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  • पतले शरीर को मोटा बनाने का तरीका, सुपरफूड्स से बढ़ाएं मसल्स और वजन!

    पतले शरीर को मोटा बनाने का तरीका, सुपरफूड्स से बढ़ाएं मसल्स और वजन!


    नई दिल्ली। आजकल मोटापा जितना आम है, उतना ही पतलापन भी लोगों के लिए चिंता का कारण बन गया है। पतले लोग वजन बढ़ाने के लिए कई तरीके अपनाते हैं, लेकिन अक्सर उनका फायदा नहीं होता। अपोलो स्पेक्ट्रा हॉस्पिटल, दिल्ली की सीनियर न्यूट्रिशनिस्ट डॉ. दिव्या मलिक के अनुसार, वजन बढ़ाने के लिए हाई कैलोरी और न्यूट्रिशन से भरपूर सुपरफूड्स डाइट में शामिल करना जरूरी है।

    वजन बढ़ाने में मददगार सुपरफूड्स

    1. केला: नेचुरल वेट गेनर

    केला वजन बढ़ाने के लिए सबसे आसान और फायदेमंद सुपरफूड माना जाता है। इसमें नेचुरल शुगर, कार्बोहाइड्रेट और फाइबर होते हैं, जो वजन तेजी से बढ़ाने में मदद करते हैं। केला इंस्टेंट एनर्जी देता है और शरीर को मजबूत बनाता है।

    उपयोग: रोज सुबह 1-2 केले खाएं या दूध/दही के साथ मिलाकर शेक बनाकर पिएं।

    2. ड्राई फ्रूट्स और नट्स: हेल्दी फैट्स और प्रोटीन का पावरहाउस

    बादाम, अखरोट, काजू, किशमिश और अंजीर वजन बढ़ाने में कारगर हैं। इनमें हेल्दी फैट्स, प्रोटीन और कैलोरी पर्याप्त मात्रा में होती है। यह मसल्स बिल्डिंग में मदद करता है और शरीर को एनर्जी देता है।

    उपयोग: रात में भिगोकर सुबह खाएं या ड्राई फ्रूट्स मिल्कशेक बनाकर पिएं। इससे कई बीमारियों से भी बचाव होता है।

    3. आलू: हेल्दी कार्बोहाइड्रेट का स्रोत

    आलू और चावल में स्टार्च और कार्बोहाइड्रेट्स भरपूर मात्रा में होते हैं, जो तेजी से वजन बढ़ाते हैं। यह शरीर को एक्टिव रखता है और एनर्जी स्तर बढ़ाता है।

    ध्यान दें: ज्यादा तला-भुना आलू स्वास्थ्य के लिए नुकसानदेह हो सकता है। इसे उबालकर या हल्का फ्राई करके खाना अधिक सुरक्षित रहता है।

    स्वस्थ वजन बढ़ाने के लिए अन्य सुझाव
    डेयरी प्रोडक्ट्स: दूध, दही और पनीर कैल्शियम और प्रोटीन से भरपूर होते हैं, जो हड्डियों और मांसपेशियों को मजबूत बनाते हैं।

    नियमित भोजन: दिन में 5-6 मात्रा भोजन करें, जिससे शरीर को लगातार पोषण मिले।
    व्यायाम: वेट ट्रेनिंग और स्ट्रेंथ एक्सरसाइज मसल्स बिल्डिंग में मदद करती हैं।
    हाइड्रेशन: पर्याप्त पानी पीना जरूरी है, यह मेटाबोलिज्म और पोषण अवशोषण को बेहतर बनाता है।

  • स्वस्थ भोजन और फिर भी मोटापा: इन आदतों को बदलकर रखें फिट और तंदुरुस्त

    स्वस्थ भोजन और फिर भी मोटापा: इन आदतों को बदलकर रखें फिट और तंदुरुस्त

    नई दिल्ली। आज के दौर में युवाएं फिटनेस और हेल्दी लाइफस्टाइल की तरफ तेजी से बढ़ रही हैं। सोशल मीडिया से लेकर घरों की रसोई तक, हर जगह हेल्दी खाने और व्यायाम की चर्चा होने लगी है। लेकिन इसके बावजूद कई महिलाएं हेल्दी डायट लेने के बावजूद वजन घटने के बजाय धीरे-धीरे बढ़ता देख रही हैं।

    मेटाबॉलिज्म और पाचन शक्ति का महत्व

    आयुर्वेद के अनुसार शरीर केवल भोजन से नहीं बल्कि ‘अग्नि’ यानी पाचन शक्ति से चलता है। विज्ञान इसे मेटाबॉलिज्म कहता है। अगर यह सिस्टम धीमा या गड़बड़ हो जाए, तो सबसे पौष्टिक खाना भी शरीर में जाकर फैट का रूप ले सकता है। यही कारण है कि हेल्दी खाना और वजन घटाना हमेशा साथ नहीं चलते।

    हेल्दी फूड्स की मात्रा का असर

    एक आम गलतफहमी यह है कि हेल्दी चीजें जितनी चाहें उतनी खाई जा सकती हैं। ड्राई फ्रूट्स, घी, शहद, मूंगफली का मक्खन या एवोकाडो जैसी चीजें पौष्टिक होते हुए भी भारी होती हैं और शरीर को इन्हें पचाने में ज्यादा समय लगता है। कैलोरी की अधिकता होने पर शरीर अतिरिक्त ऊर्जा फैट के रूप में जमा कर देता है।

    छिपी चीनी और प्रोसेस्ड हेल्दी फूड

    आज बाजार में मिलने वाले कई ‘हेल्दी’ प्रोडक्ट भी वजन बढ़ाने में योगदान करते हैं। लो-फैट दही, मल्टीग्रेन बिस्कुट और एनर्जी बार में छिपी शुगर इंसुलिन बढ़ाती है, जिससे शरीर फैट स्टोर करने लगता है। आयुर्वेद में अत्यधिक मीठा कफ दोष बढ़ाने वाला माना गया है।

    हार्मोन और शारीरिक असंतुलन

    कई बार वजन बढ़ने की वजह खाना नहीं बल्कि हार्मोन असंतुलन होता है। थायरॉइड, पीसीओएस या लंबे समय तक तनाव में रहने से मेटाबॉलिज्म धीमा पड़ता है। आयुर्वेद में इसे दोषों का असंतुलन कहा गया है, खासकर कफ दोष का बढ़ना। ऐसे में शरीर ऊर्जा जलाने के बजाय जमा करने लगता है।

    नींद, मानसिक स्थिति और मांसपेशियों का योगदान

    अधूरी नींद पाचन शक्ति को कमजोर करती है। विज्ञान के अनुसार, कम सोने से भूख बढ़ाने वाला हार्मोन ‘घ्रेलिन’ बढ़ता और पेट भरने वाला हार्मोन ‘लेप्टिन’ घट जाता है। साथ ही उम्र बढ़ने या शारीरिक गतिविधि कम होने से मेटाबॉलिज्म धीमा हो जाता है क्योंकि मांसपेशियों की कमी से कैलोरी बर्न कम होती है।

    हेल्दी खाने के बावजूद वजन बढ़ना मेटाबॉलिज्म, हार्मोन असंतुलन, नींद और शारीरिक सक्रियता पर निर्भर करता है, इसलिए सिर्फ डायट से परिणाम नहीं मिलते।