Tag: West Asia conflict

  • कमल हासन की देशवासियों से अपील: संकट के समय राजनीति नहीं, राष्ट्रहित सर्वोपरि होना चाहिए

    कमल हासन की देशवासियों से अपील: संकट के समय राजनीति नहीं, राष्ट्रहित सर्वोपरि होना चाहिए

    नई दिल्ली । पश्चिम एशिया में जारी तनाव और वैश्विक ऊर्जा संकट के बीच अभिनेता और राजनेता कमल हासन ने देशवासियों से एकजुटता और जिम्मेदारी की अपील की है। उन्होंने कहा है कि मौजूदा समय केवल आर्थिक चुनौती नहीं है, बल्कि यह ऐसा दौर है जब पूरे देश को मिलकर राष्ट्रहित में सोचने और कार्य करने की आवश्यकता है।

    कमल हासन ने अपने सोशल मीडिया अकाउंट पर जारी एक वीडियो संदेश में कहा कि ईरान क्षेत्र में जारी संघर्षऔर समुद्री व्यापार मार्गों में बाधाओं का असर पूरी दुनिया की अर्थव्यवस्था पर पड़ रहा है। भारत जैसे देशों पर इसका सीधा प्रभाव देखने को मिल रहा है, जो अपनी ऊर्जा जरूरतों के लिए बड़े पैमाने पर आयात पर निर्भर हैं। इसके कारण पेट्रोल, डीजल, रसोई गैस और अन्य आवश्यक वस्तुओं की कीमतों पर दबाव बढ़ता जा रहा है।

    उन्होंने कहा कि यह स्थिति केवल सरकारों के लिए ही नहीं, बल्कि आम नागरिकों के लिए भी जिम्मेदारी का समय है। कमल हासन ने लोगों से अपील की कि वे ईंधन और बिजली की खपत कम करने जैसे छोटे-छोटे कदम उठाकर देश की आर्थिक स्थिरता में योगदान दे सकते हैं। उन्होंने कहा कि कई विकसित देश पहले ही ऊर्जा संरक्षण को लेकर सख्त नीतियां अपना चुके हैं और नागरिकों को जागरूक किया जा रहा है।

    अपने संदेश में उन्होंने ऐतिहासिक उदाहरणों का उल्लेख करते हुए कहा कि संकट के समय भारत ने हमेशा एकजुटता दिखाई है। उन्होंने 1962 के युद्ध और 1965 के खाद्य संकट का जिक्र करते हुए बताया कि उस समय देशवासियों ने त्याग और सहयोग की मिसाल पेश की थी। उन्होंने कहा कि आज भले ही परिस्थितियां उतनी गंभीर न हों, लेकिन सामूहिक जिम्मेदारी उतनी ही आवश्यक है।

    कमल हासन ने यह भी कहा कि भारत ने पिछले कुछ वर्षों में नवीकरणीय ऊर्जा के क्षेत्र में महत्वपूर्ण प्रगति की है। सौर ऊर्जा, पवन ऊर्जा, कोल गैसीफिकेशन और परमाणु ऊर्जा जैसे क्षेत्रों में निवेश देश को ऊर्जा आत्मनिर्भरता की दिशा में आगे बढ़ा रहा है। उन्होंने इस प्रयास को सकारात्मक बताते हुए कहा कि विदेशी तेल और गैस पर निर्भरता कम करना दीर्घकालिक आर्थिक मजबूती के लिए जरूरी है।

    उन्होंने केंद्र और राज्य सरकारों से भी अपील की कि वे मिलकर ईंधन पर लगने वाले करों में संतुलन लाएं और सार्वजनिक परिवहन को अधिक सुलभ और किफायती बनाएं। उनका कहना था कि यदि बस, ट्रेन और मेट्रो जैसे साधनों को बढ़ावा दिया जाए तो निजी वाहनों पर निर्भरता कम होगी और ईंधन की बचत संभव होगी।

    कमल हासन ने अपने संदेश में प्रधानमंत्री से सभी राज्यों के मुख्यमंत्रियों की एक संयुक्त बैठक बुलाने का भी आग्रह किया, ताकि ऊर्जा संकट और उससे जुड़ी चुनौतियों पर सामूहिक रणनीति बनाई जा सके। उन्होंने कहा कि देश को इस समय राजनीतिक मतभेदों से ऊपर उठकर सोचने की आवश्यकता है, क्योंकि राष्ट्रहित सबसे महत्वपूर्ण है।

    उन्होंने यह भी कहा कि यदि देशवासी मिलकर ऊर्जा बचत और जिम्मेदारी से खपत की दिशा में कदम उठाते हैं, तो भारत इस वैश्विक संकट से और अधिक मजबूत होकर बाहर निकल सकता है। उनके अनुसार, आज बचाया गया हर यूनिट बिजली और हर लीटर ईंधन भविष्य की पीढ़ियों के लिए महत्वपूर्ण निवेश है।

  • पश्चिम एशिया के रणक्षेत्र में शांतिदूत बनेगा भारत: पाकिस्तान की विफलता के बाद अब 'महान राष्ट्र' हिंदुस्तान से ईरान को बड़ी उम्मीदें।

    पश्चिम एशिया के रणक्षेत्र में शांतिदूत बनेगा भारत: पाकिस्तान की विफलता के बाद अब 'महान राष्ट्र' हिंदुस्तान से ईरान को बड़ी उम्मीदें।


    नई दिल्ली । पश्चिम एशिया में गहराते युद्ध के बादलों और क्षेत्रीय अस्थिरता के बीच वैश्विक कूटनीति का रुख अब तेजी से नई दिल्ली की ओर मुड़ रहा है। पाकिस्तान द्वारा तनाव कम करने के तमाम प्रयासों के विफल होने के बाद, अब ईरान ने खुलकर भारत के प्रति अपना विश्वास व्यक्त किया है। ईरान के उप विदेश मंत्री काजेम गरीबाबादी ने भारत को एक ‘महान राष्ट्र’ और एक स्वतंत्र विकासशील शक्ति बताते हुए यह स्पष्ट कर दिया है कि दुनिया को इस समय भारत जैसे संतुलित दृष्टिकोण वाले देश की सख्त जरूरत है। उनका यह बयान उस समय आया है जब ईरानी विदेश मंत्री सैयद अब्बास अराघची ब्रिक्स देशों के विदेश मंत्रियों की महत्वपूर्ण बैठक में हिस्सा लेने के लिए भारत पहुंच रहे हैं। ईरान का मानना है कि भारत की अध्यक्षता में होने वाली यह बैठक न केवल द्विपक्षीय संबंधों को मजबूत करेगी, बल्कि वैश्विक मंच पर ब्रिक्स की एकजुटता का संदेश भी देगी।

    ईरानी प्रशासन ने वैश्विक मंच पर भारत की भूमिका को अपरिहार्य माना है। तेहरान का तर्क है कि भारत जैसे देश, जिनकी नीति स्वतंत्र और शांतिप्रिय रही है, वर्तमान युद्ध को रोकने और क्षेत्र में सुरक्षा बहाल करने की क्षमता रखते हैं। विशेष रूप से ब्रिक्स के भीतर चल रही आंतरिक खींचतान के बीच ईरान चाहता है कि भारत अपनी प्रभावशीलता का उपयोग कर साझा घोषणापत्र पर सहमति बनाए। संयुक्त अरब अमीरात जैसे देशों के साथ ईरान के वैचारिक मतभेदों के बावजूद, ईरान की भारत से यह अपेक्षा है कि वह इस महत्वपूर्ण समूह को विभाजित होने से बचाएगा। यह कूटनीतिक विश्वास भारत की बढ़ती सॉफ्ट पावर और उसकी विश्वसनीय विदेश नीति का प्रमाण है, जो शत्रुतापूर्ण गुटों के बीच भी मध्यस्थ की भूमिका निभाने के लिए तैयार रहता है।

    हालांकि, कूटनीतिक मधुरता के साथ-साथ सामरिक चुनौतियां भी कम नहीं हैं। स्ट्रेट ऑफ होर्मुज में जारी संघर्ष के कारण समुद्री व्यापार बुरी तरह प्रभावित हुआ है, जहाँ कई भारतीय जहाज फंसे हुए हैं। ईरान ने स्पष्ट कर दिया है कि इस जलमार्ग का उपयोग करने वाले जहाजों को अब सेवा शुल्क देना होगा। ईरान का तर्क है कि वह अंतरराष्ट्रीय समुद्री कानूनों की उन बाध्यताओं से मुक्त है जो उसे इस तरह के टैक्स लगाने से रोकते हैं। यह भारत के लिए एक व्यापारिक चुनौती भी है, क्योंकि उसके ऊर्जा हितों और मालवाहक जहाजों की सुरक्षा सीधे तौर पर इस जलमार्ग से जुड़ी हुई है। भारत को अब अपनी कूटनीतिक कुशलता का परिचय देते हुए एक तरफ ईरान के साथ अपने ऐतिहासिक संबंधों को बचाना है और दूसरी तरफ वैश्विक व्यापारिक सुगमता को भी बहाल कराना है।

    ईरान ने अपने पड़ोसी देशों पर भी गंभीर आरोप लगाए हैं कि उनकी धरती का इस्तेमाल अमेरिकी सैन्य ठिकानों द्वारा ईरान पर हमले के लिए किया जा रहा है। ऐसी जटिल स्थिति में भारत के विदेश मंत्रालय के अधिकारियों के साथ ईरान की उच्चस्तरीय बातचीत इस संघर्ष को समाप्त करने की दिशा में एक बड़ा कदम हो सकती है। ब्रिक्स बैठक के इतर होने वाली द्विपक्षीय वार्ताओं में भारत, रूस और ईरान के बीच क्षेत्रीय सुरक्षा और व्यापारिक हितों पर केंद्रित चर्चा होने की प्रबल संभावना है। कुल मिलाकर, ईरान का भारत को एक ‘महान राष्ट्र’ के रूप में संबोधित करना यह दर्शाता है कि अब मध्य-पूर्व का समाधान वाशिंगटन या इस्लामाबाद के बजाय नई दिल्ली की कूटनीतिक मेज पर तलाशा जा रहा है। भारत के लिए यह अपनी वैश्विक नेतृत्व क्षमता को सिद्ध करने का एक ऐतिहासिक अवसर है।

  • वेस्ट एशिया में तनाव के बीच ट्रंप का बड़ा दावा, बोले- ईरान विवाद जल्द होगा खत्म; परमाणु मुद्दे पर अमेरिका का सख्त रुख

    वेस्ट एशिया में तनाव के बीच ट्रंप का बड़ा दावा, बोले- ईरान विवाद जल्द होगा खत्म; परमाणु मुद्दे पर अमेरिका का सख्त रुख



    नई दिल्ली। 28 फरवरी से जारी संघर्ष के बीच क्षेत्र में हालात अब भी बेहद तनावपूर्ण बने हुए हैं, हालांकि युद्धविराम के प्रयासों और अमेरिका-ईरान बातचीत की कोशिशों ने कूटनीतिक हलचल बढ़ा दी है। इसी बीच अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने दावा किया है कि ईरान विवाद जल्द सुलझ सकता है।

    ट्रंप का दावा: जल्द खत्म होगा विवाद
    रिपोर्ट्स के मुताबिक, ट्रंप ने अपने समर्थकों से बातचीत में कहा कि ईरान के साथ युद्ध जैसी स्थिति जल्द खत्म हो जाएगी। उन्होंने कहा कि अमेरिका का मुख्य उद्देश्य ईरान को परमाणु हथियार हासिल करने से रोकना है और इसी वजह से कड़े कदम उठाए जा रहे हैं।

    ट्रंप ने अपनी नीति का बचाव करते हुए कहा कि यह कार्रवाई राष्ट्रीय सुरक्षा के लिए जरूरी है और अधिकतर लोग इसे सही मानते हैं।

    क्षेत्र में लगातार हिंसा जारी
    हालात अब भी गंभीर बने हुए हैं

    दक्षिणी तेहरान में अमेरिकी-इस्राइली हमलों में 12 लोगों की मौत

    लेबनान में पिछले 24 घंटों में 33 लोगों की मौत, जिनमें एक किशोर भी शामिल

    लेबनान से उत्तरी इस्राइल पर रॉकेट हमले में 1 व्यक्ति की मौत और 2 घायल

    ईरानी हमले में बहरीन में मोरक्को के सैनिक की मौत और कई घायल

    ईरान का पलटवार और बयान
    ईरान की संसद अध्यक्ष मोहम्मद बागेर गालिबाफ ने ट्रंप के दावों को खारिज करते हुए उन्हें अफवाह बताया। उन्होंने कहा कि ऐसे बयान वैश्विक वित्तीय और तेल बाजार को प्रभावित करने के लिए दिए जा रहे हैं।उन्होंने अमेरिकी सैन्य अभियानों पर तंज कसते हुए इन्हें “ऑपरेशन ट्रस्ट मी ब्रो” और “ऑपरेशन फॉक्सियोस” कहा और कहा कि ये रणनीतियां विफल साबित हो रही हैं।


    अंतरराष्ट्रीय प्रतिक्रिया
    ईरान के विदेश मंत्री अब्बास अराघची ने जर्मनी के राष्ट्रपति के उस बयान का समर्थन किया, जिसमें अमेरिका-इस्राइल की कार्रवाई को अंतरराष्ट्रीय कानून का उल्लंघन बताया गया था।

    वेस्ट एशिया में हालात अभी भी विस्फोटक बने हुए हैं। एक तरफ सैन्य टकराव और जवाबी हमले जारी हैं, वहीं दूसरी तरफ अमेरिका-ईरान के बीच कूटनीतिक बातचीत की उम्मीदें भी जिंदा हैं, जिससे आने वाले दिनों में बड़ा बदलाव संभव माना जा रहा है।

  • होर्मुज स्ट्रेट में तनाव के बीच भारत-ईरान का बड़ा कूटनीतिक कदम; विदेश मंत्री अराघची ने डॉ. जयशंकर के साथ की रणनीतिक वार्ता।

    होर्मुज स्ट्रेट में तनाव के बीच भारत-ईरान का बड़ा कूटनीतिक कदम; विदेश मंत्री अराघची ने डॉ. जयशंकर के साथ की रणनीतिक वार्ता।

    नई दिल्ली । पश्चिम एशिया में बढ़ते सैन्य तनाव और होर्मुज जलडमरूमध्य (Strait of Hormuz) की संवेदनशील सुरक्षा स्थिति के बीच ईरान और भारत के बीच उच्च स्तरीय कूटनीतिक संवाद हुआ है। ईरान के विदेश मंत्री सैय्यद अब्बास अराघची ने बुधवार शाम भारत के विदेश मंत्री डॉ. एस जयशंकर को फोन कर क्षेत्रीय स्थिरता और द्विपक्षीय हितों से जुड़े गंभीर मुद्दों पर चर्चा की।

    इस बातचीत में मुख्य रूप से होर्मुज स्ट्रेट में बढ़ती सैन्य हलचल और पश्चिम एशिया में जारी संघर्ष को रोकने के उपायों पर ध्यान केंद्रित किया गया। भारतीय विदेश मंत्री ने इस संवाद की पुष्टि करते हुए स्पष्ट किया कि दोनों देश मौजूदा संकट की गंभीरता को देखते हुए एक-दूसरे के निरंतर संपर्क में रहने पर सहमत हुए हैं। यह वार्ता ऐसे समय में हुई है जब वैश्विक व्यापार मार्ग पर युद्ध के बादल मंडरा रहे हैं।

    ईरानी दूतावास के अनुसार, इस चर्चा में न केवल सुरक्षा मुद्दों बल्कि युद्धविराम की संभावनाओं और अंतरराष्ट्रीय कूटनीति पर भी विचार-विमर्श किया गया। इसी बीच, ईरान के शीर्ष नेतृत्व की ओर से भारत को लेकर एक सकारात्मक संकेत मिला है। ईरान के सर्वोच्च नेतृत्व के प्रतिनिधियों का मानना है कि भारत इस क्षेत्र में शांति स्थापित करने और चल रही जंग को समाप्त करने में एक अत्यंत महत्वपूर्ण और प्रभावी भूमिका निभा सकता है।

    उन्होंने वर्तमान संकट को ‘दमन और आत्मरक्षा’ के बीच का संघर्ष करार देते हुए बढ़ते मानवीय नुकसान पर गहरी चिंता व्यक्त की है। ईरान का मानना है कि वैश्विक समुदाय को अपनी प्राथमिकताओं पर पुनर्विचार करने की आवश्यकता है और भारत जैसे प्रभावशाली राष्ट्र इस दिशा में मध्यस्थता कर सकते हैं।

    दूसरी ओर, सैन्य मोर्चे पर ईरान का रुख बेहद सख्त नजर आ रहा है। इस्लामिक रिवोल्यूशनरी गार्ड कोर (IRGC) की नौसेना ने अमेरिका को कड़े शब्दों में चेतावनी जारी की है। ईरानी सैन्य अधिकारियों का दावा है कि यदि अमेरिका ने कोई भी नई सैन्य गलती की, तो ईरान अपनी ‘आश्चर्यजनक रणनीतियों’ और नव विकसित रक्षा क्षमताओं का उपयोग करने से पीछे नहीं हटेगा।

    इसके साथ ही, ईरान की राष्ट्रीय सुरक्षा समिति ने स्पष्ट कर दिया है कि रणनीतिक रूप से महत्वपूर्ण होर्मुज जलडमरूमध्य पर वह अपना नियंत्रण किसी भी कीमत पर नहीं छोड़ेगा। ईरानी संसद में दिए गए बयानों के अनुसार, देश के पास मिसाइलों और उन्नत ड्रोनों का इतना विशाल भंडार है कि वह किसी भी लंबे संघर्ष का सामना करने के लिए पूरी तरह सक्षम है।

    कूटनीतिक स्तर पर यह भी खुलासा हुआ है कि तनाव के बावजूद पर्दे के पीछे कुछ वार्ताओं के रास्ते खुले हुए हैं। खबर है कि कुछ पड़ोसी देशों के माध्यम से अमेरिका और ईरान के बीच परोक्ष संवाद की प्रक्रिया जारी है, जिसका प्रबंधन ईरानी संसद के अध्यक्ष द्वारा किया जा रहा है।

    हालांकि, जमीन पर स्थिति अभी भी तनावपूर्ण बनी हुई है। ईरान के कड़े सैन्य तेवर और भारत के साथ बढ़ती कूटनीतिक सक्रियता यह दर्शाती है कि आने वाले दिन पश्चिम एशिया की भू-राजनीति के लिए अत्यंत निर्णायक होने वाले हैं। वैश्विक अर्थव्यवस्था के लिए जीवनरेखा माने जाने वाले होर्मुज मार्ग की सुरक्षा अब अंतरराष्ट्रीय कूटनीति के केंद्र में आ गई है।

  • वैश्विक तेल संकट के बीच बड़ा फैसला: IEA के 40 करोड़ बैरल आपात भंडार जारी करने के कदम का भारत ने किया स्वागत

    वैश्विक तेल संकट के बीच बड़ा फैसला: IEA के 40 करोड़ बैरल आपात भंडार जारी करने के कदम का भारत ने किया स्वागत


    नई दिल्ली । पश्चिम एशिया में जारी भीषण संघर्ष के कारण वैश्विक ऊर्जा बाजार में अनिश्चितता और तेल की कीमतों में तेज उछाल की आशंका के बीच अंतर्राष्ट्रीय ऊर्जा एजेंसी ने बड़ा और ऐतिहासिक कदम उठाया है। एजेंसी ने अपने सदस्य देशों के साथ मिलकर बाजार में 40 करोड़ बैरल आपातकालीन तेल भंडार जारी करने का फैसला किया है। इस निर्णय का भारत ने खुले तौर पर स्वागत करते हुए कहा है कि यह कदम वैश्विक तेल आपूर्ति को स्थिर बनाए रखने और कीमतों को बेकाबू होने से रोकने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाएगा।

    दरअसल पश्चिम एशिया में चल रहे संघर्ष और क्षेत्रीय तनाव के कारण कच्चे तेल की वैश्विक आपूर्ति बुरी तरह प्रभावित हुई है। इसी को ध्यान में रखते हुए अंतर्राष्ट्रीय ऊर्जा एजेंसी के 32 सदस्य देशों ने समन्वित रूप से यह निर्णय लिया है कि वे अपने रणनीतिक तेल भंडार का एक बड़ा हिस्सा बाजार में जारी करेंगे। भारत, जो IEA का एक महत्वपूर्ण सहयोगी सदस्य है, ने इस फैसले का समर्थन करते हुए कहा है कि वह ऊर्जा बाजार की स्थिति और पश्चिम एशिया के घटनाक्रम पर लगातार नजर बनाए हुए है।

    भारत सरकार का मानना है कि इस तरह का समन्वित अंतरराष्ट्रीय कदम मौजूदा संकट की स्थिति में बेहद आवश्यक है। सरकार ने कहा है कि वैश्विक ऊर्जा सुरक्षा को बनाए रखने के लिए भारत अंतरराष्ट्रीय समुदाय और सहयोगी देशों के साथ मिलकर काम करने के लिए प्रतिबद्ध है। विशेषज्ञों का मानना है कि यदि बाजार में अचानक आपूर्ति कम हो जाती है तो तेल की कीमतों में भारी उछाल आ सकता है, जिससे वैश्विक अर्थव्यवस्था पर व्यापक असर पड़ सकता है।

    इस संकट की सबसे बड़ी वजह रणनीतिक रूप से बेहद महत्वपूर्ण समुद्री मार्ग होर्मुज जलडमरूमध्य में आई भारी बाधा है। 28 फरवरी से शुरू हुए संघर्ष के बाद इस मार्ग से होने वाला तेल निर्यात बुरी तरह प्रभावित हुआ है और अब यह पहले की तुलना में लगभग 10 प्रतिशत तक ही रह गया है। यह जलडमरूमध्य वैश्विक समुद्री तेल व्यापार का लगभग 25 प्रतिशत हिस्सा संभालता है, इसलिए यहां की स्थिति पूरी दुनिया के ऊर्जा बाजार को सीधे प्रभावित करती है।

    साल 2025 के आंकड़ों के अनुसार रोजाना करीब 2 करोड़ बैरल तेल इसी मार्ग से होकर गुजरता था, लेकिन युद्ध और अस्थिरता के कारण यह आपूर्ति गंभीर संकट में फंस गई है। अंतर्राष्ट्रीय ऊर्जा एजेंसी के अनुसार इस मार्ग का कोई प्रभावी वैकल्पिक रास्ता नहीं है, जिसके कारण ऊर्जा सुरक्षा को लेकर चिंता और बढ़ गई है।

    IEA का यह कदम इसलिए भी खास माना जा रहा है क्योंकि 1974 में एजेंसी के गठन के बाद यह केवल छठा मौका है जब सदस्य देशों ने मिलकर इस तरह का समन्वित आपातकालीन तेल भंडार जारी करने का निर्णय लिया है। इससे पहले 1991 के खाड़ी युद्ध, 2005 के ऊर्जा संकट, 2011 के लीबिया संकट और 2022 के वैश्विक ऊर्जा संकट के दौरान भी ऐसे कदम उठाए गए थे।

    फिलहाल IEA सदस्य देशों के पास कुल मिलाकर 1.2 अरब बैरल से अधिक का रणनीतिक तेल भंडार सुरक्षित है, जिसे केवल आपातकालीन परिस्थितियों में ही बाजार में उतारा जाता है। इसके अलावा उद्योगों के पास भी लगभग 60 करोड़ बैरल का अतिरिक्त स्टॉक मौजूद है, जिसे सरकारी नियमों के तहत सुरक्षित रखना अनिवार्य होता है।

    विशेषज्ञों का मानना है कि यदि यह भंडार धीरे-धीरे बाजार में उतारा जाता है तो इससे वैश्विक तेल कीमतों को स्थिर रखने में मदद मिल सकती है। भारत जैसे विकासशील देशों के लिए यह बेहद महत्वपूर्ण है क्योंकि तेल की कीमतों में तेजी सीधे तौर पर महंगाई, परिवहन लागत और आम जनता की जेब पर असर डालती है। उम्मीद की जा रही है कि आने वाले दिनों में इस कदम से वैश्विक ऊर्जा बाजार में कुछ हद तक स्थिरता लौट सकेगी।

  • पश्चिम एशिया जंग के बीच अमेरिका ने रूस को दी चेतावनी, ईरान संघर्ष से दूर रहने को कहा

    पश्चिम एशिया जंग के बीच अमेरिका ने रूस को दी चेतावनी, ईरान संघर्ष से दूर रहने को कहा


    वॉशिंगटन। पश्चिम एशिया में जारी जंग के बीच अमेरिका ने रूस को साफ संदेश दिया है कि वह ईरान से जुड़े संघर्ष में दखल न दे। अमेरिकी युद्ध सचिव पीट हेगसेथ ने पेंटागन में प्रेस ब्रीफिंग के दौरान कहा कि हाल ही में अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप और रूस के राष्ट्रपति व्लादिमीर पुतिन के बीच हुई फोन बातचीत में इस मुद्दे पर स्पष्ट बातें हुई हैं। अमेरिका का मानना है कि मौजूदा संघर्ष को और बढ़ने से रोकना जरूरी है और रूस को इसमें शामिल नहीं होना चाहिए।

    ट्रंप-पुतिन की बातचीत में पश्चिम एशिया का जिक्र
    रूस के राष्ट्रपति के सलाहकार यूरी उशाकोव के अनुसार, दोनों नेताओं के बीच नौ मार्च को फोन पर बातचीत हुई थी। इस दौरान ईरान के आसपास बढ़ते संघर्ष और सुरक्षा हालात पर चर्चा हुई। पुतिन ने कहा कि इस संकट का हल केवल राजनीतिक और कूटनीतिक तरीके से ही निकाला जा सकता है। वहीं ट्रंप ने इस्राइल और अमेरिका की सैन्य कार्रवाई पर अपनी स्थिति स्पष्ट की और युद्ध की वर्तमान स्थिति पर अपनी राय साझा की।

    ईरान के नए सुप्रीम लीडर को चेतावनी
    अमेरिकी युद्ध सचिव ने ईरान के नए सुप्रीम लीडर अयातुल्ला मोजतबा खामेनेई को भी चेतावनी दी। उन्होंने कहा कि ईरान को परमाणु हथियार बनाने की कोशिश नहीं करनी चाहिए, क्योंकि ऐसा करने पर हालात और खतरनाक हो सकते हैं। अमेरिका ने यह भी दोहराया कि वह ईरान के परमाणु कार्यक्रम पर लगातार नजर रखे हुए है।

    मिनाब स्कूल हमले की जांच का आश्वासन
    ईरान के मिनाब शहर में एक प्राथमिक स्कूल पर हुए मिसाइल हमले में कम से कम 168 बच्चों की मौत हो गई। इस पर अमेरिका ने कहा कि घटना की पूरी जांच की जाएगी। पीट हेगसेथ ने कहा कि अमेरिकी सैन्य अभियानों में नागरिकों की सुरक्षा का पूरा ध्यान रखा जाता है और हर हमले की समीक्षा होती है।

    हॉर्मुज जलडमरूमध्य में सुरक्षा रणनीति
    पेंटागन के जॉइंट चीफ्स ऑफ स्टाफ के चेयरमैन जनरल डैन केन ने कहा कि अमेरिका हॉर्मुज जलडमरूमध्य से गुजरने वाले जहाजों की सुरक्षा सुनिश्चित करने पर विचार कर रहा है। यह क्षेत्र विश्व के सबसे अहम समुद्री व्यापार मार्गों में से एक है। जरूरत पड़ने पर अमेरिकी सेना जहाजों को सुरक्षा देने के लिए एस्कॉर्ट मिशन भी चला सकती है। पेंटागन ने कहा कि लड़ाकू विमानों, बमवर्षकों और मिसाइल हमलों की संख्या बढ़ाई जा रही है और जब तक निर्धारित लक्ष्य पूरे नहीं होते, सैन्य अभियान जारी रहेगा।