और गोला-बारूद गायब, रिकॉर्ड में खामियों ने चोरी की जांच को बनाया पेचीदा

    भारतीय सेना की आर्मरी से हथियार और गोला-बारूद गायब, रिकॉर्ड में खामियों ने चोरी की जांच को बनाया पेचीदा


    नई दिल्ली । 
    सिकंदराबाद कैंट में भारतीय सेना के हथियार चोरी होने का मामला लगातार गंभीर होता जा रहा है। सेना और तेलंगाना पुलिस की जांच में अब एक वरिष्ठ सैन्य अधिकारी से पूछताछ की गई है। जांच के दौरान आर्मरी में रखे हथियारों और गोला-बारूद से जुड़े रिकॉर्ड में भी कई खामियां सामने आने की बात कही जा रही है। बताया जा रहा है कि संबंधित रजिस्टर कई महीनों से ठीक तरीके से मेंटेन नहीं किए गए थे।

    इस मामले में सिकंदराबाद कैंट की 20 मद्रास रेजिमेंट की एक यूनिट से जुड़े हथियार गायब पाए गए हैं। चोरी हुए सामान में चार AK-203 असॉल्ट राइफल, सात पिस्टल और एक INSAS राइफल शामिल हैं। इसके अलावा एक हजार से अधिक राउंड गोला-बारूद और पैसिव नाइट-विजन बाइनोकुलर्स की एक जोड़ी भी गायब मिली है। हथियारों की संख्या और उनकी संवेदनशील प्रकृति को देखते हुए जांच एजेंसियां हर पहलू की पड़ताल कर रही हैं।

    मामले की जांच के दौरान 20 मद्रास रेजिमेंट की संबंधित यूनिट के एक वरिष्ठ अधिकारी से सेना के अधिकारियों ने पूछताछ की है। तेलंगाना पुलिस ने भी उनसे जानकारी ली है। पूछताछ का एक प्रमुख आधार आर्मरी के रिकॉर्ड से जुड़ी कथित लापरवाही बताई जा रही है। जांच में सामने आया है कि हथियारों से संबंधित बही-खाते या रजिस्टर कई महीनों तक सही तरीके से अपडेट नहीं किए गए थे।

    हथियार चोरी का मामला 31 अगस्त की सुबह करीब 7:50 बजे सामने आया था। एक वरिष्ठ सैन्य अधिकारी की ओर से मलकाजगिरी कमिश्नरेट के बोल्लाराम पुलिस स्टेशन में शिकायत दर्ज कराई गई थी। शिकायत के अनुसार, जब हथियार और गोला-बारूद रखने की जगह खोली गई तो वहां के ताले टूटे हुए मिले। इसके बाद सामान और उससे जुड़े रिकॉर्ड की जांच की गई।

    हथियारों और गोला-बारूद की आखिरी भौतिक गिनती 30 अगस्त को शाम करीब छह बजे की गई थी। इसके बाद संबंधित भंडारण स्थान को बंद कर दिया गया था। शुरुआती जांच में पुलिस ने अनुमान लगाया था कि चोरी 30 और 31 अगस्त की दरम्यानी रात हुई होगी।

    हालांकि, अब जांच की दिशा कुछ बदलती नजर आ रही है। पुलिस इस संभावना की भी जांच कर रही है कि हथियार ताले टूटे मिलने की घटना से पहले ही गायब हो चुके हों। आर्मरी के रिकॉर्ड में पर्याप्त जानकारी नहीं होने के कारण यह स्पष्ट करना मुश्किल हो रहा है कि 30 अगस्त की शाम को वास्तविक रूप से सभी हथियार वहां मौजूद थे या नहीं।

    एक वरिष्ठ पुलिस अधिकारी के मुताबिक, हथियारों के भंडारण वाले स्थान की सुरक्षा नियमित रूप से की जाती है। वहां तैनात सुरक्षाकर्मियों ने भी किसी तरह की सेंधमारी देखने से इनकार किया है। उनके बयानों को जांच का हिस्सा बनाया गया है। अधिकारियों के अनुसार, हथियारों का हिसाब नियमित रूप से किया जाना जरूरी है, लेकिन रिकॉर्ड में मिली कथित खामियां जांच के लिए महत्वपूर्ण सवाल खड़े कर रही हैं।

    फिलहाल सेना और तेलंगाना पुलिस चोरी हुए हथियारों, गोला-बारूद और अन्य सामान का पता लगाने के साथ यह समझने की कोशिश कर रही हैं कि वे आखिर कब और किन परिस्थितियों में गायब हुए। रिकॉर्ड में कमी, सुरक्षा व्यवस्था और संबंधित अधिकारियों की भूमिका समेत विभिन्न पहलुओं की जांच जारी है। मामले में आगे की कार्रवाई जांच के निष्कर्षों के आधार पर तय की जाएगी।

  • सीमा पार अफीम तस्करी और ड्रग्स के बदले हथियार भेजने वाले नेटवर्क के चार कथित सदस्य गिरफ्तार, फंडिंग कनेक्शन की जांच

    सीमा पार अफीम तस्करी और ड्रग्स के बदले हथियार भेजने वाले नेटवर्क के चार कथित सदस्य गिरफ्तार, फंडिंग कनेक्शन की जांच

    नई दिल्ली । दिल्ली पुलिस की क्राइम ब्रांच ने सीमा पार नशीले पदार्थों की तस्करी और ड्रग्स के बदले हथियारों की आपूर्ति से जुड़े एक कथित अंतरराष्ट्रीय नार्को-टेरर नेटवर्क का खुलासा करने का दावा किया है। पुलिस के मुताबिक इस नेटवर्क के तार नामित खालिस्तानी आतंकवादी अरशदीप सिंह गिल उर्फ अर्श डल्ला से जुड़े हैं। जांच एजेंसी ने इस मामले में चार कथित सदस्यों को गिरफ्तार किया है। कार्रवाई के दौरान कुल 5.138 किलोग्राम अफीम बरामद किए जाने की जानकारी सामने आई है।

    पुलिस के अनुसार यह नेटवर्क केवल नशीले पदार्थों की तस्करी तक सीमित नहीं था, बल्कि इसके जरिए आतंकी गतिविधियों के लिए धन जुटाने की भी कोशिश की जा रही थी। जांच में ड्रग्स की तस्करी और हथियारों की आपूर्ति के बीच कथित संबंध सामने आया है। बताया जा रहा है कि नेटवर्क सीमा पार से अफीम की तस्करी करता था और इसके बदले हथियार भेजने की गतिविधियों में भी शामिल था। मामले की गंभीरता को देखते हुए पुलिस गिरफ्तार आरोपियों से पूछताछ कर नेटवर्क से जुड़े अन्य लोगों की जानकारी जुटा रही है।

    क्राइम ब्रांच की द्वारका यूनिट ने यह कार्रवाई की। पुलिस अब गिरफ्तार किए गए चारों कथित सदस्यों की भूमिका, उनके आपसी संपर्क और नेटवर्क के दूसरे हिस्सों के बारे में जानकारी जुटा रही है। जांच का एक प्रमुख पहलू यह भी है कि बरामद नशीले पदार्थों को कहां से लाया गया था और इन्हें आगे किन लोगों तक पहुंचाया जाना था। इसके अलावा हथियारों की कथित आपूर्ति से जुड़े संपर्कों की भी पड़ताल की जा रही है।

    नार्को-टेरर नेटवर्क में नशीले पदार्थों की तस्करी से हासिल धन का इस्तेमाल आतंकी गतिविधियों के लिए किए जाने का आरोप है। ऐसे मामलों में सुरक्षा एजेंसियां तस्करी के रास्तों, आर्थिक लेनदेन, संपर्कों और सीमा पार मौजूद नेटवर्क की कड़ियों को जोड़ने का प्रयास करती हैं। दिल्ली में सामने आया यह मामला भी इसी दिशा में महत्वपूर्ण माना जा रहा है, क्योंकि पुलिस ने इसे अंतरराष्ट्रीय स्तर पर संचालित कथित नेटवर्क से जोड़कर जांच शुरू की है।

    पुलिस की कार्रवाई ऐसे समय में सामने आई है जब सीमा पार से नशीले पदार्थों और हथियारों की तस्करी को सुरक्षा के लिए गंभीर चुनौती माना जाता है। जांच एजेंसियों के लिए इस तरह के नेटवर्क का पता लगाना इसलिए भी महत्वपूर्ण है क्योंकि नशीले पदार्थों से मिलने वाले धन का इस्तेमाल हिंसक और आपराधिक गतिविधियों में किए जाने की आशंका रहती है।

    फिलहाल गिरफ्तार चारों कथित आरोपियों से पूछताछ जारी है। पुलिस उनके मोबाइल फोन, संपर्कों और आर्थिक गतिविधियों से जुड़ी जानकारी की जांच कर सकती है, ताकि नेटवर्क की पूरी संरचना सामने लाई जा सके। साथ ही यह पता लगाने की कोशिश होगी कि इस मॉड्यूल में कितने लोग सक्रिय थे और इसका संचालन किन स्थानों से किया जा रहा था।

    पुलिस की जांच में यदि सीमा पार संपर्क, हथियारों की आपूर्ति और आतंकी फंडिंग से जुड़े अतिरिक्त तथ्य सामने आते हैं तो मामले का दायरा और बढ़ सकता है। फिलहाल 5.138 किलोग्राम अफीम की बरामदगी और चार कथित सदस्यों की गिरफ्तारी को शुरुआती कार्रवाई के तौर पर देखा जा रहा है। जांच आगे बढ़ने के साथ नेटवर्क से जुड़े अन्य संदिग्धों, तस्करी के रास्तों और कथित आतंकी फंडिंग की पूरी कड़ी सामने आने की उम्मीद है।

  • सीवान फायरिंग विवाद के बीच तेजस्वी यादव का 19 अगस्त को राजभवन मार्च,बिहार पुलिस ने घातक हथियारों पर लगाई रोक

    सीवान फायरिंग विवाद के बीच तेजस्वी यादव का 19 अगस्त को राजभवन मार्च,बिहार पुलिस ने घातक हथियारों पर लगाई रोक

    नई दिल्ली । बिहार के सीवान में छात्र आंदोलन के दौरान पुलिस की ओर से AK-47 से फायरिंग के मामले ने राज्य की राजनीति और कानून-व्यवस्था को लेकर बहस तेज कर दी है। घटना के विरोध में नेता प्रतिपक्ष तेजस्वी यादव ने 19 अगस्त को पटना में राजभवन मार्च निकालने का ऐलान किया है। इसी बीच बिहार पुलिस मुख्यालय ने भीड़ नियंत्रण और सामान्य विधि-व्यवस्था की ड्यूटी में AK-47, INSAS और SLR जैसे असॉल्ट हथियारों के इस्तेमाल पर रोक लगाने का निर्देश जारी किया है।

    सीवान में बिहार बंद और छात्र आंदोलन के दौरान पुलिस कार्रवाई के बीच एक जवान के AK-47 से फायरिंग करने का वीडियो सामने आया था। इस घटना में तीन छात्रों के घायल होने की जानकारी सामने आई। घटना के बाद पुलिस की कार्रवाई को लेकर विपक्ष ने सरकार पर सवाल उठाए और प्रदर्शनकारियों के बीच इस तरह के घातक हथियार के इस्तेमाल पर जवाब मांगा।

    मामले के सामने आने के बाद संबंधित पुलिस जवान को निलंबित किया गया। हालांकि विपक्ष का कहना है कि केवल एक जवान के खिलाफ कार्रवाई पर्याप्त नहीं है और फायरिंग के आदेश तथा पूरी कार्रवाई की जिम्मेदारी तय की जानी चाहिए। घटना को लेकर अलग-अलग दावे भी सामने आए हैं, इसलिए पूरे घटनाक्रम की जांच को महत्वपूर्ण माना जा रहा है।

    तेजस्वी यादव ने सीवान की घटना को लेकर सरकार पर निशाना साधते हुए पूछा कि छात्रों के आंदोलन के दौरान AK-47 से फायरिंग का आदेश किस स्तर से दिया गया। उन्होंने मामले में जिम्मेदार अधिकारियों के खिलाफ भी कार्रवाई की मांग की है। इसी मुद्दे को लेकर राष्ट्रीय जनता दल ने 19 अगस्त को पटना में पार्टी कार्यालय से राजभवन या लोक भवन तक मार्च निकालने का निर्णय लिया है।

    प्रस्तावित मार्च में पार्टी के विधायक, विधान परिषद सदस्य और कार्यकर्ताओं के शामिल होने की बात कही गई है। तेजस्वी यादव के नेतृत्व में होने वाले इस मार्च के जरिए विपक्ष सीवान फायरिंग मामले में जवाबदेही तय करने और पुलिस कार्रवाई की जांच की मांग उठाएगा।

    इसी बीच बिहार पुलिस मुख्यालय के नए निर्देश को महत्वपूर्ण प्रशासनिक कदम माना जा रहा है। निर्देश के अनुसार सामान्य कानून-व्यवस्था और भीड़ नियंत्रण की ड्यूटी के दौरान AK-47, INSAS और SLR जैसे असॉल्ट हथियारों का इस्तेमाल नहीं किया जाएगा। इसका उद्देश्य भीड़ नियंत्रण के दौरान बल प्रयोग को लेकर स्पष्ट व्यवस्था सुनिश्चित करना है।

    पुलिस मुख्यालय ने यह भी स्पष्ट किया है कि इन हथियारों का इस्तेमाल पूरी तरह समाप्त नहीं किया गया है। उग्रवाद, आतंकवाद या बड़े अपराधियों के खिलाफ विशेष अभियानों जैसी परिस्थितियों में इनका इस्तेमाल किया जा सकता है। हालांकि सामान्य प्रदर्शन, भीड़ नियंत्रण या कानून-व्यवस्था की ड्यूटी में इन हथियारों के प्रयोग की अनुमति नहीं होगी।

    विशेष परिस्थिति में ऐसे हथियारों को साथ रखना जरूरी होने पर भी भीड़ नियंत्रण के दौरान इनके इस्तेमाल पर रोक लागू रहेगी। जिला स्तर पर पुलिस अधिकारियों और जवानों को नए निर्देशों की जानकारी देने तथा उनके पालन को सुनिश्चित करने की जिम्मेदारी भी तय की गई है।

    सीवान की घटना के बाद अब बिहार में पुलिस की भीड़ नियंत्रण नीति और प्रदर्शन के दौरान बल प्रयोग को लेकर राजनीतिक बहस तेज हो गई है। विपक्ष जिम्मेदारी तय करने की मांग कर रहा है, जबकि पुलिस प्रशासन ने असॉल्ट हथियारों के इस्तेमाल को लेकर स्पष्ट दिशा-निर्देश जारी किए हैं।

    अब 19 अगस्त को प्रस्तावित तेजस्वी यादव के राजभवन मार्च पर राजनीतिक और प्रशासनिक दोनों स्तरों पर नजर रहेगी। सीवान की घटना के बाद लिया गया हथियार संबंधी निर्णय आने वाले समय में बिहार में कानून-व्यवस्था और विरोध प्रदर्शनों से निपटने की रणनीति के लिए महत्वपूर्ण माना जा रहा है।

  • चीन के 4 कार्गो विमान गुपचुप तरीके से ईरान पहुंचे…. हथियार भेजने का दावा

    चीन के 4 कार्गो विमान गुपचुप तरीके से ईरान पहुंचे…. हथियार भेजने का दावा


    तेहरान।
    मध्य एशिया (Central Asia) में जारी तनाव के बीच एक नई घटना सामने आई है। सोशल मीडिया पर एक वीडियो शेयर करते हुए कमेंटेटर मारियो नॉफाल (Commentator Mario Nofal.) ने दावा किया है कि चीन के चार कार्गो विमान (Four Cargo Planes) ईरान (Iran) में गुपचुप तरीके से उतरे हैं। उन्होंने दावा किया कि लैंडिंग से पहले विमानों ने अपने ट्रांसपॉन्डर बंद कर दिए जिससे उनकी जानकारी किसी को हासिल ना हो सके। एक दिन पहले ही शी जिनपिंग (Xi Jinping) ने अमेरिका से वादा किया था कि वह ईरान को हथियारों की कोई सप्लाई नहीं करेंगे।

    अब इस मामले के जानकारों कहना है कि चारों विमानों का इस तरह से लैंडिंग से पहले ट्रांसपॉन्डर बंद करना कोई तकनीकी खामी नहीं हो सकती है। हालांकि इन विमानों को लेकर ना तो ईरान की तरफ से और ना ही चीन की तरफ से कोई आधिकारिक जानकारी सामने आई है। चीन ने ईरान को किसी तरह के सहयोग देने के आरोपों को खारिज किया है। चीनी विदेश मंत्रालय के प्रवक्ता लिन जियान ने बुधवार को कहा कि इस तरह की रिपोर्ट एकदम झूठी हैं। चीन ने ईरान को कोई सैटलाइट हेल्प भी नहीं की है।

    मीडिया रिपोर्ट्स में दावा किया जा रहा था कि पड़ोसी देशों में अमेरिका के बेस ध्वस्त करने के लिए चीन उनसकी सहायता कर रहा है। डोनाल्ड ट्रंप ने भी चीन को धमकी दी थी कि वह अगर किसी भी रूप में दखल देता है तो इसके परिणाम बहुत बुरे होंगे। एविएशन एक्सपर्ट का कहना है कि इस तरह से विमानों का ट्रांसपॉन्डर बंद कर लेना सामान्य तो नहीं है। हो सकता है कि किसी ऑपरेशनल या फिर सुरक्षा कारणों से ऐसा किया गया हो।

    जानकारों का कहना है कि लगातार कई विमानों का एक ही पैटर्न पर लैंड करना संदेह बढ़ाता है। अमेरिका और इजरायल के बीच थोड़ा तनाव इस बात से कम होता नजर आ रहा है कि दोनों ही देशों ने दावा किया है कि कमर्शल जहाजों के लिए होर्मुज को खोल दिया गया है। ट्रंप ने कहा कि होर्मुज सभी जहाजों के लिए खोल दिया जाएगा। हालांकि ईरान के लिए उनकी नाकेबंदी जारी रहेगी।

    वाशिंगटन और तेहरान ने 7 अप्रैल को दो सप्ताह के युद्धविराम की घोषणा की। इस्लामाबाद में हुई बाद की बातचीत बिना किसी नतीजे के समाप्त हो गई। हालांकि शत्रुता की पुनः शुरुआत की कोई घोषणा नहीं की गई, लेकिन अमेरिका ने ईरानी बंदरगाहों की नाकाबंदी शुरू कर दी। अब वार्ता और युद्ध को लेकर एक अनिश्चितता का माहौल बना हुआ है। होर्मुज की खबर आने के बाद वैश्विक बाजार में थोड़ा सुधार जरूर हुआ है।

  • पीएम मोदी करेंगे इजरायल दौरा, एंटी-बैलिस्टिक मिसाइल समेत कई हथियारों पर हो सकती है डील

    पीएम मोदी करेंगे इजरायल दौरा, एंटी-बैलिस्टिक मिसाइल समेत कई हथियारों पर हो सकती है डील


    नई दिल्ली । प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी 25-26 फरवरी को दो दिन के इजरायल दौरे पर जा रहे हैं। इस दौरे का उद्देश्य भारत और इजरायल के बीच रक्षा और रणनीतिक सहयोग को और मजबूत करना है। दोनों देश मिलकर नई रक्षा तकनीक और सुरक्षा प्रणाली पर काम बढ़ाना चाहते हैं। दौरे में सुरक्षा सहयोग पर एक समझौता ज्ञापन (MoU) साइन होने की उम्मीद है। हालांकि, कोई बड़ा रक्षा सौदा इस दौरे में साइन नहीं होगा, क्योंकि दोनों देशों के बीच रक्षा सहयोग पहले से ही जारी है। आने वाले वर्षों में यह सहयोग करीब 10 अरब डॉलर का माना जा रहा है।

    नई रक्षा तकनीक पर फोकस
    एक रिपोर्ट के अनुसार, इजरायल भारत को नई रक्षा तकनीक देने के लिए तैयार है, जिसमें लेजर आधारित डिफेंस सिस्टम, लंबी दूरी की मिसाइलें और ड्रोन शामिल हैं। बताया जा रहा है कि इस बार इजरायल ऐसी तकनीक भी साझा कर सकता है, जो उसने पहले नहीं दी थी। भारत और इजरायल मिलकर एंटी-बैलिस्टिक मिसाइल डिफेंस सिस्टम पर काम कर सकते हैं। यह भारत के मिशन सुदर्शन का अहम हिस्सा है, जिसका उद्देश्य देश को दुश्मन की लंबी दूरी की मिसाइलों से बचाना है। इजराइल के पास एरो, डेविड स्लिंग और आयरन डोम जैसे मजबूत रक्षा सिस्टम हैं।

    लंबी दूरी के हथियारों की खरीद
    भारत लंबी दूरी की मिसाइलें और ऐसे ड्रोन खरीदने पर भी विचार कर रहा है, जो दुश्मन की सीमा के अंदर तक मार कर सकें। भारत पहले भी रैंपेज मिसाइल और अन्य हथियारों का उपयोग कर चुका है। नौसेना भी अपने जहाजों की सुरक्षा के लिए बराक मिसाइल सिस्टम के नए वर्जन को खरीदने पर विचार कर रही है।

    अन्य क्षेत्रों में सहयोग
    रक्षा के अलावा दोनों देश विज्ञान, खेती, साफ पानी और नई तकनीक जैसे क्वांटम कंप्यूटिंग पर भी बातचीत करेंगे। पीएम मोदी और इजरायल के प्रधानमंत्री बेंजामिन नेतन्याहू के बीच अच्छे संबंध माने जाते हैं। दोनों देश आतंकवाद के खिलाफ एक जैसी सोच रखते हैं और इस दौरे से दोनों देशों के बीच व्यापक सहयोग को और मजबूत करने की उम्मीद है।

  • J&K: अंतरराष्ट्रीय सीमा पर ड्रोन से गिराई गई हथियारों की खेप, पिस्तौल, कारतूस और ग्रेनेड बरामद

    J&K: अंतरराष्ट्रीय सीमा पर ड्रोन से गिराई गई हथियारों की खेप, पिस्तौल, कारतूस और ग्रेनेड बरामद


    श्रीनगर।
    जम्मू-कश्मीर (Jammu and Kashmir) के सांबा जिले (Samba district) में अंतरराष्ट्रीय सीमा (International Border) के पास पाकिस्तान की तरफ से ड्रोन के जरिए गिराई गई हथियारों की खेप बरामद की गई है। अधिकारियों ने शनिवार को यह जानकारी दी। उन्होंने बताया कि 2 पिस्तौल, 3 मैगजीन, 16 कारतूस और एक ग्रेनेड सहित अन्य सामान बरामद किया गया है। उन्होंने कहा कि गणतंत्र दिवस समारोह (Republic Day celebrations) को बाधित करने के आतंकवादियों के किसी भी प्रयास को विफल करने के लिए सुरक्षा व्यवस्था कड़ी कर दी गई है।

    अधिकारियों ने बताया कि सीमा पार से ड्रोन की संदिग्ध गतिविधि की सूचना मिलने के बाद सीमा सुरक्षा बल (BSF) और जम्मू-कश्मीर पुलिस के विशेष अभियान समूह (SOG) की एक संयुक्त टीम ने शुक्रवार देर रात घगवाल क्षेत्र के पलोरा गांव में तलाश अभियान शुरू किया। अधिकारियों के अनुसार, तलाशी दल को एक नाले के किनारे पीले रंग की टेप में लिपटा पैकेट मिला, जिसे बम निरोधक दस्ते की मदद से खोला गया। उन्होंने बताया कि पैकेट से हथियार बरामद किए गए। अधिकारियों ने बताया कि अंतिम सूचना मिलने तक तलाश अभियान जारी था।


    ढलान से गिरने से सेना के 2 कुलियों की मौत

    दूसरी ओर, उत्तरी कश्मीर के बारामूला जिले के गुलमर्ग सेक्टर में नियंत्रण रेखा के पास ढलान से फिसलकर गिरने से सेना के 2 नागरिक कुलियों की मौत हो गई और उनके शवों को बरामद किया गया। अधिकारियों ने कहा दोनों कुलियों की पहचान लियाकत अहमद दीदार और इशाक अहमद खटाना के रूप में हुई है। दोनों बारामूला के चंदूसा के रहने वाले थे। दोनों कुली गुरुवार दोपहर एक अग्रिम क्षेत्र से फिसलकर एक नाले में गिर गए थे। घटना के तुरंत बाद श्रीनगर स्थित 15 कोर के नियंत्रण में आने वाले गुलमर्ग सेक्टर में बचाव अभियान शुरू किया गया। खोज अभियान को जम्मू क्षेत्र के पुंछ सेक्टर तक बढ़ाया गया क्योंकि यह दुर्घटनास्थल के निकट है। नियंत्रण रेखा का पुंछ क्षेत्र सेना की नगरोटा स्थित व्हाइट नाइट (16) कोर के अधिकार क्षेत्र में आता है।

  • MP: बालाघाट के जंगल से नक्सली डंप से लाखों रुपये बरामद, भारी मात्रा में हथियार भी मिले

    MP: बालाघाट के जंगल से नक्सली डंप से लाखों रुपये बरामद, भारी मात्रा में हथियार भी मिले


    बालाघाट।
    मध्य प्रदेश पुलिस (Madhya Pradesh Police) को हाल ही में उस वक्त एक बड़ी सफलता मिली, जब उसने बालाघाट (Balaghat) में नक्सलियों (Naxalites) से अबतक की सबसे बड़ी रिकवरी की। इस दौरान पुलिस ने जंगलों में छुपाकर रखी गई माओवादियों की करीब साढ़े ग्यारह लाख रुपए की नगद राशि बरामद (Cash Amount Recovered) की। पुलिस ने इस कार्रवाई को आत्मसमर्पण करने वाले नक्सलियों से मिली गोपनीय जानकारी के आधार पर अंजाम दिया।

    इस बारे में एक प्रेस नोट जारी करते हुए बालाघाट पुलिस ने बताया कि आत्मसमर्पण करने वाले नक्सलियों से उनके सहयोगियों एवं जंगल मे छिपाए गए डंप के संबध मे लगातार पूछताछ की जा रही है। इसी दौरान आत्मसमर्पित नक्सलियों से पूछताछ के आधार पर बालाघाट के विभिन्न जंगलों में डम्प करके छिपाए गए 11 लाख 57 हजार 385 रुपए नगद की रिकवरी की गई, जो बालाघाट में नक्सलियों से की गई अब तक की सबसे बडी कैश रिकवरी है।

    पुलिस ने बताया कि इसके अलावा आत्मसमर्पण किए हुए नक्सलियों की निशादेही से बालाघाट के विभिन्न जंगल से भारी मात्रा मे डम्प किए गए रायफल, पिस्टल, एम्युनेशन, ग्रेनेड लॉन्चर, इलेक्ट्रॉनिक सामान, IED निर्माण सामग्री एवं विस्फोटक सहित अन्य सामग्रियां जब्त की गई हैं।


    इन हथियारों व विस्फोटक सामग्री की हुई बरामदगी

    4 सेमीऑटोमैटिक राइफल, 1 ग्रेनेड लॉन्चर, 1 बोल्ट एक्शन राइफल, 8 पम्प एक्शन सिंगल शॉट राइफल, 1 हैंड मेड देशी कट्टा, 5 इलेक्ट्रिक डेटोनेटर, 1 वोल्ट मीटर, 4 बैटरीसेल, 451 राउंड कारतूस, 26 मैगजीन, 1 क्लेमोर माइन्स पाइप, 500 ग्राम बारूद, 16 किलो विस्फोटक सामग्री, 22 नग मेटल स्पाइक्स, 2 किलो बोल्ट व छर्रे, 4 मोटोरोला मैन पैक सेट, 1 कैमरा व बड़ी संख्या में अन्य इलेक्ट्रॉनिक डिवाइस।

    इसके अलावा दैनिक उपयोग कि सामग्री टेंट बनाने का सामान, नक्सल वर्दी, पिड्डु बैग, नक्सल साहित्य, राशन सामग्री, खाना पकाने का सामान, हथियार मेंटेनेंस सामग्री, ड्रिल मशीन, अन्य सामग्री भी बरामद हुई है।


    आखिरी दो नक्सलियों ने किया था आत्मसमर्पण

    बता दें कि मध्यप्रदेश में नक्सल विरोधी सर्चिग अभियान के दौरान मुठभेड़ में मारे जाने के डर से 11 दिसंबर को मध्यप्रदेश में बचे हुए अंतिम 2 नक्सलियों DVCM दीपक उर्फ सुधाकर एवं ACM रोहित उर्फ मंगलू ने भी आत्मसमर्पण कर दिया था। उन्होंने यह कदम शासन की नीतियों पर विश्वास जताते हुए किया था। पुलिस के अनुसार मध्यप्रदेश में इस साल अब तक सबसे ज्यादा 13 हार्डकोर सशस्त्र वर्दीधारी नक्सलियों ने भारत के संविधान पर अपनी निष्ठा जताते हुए हथियार त्याग कर आत्मसमर्पण किया है, जबकि 10 हार्डकोर नक्सलियों को सुरक्षाबलों द्वारा धराशायी कर दिया गया है।

    भारत सरकार द्वारा नक्सलवाद के उन्मूलन हेतु मार्च 2026 तक का लक्ष्य निर्धारित किया गया है। पुलिस द्वारा लगातार चलाए जा रहे सर्चिंग अभियानों के परिणाम स्वरूप मध्य प्रदेश से सक्रिय सशस्त्र नक्सलवाद को समाप्त किया जा चुका है।