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  • दुबलेपन को न समझें अच्छी सेहत की निशानी, स्वास्थ्य विशेषज्ञों ने बताया असली फिटनेस का वास्तविक पैमाना

    दुबलेपन को न समझें अच्छी सेहत की निशानी, स्वास्थ्य विशेषज्ञों ने बताया असली फिटनेस का वास्तविक पैमाना

    नई दिल्ली :आधुनिक दौर में सोशल मीडिया के प्रभाव के कारण अधिकांश लोग पतले दिखने को ही अच्छी फिटनेस का पर्याय मानने लगे हैं। हालांकि, स्वास्थ्य विशेषज्ञों का स्पष्ट कहना है कि केवल वजन कम होना या दुबला दिखना किसी व्यक्ति के पूर्ण स्वस्थ होने का प्रमाण नहीं है। वास्तविक फिटनेस का सीधा संबंध इस बात से है कि आपका शरीर दैनिक जीवन के कार्यों को कितनी सहजता और ऊर्जा के साथ पूरा करता है।

    विशेषज्ञों के अनुसार, केवल बाहरी शारीरिक बनावट के आधार पर किसी के स्वास्थ्य का सही आकलन नहीं किया जा सकता। यदि कोई व्यक्ति दिखने में सामान्य या पतला है, लेकिन दिनभर सुस्ती महसूस करता है, सीढ़ियां चढ़ने में हांफने लगता है या उसकी नींद पूरी नहीं होती, तो उसे पूर्णतः स्वस्थ नहीं माना जा सकता। असली फिटनेस शरीर को क्रियाशील, ऊर्जावान और बीमारियों से मुक्त बनाए रखने में निहित है।

    शारीरिक क्षमता का परीक्षण दैनिक गतिविधियों से होता है। थोड़ा सा चलने, वजन उठाने या सामान्य मेहनत के काम करने पर अत्यधिक थकान या सांस फूलना खराब कार्डियोवैस्कुलर फिटनेस का संकेत हो सकता है। यदि पहले की तुलना में सामान्य काम करने में भी परेशानी होने लगे, तो इसे नजरअंदाज करने के बजाय अपनी जीवनशैली और आहार में आवश्यक सुधार करना चाहिए।

    एक स्वस्थ शरीर के लिए लचीलापन और शारीरिक संतुलन भी बेहद महत्वपूर्ण घटक हैं। बिना किसी कठिनाई के झुकना, मुड़ना और दैनिक गतिविधियों के दौरान संतुलन बनाए रखना अच्छी शारीरिक स्थिति को दर्शाता है। बढ़ती उम्र के साथ शरीर की स्थिरता बनाए रखने के लिए नियमित रूप से हल्का व्यायाम और स्ट्रेंथ ट्रेनिंग करना बेहद लाभकारी सिद्ध होता है।

    शारीरिक संकेतकों की बात करें तो रेस्टिंग हार्ट रेट और ब्लड प्रेशर स्वास्थ्य के महत्वपूर्ण पैमाना हैं। अमेरिकन हार्ट एसोसिएशन के अनुसार, सामान्य स्थिति में नियंत्रित ब्लड प्रेशर और स्थिर हृदय गति अंदरूनी रूप से मजबूत शरीर का संकेत देती है। बाहर से फिट दिखने वाले व्यक्ति भी उच्च रक्तचाप या अन्य आंतरिक स्वास्थ्य समस्याओं से ग्रस्त हो सकते हैं, इसलिए नियमित जांच आवश्यक है।

    शारीरिक स्वास्थ्य के साथ-साथ मानसिक स्वास्थ्य का संतुलन भी उतना ही अनिवार्य है। अत्यधिक तनाव, चिड़चिड़ापन या उदासी व्यक्ति की कार्यक्षमता को प्रभावित करती है। स्वास्थ्य विशेषज्ञों का मानना है कि नियमित शारीरिक गतिविधि न केवल मांसपेशियों को मजबूत करती है, बल्कि मानसिक तनाव को दूर कर सकारात्मक ऊर्जा का संचार भी करती है।

    मध्य प्रदेश सहित देशभर के स्वास्थ्य विशेषज्ञों का सुझाव है कि लोग केवल वजन घटाने वाले भ्रामक पैमानों के पीछे न भागें। संतुलित पोषण, पर्याप्त नींद, नियमित व्यायाम और तनावमुक्त दिनचर्या को अपनाकर ही वास्तविक फिटनेस हासिल की जा सकती है। अपने शरीर के संकेतों को समझना और आंतरिक स्वास्थ्य पर ध्यान देना ही लंबे समय तक स्वस्थ रहने का सबसे कारगर तरीका है।

  • एंटी एजिंग के लिए महंगे प्रोडक्ट्स नहीं, ये हेल्दी फूड्स बनाए रखेंगे त्वचा की चमक और खूबसूरती

    एंटी एजिंग के लिए महंगे प्रोडक्ट्स नहीं, ये हेल्दी फूड्स बनाए रखेंगे त्वचा की चमक और खूबसूरती

    नई दिल्ली । बढ़ती उम्र के साथ त्वचा पर झुर्रियां, रूखापन और चमक कम होने जैसी समस्याएं आम हो जाती हैं। हालांकि सही खान-पान और संतुलित डाइट के जरिए उम्र बढ़ने के असर को काफी हद तक कम किया जा सकता है। एंटी-एजिंग डाइट में ऐसे खाद्य पदार्थ शामिल किए जाते हैं, जिनमें एंटीऑक्सीडेंट, विटामिन, मिनरल्स और जरूरी पोषक तत्व भरपूर मात्रा में मौजूद होते हैं। ये तत्व शरीर में बनने वाले फ्री रेडिकल्स से लड़ने में मदद करते हैं और त्वचा को स्वस्थ बनाए रखने में भूमिका निभाते हैं।

    फ्री रेडिकल्स शरीर में बनने वाले ऐसे हानिकारक तत्व होते हैं, जो प्रदूषण, तनाव और खराब जीवनशैली के कारण बढ़ सकते हैं। इनकी वजह से कोशिकाओं को नुकसान पहुंच सकता है और चेहरे पर उम्र के निशान दिखाई देने लगते हैं। ऐसे में डाइट में कुछ खास सुपरफूड्स को शामिल करके त्वचा की प्राकृतिक चमक और सेहत को बेहतर बनाए रखने में मदद मिल सकती है।

    टमाटर एंटी-एजिंग डाइट का एक महत्वपूर्ण हिस्सा माना जाता है। इसमें लाइकोपीन नामक तत्व पाया जाता है, जो त्वचा को सूरज की हानिकारक किरणों से होने वाले नुकसान से बचाने में मदद कर सकता है। इसके अलावा गाजर और कद्दू में मौजूद बीटा-कैरोटीन शरीर में जाकर विटामिन ए में बदलता है, जो त्वचा की मरम्मत प्रक्रिया के लिए जरूरी माना जाता है।

    हरी पत्तेदार सब्जियां भी त्वचा की सेहत के लिए फायदेमंद होती हैं। पालक, मेथी, ब्रोकली और अन्य हरी सब्जियों में विटामिन सी और विटामिन ई जैसे पोषक तत्व पाए जाते हैं, जो त्वचा को स्वस्थ बनाए रखने में मदद करते हैं। वहीं संतरा, नींबू, आंवला और कीवी जैसे खट्टे फल विटामिन सी के अच्छे स्रोत होते हैं। विटामिन सी शरीर में कोलेजन बनाने में मदद करता है, जिससे त्वचा की लचक बनी रह सकती है।

    ड्राई फ्रूट्स और सीड्स जैसे बादाम, अखरोट, अलसी और चिया सीड्स भी एंटी-एजिंग डाइट का हिस्सा बनाए जा सकते हैं। इनमें ओमेगा-3 फैटी एसिड, विटामिन ई, जिंक और अन्य पोषक तत्व होते हैं, जो त्वचा की नमी बनाए रखने और उसे स्वस्थ रखने में मदद कर सकते हैं। नियमित रूप से सीमित मात्रा में इनका सेवन त्वचा के लिए लाभकारी माना जाता है।

    ग्रीन टी में मौजूद एंटीऑक्सीडेंट तत्व कोशिकाओं को नुकसान पहुंचाने वाले फ्री रेडिकल्स से बचाने में मदद कर सकते हैं। इसमें मौजूद पॉलीफेनॉल त्वचा पर प्रदूषण और पर्यावरणीय प्रभावों के कारण होने वाले नुकसान को कम करने में सहायक हो सकते हैं। इसके अलावा पर्याप्त मात्रा में पानी पीना भी त्वचा के लिए बेहद जरूरी है। शरीर में पानी की कमी होने पर त्वचा बेजान और रूखी दिखाई दे सकती है।

    एवोकाडो में मौजूद हेल्दी फैट्स, विटामिन ई और एंटीऑक्सीडेंट त्वचा को पोषण देने में मदद करते हैं। ब्लूबेरी में पाए जाने वाले एंथोसायनिन और विटामिन सी त्वचा को ऑक्सीडेटिव स्ट्रेस से बचाने में सहायक हो सकते हैं। वहीं हल्दी में मौजूद करक्यूमिन अपने एंटीऑक्सीडेंट और एंटी-इंफ्लेमेटरी गुणों के लिए जानी जाती है, जो त्वचा की सूजन और दाग-धब्बों को कम करने में मदद कर सकती है।

    विशेषज्ञों के अनुसार, केवल किसी एक फूड को खाने से उम्र का असर पूरी तरह नहीं रुकता, बल्कि संतुलित आहार, पर्याप्त पानी, अच्छी नींद और स्वस्थ जीवनशैली के साथ इन सुपरफूड्स को डाइट में शामिल करने से त्वचा को लंबे समय तक स्वस्थ और चमकदार बनाए रखने में मदद मिल सकती है।

  • व्रत में कमजोरी से बचना है तो अपनाएं ये पौष्टिक स्नैक्स, दिनभर बनी रहेगी एनर्जी.

    व्रत में कमजोरी से बचना है तो अपनाएं ये पौष्टिक स्नैक्स, दिनभर बनी रहेगी एनर्जी.


    नई दिल्ली । सावन सोमवार का व्रत भगवान शिव की आराधना के साथ-साथ संयम और सात्विक जीवनशैली का भी प्रतीक माना जाता है। इस दौरान लंबे समय तक उपवास रखने से शरीर में ऊर्जा की कमी महसूस हो सकती है। ऐसे में संतुलित और पौष्टिक आहार का चयन करना आवश्यक हो जाता है, ताकि दिनभर शरीर सक्रिय रहे और आवश्यक पोषक तत्वों की पूर्ति भी होती रहे। विशेषज्ञों का मानना है कि हल्के, सुपाच्य और पोषण से भरपूर स्नैक्स व्रत के दौरान बेहतर विकल्प साबित हो सकते हैं।

    साबूदाना से तैयार टिक्की व्रत के सबसे लोकप्रिय व्यंजनों में शामिल है। उबले आलू के साथ तैयार यह स्नैक लंबे समय तक ऊर्जा बनाए रखने में मदद करता है। इसे कम घी या हल्के तेल में सेंककर दही अथवा व्रत वाली हरी चटनी के साथ खाया जा सकता है। इसी तरह कुट्टू के आटे से बना चीला भी प्रोटीन और फाइबर का अच्छा स्रोत माना जाता है। इसमें पनीर या उबले आलू का उपयोग करने से इसका पोषण मूल्य और बढ़ जाता है।

    मखाना चिवड़ा भी व्रत के लिए एक हल्का और पौष्टिक विकल्प है। घी में हल्का भुना मखाना, मूंगफली और सेंधा नमक के साथ तैयार यह स्नैक कैल्शियम, प्रोटीन और एंटीऑक्सीडेंट से भरपूर होता है। हल्की भूख लगने पर यह शरीर को ऊर्जा देने के साथ पेट भी भरा हुआ महसूस कराता है। वहीं उबले आलू, सेंधा नमक, काली मिर्च, नींबू का रस और हरा धनिया मिलाकर तैयार आलू चाट स्वाद और पोषण का संतुलित विकल्प माना जाता है।

    सिंघाड़े के आटे से बने पकौड़े भी व्रत के दौरान पसंद किए जाने वाले व्यंजनों में शामिल हैं। इन्हें पनीर या आलू के साथ तैयार कर दही के साथ परोसा जा सकता है। यदि तली हुई चीजों से बचना चाहते हैं तो इन्हें कम तेल में भी बनाया जा सकता है। इसके अलावा दही, केला, सेब और भीगे हुए बादाम से तैयार फ्रूट एंड नट लस्सी शरीर को हाइड्रेट रखने के साथ लंबे समय तक ऊर्जा बनाए रखने में मदद करती है।

    शकरकंद से बने चिप्स भी सामान्य तले हुए स्नैक्स की तुलना में अधिक पौष्टिक विकल्प माने जाते हैं। इन्हें घी में हल्का सेंककर या बेक करके तैयार किया जा सकता है। इनमें मौजूद फाइबर और जटिल कार्बोहाइड्रेट धीरे-धीरे ऊर्जा प्रदान करते हैं। वहीं राजगिरा और गुड़ से बने लड्डू तुरंत ऊर्जा देने वाले स्नैक्स के रूप में उपयोग किए जा सकते हैं। इन्हें पहले से तैयार कर पूरे सावन में आसानी से इस्तेमाल किया जा सकता है।

    स्वास्थ्य विशेषज्ञ सलाह देते हैं कि व्रत के दौरान तले हुए खाद्य पदार्थों का सेवन सीमित मात्रा में करना चाहिए। दिनभर पर्याप्त पानी, नारियल पानी या छाछ का सेवन शरीर को हाइड्रेट रखने में मदद करता है। इसके साथ ही मौसमी फल, दही और सूखे मेवों को भोजन का हिस्सा बनाना लाभकारी माना जाता है। एक बार में अधिक भोजन करने की बजाय थोड़ी-थोड़ी मात्रा में संतुलित स्नैक्स लेना बेहतर रहता है। सही खानपान अपनाकर सावन सोमवार का व्रत श्रद्धा के साथ-साथ स्वस्थ और ऊर्जावान तरीके से भी पूरा किया जा सकता है।

  • रीढ़ को मजबूत और मन को शांत रखने का आसान मंत्र है सरल धनुरासन जानिए सही तरीका और जबरदस्त फायदे

    रीढ़ को मजबूत और मन को शांत रखने का आसान मंत्र है सरल धनुरासन जानिए सही तरीका और जबरदस्त फायदे


    नई दिल्ली । आज की भागदौड़ भरी जीवनशैली में लंबे समय तक कुर्सी पर बैठकर काम करना मोबाइल और लैपटॉप का लगातार उपयोग तथा शारीरिक गतिविधियों की कमी लोगों को कम उम्र में ही पीठ दर्द गर्दन की अकड़न और रीढ़ से जुड़ी समस्याओं की ओर धकेल रही है। ऐसे समय में योग केवल व्यायाम नहीं बल्कि स्वस्थ जीवन जीने का प्रभावी माध्यम बनकर सामने आया है। योग विशेषज्ञों के अनुसार सरल धनुरासन ऐसा योगासन है जो पूरे शरीर को सक्रिय करने के साथ रीढ़ की हड्डी को मजबूत और लचीला बनाने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाता है। यही कारण है कि आयुष मंत्रालय भी लोगों को नियमित रूप से इस योगासन का अभ्यास करने के लिए प्रेरित कर रहा है।

    सरल धनुरासन शरीर को धनुष के आकार में लाने वाला आसन है। यह पीठ कंधों कमर और पैरों की मांसपेशियों पर सकारात्मक प्रभाव डालता है। नियमित अभ्यास से शरीर की जकड़न धीरे धीरे कम होने लगती है और रीढ़ में लचीलापन बढ़ता है। यह आसन केवल शारीरिक मजबूती ही नहीं देता बल्कि मानसिक तनाव को कम करने और मन को शांत रखने में भी सहायक माना जाता है। दिनभर की थकान और तनाव के बाद इसका अभ्यास शरीर में नई ऊर्जा का संचार करता है।

    योग विशेषज्ञ बताते हैं कि सरल धनुरासन करने के लिए सबसे पहले समतल स्थान पर योगा मैट बिछाकर पेट के बल लेट जाएं। इसके बाद दोनों पैरों को घुटनों से मोड़ें और हाथों से टखनों को पकड़ लें। अब गहरी सांस लेते हुए धीरे धीरे सिर छाती और घुटनों को ऊपर उठाएं। पैरों को पीछे की ओर खींचते हुए शरीर को धनुष जैसी आकृति में लाएं। इस स्थिति में कुछ सेकंड तक सामान्य सांस लेते हुए बने रहें। इसके बाद धीरे धीरे सांस छोड़ते हुए सामान्य अवस्था में लौट आएं और शरीर को आराम दें। शुरुआत में इस आसन को कम समय तक करें और धीरे धीरे अभ्यास की अवधि बढ़ाएं।

    इस योगासन के नियमित अभ्यास से रीढ़ की हड्डी मजबूत होती है शरीर का लचीलापन बढ़ता है पीठ और कंधों की मांसपेशियां मजबूत बनती हैं तथा रक्त संचार बेहतर होता है। यह पाचन तंत्र को सक्रिय करने में भी मदद करता है और शरीर में ऊर्जा का स्तर बढ़ाता है। मानसिक रूप से भी यह आसन तनाव चिंता और थकान को कम करने में उपयोगी माना जाता है जिससे व्यक्ति अधिक शांत और सकारात्मक महसूस करता है।

    हालांकि किसी भी योगासन की तरह सरल धनुरासन करते समय सावधानी रखना भी जरूरी है। यदि किसी व्यक्ति को गंभीर कमर दर्द रीढ़ की गंभीर समस्या हर्निया उच्च रक्तचाप हाल ही में हुई सर्जरी या गर्भावस्था जैसी स्थिति हो तो बिना विशेषज्ञ की सलाह के इसका अभ्यास नहीं करना चाहिए। अभ्यास के दौरान शरीर पर अनावश्यक दबाव डालने या झटके से ऊपर उठने की कोशिश नहीं करनी चाहिए क्योंकि इससे चोट लगने का खतरा बढ़ सकता है।

    योग विशेषज्ञों का मानना है कि यदि सरल धनुरासन को नियमित दिनचर्या का हिस्सा बनाया जाए और संतुलित खानपान तथा स्वस्थ जीवनशैली अपनाई जाए तो यह शरीर और मन दोनों के लिए बेहद लाभकारी साबित हो सकता है। रोजाना कुछ मिनट का यह अभ्यास न केवल रीढ़ को मजबूत बनाता है बल्कि व्यक्ति को तनावमुक्त ऊर्जावान और अधिक सक्रिय जीवन जीने में भी मदद करता है।

  • चेहरे से बालों तक कमाल दिखा रही रेड लाइट थेरेपी, पुलकित सम्राट की मॉर्निंग रूटीन बनी चर्चा का विषय

    चेहरे से बालों तक कमाल दिखा रही रेड लाइट थेरेपी, पुलकित सम्राट की मॉर्निंग रूटीन बनी चर्चा का विषय


    नई दिल्ली।फिटनेस और हेल्दी लाइफस्टाइल को लेकर चर्चा में रहने वाले अभिनेता Pulkit Samrat एक बार फिर अपने मॉर्निंग रूटीन को लेकर सुर्खियों में हैं। हाल ही में उन्होंने अपनी सुबह की दिनचर्या की एक झलक साझा की, जिसमें वे रेड लाइट थेरेपी लेते नजर आए। इसके बाद यह थेरेपी एक बार फिर चर्चा का विषय बन गई और लोगों के बीच इसकी उपयोगिता को लेकर उत्सुकता बढ़ने लगी। स्वास्थ्य और ब्यूटी इंडस्ट्री में पिछले कुछ समय से रेड लाइट थेरेपी तेजी से लोकप्रिय हो रही है और इसे त्वचा, बालों तथा शरीर की रिकवरी से जोड़कर देखा जा रहा है।

    रेड लाइट थेरेपी एक गैर-आक्रामक उपचार प्रक्रिया मानी जाती है, जिसमें शरीर पर विशेष तरंगदैर्ध्य वाली लाल रोशनी का उपयोग किया जाता है। माना जाता है कि यह रोशनी शरीर की कोशिकाओं तक पहुंचकर ऊर्जा उत्पादन को बढ़ाने में मदद करती है। विशेषज्ञों के अनुसार यह प्रक्रिया शरीर के अंदर मौजूद कोशिकाओं के ऊर्जा केंद्र को सक्रिय करती है, जिससे ऊतकों की मरम्मत और प्राकृतिक हीलिंग प्रक्रिया तेज हो सकती है। यही वजह है कि इसे हेल्थ और स्किनकेयर इंडस्ट्री में एक आधुनिक तकनीक के रूप में देखा जा रहा है।

    त्वचा से जुड़ी समस्याओं के लिए भी इस थेरेपी को काफी उपयोगी बताया जाता है। माना जाता है कि यह त्वचा में कोलेजन उत्पादन को बढ़ावा देती है, जिससे त्वचा अधिक लचीली और चमकदार दिखाई दे सकती है। झुर्रियों को कम करने, त्वचा की बनावट बेहतर करने और कुछ प्रकार की त्वचा संबंधी समस्याओं में भी इसके इस्तेमाल की चर्चा होती रही है। इसके अलावा चेहरे की लालिमा और त्वचा की थकान कम करने के लिए भी लोग इसका उपयोग कर रहे हैं।

    बालों के स्वास्थ्य को लेकर भी रेड लाइट थेरेपी को लेकर काफी दावे किए जाते हैं। कुछ विशेषज्ञों का मानना है कि नियमित उपयोग से बालों की जड़ों को सक्रिय करने और बालों को मजबूत बनाने में मदद मिल सकती है। बाल झड़ने की समस्या से परेशान लोग भी अब इस तकनीक में दिलचस्पी दिखा रहे हैं। इसके साथ ही मांसपेशियों की रिकवरी, शरीर के दर्द और सूजन को कम करने के लिए भी इसका इस्तेमाल किया जा रहा है।

    हालांकि, विशेषज्ञ यह भी सलाह देते हैं कि किसी भी थेरेपी को अपनाने से पहले उसके उपयोग और सीमाओं को समझना जरूरी है। जरूरत से ज्यादा उपयोग या गलत तरीके से इस्तेमाल करने पर कुछ लोगों में त्वचा पर लालिमा या हल्की परेशानी हो सकती है। आंखों की सुरक्षा को भी प्राथमिकता देने की सलाह दी जाती है।

    फिलहाल रेड लाइट थेरेपी फिटनेस और वेलनेस की दुनिया में तेजी से लोकप्रिय होती दिखाई दे रही है। स्वास्थ्य और सौंदर्य से जुड़े नए प्रयोगों के बीच अब लोग ऐसे विकल्पों की तलाश में हैं, जो प्राकृतिक तरीके से शरीर और त्वचा को बेहतर बनाने में मदद कर सकें।

  • बिना मेहनत घटता वजन बन सकता है जानलेवा इन लक्षणों को तुरंत पहचानें

    बिना मेहनत घटता वजन बन सकता है जानलेवा इन लक्षणों को तुरंत पहचानें


    नई दिल्ली । आज के समय में जहां लोग वजन कम करने के लिए कड़ी मेहनत करते हैं वहीं अगर बिना किसी डाइटिंग या एक्सरसाइज के वजन तेजी से घटने लगे तो यह चिंता का विषय बन जाता है। मेडिकल भाषा में इसे बिना किसी कारण वज़न कम होना कहा जाता है और इसे कभी भी नजरअंदाज नहीं करना चाहिए। हेल्थ एक्सपर्ट्स के अनुसार यदि 6 से 12 महीनों के भीतर शरीर का 5 प्रतिशत या उससे अधिक वजन बिना किसी कारण के कम हो जाए तो यह किसी गंभीर बीमारी का शुरुआती संकेत हो सकता है।

    हमारा शरीर मेटाबॉलिज्म और हार्मोनल संतुलन के आधार पर काम करता है। जब शरीर के अंदर कोई गड़बड़ी होती है तो वह ऊर्जा के लिए फैट और मांसपेशियों को तेजी से जलाने लगता है जिससे वजन अचानक कम होने लगता है। इसके पीछे कई गंभीर कारण हो सकते हैं जिन्हें समय रहते पहचानना बेहद जरूरी है।

    सबसे आम कारणों में से एक है हाइपरथायरायडिज्म। इस स्थिति में थायराइड ग्रंथि जरूरत से ज्यादा हार्मोन बनाने लगती है जिससे मेटाबॉलिज्म बहुत तेज हो जाता है। व्यक्ति सामान्य से ज्यादा खाना खाने के बावजूद तेजी से दुबला होने लगता है। इसके साथ घबराहट, पसीना आना और दिल की धड़कन तेज होना जैसे लक्षण भी दिखाई देते हैं।

    इसी तरह टाइप 2 मधुमेह भी अचानक वजन घटने का कारण बन सकती है। जब शरीर में इंसुलिन ठीक से काम नहीं करता तो कोशिकाएं ग्लूकोज को ऊर्जा के रूप में इस्तेमाल नहीं कर पातीं। ऐसे में शरीर फैट और मांसपेशियों को तोड़कर ऊर्जा बनाता है जिससे वजन तेजी से कम होने लगता है। बार बार पेशाब आना और ज्यादा प्यास लगना इसके सामान्य संकेत हैं।

    कई मामलों में यह समस्या कैंसर का शुरुआती संकेत भी हो सकती है। कैंसर कोशिकाएं शरीर की ऊर्जा को तेजी से खर्च करती हैं और शरीर को कमजोर बना देती हैं। भूख कम होना, लगातार थकान और बिना वजह वजन गिरना इसके प्रमुख लक्षण हो सकते हैं।

    मानसिक स्वास्थ्य भी इसमें बड़ी भूमिका निभाता है।अवसाद या अत्यधिक तनाव की स्थिति में व्यक्ति की भूख प्रभावित हो जाती है। शरीर में हार्मोनल बदलाव होते हैं जिससे या तो व्यक्ति खाना छोड़ देता है या शरीर पोषक तत्वों को सही तरीके से अवशोषित नहीं कर पाता और वजन गिरने लगता है।

    इसके अलावा शराब, सिगरेट या नशीले पदार्थों की आदत भी शरीर को अंदर से कमजोर कर देती है। इससे इम्यून सिस्टम प्रभावित होता है और शरीर बीमारियों के प्रति अधिक संवेदनशील हो जाता है जिसके कारण वजन तेजी से घट सकता है।

    अचानक वजन कम होना कभी भी सामान्य बात नहीं होती बल्कि यह शरीर का एक चेतावनी संकेत है। यदि आप भी बिना कारण वजन घटने की समस्या से जूझ रहे हैं तो तुरंत डॉक्टर से संपर्क करें। समय पर जांच जैसे ब्लड टेस्ट, थायराइड प्रोफाइल और अन्य जरूरी स्क्रीनिंग करवाना बेहद आवश्यक है। सही समय पर पहचान और इलाज ही आपको बड़ी और गंभीर बीमारियों से बचा सकता है।

  • स्वाद और सेहत का अद्भुत मिलाजुला: रसोई के इस मसाले से पाएं दोनों का बेहतरीन संगम

    स्वाद और सेहत का अद्भुत मिलाजुला: रसोई के इस मसाले से पाएं दोनों का बेहतरीन संगम


    नई दिल्ली । आयुर्वेद बताता है कि भारतीय रसोई घर में ऐसे कई मसाले हैं जिनके सेवन से कई शारीरिक और मानसिक समस्याओं को मात दी जा सकती है। ऐसे ही एक मसाले का नाम जायफल है जो न केवल व्यंजनों में स्वाद और खुशबू जोड़ता है बल्कि स्वास्थ्य के लिए भी बेहद फायदेमंद है।रसोई घर में रखा जायफल स्वाद बढ़ाने में कारगर है। औषधीय गुणों से भरपूर जायफल के बारे में आयुर्वेद विस्तार से जानकारी देता है। इसे दाल करी सब्जियां और मिठाइयों में भी इस्तेमाल किया जाता है।
    इसकी अनोखी सुगंध और हल्की मिठास किसी भी डिश को चार चांद लगा देती है।भारतीय व्यंजनों में जायफल का इस्तेमाल सदियों से होता आ रहा है। इसे अक्सर धनिया हल्दी मिर्च और अन्य मसालों के साथ मिलाकर इस्तेमाल किया जाता है जो डिश को ताजगी और मसालेदार स्वाद देता है। गरम मसाला में भी जायफल शामिल होता है। मिठाइयों जैसे हलवा खीर या लड्डू में इसका पाउडर डालने से स्वाद दोगुना हो जाता है।

    विशेषज्ञों के अनुसार जायफल सिर्फ स्वाद बढ़ाने वाला नहीं बल्कि सेहत का साथी भी है। जायफल का सबसे बड़ा फायदा नींद की समस्या में है। यह प्राकृतिक रूप से मानसिक शांति प्रदान करता है और अनिद्रा से राहत दिलाता है। रात को दूध में थोड़ा सा पीसा जायफल मिलाकर पीने से अच्छी नींद आती है। इसके अलावा जायफल पाचन तंत्र को मजबूत बनाता है। यह गैस अपच पेट फूलना और कब्ज जैसी आम समस्याओं से छुटकारा दिलाता है।

    जायफल में मौजूद तत्व पाचन एंजाइम्स को सक्रिय करते हैं जिससे भोजन आसानी से पचता है। आयुर्वेदाचार्य बताते हैं कि सीमित मात्रा में जायफल का सेवन शरीर के लिए लाभकारी है। यह एंटीऑक्सीडेंट्स से भरपूर होता है जो इम्यूनिटी बढ़ाता है और सूजन कम करता है। हालांकि ज्यादा मात्रा में जायफल हानिकारक हो सकता है इसलिए रोजाना थोड़ी मात्रा ही इस्तेमाल करें। गर्भवती महिलाएं या कोई दवा ले रहे लोग डॉक्टर से सलाह लें।