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  • बंगाल में TMC पर बड़ा एक्शन: ताबड़तोड़ गिरफ्तारियों से मचा हड़कंप, कई नेता जांच के घेरे में

    बंगाल में TMC पर बड़ा एक्शन: ताबड़तोड़ गिरफ्तारियों से मचा हड़कंप, कई नेता जांच के घेरे में



    नई दिल्ली। पश्चिम बंगाल की राजनीति में इन दिनों बड़ा बवाल मचा हुआ है। राज्य में चल रही कार्रवाई के तहत तृणमूल कांग्रेस (Mamata Banerjee) की पार्टी All India Trinamool Congress के कई नेताओं पर भ्रष्टाचार, हिंसा और अवैध गतिविधियों के गंभीर आरोपों के चलते लगातार गिरफ्तारियां हो रही हैं। इस पूरे घटनाक्रम ने राज्य के राजनीतिक माहौल को पूरी तरह गरमा दिया है।

    हाई-प्रोफाइल नेताओं पर कार्रवाई
    इस कार्रवाई के तहत पूर्व राज्य मंत्री और TMC नेता Sujit Bose को नगरपालिका भर्ती घोटाले से जुड़े मनी लॉन्ड्रिंग मामले में गिरफ्तार किया गया है। वहीं, संदेशखाली विवाद से जुड़े नेता Sheikh Shahjahan भी गंभीर आरोपों के चलते जांच के दायरे में हैं।

    पंचायत और स्थानीय स्तर पर भी शिकंजा
    सिर्फ बड़े नेताओं तक ही नहीं, बल्कि पंचायत और जिला स्तर पर भी कार्रवाई तेज है। कई पंचायत प्रतिनिधियों और स्थानीय पदाधिकारियों पर वित्तीय अनियमितताओं, रंगदारी और अवैध हथियार रखने जैसे आरोप लगाए गए हैं। कई मामलों में गिरफ्तारियां भी हुई हैं, जिससे प्रशासनिक स्तर पर हलचल बढ़ गई है।

    हिंसा और रंगदारी के आरोप
    कुछ नेताओं पर राजनीतिक विरोधियों पर हमले, धमकी और जबरन वसूली जैसे गंभीर आरोप भी सामने आए हैं। इन मामलों की जांच राज्य पुलिस और केंद्रीय एजेंसियों द्वारा की जा रही है।

    फरार और जांच के घेरे में नेता
    इस कार्रवाई के बीच कुछ नेता या तो फरार बताए जा रहे हैं या फिर पूछताछ के लिए तलाश में हैं। पुलिस लगातार छापेमारी कर रही है और कई जगहों पर निगरानी बढ़ा दी गई है।

    जनता का विरोध और तनाव
    राज्य के कई इलाकों में गिरफ्तारी के बाद प्रदर्शन भी देखने को मिल रहे हैं। कुछ जगहों पर स्थानीय लोगों द्वारा विरोध दर्ज कराया जा रहा है, जिससे जमीनी हालात तनावपूर्ण बने हुए हैं।

    फिलहाल यह पूरा मामला पश्चिम बंगाल की राजनीति में बड़े बदलाव और सत्ता-संघर्ष की ओर इशारा कर रहा है, और आने वाले दिनों में इस पर और राजनीतिक प्रतिक्रिया देखने को मिल सकती है।

  • बंगाल कैबिनेट पर जाति विवाद के बीच शहजाद पूनावाला का तीखा बयान, बताया भारतीय और बंगाली पहचान सबसे ऊपर

    बंगाल कैबिनेट पर जाति विवाद के बीच शहजाद पूनावाला का तीखा बयान, बताया भारतीय और बंगाली पहचान सबसे ऊपर

    नई दिल्ली ।
    पश्चिम बंगाल की राजनीति में हाल ही में बने मंत्रिमंडल को लेकर एक नई तरह की बहस ने जोर पकड़ लिया है, जहां सोशल मीडिया पर मंत्रियों की जातीय पहचान और सामाजिक पृष्ठभूमि को लेकर चर्चाएं लगातार बढ़ती जा रही हैं। इस पूरे मामले ने राजनीतिक माहौल को और अधिक संवेदनशील बना दिया है, क्योंकि अलग-अलग स्तर पर लोग अपने-अपने नजरिए से मंत्रिमंडल के स्वरूप और प्रतिनिधित्व पर टिप्पणी कर रहे हैं। इसी बीच भारतीय जनता पार्टी के राष्ट्रीय प्रवक्ता Shehzad Poonawalla का बयान इस चर्चा का प्रमुख केंद्र बन गया है, जिसमें उन्होंने स्पष्ट रूप से कहा है कि मंत्रिमंडल में शामिल सभी सदस्य भारतीय नागरिक हैं और उनकी पहचान बंगाली समाज और संस्कृति से गहराई से जुड़ी हुई है।

    पूनावाला के इस बयान को उन चर्चाओं के जवाब के रूप में देखा जा रहा है, जो सोशल मीडिया पर तेजी से फैल रही थीं और जिनमें मंत्रियों की जातीय पहचान को लेकर तरह-तरह के दावे किए जा रहे थे। उन्होंने अपने संदेश में यह स्पष्ट करने की कोशिश की कि लोकतांत्रिक व्यवस्था में किसी भी जनप्रतिनिधि की भूमिका उसके कार्य और जिम्मेदारी से तय होती है, न कि उसकी जातीय या सामाजिक पृष्ठभूमि से। उनके अनुसार इस तरह की बहसें समाज में अनावश्यक विभाजन पैदा कर सकती हैं और राजनीतिक विमर्श को विकास के मूल मुद्दों से भटका सकती हैं।

    इस बीच पश्चिम बंगाल की राजनीतिक परिस्थितियों में भी लगातार बदलाव और हलचल देखने को मिल रही है, जहां सत्ता संरचना और नेतृत्व को लेकर अलग-अलग राजनीतिक विश्लेषण सामने आ रहे हैं। Shubhendu Adhikari का नाम भी इन चर्चाओं में प्रमुखता से लिया जा रहा है, क्योंकि राज्य की राजनीति में हालिया घटनाक्रम के बाद नई राजनीतिक दिशा और रणनीतियों पर लगातार चर्चा हो रही है। इस पूरे परिदृश्य ने राज्य की राजनीति को एक बार फिर राष्ट्रीय स्तर पर चर्चा का विषय बना दिया है।

    राजनीतिक विशेषज्ञों का मानना है कि बंगाल की राजनीति हमेशा से ही सामाजिक विविधता और जटिल राजनीतिक समीकरणों के लिए जानी जाती है, जहां विभिन्न समुदायों और विचारधाराओं की सक्रिय भागीदारी देखने को मिलती है। ऐसे में जातीय पहचान को लेकर होने वाली बहसें समय-समय पर उभरती रहती हैं, लेकिन इन्हें राजनीतिक संतुलन और जिम्मेदारी के साथ संभालना बेहद जरूरी होता है। यदि इन चर्चाओं को सही दिशा नहीं दी गई, तो यह सामाजिक तनाव और राजनीतिक ध्रुवीकरण को बढ़ा सकती हैं।

    डिजिटल युग में राजनीतिक जानकारी और विचार तेजी से फैलते हैं, जिससे कई बार अधूरी या अपुष्ट बातें भी व्यापक बहस का रूप ले लेती हैं। यही कारण है कि इस तरह के मामलों में नेताओं की भूमिका और भी महत्वपूर्ण हो जाती है, क्योंकि उनके बयान सीधे तौर पर जनता की सोच और राजनीतिक माहौल को प्रभावित करते हैं। पूनावाला का बयान इसी संदर्भ में एक राजनीतिक संदेश के रूप में देखा जा रहा है, जिसमें उन्होंने जाति आधारित बहसों से हटकर शासन और विकास पर ध्यान केंद्रित करने की बात कही है।

    फिलहाल यह मुद्दा राज्य की राजनीति में चर्चा का विषय बना हुआ है और आने वाले समय में इसके राजनीतिक और सामाजिक प्रभाव और अधिक स्पष्ट रूप से सामने आ सकते हैं। बंगाल की राजनीति में यह बहस एक बार फिर यह संकेत देती है कि पहचान, प्रतिनिधित्व और विचारधारा जैसे मुद्दे अभी भी राजनीतिक विमर्श के केंद्र में बने हुए हैं।

  • सुवेंदु अधिकारी के PA की हत्या से बंगाल में सनसनी: 10 राउंड फायरिंग, पेशेवर हथियार से हमला, राजनीतिक तनाव बढ़ा

    सुवेंदु अधिकारी के PA की हत्या से बंगाल में सनसनी: 10 राउंड फायरिंग, पेशेवर हथियार से हमला, राजनीतिक तनाव बढ़ा



    नई दिल्ली। पश्चिम बंगाल के नॉर्थ 24 परगना जिले के मध्यमग्राम में बुधवार रात करीब 10:30 बजे भाजपा नेता सुवेंदु अधिकारी के पर्सनल असिस्टेंट (PA) चंद्रनाथ रथ (42) की गोली मारकर हत्या कर दी गई। इस घटना ने पूरे राज्य में सनसनी फैला दी है और राजनीतिक माहौल को और गर्म कर दिया है।

    कार रोककर किया गया हमला, 10 राउंड फायरिंग
    जानकारी के मुताबिक, चंद्रनाथ रथ कोलकाता से अपने घर लौट रहे थे। स्कॉर्पियो में वह ड्राइवर और एक अन्य व्यक्ति के साथ बैठे थे। जैसे ही वाहन डोलतला से मध्यमग्राम के बीच पहुंचा, पीछे से आई एक कार ने उनकी गाड़ी को रोक दिया।इसके बाद बिना नंबर प्लेट की बाइक पर आए हमलावर ने स्कॉर्पियो पर ताबड़तोड़ फायरिंग शुरू कर दी। बताया जा रहा है कि 6 से 10 राउंड गोलियां चलाई गईं, जिनमें से 4 गोलियां चंद्रनाथ रथ को लगीं।2 गोलियां सीने को पार कर गईं। 1 गोली पेट में लगी,
    ड्राइवर को भी गोली लगी। घटना के बाद हमलावर बाइक और फर्जी नंबर प्लेट वाली कार छोड़कर फरार हो गए।

    अस्पताल में मौत, ड्राइवर गंभीर
    घायलों को तुरंत नजदीकी अस्पताल ले जाया गया, जहां डॉक्टरों ने चंद्रनाथ रथ को मृत घोषित कर दिया। वहीं ड्राइवर बुद्धदेब बेरा की हालत गंभीर बताई जा रही है।

    ग्लॉक पिस्टल से हमला, प्रोफेशनल शूटर की आशंका
    फोरेंसिक रिपोर्ट के शुरुआती इनपुट के अनुसार, हमले में आधुनिक ग्लॉक 47X पिस्टल का इस्तेमाल किया गया है। इस तरह का हथियार आम अपराधियों के पास नहीं होता, जिससे यह शक और गहरा हो गया है कि हमला किसी प्रोफेशनल शूटर ने अंजाम दिया है।हमलावर ने हेलमेट पहन रखा था और बाइक पर नंबर प्लेट भी नहीं थी, जिससे उसकी पहचान मुश्किल हो रही है।

    राजनीतिक आरोप-प्रत्यारोप तेज
    घटना के बाद बीजेपी ने तृणमूल कांग्रेस (TMC) पर गंभीर आरोप लगाए हैं। सुवेंदु अधिकारी ने इसे प्लान्ड मर्डर बताया और कहा कि पिछले 2–3 दिनों से रेकी की जा रही थी।वहीं TMC ने इन आरोपों को खारिज करते हुए मामले की CBI जांच की मांग की है।

    एक घंटे बाद दूसरी फायरिंग, हालात और तनावपूर्ण
    इस घटना के करीब एक घंटे बाद बशीरहाट में एक और भाजपा कार्यकर्ता रोहित रॉय पर भी फायरिंग की गई, जिसकी हालत गंभीर बताई जा रही है।

    बढ़ता राजनीतिक तनाव
    4 मई के चुनावी नतीजों के बाद राज्य में अब तक 5 हत्याएं हो चुकी हैं, जिनमें भाजपा और TMC दोनों से जुड़े लोग शामिल बताए जा रहे हैं। इससे राज्य की कानून-व्यवस्था पर गंभीर सवाल खड़े हो गए हैं।

    मां की भावुक अपील
    मृतक चंद्रनाथ रथ की मां ने कहा कि दोषियों को सजा मिलनी चाहिए, लेकिन वह चाहती हैं कि कानून के तहत उम्रकैद की सजा दी जाए, न कि फांसी।उन्होंने सरकार से न्याय सुनिश्चित करने की अपील की है।

  • अमित शाह के रोड शो के बाद दुर्गापुर में भड़की राजनीतिक हिंसा, बीजेपी और टीएमसी कार्यकर्ताओं की झड़प में दो घायल, पूरे इलाके में तनाव

    अमित शाह के रोड शो के बाद दुर्गापुर में भड़की राजनीतिक हिंसा, बीजेपी और टीएमसी कार्यकर्ताओं की झड़प में दो घायल, पूरे इलाके में तनाव


    नई दिल्ली :पश्चिम बंगाल  अमित शाह के रोड शो के बाद दुर्गापुर में बीजेपी और टीएमसी कार्यकर्ताओं के बीच भड़की हिंसक झड़प, राजनीतिक तनाव के बीच दो लोग घायल, इलाके में भारी पुलिस बल तैनात

    पश्चिम बंगाल के दुर्गापुर में केंद्रीय गृह मंत्री अमित शाह के रोड शो के बाद राजनीतिक माहौल अचानक तनावपूर्ण हो गया, जब भारतीय जनता पार्टी और तृणमूल कांग्रेस के कार्यकर्ताओं के बीच तीखी झड़प हो गई। यह घटना बांकुरा मोड़ इलाके में हुई, जहां दोनों दलों के समर्थकों के बीच पहले कहासुनी हुई और देखते ही देखते मामला हिंसा में बदल गया। इस झड़प में दोनों पक्षों के एक एक कार्यकर्ता घायल हो गए, जिन्हें तुरंत नजदीकी अस्पताल में भर्ती कराया गया।

    प्रत्यक्षदर्शियों के अनुसार, शुरुआत में दोनों पक्षों के बीच हल्की नोकझोंक हुई थी, लेकिन कुछ ही समय में स्थिति बेकाबू हो गई और हाथापाई शुरू हो गई। घटना के बाद इलाके में अफरा तफरी का माहौल बन गया और स्थानीय लोगों ने स्थिति को शांत करने की कोशिश की। हालांकि तब तक दोनों पक्षों को चोटें लग चुकी थीं।

    घटना की जानकारी मिलते ही पुलिस मौके पर पहुंची और स्थिति को नियंत्रण में लिया गया। इलाके में अतिरिक्त पुलिस बल तैनात कर दिया गया है ताकि किसी भी तरह की आगे की हिंसा को रोका जा सके। प्रशासन ने पूरे क्षेत्र में निगरानी बढ़ा दी है और लोगों से शांति बनाए रखने की अपील की गई है।

    घायलों को तुरंत दुर्गापुर के सब डिविजनल अस्पताल ले जाया गया, जहां उनका इलाज चल रहा है। इस घटना के बाद राजनीतिक स्तर पर भी आरोप प्रत्यारोप का दौर शुरू हो गया है। एक पक्ष ने दूसरे पर हमले का आरोप लगाते हुए कहा कि रोड शो के बाद बढ़ी भीड़ से विपक्षी दल असहज हो गया था, जिसके कारण यह झड़प हुई। वहीं दूसरे पक्ष की ओर से भी इस घटना को लेकर गंभीर आरोप लगाए गए हैं।

    घटना के बाद स्थानीय राजनीतिक नेताओं ने अस्पताल पहुंचकर घायलों का हाल जाना और स्थिति का जायजा लिया। इस दौरान दोनों दलों के समर्थकों के बीच तनाव का माहौल बना रहा। इलाके में फिलहाल स्थिति सामान्य लेकिन संवेदनशील बनी हुई है।

    पुलिस प्रशासन इस पूरे मामले की जांच में जुटा है और यह पता लगाने की कोशिश की जा रही है कि झड़प की शुरुआत किस कारण से हुई और इसमें कौन कौन शामिल थे। अधिकारियों का कहना है कि सीसीटीवी फुटेज और प्रत्यक्षदर्शियों के बयान के आधार पर आगे की कार्रवाई की जाएगी।

  • राज्यपाल सीवी आनंद बोस को बम से उड़ाने की धमकी! पश्चिम बंगाल में हाई अलर्ट

    राज्यपाल सीवी आनंद बोस को बम से उड़ाने की धमकी! पश्चिम बंगाल में हाई अलर्ट

    पश्चिम बंगाल । पश्चिम बंगाल के राज्यपाल सीवी आनंद बोस को ईमेल के जरिए जान से मारने की धमकी मिलने के बाद राज्य और केंद्र की सुरक्षा एजेंसियां पूरी तरह सतर्क हो गई हैं। ‘बम से उड़ा देंगे’ जैसे गंभीर शब्दों वाली इस धमकी के बाद पूरे सुरक्षा तंत्र को हाई अलर्ट पर रखा गया है। राज्य पुलिस और सीआरपीएफ की संयुक्त तैनाती के बीच राज्यपाल की जेड-प्लस सुरक्षा को और मजबूत किया गया है, जबकि धमकी देने वाले की पहचान और गिरफ्तारी के लिए साइबर और तकनीकी जांच तेज कर दी गई है।

    दरअसल, पश्चिम बंगाल के राज्यपाल सीवी आनंद बोस को गुरुवार देर रात एक ईमेल के जरिए जान से मारने की धमकी मिलने से प्रशासनिक और राजनीतिक हलकों में खलबली मच गई है। धमकी भरे ईमेल में साफ शब्दों में लिखा गया कि राज्यपाल को बम से उड़ा दिया जाएगा। इस गंभीर मामले के सामने आते ही पुलिस और सुरक्षा एजेंसियों को अलर्ट कर दिया गया और आधी रात को उच्चस्तरीय सुरक्षा बैठक बुलाई गई।

    लोक भवन के एक वरिष्ठ अधिकारी ने बताया कि यह ईमेल रात करीब 11 बजे प्राप्त हुआ, जिसके तुरंत बाद राज्यपाल की सुरक्षा में तैनात एजेंसियों ने स्थिति की समीक्षा की। मामले की जानकारी पश्चिम बंगाल के डीजीपी, मुख्यमंत्री ममता बनर्जी और केंद्रीय गृह मंत्रालय को भी दे दी गई है।

    ईमेल में मोबाइल नंबर, जांच तेज

    इस मामले में एक अधिकारी ने बताया, धमकी देने वाले व्यक्ति ने ईमेल में अपना मोबाइल नंबर भी दिया है। इससे जांच एजेंसियों को तकनीकी तौर पर बड़ी मदद मिलने की उम्मीद है। पुलिस का साइबर सेल ईमेल की आईपी ट्रैकिंग, मोबाइल नंबर की लोकेशन और कॉल डिटेल रिकॉर्ड खंगालने में जुटा है। आरोपी को जल्द गिरफ्तार करने के लिए विशेष टीमें गठित कर दी गई हैं और यह भी जांच की जा रही है कि धमकी किसी संगठित साजिश या आतंकी नेटवर्क से तो जुड़ी नहीं है। धमकी के बाद राज्यपाल सीवी आनंद बोस की सुरक्षा को और मजबूत कर दिया गया है। उन्हें पहले से ही जेड-प्लस श्रेणी की सुरक्षा प्राप्त है, लेकिन अब इसमें अतिरिक्त केंद्रीय बल जोड़े गए हैं।

    अधिकारियों के मुताबिक, राज्य पुलिस और सीआरपीएफ के बीच समन्वय के तहत राज्यपाल की सुरक्षा में लगभग 60 से 70 केंद्रीय पुलिस कर्मियों को तैनात किया गया है। राजभवन परिसर में अतिरिक्त सीसीटीवी कैमरे, ड्रोन निगरानी और प्रवेश बिंदुओं पर सख्त चेकिंग की जा रही है। राज्यपाल के आवागमन के दौरान बुलेटप्रूफ वाहनों और एस्कॉर्ट की संख्या भी बढ़ा दी गई है।

    राज्य और केंद्र सतर्क

    इस पूरे घटनाक्रम को गंभीरता से लेते हुए केंद्रीय गृह मंत्रालय लगातार राज्य सरकार और सुरक्षा एजेंसियों के संपर्क में है। केंद्र ने स्पष्ट निर्देश दिए हैं कि राज्यपाल की सुरक्षा में किसी भी स्तर पर कोई चूक न हो। राज्य पुलिस को भी अतिरिक्त संसाधन और बल मुहैया कराए गए हैं।

    राजनीतिक घमासान तेज

    राज्यपाल को मिली धमकी के बाद राजनीतिक बयानबाजी भी तेज हो गई है। भारतीय जनता पार्टी (भाजपा) ने इस मुद्दे को लेकर मुख्यमंत्री ममता बनर्जी और उनकी सरकार पर तीखा हमला बोला है। बीजेपी नेताओं ने सोशल मीडिया पर आरोप लगाया कि पश्चिम बंगाल में कानून व्यवस्था पूरी तरह चरमरा चुकी है और राज्यपाल जैसे संवैधानिक पद पर बैठे व्यक्ति भी सुरक्षित नहीं हैं।

    भाजपा नेताओं का कहना है कि यह घटना राज्य में बढ़ते अपराध और राजनीतिक हिंसा का प्रमाण है। पार्टी ने मांग की है कि राज्य सरकार कानून-व्यवस्था पर तुरंत नियंत्रण करे और इस मामले में पारदर्शी कार्रवाई सुनिश्चित करे। वहीं, तृणमूल कांग्रेस (टीएमसी) ने भाजपा के आरोपों को राजनीति से प्रेरित बताया है। टीएमसी नेताओं का कहना है कि राज्य पुलिस पूरी तरह मुस्तैद है और आरोपी को जल्द पकड़ लिया जाएगा।

    पहले भी मिल चुकी हैं धमकियां

    आपको बतादें कि यह पहली बार नहीं है जब राज्यपाल सीवी आनंद बोस को धमकी मिली हो। पिछले कुछ वर्षों में उन्हें ईमेल और फोन के जरिए धमकियां मिलती रही हैं, जिसके चलते उनकी सुरक्षा को क्रमशः बढ़ाया गया था। मौजूदा घटना के बाद सुरक्षा व्यवस्था की दोबारा व्यापक समीक्षा की जा रही है। गौरतलब है कि इस धमकी ने एक बार फिर पश्चिम बंगाल में सुरक्षा और कानून-व्यवस्था को लेकर गंभीर सवाल खड़े कर दिए हैं।

  • जान से मारने की धमकियों से घिरे विधायक हुमायूं कबीर, सुरक्षा के लिए हाईकोर्ट जाने की तैयारी

    जान से मारने की धमकियों से घिरे विधायक हुमायूं कबीर, सुरक्षा के लिए हाईकोर्ट जाने की तैयारी


    नई दिल्ली। पश्चिम बंगाल में बाबरी मस्जिद की नींव रखने वाले विधायक हुमायूं कबीर को लगातार मिल रही धमकियों ने सुरक्षा को लेकर चिंता बढ़ा दी है। कबीर ने बताया कि 6 दिसंबर को शिलान्यास के बाद से उन्हें राज्य के बाहर से फोन कर जान से मारने की धमकियां दी जा रही हैं।

    सोमवार को पत्रकारों से बात करते हुए उन्होंने कहा कि तत्काल उपाय के तौर पर वह मंगलवार से अपने लिए आठ निजी सुरक्षाकर्मी तैनात करेंगे। उन्होंने राज्य सरकार और केंद्र सरकार दोनों को सुरक्षा मुहैया कराने के लिए मेल भेजा है। कबीर ने कहा कि अगर उनकी मांग पर कार्रवाई नहीं हुई तो वह कलकत्ता हाईकोर्ट का दरवाजा खटखटाएंगे।

    एक टीवी चैनल से बातचीत के दौरान उन्होंने कहा, “पिछले सात दिनों से लगातार धमकी आ रही है। कहा जा रहा है कि बाबरी मस्जिद की नींव रखने से पहले ही मुझे मार दिया जाएगा। मैं डरा नहीं हूं, अल्लाह पर पूरा भरोसा है, लेकिन सावधानी के लिए सुरक्षा ज़रूरी है।”

    उन्होंने यह भी कहा कि 16 दिसंबर को वह बेंगलुरु जाएंगे और इसके बाद नोएडा की यात्रा करेंगे, इसलिए यात्रा के दौरान सुरक्षा की जरूरत और अधिक बढ़ जाती है।

    तृणमूल कांग्रेस द्वारा निलंबित किए जा चुके कबीर ने राज्य पुलिस पर भरोसा न होने की बात भी कही। उनका कहना है कि चूंकि सत्तारूढ़ पार्टी टीएमसी बाबरी मस्जिद के लिए फंडिंग को लेकर बीजेपी पर आरोप लगा रही है, इसलिए उन्हें सुरक्षा व्यवस्था को लेकर संदेह है।

    कबीर ने स्पष्ट किया कि वह जल्द ही पर्याप्त सुरक्षा की मांग के लिए उच्च न्यायालय का रुख कर सकते हैं।