Tag: West Bengal elections

  • बंगाल चुनाव में भाजपा का बड़ा दांव, महिलाओं को ₹3000 मासिक सहायता और 33 प्रतिशत आरक्षण का वादा

    बंगाल चुनाव में भाजपा का बड़ा दांव, महिलाओं को ₹3000 मासिक सहायता और 33 प्रतिशत आरक्षण का वादा

    नई दिल्ली। पश्चिम बंगाल विधानसभा चुनाव से पहले राजनीतिक माहौल और अधिक गर्म हो गया है, जहां भारतीय जनता पार्टी ने अपना चुनावी घोषणापत्र जारी कर दिया है। इस घोषणापत्र को ‘संकल्प पत्र’ नाम दिया गया है, जिसे केंद्रीय गृह मंत्री Amit Shah ने कोलकाता में जारी किया। पार्टी ने इसे राज्य के विकास और बदलाव का रोडमैप बताते हुए कई बड़े वादों की घोषणा की है।

    इस घोषणापत्र में सबसे अधिक फोकस महिलाओं, युवाओं और सरकारी कर्मचारियों पर किया गया है। महिलाओं के लिए आर्थिक सहायता योजना के तहत हर पात्र महिला को प्रतिमाह तीन हजार रुपये सीधे बैंक खाते में देने का प्रस्ताव रखा गया है। इसके साथ ही महिलाओं को सरकारी नौकरियों में तैंतीस प्रतिशत आरक्षण देने का भी वादा किया गया है, जिससे उनकी भागीदारी को बढ़ाने का लक्ष्य रखा गया है।

    युवाओं के लिए भी घोषणापत्र में बड़े वादे किए गए हैं। बेरोजगार युवाओं को प्रतिमाह तीन हजार रुपये का भत्ता देने की बात कही गई है, साथ ही आने वाले वर्षों में बड़े पैमाने पर रोजगार और स्वरोजगार के अवसर पैदा करने का दावा किया गया है। इसके जरिए राज्य में रोजगार संकट को कम करने की रणनीति प्रस्तुत की गई है।

    शिक्षा के क्षेत्र में भी कई महत्वपूर्ण घोषणाएं की गई हैं। लड़कियों के लिए केजी से पीजी तक मुफ्त शिक्षा की बात कही गई है, जिससे शिक्षा को अधिक सुलभ और समावेशी बनाया जा सके। पार्टी का कहना है कि इस कदम से शिक्षा व्यवस्था में व्यापक बदलाव देखने को मिलेगा और सामाजिक सशक्तिकरण को बढ़ावा मिलेगा।

    सरकारी कर्मचारियों के लिए भी बड़ा वादा किया गया है, जिसके तहत सरकार बनने के बाद पैंतालीस दिनों के भीतर सातवें वेतन आयोग की सिफारिशों को लागू करने और बकाया महंगाई भत्ते का भुगतान सुनिश्चित करने की बात कही गई है। इस घोषणा को कर्मचारियों को साधने की एक बड़ी रणनीति के रूप में देखा जा रहा है।

    इसके अलावा राज्य में समान नागरिक संहिता को लेकर भी बड़ा ऐलान किया गया है। पार्टी ने कहा है कि यदि उन्हें सत्ता मिलती है तो छह महीने के भीतर समान नागरिक संहिता लागू करने की दिशा में कदम उठाए जाएंगे। इस घोषणा ने राजनीतिक बहस को और तेज कर दिया है।

    घोषणापत्र में सीमा सुरक्षा और घुसपैठ के मुद्दे को भी प्रमुखता दी गई है। पार्टी ने दावा किया है कि राज्य की सीमाओं को अधिक मजबूत बनाया जाएगा और अवैध गतिविधियों पर सख्त कार्रवाई की जाएगी। साथ ही भ्रष्टाचार के मामलों की जांच और पारदर्शिता सुनिश्चित करने के लिए विशेष कदम उठाने का वादा किया गया है।

    राजनीतिक विश्लेषकों का मानना है कि यह घोषणापत्र चुनावी रणनीति का एक महत्वपूर्ण हिस्सा है, जिसमें विभिन्न वर्गों को सीधे आर्थिक और सामाजिक लाभ का आश्वासन देकर समर्थन हासिल करने की कोशिश की गई है। वहीं सत्तारूढ़ दल की ओर से इन वादों को लेकर तीखी प्रतिक्रिया आने की संभावना जताई जा रही है

  • पश्चिम बंगाल चुनाव में प्रधानमंत्री की ताबड़तोड़ रैलियों से सियासी माहौल हुआ गर्म और प्रचार अभियान ने पकड़ी रफ्तार

    पश्चिम बंगाल चुनाव में प्रधानमंत्री की ताबड़तोड़ रैलियों से सियासी माहौल हुआ गर्म और प्रचार अभियान ने पकड़ी रफ्तार


    नई दिल्ली। पश्चिम बंगाल में विधानसभा चुनाव को लेकर सियासी हलचल अपने चरम पर पहुंच गई है। इसी क्रम में प्रधानमंत्री Narendra Modi राज्य में चुनाव प्रचार को नई गति देने के लिए एक ही दिन में तीन महत्वपूर्ण जनसभाओं को संबोधित कर रहे हैं। इन रैलियों के जरिए भारतीय जनता पार्टी अपने अभियान को मजबूती देने और विभिन्न क्षेत्रों में अपनी पकड़ मजबूत करने की रणनीति पर काम कर रही है।

    प्रधानमंत्री की रैलियां पूर्वी बर्धमान, मुर्शिदाबाद और दक्षिण दिनाजपुर जैसे क्षेत्रों में आयोजित की जा रही हैं, जिन्हें राजनीतिक दृष्टि से बेहद अहम माना जाता है। इन इलाकों में अलग अलग सामाजिक और जनसंख्या समीकरण हैं, जिन पर सभी राजनीतिक दलों की नजर बनी हुई है। भाजपा इन क्षेत्रों में अपनी स्थिति मजबूत करने के प्रयास में जुटी है, ताकि सत्तारूढ़ Mamata Banerjee के नेतृत्व वाली सरकार को कड़ी चुनौती दी जा सके।

    चुनावी कार्यक्रम घोषित होने के बाद से प्रधानमंत्री का यह तीसरा दौरा है, जो इस बात का संकेत है कि पार्टी इस चुनाव को बेहद गंभीरता से ले रही है। इससे पहले भी वे राज्य के विभिन्न हिस्सों में जनसभाओं के माध्यम से अपनी पार्टी के पक्ष में माहौल बनाने की कोशिश कर चुके हैं। लगातार हो रहे ये दौरे चुनावी रणनीति का अहम हिस्सा माने जा रहे हैं।

    अपने पिछले संबोधनों में प्रधानमंत्री ने कानून व्यवस्था, भ्रष्टाचार और प्रशासनिक पारदर्शिता जैसे मुद्दों को प्रमुखता से उठाया था। उन्होंने जनता के सामने एक वैकल्पिक शासन दृष्टिकोण प्रस्तुत करते हुए विकास और सुरक्षा से जुड़े वादों पर जोर दिया। इन मुद्दों के जरिए मतदाताओं को प्रभावित करने का प्रयास किया जा रहा है।

    राज्य में इस बार चुनावी मुकाबला बेहद रोचक और कड़ा माना जा रहा है। एक ओर सत्ताधारी दल अपनी पकड़ बनाए रखने के लिए प्रयासरत है, तो दूसरी ओर विपक्ष पूरी ताकत के साथ सत्ता परिवर्तन की कोशिश में लगा हुआ है। दोनों पक्षों के बीच लगातार बढ़ती बयानबाजी और रैलियों ने चुनावी माहौल को और अधिक गर्म कर दिया है।

    निर्धारित कार्यक्रम के अनुसार राज्य में मतदान दो चरणों में कराया जाएगा और इसके बाद मतगणना होगी। इस बीच सभी राजनीतिक दल जनसभाओं, रैलियों और जनसंपर्क अभियानों के माध्यम से मतदाताओं तक पहुंचने में जुटे हुए हैं।

    राजनीतिक विश्लेषकों का मानना है कि इस बार चुनाव में राष्ट्रीय और क्षेत्रीय मुद्दों का मिश्रण देखने को मिल रहा है, जो परिणामों को प्रभावित कर सकता है। प्रधानमंत्री की सक्रियता और लगातार हो रही रैलियां इस चुनाव को और अधिक महत्वपूर्ण बना रही हैं।
  • बंगाल चुनाव से पहले बड़ा प्रशासनिक फेरबदल: मुख्य सचिव-DGP बदले, कोलकाता पुलिस कमिश्नर समेत 6 अफसरों का ट्रांसफर

    बंगाल चुनाव से पहले बड़ा प्रशासनिक फेरबदल: मुख्य सचिव-DGP बदले, कोलकाता पुलिस कमिश्नर समेत 6 अफसरों का ट्रांसफर



    नई दिल्ली। भारत निर्वाचन आयोग ने पश्चिम बंगाल में विधानसभा चुनाव की घोषणा के बाद बड़ा प्रशासनिक फेरबदल करते हुए मुख्य सचिव, डीजीपी और कोलकाता पुलिस कमिश्नर समेत 6 वरिष्ठ अधिकारियों का तबादला कर दिया है।

    आयोग ने Piyush Pandey की जगह Siddhnath Gupta को नया डीजीपी नियुक्त किया है। वहीं, मुख्य सचिव Nandini Chakraborty को हटाकर 1993 बैच के IAS Dushmant Nariala को नया मुख्य सचिव बनाया गया है।

    कोलकाता पुलिस कमिश्नर सुप्रतिम सरकार की जगह अजय कुमार नंद को जिम्मेदारी सौंपी गई है। साथ ही गृह सचिव जगदीश प्रसाद मीणा की जगह 1997 बैच की आईएएस संघमित्रा घोष को नया गृह सचिव बनाया गया है।

    इसके अलावा नटराजन रमेश बाबू को सुधार सेवा बहाल और अजय मुकुंद रानाडे को अतिरिक्त पुलिस बहाल व आईजीपी (कानून-व्यवस्था) नियुक्त किया गया है।

    चुनाव आयोग के आदेश के अनुसार तबादला किए गए सभी अधिकारियों को चुनाव प्रक्रिया पूरी होने तक किसी भी चुनाव संबंधी पद पर तैनात नहीं किया जाएगा।

    23 और 29 अप्रैल को वोटिंग
    आयोग ने रविवार को West Bengal समेत Tamil Nadu, Kerala, Assam और Puducherry में विधानसभा चुनाव की तारीखों का ऐलान किया था। पश्चिम बंगाल की 294 सीटों पर दो चरणों में 23 और 29 अप्रैल को मतदान होगा, जबकि 4 मई को नतीजे घोषित किए जाएंगे।

    14 साल से सत्ता में ममता सरकार
    राज्य में पिछले 14 वर्षों से Mamata Banerjee की सरकार है और इस बार भी मुख्य मुकाबला टीएमसी और Bharatiya Janata Party के बीच माना जा रहा है। यदि टीएमसी जीतती है तो ममता बनर्जी लगातार चौथी बार मुख्यमंत्री बन सकती हैं।

  • पश्चिम बंगाल चुनाव: ममता का चौका या कमल का कमाल? घुसपैठ और एसआईआर के मुद्दों के बीच दिलचस्प जंग

    पश्चिम बंगाल चुनाव: ममता का चौका या कमल का कमाल? घुसपैठ और एसआईआर के मुद्दों के बीच दिलचस्प जंग


    कोलकाता। West Bengal में विधानसभा चुनाव की घोषणा के साथ ही सियासी माहौल गर्म हो गया है। पिछली बार आठ चरणों में हुए मतदान के विपरीत इस बार केवल दो चरणों में चुनाव होने की संभावना ने मुकाबले को और दिलचस्प बना दिया है। ऐसे में सबसे बड़ा सवाल यही है कि क्या मुख्यमंत्री Mamata Banerjee की पार्टी All India Trinamool Congress लगातार चौथी बार जीत दर्ज कर इतिहास रचेगी या Bharatiya Janata Party पहली बार सत्ता का दरवाजा खोल पाएगी।

    मतदाता सूची के गहन पुनरीक्षण यानी एसआईआर को लेकर पहले से ही सियासी संग्राम छिड़ा हुआ है। भाजपा कानून-व्यवस्था, घुसपैठ और 15 साल की कथित एंटी-इन्कम्बेंसी को बड़ा मुद्दा बनाकर मैदान में उतरी है, जबकि ममता बनर्जी मुस्लिम मतदाताओं के समर्थन को मजबूत बनाए रखने की कोशिश में जुटी हैं। राज्य में मुस्लिम आबादी करीब 28 प्रतिशत मानी जाती है, जो चुनावी समीकरण में अहम भूमिका निभाती है।

    भाजपा की नजर सत्ता पर

    तीन देशों—Bhutan, Nepal और Bangladesh—से घिरे इस राज्य में भाजपा पिछले ढाई दशक से सत्ता में आने की कोशिश कर रही है। पिछले चुनाव में पार्टी ने Communist Party of India (Marxist) सहित वाम दलों और Indian National Congress को पीछे छोड़ते हुए मुख्य विपक्षी दल का दर्जा हासिल किया था, लेकिन सरकार बनाने का सपना अधूरा रह गया।
    इस बार भाजपा ने घुसपैठ, जनसांख्यिकीय बदलाव और भ्रष्टाचार को प्रमुख मुद्दा बनाया है। साथ ही पिछले चुनाव से सबक लेते हुए पार्टी ने दलबदल कर आए नेताओं की जगह पुराने कार्यकर्ताओं को टिकट देने की रणनीति अपनाई है।

    36 सीटों पर कांटे की टक्कर

    राजनीतिक विश्लेषकों के अनुसार पिछले चुनाव में करीब 36 सीटों पर जीत का अंतर 5,000 वोट से भी कम था। कई सीटों पर तो हार-जीत कुछ सौ वोटों से तय हुई थी। ऐसे में माना जा रहा है कि इन सीटों पर थोड़ा सा भी वोटों का झुकाव बदला तो सत्ता का गणित पूरी तरह बदल सकता है।

    उत्तर बंगाल और जंगलमहल पर फोकस

    भाजपा खासतौर पर उत्तर बंगाल और जंगलमहल क्षेत्रों में अपनी पकड़ मजबूत करने की रणनीति पर काम कर रही है। Cooch Behar, Alipurduar, Jalpaiguri और Darjeeling जैसे जिलों में पिछले चुनाव में उसे अच्छी सफलता मिली थी।
    वहीं ममता बनर्जी की सरकार महिलाओं, किसानों और गरीब वर्ग के लिए चलाई गई कल्याणकारी योजनाओं को चुनावी मैदान में अपनी सबसे बड़ी ताकत बता रही है।

    मुस्लिम वोट बैंक पर नजर

    मुस्लिम वोट बैंक बंगाल की राजनीति में निर्णायक माना जाता है। इसे साधे रखने के लिए ममता बनर्जी लगातार आक्रामक रुख अपनाए हुए हैं। एसआईआर के मुद्दे पर सुप्रीम कोर्ट से लेकर सड़क और संसद तक विरोध जताना इसी रणनीति का हिस्सा माना जा रहा है।
    दूसरी ओर, भाजपा आदिवासी, मतुआ और महिला मतदाताओं को एकजुट कर पिछली बार के लगभग सात प्रतिशत वोट अंतर को कम करने की कोशिश में है। राज्य में नेता प्रतिपक्ष Suvendu Adhikari भी घुसपैठ के मुद्दे पर लगातार आक्रामक रुख अपनाए हुए हैं।

    नए समीकरण भी बना सकते हैं असर

    इस बार मुस्लिम वोटों के नए समीकरण पर भी सबकी नजर है। मुर्शिदाबाद क्षेत्र में Humayun Kabir की पार्टी आम जनता उन्नयन पार्टी, Asaduddin Owaisi की All India Majlis-e-Ittehadul Muslimeen (एआईएमआईएम) और Abbas Siddiqui की Indian Secular Front (आईएसएफ) के बीच संभावित गठबंधन की चर्चाएं हैं। माना जा रहा है कि यह समीकरण तृणमूल के लिए कुछ इलाकों में चुनौती बन सकता है।

    राष्ट्रीय राजनीति पर भी नजर

    विश्लेषकों का मानना है कि यह चुनाव केवल राज्य की सत्ता तक सीमित नहीं है, बल्कि इसका असर राष्ट्रीय राजनीति पर भी पड़ सकता है। अब निगाहें इस बात पर टिकी हैं कि क्या तृणमूल अपना किला बचा पाएगी या भाजपा पहली बार बंगाल की सत्ता तक पहुंचने में कामयाब होगी।

  • पांच राज्यों के विधानसभा चुनाव की तारीखों का ऐलान आज, चुनाव आयोग की प्रेस कॉन्फ्रेंस थोड़ी देर में

    पांच राज्यों के विधानसभा चुनाव की तारीखों का ऐलान आज, चुनाव आयोग की प्रेस कॉन्फ्रेंस थोड़ी देर में


    नई दिल्ली। देश के पांच राज्यों पश्चिम बंगाल, असम, तमिलनाडु, केरल और पुडुचेरी में होने वाले विधानसभा चुनावों की तारीखों का ऐलान आज किया जाएगा। चुनाव कार्यक्रम की घोषणा के लिए भारत निर्वाचन आयोग थोड़ी देर में प्रेस कॉन्फ्रेंस करेगा। इसके साथ ही इन सभी राज्यों में आचार संहिता भी लागू हो जाएगी।

    चुनाव आयोग की प्रेस कॉन्फ्रेंस **विज्ञान भवन, नई दिल्ली में आयोजित की जाएगी। इस दौरान ज्ञानेश कुमार (मुख्य चुनाव आयुक्त), सुखबीर सिंह संधू और राजीव कुमार चुनाव कार्यक्रम की घोषणा करेंगे।

    संभावना जताई जा रही है कि पश्चिम बंगाल, असम और तमिलनाडु में चुनाव दो-दो चरणों में कराए जा सकते हैं, जबकि केरल और पुडुचेरी में एक चरण में मतदान हो सकता है। पांचों विधानसभाओं का कार्यकाल मई 2026 तक समाप्त हो रहा है, इसलिए उससे पहले चुनाव प्रक्रिया पूरी की जाएगी।

    पिछली बार कैसे हुए थे चुनाव
    साल 2021 के विधानसभा चुनावों में चुनाव आयोग ने 26 फरवरी को चुनाव कार्यक्रम घोषित किया था। उस समय पश्चिम बंगाल में 8 चरणों में मतदान कराया गया था, जबकि असम में 3 चरण और तमिलनाडु, केरल तथा पुडुचेरी में एक ही चरण में मतदान हुआ था।

    मतदाता सूची में बदलाव
    इस बार चुनाव से पहले स्पेशल इंटेंसिव रिवीजन (SIR) प्रक्रिया के तहत मतदाता सूची का पुनरीक्षण किया गया है। इसमें तमिलनाडु में सबसे अधिक मतदाताओं के नाम हटाए गए हैं।

    चुनाव आयोग के अनुसार, 27 अक्टूबर 2025 को SIR प्रक्रिया शुरू होने के समय राज्य में 6,41,14,587 मतदाता पंजीकृत थे। लगभग चार महीने चली इस प्रक्रिया के बाद 74,07,207 मतदाताओं के नाम सूची से हटाए गए, जिसके बाद राज्य में अब 5,67,07,380 मतदाता रह गए हैं।

    इसके अलावा पश्चिम बंगाल में लगभग 58 लाख, केरल में करीब 8 लाख, असम में करीब 2 लाख और पुडुचेरी में लगभग 77 हजार मतदाताओं के नाम सूची से हटाए गए हैं।

    चुनाव से पहले सियासी हलचल
    चुनाव तारीखों की घोषणा से कुछ घंटे पहले ममता बनर्जी ने पश्चिम बंगाल में दो अहम घोषणाएं कीं। उन्होंने पुरोहितों और मुअज्जिनों के मासिक मानदेय में 500 रुपये की बढ़ोतरी का ऐलान किया। इसके साथ ही राज्य सरकार के कर्मचारियों का महंगाई भत्ता (DA) बकाया चुकाने की भी घोषणा की।

    राज्यों में राजनीतिक चुनौती
    पांचों राज्यों में चुनाव को लेकर राजनीतिक माहौल काफी सक्रिय है। खासतौर पर पश्चिम बंगाल में ममता बनर्जी के नेतृत्व वाली सरकार के सामने भारतीय जनता पार्टी मुख्य चुनौती मानी जा रही है। अगर इस बार भी उनकी पार्टी जीतती है, तो ममता बनर्जी लगातार चौथी बार मुख्यमंत्री बनने वाली पहली महिला नेता बन सकती हैं।

    भाषा, केंद्र की योजनाएं, विचारधारा और केंद्रीय एजेंसियों की कार्रवाई जैसे मुद्दे इन चुनावों में अहम भूमिका निभा सकते हैं।

  • बंगाल चुनाव से पहले अभिषेक बनर्जी का बड़ा बयान कहा 'कांग्रेस की हमें नहीं जरूरत इंडिया गठबंधन पर भी दिया बयान'

    बंगाल चुनाव से पहले अभिषेक बनर्जी का बड़ा बयान कहा 'कांग्रेस की हमें नहीं जरूरत इंडिया गठबंधन पर भी दिया बयान'


    नई दिल्ली । पश्चिम बंगाल में अगले साल होने वाले विधानसभा चुनाव से पहले तृणमूल कांग्रेस TMC के राष्ट्रीय महासचिव और ममता बनर्जी के भतीजे अभिषेक बनर्जी ने कांग्रेस और इंडिया गठबंधन को लेकर एक बड़ा बयान दिया है। उन्होंने कहा कि पश्चिम बंगाल में चुनाव जीतने के लिए उनकी पार्टी को कांग्रेस की जरूरत नहीं है। हालांकि अभिषेक ने यह भी साफ किया कि तृणमूल कांग्रेस अब भी इंडिया गठबंधन का हिस्सा है।

    अभिषेक बनर्जी ने बुधवार को पत्रकारों से बातचीत के दौरान कांग्रेस के साथ गठबंधन पर कहा कांग्रेस के पास बंगाल में ऐसा कुछ नहीं है जिसकी हमें जरूरत हो या जो वह हमें दे सके। उन्होंने उदाहरण देते हुए कहा कि 2024 के लोकसभा चुनावों में कांग्रेस ने सिर्फ दो सीटों पर जीत हासिल की जबकि तृणमूल कांग्रेस ने उन्हें गठबंधन का प्रस्ताव दिया था जिसे कांग्रेस ने ठुकरा दिया। अभिषेक ने कहा इसका परिणाम सबके सामने है उनकी सीट अब घटकर एक रह गई है।

    अभिषेक ने यह भी स्पष्ट किया कि कांग्रेस के साथ गठबंधन पर कोई भी निर्णय ममता बनर्जी ही लेंगी। उन्होंने कहा जब पार्टी कोई फैसला लेगी तो आपको पता चल जाएगा। फिलहाल कांग्रेस से कोई गठबंधन नहीं है।
    इसके साथ ही अभिषेक बनर्जी ने केंद्र सरकार पर भी हमला किया और मनरेगा का नाम बदलने के मुद्दे पर कहा कि इसका नाम बदलने से कोई फायदा नहीं होगा। उन्होंने सरकार से पश्चिम बंगाल को बकाया राशि का भुगतान करने की मांग की। केंद्र सरकार को पश्चिम बंगाल का बकाया भुगतान करना चाहिए। मनरेगा का नाम बदलने से कोई फायदा नहीं होगा उन्होंने कहा।

    अभिषेक ने भाजपा पर आरोप लगाया कि वह बंगाल के खिलाफ काम कर रही है और गांधीजी के नाम को हटाना बंगाल विरोधी कदम है। उन्होंने कहा गांधीजी को ‘महात्मा’ की उपाधि रवींद्रनाथ टैगोर ने दी थी इसलिए बंगाल से गांधीजी का नाम हटाना गलत है।इस बयान ने भाजपा और कांग्रेस दोनों को निशाने पर लिया है और यह आगामी विधानसभा चुनाव के लिए तृणमूल कांग्रेस के राजनीतिक रणनीतियों का इशारा है। अब यह देखना होगा कि ममता बनर्जी के नेतृत्व में तृणमूल कांग्रेस क्या कदम उठाती है और कांग्रेस के साथ गठबंधन का कोई नया मोड़ आता है या नहीं।

  • ‘हैदराबाद का ओवैसी वो, बंगाल का मैं’ – हुमायूं कबीर के बयान से बंगाल की सियासत में बवंडर

    ‘हैदराबाद का ओवैसी वो, बंगाल का मैं’ – हुमायूं कबीर के बयान से बंगाल की सियासत में बवंडर


    नई दिल्ली। पश्चिम बंगाल की राजनीति में नया भूचाल आ गया है। तृणमूल कांग्रेस से निलंबित विधायक हुमायूं कबीर ने मुख्यमंत्री ममता बनर्जी को सीधी चुनौती देते हुए खुद को “बंगाल का ओवैसी” बताया है और एक नई राजनीतिक पार्टी बनाने का बड़ा ऐलान किया है।

    कबीर ने दावा किया कि उनकी नई
    पार्टी आने वाले विधानसभा चुनाव में गेमचेंजर साबित होगी और वे राज्य की 135 सीटों पर अपने उम्मीदवार उतारेंगे।

    बाबरी मस्जिद की प्रतिकृति के कार्यक्रम के बाद निलंबन

    मुर्शिदाबाद में बाबरी मस्जिद की प्रतिकृति निर्माण की आधारशिला रखने के बाद हुमायूं कबीर को तृणमूल कांग्रेस ने पार्टी विरोधी गतिविधियों के आरोप में निलंबित कर दिया था। निलंबन के कुछ दिनों बाद उन्होंने राजनीतिक मैदान में अलग राह चुनने का ऐलान कर दिया।

    नई पार्टी का गठन और ओवैसी से बातचीत का दावा

    एक प्रेस कॉन्फ्रेंस में कबीर ने कहा-

    “मैंने असदुद्दीन ओवैसी से बात की है। वो हैदराबाद के ओवैसी हैं और मैं बंगाल का ओवैसी हूँ।”

    उन्होंने बताया कि 12 दिसंबर को कोलकाता में लाखों समर्थकों की मौजूदगी में वे अपनी नई पार्टी का औपचारिक शुभारंभ करेंगे। कबीर ने दावा किया कि उनकी पार्टी राज्य के मुस्लिम समाज के अधिकारों और प्रतिनिधित्व के लिए काम करेगी।

    हालांकि उन्होंने कहा कि उनका लक्ष्य तृणमूल के वोट बैंक को नुकसान पहुंचाना नहीं है, लेकिन बाद के बयानों ने इस दावे को कमजोर कर दिया।

    ‘तृणमूल का मुस्लिम वोट बैंक खत्म’ – कबीर का दावा

    कबीर ने एक बयान में कहा-

    “मैं 135 सीटों पर चुनाव लड़ूंगा। मेरी पार्टी ही चुनाव का गेमचेंजर होगी। तृणमूल का मुस्लिम वोट बैंक खत्म हो जाएगा।”

    गौरतलब है कि बंगाल में लगभग 27% मुस्लिम आबादी है, जो अब तक तृणमूल कांग्रेस की बड़ी ताकत मानी जाती रही है। यही वजह है कि कबीर का दावा टीएमसी के लिए गंभीर चुनौती माना जा रहा है।

    AIMIM से गठबंधन के संकेत

    हुमायूं कबीर ने यह भी कहा कि वे AIMIM के संपर्क में हैं और संभव है कि ओवैसी की पार्टी के साथ मिलकर चुनाव लड़ें।
    हालांकि AIMIM या असदुद्दीन ओवैसी ने अब तक इस पर कोई आधिकारिक प्रतिक्रिया नहीं दी है।

    राजनीतिक हलचल तेज – टीएमसी की बढ़ी चिंता

    कबीर के ऐलान के बाद राज्य की राजनीति में तेजी से हलचल बढ़ गई है। विश्लेषक मानते हैं कि यदि कबीर AIMIM से हाथ मिलाते हैं, तो यह मुस्लिम वोटों के बड़े हिस्से पर असर डाल सकता है। इसका सीधा लाभ विपक्षी दलों – खासकर बीजेपी और लेफ्ट-कांग्रेस गठबंधन – को मिल सकता है।

    अब सबकी नजर इस बात पर है कि-

    कबीर की नई पार्टी को जमीनी स्तर पर कितना समर्थन मिलता है?

    क्या ओवैसी वास्तव में उनके साथ कदम मिलाकर चलेंगे?

    और क्या यह कदम तृणमूल के मजबूत वोट बैंक को वास्तव में नुकसान पहुंचा पाएगा?

    अभी इतना तय है कि हुमायूं कबीर के बयान और घोषणा ने बंगाल की सियासत में तेज हलचल मचा दी है।