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  • बैतूल हादसे के बाद बढ़ी चिंता, तीन मानसूनी सिस्टम सक्रिय; मध्य प्रदेश के 12 जिलों में रेड अलर्ट जैसे हालात

    बैतूल हादसे के बाद बढ़ी चिंता, तीन मानसूनी सिस्टम सक्रिय; मध्य प्रदेश के 12 जिलों में रेड अलर्ट जैसे हालात


    मध्यप्रदेश। मध्य प्रदेश में मानसून एक बार फिर पूरी ताकत के साथ सक्रिय हो गया है। प्रदेश में एक साथ तीन मजबूत मौसम प्रणालियों के प्रभाव से अगले 48 घंटे तक भारी से अति भारी बारिश का दौर जारी रहने की संभावना है। मौसम विभाग ने खास तौर पर मालवा और निमाड़ क्षेत्र के साथ इंदौर और उज्जैन संभाग के कई जिलों के लिए हाई अलर्ट जारी किया है। लगातार हो रही बारिश के कारण नदी नाले उफान पर हैं और कई इलाकों में जनजीवन प्रभावित होने लगा है।

    मौसम विभाग के अनुसार शुक्रवार को रतलाम झाबुआ अलीराजपुर और धार जिलों में अति भारी बारिश होने की संभावना है। इसके अलावा नीमच आगर मालवा उज्जैन देवास बड़वानी खरगोन बुरहानपुर और छिंदवाड़ा में भी भारी बारिश का पूर्वानुमान है। राजधानी भोपाल सहित इंदौर जबलपुर ग्वालियर रायसेन सीहोर विदिशा नर्मदापुरम बैतूल हरदा शाजापुर मंदसौर खंडवा शिवपुरी गुना दतिया मुरैना भिंड सागर रीवा सतना सीधी शहडोल और अन्य जिलों में भी रुक रुक कर बारिश का सिलसिला जारी रहने की संभावना जताई गई है।

    गुरुवार को भी प्रदेश के कई हिस्सों में जोरदार बारिश हुई। भोपाल उज्जैन रतलाम हरदा और खरगोन सहित कई जिलों में अच्छी बारिश दर्ज की गई। सबसे दर्दनाक घटना बैतूल जिले में हुई जहां मूसलाधार बारिश के दौरान रेलवे की बाउंड्री वॉल पास की झोपड़ी पर गिर गई। इस हादसे में 27 वर्षीय मजदूर राहुल उइके की मौके पर ही मौत हो गई जबकि उसका साथी गंभीर रूप से घायल हो गया। इस घटना ने लगातार हो रही बारिश के बीच कमजोर निर्माण और सुरक्षा व्यवस्था पर सवाल खड़े कर दिए हैं।

    बारिश के बढ़ते दबाव को देखते हुए बैतूल के सारणी स्थित सतपुड़ा बांध के सात गेट इस मानसून में पहली बार खोल दिए गए हैं ताकि अतिरिक्त पानी की निकासी की जा सके। प्रशासन ने निचले इलाकों के लोगों को सतर्क रहने और नदी नालों के पास नहीं जाने की सलाह दी है।

    मौसम वैज्ञानिकों के अनुसार प्रदेश में अब तक औसतन 14 दशमलव 7 इंच वर्षा दर्ज की गई है जबकि इस समय तक 17 दशमलव 2 इंच बारिश हो जानी चाहिए थी। यानी प्रदेश में अभी भी लगभग 15 प्रतिशत वर्षा की कमी बनी हुई है। हालांकि पश्चिमी मध्य प्रदेश में लगातार हो रही बारिश से यह अंतर आने वाले दिनों में कम होने की संभावना है।

    प्रदेश के 47 जिलों में अब भी सामान्य से कम वर्षा रिकॉर्ड की गई है। इनमें उज्जैन रतलाम धार झाबुआ बैतूल हरदा छिंदवाड़ा जबलपुर सागर रीवा सतना ग्वालियर शिवपुरी और विदिशा जैसे जिले शामिल हैं। दूसरी ओर भोपाल इंदौर देवास सीहोर राजगढ़ भिंड मंदसौर और बुरहानपुर ऐसे जिले हैं जहां सामान्य से अधिक वर्षा हो चुकी है। देवास में सामान्य से लगभग 29 प्रतिशत अधिक बारिश दर्ज की गई है।

    विशेषज्ञों का कहना है कि जुलाई मानसून का सबसे महत्वपूर्ण महीना माना जाता है और इसी दौरान प्रदेश में कुल वर्षा का लगभग 40 प्रतिशत हिस्सा दर्ज होता है। यदि अगले दो दिनों तक मौसम विभाग का अनुमान सही साबित होता है तो वर्षा की कमी काफी हद तक पूरी हो सकती है। प्रशासन ने लोगों से अपील की है कि खराब मौसम के दौरान अनावश्यक यात्रा से बचें और मौसम विभाग की चेतावनियों का पालन करें ताकि किसी भी अप्रिय स्थिति से बचा जा सके।

  • मध्य प्रदेश में मानसून का प्रचंड रूप भोपाल उज्जैन से लेकर हरदा और खरगोन तक झमाझम बारिश बैतूल में दर्दनाक हादसा

    मध्य प्रदेश में मानसून का प्रचंड रूप भोपाल उज्जैन से लेकर हरदा और खरगोन तक झमाझम बारिश बैतूल में दर्दनाक हादसा


    मध्य प्रदेश । मध्य प्रदेश में मानसून पूरी तरह सक्रिय हो चुका है और एक साथ तीन मौसम प्रणालियों के प्रभाव से प्रदेश के कई जिलों में लगातार तेज बारिश का दौर जारी है। मानसून ट्रफ साइक्लोनिक सर्कुलेशन और शियर जोन के एक साथ सक्रिय होने के कारण राजधानी भोपाल सहित उज्जैन रतलाम हरदा और खरगोन में रुक रुक कर तेज बारिश हो रही है। मौसम विभाग ने आने वाले घंटों में कई जिलों में भारी से अति भारी वर्षा की संभावना जताते हुए लोगों को सतर्क रहने की सलाह दी है।

    बारिश के बीच बैतूल जिले से दुखद खबर सामने आई है। बुधवार देर रात गंज थाना क्षेत्र में मूसलाधार बारिश के दौरान रेलवे की बाउंड्री वॉल उसके पास बनी झोपड़ी पर गिर गई। हादसे के समय झोपड़ी में सो रहे 27 वर्षीय मजदूर राहुल उइके की मौके पर ही मौत हो गई जबकि उसका साथी शनि सिंह घायल हो गया। स्थानीय लोगों और प्रशासन की मदद से राहत कार्य किया गया तथा घायल को अस्पताल में भर्ती कराया गया।

    मौसम विभाग के आंकड़ों के अनुसार पिछले चौबीस घंटों में छिंदवाड़ा जिले के हर्रई में लगभग छह इंच बारिश दर्ज की गई जो प्रदेश में सबसे अधिक रही। इसके अलावा पचमढ़ी में करीब पांच इंच और बैतूल के भैंसदेही क्षेत्र में चार इंच से अधिक वर्षा रिकॉर्ड की गई। बैतूल जिले के अधिकांश इलाकों में तेज बारिश हुई जबकि छिंदवाड़ा के तामिया नरसिंहपुर के गाडरवारा देवास के खातेगांव और शिवपुरी के पोहरी में भी जोरदार बारिश दर्ज की गई।

    प्रदेश के कई हिस्सों में तेज हवाओं ने भी लोगों की परेशानी बढ़ा दी। भिंड जिले में सबसे तेज करीब पचास किलोमीटर प्रति घंटे की रफ्तार से आंधी चली। इसके अलावा नर्मदापुरम सीहोर इंदौर रायसेन दतिया बड़वानी बैतूल सिवनी जबलपुर उमरिया सागर पन्ना छिंदवाड़ा और सीधी में भी तेज हवाओं के साथ बारिश हुई। कई स्थानों पर पेड़ गिरने और बिजली आपूर्ति प्रभावित होने की भी खबरें सामने आई हैं।

    राजधानी भोपाल में सुबह से मौसम का मिजाज लगातार बदलता रहा। कभी तेज धूप तो कभी घने बादलों के साथ बारिश का सिलसिला चलता रहा। उज्जैन में भी सुबह से अच्छी बारिश हुई जिससे तापमान में गिरावट दर्ज की गई। हरदा में कई सड़कें पानी से भर गईं जबकि खरगोन में रुक रुक कर बारिश का दौर जारी रहा। रतलाम में दोपहर के समय तेज बारिश ने जनजीवन को प्रभावित किया।

    मौसम विभाग ने गुरुवार के लिए प्रदेश के सत्रह जिलों में भारी बारिश का अलर्ट जारी किया है। धार देवास बुरहानपुर हरदा और नर्मदापुरम में अति भारी बारिश का ऑरेंज अलर्ट घोषित किया गया है। वहीं उज्जैन शाजापुर सीहोर बड़वानी खरगोन खंडवा रायसेन सागर बैतूल छिंदवाड़ा पांढुर्णा और सिवनी में भारी बारिश का यलो अलर्ट जारी किया गया है।

    विशेषज्ञों का कहना है कि तीनों मौसम प्रणालियों के सक्रिय रहने के कारण अगले कुछ दिनों तक प्रदेश के अधिकांश हिस्सों में बारिश का सिलसिला जारी रह सकता है। प्रशासन ने नदी नालों के आसपास रहने वाले लोगों को सतर्क रहने तथा जलभराव वाले क्षेत्रों में अनावश्यक आवाजाही से बचने की सलाह दी है। मौसम विभाग ने भी नागरिकों से बिजली गिरने और तेज बारिश के दौरान सुरक्षित स्थानों पर रहने की अपील की है ताकि किसी भी अप्रिय घटना से बचा जा सके।

  • मध्य प्रदेश में बारिश का रेड जोन तैयार तीन मौसमी सिस्टम से अगले चार दिन आफत की आशंका बैतूल में दीवार गिरने से मजदूर की मौत

    मध्य प्रदेश में बारिश का रेड जोन तैयार तीन मौसमी सिस्टम से अगले चार दिन आफत की आशंका बैतूल में दीवार गिरने से मजदूर की मौत


    नई दिल्ली। मध्य प्रदेश में मानसून ने एक बार फिर जोर पकड़ लिया है और प्रदेश के अधिकांश हिस्सों में लगातार बारिश का दौर शुरू हो गया है। मौसम विभाग के अनुसार इस समय मानसून ट्रफ साइक्लोनिक सर्कुलेशन और शियर जोन जैसे तीन मजबूत मौसमी सिस्टम एक साथ सक्रिय हैं जिसके कारण अगले चार दिनों तक पूरे प्रदेश में झमाझम बारिश होने की संभावना है। मौसम वैज्ञानिकों का मानना है कि इन सिस्टमों के संयुक्त प्रभाव से कई जिलों में भारी से अति भारी वर्षा हो सकती है। इसके चलते प्रशासन को भी सतर्क रहने की सलाह दी गई है।

    राजधानी भोपाल में गुरुवार सुबह से लगातार रुक रुककर बारिश हो रही है। वहीं इंदौर ग्वालियर जबलपुर रीवा सतना और कई अन्य जिलों में भी गरज चमक के साथ बारिश दर्ज की जा रही है। मौसम विभाग ने बताया है कि अगले चौबीस घंटों में कुछ इलाकों में चार इंच से अधिक बारिश हो सकती है जिससे नदियों और नालों का जलस्तर तेजी से बढ़ने की आशंका है।

    बारिश के बीच बैतूल जिले से एक दुखद हादसा भी सामने आया है। गंज थाना क्षेत्र में देर रात हुई तेज बारिश के दौरान रेलवे की बाउंड्री वॉल पास बनी एक झोपड़ी पर गिर गई। हादसे के समय झोपड़ी में सो रहे 27 वर्षीय मजदूर राहुल उइके मलबे में दब गए और उनकी मौके पर ही मौत हो गई। वहीं उनके साथी शनि सिंह को मामूली चोटें आई हैं। घटना के बाद स्थानीय प्रशासन और राहत दल मौके पर पहुंचे तथा स्थिति का जायजा लिया।

    मौसम विभाग ने प्रदेश के कई जिलों के लिए अलग अलग स्तर के अलर्ट जारी किए हैं। धार देवास बुरहानपुर हरदा और नर्मदापुरम में अति भारी बारिश की संभावना को देखते हुए ऑरेंज अलर्ट जारी किया गया है। इसके अलावा उज्जैन शाजापुर सीहोर बड़वानी खरगोन खंडवा रायसेन सागर बैतूल छिंदवाड़ा पांढुर्णा और सिवनी में भारी बारिश की चेतावनी दी गई है। इन जिलों में लोगों को अनावश्यक यात्रा से बचने और सुरक्षित स्थानों पर रहने की सलाह दी गई है।

    लगातार हो रही बारिश का असर प्रदेश के कई हिस्सों में दिखाई देने लगा है। बालाघाट में कई नदी नाले उफान पर हैं और ग्रामीण इलाकों के कई मार्ग बंद हो गए हैं। बैहर परसवाड़ा मार्ग पर पेड़ गिरने से यातायात बाधित हुआ। ग्वालियर और अन्य शहरों में भी जलभराव की स्थिति बनने लगी है। प्रशासन लगातार हालात पर नजर बनाए हुए है और जरूरत पड़ने पर राहत एवं बचाव दलों को सक्रिय किया जा रहा है।

    मौसम वैज्ञानिक शैलेंद्र कुमार नायक के अनुसार वर्तमान मौसमी सिस्टम दो अगस्त तक सक्रिय बने रहेंगे। इस दौरान प्रदेश के अलग अलग हिस्सों में तेज बारिश का सिलसिला जारी रहेगा। उन्होंने कहा कि निचले इलाकों में रहने वाले लोगों को विशेष सतर्कता बरतनी चाहिए क्योंकि लगातार वर्षा से नदी नालों में अचानक जलस्तर बढ़ सकता है। किसानों के लिए यह बारिश फायदेमंद मानी जा रही है लेकिन शहरी क्षेत्रों में जलभराव और ग्रामीण इलाकों में आवागमन प्रभावित होने की आशंका भी बनी हुई है। ऐसे में मौसम विभाग की चेतावनियों का पालन करना और अनावश्यक जोखिम से बचना बेहद जरूरी होगा।

  • मध्य प्रदेश में मानसून ने दी दस्तक, आज 46 जिलों में आंधी-बारिश की चेतावनी

    मध्य प्रदेश में मानसून ने दी दस्तक, आज 46 जिलों में आंधी-बारिश की चेतावनी

    भोपाल। मध्य प्रदेश के दक्षिण-पूर्वी क्षेत्र के 15 जिलों में मानसून की आधिकारिक एंट्री हो चुकी है। मौसम विभाग के मुताबिक अगले 2 से 3 दिनों में मानसून प्रदेश के शेष हिस्सों को भी कवर कर लेगा। हालांकि ग्वालियर-चंबल संभाग में मानसून सबसे आखिर में पहुंचने की संभावना जताई गई है।

    मौसम विभाग ने गुरुवार को प्रदेश के 46 जिलों में तेज आंधी और बारिश का अलर्ट जारी किया है। वहीं सीधी जिले में लू चलने की आशंका है। इसके अलावा नीमच, मंदसौर, ग्वालियर, श्योपुर, मुरैना, भिंड, रीवा और सिंगरौली में उमस और गर्मी का असर बना रह सकता है।

    विभाग के अनुसार भोपाल, रायसेन, सीहोर, राजगढ़, विदिशा, इंदौर, झाबुआ, आलीराजपुर, धार, बुरहानपुर, बड़वानी, खंडवा, खरगोन, उज्जैन, रतलाम, आगर-मालवा, शाजापुर, देवास, नर्मदापुरम, बैतूल, हरदा, दतिया, शिवपुरी, गुना, अशोकनगर, जबलपुर, कटनी, नरसिंहपुर, छिंदवाड़ा, पांढुर्णा, सिवनी, बालाघाट, मंडला, डिंडौरी, सतना, सीधी, मऊगंज, मैहर, शहडोल, उमरिया, अनूपपुर, सागर, पन्ना, दमोह, छतरपुर, टीकमगढ़ और निवाड़ी में 40 से 60 किलोमीटर प्रतिघंटा की रफ्तार से आंधी के साथ बारिश होने का अनुमान है।

    इन जिलों में पहुंच चुका है मानसून

    आलीराजपुर, इंदौर, हरदा, धार, बैतूल, खंडवा, बुरहानपुर, छिंदवाड़ा, पांढुर्णा, खरगोन, सिवनी, बालाघाट, मंडला, बड़वानी और डिंडौरी जिलों में मानसून के आगमन की घोषणा की जा चुकी है। मौसम वैज्ञानिकों का कहना है कि अगले दो से चार दिनों के भीतर मानसून पूरे प्रदेश में सक्रिय हो जाएगा।

    इस बार सामान्य से कम बारिश के संकेत

    मौसम केंद्र (आईएमडी) के पूर्वानुमान के अनुसार इस वर्ष भोपाल, इंदौर, जबलपुर सहित प्रदेश के 47 जिलों में सामान्य से कम वर्षा होने की संभावना है। प्रदेश में औसत 37.3 इंच बारिश के मुकाबले 30 से 32 इंच तक वर्षा दर्ज होने का अनुमान लगाया गया है।

    मानसून की देरी से बारिश में 50 प्रतिशत की कमी

    मानसून के विलंब से पहुंचने के कारण 24 जून तक प्रदेश में सूखे जैसे हालात बने रहे। एक जून से अब तक जहां औसतन 84.8 मिमी (3.6 इंच) बारिश होनी चाहिए थी, वहीं केवल 42 मिमी (1.6 इंच) वर्षा दर्ज की गई है, जो सामान्य से करीब 50 प्रतिशत कम है। इंदौर, उज्जैन और ग्वालियर समेत प्रदेश के 48 जिलों में सामान्य से कम बारिश रिकॉर्ड की गई है।

  • 45°C की आग उगलती गर्मी में ऐसे बचाएं खुद को, नौतपा में भूलकर भी न करें ये गलतियां

    45°C की आग उगलती गर्मी में ऐसे बचाएं खुद को, नौतपा में भूलकर भी न करें ये गलतियां


    नई दिल्ली । नौतपा के नौ दिन साल के सबसे गर्म दिनों में गिने जाते हैं। इस दौरान सूरज की किरणें सीधे धरती पर पड़ती हैं और तापमान कई शहरों में 40 से 45 डिग्री सेल्सियस तक पहुंच जाता है। तेज धूप, गर्म हवाएं और लू शरीर पर तेजी से असर डालती हैं। ऐसे में थोड़ी सी लापरवाही भी डीहाइड्रेशन, हीट एग्जॉशन और हीट स्ट्रोक जैसी गंभीर समस्याओं की वजह बन सकती है। खासकर उन लोगों के लिए खतरा ज्यादा बढ़ जाता है जिन्हें रोजमर्रा के काम, नौकरी, व्यापार या यात्रा के कारण घर से बाहर निकलना पड़ता है।

    विशेषज्ञों के मुताबिक नौतपा में सबसे जरूरी है कि शरीर को ज्यादा गर्म होने से बचाया जाए और पानी की कमी न होने दी जाए। डॉक्टरों का कहना है कि अगर सही सावधानी बरती जाए तो इस भीषण गर्मी के असर को काफी हद तक कम किया जा सकता है।

    घर से बाहर निकलते समय कुछ जरूरी चीजें हमेशा साथ रखनी चाहिए। पानी की बोतल, ORS या ग्लूकोज, छाता या टोपी, सनग्लास, गमछा या कॉटन कपड़ा, हल्का स्नैक और जरूरी दवाइयां साथ रखना बेहद जरूरी माना गया है। धूप में निकलते समय सिर और चेहरे को ढंकना लू से बचाने में काफी मदद करता है।

    नौतपा के दौरान सुबह 6 बजे से 10 बजे तक और शाम 5 बजे के बाद बाहर निकलना ज्यादा सुरक्षित माना जाता है। दोपहर 12 बजे से शाम 4 बजे तक का समय सबसे ज्यादा खतरनाक होता है। इस दौरान गर्म हवाएं और तेज धूप शरीर का तापमान तेजी से बढ़ा देती हैं। यदि जरूरी काम न हो तो इस समय बाहर निकलने से बचना चाहिए।

    पैदल चलने वालों और बाइक सवारों को अतिरिक्त सावधानी बरतने की जरूरत होती है। बाइक चलाते समय फुल स्लीव कपड़े, ग्लव्स और हेलमेट का इस्तेमाल करें। हेलमेट के अंदर कॉटन का कपड़ा लगाने से सिर जल्दी गर्म नहीं होता। वहीं पैदल चलने वाले लोग बीच-बीच में छांव में रुककर आराम करें और हर 20 से 30 मिनट में पानी पीते रहें। खाली पेट बाहर निकलना भी खतरनाक हो सकता है।

    डॉक्टरों के अनुसार कुछ शारीरिक संकेतों को कभी नजरअंदाज नहीं करना चाहिए। लगातार सिरदर्द, चक्कर आना, ज्यादा पसीना आना या अचानक पसीना बंद हो जाना, तेज कमजोरी, उल्टी, सांस लेने में दिक्कत, शरीर का तापमान बढ़ना, बेहोशी या दिल की धड़कन तेज होना हीट स्ट्रोक के संकेत हो सकते हैं। ऐसी स्थिति में तुरंत छांव या ठंडी जगह पर जाएं और मेडिकल मदद लें।

    नौतपा में सिर्फ पानी पीना काफी नहीं होता। शरीर से पसीने के साथ जरूरी मिनरल्स भी निकल जाते हैं। इसलिए ORS, नींबू पानी, छाछ, नारियल पानी और बेल या आम पना जैसे देसी पेय शरीर को हाइड्रेट रखने में मदद करते हैं। बहुत ज्यादा चाय, कॉफी, शराब और कोल्ड ड्रिंक्स से बचना चाहिए क्योंकि ये शरीर में पानी की कमी बढ़ा सकते हैं।

    बच्चों और बुजुर्गों को इस मौसम में खास देखभाल की जरूरत होती है। बच्चों को धूप में खेलने से बचाएं और उन्हें बार-बार पानी या तरल पदार्थ देते रहें। वहीं बुजुर्गों को लंबे समय तक गर्मी में न रहने दें। जिन लोगों को ब्लड प्रेशर, शुगर, हार्ट या सांस की बीमारी है उन्हें अतिरिक्त सतर्क रहने की जरूरत है।

    नौतपा के दौरान लाइफस्टाइल में भी बदलाव जरूरी है। हल्का और सुपाच्य भोजन करें। तरबूज, खरबूजा, खीरा, ककड़ी और मौसमी फल डाइट में शामिल करें। ढीले और सूती कपड़े पहनें ताकि शरीर में हवा का संचार बना रहे। पर्याप्त नींद और आराम भी शरीर को गर्मी से लड़ने की ताकत देता है। विशेषज्ञों का कहना है कि नौतपा को हल्के में लेना भारी पड़ सकता है। सही सावधानी और जागरूकता ही इस भीषण गर्मी में सबसे बड़ा बचाव है।

  • आग बरसाता आसमान: उत्तर भारत में भीषण गर्मी का कहर, पाकिस्तान से आने वाली लू बनी बड़ी वजह

    आग बरसाता आसमान: उत्तर भारत में भीषण गर्मी का कहर, पाकिस्तान से आने वाली लू बनी बड़ी वजह

    नई दिल्ली: देश के कई हिस्सों में इस समय गर्मी अपने सबसे खतरनाक रूप में दिखाई दे रही है। दिल्ली-एनसीआर, उत्तर प्रदेश, राजस्थान, बिहार, मध्य प्रदेश और महाराष्ट्र समेत कई राज्यों में सूरज मानो आग बरसा रहा है। सुबह से ही तेज धूप लोगों को परेशान कर रही है, जबकि दोपहर होते-होते सड़कें तपते तवे जैसी महसूस होने लगती हैं। कई शहरों में तापमान 45 डिग्री सेल्सियस के पार पहुंच चुका है और आने वाले दिनों में इसके और बढ़ने की आशंका जताई जा रही है। लगातार बढ़ती गर्मी ने आम जनजीवन को बुरी तरह प्रभावित कर दिया है। बाजारों में भीड़ कम हो गई है, सड़कों पर सन्नाटा दिखाई दे रहा है और लोग जरूरी काम होने पर ही घरों से बाहर निकल रहे हैं।

    मौसम विशेषज्ञों के अनुसार इस बार गर्मी सामान्य से कहीं अधिक तेज महसूस की जा रही है। इसकी सबसे बड़ी वजह प्री-मॉनसून गतिविधियों का कमजोर पड़ना माना जा रहा है। आमतौर पर मई के मध्य तक उत्तर भारत में आंधी, हल्की बारिश और बादलों की आवाजाही शुरू हो जाती है, जिससे तापमान में कुछ राहत मिलती है। लेकिन इस बार ऐसा नहीं हो रहा है। आसमान पूरी तरह साफ है और तेज धूप सीधे धरती को गर्म कर रही है। लगातार कई दिनों तक बारिश नहीं होने से जमीन भी तेजी से तप रही है, जिसका असर तापमान पर साफ दिखाई दे रहा है।

    विशेषज्ञों का कहना है कि पाकिस्तान और थार रेगिस्तान की ओर से आने वाली गर्म और सूखी हवाएं भी इस भीषण गर्मी को और खतरनाक बना रही हैं। ये हवाएं राजस्थान, पंजाब, हरियाणा, दिल्ली और पश्चिमी उत्तर प्रदेश से होते हुए मध्य भारत तक पहुंच रही हैं। दिन के समय चलने वाली लू लोगों के लिए सबसे बड़ी परेशानी बन गई है। कई इलाकों में रात के समय भी गर्मी कम नहीं हो रही, जिससे लोगों को आराम तक नहीं मिल पा रहा है। लगातार गर्म रहने वाली रातें स्वास्थ्य के लिए भी खतरा पैदा कर रही हैं।

    मौसम की मौजूदा स्थिति के पीछे समुद्री सिस्टम का कमजोर होना भी एक बड़ा कारण बताया जा रहा है। बंगाल की खाड़ी में बना सिस्टम भारत की ओर सक्रिय असर नहीं डाल पाया, जबकि अरब सागर में बनने वाली गतिविधियां भी कमजोर बनी हुई हैं। इसके कारण नमी वाली हवाएं उत्तर भारत तक नहीं पहुंच पा रहीं। नतीजा यह है कि गर्मी को रोकने वाला कोई मजबूत मौसम तंत्र फिलहाल सक्रिय नहीं दिख रहा।

    डॉक्टरों ने भी लोगों को सतर्क रहने की सलाह दी है। तेज धूप और लू के कारण डिहाइड्रेशन, चक्कर आना, सिरदर्द और हीट स्ट्रोक के मामलों में बढ़ोतरी देखी जा रही है। बच्चों, बुजुर्गों और बीमार लोगों को विशेष सावधानी बरतने की जरूरत बताई गई है। दिन के समय ज्यादा देर तक धूप में रहने से बचने, पर्याप्त पानी पीने और हल्के कपड़े पहनने की सलाह दी जा रही है।

    फिलहाल मौसम में तुरंत राहत मिलने के संकेत नहीं दिखाई दे रहे हैं। आने वाले कुछ दिन उत्तर भारत के लिए और अधिक चुनौतीपूर्ण साबित हो सकते हैं। यदि जल्द बारिश या आंधी जैसी गतिविधियां शुरू नहीं होतीं, तो तापमान में और बढ़ोतरी देखने को मिल सकती है। ऐसे में लोगों को सतर्क और सुरक्षित रहने की जरूरत है।

  • सुपर एल नीनो 2027 की चेतावनी से वैज्ञानिक चिंतित, दुनिया के सबसे गर्म साल का खतरा; मौसम में भारी बदलाव की आशंका

    सुपर एल नीनो 2027 की चेतावनी से वैज्ञानिक चिंतित, दुनिया के सबसे गर्म साल का खतरा; मौसम में भारी बदलाव की आशंका


    नई दिल्ली। वैज्ञानिकों ने चेतावनी दी है कि साल 2027 में एक शक्तिशाली “सुपर एल नीनो” विकसित हो सकता है, जो वैश्विक तापमान को रिकॉर्ड स्तर तक पहुंचा सकता है। अमेरिकी एजेंसी NOAA के शुरुआती आकलनों के अनुसार प्रशांत महासागर के तापमान में लगातार बढ़ोतरी देखी जा रही है, जो इस जलवायु पैटर्न के बनने का संकेत है।

    एल नीनो एक प्राकृतिक जलवायु घटना है, जिसमें प्रशांत महासागर के भूमध्यीय हिस्से (Niño 3.4 क्षेत्र) का तापमान असामान्य रूप से बढ़ जाता है। जब यह वृद्धि अत्यधिक होती है, तो इसे “सुपर एल नीनो” कहा जाता है, जिसका असर पूरी दुनिया के मौसम पर पड़ सकता है।

    विशेषज्ञों के मुताबिक, इस स्थिति में कई क्षेत्रों में सूखा, बाढ़, हीटवेव और जंगल की आग जैसी घटनाएं बढ़ सकती हैं। साथ ही अटलांटिक और प्रशांत महासागर में तूफानों की तीव्रता भी प्रभावित हो सकती है।

    मौसम वैज्ञानिकों का मानना है कि यदि यह पैटर्न मजबूत रूप में विकसित होता है, तो 2027 हाल के इतिहास के सबसे गर्म वर्षों में शामिल हो सकता है। इससे पहले 1997-98 के एल नीनो ने भी वैश्विक स्तर पर गंभीर मौसमीय प्रभाव डाले थे।

    हालांकि, वैज्ञानिक यह भी स्पष्ट कर रहे हैं कि यह फिलहाल शुरुआती मॉडल और संभावनाओं पर आधारित अनुमान है और इसकी तीव्रता व समय में बदलाव संभव है।

  • गर्मी से हाहाकार: शाजापुर-नौगांव सबसे गर्म, MP में मौसम विभाग का अलर्ट

    गर्मी से हाहाकार: शाजापुर-नौगांव सबसे गर्म, MP में मौसम विभाग का अलर्ट


    नई दिल्ली । मध्य प्रदेश एक बार फिर भीषण गर्मी की चपेट में आ गया है। मौसम विभाग ने अगले चार दिनों के लिए राज्य के करीब 40 जिलों में लू और गर्म हवाओं का अलर्ट जारी किया है। कई जिलों में तापमान 44 डिग्री सेल्सियस के पार पहुंच चुका है, जिससे लोगों को दिन के समय सतर्क रहने की सलाह दी गई है।

    शाजापुर और छतरपुर के नौगांव में गुरुवार को अधिकतम तापमान 44.8 डिग्री सेल्सियस दर्ज किया गया, जो इस सीजन का सबसे अधिक तापमान रहा। इसके अलावा खरगोन, खंडवा, रतलाम, खजुराहो और अन्य जिलों में भी पारा 44 डिग्री के आसपास रहा।

    राज्य के प्रमुख शहरों की बात करें तो उज्जैन में 44 डिग्री, भोपाल में 43.4 डिग्री, जबलपुर में 43.3 डिग्री, इंदौर में 43 डिग्री और ग्वालियर में 41.8 डिग्री सेल्सियस तापमान दर्ज किया गया है।

    मौसम वैज्ञानिकों के अनुसार, दोपहर 12 बजे से 3 बजे के बीच गर्मी का असर सबसे ज्यादा रहेगा। इस दौरान लोगों को घरों से बाहर निकलने से बचने की सलाह दी गई है।

    इंदौर, उज्जैन, रतलाम, देवास और धार जैसे जिलों में ऑरेंज अलर्ट जारी किया गया है, जहां तेज लू के साथ रात में भी गर्मी का असर यानी ‘वॉर्म नाइट’ देखने को मिल सकता है।

    हालांकि, पूर्वी मध्य प्रदेश के कुछ जिलों में फिलहाल लू का असर कम है, लेकिन वहां भी तेज गर्मी बनी हुई है।

    मौसम में यह बदलाव लंबे समय से चल रहे बारिश और आंधी के दौर के बाद आया है। मई महीने के शुरुआती दिनों में लगातार बारिश के कारण तापमान सामान्य बना हुआ था, लेकिन अब अचानक मौसम ने करवट ली है और गर्मी ने अपना असर दिखाना शुरू कर दिया है।

  • भोपाल में घना कोहरा और कड़ाके की ठंड: 20 जिलों में स्कूल बंद, भोपाल में समय बदला

    भोपाल में घना कोहरा और कड़ाके की ठंड: 20 जिलों में स्कूल बंद, भोपाल में समय बदला


    नई दिल्ली। राजधानी भोपाल में पिछले तीन दिनों से घना कोहरा और कड़ाके की ठंड का असर देखने को मिल रहा है। सोमवार सुबह 6 से 8 बजे के बीच विजिबिलिटी 20 से 50 मीटर तक ही रही, यानी कोहरा इतना घना था कि 20 मीटर दूर भी देख पाना मुश्किल था। इसी बीच, नन्हें बच्चे ठिठुरते हुए स्कूल पहुंचे। सुबह के समय स्कूल वैन और बसों द्वारा बच्चों को लेने के दौरान हादसे का खतरा भी बना रहा।
    कड़ाके की ठंड और घने कोहरे की वजह से प्रदेश के 20 जिलों में स्कूलों में छुट्टी घोषित कर दी गई है। भोपाल ऐसा जिला है, जहां नर्सरी से आठवीं तक की कक्षाओं की शुरुआत समय बदलकर सुबह 9.30 बजे कर दी गई, जबकि उच्च कक्षाओं (9वीं से 12वीं) के छात्रों को सामान्य समय पर स्कूल आना पड़ा।

    भोपाल में विशेष व्यवस्था
    भोपाल में नर्सरी से 8वीं तक के स्कूल सोमवार से सुबह 9.30 बजे खुलेंगे। इसके पहले जिला शिक्षा अधिकारी नरेंद्र अहिरवार ने आदेश जारी किया था।

    छोटे बच्चों के लिए टाइमिंग बढ़ाने का मकसद उन्हें ठिठुरते हुए स्कूल जाने से बचाना है। लेकिन 9वीं से 12वीं के छात्रों को घने कोहरे के बीच स्कूल पहुंचना पड़ा।

    अभिभावक मयंक लिमये ने कहा, पूरे प्रदेश में तेज सर्दी और कोहरा छाया हुआ है। कई जिलों में स्कूल बंद किए गए हैं, लेकिन भोपाल में बच्चों को ठंड और कोहरे में स्कूल भेजा गया। यह असुरक्षा का सवाल है।

    हादसे का डर
    सुबह के समय घना कोहरा रहने के कारण स्कूल वैन और बसें घर से बच्चों को लेने गईं।

    अभिभावकों का डर है कि कोहरे में वाहन दुर्घटना हो सकती है। उनका कहना है कि जब तक विजिबिलिटी सामान्य नहीं होती, स्कूल बंद रखना चाहिए।
    प्रदेश के 20 जिलों में छुट्टी की सूची
    इंदौर: कक्षा 1 से 8 तक, तीन दिन की छुट्टी।
    उज्जैन: नर्सरी से 5वीं तक, एक दिन छुट्टी।
    मंदसौर: नर्सरी से 8वीं तक, दो दिन छुट्टी।
    शाजापुर: नर्सरी से 8वीं तक, 5–6 जनवरी को अवकाश।
    विदिशा: नर्सरी से 5वीं तक, 5–6 जनवरी को अवकाश।
    ग्वालियर: नर्सरी से 8वीं तक, 5–6 जनवरी को छुट्टी, 7 जनवरी से स्कूल।
    अशोकनगर: 5 जनवरी को स्कूल व आंगनबाड़ी बंद।
    रायसेन: नर्सरी से 5वीं तक, 7 जनवरी तक छुट्टी।
    आगर-मालवा: कक्षा 1 से 8 तक, दो दिन अवकाश (आंगनबाड़ी भी बंद)।
    भिंड: नर्सरी से 8वीं तक, दो दिन अवकाश।
    टीकमगढ़: नर्सरी से 8वीं तक, 5–6 जनवरी को छुट्टी।
    हरदा: नर्सरी से 8वीं तक, सोमवार को अवकाश।
    नीमच: नर्सरी से 8वीं तक, 5–6 जनवरी को छुट्टी।
    रतलाम: नर्सरी से 8वीं तक, 5–6 जनवरी दो दिन अवकाश।
    राजगढ़: कक्षा 8वीं तक के स्कूलों में दो दिन अवकाश।
    मंडला: नर्सरी से 8वीं तक, 5–6 जनवरी दो दिन अवकाश, आंगनबाड़ी बंद।
    जबलपुर: नर्सरी से 8वीं तक, 5–6 जनवरी दो दिन अवकाश, आंगनबाड़ी बंद; परीक्षाएं यथावत।
    दमोह: प्री-प्राइमरी से 8वीं तक एक दिन अवकाश, आंगनबाड़ी बंद।
    डिंडौरी: नर्सरी से 5वीं, 5–6 जनवरी दो दिन अवकाश।
    नर्मदापुरम: 6–7 जनवरी कक्षा 8वीं तक छुट्टी।
    भोपाल में घने कोहरे और ठंड के बीच बच्चों की सुरक्षा प्राथमिकता होनी चाहिए। जबकि अन्य जिलों में स्कूल पूरी तरह बंद किए गए हैं, राजधानी में केवल छोटे बच्चों के समय में बदलाव किया गया। अभिभावक और शिक्षक उम्मीद कर रहे हैं कि प्रशासन भविष्य में मौसम की गंभीरता को देखते हुए और भी सावधानी बरते।