Tag: Weight loss

  • मीठा खाने का भी होता है सही समय वरना बढ़ सकता है ब्लड शुगर और वजन का खतरा जानिए क्या कहते हैं हेल्थ एक्सपर्ट्स

    मीठा खाने का भी होता है सही समय वरना बढ़ सकता है ब्लड शुगर और वजन का खतरा जानिए क्या कहते हैं हेल्थ एक्सपर्ट्स


    नई दिल्ली । त्योहार हो जन्मदिन हो शादी का जश्न हो या फिर कोई छोटी सी खुशी भारत में हर खास मौके की शुरुआत मीठे से होती है। मिठाई हमारे खानपान और संस्कृति का अहम हिस्सा है लेकिन क्या आप जानते हैं कि मीठा सिर्फ कितनी मात्रा में खाया जाए यह ही महत्वपूर्ण नहीं है बल्कि उसे किस समय खाया जाए यह भी आपकी सेहत पर बड़ा असर डालता है। स्वास्थ्य विशेषज्ञों का कहना है कि गलत समय पर मीठा खाने की आदत धीरे धीरे ब्लड शुगर बढ़ने वजन बढ़ने और भविष्य में डायबिटीज जैसी समस्याओं का कारण बन सकती है।

    अक्सर लोग सुबह उठते ही चाय के साथ बिस्कुट मिठाई चॉकलेट या अन्य मीठी चीजें खा लेते हैं। कुछ लोग खाली पेट ही मीठे से दिन की शुरुआत करते हैं। डॉक्टरों के अनुसार यह आदत शरीर के लिए नुकसानदायक साबित हो सकती है। खाली पेट मीठा खाने पर उसमें मौजूद शुगर तेजी से खून में पहुंचती है जिससे ब्लड ग्लूकोज का स्तर अचानक बढ़ जाता है। इसके कुछ समय बाद शुगर तेजी से नीचे भी आ जाती है जिससे कमजोरी थकान और बार बार भूख लगने जैसी समस्याएं पैदा हो सकती हैं। यही वजह है कि दिनभर मीठा खाने की इच्छा भी बढ़ जाती है।

    विशेषज्ञ बताते हैं कि यदि मीठा खाना ही है तो उसे मुख्य भोजन के बाद सीमित मात्रा में खाना ज्यादा बेहतर विकल्प माना जाता है। जब हम पहले दाल रोटी सब्जी चावल सलाद या अन्य पौष्टिक भोजन खाते हैं तब शरीर को फाइबर प्रोटीन और आवश्यक पोषक तत्व मिल जाते हैं। ये तत्व मीठे में मौजूद चीनी को धीरे धीरे अवशोषित होने में मदद करते हैं जिससे ब्लड शुगर अचानक नहीं बढ़ता और शरीर पर अतिरिक्त दबाव भी नहीं पड़ता। यही कारण है कि डॉक्टर भोजन के तुरंत बाद थोड़ी मात्रा में मिठाई खाने की सलाह देते हैं।

    दिन और रात के समय का अंतर भी इस मामले में काफी महत्वपूर्ण माना जाता है। रात में शरीर आराम की अवस्था में पहुंचने लगता है और ऊर्जा की जरूरत भी कम हो जाती है। ऐसे समय अधिक मात्रा में मीठा खाने से अतिरिक्त कैलोरी शरीर में जमा होने लगती है जिससे वजन बढ़ने का खतरा बढ़ जाता है। लगातार रात में मीठा खाने की आदत भविष्य में मोटापा इंसुलिन रेजिस्टेंस और डायबिटीज जैसी समस्याओं की आशंका को भी बढ़ा सकती है।

    यदि मीठा खाना हो तो दोपहर के भोजन के बाद सीमित मात्रा में खाना अपेक्षाकृत बेहतर माना जाता है क्योंकि दिन के समय शरीर अधिक सक्रिय रहता है और अतिरिक्त ऊर्जा का उपयोग आसानी से कर लेता है। हालांकि इसका मतलब यह नहीं कि दिनभर मनचाहा मीठा खाया जाए। मात्रा पर नियंत्रण रखना हर स्थिति में जरूरी है।

    डॉक्टर यह भी कहते हैं कि केवल केक पेस्ट्री चॉकलेट या मीठे पेय पदार्थों के सहारे भूख मिटाना सही आदत नहीं है। इससे शरीर को आवश्यक विटामिन मिनरल्स और प्रोटीन नहीं मिल पाते। संतुलित भोजन के साथ ही मीठे का सेवन करना सबसे सुरक्षित तरीका माना जाता है।

    जिन लोगों को डायबिटीज प्री डायबिटीज मोटापा या ब्लड शुगर से जुड़ी कोई समस्या है उन्हें मीठा खाने से पहले अपने डॉक्टर या डाइट विशेषज्ञ की सलाह जरूर लेनी चाहिए। सही समय सही मात्रा और संतुलित खानपान अपनाकर मीठे का आनंद भी लिया जा सकता है और स्वास्थ्य भी बेहतर बनाए रखा जा सकता है।

  • बेली फैट कम करने के लिए कौन ज्यादा असरदार? जीरा पानी और मेथी पानी को लेकर एक्सपर्ट ने दूर किया बड़ा कन्फ्यूजन

    बेली फैट कम करने के लिए कौन ज्यादा असरदार? जीरा पानी और मेथी पानी को लेकर एक्सपर्ट ने दूर किया बड़ा कन्फ्यूजन

    नई दिल्ली। आजकल वजन कम करने के लिए लोग केवल जिम और डाइटिंग तक सीमित नहीं हैं, बल्कि घरेलू उपायों और डिटॉक्स ड्रिंक्स की लोकप्रियता भी तेजी से बढ़ी है। खासकर सुबह खाली पेट पी जाने वाली कुछ पारंपरिक ड्रिंक्स लोगों के बीच काफी चर्चा में रहती हैं। इनमें जीरा पानी और मेथी पानी का नाम सबसे ऊपर आता है। सोशल मीडिया और हेल्थ ट्रेंड्स के दौर में इन दोनों ड्रिंक्स को लेकर कई दावे किए जाते हैं कि ये तेजी से वजन कम करने, पेट की चर्बी घटाने और शरीर को डिटॉक्स करने में मदद कर सकती हैं। हालांकि विशेषज्ञों का मानना है कि इन दोनों को लेकर लोगों के बीच कई गलतफहमियां भी मौजूद हैं।

    स्वास्थ्य विशेषज्ञों के अनुसार जीरा पानी और मेथी पानी दोनों के अपने-अपने फायदे हैं, लेकिन दोनों का काम करने का तरीका अलग है। इसलिए यह कहना कि इनमें से कोई एक सभी लोगों के लिए सबसे बेहतर है, पूरी तरह सही नहीं माना जा सकता। व्यक्ति की शारीरिक स्थिति, खानपान, पाचन क्षमता और लाइफस्टाइल के आधार पर इनके प्रभाव अलग-अलग हो सकते हैं।

    जीरा पानी को लंबे समय से पाचन सुधारने वाले घरेलू उपाय के रूप में देखा जाता रहा है। माना जाता है कि यह पेट से जुड़ी समस्याओं जैसे गैस, ब्लोटिंग और अपच में राहत पहुंचाने में मदद कर सकता है। जब पाचन बेहतर होता है तो शरीर भोजन को सही तरीके से प्रोसेस कर पाता है, जिससे वजन नियंत्रित रखने में अप्रत्यक्ष सहायता मिल सकती है। इसके अलावा शरीर में जमा अतिरिक्त पानी और भारीपन की समस्या कम होने से हल्कापन महसूस हो सकता है।

    दूसरी तरफ मेथी पानी का प्रभाव भूख नियंत्रण से जोड़कर देखा जाता है। इसमें मौजूद फाइबर पेट को लंबे समय तक भरा हुआ महसूस करा सकता है, जिससे बार-बार खाने की इच्छा कम हो सकती है। जिन लोगों को अनावश्यक स्नैकिंग या ओवरईटिंग की आदत होती है, उनके लिए यह उपयोगी साबित हो सकता है। इसके अलावा ब्लड शुगर संतुलन में मदद मिलने से भी अचानक लगने वाली भूख कम हो सकती है।

    हालांकि विशेषज्ञ साफ कहते हैं कि इन ड्रिंक्स को वजन घटाने का जादुई उपाय मानना सही नहीं होगा। केवल जीरा या मेथी पानी पीने से तेजी से फैट लॉस होने की उम्मीद करना वास्तविकता से दूर हो सकता है। वजन घटाने के लिए संतुलित आहार, पर्याप्त नींद, नियमित शारीरिक गतिविधि, पानी का सही सेवन और तनाव नियंत्रण जैसे कई कारक महत्वपूर्ण भूमिका निभाते हैं।

    स्वास्थ्य विशेषज्ञ यह भी सलाह देते हैं कि इन ड्रिंक्स का सेवन सीमित मात्रा में ही करना चाहिए। अधिक सेवन करने पर कुछ लोगों को पेट संबंधी दिक्कतें या अन्य परेशानियां हो सकती हैं। खासकर गर्भवती महिलाओं, मधुमेह की दवा लेने वालों और किसी पुरानी बीमारी से जूझ रहे लोगों को ऐसे घरेलू उपाय अपनाने से पहले विशेषज्ञ की सलाह जरूर लेनी चाहिए। स्वस्थ जीवनशैली की जगह कोई एक ड्रिंक नहीं ले सकती, बल्कि यह केवल अच्छी आदतों को सपोर्ट करने का काम करती है।

  • वजन घटाने का आसान तरीका, इन 6 फ्लेवर वाली ग्रीन टी से मिलेगा डबल फायदा..

    वजन घटाने का आसान तरीका, इन 6 फ्लेवर वाली ग्रीन टी से मिलेगा डबल फायदा..

    नई दिल्ली:   वजन कम करने के लिए लोग अक्सर डाइटिंग, जिम और तरह-तरह के हेल्दी ड्रिंक्स का सहारा लेते हैं, लेकिन इनमें सबसे आसान और असरदार विकल्पों में से एक ग्रीन टी है। यह शरीर के मेटाबॉलिज्म को तेज करने में मदद करती है और फैट बर्निंग प्रक्रिया को सपोर्ट करती है। हालांकि, रोज एक ही तरह की ग्रीन टी पीना कई लोगों के लिए बोरिंग हो जाता है, जिसके कारण वे इसे छोड़ देते हैं। ऐसे में ग्रीन टी को अलग-अलग फ्लेवर के साथ पीना एक बेहतर विकल्प साबित हो सकता है, जिससे स्वाद भी बदलता है और सेहत को अतिरिक्त फायदे भी मिलते हैं।

    लेमन ग्रीन टी एक लोकप्रिय विकल्प है जिसमें ग्रीन टी के साथ नींबू का रस मिलाया जाता है। इसमें मौजूद विटामिन सी शरीर को डिटॉक्स करने में मदद करता है और मेटाबॉलिज्म को और अधिक सक्रिय बनाता है। यह ड्रिंक शरीर से टॉक्सिन्स निकालने में मदद करने के साथ-साथ ताजगी भी प्रदान करती है, जिससे दिनभर एनर्जी बनी रहती है।

    हनी ग्रीन टी उन लोगों के लिए बेहतरीन विकल्प है जिन्हें ग्रीन टी का कड़वा स्वाद पसंद नहीं आता। इसमें थोड़ा सा शहद मिलाने से इसका स्वाद संतुलित हो जाता है और यह अधिक स्वादिष्ट बन जाती है। शहद में मौजूद प्राकृतिक गुण शरीर की इम्युनिटी को मजबूत करने में मदद करते हैं और यह गले को भी आराम पहुंचाती है।

    दालचीनी ग्रीन टी भी वजन घटाने के लिए काफी प्रभावी मानी जाती है। इसमें दालचीनी मिलाने से ब्लड शुगर लेवल को नियंत्रित करने में मदद मिलती है और यह फैट बर्निंग प्रक्रिया को तेज करती है। इसका नियमित सेवन शरीर के मेटाबॉलिज्म को बेहतर बनाने में सहायक हो सकता है।

    पुदीना ग्रीन टी शरीर को ठंडक देने के साथ-साथ पाचन तंत्र को भी सुधारती है। यह खासकर गर्मियों में बहुत फायदेमंद मानी जाती है और पेट की समस्याओं को कम करने में मदद करती है।

    अदरक ग्रीन टी वजन घटाने के लिए एक शक्तिशाली विकल्प है। अदरक में मौजूद एंटीऑक्सीडेंट शरीर की सूजन को कम करने में मदद करते हैं और पाचन को बेहतर बनाते हैं, जिससे फैट तेजी से बर्न होता है।

    सेब और दालचीनी वाली ग्रीन टी भी एक स्वादिष्ट और हेल्दी विकल्प है। इसमें मौजूद प्राकृतिक तत्व शरीर को एनर्जी देने के साथ-साथ फैट मेटाबॉलिज्म को भी तेज करते हैं।

    इन अलग-अलग फ्लेवर वाली ग्रीन टी को अपनी डेली रूटीन में शामिल करके न सिर्फ वजन घटाने की प्रक्रिया को आसान बनाया जा सकता है, बल्कि इसे स्वादिष्ट और दिलचस्प भी बनाया जा सकता है।

  • सुबह खाली पेट गुनगुना पानी पीने की आदत: सिर्फ 15 दिन में दिखेंगे शरीर में ये 5 बड़े बदलाव

    सुबह खाली पेट गुनगुना पानी पीने की आदत: सिर्फ 15 दिन में दिखेंगे शरीर में ये 5 बड़े बदलाव


    नई दिल्ली । आज की तेज रफ्तार जिंदगी और अनियमित खानपान के चलते कब्ज एसिडिटी और बढ़ता वजन जैसी समस्याएं आम हो गई हैं। ऐसे में लोग अक्सर महंगी दवाइयों और सप्लीमेंट्स का सहारा लेते हैं जबकि एक बेहद आसान और प्रभावी उपाय हमारी दिनचर्या में ही छिपा है सुबह खाली पेट गुनगुना पानी पीना। आयुर्वेद और स्वास्थ्य विशेषज्ञों के अनुसार यह छोटी-सी आदत शरीर को भीतर से साफ करने और कई समस्याओं को दूर करने में बेहद कारगर साबित होती है।

    सुबह उठते ही एक गिलास गुनगुना पानी पीने से शरीर में मेटाबॉलिज्म सक्रिय हो जाता है। जब आप गुनगुना पानी पीते हैं तो शरीर का तापमान थोड़ा बढ़ता है जिससे थर्मोजेनेसिस की प्रक्रिया शुरू होती है। इसका सीधा असर कैलोरी बर्निंग पर पड़ता है और वजन कम करने में मदद मिलती है। नियमित रूप से 15 दिनों तक यह आदत अपनाने पर पेट की अतिरिक्त चर्बी में कमी महसूस होने लगती है और शरीर हल्का लगने लगता है।

    गुनगुना पानी शरीर को डिटॉक्स करने में भी महत्वपूर्ण भूमिका निभाता है। रातभर शरीर में जमा हुए विषैले तत्व सुबह पानी के माध्यम से बाहर निकलते हैं। यह प्रक्रिया किडनी और पसीने के जरिए शरीर की गहराई से सफाई करती है। परिणामस्वरूप व्यक्ति दिनभर तरोताजा और ऊर्जावान महसूस करता है।

    यदि आप लंबे समय से कब्ज या पाचन संबंधी समस्याओं से परेशान हैं तो गुनगुना पानी आपके लिए एक सरल और प्रभावी उपाय हो सकता है। यह आंतों की गति को सुचारू बनाता है और मल त्याग को आसान करता है। नियमित सेवन से गैस एसिडिटी और पेट फूलने जैसी समस्याओं में भी राहत मिलती है। करीब दो हफ्तों में पाचन तंत्र बेहतर तरीके से काम करने लगता है।

    इस आदत का असर सिर्फ शरीर के अंदर ही नहीं बल्कि बाहरी रूप पर भी दिखाई देता है। जब शरीर अंदर से साफ होता है तो त्वचा पर प्राकृतिक निखार आता है। गुनगुना पानी ब्लड सर्कुलेशन को बेहतर बनाता है जिससे त्वचा की कोशिकाओं को पर्याप्त पोषण मिलता है। इससे मुंहासे कम होते हैं और चेहरे पर एक अलग ही चमक नजर आती है।

    इसके अलावा गुनगुना पानी बालों की सेहत के लिए भी लाभकारी माना जाता है। यह बालों की जड़ों को पोषण देकर उन्हें मजबूत और चमकदार बनाता है। वहीं जो लोग सुबह उठते ही साइनस या बंद नाक की समस्या से परेशान रहते हैं उनके लिए यह आदत राहत देने वाली हो सकती है। गुनगुना पानी म्यूकस को पतला कर देता है जिससे सांस लेना आसान हो जाता है।

    कुल मिलाकर सुबह खाली पेट गुनगुना पानी पीना एक सरल लेकिन बेहद प्रभावी आदत है जो शरीर को स्वस्थ ऊर्जावान और संतुलित बनाए रखने में मदद करती है। यदि इसे नियमित रूप से अपनाया जाए तो केवल 15 दिनों में इसके सकारात्मक परिणाम स्पष्ट रूप से महसूस किए जा सकते हैं।

  • सुबह खाली पेट पानी पीना: सेहत के लिए ‘साइलेंट हीलर’, जानें 11 फायदे और सही तरीका

    सुबह खाली पेट पानी पीना: सेहत के लिए ‘साइलेंट हीलर’, जानें 11 फायदे और सही तरीका


    नई दिल्ली । हम अक्सर सुनते हैं कि सुबह खाली पेट पानी पीना सेहत के लिए बेहद फायदेमंद है। हेल्थ एक्सपर्ट इसे साइलेंट हीलर कहते हैं क्योंकि यह छोटी लेकिन असरदार आदत हमारे शरीर को रीस्टार्ट का संदेश देती है। इंग्लैंड की लॉफबोरो यूनिवर्सिटी की स्टडी बताती है कि सुबह उठने के 30 मिनट के अंदर आधा लीटर पानी पीने से ब्रेन की फंक्शनिंग में सुधार आता है।

    डॉ. रोहित शर्मा कंसल्टेंट इंटरनल मेडिसिन अपोलो स्पेक्ट्रा हॉस्पिटल जयपुर बताते हैं कि सोते समय शरीर रिकवरी और रिपेयर मोड में चला जाता है। मेटाबॉलिज्म और ऑर्गन्स स्लो हो जाते हैं। ऐसे में सुबह पानी पीना शरीर को धीरे धीरे इस मोड से बाहर निकालता है। मूड संतुलित रहता है फोकस और याददाश्त बढ़ती है और सोचने समझने की क्षमता बेहतर होती है।

    डाइजेशन पर इसका असर भी महत्वपूर्ण है। खाली पेट पानी पेट में पहुंचकर पाचन तंत्र को सक्रिय करता है पेट और आंतों की मांसपेशियां मूवमेंट शुरू करती हैं। गैस्ट्रिक जूस और एंजाइम्स रिलीज होने से खाना पचाने की क्षमता बढ़ती है। कब्ज एसिडिटी और ब्लोटिंग जैसी समस्याएं कम होती हैं।

    सुबह पानी पीने से कई लाइफस्टाइल डिजीज का जोखिम घट सकता है। हाइड्रेटेड रहने से मेटाबॉलिज्म बेहतर होता है और टॉक्सिन्स जमा नहीं होते। किडनी स्टोन यूरिन इन्फेक्शन हाई ब्लड प्रेशर और कब्ज जैसी बीमारियों के खतरे कम होते हैं।

    वजन कम करने में भी यह मददगार है। पानी मेटाबॉलिज्म को 20–30% तक एक्टिव करता है और कैलोरी बर्न में सहायक होता है। पेट थोड़ा भरा महसूस होने से नाश्ते में ओवरईटिंग कम होती है। हालांकि सिर्फ पानी पीने से वजन कम नहीं होता इसे हेल्दी लाइफस्टाइल के साथ अपनाना जरूरी है।

    मानसिक स्वास्थ्य पर भी इसका असर दिखता है। डिहाइड्रेशन से थकान चिड़चिड़ापन और फोकस की कमी हो सकती है। सुबह पानी पीने से ब्रेन को पर्याप्त ऑक्सीजन और ब्लड सप्लाई मिलती है जिससे स्ट्रेस हॉर्मोन बैलेंस होते हैं और दिन की शुरुआत क्लियर और शांत होती है।

    एनर्जी लेवल और मूड पर भी सकारात्मक असर पड़ता है। रात भर डिहाइड्रेटेड रहने से शरीर सुस्त रहता है। पानी पीते ही सेल्स सक्रिय हो जाती हैं थकान कम होती है और सिर भारी लगने की समस्या घटती है। यही कारण है कि हेल्थ एक्सपर्ट चाय कॉफी से पहले पानी पीने की सलाह देते हैं।

    डॉ. शर्मा के मुताबिक गुनगुना या नॉर्मल टेम्परेचर का पानी सुबह के लिए सबसे सही है। ठंडा पानी डाइजेशन धीमा कर सकता है। आमतौर पर 1–2 गिलास 250–500 ml पानी पर्याप्त होता है लेकिन मौसम और हेल्थ कंडीशन के हिसाब से मात्रा बदल सकती है।

    कुछ सावधानियां भी जरूरी हैं। किडनी या हार्ट की समस्या लो ब्लड प्रेशर गंभीर गैस्ट्रिक इश्यू वाले लोग थोड़ी सतर्कता बरतें। सुबह खाली पेट पानी पीना एक छोटी लेकिन असरदार आदत है जो डाइजेशन मेटाबॉलिज्म मेंटल हेल्थ और ओवरऑल वेलबीइंग को बेहतर बनाती है।

  • सोशल मीडिया पर लिया वजन घटाने का उपाय, खाते ही तड़प-तड़प कर हो गई छात्रा की मौत

    सोशल मीडिया पर लिया वजन घटाने का उपाय, खाते ही तड़प-तड़प कर हो गई छात्रा की मौत


    मदुरै । लोग इंटरनेट या सोशल मीडिया पर अक्सर वजन घटाने के लिए उपायों की तलाश करते रहते हैं। हाल ही में यह एक छात्रा की दर्दनाक मौत का कारण बन गया। जानकारी के मुताबिक वजन घटाने के लिए सोशल मीडिया पर एक वीडियो में बताए गए तरीके के अनुसार ‘वेंकारम’ यानी बोरेक्स का सेवन करने के बाद स्नातक की प्रथम वर्ष की एक कॉलेज छात्रा की मौत हो गई है।

    पुलिस ने मंगलवार बताया कि 19 वर्षीय कलैयारसी दिहाड़ी मजदूर वेल मुरुगन (51) और विजयलक्ष्मी की पुत्री थी और नरिमेडु स्थित एक निजी महिला कॉलेज में पढ़ाई कर रही थी। वह सेलूर के मीनाम्बलपुरम इलाके की कामराज क्रॉस स्ट्रीट में रहती थी।

    पुलिस ने बताया कि वजन कुछ ज्यादा होने के कारण कलैयारसी अक्सर वजन घटाने से जुड़े उपाय तलाशती रहती थी।

    पिछले सप्ताह उसने ‘वजन घटाने और छरहरी काया के लिए वेंकारम’ शीर्षक वाला एक यूट्यूब वीडियो देखा था और 16 जनवरी को कीझामासी स्ट्रीट के थर्मुट्टी इलाके के पास स्थित दवा की एक दुकान से यह पदार्थ खरीदा।

    पुलिस ने बताया कि कलैयारसी ने 17 जनवरी को वीडियो में बताए गए तरीके से इसका सेवन किया, जिसके बाद उसे उल्टी और दस्त होने लगे। उसकी मां उसे मुनिसलाई स्थित एक निजी अस्पताल ले गई, जहां उपचार के बाद उसे घर भेज दिया गया। हालांकि उसी शाम लक्षण दोबारा उभरे और पास के एक अन्य अस्पताल में इलाज के बाद घर लौटने पर उसने तेज पेट दर्द और मल में खून आने की शिकायत की।

    पुलिस के अनुसार रात करीब 11 बजे उल्टी और दस्त की स्थिति गंभीर हो गई जिसके बाद पड़ोसियों की मदद से उसे सरकारी राजाजी अस्पताल ले जाया गया, लेकिन वहां पहुंचने पर डॉक्टरों ने उसे मृत घोषित कर दिया। फिलहाल शव का पोस्टमार्टम कर परिजनों को सौंप दिया गया है। सेलूर पुलिस ने मामला दर्ज कर आगे की जांच शुरू कर दी है।

  • एंटी-इंफ्लेमेटरी डाइट से आमिर खान ने घटाया 18 किलो वजन, माइग्रेन में भी हुआ बड़ा सुधार, ‘हैप्पी पटेल’ में दिखेंगे कैमियो में

    एंटी-इंफ्लेमेटरी डाइट से आमिर खान ने घटाया 18 किलो वजन, माइग्रेन में भी हुआ बड़ा सुधार, ‘हैप्पी पटेल’ में दिखेंगे कैमियो में


    नई दिल्ली।बॉलीवुड सुपरस्टार आमिर खान एक बार फिर चर्चा में हैं लेकिन इस बार वजह उनकी कोई फिल्म नहीं बल्कि उनकी सेहत से जुड़ा बड़ा खुलासा है। आमिर खान ने हाल ही में बताया कि उन्होंने बिना किसी हैवी वर्कआउट के सिर्फ एंटी-इंफ्लेमेटरी डाइट को अपनाकर करीब 18 किलो वजन घटाया है। खास बात यह है कि यह बदलाव उन्होंने किसी अपकमिंग फिल्म के लुक के लिए नहीं बल्कि पूरी तरह से हेल्थ रीजन की वजह से किया है।

    आमिर खान ने बॉलीवुड हंगामा को दिए इंटरव्यू में अपने वेट लॉस को लेकर खुलकर बात की। जब उनसे पूछा गया कि उन्होंने कितना वजन कम किया है तो आमिर ने जवाब दियाअठारह किलो असल में। उन्होंने बताया कि यह बदलाव किसी प्लान के तहत नहीं बल्कि अपने आप हुआ। आमिर के मुताबिक स्वास्थ्य कारणों से उन्होंने जो नई डाइट फॉलो करना शुरू की उसने किसी करिश्मे की तरह काम किया।इस डाइट का सबसे बड़ा फायदा यह हुआ कि आमिर खान की लंबे समय से चली आ रही माइग्रेन की समस्या में भी काफी सुधार देखने को मिला। उन्होंने कहा कि वजन घटने के साथ-साथ उनकी माइग्रेन की परेशानी काफी हद तक कम हो गई है जिससे उनकी लाइफ क्वालिटी बेहतर हुई है। आमिर का मानना है कि सही खानपान न सिर्फ शरीर बल्कि दिमागी सेहत के लिए भी बेहद जरूरी है।

    वर्कफ्रंट की बात करें तो आमिर खान जल्द ही अपकमिंग फिल्म हैप्पी पटेल: खतरनाक जासूस में नजर आने वाले हैं। हालांकि इसमें उनका लीड रोल नहीं बल्कि एक कैमियो अपीयरेंस होगा। इस फिल्म के जरिए आमिर खान के भांजे इमरान खान भी एक बार फिर बड़े पर्दे पर दिखाई देंगे। हालांकि आमिर ने साफ किया कि इसे इमरान का प्रॉपर कमबैक कहना सही नहीं होगा क्योंकि दोनों का ही फिल्म में कैमियो रोल है।इमरान खान के कमबैक को लेकर चल रही अटकलों पर आमिर ने कहायह इमरान के लिए फुल कमबैक नहीं है। मेरा और इमरान दोनों का कैमियो है। आमिर ने यह भी बताया कि उन्होंने अपने करियर में बहुत कम कॉमेडी रोल किए हैं लेकिन आज भी लोग उन्हें अंदाज अपना अपना के लिए याद करते हैं।फिल्म में स्टैंडअप कॉमेडियन वीर दास लीड रोल निभा रहे हैं। ट्रेलर पहले ही रिलीज हो चुका है जिसमें वीर दास एक ऐसे लड़के की भूमिका में नजर आ रहे हैं जो लंदन में पला-बढ़ा है और एक खास मिशन के तहत भारत आता है। वीर दास ने फिल्म के लिरिक्स भी खुद लिखे हैं।

    वीर दास ने इंडिया टुडे से बातचीत में फिल्म की थीम पर कहा था कि यह फिल्म हर एनआरआई की सोच पर सवाल उठाती है। उनके मुताबिक कई एनआरआई भारत को जिस नजरिए से देखते हैं वह पूरी तरह गलत है और यह फिल्म उसी सोच को चुनौती देती है।कुल मिलाकर आमिर खान का यह ट्रांसफॉर्मेशन न सिर्फ उनके फैंस के लिए प्रेरणादायक है बल्कि यह भी साबित करता है कि सही डाइट और हेल्दी लाइफस्टाइल से बड़े बदलाव संभव हैं।

  • इन 5 लोगों को भूलकर भी नहीं खानी चाहिए मूंगफली, वरना पड़ जाएंगे लेने के देने

    इन 5 लोगों को भूलकर भी नहीं खानी चाहिए मूंगफली, वरना पड़ जाएंगे लेने के देने


    नई दिल्ली । सर्दियों में धूप में बैठकर मूंगफली खाना एक लोकप्रिय शगल है खासतौर पर भारत में। यह न केवल स्वादिष्ट होती है बल्कि प्रोटीन फैट और फाइबर से भरपूर होने के कारण इसे गरीबों का बादाम भी कहा जाता है। हालांकि यह सेहत के लिए फायदेमंद मानी जाती है लेकिन कुछ विशेष स्वास्थ्य स्थितियों में मूंगफली का सेवन गंभीर नुकसान पहुंचा सकता है। इस लेख में हम उन 5 खास परिस्थितियों पर प्रकाश डालेंगे जिनमें मूंगफली का सेवन स्वास्थ्य के लिए खतरनाक हो सकता है।
    गंभीर एलर्जी से जूझ रहे लोग

    मूंगफली की एलर्जी दुनिया भर में सबसे आम और खतरनाक एलर्जी मानी जाती है। यह एलर्जी गंभीर परिणाम दे सकती है। यदि किसी व्यक्ति को मूंगफली से एलर्जी है तो उसे इससे बने उत्पादों के सेवन से बचना चाहिए। एलर्जी की प्रतिक्रियाएं त्वचा पर चकत्ते खुजली दस्त और सांस लेने में दिक्कत जैसे लक्षणों के रूप में सामने आ सकती हैं। गंभीर मामलों में एनाफिलेक्सिस एक प्रकार की जानलेवा एलर्जिक प्रतिक्रिया हो सकती है जो तुरंत उपचार की आवश्यकता होती है। इस कारण से मूंगफली या उससे बने उत्पादों से पूरी तरह से परहेज करने की सलाह दी जाती है।

    वेट लॉस डाइट पर रहने वाले लोग
    मूंगफली पोषक तत्वों से भरपूर होने के बावजूद इसमें कैलोरी और फैट की मात्रा भी अधिक होती है। यदि आप वजन घटाने के लिए डाइट पर हैं तो मूंगफली का अत्यधिक सेवन आपके प्रयासों पर पानी फेर सकता है। एक मुट्ठी मूंगफली में 160 से 180 कैलोरी होती हैं जो वेट लॉस डाइट के लिए अनुपयुक्त हो सकती हैं। अत्यधिक फैट और कैलोरी के सेवन से आपका वजन बढ़ सकता है जिससे वेट लॉस के प्रयास प्रभावित हो सकते हैं। इसलिए यदि आप वजन घटाना चाहते हैं तो मूंगफली का सेवन नियंत्रित मात्रा में करना चाहिए।

    हाई ब्लड प्रेशर के मरीज

    सामान्य मूंगफली में सोडियम की मात्रा बहुत कम होती है लेकिन बाजार में मिलने वाली अधिकतर मूंगफली ‘रोस्टेड और साल्टेड’ नमकीन होती हैं जिनमें अतिरिक्त नमक होता है। नमक का अत्यधिक सेवन उच्च रक्तचाप हाई ब्लड प्रेशर वाले व्यक्तियों के लिए खतरनाक हो सकता है। यह रक्तचाप को अचानक बढ़ा सकता है जो हृदय रोगियों के लिए गंभीर समस्याएं उत्पन्न कर सकता है। अगर आप हाई ब्लड प्रेशर के मरीज हैं तो नमकीन मूंगफली से बचें और केवल बिना नमक वाली मूंगफली का सेवन करें।

    शरीर में सूजन ,सूजन और जलन की समस्या

    मूंगफली में ओमेगा-6 फैटी एसिड की मात्रा अधिक होती है जबकि ओमेगा-3 की कमी होती है। शरीर में इन फैटी एसिड्स का असंतुलन सूजन और जलन की समस्याओं को बढ़ावा दे सकता है। जो लोग पहले से ही जोड़ों के दर्द आर्थराइटिस या शरीर में सूजन से पीड़ित हैं उन्हें मूंगफली का सेवन बहुत सोच-समझ कर करना चाहिए। ओमेगा-6 का अत्यधिक सेवन सूजन बढ़ा सकता है जिससे इन समस्याओं में वृद्धि हो सकती है। इसीलिए ऐसे लोग मूंगफली के सेवन में सावधानी बरतें और डॉक्टर से परामर्श लें।


    मिनरल्स की कमी वाले लोग

    मूंगफली में फाइटिक एसिड पाया जाता है जो शरीर में आवश्यक मिनरल्स जिंक आयरन कैल्शियम मैग्नीशियम के अवशोषण में बाधा डालता है। यदि आप इन मिनरल्स की कमी से जूझ रहे हैं तो मूंगफली का अत्यधिक सेवन आपके स्वास्थ्य के लिए हानिकारक हो सकता है। यह फाइटिक एसिड शरीर में इन महत्वपूर्ण पोषक तत्वों की कमी को बढ़ा सकता है जिससे अन्य स्वास्थ्य समस्याएं उत्पन्न हो सकती हैं। ऐसे लोगों को मूंगफली के सेवन में संयम बरतना चाहिए और डॉक्टर से सलाह लेनी चाहिए।

    मूंगफली का सेवन सेहत के लिए कई लाभकारी हो सकता है लेकिन यह हर किसी के लिए उपयुक्त नहीं है। खासकर जिन लोगों को एलर्जी हाई ब्लड प्रेशर सूजन की समस्या या मिनरल्स की कमी है उन्हें मूंगफली से बचना चाहिए। किसी भी चीज की अति हानिकारक हो सकती है और यदि आप उपरोक्त में से किसी भी श्रेणी में आते हैं तो मूंगफली को अपनी डाइट में शामिल करने से पहले डॉक्टर से परामर्श जरूर लें। इसके अलावा अगर आप सर्दियों में मूंगफली का आनंद लेना चाहते हैं तो सीमित मात्रा में और बिना नमक वाली मूंगफली का सेवन करना सबसे बेहतर रहेगा

  • भारत में लॉन्च हुई डायबिटीज की दवा ओज़ेम्पिक: जानें कीमत और फायदे

    भारत में लॉन्च हुई डायबिटीज की दवा ओज़ेम्पिक: जानें कीमत और फायदे


    नई दिल्ली। डेनमार्क की प्रमुख दवा कंपनी नोवो नॉर्डिस्क ने भारत में अपनी बहुप्रतीक्षित दवा ओज़ेम्पिक (Ozempic) को आधिकारिक तौर पर लॉन्च कर दिया है। यह दवा टाइप 2 डायबिटीज के मरीजों के लिए एक महत्वपूर्ण उपचार विकल्प बन सकती है। ओज़ेम्पिक को 2017 में अमेरिकी खाद्य और औषधि प्रशासन (FDA) द्वारा अनुमोदित किया गया था और तब से यह दुनिया भर में सबसे ज्यादा बिकने वाली दवाओं में से एक बन गई है। भारत में इसकी कीमत 0.25 मिलीग्राम की खुराक के लिए ₹2,200 प्रति सप्ताह रखी गई है। वहीं, 0.5 मिलीग्राम और 1 मिलीग्राम की खुराक के लिए कीमत ₹10,170 और ₹11,175 प्रति माह होगी।

    यह दवा सेमाग्लूटाइड (Semaglutide) नामक सक्रिय घटक से बनती है, जो शरीर में प्राकृतिक रूप से पाए जाने वाले GLP-1 हार्मोन की तरह काम करता है। यह हार्मोन शरीर को यह संकेत भेजता है कि पेट भरा हुआ है, जिससे भूख कम लगती है और व्यक्ति कम कैलोरी का सेवन करता है। इसके अतिरिक्त, ओज़ेम्पिक का असर पेट की पाचन क्रिया को धीमा करने पर भी पड़ता है, जिससे व्यक्ति लंबे समय तक भरा हुआ महसूस करता है और बार-बार खाने से बचता है। इसके कारण यह दवा वजन घटाने में भी प्रभावी साबित हो रही है, जिससे यह डायबिटीज के मरीजों के अलावा अन्य लोगों के बीच भी लोकप्रिय हो रही है।

    भारत में सीडीएससीओ (केंद्रीय औषधि मानक नियंत्रण संगठन) ने अक्टूबर 2023 में ओज़ेम्पिक को टाइप 2 डायबिटीज के इलाज के लिए मंजूरी दी थी। यह दवा अब ग्लाइसेमिक नियंत्रण में सुधार करने के साथ-साथ उन मरीजों में हृदय संबंधी समस्याओं के जोखिम को भी कम करने में मदद करती है, जिन्हें पहले से हृदय रोग है। यह दवा खासतौर पर डाइट और एक्सरसाइज के साथ मिलकर काम करती है और मरीजों के रक्त शर्करा को नियंत्रित करने में मदद करती है।

    हालांकि ओज़ेम्पिक की कीमतें कुछ उच्च हैं, लेकिन यह एक कारगर उपचार विकल्प हो सकती है। फिर भी, किसी भी नई दवा का उपयोग करने से पहले, मरीजों को अपने डॉक्टर से सलाह जरूर लेनी चाहिए, ताकि यह सुनिश्चित किया जा सके कि यह उनके लिए सही है और उन्हें इसके किसी साइड इफेक्ट का सामना नहीं करना पड़ेगा।