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  • पश्चिम बंगाल में अवैध प्रवासियों पर सख्ती, 11 होल्डिंग सेंटरों में 335 लोग रखे गए, पहचान प्रक्रिया तेज

    पश्चिम बंगाल में अवैध प्रवासियों पर सख्ती, 11 होल्डिंग सेंटरों में 335 लोग रखे गए, पहचान प्रक्रिया तेज

    नई दिल्ली । देश के विभिन्न हिस्सों में अवैध प्रवासन और सीमा सुरक्षा को लेकर चल रही चर्चाओं के बीच पश्चिम बंगाल से एक महत्वपूर्ण प्रशासनिक कार्रवाई सामने आई है, जहां राज्य सरकार ने संदिग्ध अवैध प्रवासियों की पहचान और उनके कानूनी सत्यापन के लिए 11 होल्डिंग सेंटर स्थापित किए हैं। इन सेंटरों में फिलहाल कुल 335 लोगों को रखा गया है, जिनके दस्तावेजों और नागरिकता से जुड़ी स्थिति की जांच की जा रही है। प्रशासन का कहना है कि यह कदम पूरी तरह से निर्धारित कानूनी प्रक्रिया के तहत उठाया गया है और इसका उद्देश्य किसी भी प्रकार की अवैध गतिविधि पर नियंत्रण रखते हुए व्यवस्था को मजबूत करना है।

    अधिकारियों के अनुसार इन होल्डिंग सेंटरों का संचालन राज्य के अलग-अलग जिलों में किया जा रहा है, जहां पुलिस और जिला प्रशासन की निगरानी में लोगों को अस्थायी रूप से रखा गया है। इनमें बड़ी संख्या उन क्षेत्रों से सामने आई है जो अंतरराष्ट्रीय सीमा के करीब स्थित हैं, जहां अवैध घुसपैठ की आशंका अधिक मानी जाती है। इन केंद्रों में पुरुषों, महिलाओं और बच्चों को अलग-अलग परिस्थितियों में रखा गया है और उनके रिकॉर्ड का सत्यापन किया जा रहा है ताकि उनकी वास्तविक पहचान स्पष्ट हो सके।

    प्रशासनिक सूत्रों का कहना है कि यह पूरी प्रक्रिया केंद्र सरकार के दिशा-निर्देशों के अनुरूप की जा रही है, जिसमें संदिग्ध विदेशी नागरिकों की पहचान, उन्हें सुरक्षित स्थान पर रखना और आवश्यक जांच पूरी होने तक निगरानी में रखना शामिल है। राज्य स्तर पर इस व्यवस्था को मजबूत करने के लिए कई जिलों में विशेष टीमों का गठन किया गया है, जो दस्तावेजों की जांच और स्थानीय स्तर पर जानकारी जुटाने का कार्य कर रही हैं।

    इस बीच राजनीतिक स्तर पर भी इस मुद्दे पर चर्चा तेज हो गई है, जहां अवैध घुसपैठ और सीमा सुरक्षा को लेकर अलग-अलग मत सामने आ रहे हैं। कुछ पक्ष इसे सुरक्षा व्यवस्था की मजबूती के लिए आवश्यक कदम बता रहे हैं, जबकि अन्य इसे मानवीय दृष्टिकोण से जोड़कर देखने की बात कह रहे हैं। हालांकि प्रशासन ने स्पष्ट किया है कि किसी भी व्यक्ति के साथ अनावश्यक कठोरता नहीं बरती जाएगी और पूरी प्रक्रिया कानून के दायरे में रहकर ही आगे बढ़ाई जाएगी।

    फिलहाल सभी होल्डिंग सेंटरों में रखे गए लोगों के दस्तावेजों की जांच, उनके मूल देश की पुष्टि और अन्य कानूनी औपचारिकताओं को पूरा किया जा रहा है। जांच पूरी होने के बाद ही यह तय किया जाएगा कि किन लोगों को देश से वापस भेजने की प्रक्रिया अपनाई जाएगी और किन मामलों में आगे की कानूनी कार्रवाई की आवश्यकता है। प्रशासन का कहना है कि पूरी प्रक्रिया पारदर्शिता और नियमों के अनुरूप की जा रही है ताकि किसी भी प्रकार की त्रुटि की संभावना न रहे और कानून व्यवस्था मजबूत बनी रहे।

  • ममता सरकार पर बढ़ा दबाव: 91 पार्षदों के इस्तीफे के दावे ने बदला बंगाल की राजनीति का समीकरण

    ममता सरकार पर बढ़ा दबाव: 91 पार्षदों के इस्तीफे के दावे ने बदला बंगाल की राजनीति का समीकरण

    नई दिल्ली। पश्चिम बंगाल की राजनीति में एक नया और बड़ा सियासी घटनाक्रम चर्चा का विषय बना हुआ है। राज्य में सत्तारूढ़ तृणमूल कांग्रेस को लेकर उठे एक बड़े दावे ने राजनीतिक गलियारों में हलचल तेज कर दी है। दावा किया जा रहा है कि पार्टी के 91 पार्षदों ने एक साथ इस्तीफा दे दिया है, जिसके बाद स्थानीय निकायों से लेकर राज्य की राजनीति तक कई तरह की चर्चाएं शुरू हो गई हैं। इस घटनाक्रम को लेकर सत्ता और विपक्ष के बीच आरोप-प्रत्यारोप का दौर भी तेज होता दिखाई दे रहा है।

    बताया जा रहा है कि विधानसभा चुनाव के बाद राज्य की राजनीतिक परिस्थितियों में तेजी से बदलाव देखने को मिल रहे हैं। इसी बीच बड़ी संख्या में पार्षदों के सामूहिक इस्तीफे का दावा सामने आने से राजनीतिक समीकरणों को लेकर अटकलें बढ़ गई हैं। विपक्षी दलों का आरोप है कि स्थानीय स्तर पर पार्टी के भीतर असंतोष बढ़ रहा है और इसका असर अब संगठनात्मक ढांचे पर भी दिखाई देने लगा है।

    राजनीतिक चर्चाओं के अनुसार, स्थानीय निकायों में प्रशासनिक और वित्तीय मामलों की समीक्षा तथा विभिन्न स्तरों पर जांच की प्रक्रिया तेज होने के बाद कई नेताओं में असहजता बढ़ी है। इसी वजह से स्थानीय स्तर पर राजनीतिक हलचल और तेज होती दिखाई दे रही है। कई दावे ऐसे भी सामने आए हैं जिनमें कहा जा रहा है कि आने वाले समय में और बड़े बदलाव देखने को मिल सकते हैं। हालांकि इन दावों की स्वतंत्र रूप से पुष्टि होना अभी बाकी माना जा रहा है।

    इस पूरे घटनाक्रम के बाद नगर निकायों की कार्यप्रणाली को लेकर भी चर्चाएं शुरू हो गई हैं। यदि बड़ी संख्या में जनप्रतिनिधियों के इस्तीफे की स्थिति बनती है तो प्रशासनिक व्यवस्था पर उसका असर पड़ना स्वाभाविक माना जा रहा है। स्थानीय स्तर पर कई विकास परियोजनाओं और नागरिक सुविधाओं से जुड़े काम प्रभावित होने की आशंका भी जताई जा रही है।

    राजनीतिक विश्लेषकों का मानना है कि पश्चिम बंगाल की राजनीति लंबे समय से स्थानीय निकायों की मजबूत संरचना के इर्द-गिर्द घूमती रही है। ऐसे में यदि जमीनी स्तर पर राजनीतिक बदलाव के संकेत दिखाई देते हैं तो इसका असर बड़े चुनावी समीकरणों पर भी पड़ सकता है। यही कारण है कि इस पूरे घटनाक्रम पर राजनीतिक दलों के साथ-साथ आम लोगों की भी नजर बनी हुई है।

    वहीं दूसरी ओर इस पूरे मामले को लेकर अलग-अलग प्रतिक्रियाएं सामने आ रही हैं। कुछ लोग इसे बड़े राजनीतिक बदलाव की शुरुआत मान रहे हैं, जबकि कुछ इसे राजनीतिक रणनीति और दबाव की राजनीति से जोड़कर देख रहे हैं। राजनीतिक माहौल में बढ़ी इस हलचल ने एक बार फिर यह साफ कर दिया है कि पश्चिम बंगाल की राजनीति आने वाले दिनों में और अधिक दिलचस्प मोड़ ले सकती है।

    फिलहाल इस दावे को लेकर चर्चा और बहस का दौर जारी है। आने वाले समय में यदि इस पूरे घटनाक्रम पर अधिक स्पष्ट जानकारी सामने आती है तो राज्य की राजनीति में इसके व्यापक प्रभाव देखने को मिल सकते हैं। बंगाल का सियासी तापमान फिलहाल बढ़ा हुआ है और सभी की नजर अब अगले घटनाक्रम पर टिकी हुई है।

  • बंगाल में आरक्षण नीति पर नया मोड़, ओबीसी कोटा गणित बदला; कई समुदायों की स्थिति में बड़ा बदलाव

    बंगाल में आरक्षण नीति पर नया मोड़, ओबीसी कोटा गणित बदला; कई समुदायों की स्थिति में बड़ा बदलाव

    नई दिल्ली । पश्चिम बंगाल में आरक्षण व्यवस्था को लेकर बड़ा प्रशासनिक और नीतिगत बदलाव देखने को मिला है, जहां ओबीसी वर्गीकरण प्रणाली में संशोधन कर पुरानी सूची को फिर से लागू कर दिया गया है। इस फैसले के बाद राज्य की आरक्षण संरचना में महत्वपूर्ण परिवर्तन हुआ है, जिससे सामाजिक और राजनीतिक दोनों स्तरों पर नई चर्चा शुरू हो गई है। यह कदम अदालत के निर्देशों और मौजूदा नियमों के अनुपालन के संदर्भ में उठाया गया बताया जा रहा है, जिसके तहत पहले लागू संशोधित ओबीसी सूची को रद्द कर दिया गया है।

    इस बदलाव के बाद राज्य में 2010 से पहले की ओबीसी सूची को बहाल किया गया है, जिसमें कई पारंपरिक समुदायों को फिर से शामिल किया गया है। इस सूची के अनुसार अब संबंधित समुदायों को सरकारी नौकरियों और अन्य नियुक्तियों में निर्धारित आरक्षण का लाभ मिलेगा। प्रशासनिक स्तर पर इस निर्णय को व्यवस्था में पारदर्शिता और संतुलन लाने की दिशा में उठाया गया कदम बताया जा रहा है।

    पहले राज्य में ओबीसी आरक्षण को दो श्रेणियों में बांटा गया था, जिसमें एक वर्ग को अधिक पिछड़ा मानते हुए अलग प्रतिशत का लाभ दिया जाता था, जबकि दूसरे वर्ग को अलग कोटा मिलता था। लेकिन अब इस पूरी व्यवस्था को समाप्त कर एकीकृत प्रणाली लागू की गई है, जिससे आरक्षण ढांचे में व्यापक बदलाव देखने को मिल रहा है।

    इस फैसले के बाद बड़ी संख्या में पहले जारी किए गए ओबीसी प्रमाणपत्रों की वैधता पर भी प्रभाव पड़ा है। बताया जा रहा है कि 2010 के बाद जारी कई प्रमाणपत्र अब इस नई व्यवस्था के दायरे में नहीं आते, जिससे प्रभावित लोगों की संख्या लाखों में है। हालांकि पहले से नौकरी प्राप्त कर चुके कर्मचारियों की स्थिति को सुरक्षित रखा गया है और पुराने प्रमाणपत्रों को मान्यता दी गई है।

    नई सूची में कई पारंपरिक सामाजिक समुदायों को शामिल किया गया है, जो लंबे समय से पिछड़ा वर्ग की श्रेणी में आते रहे हैं। इसके साथ ही कुछ अल्पसंख्यक समुदायों को भी पिछड़ा वर्ग में शामिल किया गया है, जिससे आरक्षण ढांचे का सामाजिक संतुलन बदलता हुआ दिखाई दे रहा है।

    इस निर्णय के बाद राज्य में राजनीतिक हलचल भी तेज हो गई है। विभिन्न स्तरों पर इसे सामाजिक न्याय और प्रशासनिक सुधार से जोड़कर देखा जा रहा है, जबकि कुछ वर्ग इसे आरक्षण नीति में बड़ा बदलाव मान रहे हैं। आने वाले समय में यह बदलाव राज्य की सामाजिक संरचना और सरकारी नौकरियों की प्रक्रिया पर गहरा प्रभाव डाल सकता है।

  • कोर्ट में सक्रिय दिखीं ममता बनर्जी, चुनावी हिंसा मामले में पेश की पैरवी, बाहर विरोध और नारेबाजी ने खींचा ध्यान

    कोर्ट में सक्रिय दिखीं ममता बनर्जी, चुनावी हिंसा मामले में पेश की पैरवी, बाहर विरोध और नारेबाजी ने खींचा ध्यान

    नई दिल्ली । पश्चिम बंगाल की राजनीति एक बार फिर अदालत और सियासी हलकों के केंद्र में आ गई है, जब राज्य की पूर्व मुख्यमंत्री और तृणमूल कांग्रेस प्रमुख ममता बनर्जी एक महत्वपूर्ण मामले की सुनवाई के लिए काला कोट पहनकर कलकत्ता हाईकोर्ट पहुंचीं। यह मामला राज्य में हाल ही में हुए विधानसभा चुनावों के बाद सामने आए कथित चुनावी हिंसा से जुड़ा था, जिसकी सुनवाई के दौरान उन्होंने अदालत के समक्ष अपनी बात रखी और पूरे घटनाक्रम पर गंभीर चिंता जताई।

    सुनवाई के दौरान ममता बनर्जी ने राज्य में चुनाव परिणामों के बाद हुई घटनाओं का उल्लेख करते हुए कहा कि कई जगहों पर हिंसा, आगजनी और अन्य आपराधिक गतिविधियों की शिकायतें सामने आई हैं। उन्होंने यह भी दावा किया कि कई मामलों में पुलिस द्वारा एफआईआर दर्ज करने की अनुमति नहीं दी जा रही, जिससे पीड़ित पक्षों को न्याय मिलने में कठिनाई हो रही है। उन्होंने अदालत से इस पूरे मामले की निष्पक्ष जांच और प्रभावित लोगों की सुरक्षा सुनिश्चित करने की अपील की।

    ममता बनर्जी के साथ उनके कुछ वरिष्ठ सहयोगी भी मौजूद रहे, और पूरे कोर्ट परिसर में उनकी मौजूदगी ने मीडिया और वकीलों का ध्यान खींच लिया। सुनवाई के दौरान उनका व्यवहार पूरी तरह औपचारिक और कानूनी प्रक्रिया के अनुरूप रहा, जहां उन्होंने अपनी पृष्ठभूमि का उल्लेख करते हुए बताया कि वे पहले भी वकालत से जुड़ी रही हैं और कानून की समझ रखती हैं।

    हालांकि सुनवाई समाप्त होने के बाद जैसे ही वह कोर्ट रूम से बाहर निकलीं, माहौल अचानक बदल गया। परिसर के गलियारों में मौजूद कुछ लोगों की भीड़ ने उन्हें घेर लिया और नारेबाजी शुरू हो गई। इस दौरान राजनीतिक नारे लगाए गए, जिससे वातावरण कुछ देर के लिए तनावपूर्ण हो गया। सुरक्षा कर्मियों ने स्थिति को नियंत्रित किया और उन्हें सुरक्षित बाहर निकाला गया।

    यह पूरा घटनाक्रम ऐसे समय पर सामने आया है जब राज्य में चुनावी हिंसा को लेकर राजनीतिक आरोप-प्रत्यारोप पहले से ही तेज हैं। विभिन्न पक्षों की ओर से अलग-अलग दावे किए जा रहे हैं। एक ओर जहां कुछ याचिकाओं में यह आरोप लगाया गया है कि चुनाव परिणामों के बाद हिंसा के चलते कई लोग अपने घर छोड़ने को मजबूर हुए, वहीं दूसरी ओर सत्तारूढ़ पक्ष का कहना है कि शिकायतों की संख्या को लेकर तथ्य अलग हैं और कई मामलों में सही कानूनी प्रक्रिया अपनाई जानी चाहिए।

    इस मामले की पृष्ठभूमि में यह भी सामने आता है कि ममता बनर्जी का कानूनी क्षेत्र से पुराना जुड़ाव रहा है। उन्होंने अपनी प्रारंभिक शिक्षा के बाद कानून की पढ़ाई की थी और कुछ समय तक अदालत में वकालत भी की थी, जिसके बाद उन्होंने पूरी तरह राजनीति में प्रवेश किया।

    राजनीतिक और कानूनी दोनों ही स्तरों पर यह मामला अब चर्चा का विषय बन गया है। अदालत में रखी गई दलीलों के साथ-साथ बाहर हुई घटनाओं ने इसे और अधिक संवेदनशील बना दिया है। आने वाले समय में इस मामले की सुनवाई और उससे जुड़े तथ्य राज्य की राजनीतिक दिशा पर भी असर डाल सकते हैं।

  • व्यापारिक माहौल सुधरने पर बंगाल में औद्योगिक विकास की वापसी की उम्मीद तेज

    व्यापारिक माहौल सुधरने पर बंगाल में औद्योगिक विकास की वापसी की उम्मीद तेज

    नई दिल्ली ।पश्चिम बंगाल के आर्थिक भविष्य को लेकर एक बार फिर सकारात्मक उम्मीदें सामने आ रही हैं। व्यापार जगत से जुड़े प्रतिनिधियों का मानना है कि यदि राज्य में निवेश के लिए अनुकूल माहौल और स्थिर नीतिगत ढांचा तैयार किया जाए, तो बंगाल एक बार फिर देश के प्रमुख व्यापार और उद्योग केंद्रों में अपनी मजबूत स्थिति हासिल कर सकता है।

    व्यापारिक समुदाय का कहना है कि पिछले कुछ वर्षों में राज्य के औद्योगिक ढांचे को कई चुनौतियों का सामना करना पड़ा है। इनमें निवेश में गिरावट, छोटे उद्योगों पर दबाव, और कारोबारियों के पलायन जैसी स्थितियां प्रमुख रही हैं। इसके कारण राज्य के एमएसएमई सेक्टर और पारंपरिक उद्योगों पर सीधा असर पड़ा है।

    कई व्यापारिक प्रतिनिधियों का मानना है कि एक समय पश्चिम बंगाल देश के औद्योगिक विकास में अग्रणी राज्यों में शामिल था, लेकिन समय के साथ प्रतिस्पर्धा बढ़ने और नीतिगत स्थिरता की कमी के कारण यह गति धीमी हो गई। परिणामस्वरूप कई छोटे और मध्यम उद्योग या तो बंद हो गए या बेहतर अवसरों की तलाश में अन्य राज्यों में स्थानांतरित हो गए।

    अब व्यापारिक जगत को उम्मीद है कि यदि राज्य में उद्योगों के लिए सरल नियम, निवेशकों के लिए भरोसेमंद माहौल और प्रशासनिक प्रक्रियाओं में पारदर्शिता लाई जाती है, तो स्थिति में तेजी से सुधार हो सकता है। खासकर यह माना जा रहा है कि छोटे और मध्यम उद्योगों को यदि उचित सहयोग दिया जाए तो वे फिर से राज्य की आर्थिक रीढ़ बन सकते हैं।

    पारंपरिक उद्योगों जैसे चाय, जूट, हथकरघा, चमड़ा और मिठाई व्यवसाय को बंगाल की पहचान माना जाता है। लेकिन बढ़ती लागत, जटिल नियमों और सीमित सहायता के कारण इन क्षेत्रों को भी दबाव का सामना करना पड़ा है। व्यापारिक वर्ग का कहना है कि यदि इन उद्योगों के लिए विशेष नीतिगत समर्थन दिया जाए, तो बड़ी संख्या में रोजगार के अवसर दोबारा पैदा हो सकते हैं।

    इसके साथ ही यह भी सुझाव दिया जा रहा है कि राज्य में निवेश को आकर्षित करने के लिए बुनियादी ढांचे को मजबूत करना बेहद जरूरी है। बेहतर सड़क, परिवहन और लॉजिस्टिक्स सुविधाएं औद्योगिक विकास को नई गति दे सकती हैं। साथ ही औद्योगिक गलियारों के विस्तार से बड़े स्तर पर निवेश आकर्षित किया जा सकता है।

    व्यापार जगत यह भी मानता है कि यदि राज्य में केंद्र की विभिन्न विकास योजनाओं की भावना के अनुरूप नीतियां लागू की जाएं, तो बंगाल एक बार फिर निवेशकों की पसंदीदा जगह बन सकता है। इससे न केवल उद्योगों का विस्तार होगा, बल्कि युवाओं के लिए रोजगार के नए अवसर भी पैदा होंगे।

    कुल मिलाकर, व्यापारिक प्रतिनिधियों का मानना है कि यदि सही दिशा में नीतिगत सुधार किए जाएं और निवेश के लिए स्थिर वातावरण बनाया जाए, तो पश्चिम बंगाल में एक नया औद्योगिक दौर शुरू हो सकता है, जिससे राज्य की आर्थिक स्थिति को मजबूती मिल सकती है।

  • बगाल के मुर्शिदाबाद में बाबरी मस्जिद स्थल पर जुटी भीड़, सैकड़ों लोगों ने अदा की जुमे की नमाज

    बगाल के मुर्शिदाबाद में बाबरी मस्जिद स्थल पर जुटी भीड़, सैकड़ों लोगों ने अदा की जुमे की नमाज


    कोलकाता । पश्चिम बंगाल (West Bengal)के मुर्शिदाबाद (Murshidabad)जिले में प्रस्तावित बाबरी मस्जिद शैली वाली मस्जिद के स्थल पर सैकड़ों लोगों ने शुक्रवार की नमाज अदा की। निलंबित तृणमूल कांग्रेस विधायक हुमायूं कबीर (Humayun Kabir)ने 6 दिसंबर को इस मस्जिद की नींव रखी थी। यह तारीख वही है जब 1992 में अयोध्या(Ayodhya) की बाबरी मस्जिद को ढहाया गया था। आज सुबह से ही आसपास के गांवों से लोग खेतों के रास्ते इस स्थल की ओर आने लगे थे। नमाज के समय नजदीक आने पर आयोजकों ने लाउडसर्स के जरिए भीड़ को निर्देश दिए। तस्वीरों में दिख रहा है कि नमाजियों की लंबी-लंबी कतारें खेतों से होते हुए खुले मैदान तक पहुंच रही थीं।

    पहले से क्षेत्र में तनाव को देखते हुए भारी सुरक्षा व्यवस्था की गई थी। पिछले हफ्ते तृणमूल कांग्रेस से निष्कासित किए गए हुमायूं कबीर भी नमाज में शामिल हुए। किसी अप्रिय घटना को रोकने के लिए पुलिस बल बढ़ा दिया गया था। अधिकारियों ने यह जानकारी दी। आयोजकों ने करीब 1 हजार लोगों के लिए खाने की व्यवस्था की थी, लेकिन भीड़ उससे कहीं अधिक थी। पड़ोस के प्लासी से आए लोगों ने करीब डेढ़ क्विंटल चावल से खिचड़ी बनाई। खाना बनाने वाली कमेटी के एक सदस्य ने कहा, ‘हम ये सवाब के लिए कर रहे हैं। पता नहीं कितने लोग आएंगे, लेकिन उन्हें खिलाना बड़ा पुण्य है।’

    राजनीतिक बयानबाजियां तेज
    नींव रखे जाने के बाद से बाबरी मस्जिद की तर्ज पर बनने वाली इस मस्जिद के लिए भारी चंदा आ रहा है। स्थल पर रखे दान-पात्र तेजी से भरते दिखे और डिजिटल योगदान के लिए क्यूआर कोड भी लगाए गए थे। नींव समारोह ने तीखी राजनीतिक प्रतिक्रियाएं पैदा की थीं। भाजपा ने मुख्यमंत्री ममता बनर्जी पर सांप्रदायिक तुष्टिकरण का आरोप लगाया। तृणमूल कांग्रेस ने दावा किया कि यह सारा मामला भाजपा के इशारे पर अगले साल होने वाले विधानसभा चुनाव से पहले क्षेत्र को ध्रुवीकृत करने की साजिश है। हुमायूं कबीर ने कहा कि वे सिर्फ लोगों की मांग पर ऐसा कर रहे हैं।

  • हुमायूं कबीर ने ममता बनर्जी को दी चुनौती, 2026 विधानसभा चुनाव में नई पार्टी से लड़ेंगे

    हुमायूं कबीर ने ममता बनर्जी को दी चुनौती, 2026 विधानसभा चुनाव में नई पार्टी से लड़ेंगे


    नई दिल्ली । पश्चिम बंगाल (West Bengal)में बाबरी मस्जिद (Babri Masjid)की नींव रख चुके विधायक हुमायूं कबीर(Humayun Kabir) ने मुख्यमंत्री ममता बनर्जी(Mamata Banerjee) को चुनौती दी है। उन्होंने बुधवार को कहा है कि वह अगले विधानसभा चुनाव में सीएम बनर्जी की पार्टी के खिलाफ उम्मीदवार उतारने जा रहे हैं। राज्य में 2026 में चुनाव होने हैं। इससे पहले वह दावा कर चुके हैं कि बनर्जी 2026 में सीएम नहीं बन पाएंगी। तृणमूल कांग्रेस ने कबीर को निलंबित कर दिया है।

    मीडिया से बातचीत में उन्होंने कहा, ‘मैं 22 दिसंबर को एक नई पार्टी का ऐलान करूंगा। मैं ममता बनर्जी की पार्टी के खिलाफ उम्मीदवारों को उतारूंगा। जो भी मुख्यमंत्री बनेगा, उसे ऐसा करने के लिए हुमायूं कबीर का समर्थन लेना पड़ेगा।’ उन्होंने पहले भी कहा था कि वह अगले चुनाव में पश्चिम बंगाल में किंगमेकर बनकर सामने आएंगे।

    सूत्रों के अनुसार, मंगलवार को कबीर ने दावा किया कि 2026 में न तो सत्तारूढ़ तृणमूल कांग्रेस और न ही भारतीय जनता पार्टी अपने दम पर बहुमत का आंकड़ा छू पाएगी। कबीर ने कहा कि उनका अनुमान है कि 294 सदस्यीय विधानसभा में कोई भी पार्टी 148 सीटों का आंकड़ा पार नहीं कर पाएगी।

    उन्होंने संवाददाताओं से कहा, ‘चुनाव के बाद मैं किंगमेकर बनूंगा। मेरे समर्थन के बिना कोई भी सरकार नहीं बना सकता।’ कबीर ने कहा, ‘मैंने कहा है कि मैं 135 सीटों पर चुनाव लड़ूंगा। आप देखेंगे कि मैं जो पार्टी बनाऊंगा, वह इतनी सीटें जीतेगी कि जो भी मुख्यमंत्री पद की शपथ लेगा, उसे मेरी पार्टी के विधायकों के समर्थन की आवश्यकता होगी।’

    TMC ने उड़ाया मजाक
    टीएमसी ने कबीर के इस दावे का मजाक उड़ाया था। सीएम बनर्जी की अगुवाई वाली पार्टी के प्रदेश महासचिव अरूप चक्रवर्ती ने कहा, ‘हुमायूं कबीर दिवास्वप्न देख रहे हैं। सरकार बनाने की बात करने से पहले उन्हें अपनी जमानत बचाने की कोशिश करनी चाहिए। ऐसे निराधार दावे उनकी राजनीतिक हताशा को ही उजागर करते हैं।’

  • हुमायूं कबीर का दावा: 2026 में बनूंगा किंगमेकर, मेरी पार्टी के बिना कोई सरकार नहीं बनेगी

    हुमायूं कबीर का दावा: 2026 में बनूंगा किंगमेकर, मेरी पार्टी के बिना कोई सरकार नहीं बनेगी


    कोलकाता । तृणमूल कांग्रेस के निलंबित विधायक हुमायूं कबीर ने मंगलवार को कहा कि पश्चिम बंगाल में 2026 के विधानसभा चुनावों के बाद वह ‘किंगमेकर’ के रूप में उभरेंगे। उन्होंने कहा कि उनके प्रस्तावित नए राजनीतिक दल के समर्थन के बिना कोई सरकार नहीं बन सकती। कबीर ने दावा किया कि 2026 में न तो सत्तारूढ़ तृणमूल कांग्रेस और न ही भारतीय जनता पार्टी (BJP) अपने दम पर बहुमत का आंकड़ा छू पाएगी। कबीर ने कहा कि उनका अनुमान है कि 294 सदस्यीय विधानसभा में कोई भी पार्टी 148 सीटों का आंकड़ा पार नहीं कर पाएगी।

    उन्होंने संवाददाताओं से कहा, ‘चुनाव के बाद मैं किंगमेकर बनूंगा। मेरे समर्थन के बिना कोई भी सरकार नहीं बना सकता।’ उन्होंने संकेत दिया कि उनकी नई पार्टी की औपचारिक घोषणा 22 दिसंबर को की जाएगी। कबीर ने कहा, ‘मैंने कहा है कि मैं 135 सीटों पर चुनाव लड़ूंगा। आप देखेंगे कि मैं जो पार्टी बनाऊंगा, वह इतनी सीटें जीतेगी कि जो भी मुख्यमंत्री पद की शपथ लेगा, उसे मेरी पार्टी के विधायकों के समर्थन की आवश्यकता होगी।’

    यह पूछे जाने पर कि क्या उनके संगठन का नाम ‘नेशनल कंजर्वेटिव पार्टी’ होगा, कबीर ने कहा, ‘मैं बाद में सब कुछ बताऊंगा। आपको 22 दिसंबर के बाद पता चल जाएगा।’ तृणमूल कांग्रेस ने पिछले सप्ताह हुमायूं कबीर को निलंबित कर दिया था।

    हालांकि, तृणमूल कांग्रेस ने उनके दावे का मजाक उड़ाया और कहा कि वह ‘दिवास्वप्न देख रहे हैं।’ तृणमूल कांग्रेस के प्रदेश महासचिव अरूप चक्रवर्ती ने कहा, ‘हुमायूं कबीर दिवास्वप्न देख रहे हैं। सरकार बनाने की बात करने से पहले उन्हें अपनी जमानत बचाने की कोशिश करनी चाहिए। ऐसे निराधार दावे उनकी राजनीतिक हताशा को ही उजागर करते हैं।’

    करीब तीन करोड़ रुपये का चंदा मिला
    मुर्शिदाबाद में प्रस्तावित बाबरी मस्जिद-शैली की मस्जिद के लिए मिले चंदे की राशि लगभग तीन करोड़ रुपये तक पहुंच गई है। विधायक के सहयोगियों ने मंगलवार को यह दावा किया। कबीर के अनुसार, स्थल पर 12 दान पेटियां रखी गई थीं। अब तक इन पेटियों से 57 लाख रुपये की गिनती हुई है, जबकि क्यूआर कोड भुगतान के माध्यम से 2.47 करोड़ रुपये प्राप्त हुए हैं।

  • कोई राजनीतिक दल नहीं दे रहा हुमायूं कबीर का साथ, TMC ने विधानसभा में भी दूरी बनाने का फैसला लिया"

    कोई राजनीतिक दल नहीं दे रहा हुमायूं कबीर का साथ, TMC ने विधानसभा में भी दूरी बनाने का फैसला लिया"


    कोलकाता । पश्चिम बंगाल में बाबरी मस्जिद की नींव रखने वाले विधायक हुमायूं कबीर को खास राजनीतिक समर्थन नहीं मिल रहा है। तृणमूल कांग्रेस ने उन्हें पहले ही निलंबित कर दिया है। वहीं, भारतीय जनता पार्टी, कांग्रेस और लेफ्ट ने भी उनसे किनारा किया है। यहां तक कि सांसद असदुद्दीन ओवैसी की ऑल इंडिया मजलिस-ए-इत्तेहादुल मुस्लिमीन ने भी दूरी बनाने का फैसला किया है।

    विधायक बने रहने का फैसला करने के बावजूद, कबीर ने सोमवार को दोहराया कि वह इस महीने के अंत में एक नया राजनीतिक दल बनाने की योजना पर आगे बढ़ेंगे। उन्होंने दावा किया, ‘मैंने अभी तक कांग्रेस से बात नहीं की है। मार्क्सवादी कम्युनिस्ट पार्टी (माकपा) के प्रदेश सचिव मोहम्मद सलीम ने उनके साथ बातचीत की जिम्मेदारी ली है। अगले विधानसभा चुनाव के लिए मुर्शिदाबाद में कांग्रेस और वाम दलों के साथ सीट के बंटवारे की प्रबल संभावना है।’

    भाजपा बोली- जिन्ना की भाषा बोल रहे
    भाजपा विधायक और बंगाल में नेता प्रतिपक्ष शुभेंदु अधिकारी ने सोमवार को कहा कि कबीर की बयानबाजी को ‘मुहम्मद अली जिन्ना की भाषा’ करार दिया। उन्होंने कहा कि यह ‘बंगाली हिंदुओं के लिए सीधी चुनौती’ है।

    उन्होंने आरोप लगाया, ‘हमने स्पष्ट रूप से कहा है कि आप अपनी जमीन पर, अपने समुदाय के धन से, कानूनी तौर पर मंदिर, मस्जिद, चर्च और गुरुद्वारे बनाएं। लेकिन रेजिनगर में जो हुआ वह धार्मिक आस्था नहीं थी। यह राज्य के संरक्षण में कट्टरपंथियों का शक्ति प्रदर्शन था।’

    शुभेंदु ने कबीर पर सीधा निशाना साधते हुए कहा, ‘हुमायूं कबीर अब जिस भाषा का इस्तेमाल कर रहे हैं, वह हुसैन सुहरावर्दी और मुहम्मद अली जिन्ना की भाषा से अलग नहीं है। यह एक चुनौती है, एक युद्धघोष है, यह सह-अस्तित्व की भाषा नहीं है।’

    सीट बदलेगी TMC?
    टीएमसी ने विधानसभा के अंदर भी कबीर से दूरी बनाए रखने का फैसला किया है। टीएमसी नेताओं ने कहा कि सदन में उनके बैठने की व्यवस्था बदली जाएगी। सूत्रों के अनुसार, पार्टी सूत्रों ने बताया कि विधायक बने रहने के उनके फैसले के बाद, तृणमूल कांग्रेस विधायक दल ने सत्तारूढ़ दल के सदस्यों से दूर रखने के लिए कबीर की सीट भाजपा सदस्यों की सीट के पास करने की पहल की है। इससे पहले, कबीर को उनके पूर्व मंत्री पद के कारण सत्ता पक्ष की सीट के पास अगली पंक्ति में सीट दी गई थी।

    तृणमूल कांग्रेस के मुख्य सचेतक निर्मल घोष ने कहा कि पार्टी स्थिति पर कड़ी नजर रख रही है। उन्होंने पीटीआई-भाषा को बताया, ‘निलंबित विधायकों को विधानसभा में बैठने की व्यवस्था पर फैसला अगले कुछ दिन में लिया जाएगा।’ पश्चिम बंगाल विधानसभा के कार्यकाल की समाप्ति से पहले सदन का शीतकालीन सत्र और अंतरिम बजट सत्र की बैठक होने की उम्मीद है।

    AIMIM ने क्या कहा
    हुमायूं कबीर ने खुद को पश्चिम बंगाल का ओवैसी बताया था। साथ ही खबरें थीं कि वह AIMIM के साथ गठबंधन भी करने की तैयारी कर रहे हैं। उन्होंने दावा किया था कि इस संबंध में ओवैसी से बात हुई है। हालांकि, AIMIM ने विधायक कबीर के साथ चुनावी गठजोड़ से सोमवार को इनकार किया और उनके प्रस्तावों को ‘राजनीतिक रूप से संदिग्ध और वैचारिक रूप से असंगत’ बताया।

    पार्टी के राष्ट्रीय प्रवक्ता सैयद असीम वकार ने कहा, ‘सार्वजनिक रूप से उपलब्ध जानकारी के अनुसार, कबीर को अधिकारी के राजनीतिक तंत्र का हिस्सा माना जाता है। और यह सर्वविदित है कि अधिकारी भाजपा के राष्ट्रीय स्तरीय नेतृत्व के मुख्य रणनीतिक ढांचे के भीतर काम करते हैं।’ उन्होंने कहा, ‘मुस्लिम समुदाय राष्ट्र निर्माण में विश्वास रखता है, उसे तोड़ने में नहीं। वह देश को मजबूत करने वाली ताकतों के साथ खड़ा है और अशांति और विभाजन पैदा करने वालों को नकारता है।’

    कांग्रेस ने निकाली सद्भावना यात्रा
    शनिवार को कांग्रेस ने आरोप लगाया कि टीएमसी और भाजपा, दोनों ही, उस जिले में धार्मिक आशंकाओं का फायदा उठा रहे हैं जहां ऐतिहासिक रूप से साम्प्रदायिक तनाव देखा गया है। कोलकाता में कांग्रेस के सैकड़ों कार्यकर्ताओं ने एक मस्जिद से मंदिर तक ‘सद्भावना रैली’ निकाली और लोगों से अपील की कि वे बाबरी मस्जिद ढहाये जाने के बाद पैदा हुए साम्प्रदायिक भय के माहौल की वापसी को खारिज करें।

    प्रदेश कांग्रेस प्रमुख शुभंकर सरकार ने कहा, ‘मंदिर और मस्जिद लोगों को ना तो रोजगार देंगे और ना ही भोजन। विभाजन की राजनीति बंद होनी चाहिए।’ मीडिया रिपोर्ट्स के अनुसार, सीपीएम ने भी कबीर के फैसले से दूरी बनाई है। हालांकि, इसे लेकर आधिकारिक तौर पर कुछ नहीं कहा गया है।

  • 40,000 पैकेट बिरयानी की तैयारी, मस्जिद कार्यक्रम को लेकर इलाक़े में उत्साह

    40,000 पैकेट बिरयानी की तैयारी, मस्जिद कार्यक्रम को लेकर इलाक़े में उत्साह


    बहरामपुर । TMC के निलंबित विधायक हुमायूं कबीर (Humayun Kabir) ने पश्चिम बंगाल (West Bengal) के मुर्शिदाबाद जिले में ‘बाबरी जैसी मस्जिद’ (Babri Mosque) बनाने का ऐलान कर बड़ा बखेड़ा खड़ा कर दिया है। शुक्रवार को कलकत्ता हाईकोर्ट (Calcutta High Court) ने भी मस्जिद के निर्माण में हस्तक्षेप करने के इनकार कर दिया है। इसके बाद अब शिलान्यास समारोह को भव्य बनाने की तैयारियां शुरू हो गई हैं। समारोह स्थल को एक विशाल कार्यस्थल में बदल दिया गया है जहां शनिवार को बाबरी जैसी मस्जिद का शिलान्यास होगा। जानकारी के मुताबिक समारोह में सऊदी अरब के मौलवियों के आने की संभावना है। वहीं यहां हजारों लोगों के लिए भोजन तैयार किया जा रहा है। अधिकारियों ने समारोह से पहले सुरक्षा व्यवस्था कड़ी कर दी है।

    इससे पहले TMC ने हुमायूं कबीर को पार्टी से निकाल दिया है। मुख्यमंत्री ममता बनर्जी ने बिना नाम लिए इस तरह के आयोजनों के खिलाफ चेतावनी भी जारी की है। हालांकि कबीर राजनीतिक घटनाक्रम और प्रशासनिक दबाव से बेपरवाह दिखे। कबीर ने पत्रकारों से कहा है कि शनिवार को मोरादघी के पास 25 बीघा जमीन पर लगभग तीन लाख लोग इकट्ठा होंगे। उन्होंने यह भी बताया कि कई राज्यों के धार्मिक नेताओं ने अपनी उपस्थिति की पुष्टि की है। कबीर ने बटुआ, “सऊदी अरब से दो काजी सुबह कोलकाता हवाई अड्डे से एक विशेष काफिले में पहुंचेंगे।”

    60-70 लाख रुपए खानपान में खर्च
    राज्य के एकमात्र उत्तर-दक्षिण मुख्य राजमार्ग एनएच-12 के किनारे स्थित विशाल आयोजन स्थल पर जोर-शोर से तैयारियां चल रही हैं। भीड़ के लिए शाही बिरयानी बनाने के लिए मुर्शिदाबाद की सात खानपान एजेंसियों को अनुबंध दिया गया है। विधायक के एक करीबी सहयोगी ने बताया कि मेहमानों के लिए लगभग 40,000 पैकेट और स्थानीय लोगों के लिए 20,000 पैकेट बनाए जा रहे हैं, जिससे सिर्फ भोजन का खर्च 30 लाख रुपए से अधिक हो जाएगा। उन्होंने कहा, “आयोजन स्थल का बजट लगभग 60-70 लाख रुपए होगा।”

    मंच पर 400 मेहमानों के बैठने की व्यवस्था
    धान के खेतों के ऊपर बना मुख्य मंच इस विशाल आयोजन का सबसे स्पष्ट प्रतीक बन गया है। करीबी सहयोगी ने बताया कि 150 फुट लंबा और 80 फुट चौड़ा यह मंच लगभग 400 मेहमानों के बैठने की क्षमता के साथ 10 लाख रुपए की अनुमानित लागत से बनाया जा रहा है। आयोजकों ने बताया कि लगभग 3,000 स्वयंसेवक भीड़ को नियंत्रित करने, मार्गों को नियंत्रित करने और NH-12 पर अवरोधों को रोकने के लिए तैनात किए गए हैं। इनमें से 2,000 ने शुक्रवार सुबह से ही काम शुरू कर दिया था।

    कुरान की आयतों के साथ शुरू होगा समारोह
    कबीर ने कहा कि समारोह पूर्वाह्न 10 बजे कुरान की आयतों के साथ शुरू होगा, जिसके बाद दोपहर में आधारशिला समारोह होगा। उन्होंने कहा, “औपचारिकताएं दो घंटे पहले शुरू हो जाएंगी। पुलिस के निर्देशानुसार शाम चार बजे तक मैदान खाली कर दिया जाएगा।”

    3000 पुलिसकर्मी तैनात
    इस बीच शुक्रवार को कलकत्ता हाईकोर्ट के निर्देश के बाद जिला पुलिस ने सार्वजनिक व्यवस्था और NH-12 पर निर्बाध आवाजाही सुनिश्चित करने के लिए हुमायूं कबीर की टीम के साथ कई दौर की चर्चा की। जिला पुलिस के एक वरिष्ठ अधिकारी ने बताया कि बेलडांगा और रानीनगर थाना क्षेत्र में लगभग 3,000 पुलिसकर्मियों को तैनात किया जाएगा।