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  • पोडियम पर क्यों रोई थीं मीराबाई चानू? PM मोदी ने पूछा सवाल, बोलीं- चार साल में बहुत कुछ सहा

    पोडियम पर क्यों रोई थीं मीराबाई चानू? PM मोदी ने पूछा सवाल, बोलीं- चार साल में बहुत कुछ सहा


    नई दिल्ली । कॉमनवेल्थ गेम्स 2026 में लगातार तीसरी बार गोल्ड मेडल जीतकर इतिहास रचने वाली भारतीय वेटलिफ्टर मीराबाई चानू की भावुक तस्वीरें अब भी लोगों के जेहन में हैं। ग्लासगो में पोडियम पर खड़ी मीराबाई जब अपने गले में गोल्ड मेडल पहनकर भारत का राष्ट्रगान सुन रही थीं तो उनकी आंखों से आंसू छलक पड़े थे। रविवार को प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने अपने आवास पर कॉमनवेल्थ गेम्स से पदक जीतकर लौटे भारतीय खिलाड़ियों से मुलाकात की। इस दौरान पीएम मोदी ने मीराबाई चानू के उसी भावुक पल का जिक्र करते हुए उनकी उपलब्धि और संघर्ष की जमकर सराहना की।

    प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने मीराबाई से पूछा कि गोल्ड मेडल जीतने के बाद वह पोडियम पर इतनी भावुक क्यों हो गई थीं। पीएम ने बेहद भावुक अंदाज में कहा कि उनके इतने आंसू बह रहे थे कि ऐसा लग रहा था जैसे हर आंसू की बूंद से गोल्ड मेडल टपक रहा हो। प्रधानमंत्री की यह बात सुनकर मीराबाई ने भी अपने भावुक होने की वजह बताई और कहा कि उस दिन वह बेहद खुश और भावुक थीं। उन्होंने बताया कि पेरिस ओलंपिक में वह सिर्फ एक किलो के अंतर से पदक से चूक गई थीं और उस अनुभव ने उन्हें भीतर तक प्रभावित किया था।

    मीराबाई ने बताया कि एक खिलाड़ी के सफर में केवल मैदान पर प्रदर्शन करना ही चुनौती नहीं होता, बल्कि इसके साथ कई व्यक्तिगत और शारीरिक संघर्ष भी जुड़े होते हैं। उन्होंने कहा कि पिछले चार वर्षों के दौरान उन्हें लगातार चोटों का सामना करना पड़ा। इसके साथ ही परिवार में भी कई तरह की परेशानियां चल रही थीं। इन परिस्थितियों के बावजूद उन्होंने अपनी तैयारी जारी रखी और खुद को दोबारा मजबूत बनाकर कॉमनवेल्थ गेम्स में वापसी की।

    मीराबाई ने कहा कि जब वह पोडियम पर खड़ी थीं और भारत का राष्ट्रगान बजना शुरू हुआ, तो वह अपनी भावनाओं पर नियंत्रण नहीं रख सकीं। ऊपर लहराता भारतीय तिरंगा देखकर उनके आंसू अपने आप निकल आए। उनके लिए वह पल केवल एक व्यक्तिगत जीत नहीं था, बल्कि वर्षों की मेहनत, संघर्ष, चोटों और निराशाओं के बाद देश के लिए सम्मान हासिल करने का क्षण था।

    कॉमनवेल्थ गेम्स में मीराबाई चानू का प्रदर्शन भारतीय खेल इतिहास के लिए बेहद खास रहा। उन्होंने लगातार तीसरे कॉमनवेल्थ गेम्स में गोल्ड मेडल जीतकर ऐसी उपलब्धि हासिल की, जो इससे पहले किसी महिला वेटलिफ्टर के नाम नहीं थी। उन्होंने 48 किलोग्राम वर्ग में कुल 190 किलोग्राम भार उठाकर स्वर्ण पदक अपने नाम किया। उनकी इस जीत ने एक बार फिर साबित किया कि मुश्किल परिस्थितियों के बावजूद निरंतर मेहनत और मजबूत इच्छाशक्ति से दुनिया के बड़े मंच पर सफलता हासिल की जा सकती है।

    मीराबाई की उपलब्धि इसलिए भी खास है क्योंकि उनके सामने पिछले कुछ वर्षों में कई चुनौतियां आईं। चोटों के कारण उन्हें अपनी फिटनेस और तैयारी पर लगातार काम करना पड़ा। पेरिस ओलंपिक में पदक से मामूली अंतर से चूकने के बाद उनके लिए वापसी आसान नहीं थी। लेकिन उन्होंने निराशा को अपनी कमजोरी नहीं बनने दिया और कॉमनवेल्थ गेम्स में शानदार प्रदर्शन करते हुए फिर से स्वर्ण पदक हासिल किया।

    प्रधानमंत्री मोदी ने खिलाड़ियों से मुलाकात के दौरान भारतीय दल के प्रदर्शन की भी सराहना की। ग्लासगो में हुए कॉमनवेल्थ गेम्स 2026 में भारत ने कुल 39 पदक जीते। इनमें 13 गोल्ड, 17 सिल्वर और 9 ब्रॉन्ज मेडल शामिल रहे। भारतीय खिलाड़ियों के इस प्रदर्शन ने देश को गौरवान्वित किया और मीराबाई चानू की ऐतिहासिक हैट्रिक ने इस सफलता को और खास बना दिया। उनके पोडियम पर छलके आंसू उस संघर्ष की कहानी बयां कर रहे थे, जिसने उन्हें लगातार तीसरी बार कॉमनवेल्थ चैंपियन बनाया।

  • मेडल से चूकीं मार्टिना देवी, कॉमनवेल्थ गेम्स में भारत की उम्मीदों को लगा झटका

    मेडल से चूकीं मार्टिना देवी, कॉमनवेल्थ गेम्स में भारत की उम्मीदों को लगा झटका


    नई दिल्ली । कॉमनवेल्थ गेम्स 2026 में भारतीय महिला वेटलिफ्टर मार्टिना देवी मैबाम ने शानदार संघर्ष तो किया, लेकिन पदक जीतने का सपना पूरा नहीं हो सका। महिला 86+ किलोग्राम भार वर्ग में उन्होंने कुल 245 किलोग्राम वजन उठाकर पांचवां स्थान हासिल किया। कांस्य पदक उनसे महज 5 किलोग्राम दूर रह गया। उनकी इस करीबी हार ने भारतीय खेल प्रेमियों को निराश जरूर किया, लेकिन उनके जुझारू प्रदर्शन ने सभी का दिल जीत लिया।

    ग्लासगो के एसईसी आर्माडिलो एरीना में आयोजित इस मुकाबले में मार्टिना की शुरुआत उम्मीद के मुताबिक नहीं रही। स्नैच स्पर्धा में उन्होंने पहले दो प्रयासों में 103 किलोग्राम वजन उठाने की कोशिश की, लेकिन दोनों बार असफल रहीं। लगातार दो असफल प्रयासों के बाद दबाव काफी बढ़ गया था। ऐसे में उन्होंने तीसरे प्रयास में वजन बढ़ाकर 105 किलोग्राम उठाया और सफलता हासिल की। यह लिफ्ट पूरी होते ही उनकी आंखों में खुशी और राहत के आंसू साफ दिखाई दिए।

    स्नैच के बाद क्लीन एंड जर्क में मार्टिना ने दमदार शुरुआत करते हुए पहले प्रयास में 140 किलोग्राम वजन सफलतापूर्वक उठाया। इसके बाद उन्होंने 144 और 146 किलोग्राम का प्रयास किया, लेकिन दोनों कोशिशें सफल नहीं हो सकीं। इस तरह उनका कुल स्कोर 245 किलोग्राम रहा, जो उन्हें पांचवें स्थान तक ही पहुंचा सका।

    इस स्पर्धा में मेजबान इंग्लैंड की एमिली कैंपबेल ने शानदार प्रदर्शन करते हुए कुल 278 किलोग्राम वजन उठाकर स्वर्ण पदक अपने नाम किया। उन्होंने स्नैच में 115 किलोग्राम और क्लीन एंड जर्क में 163 किलोग्राम का सफल प्रयास कर कॉमनवेल्थ गेम्स का नया रिकॉर्ड भी बनाया। मलेशिया की सिती अकीलाह फरहाना ड्रामन ने 253 किलोग्राम के साथ रजत पदक जीता, जबकि कनाडा की एटा मे लव ने कुल 250 किलोग्राम वजन उठाकर कांस्य पदक अपने नाम किया।

    मार्टिना यदि अपने दूसरे या तीसरे क्लीन एंड जर्क प्रयास में 144 किलोग्राम वजन उठाने में सफल हो जातीं तो उनका कुल स्कोर 249 किलोग्राम हो जाता और वह पदक की दौड़ में मजबूती से बनी रहतीं। वहीं 146 किलोग्राम की सफल लिफ्ट उन्हें सीधे कांस्य पदक तक पहुंचा सकती थी। हालांकि खेल में छोटे अंतर ही बड़ा फैसला करते हैं और इस बार किस्मत उनका साथ नहीं दे सकी।

    इसके बावजूद मार्टिना का प्रदर्शन भारतीय वेटलिफ्टिंग के लिए सकारात्मक संकेत माना जा रहा है। उन्होंने दबाव की स्थिति में वापसी करते हुए अपनी मानसिक मजबूती का परिचय दिया और अंत तक पदक की दौड़ में बनी रहीं। आने वाले अंतरराष्ट्रीय टूर्नामेंटों में उनसे और बेहतर प्रदर्शन की उम्मीद की जा रही है।

    कॉमनवेल्थ गेम्स 2026 में भारत का अभियान लगातार मजबूत बना हुआ है। अब तक भारतीय दल 15 पदक जीत चुका है, जिनमें 3 स्वर्ण, 9 रजत और 3 कांस्य पदक शामिल हैं। मार्टिना भले ही इस बार पदक से चूक गईं, लेकिन उनका संघर्ष और जज्बा भविष्य के लिए भारतीय वेटलिफ्टिंग को नई उम्मीद जरूर देता है।

  • आर्थिक तंगी से कॉमनवेल्थ पोडियम तक, लवप्रीत सिंह ने सिल्वर जीतकर बढ़ाया भारत का मान

    आर्थिक तंगी से कॉमनवेल्थ पोडियम तक, लवप्रीत सिंह ने सिल्वर जीतकर बढ़ाया भारत का मान


    नई दिल्ली । कॉमनवेल्थ गेम्स 2026 में भारतीय वेटलिफ्टर लवप्रीत सिंह ने अपने शानदार प्रदर्शन से पूरे देश को गौरवान्वित कर दिया। पुरुषों के 110+ किलोग्राम भार वर्ग में उन्होंने कुल 388 किलोग्राम वजन उठाकर सिल्वर मेडल अपने नाम किया। गोल्ड मेडल उनसे केवल एक किलोग्राम दूर रह गया, लेकिन उनकी मेहनत, संघर्ष और जज्बे ने करोड़ों भारतीयों का दिल जीत लिया। लवप्रीत ने यह साबित कर दिया कि मजबूत इरादों के सामने आर्थिक अभाव भी कभी बड़ी बाधा नहीं बनते।

    पंजाब के अमृतसर जिले के बाल सचंदर गांव में जन्मे लवप्रीत का बचपन बेहद साधारण परिस्थितियों में बीता। उनके पिता दर्जी का काम करते हैं, जबकि दादा सब्जियां बेचकर परिवार का गुजारा करते थे। सीमित आय के बावजूद परिवार ने बेटे के सपनों पर कभी समझौता नहीं किया। पिता ने सिलाई मशीन की आवाज के बीच बेटे के लिए मेडल जीतने का सपना संजोया और हर मुश्किल परिस्थिति में उसका साथ दिया। परिवार ने अपनी जरूरतों में कटौती की, लेकिन लवप्रीत की ट्रेनिंग और खानपान में कोई कमी नहीं आने दी।

    महज 13 वर्ष की उम्र में लवप्रीत ने वेटलिफ्टिंग की दुनिया में कदम रखा। स्थानीय कोचों के मार्गदर्शन में शुरू हुआ यह सफर धीरे-धीरे राष्ट्रीय स्तर तक पहुंचा। उनकी प्रतिभा और अनुशासन ने जल्द ही उन्हें पहचान दिलाई। वर्ष 2015 में भारतीय नौसेना में नौकरी मिलने के बाद उनके करियर को नई दिशा मिली। इसके बाद उन्हें पटियाला स्थित राष्ट्रीय प्रशिक्षण शिविर में अभ्यास का अवसर मिला, जहां उनकी प्रतिभा और अधिक निखरी।

    अंतरराष्ट्रीय स्तर पर भी लवप्रीत ने लगातार अपनी क्षमता का प्रदर्शन किया। उन्होंने कॉमनवेल्थ जूनियर चैंपियनशिप में स्वर्ण और एशियाई जूनियर चैंपियनशिप में कांस्य पदक जीतकर भारतीय वेटलिफ्टिंग में अपनी मजबूत पहचान बनाई। बाद में 2022 कॉमनवेल्थ गेम्स में कांस्य और कॉमनवेल्थ वेटलिफ्टिंग चैंपियनशिप में स्वर्ण पदक जीतकर उन्होंने खुद को देश के भरोसेमंद वेटलिफ्टरों में शामिल कर लिया।

    ग्लासगो में आयोजित कॉमनवेल्थ गेम्स 2026 में लवप्रीत का प्रदर्शन यादगार रहा। स्नैच राउंड में उन्होंने 176 किलोग्राम वजन उठाकर नया कॉमनवेल्थ रिकॉर्ड बनाया और प्रतियोगिता में बढ़त हासिल की। इसके बाद क्लीन एंड जर्क में उन्होंने 212 किलोग्राम वजन सफलतापूर्वक उठाया। अंतिम प्रयास में उन्होंने 217 किलोग्राम वजन उठाकर गोल्ड पर कब्जा जमाने की कोशिश की, लेकिन यह प्रयास सफल नहीं हो सका। इसी कारण वह कुल 388 किलोग्राम के साथ सिल्वर पर रहे, जबकि न्यूजीलैंड के डेविड लिटी ने 389 किलोग्राम उठाकर स्वर्ण पदक अपने नाम किया।

    हालांकि गोल्ड मेडल उनसे सिर्फ एक किलोग्राम दूर रह गया, लेकिन उनके संघर्ष और प्रदर्शन ने उन्हें देश का हीरो बना दिया। साधारण परिवार से निकलकर अंतरराष्ट्रीय मंच पर रिकॉर्ड बनाना और भारत के लिए पदक जीतना किसी प्रेरक कहानी से कम नहीं है। लवप्रीत की सफलता यह संदेश देती है कि मेहनत, अनुशासन और परिवार का विश्वास किसी भी सपने को हकीकत में बदल सकता है। उनका यह सिल्वर मेडल केवल एक खिलाड़ी की उपलब्धि नहीं, बल्कि उन लाखों युवाओं के लिए प्रेरणा है जो सीमित संसाधनों के बावजूद बड़े सपने देखने का साहस रखते हैं।

  • भारत की झोली में एक और मेडल, लवप्रीत सिंह ने वेटलिफ्टिंग में किया कमाल

    भारत की झोली में एक और मेडल, लवप्रीत सिंह ने वेटलिफ्टिंग में किया कमाल

    नई दिल्ली । कॉमनवेल्थ गेम्स 2026 में भारत के वेटलिफ्टर लवप्रीत सिंह ने शानदार प्रदर्शन करते हुए देश की झोली में एक और रजत पदक डाल दिया। स्कॉटलैंड के ग्लासगो में आयोजित पुरुषों के 110+ किलोग्राम भार वर्ग मुकाबले में लवप्रीत ने कुल 388 किलोग्राम वजन उठाकर सिल्वर मेडल अपने नाम किया। वह स्वर्ण पदक से केवल एक किलोग्राम के मामूली अंतर से चूक गए। न्यूजीलैंड के डेविड लिटी ने 389 किलोग्राम वजन उठाकर गोल्ड मेडल जीता, जबकि इंग्लैंड के एंड्रयू ग्रिफिथ्स 356 किलोग्राम के साथ कांस्य पदक हासिल करने में सफल रहे।

    मुकाबले की शुरुआत से ही लवप्रीत सिंह शानदार लय में नजर आए। स्नैच स्पर्धा में उन्होंने अपने पहले प्रयास में 168 किलोग्राम वजन सफलतापूर्वक उठाया। इसके बाद दूसरे प्रयास में 173 किलोग्राम का वजन भी आसानी से उठाकर अपनी दावेदारी मजबूत कर दी। तीसरे और अंतिम प्रयास में उन्होंने 176 किलोग्राम वजन उठाकर प्रतियोगिता में बढ़त बना ली। इस प्रदर्शन के दम पर वह स्नैच में शीर्ष स्थान पर रहे और न्यूजीलैंड के डेविड लिटी पर 10 किलोग्राम की बढ़त हासिल कर चुके थे।

    हालांकि असली मुकाबला क्लीन एंड जर्क में देखने को मिला। लवप्रीत ने पहले 205 किलोग्राम और फिर 212 किलोग्राम वजन सफलतापूर्वक उठाया। इसके बाद उन्होंने स्वर्ण पदक पक्का करने के इरादे से 217 किलोग्राम की चुनौती ली, लेकिन अंतिम प्रयास सफल नहीं हो सका। दूसरी ओर डेविड लिटी ने शानदार वापसी करते हुए क्लीन एंड जर्क में 223 किलोग्राम वजन उठाया और कुल 389 किलोग्राम के साथ महज एक किलोग्राम की बढ़त बनाकर स्वर्ण पदक अपने नाम कर लिया। लवप्रीत का कुल स्कोर 388 किलोग्राम रहा, जिसने उन्हें रजत पदक दिलाया।

    पंजाब के अमृतसर जिले के बाल सचंदर गांव में 6 सितंबर 1997 को जन्मे लवप्रीत सिंह की सफलता संघर्ष और मेहनत की प्रेरक कहानी है। आर्थिक चुनौतियों के बावजूद उन्होंने वर्ष 2010 में महज 13 वर्ष की उम्र में वेटलिफ्टिंग शुरू की। स्थानीय कोचों के मार्गदर्शन में लगातार अभ्यास करते हुए उन्होंने राष्ट्रीय स्तर पर पंजाब का प्रतिनिधित्व किया और अपनी प्रतिभा का लोहा मनवाया।

    साल 2017 में उन्हें पटियाला स्थित भारतीय खेल प्राधिकरण (साई) के राष्ट्रीय प्रशिक्षण शिविर में जगह मिली, जहां उनकी प्रतिभा को और निखार मिला। शुरुआत में उन्होंने 105 किलोग्राम वर्ग में खेलते हुए जूनियर कॉमनवेल्थ और एशियाई जूनियर प्रतियोगिताओं में पदक जीते। बाद में अंतरराष्ट्रीय वेटलिफ्टिंग महासंघ द्वारा नई भार श्रेणियां लागू होने के बाद वह 109 किलोग्राम वर्ग में पहुंचे और वहां भी शानदार प्रदर्शन जारी रखा।

    लवप्रीत इससे पहले 2022 कॉमनवेल्थ गेम्स में कांस्य पदक जीत चुके हैं। इसके अलावा 2022 कॉमनवेल्थ वेटलिफ्टिंग चैंपियनशिप में उन्होंने स्वर्ण पदक भी अपने नाम किया था। अब कॉमनवेल्थ गेम्स 2026 में रजत पदक जीतकर उन्होंने एक बार फिर साबित कर दिया कि वह भारत के सबसे भरोसेमंद वेटलिफ्टरों में शामिल हैं। भले ही इस बार गोल्ड उनसे सिर्फ एक किलोग्राम दूर रह गया, लेकिन उनका प्रदर्शन भारतीय खेल प्रेमियों के लिए गर्व और प्रेरणा का विषय बन गया।

  • ग्लासगो में भारत का दमदार प्रदर्शन, गुलवीर ने रचा इतिहास, हरजिंदर ने जीता सिल्वर; अमित शाह ने दी शुभकामनाएं

    ग्लासगो में भारत का दमदार प्रदर्शन, गुलवीर ने रचा इतिहास, हरजिंदर ने जीता सिल्वर; अमित शाह ने दी शुभकामनाएं


    नई दिल्ली । ग्लासगो में आयोजित कॉमनवेल्थ गेम्स 2026 में भारतीय खिलाड़ियों का शानदार प्रदर्शन लगातार जारी है। पुरुषों की 10,000 मीटर दौड़ में इतिहास रचने वाले गुलवीर सिंह और महिला वेटलिफ्टिंग के 69 किलोग्राम वर्ग में रजत पदक जीतने वाली हरजिंदर कौर को केंद्रीय गृह मंत्री अमित शाह ने बधाई देते हुए उनके प्रदर्शन की सराहना की है। दोनों खिलाड़ियों की उपलब्धियों को भारत के खेल इतिहास में महत्वपूर्ण माना जा रहा है।

    अमित शाह ने सोशल मीडिया मंच एक्स पर गुलवीर सिंह को शुभकामनाएं देते हुए लिखा कि कॉमनवेल्थ गेम्स की 10,000 मीटर दौड़ में भारत के लिए पहला पदक जीतना एक ऐतिहासिक उपलब्धि है। उन्होंने कहा कि गुलवीर की यह सफलता देश के युवा खिलाड़ियों को प्रेरित करेगी और आने वाले वर्षों में भारतीय एथलेटिक्स को नई ऊंचाइयों तक पहुंचाने में मदद करेगी।

    गुलवीर सिंह ने ग्लासगो में बारिश के बीच बेहद चुनौतीपूर्ण परिस्थितियों में शानदार दौड़ लगाई। राष्ट्रीय रिकॉर्डधारी भारतीय धावक पूरे मुकाबले में शीर्ष धावकों के साथ बने रहे और अंतिम लैप में जबरदस्त गति दिखाते हुए 27 मिनट 49.78 सेकंड का समय निकालकर सिल्वर मेडल अपने नाम किया। इसके साथ ही वह कॉमनवेल्थ गेम्स की 10,000 मीटर स्पर्धा में पदक जीतने वाले पहले भारतीय एथलीट बन गए। इससे पहले उनके नाम एशियन गेम्स का कांस्य पदक और एशियन एथलेटिक्स चैंपियनशिप के दो स्वर्ण पदक भी दर्ज हैं।

    वहीं महिला वेटलिफ्टिंग में हरजिंदर कौर ने भी भारत का गौरव बढ़ाया। उन्होंने 69 किलोग्राम वर्ग में कुल 227 किलोग्राम भार उठाकर सिल्वर मेडल अपने नाम किया। स्नैच राउंड में हरजिंदर ने 101 किलोग्राम और क्लीन एंड जर्क में 126 किलोग्राम वजन उठाते हुए अपना सर्वश्रेष्ठ प्रदर्शन किया। इस स्पर्धा का स्वर्ण पदक कनाडा की शार्लेट सिमोन्यू ने 240 किलोग्राम कुल वजन उठाकर जीता, जबकि ऑस्ट्रेलिया की नया फीबे हेमन ने 218 किलोग्राम के साथ कांस्य पदक हासिल किया।

    हरजिंदर की उपलब्धि पर अमित शाह ने कहा कि वेटलिफ्टिंग में भारत का पदक जीतने का सिलसिला लगातार जारी है। उन्होंने लिखा कि यह सफलता उनकी कड़ी मेहनत, समर्पण और संघर्ष का परिणाम है तथा भविष्य में भी उनसे ऐसे ही उत्कृष्ट प्रदर्शन की उम्मीद है।

    कॉमनवेल्थ गेम्स में वेटलिफ्टिंग हमेशा से भारत के सबसे मजबूत खेलों में शामिल रही है और इस बार भी भारतीय खिलाड़ियों ने इस परंपरा को कायम रखा है। दूसरी ओर एथलेटिक्स में गुलवीर सिंह का ऐतिहासिक पदक यह संकेत देता है कि अब भारत लंबी दूरी की दौड़ जैसी चुनौतीपूर्ण स्पर्धाओं में भी विश्व स्तर पर अपनी मजबूत पहचान बना रहा है।

    गुलवीर सिंह और हरजिंदर कौर की इन उपलब्धियों ने ग्लासगो कॉमनवेल्थ गेम्स 2026 में भारत के अभियान को नई मजबूती दी है। दोनों खिलाड़ियों के शानदार प्रदर्शन से देशवासियों में उत्साह है और भारतीय दल से आगामी मुकाबलों में भी पदकों की उम्मीदें बढ़ गई हैं।

  • ग्लासगो में भारत का परचम लहराया शर्मिला बनीं गोल्डन गर्ल चार नए पदकों के साथ मेडल टैली में मजबूत हुई दावेदारी

    ग्लासगो में भारत का परचम लहराया शर्मिला बनीं गोल्डन गर्ल चार नए पदकों के साथ मेडल टैली में मजबूत हुई दावेदारी


    नई दिल्ली। कॉमनवेल्थ गेम्स 2026 में भारतीय खिलाड़ियों का शानदार प्रदर्शन लगातार जारी है। सोमवार देर रात भारतीय दल ने एक बार फिर देश को गौरवान्वित करते हुए चार और पदक अपने नाम किए। इन उपलब्धियों में सबसे बड़ी सफलता पैरा एथलीट शर्मिला ने दिलाई जिन्होंने महिला शॉट पुट एफ57 स्पर्धा में स्वर्ण पदक जीतकर भारत को प्रतियोगिता का दूसरा गोल्ड दिलाया। इसके अलावा भारत को दो रजत और एक कांस्य पदक भी मिला जिससे कुल पदकों की संख्या बढ़कर 10 हो गई। भारत अब दो स्वर्ण पांच रजत और तीन कांस्य पदकों के साथ पदक तालिका में आठवें स्थान पर पहुंच गया है।

    महिला शॉट पुट एफ57 वर्ग के फाइनल में शर्मिला ने शुरुआत से ही शानदार प्रदर्शन किया। उन्होंने छह प्रयासों में लगातार बेहतरीन थ्रो किए और तीसरे प्रयास में 9 दशमलव 81 मीटर का सर्वश्रेष्ठ प्रदर्शन करते हुए स्वर्ण पदक अपने नाम किया। यह उनका इस सत्र का सर्वश्रेष्ठ प्रदर्शन भी रहा। पूरे मुकाबले में उन्होंने आत्मविश्वास और तकनीकी कौशल का बेहतरीन प्रदर्शन किया जिससे प्रतिद्वंद्वी खिलाड़ी उनके आसपास भी नहीं पहुंच सके।

    इस स्पर्धा में घाना की जिनाबु इसाह ने 8 दशमलव 65 मीटर के सर्वश्रेष्ठ प्रयास के साथ रजत पदक हासिल किया जबकि भारत की शिल्पा कंचुगरकोप्पालु शायला ने 7 दशमलव 26 मीटर का व्यक्तिगत सर्वश्रेष्ठ प्रदर्शन करते हुए कांस्य पदक अपने नाम किया। इस तरह एक ही स्पर्धा में भारत ने स्वर्ण और कांस्य दोनों पदक जीतकर शानदार उपलब्धि दर्ज की।

    एथलेटिक्स में भी भारत को बड़ी सफलता मिली। पुरुषों की हाई जंप स्पर्धा में सर्वेश अनिल कुशारे ने 2 दशमलव 25 मीटर की ऊंची छलांग लगाकर रजत पदक अपने नाम किया। गोल्ड मेडल की दौड़ बेहद रोमांचक रही क्योंकि सर्वेश और जमैका के रोमेन बेकफोर्ड दोनों ने समान ऊंचाई पार की। हालांकि प्रयासों की संख्या के आधार पर स्वर्ण पदक जमैका के खिलाड़ी के नाम रहा जबकि सर्वेश को रजत से संतोष करना पड़ा। इसके बावजूद उनका प्रदर्शन भारतीय एथलेटिक्स के लिए बड़ी उपलब्धि माना जा रहा है।

    वेटलिफ्टिंग में भी भारत ने अपनी मजबूत मौजूदगी दर्ज कराई। पुरुषों के 79 किलोग्राम वर्ग में वल्लूरी अजय बाबू ने कुल 330 किलोग्राम वजन उठाकर रजत पदक जीता। उन्होंने स्नैच में 149 किलोग्राम का गेम रिकॉर्ड बनाया और क्लीन एंड जर्क में 181 किलोग्राम भार उठाया। हालांकि मलेशिया के एरी हिदायत मुहम्मद ने कुल 331 किलोग्राम वजन उठाकर स्वर्ण पदक अपने नाम किया। दोनों खिलाड़ियों के बीच मुकाबला बेहद कांटे का रहा और अजय बाबू केवल एक किलोग्राम के अंतर से स्वर्ण पदक से चूक गए।

    भारतीय खिलाड़ियों के लगातार शानदार प्रदर्शन ने यह साबित कर दिया है कि देश के खिलाड़ी अब हर बड़े अंतरराष्ट्रीय मंच पर दमदार चुनौती पेश कर रहे हैं। पैरा खेलों से लेकर एथलेटिक्स और वेटलिफ्टिंग तक भारतीय प्रतिभाएं लगातार पदक जीतकर देश का मान बढ़ा रही हैं। आने वाले दिनों में भी कई स्पर्धाओं में भारतीय खिलाड़ियों से पदकों की उम्मीद बनी हुई है और खेल प्रेमियों की नजर अब अगले मुकाबलों पर टिकी है।

  • भारत की मेडल झोली हुई और मजबूत, राजा मुथुपंडी के सिल्वर पर राष्ट्रपति द्रौपदी मुर्मु और प्रधानमंत्री मोदी ने जताया गर्व

    भारत की मेडल झोली हुई और मजबूत, राजा मुथुपंडी के सिल्वर पर राष्ट्रपति द्रौपदी मुर्मु और प्रधानमंत्री मोदी ने जताया गर्व


    नई दिल्ली । कॉमनवेल्थ गेम्स 2026 में भारतीय खिलाड़ियों का शानदार प्रदर्शन लगातार जारी है और देश के पदकों की संख्या में लगातार इजाफा हो रहा है। वेटलिफ्टिंग में भारत को एक और बड़ी सफलता तब मिली जब तमिलनाडु के प्रतिभाशाली वेटलिफ्टर राजा मुथुपंडी ने पुरुषों के 65 किलोग्राम वर्ग में रजत पदक अपने नाम कर लिया। उनकी इस उपलब्धि ने पूरे देश को गौरवान्वित किया है। राष्ट्रपति द्रौपदी मुर्मु और प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने भी उनकी शानदार सफलता पर बधाई देते हुए उज्ज्वल भविष्य की शुभकामनाएं दी हैं।

    राजा मुथुपंडी ने पूरे मुकाबले के दौरान दमदार प्रदर्शन करते हुए कुल 286 किलोग्राम वजन उठाया। उन्होंने स्नैच में 126 किलोग्राम और क्लीन एंड जर्क में 160 किलोग्राम वजन सफलतापूर्वक उठाया। उनका प्रदर्शन पूरे मुकाबले में बेहद संतुलित और प्रभावशाली रहा। हालांकि स्वर्ण पदक मलेशिया के अजनील बिदिन ने जीता जिन्होंने रिकॉर्ड 299 किलोग्राम वजन उठाकर पहला स्थान हासिल किया लेकिन राजा मुथुपंडी का रजत पदक भारत के लिए किसी बड़ी उपलब्धि से कम नहीं माना जा रहा है।

    राष्ट्रपति द्रौपदी मुर्मु ने सोशल मीडिया पर संदेश जारी करते हुए राजा मुथुपंडी को बधाई दी और कहा कि पुरुषों के 65 किलोग्राम वेटलिफ्टिंग वर्ग में रजत पदक जीतकर उन्होंने पूरे देश का सम्मान बढ़ाया है। राष्ट्रपति ने कहा कि देश को उनकी उपलब्धि पर गर्व है और भविष्य की प्रतियोगिताओं के लिए उन्हें शुभकामनाएं दीं।

    प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने भी राजा मुथुपंडी की उपलब्धि की सराहना करते हुए कहा कि कॉमनवेल्थ गेम्स में वेटलिफ्टिंग से भारत के लिए एक और पदक आना बेहद गर्व की बात है। उन्होंने कहा कि राजा की सफलता से हर भारतीय खुश है और उनका प्रदर्शन देश के युवा खिलाड़ियों को प्रेरित करेगा। प्रधानमंत्री ने उनके उज्ज्वल भविष्य और आगामी प्रतियोगिताओं में और बड़ी सफलताओं की कामना भी की।

    राजा मुथुपंडी का यह पदक भारत के लिए बेहद अहम साबित हुआ क्योंकि इससे पहले भारतीय वेटलिफ्टर ऋषिकांत सिंह चनंबम पुरुषों के 60 किलोग्राम वर्ग में रजत पदक जीत चुके थे जबकि स्टार वेटलिफ्टर मीराबाई चानू ने महिलाओं के 48 किलोग्राम वर्ग में स्वर्ण पदक जीतकर इतिहास रच दिया था। मीराबाई ने लगातार तीसरे कॉमनवेल्थ गेम्स में गोल्ड जीतकर भारतीय खेल इतिहास में अपना नाम और मजबूत कर लिया है।

    भारतीय वेटलिफ्टिंग टीम का यह प्रदर्शन साफ संकेत देता है कि देश के खिलाड़ी अंतरराष्ट्रीय मंच पर लगातार बेहतर प्रदर्शन कर रहे हैं। शुरुआती दिनों में ही वेटलिफ्टिंग में मिले इन पदकों ने भारत की पदक तालिका को मजबूत किया है और अन्य खिलाड़ियों का भी मनोबल बढ़ाया है। खेल विशेषज्ञों का मानना है कि यदि यही लय बरकरार रही तो भारत इस बार कॉमनवेल्थ गेम्स में अपने पिछले प्रदर्शन से भी बेहतर नतीजे हासिल कर सकता है।

    भारत के खिलाड़ियों का लगातार शानदार प्रदर्शन यह साबित कर रहा है कि वर्षों की मेहनत आधुनिक प्रशिक्षण और बेहतर खेल सुविधाओं का सकारात्मक परिणाम अब अंतरराष्ट्रीय मंच पर दिखाई देने लगा है। राजा मुथुपंडी का रजत पदक भी इसी सफलता की एक महत्वपूर्ण कड़ी बन गया है जिसने देशवासियों को एक और गर्व का अवसर दिया है।

  • मीराबाई चानू की ऐतिहासिक जीत पर नेताओं ने जताया गर्व, राहुल गांधी बोले- आपने दुनिया में तिरंगा ऊंचा किया

    मीराबाई चानू की ऐतिहासिक जीत पर नेताओं ने जताया गर्व, राहुल गांधी बोले- आपने दुनिया में तिरंगा ऊंचा किया


    नई दिल्ली । कॉमनवेल्थ गेम्स 2026 में भारत के लिए ऐतिहासिक स्वर्ण पदक जीतने वाली स्टार वेटलिफ्टर मीराबाई चानू को देशभर से बधाइयों का सिलसिला जारी है। लोकसभा में नेता प्रतिपक्ष और कांग्रेस सांसद राहुल गांधी ने उनकी शानदार उपलब्धि पर खुशी जताते हुए इसे पूरे देश के लिए गर्व का क्षण बताया। उन्होंने कहा कि मीराबाई की मेहनत अनुशासन और संघर्ष करोड़ों भारतीयों विशेषकर युवाओं के लिए प्रेरणा का स्रोत है।

    राहुल गांधी ने सोशल मीडिया पर मीराबाई चानू की विजयी तस्वीर साझा करते हुए उन्हें लगातार तीसरी बार कॉमनवेल्थ गेम्स में स्वर्ण पदक जीतने पर हार्दिक बधाई दी। उन्होंने कहा कि मीराबाई ने अपनी अटूट मेहनत दृढ़ संकल्प और अनुशासन के दम पर एक बार फिर अंतरराष्ट्रीय मंच पर भारत का तिरंगा शान से लहराया है। राहुल ने लिखा कि हर भारतीय को उनकी इस ऐतिहासिक सफलता पर गर्व है और उनकी उपलब्धि देश के लाखों युवाओं को आगे बढ़ने की प्रेरणा देती रहेगी।

    कांग्रेस के राष्ट्रीय अध्यक्ष मल्लिकार्जुन खड़गे ने भी मीराबाई चानू को बधाई देते हुए उनकी उपलब्धि को भारतीय खेल इतिहास का गौरवपूर्ण क्षण बताया। उन्होंने वेटलिफ्टर ऋषिकांत सिंह चनंबम को भी रजत पदक जीतने पर शुभकामनाएं दीं। खड़गे ने कहा कि दोनों खिलाड़ियों ने अपने शानदार प्रदर्शन से देश का सम्मान बढ़ाया है और उनकी सफलता आने वाली पीढ़ियों को खेलों में उत्कृष्ट प्रदर्शन के लिए प्रेरित करेगी।

    ग्लासगो में आयोजित कॉमनवेल्थ गेम्स 2026 में मीराबाई चानू ने महिलाओं के 48 किलोग्राम वर्ग में शानदार प्रदर्शन करते हुए स्वर्ण पदक अपने नाम किया। उन्होंने कुल 190 किलोग्राम वजन उठाकर प्रतियोगिता में अपना दबदबा कायम रखा। इस प्रदर्शन के साथ उन्होंने कॉमनवेल्थ गेम्स में लगातार तीसरी बार स्वर्ण पदक जीतने का ऐतिहासिक कारनामा कर दिखाया। इससे पहले वह 2018 के गोल्ड कोस्ट और 2022 के बर्मिंघम राष्ट्रमंडल खेलों में भी स्वर्ण पदक जीत चुकी हैं। वहीं 2014 के ग्लासगो खेलों में उन्होंने रजत पदक हासिल किया था।

    कॉमनवेल्थ गेम्स 2026 में मीराबाई का यह स्वर्ण भारत का पहला गोल्ड मेडल भी बना। दूसरी ओर ऋषिकांत सिंह चनंबम ने पुरुषों के 60 किलोग्राम वर्ग में शानदार प्रदर्शन करते हुए रजत पदक जीता और भारत की पदक तालिका में महत्वपूर्ण योगदान दिया।

    मीराबाई चानू पिछले कई वर्षों से भारतीय वेटलिफ्टिंग की सबसे भरोसेमंद खिलाड़ियों में शामिल रही हैं। उन्होंने टोक्यो ओलंपिक में रजत पदक जीतकर देश का नाम रोशन किया था और अब कॉमनवेल्थ गेम्स में लगातार तीसरे स्वर्ण पदक के साथ अपने शानदार करियर में एक और ऐतिहासिक उपलब्धि जोड़ दी है। उनकी इस सफलता ने एक बार फिर साबित कर दिया कि मेहनत और समर्पण के दम पर भारतीय खिलाड़ी विश्व मंच पर लगातार नई ऊंचाइयां हासिल कर सकते हैं।

  • ग्लास्गो राष्ट्रमंडल खेल 2026 में भारतीय भारोत्तोलकों का शानदार दबदबा, मीराबाई चानू की ऐतिहासिक स्वर्ण हैट्रिक

    ग्लास्गो राष्ट्रमंडल खेल 2026 में भारतीय भारोत्तोलकों का शानदार दबदबा, मीराबाई चानू की ऐतिहासिक स्वर्ण हैट्रिक

    नई दिल्ली । ग्लास्गो में आयोजित हो रहे राष्ट्रमंडल खेल 2026 के चौथे दिन भारतीय एथलीटों ने अपने शानदार प्रदर्शन से देश को गौरवान्वित किया है। खेल प्रतियोगिता के चौथे दिन भारतीय दल ने कुल तीन पदक अपने नाम किए और ये तीनों ही सफलताएं भारोत्तोलन स्पर्धा में हासिल हुईं। स्टार भारोत्तोलक मीराबाई चानू ने एक बार फिर अपनी अंतरराष्ट्रीय बादशाहत साबित करते हुए स्वर्ण पदक पर कब्जा जमाया, जबकि पुरुषों के वर्ग में ऋषिकांता सिंह और आर मुथुपांडी ने अपनी प्रतिभा का लोहा मनवाते हुए देश के लिए रजत पदक जीते। इन सफलताओं के साथ ही प्रतियोगिता में भारत के कुल पदकों की संख्या में अभूतपूर्व बढ़ोतरी दर्ज की गई है।

    महिलाओं के 48 किलोग्राम भारवर्ग में प्रतिस्पर्धा करते हुए ओलंपिक पदक विजेता मीराबाई चानू ने राष्ट्रमंडल खेलों में लगातार तीसरा स्वर्ण पदक जीतकर एक नया कीर्तिमान स्थापित कर दिया। उन्होंने कुल 190 किलोग्राम वजन उठाकर अपने वर्ग में शीर्ष स्थान हासिल किया। शुरुआती प्रयासों में मिली असफलता से बिना विचलित हुए उन्होंने स्नैच और क्लीन एंड जर्क दोनों चरणों में जबरदस्त वापसी की और अपने निकटतम प्रतिद्वंद्वी को भारी अंतर से पछाड़ते हुए रिकॉर्ड कायम किया। यह मौजूदा खेलों में भारत के लिए पहला स्वर्ण पदक भी साबित हुआ।

    पुरुषों के भारोत्तोलन मुकाबलों में मणिपुर के युवा भारोत्तोलक ऋषिकांता सिंह ने अपनी शारीरिक चोटों की परवाह न करते हुए ऐतिहासिक प्रदर्शन किया। 60 किलोग्राम वर्ग में भाग लेते हुए उन्होंने स्नैच स्पर्धा में राष्ट्रमंडल खेलों के रिकॉर्ड की बराबरी की। हालांकि घुटने की तकलीफ के चलते क्लीन एंड जर्क के अंतिम प्रयासों में उन्हें संघर्ष करना पड़ा, इसके बावजूद उन्होंने कुल 264 किलोग्राम वजन उठाकर रजत पदक अपनी झोली में डाला। इसी स्पर्धा के एक अन्य मुकाबले में आर मुथुपांडी ने भी अपनी क्षमता का प्रदर्शन करते हुए कुल 286 किलोग्राम भार उठाया और भारत के लिए एक और रजत पदक सुनिश्चित किया।

    मुक्केबाजी रिंग से भी भारतीय दल के लिए सकारात्मक खबरें सामने आईं, जहां महिला और पुरुष मुक्केबाजों ने अपने-अपने मुकाबलों में दबदबा बनाया। महिला 54 किलोग्राम वर्ग में मुक्केबाज प्रीति ने शानदार खेल दिखाते हुए विपक्षी खिलाड़ी को दूसरे ही दौर में परास्त कर दिया और क्वार्टर फाइनल में प्रवेश कर लिया। पुरुष 55 किलोग्राम वर्ग के एक बेहद रोमांचक और एकतरफा मुकाबले में जादूमणि सिंह ने अपने प्रतिद्वंद्वी को सर्वसम्मत फैसले से हराकर अंतिम आठ में अपनी जगह पक्की की। हालांकि 65 किलोग्राम वर्ग में आदित्य प्रताप यादव को कड़े संघर्ष के बाद अंकों के आधार पर हार का सामना करना पड़ा।

    अन्य खेल स्पर्धाओं में भारत का दिन मिला-जुला रहा। तैराकी के पुरुषों की 4×200 मीटर फ्रीस्टाइल रिले वर्ग में भारतीय टीम ने फाइनल तक का सफर तय किया, लेकिन अंतिम दौर में कड़े मुकाबले के बीच वे छठे स्थान पर रहे और पदक से चूक गए। इसके अलावा लॉन बॉल्स, जिम्नास्टिक और व्हीलचेयर बास्केटबॉल की स्पर्धाओं में भारतीय खिलाड़ियों ने अपनी ओर से कड़ी चुनौती पेश की, हालांकि वे अंतिम चरण तक पहुंचने में असफल रहे। तपन मोहंती ने आर्टिस्टिक जिम्नास्टिक के फाइनल में संघर्ष किया, पर वे पदक तालिका में स्थान बनाने से थोड़ा पीछे रह गए।

  • कॉमनवेल्थ गेम्स 2026 में भारत को दूसरी बड़ी सफलता, ऋषिकांत सिंह ने रिकॉर्डतोड़ प्रदर्शन के साथ जीता सिल्वर मेडल

    कॉमनवेल्थ गेम्स 2026 में भारत को दूसरी बड़ी सफलता, ऋषिकांत सिंह ने रिकॉर्डतोड़ प्रदर्शन के साथ जीता सिल्वर मेडल


    नई दिल्ली । कॉमनवेल्थ गेम्स 2026 में भारतीय खिलाड़ियों का शानदार प्रदर्शन लगातार जारी है। रविवार को वेटलिफ्टिंग में भारत को एक और बड़ी सफलता मिली जब युवा वेटलिफ्टर ऋषिकांत सिंह चनंबम ने पुरुषों की 60 किलोग्राम स्पर्धा में सिल्वर मेडल जीतकर देश का गौरव बढ़ाया। ऋषिकांत ने कुल 264 किलोग्राम वजन उठाते हुए पोडियम पर दूसरा स्थान हासिल किया। उनके शानदार प्रदर्शन से भारत की पदक तालिका में दूसरा पदक जुड़ गया और खेल प्रेमियों को एक और जश्न मनाने का मौका मिला।

    प्रतियोगिता के स्नैच राउंड में ऋषिकांत का प्रदर्शन बेहद शानदार रहा। उन्होंने अपने पहले प्रयास में 116 किलोग्राम वजन सफलतापूर्वक उठाया। इसके बाद दूसरे प्रयास में 119 किलोग्राम और तीसरे प्रयास में 121 किलोग्राम वजन उठाकर सभी प्रतिद्वंद्वियों को पीछे छोड़ दिया। 121 किलोग्राम का सफल प्रयास उनके लिए ऐतिहासिक साबित हुआ क्योंकि इसके साथ उन्होंने स्नैच वर्ग में नया कॉमनवेल्थ गेम्स रिकॉर्ड अपने नाम कर लिया। इस प्रदर्शन ने उन्हें गोल्ड मेडल की मजबूत दावेदारी में ला खड़ा किया।

    क्लीन एंड जर्क राउंड में भी ऋषिकांत ने आत्मविश्वास के साथ शुरुआत की और पहले ही प्रयास में 143 किलोग्राम वजन उठाकर अपनी स्थिति मजबूत कर ली। इसके बाद उन्होंने 148 किलोग्राम वजन उठाने का प्रयास किया लेकिन सफलता नहीं मिली। इसी दौरान मलेशिया के मोहम्मद अनिक ने 149 किलोग्राम वजन उठाकर बढ़त हासिल कर ली।

    गोल्ड मेडल जीतने की उम्मीद बनाए रखने के लिए ऋषिकांत ने अंतिम प्रयास में 151 किलोग्राम वजन उठाने की चुनौती स्वीकार की। उन्होंने वजन को कंधों तक सफलतापूर्वक पहुंचा भी दिया लेकिन अंतिम जर्क पूरा नहीं कर सके। इसी के साथ उनका कुल स्कोर 264 किलोग्राम पर रुक गया और उन्हें सिल्वर मेडल से संतोष करना पड़ा।

    मलेशिया के मोहम्मद अनिक ने कुल 273 किलोग्राम वजन उठाकर नया कॉमनवेल्थ गेम्स रिकॉर्ड बनाया और स्वर्ण पदक अपने नाम किया। वहीं केन्या के जोशुआ अमूंगा मबोया ने 260 किलोग्राम वजन उठाकर कांस्य पदक हासिल किया।

    ऋषिकांत सिंह का यह प्रदर्शन भारत के लिए बेहद अहम रहा। उन्होंने न केवल सिल्वर मेडल जीतकर देश का मान बढ़ाया बल्कि स्नैच में गेम्स रिकॉर्ड बनाकर अपनी प्रतिभा का भी शानदार परिचय दिया। शुरुआती दिनों में ही भारतीय खिलाड़ियों के दमदार प्रदर्शन से कॉमनवेल्थ गेम्स 2026 में भारत के पदकों की उम्मीदें और मजबूत हो गई हैं।

    फिलहाल भारत के खाते में एक सिल्वर और एक ब्रॉन्ज मेडल दर्ज हैं और देश पदक तालिका में 10वें स्थान पर है। ऑस्ट्रेलिया शीर्ष स्थान पर बना हुआ है जबकि इंग्लैंड और नाइजीरिया क्रमशः दूसरे और तीसरे स्थान पर हैं। आने वाले मुकाबलों में भारतीय खिलाड़ियों से और पदकों की उम्मीद की जा रही है।