Tag: West Asia

  • LPG संकट में भारत के लिए इस पुराने दोस्त ने खोले भंडार, 20000 KM दूर से बढ़ाए मदद के हाथ

    LPG संकट में भारत के लिए इस पुराने दोस्त ने खोले भंडार, 20000 KM दूर से बढ़ाए मदद के हाथ


    नई दिल्ली।
     पश्चिम एशिया में चल रहे युद्ध और भू-राजनीतिक तनाव के कारण उपजे गंभीर एलपीजी संकट के बीच, लगभग 20,000 किलोमीटर दूर स्थित एक दक्षिण अमेरिकी देश भारत के लिए एक बड़े मददगार के रूप में सामने आया है। दरअसल पश्चिम एशिया के मौजूदा संघर्ष के कारण समुद्री यातायात बुरी तरह प्रभावित हुआ है। विशेष रूप से होर्मुज जलडमरूमध्य के बंद होने से भारत की ऊर्जा सप्लाई चेन पर गहरा असर पड़ा है, क्योंकि भारत का लगभग 60 प्रतिशत एलपीजी आयात इसी मार्ग से होता है। इस बाधा ने नई दिल्ली को अपने ऊर्जा स्रोतों में तेजी से विविधता लाने के लिए मजबूर कर दिया है।

    अर्जेंटीना का अप्रत्याशित और अहम सहयोग

    इस संकट की घड़ी में अर्जेंटीना एक महत्वपूर्ण रणनीतिक भागीदार बनकर उभरा है। दोनों देशों के बीच ऊर्जा संबंधों में कितनी तेजी से विकास हुआ है, इसे इन आंकड़ों से समझा जा सकता है। साल 2026 की पहली तिमाही में ही अर्जेंटीना ने भारत को 50,000 टन एलपीजी का निर्यात किया है। यह मात्रा पूरे 2025 में भेजे गए 22,000 टन से दोगुने से भी अधिक है। संघर्ष के गहराने से पहले ही अर्जेंटीना के ‘बाहिया ब्लांका’ बंदरगाह से करीब 39,000 टन एलपीजी भारतीय तटों पर पहुँच चुकी थी। संकट के बीच 5 मार्च को 11,000 टन का एक और शिपमेंट भारत के लिए रवाना किया गया है। गौरतलब है कि साल 2024 से पहले अर्जेंटीना ने भारत को कभी एलपीजी की आपूर्ति नहीं की थी।

    राजनयिक दृष्टिकोण और भविष्य की संभावनाएं
    एक मुताबिक, भारत में अर्जेंटीना के राजदूत मारियानो अगस्टिन कौसिनो ने इस सहयोग कहा कि उनका देश भारत की ऊर्जा सुरक्षा में बड़ी भूमिका निभाने के लिए पूरी तरह तैयार है। उन्होंने बताया कि अर्जेंटीना के पास गैस का विशाल भंडार है। हमारी राष्ट्रीय गैस और तेल कंपनी के अध्यक्ष ने पिछले साल भारत का दो बार दौरा किया था; भारतीय ऊर्जा कंपनियों और केंद्रीय मंत्री हरदीप पुरी के साथ उनकी कई बैठकें हुईं। यह सहयोग अभी शुरुआती चरण में है, लेकिन मौजूदा हालात इसे और तेज कर सकते हैं।

    भारत की रणनीति की सराहना
    राजदूत ने भारत सरकार की ‘ऊर्जा विविधता रणनीति’ को बेहद बुद्धिमानी भरा बताया। उन्होंने संसद में दिए गए हालिया बयानों का जिक्र करते हुए कहा कि भारत अब 40 से अधिक देशों से ऊर्जा आपूर्ति नेटवर्क बना रहा है, जिसमें अर्जेंटीना एक अहम कड़ी है।

    साझेदारी की चुनौतियां
    भले ही यह सहयोग भारत के लिए राहत की बात है, लेकिन इसमें कुछ बड़ी लॉजिस्टिक चुनौतियां भी शामिल हैं। अर्जेंटीना के बाहिया ब्लांका से गुजरात के दाहेज बंदरगाह की दूरी लगभग 20,000 किलोमीटर है। यह ऊर्जा शिपमेंट के लिए दुनिया के सबसे लंबे मार्गों में से एक है। इतनी लंबी दूरी के कारण परिवहन लागत में भारी इजाफा होता है, डिलीवरी में लंबा समय लगता है और खराब मौसम से जुड़े जोखिम भी बढ़ जाते हैं।

    भारत के घरेलू कदम
    आयात के नए विकल्प तलाशने के साथ-साथ भारत सरकार ने घरेलू स्तर पर भी स्थिति को संभालने के लिए कड़े कदम उठाए हैं। कमर्शियल एलपीजी आवंटन में वृद्धि की है। हॉस्पिटैलिटी और खाद्य सेवा क्षेत्रों को राहत देने के लिए सरकार ने कमर्शियल एलपीजी के कोटे में 20 प्रतिशत की बढ़ोतरी की है। इसके अलावा, घरों में निरंतर ऊर्जा आपूर्ति सुनिश्चित करने के लिए ‘पाइप्ड नेचुरल गैस’ (PNG) के कनेक्शन देने की प्रक्रिया में तेजी लाई जा रही है, जो एक अधिक स्थिर विकल्प है।

  • भारत से पश्चिम एशिया के लिए आज संचालित होंगी 50 उड़ानें

    भारत से पश्चिम एशिया के लिए आज संचालित होंगी 50 उड़ानें


    नई दिल्ली।
    भारत से पश्चिम एशिया के लिए कल, 18 मार्च को कुल 50 उड़ानें संचालित की जाएंगी। एयर इंडिया और एयर इंडिया एक्सप्रेस की ये उड़ानें वेस्ट एशिया के विभिन्न गंतव्यों को जोड़ेंगी।

    सूत्रों के अनुसार, इन उड़ानों में 14 शेड्यूल्ड फ्लाइट्स जेद्दा और 12 फ्लाइट्स मस्कट के लिए उड़ान भरेंगी। शेड्यूल्ड उड़ानों का संचालन दिल्ली, मुंबई, बेंगलुरु, हैदराबाद, मैंगलोर, कोझिकोड, कन्नूर, कोच्चि, लखनऊ और तिरुवनंतपुरम जैसे प्रमुख शहरों से किया जाएगा।

    इसके अलावा, 24 नॉन-शेड्यूल्ड फ्लाइट्स यूएई और सऊदी अरब के लिए संचालित की जाएंगी। इन उड़ानों का उद्देश्य विशेष रूप से उन यात्रियों और भारतीय नागरिकों को सेवा देना है, जो मौजूदा तनावपूर्ण परिस्थितियों के बावजूद अपने गंतव्य तक सुरक्षित पहुंचना चाहते हैं।

    एयरलाइनों ने यात्रियों से समय पर एयरपोर्ट पहुंचने और सभी सुरक्षा नियमों का पालन करने की अपील की है। अधिकारियों का कहना है कि इस तरह की अतिरिक्त उड़ानों से मिडिल ईस्ट में फंसे भारतीय नागरिकों की आवाजाही सुगम बनेगी।

    विशेष रूप से हाल के अंतरराष्ट्रीय तनाव और मध्य पूर्व में सुरक्षा परिस्थितियों को देखते हुए, यह कदम भारतीय नागरिकों और व्यापारिक यात्रियों की सुविधा और सुरक्षा को ध्यान में रखकर उठाया गया है।

  • ईरान ने खाड़ी देशों और तेल जहाजों को भी निशाना बनाया, आईडीएफ प्रवक्ता ने जताया गंभीर खतरा

    ईरान ने खाड़ी देशों और तेल जहाजों को भी निशाना बनाया, आईडीएफ प्रवक्ता ने जताया गंभीर खतरा


    नई दिल्ली । पश्चिम एशिया में ईरान और अमेरिका इजरायल के बीच जारी भीषण संघर्ष से पूरे इलाके में तनाव चरम पर है। इस बीच इजरायल डिफेंस फोर्स आईडीएफ के प्रवक्ता बीजी एफी डेफ्रिन ने आईएएनएस को हालात की गंभीरता के बारे में जानकारी दी। उन्होंने बताया कि हालिया संघर्ष का मुख्य मकसद ईरान की न्यूक्लियर और मिसाइल क्षमताओं को नियंत्रित करना है।

    आईडीएफ प्रवक्ता ने कहा हमने दो हफ्ते पहले इजरायल पर संभावित खतरे को हटाने के लिए कार्रवाई की। ईरान ने वर्षों से अपनी न्यूक्लियर क्षमता विकसित की है और जून में किए गए हमले के बाद वे इसे फिर से शुरू कर रहे थे। उनका प्रयास यह था कि न्यूक्लियर प्रोजेक्ट को जमीन के नीचे छिपाया जाए ताकि इजरायल और अमेरिका के बमों से बचा जा सके। यह हमारे लिए गंभीर खतरा है।

    एफी डेफ्रिन ने ईरान के मिसाइल प्रोजेक्ट का भी उल्लेख किया। उनके अनुसार ईरान हजारों बैलिस्टिक मिसाइलें और लॉन्चर बना रहा था जिनकी रेंज 2 000 से 3 000 किलोमीटर तक थी। इन मिसाइलों का उद्देश्य इजरायल पर हमला करना था। वे महीने में सैकड़ों हथियार तैयार करने की योजना बना रहे थे और यह स्तर हमारे लिए बर्दाश्त के बाहर था उन्होंने कहा।

    प्रवक्ता ने कहा कि अब ईरान ने खाड़ी देशों और कमर्शियल तेल जहाजों को भी निशाना बनाना शुरू कर दिया है। वे अपने पुराने मित्र देशों ओमान यूएई बहरीन और सऊदी अरब पर हमला कर रहे हैं जिन्होंने ईरान के साथ कभी बुरा नहीं किया। इनके हमले मिलिट्री टारगेट पर नहीं बल्कि सिविलियन टारगेट जैसे अंतरराष्ट्रीय एयरपोर्ट और बुर्ज खलीफा पर हो रहे हैं। यह केवल उनकी असली प्रवृत्ति दिखाता है।

    एफी डेफ्रिन ने जोर देकर कहा कि आईडीएफ इस स्थिति को गंभीरता से देख रहा है। पड़ोसी देशों के साथ हमारे अच्छे संबंध हैं और यह इतिहास का एक मौका है। हमारा लक्ष्य पूरे इलाके में स्थायी शांति बनाना है। ईरान केवल इजरायल के लिए खतरा नहीं है बल्कि यह एक क्षेत्रीय समस्या है जिसे सुलझाना जरूरी है।

    आईडीएफ प्रवक्ता की यह प्रतिक्रिया यह स्पष्ट करती है कि इजरायल ईरानी न्यूक्लियर और मिसाइल कार्यक्रमों साथ ही उनके बढ़ते आक्रामक रवैये को लेकर सतर्क है। साथ ही खाड़ी देशों और वैश्विक तेल परिवहन पर ईरानी हमलों को गंभीर खतरे के रूप में देखा जा रहा है।

    इस बयान से यह भी संकेत मिलता है कि पश्चिम एशिया में तनाव और सुरक्षा खतरे केवल द्विपक्षीय नहीं हैं बल्कि पूरे क्षेत्र की स्थिरता के लिए चुनौतीपूर्ण हैं। आईडीएफ के अनुसार इलाके में शांति बनाए रखना और पड़ोसी देशों की सुरक्षा सुनिश्चित करना अब उनकी प्राथमिकता बन गई है।

  • पश्चिम एशिया युद्ध की स्थिति में भी अफवाह फैला रही कांग्रेस : मोदी

    पश्चिम एशिया युद्ध की स्थिति में भी अफवाह फैला रही कांग्रेस : मोदी


    गुवाहाटी। प्र
    धानमंत्री नरेन्द्र मोदी ने शुक्रवार को कांग्रेस पर तीखा हमला बोला। उन्होंने कहा कि वैश्विक संकट और युद्ध की परिस्थितियों के बीच भी कांग्रेस देश में अफवाह फैलाने और गलत जानकारी देने में लगी हुई है, जबकि भाजपा-एनडीए सरकार किसानों के हित, ऊर्जा आत्मनिर्भरता और पूर्वोत्तर के विकास के लिए लगातार काम कर रही है।

    प्रधानमंत्री ने यहां एक सार्वजनिक कार्यक्रम के दौरान असम के लिए 19,500 करोड़ रुपये से अधिक की विभिन्न विकास परियोजनाओं का शिलान्यास और लोकार्पण किया। प्रधानमंत्री ने कहा कि कांग्रेस ने एक बार फिर साबित कर दिया है कि वह किसी भी स्थिति में देश के प्रति ईमानदार नहीं है। उन्होंने कांग्रेस नेताओं को सलाह देते हुए कहा कि वे 15 अगस्त को लाल किले से दिए गए भारत के पहले प्रधानमंत्री जवाहरलाल नेहरू के भाषण को सुनें। मोदी ने कहा कि पंडित नेहरू ने एक बार कहा था कि उत्तर कोरिया और दक्षिण कोरिया के बीच चल रहे युद्ध की वजह से भारत में महंगाई बढ़ रही है। आज कांग्रेस के लोग भी उसी तरह देश को गुमराह करने में लगे हैं, जबकि वैश्विक संकटों का असर दुनिया के कई देशों पर पड़ता है।

    प्रधानमंत्री ने कहा कि भाजपा-एनडीए सरकार ने ऊर्जा क्षेत्र में देश को आत्मनिर्भर बनाने के लिए व्यापक काम किया है। आज भारत न केवल अपनी ऊर्जा जरूरतों का ध्यान रख रहा है, बल्कि वैश्विक ऊर्जा संतुलन में भी महत्वपूर्ण भूमिका निभा रहा है। असम सहित पूरे पूर्वोत्तर में गैस पाइपलाइन और ऊर्जा बुनियादी ढांचे के विकास पर अभूतपूर्व निवेश किया जा रहा है।

    उन्होंने बताया कि किसानों के लिए भी बड़ा कदम उठाया गया है। उन्होंने कहा कि कुछ ही समय पहले पूरे देश के करोड़ों किसानों के खातों में प्रधानमंत्री किसान सम्मान निधि योजना के तहत 18 हजार करोड़ रुपये से अधिक की राशि सीधे भेजी गई है। यह योजना देश के छोटे और सीमांत किसानों के लिए सामाजिक सुरक्षा का मजबूत माध्यम बन चुकी है।

    उन्होंने कहा कि 2014 से पहले ऐसे लाखों किसान थे जिनके पास न तो मोबाइल फोन था और न ही बैंक खाता, लेकिन पिछले कुछ वर्षों में वित्तीय समावेशन के माध्यम से करोड़ों किसानों को बैंकिंग प्रणाली से जोड़ा गया है और अब तक उनके खातों में सवा चार लाख करोड़ रुपये से अधिक की सहायता राशि भेजी जा चुकी है।

    प्रधानमंत्री ने आरोप लगाया कि जब प्रधानमंत्री किसान सम्मान निधि योजना शुरू की गई थी, तब कांग्रेस के लोगों ने इसके बारे में झूठ फैलाया था। कांग्रेस के नेता किसानों से कहते थे कि चुनाव के बाद उन्हें यह पैसा वापस करना पड़ेगा, लेकिन आज यह योजना किसानों के लिए एक मजबूत सहारा बन चुकी है। मोदी ने कहा कि भाजपा-एनडीए सरकार के लिए किसान हित सर्वोच्च प्राथमिकता है।

    उन्होंने कहा कि वर्ष 2014 से पहले केंद्र में दस वर्षों तक कांग्रेस की सरकार रही और उस दौरान किसानों को न्यूनतम समर्थन मूल्य (एमएसपी) के रूप में लगभग 6.5 लाख करोड़ रुपये मिले थे। इसके विपरीत पिछले दस वर्षों में उनकी सरकार ने किसानों को एमएसपी के रूप में 20 लाख करोड़ रुपये से अधिक का भुगतान किया है। एमएसपी, सस्ता कृषि ऋण, फसल बीमा और किसान सम्मान निधि जैसी योजनाओं ने किसानों को आर्थिक सुरक्षा प्रदान की है। इसके साथ ही सरकार ने यह भी सुनिश्चित किया है कि वैश्विक संकटों का असर भारत की खेती पर कम से कम पड़े।

    प्रधानमंत्री ने कहा कि कोविड महामारी और उसके बाद हुए वैश्विक संघर्षों के कारण अंतरराष्ट्रीय बाजार में उर्वरकों की कीमतों में भारी वृद्धि हुई थी। कई देशों में इसकी कमी हो गई थी, लेकिन भारत सरकार ने किसानों को किसी प्रकार की परेशानी नहीं होने दी। जहां अंतरराष्ट्रीय बाजार में यूरिया की एक बोरी की कीमत लगभग 3000 रुपये तक पहुंच गई थी, वहीं भारत में किसानों को यह मात्र 300 रुपये में उपलब्ध कराई गई। इसके लिए केंद्र सरकार ने 12 लाख करोड़ रुपये से अधिक की सब्सिडी दी है।

    उन्होंने कहा कि पिछले दशक में देश को कृषि और ऊर्जा के क्षेत्र में आत्मनिर्भर बनाने के लिए कई महत्वपूर्ण कदम उठाए गए हैं। लंबे समय तक कांग्रेस सरकारों ने देश को कई क्षेत्रों में विदेशों पर निर्भर बनाए रखा, जिससे अंतरराष्ट्रीय संकटों का सीधा असर भारत के किसानों और आम लोगों पर पड़ता था।

    प्रधानमंत्री ने बताया कि खेती को आधुनिक तकनीक से जोड़ने के लिए सरकार ने “पर ड्रॉप मोर क्रॉप” नीति लागू की है, जिसके तहत ड्रिप और स्प्रिंकलर जैसी सिंचाई तकनीकों को बढ़ावा दिया जा रहा है। इसके साथ ही किसानों को सोलर पंप से जोड़ने के प्रयास किए जा रहे हैं ताकि डीजल पर उनकी निर्भरता कम हो सके। असम के विकास का उल्लेख करते हुए प्रधानमंत्री ने कहा कि राज्य आज पूरे पूर्वोत्तर के लिए एक मॉडल बनता जा रहा है। उन्होंने कहा कि असम की प्रगति का प्रभाव पूरे नॉर्थ ईस्ट क्षेत्र पर दिखाई दे रहा है और यह क्षेत्र देश के विकास में नई गति प्रदान कर रहा है।

    प्रधानमंत्री ने असम के चाय बागानों में काम करने वाले श्रमिक परिवारों का जिक्र किया और कहा कि राज्य सरकार ऐतिहासिक अन्याय को समाप्त करते हुए चाय बागान श्रमिकों को भूमि के पट्टे प्रदान कर रही है। इससे हजारों परिवारों को पहली बार भूमि का अधिकार मिल रहा है। असम आज शांति, विकास और आत्मनिर्भरता की दिशा में तेजी से आगे बढ़ रहा है और आने वाले वर्षों में यह राज्य पूरे पूर्वोत्तर के उज्ज्वल भविष्य का मार्गदर्शक बनेगा।

  • पश्चिम एशिया में बढ़ते तनाव पर PM मोदी ने ईरानी राष्ट्रपति से की बात, भारतीयों की सुरक्षा और ऊर्जा आपूर्ति पर जोर

    पश्चिम एशिया में बढ़ते तनाव पर PM मोदी ने ईरानी राष्ट्रपति से की बात, भारतीयों की सुरक्षा और ऊर्जा आपूर्ति पर जोर

    mod
    नई दिल्ली।
    पश्चिम एशिया में बढ़ते तनाव और बिगड़ते हालात के बीच प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी ने गुरुवार को ईरानी राष्ट्रपति मसूद पेजेशकियन से फोन पर बातचीत कर क्षेत्र की मौजूदा स्थिति की समीक्षा की। इस दौरान दोनों नेताओं के बीच क्षेत्रीय सुरक्षा, बढ़ते संघर्ष और उसके संभावित वैश्विक प्रभावों पर चर्चा हुई।

    प्रधानमंत्री मोदी ने सोशल मीडिया मंच ‘एक्स’ पर जानकारी साझा करते हुए कहा कि पश्चिम एशिया में बढ़ती हिंसा, नागरिकों की मौत और बुनियादी ढांचे को हुए नुकसान को लेकर भारत गहरी चिंता व्यक्त करता है। उन्होंने कहा कि मौजूदा परिस्थितियों में विदेशों में रह रहे भारतीय नागरिकों की सुरक्षा सरकार की सर्वोच्च प्राथमिकता है।

    पीएम मोदी ने बातचीत के दौरान यह भी रेखांकित किया कि सामान और ऊर्जा की निर्बाध आवाजाही भारत के लिए बेहद अहम है। उन्होंने कहा कि यदि ऊर्जा आपूर्ति या व्यापारिक मार्गों में किसी तरह की रुकावट आती है तो इसका असर न केवल भारत की अर्थव्यवस्था पर पड़ेगा, बल्कि पूरे क्षेत्र की स्थिरता भी प्रभावित हो सकती है।

    प्रधानमंत्री ने सभी पक्षों से संयम बरतने की अपील करते हुए कहा कि मौजूदा संकट का समाधान केवल संवाद और कूटनीति के माध्यम से ही संभव है। उन्होंने तनाव कम करने और रचनात्मक बातचीत को आगे बढ़ाने की आवश्यकता पर जोर दिया, ताकि हालात और ज्यादा खराब न हों।

    भारत और ईरान के बीच लंबे समय से गहरे सांस्कृतिक, ऐतिहासिक और आर्थिक संबंध रहे हैं। ऊर्जा सहयोग दोनों देशों के रिश्तों का महत्वपूर्ण आधार रहा है। इसके अलावा चाबहार पोर्ट परियोजना भारत के लिए मध्य एशिया और अफगानिस्तान तक व्यापार और संपर्क का एक अहम रणनीतिक मार्ग मानी जाती है।

    प्रधानमंत्री मोदी की यह बातचीत ऐसे समय में हुई है जब पश्चिम एशिया में बढ़ते भू-राजनीतिक तनाव ने वैश्विक ऊर्जा बाजार, व्यापार मार्गों और प्रवासी समुदायों की सुरक्षा को लेकर नई चिंताएं पैदा कर दी हैं। भारत इन परिस्थितियों में संतुलित कूटनीति के जरिए अपने राष्ट्रीय हितों और क्षेत्रीय शांति, दोनों को साधने की कोशिश कर रहा है।

    भारत लगातार क्षेत्र में शांति, स्थिरता और कूटनीतिक समाधान की वकालत करता रहा है। यह अहम भी है क्योंकि पश्चिम एशिया में अस्थिरता का असर भारत की ऊर्जा सुरक्षा और वहां रह रहे बड़े भारतीय समुदाय पर सीधे तौर पर पड़ सकता है।

  • ईरान के हमलों के बीच कतर से सीमित उड़ानें शुरू, भारत के लिए भी विशेष विमान रवाना

    ईरान के हमलों के बीच कतर से सीमित उड़ानें शुरू, भारत के लिए भी विशेष विमान रवाना


    नई दिल्ली । पश्चिम एशिया में ईरान की ओर से जारी हमलों के बीच नागरिक उड़ानों पर भारी असर पड़ा है। दूसरे देशों के नागरिक इस तनावपूर्ण माहौल में फंसे हुए हैं। इसी बीच कतार वायुमार्ग ने 12 मार्च से दोहा से सीमित उड़ानों का संचालन शुरू करने की घोषणा की है। एयरलाइन ने बताया कि 12 से 17 मार्च तक दोहा के लिए और दोहा से सीमित विमान चलाए जाएंगे।

    एयरलाइन के अपडेटेड शेड्यूल के अनुसार 12 मार्च को हमाद इंटरनेशनल एयरपोर्ट से कुल 29 विमान उड़ान भरेंगे जिनमें 15 प्रस्थान और 14 आगमन होंगे। दोहा से उड़ानें मुंबई नई दिल्ली कोच्चि इस्लामाबाद न्यूयॉर्क फ्रैंकफर्ट बीजिंग लंदन काहिरा और जोहान्सबर्ग के लिए होंगी। वहीं दोहा आने वाली उड़ानों में सोल जेद्दा नई दिल्ली हांगकांग मस्कट मेलबर्न डलास और बैंकॉक शामिल हैं।

    भारत के लिए उड़ानों का विशेष शेड्यूल भी तैयार किया गया है। 13 मार्च को दोहा से कोच्चि के लिए उड़ान होगी। 14 मार्च को मुंबई 15 मार्च को नई दिल्ली और 16 मार्च को कोच्चि और मुंबई के लिए उड़ानें संचालित होंगी। वहीं कोच्चि से दोहा 14 मार्च को मुंबई से 15 मार्च और नई दिल्ली से 16 मार्च को विमान रवाना होंगे। 17 मार्च को दोहा से कोच्चि और मुंबई के लिए उड़ानें जारी रहेंगी।

    कतर एयरवेज ने कहा कि कतर नागरिक उड्डयन मंत्रालय से अस्थायी प्राधिकरण मिलने के बाद लिमिटेड ऑपरेटिंग कॉरिडोर का इस्तेमाल कर विमान संचालित किए जा रहे हैं। एयरलाइन ने स्पष्ट किया कि ये उड़ानें नियमित कमर्शियल ऑपरेशन की वापसी नहीं हैं। इन अस्थायी उड़ानों का उद्देश्य प्रभावित यात्रियों को उनके परिवार और प्रियजनों से मिलाना है। कतर एयरस्पेस की पूर्ण सुरक्षा सुनिश्चित होने के बाद ही नियमित संचालन फिर से शुरू होगा।

    कतर के प्रधानमंत्री शेख मोहम्मद बिन अब्दुलरहमान अल थानी ने कैबिनेट मीटिंग में कहा कि अमेरिका और इजरायल के साथ ईरान के संघर्ष के दौरान देश की तैयारियों और क्षमता को मजबूत करना आवश्यक है। उन्होंने नागरिक सुरक्षा और एयरलाइन संचालन की स्थिरता पर जोर दिया।

    इस बीच बहरीन के गृह मंत्रालय ने जानकारी दी कि ईरानी रिवोल्यूशनरी गार्ड कॉर्प्स के साथ जासूसी के आरोप में चार बहरीन नागरिकों को गिरफ्तार किया गया है। इनमें उम्र 22 से 36 वर्ष के लोग शामिल हैं जबकि एक 25 वर्षीय व्यक्ति विदेश में फरार है। मंत्रालय के अनुसार आरोपियों ने हाई रिजॉल्यूशन कैमरा और एन्क्रिप्टेड सॉफ्टवेयर का इस्तेमाल कर महत्वपूर्ण स्थानों की तस्वीरें ली और उन्हें IRGC को भेजा। सुरक्षा और यात्री सुविधा को ध्यान में रखते हुए कतर एयरवेज का यह कदम संकटग्रस्त क्षेत्र में फंसे यात्रियों के लिए राहत का संकेत देता है खासकर भारत समेत अन्य देशों के नागरिकों के लिए।

  • West Asia में जारी संघर्ष के बीच EU ने 19 ईरानी अधिकारियों पर लगाए नए प्रतिबंध

    West Asia में जारी संघर्ष के बीच EU ने 19 ईरानी अधिकारियों पर लगाए नए प्रतिबंध


    तेहरान।
    पश्चिम एशिया (West Asia) में जारी संघर्ष के बीच यूरोपीय संघ (European Union) ने ईरान (Iran) पर दबाव बढ़ाते हुए 19 ईरानी अधिकारियों और संस्थाओं पर नए प्रतिबंधों को मंजूरी दी है। इन पर गंभीर मानवाधिकार उल्लंघन और घरेलू दमन में शामिल होने के आरोप हैं। यूरोपीय संघ की विदेश मामलों और सुरक्षा नीति की उच्च प्रतिनिधि काजा कल्लास ने बुधवार को इसकी जानकारी दी। उन्होंने कहा कि यूरोपीय संघ के सदस्य देशों के राजदूतों द्वारा लिया गया यह निर्णय तेहरान को जवाबदेह ठहराने के लिए ब्लॉक की प्रतिबद्धता को दर्शाता है।

    कल्लास ने सोशल मीडिया एक्स पर लिखा कि यूरोपीय संघ ईरान को जवाबदेह ठहराना जारी रखेगा। आज सदस्य देशों के राजदूतों ने मानवाधिकारों के गंभीर उल्लंघन के लिए जिम्मेदार 19 अधिकारियों और संस्थाओं को लक्षित करते हुए नए प्रतिबंधों को मंजूरी दी है। उन्होंने कहा कि ये प्रतिबंध उन व्यक्तियों और संगठनों पर केंद्रित हैं जिन पर ईरान में घरेलू दमन और मानवाधिकार हनन के आरोप हैं। हालांकि, इन प्रतिबंधों को लागू होने से पहले यूरोपीय संघ परिषद की औपचारिक मंजूरी अभी आवश्यक है।

    कल्लास की यह घोषणा ऐसे समय में आई है जब 28 फरवरी को अमेरिका और इजरायल के संयुक्त हमलों में ईरान के सर्वोच्च नेता अयातुल्ला अली खामेनेई की मौत के बाद क्षेत्र में तनाव और बढ़ गया है। इसके बाद ईरान ने जवाबी कार्रवाई करते हुए कई खाड़ी देशों और इजरायल में अमेरिकी और इजरायली ठिकानों को निशाना बनाया, जिससे समुद्री मार्ग प्रभावित हुए और वैश्विक ऊर्जा बाजारों पर असर पड़ा।


    ईरान का पलटवार

    इससे पहले मंगलवार को ईरान के विदेश मंत्रालय के प्रवक्ता इस्माइल बगाई ने यूरोपीय नेताओं की कड़ी आलोचना करते हुए उन पर ‘पाखंड और दोहरे मापदंड’ अपनाने का आरोप लगाया था। बगाई की यह टिप्पणी यूरोपीय आयोग की अध्यक्ष उर्सुला वॉन डेर लेयेन और काजा कल्लास के बयानों के जवाब में आई। उन्होंने एक्स पर पोस्ट करते हुए वॉन डेर लेयेन पर आरोप लगाया कि वह हमेशा ‘इतिहास के गलत पक्ष’ में खड़ी रही हैं।

    ईरानी प्रवक्ता ने कहा कि यूरोपीय नेताओं को पाखंड बंद करना चाहिए और आरोप लगाया कि वे अमेरिका और इजरायल की कार्रवाइयों को वैध ठहराने की कोशिश कर रहे हैं। उन्होंने मीनाब शहर में कथित अमेरिकी हमलों के कारण बच्चों की मौत का भी जिक्र किया और इस पर यूरोपीय संघ की प्रतिक्रिया पर सवाल उठाए।


    लेबनान को लेकर बयानबाजी तेज

    यूरोपीय संघ के राजदूतों की बैठक में उर्सुला वॉन डेर लेयेन ने कहा था कि ईरान के लोग स्वतंत्रता, गरिमा और अपने भविष्य का फैसला करने के अधिकार के हकदार हैं। उन्होंने चेतावनी दी थी कि मौजूदा युद्ध व्यापक क्षेत्रीय अस्थिरता का कारण बन सकता है। वहीं काजा कल्लास ने कहा कि लेबनान ईरान से जुड़े संघर्ष का नया मोर्चा बनने के खतरे में है। उन्होंने कहा कि ईरान समर्थित हिज्बुल्लाह द्वारा इजरायल पर हमले पूरे क्षेत्र को और अधिक अस्थिर कर सकते हैं।

    कल्लास ने यह भी कहा कि अंतरराष्ट्रीय कानून के तहत इजरायल को आत्मरक्षा का अधिकार है, लेकिन तनाव बढ़ने से लेबनान में संघर्ष और गहरा सकता है। इसके जवाब में इस्माइल बगाई ने कहा कि यह ‘दोहरे मापदंड का चरम उदाहरण’ है। उन्होंने आरोप लगाया कि जब इजरायल गाजा और लेबनान में सैन्य कार्रवाई कर रहा था, तब यूरोपीय संघ ने उदासीन रुख अपनाया और उसके कुछ सदस्य देशों ने इजरायल को हथियार भी उपलब्ध कराए।

  • पश्चिम एशिया में चल रहे युद्ध से LNG सप्लाई को बड़ा झटका… भारत में 40% घटी सप्लाई

    पश्चिम एशिया में चल रहे युद्ध से LNG सप्लाई को बड़ा झटका… भारत में 40% घटी सप्लाई


    नई दिल्ली।
    पश्चिम एशिया में चल रहे युद्ध (West Asia War) के कारण भारत में तरलीकृत प्राकृतिक गैस (Liquefied Natural Gas) यानी LNG की सप्लाई को बड़ा झटका लगा है। लगभग 40% LNG सप्लाई प्रभावित होने के बाद, सरकार उर्वरक (फर्टिलाइजर) जैसे प्राथमिकता वाले क्षेत्रों सहित विभिन्न उद्योगों के लिए एक गैस वितरण योजना (‘ऑप्टिमाइजेशन प्लान’) पर तेजी से काम कर रही है।


    फर्टिलाइजर क्षेत्र पर प्रभाव और सरकार की रणनीति

    टाइम्स ऑफ इंडिया ने मामले की जानकारी रखने वाले सूत्रों के हवाले से लिखा है कि पेट्रोलियम मंत्रालय जल्द ही नई वितरण व्यवस्था को अंतिम रूप दे सकता है। हो सकता है कि ये व्यवस्था आज ही यानी मंगलवार तक लागू भी हो जाए। इसमें उर्वरक क्षेत्र की सप्लाई में कुछ कमी किए जाने की संभावना से इनकार नहीं किया जा सकता। हालांकि, इस कटौती का असर खेती पर नहीं पड़ेगा।

    पर्याप्त गैस आपूर्ति: उर्वरक इकाइयों को उनकी क्षमता के इष्टतम स्तर पर काम करने के लिए पर्याप्त गैस दी जाएगी।

    रखरखाव का समय: गैस की कम उपलब्धता फिलहाल बड़ी चिंता का विषय नहीं है क्योंकि कुछ उर्वरक कंपनियां इस समय का इस्तेमाल अपने कारखानों के नियमित रखरखाव (मेंटेनेंस शटडाउन) के लिए कर रही हैं।

    सुस्ती का दौर: फर्टिलाइजर एसोसिएशन ऑफ इंडिया (FAI) के अनुसार, कृषि क्षेत्र में अभी मांग कम है। खरीफ फसलों की बुवाई जून में शुरू होगी। इस दौरान खपत मध्यम रहती है, जिससे उद्योग को अपना स्टॉक भरने और रखरखाव का समय मिल जाता है।


    बंपर स्टॉक से दूर हुई चिंता

    आंकड़ों के अनुसार, भारत के पास उर्वरकों का पर्याप्त भंडार है, जो संकट के समय एक बड़े ‘कुशन’ (सुरक्षा कवच) का काम करेगा। शुक्रवार तक कुल उर्वरक स्टॉक 36.5% बढ़कर 17.7 मिलियन टन (MT) हो गया है, जो पिछले साल इसी समय लगभग 13 MT था। FAI के मुताबिक, DAP और NPK का भंडार पिछले साल की तुलना में 70-80% अधिक है।

    फरवरी के अंत तक एजेंसियों ने 9.8 MT उर्वरक का आयात किया है। इसके अलावा, अगले तीन महीनों के लिए 1.7 MT का अतिरिक्त आयात तय किया जा चुका है। उर्वरक विभाग ने स्पष्ट किया है कि भारत ने फॉस्फेटिक उर्वरकों के आयात स्रोतों में विविधता लाई है। इससे यह सुनिश्चित होगा कि अंतरराष्ट्रीय लॉजिस्टिक समस्याओं के कारण किसानों को खाद की कमी का सामना न करना पड़े।


    गैर-प्राथमिकता वाले उद्योगों की चुनौतियां

    विशेषज्ञों की मानें तो उर्वरक सरकार की प्राथमिकता है, इसलिए इसमें भारी कटौती नहीं होगी। हालांकि, गैर-प्राथमिकता वाले क्षेत्रों को कम गैस सप्लाई से ही काम चलाना होगा। इन उद्योगों को अपनी ऊर्जा जरूरतों को पूरा करने के लिए तुरंत वैकल्पिक ईंधन की व्यवस्था करनी होगी।


    नए LNG स्रोतों की तलाश और बाधाएं

    भारत वर्तमान में अपनी कुल जरूरत का 60% LNG पश्चिम एशिया के अलावा अन्य स्रोतों से प्राप्त करता है। अब सरकार और कंपनियां बचे हुए हिस्से की भरपाई के लिए ऑस्ट्रेलिया और कनाडा जैसे देशों से अतिरिक्त आपूर्ति सुनिश्चित करने की कोशिश कर रही हैं।

    इसमें दो मुख्य चुनौतियां हैं:

    शिपिंग: गैस के परिवहन के लिए विशेष LNG टैंकरों की व्यवस्था करना।
    क्षमता: यह सुनिश्चित करना कि नए सप्लायर देशों के पास जहाजों पर लादने से पहले गैस को लिक्विफाई (तरलीकृत) करने की अतिरिक्त क्षमता हो।


    संकट का मुख्य कारण क्या है?

    भारत में यूरिया निर्माण के लिए इस्तेमाल होने वाली 60% LNG कतर से आयात की जाती है। हाल ही में ईरान द्वारा कतर की कतरएनर्जी फैसिलिटी पर किए गए हमले के बाद, कतर को अपना उत्पादन रोकने के लिए मजबूर होना पड़ा है। इसी कारण भारत की सप्लाई चेन में यह बड़ी रुकावट आई है।

  • पश्चिम एशिया संकट के बीच सरकार का भरोसा, भारत के पास पेट्रोलियम का पर्याप्त भंडार

    पश्चिम एशिया संकट के बीच सरकार का भरोसा, भारत के पास पेट्रोलियम का पर्याप्त भंडार


    नई दिल्ली। पश्चिम एशिया में बढ़ते तनाव और कच्चे तेल व पेट्रोलियम उत्पादों की आपूर्ति श्रृंखला में आई बाधाओं के बीच केंद्र सरकार ने स्पष्ट किया है कि देश में पेट्रोलियम का पर्याप्त भंडार मौजूद है और फिलहाल किसी तरह की कमी की आशंका नहीं है।

    पेट्रोलियम मंत्रालय के वरिष्ठ अधिकारियों के अनुसार, देश में इस समय कच्चे तेल का लगभग 25 दिनों का अतिरिक्त भंडार उपलब्ध है। इसके साथ ही पेट्रोलियम के शोधित उत्पादों का भी करीब 25 दिनों का अतिरिक्त स्टॉक मौजूद है। इस तरह कुल मिलाकर देश के पास सात सप्ताह से अधिक की आवश्यकता पूरी करने लायक भंडार है।

    अधिकारियों ने बताया कि कुल अतिरिक्त भंडार करीब 25 करोड़ बैरल, यानी लगभग 4,000 करोड़ लीटर है। उन्होंने यह भी स्पष्ट किया कि रूस, अमेरिका, पश्चिम अफ्रीका और मध्य एशिया जैसे क्षेत्रों से कच्चे तेल का आयात लगातार जारी है। इसलिए मीडिया में चल रही यह खबर कि देश के पास केवल 25 दिन का कच्चा तेल ही बचा है, तथ्यात्मक रूप से गलत है।

    गौरतलब है कि भारत वर्तमान में छह महाद्वीपों के लगभग 40 देशों से कच्चे तेल और पेट्रोलियम उत्पादों का आयात करता है। ऐसे में देश की निर्भरता पूरी तरह से होर्मुज जलडमरूमध्य पर नहीं है। देश की रिफायनिंग कंपनियों की कुल शोधन क्षमता 25.8 करोड़ टन प्रतिवर्ष है, जो घरेलू मांग से काफी अधिक है। भारत में पेट्रोलियम उत्पादों की वार्षिक मांग लगभग 21 से 23 करोड़ टन के बीच रहती है।

    इसके अलावा पेट्रोल में 20 प्रतिशत एथेनॉल मिश्रण अनिवार्य किए जाने से हर साल लगभग 4.4 करोड़ बैरल, यानी करीब 60 लाख टन कच्चे तेल के आयात में कमी आती है। अधिकारियों ने यह भी कहा कि यदि होर्मुज जलडमरूमध्य से आयात पूरी तरह बंद भी हो जाए, तब भी देश में पेट्रोलियम उत्पादों की उपलब्धता पर कोई बड़ा असर नहीं पड़ेगा।

    उल्लेखनीय है कि 28 फरवरी को अमेरिका और इजरायल की संयुक्त सैन्य कार्रवाई के तहत ईरान पर हुए हमले और उसके बाद ईरान की जवाबी कार्रवाई के कारण पश्चिम एशिया में तनाव काफी बढ़ गया है। इसके चलते कच्चे तेल की आपूर्ति प्रभावित हुई है और अंतरराष्ट्रीय बाजार में इसकी कीमतों में करीब 20 प्रतिशत तक बढ़ोतरी दर्ज की गई है।

  • Iran war: पश्चिम एशिया में फंसे लोगो की वापसी की तैयारी में जुटी सरकार.. आज 58 फ्लाइट्स भरेंगी उड़ान

    Iran war: पश्चिम एशिया में फंसे लोगो की वापसी की तैयारी में जुटी सरकार.. आज 58 फ्लाइट्स भरेंगी उड़ान

    नई दिल्ली। पश्चिम एशिया (West Asia) में चल रहे तनाव के कारण हवाई सेवाओं पर बड़ा असर पड़ा है। इस बीच केंद्र सरकार (Central Government) ने मंगलवार को जानकारी दी कि एयरलाइनों ने अपनी उड़ानों के शेड्यूल में सावधानीपूर्वक बदलाव किए हैं और 4 मार्च को कुल 58 उड़ानें संचालित करने की योजना बनाई है। नागरिक उड्डयन मंत्रालय (Ministry of Civil Aviation) ने बताया कि फंसे हुए यात्रियों की मदद के लिए विशेष इंतजाम किए जा रहे हैं। जरूरत पड़ने पर एयरलाइंस अतिरिक्त उड़ानें चला रही हैं और विदेशी विमानन प्राधिकरणों तथा भारतीय दूतावासों के साथ मिलकर काम कर रही हैं, ताकि यात्रियों की सुरक्षित और व्यवस्थित आवाजाही सुनिश्चित की जा सके।

    मंत्रालय के अनुसार, आज भारतीय एयरलाइनों की तरफ से 24 उड़ानें संचालित की जा रही हैं। इसके अलावा पिछले 24 घंटों में खाड़ी देशों से एमिरेट्स और एतिहाद एयरवेज ने 9 उड़ानें संचालित की हैं। सरकार ने कहा कि वह लगातार एयरलाइनों के संपर्क में है और हवाई किरायों पर नजर रख रही है, ताकि इस संकट के समय टिकट की कीमतों में अनावश्यक बढ़ोतरी न हो। मंत्रालय ने बताया कि भारतीय एयरलाइनों ने लंबी दूरी और अति लंबी दूरी की उड़ानों को वैकल्पिक मार्गों से धीरे-धीरे फिर से शुरू करना शुरू कर दिया है।


    क्या है चार मार्च की योजना?

    ये उड़ानें उन हवाई क्षेत्रों से बचकर चलाई जा रही हैं, जो फिलहाल बंद या प्रतिबंधित हैं। बता दें कि 4 मार्च को कुल 58 उड़ानों की योजना बनाई गई है। इनमें 30 उड़ानें इंडिगो की तरफ से और 23 उड़ानें एअर इंडिया तथा एयर इंडिया एक्सप्रेस द्वारा संचालित की जाएंगी। भारत और खाड़ी क्षेत्र के बीच विदेशी एयरलाइंस भी सीमित संख्या में उड़ानें चला रही हैं, जो संचालन और हवाई क्षेत्र की स्थिति पर निर्भर हैं। पश्चिम एशिया में अमेरिका, इस्राइल और ईरान के बीच बढ़ते तनाव के कारण कई देशों ने अपना हवाई क्षेत्र बंद कर दिया है। इसका सीधा असर अंतरराष्ट्रीय उड़ानों पर पड़ा है।


    डीजीसीए ने दी जानकारी

    मंत्रालय के अनुसार, अब तक भारतीय एयरलाइनों की 1,221 उड़ानें और विदेशी एयरलाइनों की 388 उड़ानें रद्द की जा चुकी हैं। केवल मंगलवार को ही भारतीय एयरलाइनों ने 104 अंतरराष्ट्रीय उड़ानें रद्द कीं। 28 फरवरी से अब तक तीन दिनों में कुल 1,117 अंतरराष्ट्रीय उड़ानें रद्द हुई हैं। सरकार ने सभी एयरलाइनों को निर्देश दिया है कि वे यात्रियों को स्पष्ट और समय पर जानकारी दें तथा रिफंड, री-शेड्यूलिंग और अन्य सहायता से जुड़े नियमों का पालन करें।


    एअर इंडिया ने क्या जानकारी दी?

    इस बीच एअर इंडिया ने सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म एक्स पर जानकारी दी कि पश्चिम एशिया की स्थिति को देखते हुए उसने संयुक्त अरब अमीरात, सऊदी अरब, इस्राइल और कतर के लिए अपनी अधिकांश उड़ानों को 4 मार्च 2026 की रात 11:59 बजे तक के लिए स्थगित कर दिया है। एयरलाइन ने कहा है कि वह क्षेत्र की स्थिति पर लगातार नजर बनाए हुए है और आगे की स्थिति के अनुसार निर्णय लेगी। इसके साथ ही सरकार ने भरोसा दिलाया है कि वह एयरलाइनों, एयरपोर्ट ऑपरेटरों, नियामक संस्थाओं और विदेश मंत्रालय के साथ मिलकर काम कर रही है, ताकि यात्रियों की सुरक्षा सुनिश्चित की जा सके और सेवाओं को धीरे-धीरे सामान्य किया जा सके।