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  • पूर्व प्रधानमंत्री आई.के. गुजराल के बेटे के साथ व्हाट्सएप पर हुआ देश का सबसे बड़ा साइबर फ्रॉड, शातिर ठगों ने डीपी बदलकर कंपनी के अधिकारियों से ऐंठे 7.8 करोड़ रुपये

    पूर्व प्रधानमंत्री आई.के. गुजराल के बेटे के साथ व्हाट्सएप पर हुआ देश का सबसे बड़ा साइबर फ्रॉड, शातिर ठगों ने डीपी बदलकर कंपनी के अधिकारियों से ऐंठे 7.8 करोड़ रुपये

    नई दिल्ली । देश की राजधानी में एक बेहद हैरान करने वाला और अब तक का सबसे बड़ा हाई-प्रोफाइल साइबर फ्रॉड का मामला सामने आया है। भारत के पूर्व प्रधानमंत्री इंद्र कुमार गुजराल के बेटे और पूर्व राज्यसभा सांसद नरेश गुजराल के परिवार और उनकी कंपनी को निशाना बनाकर साइबर अपराधियों ने करीब 7.8 करोड़ रुपये का बड़ा वित्तीय चूना लगाया है। शातिर ठगों ने इस पूरे स्कैम को व्हाट्सएप मैसेंजर के जरिए बेहद चालाकी और लंबी प्लानिंग के तहत अंजाम दिया। इस सनसनीखेज मामले के उजागर होने के बाद राजनीतिक गलियारों से लेकर कॉर्पोरेट जगत और सुरक्षा एजेंसियों में हड़कंप मच गया है।

    इस बेहद शातिर ठगी की शुरुआत नरेश गुजराल की कंपनी में कार्यरत एक बेहद वरिष्ठ अधिकारी के मोबाइल पर आए एक अज्ञात व्हाट्सएप मैसेज से हुई। ठगों ने चालाकी का परिचय देते हुए उस अनजान नंबर पर पूर्व सांसद नरेश गुजराल की ही प्रोफाइल फोटो यानी डीपी लगा रखी थी। वरिष्ठ अधिकारी ने जैसे ही मोबाइल स्क्रीन पर अपने बॉस की तस्वीर देखी, उन्हें रत्ती भर भी अंदेशा नहीं हुआ कि यह कोई जालसाज हो सकता है। ठग ने खुद को नरेश गुजराल के रूप में पेश करते हुए बेहद कड़क और पेशेवर अंदाज में अधिकारी से चैट शुरू की और कंपनी के काम का हवाला देते हुए एक अज्ञात बैंक खाते में तुरंत एक बड़ी रकम ट्रांसफर करने का सख्त निर्देश दे दिया।

    व्हाट्सएप पर मिले इस कथित निर्देश के बाद अधिकारी ने बिना कोई प्रामाणिक जांच किए तुरंत पहली किश्त के रूप में करीब 1.5 करोड़ रुपये आरटीजीएस के माध्यम से बताए गए बैंक खाते में स्थानांतरित कर दिए। ठगों का हौसला यहीं नहीं रुका; उन्होंने अधिकारी के इसी अटूट भरोसे का फायदा उठाते हुए अगले चार दिनों तक लगातार सिलसिलेवार ढंग से अलग-अलग बहानों से और पैसों की मांग की। बॉस की डीपी और उनके बात करने के लहजे से पूरी तरह आश्वस्त अधिकारी लगातार ट्रांजैक्शन करता रहा, जिसके चलते महज 96 घंटों के भीतर कंपनी के खाते से कुल 7.8 करोड़ रुपये ठगों के हवाले कर दिए गए।

    इस अभूतपूर्व वित्तीय धोखाधड़ी के दौरान सुरक्षा के तमाम दावों के बीच बैंक और कंपनी के मुख्य वित्तीय अधिकारी यानी सीएफओ भी गच्चा खा गए। लगातार हो रहे करोड़ों रुपये के इस बड़े लेन-देन को देखकर बैंक प्रबंधन को कुछ संदेह अवश्य हुआ था, जिसके बाद उन्होंने तत्काल कंपनी के सीएफओ से इस संबंध में संपर्क भी साधा। हालांकि, सीएफओ ने भी आंतरिक रूप से बिना किसी क्रॉस-वेरिफिकेशन के यह मान लिया कि यह वित्तीय निर्देश स्वयं नरेश गुजराल की ओर से ही जारी किए गए हैं, जिसके कारण यह संदिग्ध ट्रांजैक्शन बिना किसी रुकावट के जारी रहा।

    इस पूरे काले खेल का पर्दाफाश तब हुआ जब 16 जून को लगातार पैसे भेजने से परेशान वरिष्ठ अधिकारी को कुछ गंभीर संदेह हुआ। उन्होंने सीधे नरेश गुजराल की बेटी दीक्षा गुजराल से संपर्क किया और उन्हें बताया कि उनके पिता लगातार बड़ी रकम ट्रांसफर करने के निर्देश दे रहे हैं। यह सुनते ही दीक्षा के पैरों तले जमीन खिसक गई क्योंकि नरेश गुजराल ने ऐसा कोई भी संदेश नहीं भेजा था। परिवार को तुरंत साइबर फ्रॉड का अहसास हुआ और उन्होंने बिना समय गंवाए उसी दिन दिल्ली पुलिस में ई-एफआईआर दर्ज कराई। दिल्ली पुलिस की स्पेशल साइबर टीम आईएफएसओ ने मामले की गंभीरता को देखते हुए तत्काल तकनीकी जांच शुरू की और उस बैंक खाते को ट्रैक कर लिया, जिसमें पैसे भेजे गए थे। पुलिस की तत्परता के चलते ठगी गई कुल राशि में से करीब 4 करोड़ रुपये को उसी खाते में समय रहते फ्रीज कर दिया गया है, जबकि शेष राशि की रिकवरी और आरोपियों की धरपकड़ के लिए देशव्यापी छापेमारी जारी है।

  • बगैर SIM के नहीं चलेगा WhatsApp… 1 मार्च से लागू होगा सरकार का ये नया नियम

    बगैर SIM के नहीं चलेगा WhatsApp… 1 मार्च से लागू होगा सरकार का ये नया नियम


    नई दिल्ली।
    अगर आप वाट्सएप (WhatsApp) यूजर हैं, तो यह खबर आपके काम की है। दरअसल केंद्र सरकार ने एक बार फिर साफ कर दिया है कि SIM-Binding नियम में कोई बदलाव या ढील नहीं दी जाएगी। यह नियम WhatsApp, Telegram, Signal मैसेजिंग ऐप्स लागू होते हैं, और इसका लक्ष्य डिजिटल सुरक्षा को मजबूत बनाना है। यानी 1 मार्च से यह नियम लागू रहेगा और कंपनियों को इसे मानना ही होगा। सरकार के अनुसार, इन ऐप्स को एक्टिव SIM कार्ड से लगातार जुड़े रहना होगा, जिससे यह कन्फर्म किया जा सके कि व्हाट्सऐप उपयोग होने वाला नंबर असली और एक्टिव है। अगर SIM हटाई जाती है या इनएक्टिव होती है, तो ऐप की सेवाएं उस डिवाइस पर काम नहीं करेंगी।


    SIM-Binding क्या है?

    जिस मोबाइल नंबर से आपने WhatsApp अकाउंट बनाया है, वही SIM आपके फोन में एक्टिव रहनी चाहिए। अगर वह SIM आपके फोन में नहीं है या बंद हो गई है, तो WhatsApp ठीक से काम नहीं करेगा। अब तक मैसेजिंग ऐप्स में 6-डिजिट OTP डालकर एक बार लॉगिन होने के बाद SIM की मौजूदगी लगातार नहीं चेक होती थी। नया नियम यह बदलने वाला है अब हर समय SIM को एक्टिव और फोन में मौजूद होना जरूरी होगा। सरकार ने यह बदलाव इसलिए किया है क्योंकि वह डिजिटल धोखाधड़ी, फर्जी नंबरों का दुरुपयोग और साइबर अपराध को रोकने पर जोर दे रही है। जब हर अकाउंट एक वेरिफाइड SIM से जुड़ा होगा, तो फ्रॉड और फेक अकाउंट्स को पहचानना आसान हो जाएगा।


    1 मार्च 2026 के बाद कोई ढील नहीं

    डिपार्टमेंट ऑफ़ टेलीकम्यूनिकेशंस (DoT) ने SIM-Binding नियम को 28 नवंबर 2025 को जारी किया था और कंपनियों को इसे पूरा करने के लिए 90 दिन का समय दिया गया है। इसका मतलब है कि 1 मार्च 2026 तक सभी मैसेजिंग प्लेटफॉर्म को इस सिस्टम को लागू करना पड़ेगा। सरकार ने यह भी साफ किया है कि अलग-अलग डिवाइस पर लॉगिन किए गए Web या Desktop के लिए भी छह घंटे का ऑटो लॉग-आउट नियम भी लागू रहेगा। इसका यह मतलब है कि अगर आप कंप्यूटर या वेब पर WhatsApp चला रहे हैं, तो हर छह घंटे में आपको QR कोड से फिर से लॉगिन करना पड़ेगा।


    आम लोगों पर पड़ेगा ये असर

    अगर आपका नंबर एक्टिव है और वही SIM आपके फोन में लगी है, तो आपको ज्यादा चिंता करने की जरूरत नहीं है। आपका WhatsApp सामान्य तरीके से चलता रहेगा।लेकिन अगर आपने फोन से SIM निकाल दी या वहीं SIM दूसरे फोन में डाल दी तो आपका व्हट्सऐप टेम्पररी इनएक्टिव हो जाएगा। साथ ही आपका नंबर बंद हो गया (रिचार्ज न होने की वजह से) तो WhatsApp दोबारा वेरिफिकेशन मांग सकता है या बंद भी हो सकता है। दरअसल केंद्र सरकार का मानना है कि अगर हर अकाउंट एक एक्टिव SIM से जुड़ा होगा, तो फर्जी नंबर, स्कैम और साइबर अपराधों के खिलाफ लड़ाई और मजबूती से लड़ी जा सकती है।

  • रूस ने व्हाट्सएप को किया पूरी तरह ब्लॉक… स्थानीय कानूनों के उल्लंघन का आरोप

    रूस ने व्हाट्सएप को किया पूरी तरह ब्लॉक… स्थानीय कानूनों के उल्लंघन का आरोप


    मास्को।
    रूस (Russia) ने मेटा (Meta) के स्वामित्व वाले मैसेजिंग प्लेटफॉर्म व्हाट्सएप (Messaging Platform Whatsapp) को स्थानीय कानूनों के कथित उल्लंघन के आरोप में ब्लॉक कर दिया है। क्रेमलिन ने गुरुवार को समाचार एजेंसी एएफपी से इसकी पुष्टि करते हुए कहा कि यह निर्णय घरेलू कानूनों के अनुपालन न करने के कारण लिया गया है। क्रेमलिन के प्रवक्ता दिमित्री पेस्कोव (Dmitry Peskov) ने प्रतिबंध के बारे में पूछे जाने पर कहा कि वास्तव में ऐसा निर्णय लिया गया और उसे लागू किया गया है। इस दौरान उन्होंने आरोप लगाया कि व्हाट्सएप ने रूसी कानून के मानदंडों और अक्षरशः पालन करने में अनिच्छा दिखाई, जिसके बाद यह कदम उठाया गया।

    इससे पहले व्हाट्सएप ने दावा किया था कि रूसी अधिकारी ऐप तक पहुंच को सीमित करने की कोशिश कर रहे हैं। कंपनी का यह बयान टेलीग्राम के संस्थापक पावेल दुरोव द्वारा मॉस्को पर अपने प्लेटफॉर्म की पहुंच बाधित करने का आरोप लगाने के तुरंत बाद आया।

    सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म एक्स पर जारी एक बयान में व्हाट्सएप ने कहा था कि आज रूसी सरकार ने लोगों को सरकारी निगरानी ऐप की ओर धकेलने के प्रयास में व्हाट्सएप को पूरी तरह से ब्लॉक करने की कोशिश की। 10 करोड़ से अधिक उपयोगकर्ताओं को निजी और सुरक्षित संचार से अलग करने का प्रयास एक पिछड़ा कदम है और इससे रूस में लोगों की सुरक्षा में कमी आएगी। हम उपयोगकर्ताओं को जोड़े रखने के लिए हर संभव प्रयास जारी रखेंगे।

    रूसी समाचार एजेंसी TASS से बातचीत में पेस्कोव ने संकेत दिया कि यदि इसकी मूल कंपनी मेटा स्थानीय नियमों का पालन करती है तो प्लेटफॉर्म को बहाल किया जा सकता है। उन्होंने कहा कि यह रूसी कानूनों के अनुपालन का मामला है। यदि मेटा अनुपालन करती है, तो वह रूसी अधिकारियों के साथ बातचीत करेगी और फिर समझौते की संभावना बन सकती है। उन्होंने यह भी स्पष्ट किया कि अगर कंपनी अपने रुख पर कायम रहती है और रूसी कानूनों का पालन करने में अनिच्छा दिखाती है, तो बहाली की संभावना नहीं होगी।

    इस बीच सरकारी एजेंसी TASS ने रिपोर्ट दी कि रूस के दूरसंचार नियामक Roskomnadzor ने राष्ट्रीय कानून के कथित उल्लंघन के आरोप में व्हाट्सएप की गति धीमी करने की प्रक्रिया शुरू कर दी है। रूसी अधिकारियों का दावा है कि इस प्लेटफॉर्म का इस्तेमाल आतंकवादी गतिविधियों के आयोजन और क्रियान्वयन के लिए किया गया है। साथ ही इसे रूसी नागरिकों को निशाना बनाकर धोखाधड़ी और जबरन वसूली के प्रमुख माध्यमों में से एक बताया गया है।

    रिपोर्टों के अनुसार, सरकार समर्थित विकल्प ‘मैक्स’ नामक ऐप को रूस में बेचे जाने वाले सभी नए स्मार्टफोन और टैबलेट में पहले से इंस्टॉल करना अनिवार्य किया गया है। इस ऐप के जरिए उपयोगकर्ता संदेश भेजने, पैसे ट्रांसफर करने और ऑडियो-वीडियो कॉल करने जैसी सुविधाएं प्राप्त कर सकते हैं।

  • वॉट्सऐप की प्राइवेसी नीति पर छिड़ा विवाद… SC ने लगाई कड़ी फटकार… कहा- नागरिकों की निजता सर्वोपरि

    वॉट्सऐप की प्राइवेसी नीति पर छिड़ा विवाद… SC ने लगाई कड़ी फटकार… कहा- नागरिकों की निजता सर्वोपरि


    नई दिल्ली।
    क्या वाकई आपकी चैट पूरी तरह सुरक्षित है? इस सवाल के बीच भारत के सर्वोच्च न्यायालय (Supreme Court.) ने मेटा (Meta) के स्वामित्व वाले इंस्टेंट मैसेजिंग प्लेटफॉर्म वॉट्सऐप (Instant messaging platform WhatsApp.) को कड़ी फटकार लगाई है। अदालत ने स्पष्ट शब्दों में कहा है कि डेटा साझा करने के नाम पर देश के नागरिकों की निजता से कोई समझौता स्वीकार नहीं किया जा सकता। सुप्रीम कोर्ट ने वॉट्सऐप और उसकी पैरेंट कंपनी मेटा की डेटा-शेयरिंग व्यवस्था और प्राइवेसी पॉलिसी पर गंभीर नाराजगी जाहिर की है।

    कोर्ट ने दो टूक कहा कि भारतीय नागरिकों के प्राइवेसी अधिकारों में किसी भी तरह का हस्तक्षेप बर्दाश्त नहीं होगा। वॉट्सऐप डेटा साझा करने की आड़ में निजी जानकारी का गलत इस्तेमाल नहीं कर सकता। मुख्य न्यायाधीश सूर्यकांत की अध्यक्षता वाली पीठ तीन फरवरी को मेटा की याचिका पर सुनवाई कर रही थी। गौरतलब है कि भारतीय प्रतिस्पर्धा आयोग (सीसीआई) ने वर्ष 2024 में वॉट्सऐप की 2021 की प्राइवेसी पॉलिसी को लेकर 213.14 करोड़ रुपये का जुर्माना लगाया था, जिसे नेशनल कंपनी लॉ अपीलेट ट्रिब्यूनल (एनसीएलएटी) ने भी सही ठहराया।

    सुप्रीम कोर्ट ने वॉट्सऐप की तथाकथित “टेक इट ऑर लीव इट” प्राइवेसी नीति पर भी सवाल उठाए। अदालत का कहना है कि आम यूजर्स इन जटिल शर्तों को ठीक से समझ ही नहीं पाते। कोर्ट ने चेतावनी देते हुए कहा कि कंपनी को भारतीय कानून और संविधान का पालन करना ही होगा, अन्यथा उसे देश छोड़ने तक का विकल्प चुनना पड़ सकता है। मामले की गंभीरता को देखते हुए इलेक्ट्रॉनिक्स और सूचना प्रौद्योगिकी मंत्रालय को भी याचिका में पक्षकार बनाने का निर्देश दिया गया है। अगली सुनवाई 9 फरवरी को तय की गई है।


    क्या है वॉट्सऐप की 2021 की प्राइवेसी पॉलिसी?

    वॉट्सऐप ने 8 फरवरी 2021 को अपनी नई प्राइवेसी पॉलिसी लागू की थी। कंपनी का दावा है कि उसका एंड-टू-एंड एन्क्रिप्शन पूरी तरह सुरक्षित है, यानी यूजर की चैट, वॉइस कॉल और तस्वीरें मेटा नहीं देख सकता। अगर रिसीवर का फोन अस्थायी रूप से बंद हो या वह ऑफलाइन हो, तो संदेश अधिकतम 30 दिनों तक वॉट्सऐप के सर्वर पर एन्क्रिप्टेड रूप में सुरक्षित रखे जाते हैं ताकि बाद में डिलीवरी हो सके।

    हालांकि चैट कंटेंट निजी रहता है, लेकिन वॉट्सऐप यूजर के “मेटाडाटा” तक पहुंच रखता है। यूजर्स के सामने केवल दो ही विकल्प होते हैं—इन शर्तों को स्वीकार करना या ऐप का इस्तेमाल बंद कर देना।

    एआई आधारित साइबर सुरक्षा और डेटा एनालिटिक्स कंपनी इनेफ्यू लैब्स के को-फाउंडर और सीईओ तरुण विज के मुताबिक, वॉट्सऐप मेटाडाटा और व्यवहारिक संकेतों का उपयोग करता है। इसमें यह जानकारी शामिल होती है कि यूजर किससे, कितनी बार और किस समय बात करता है, उसका डिवाइस, लोकेशन, प्रोफाइल फोटो, ग्रुप मेंबरशिप और कॉन्टैक्ट लिस्ट। इसी आधार पर यूजर प्रोफाइलिंग की जाती है। मेटा इस डेटा को इंस्टाग्राम, फेसबुक और यूट्यूब जैसे अन्य प्लेटफॉर्म्स के साथ साझा कर सकता है, जिससे डेटा लीक और संवेदनशील जानकारी के दुरुपयोग का खतरा बढ़ जाता है।

    हालांकि यूरोप में यूरोपीय डेटा संरक्षण नियम (जीडीपीआर) के चलते ऐसी डेटा शेयरिंग पर सख्त सीमाएं हैं। तरुण विज बताते हैं कि वॉट्सऐप पर की गई गतिविधियां अन्य प्लेटफॉर्म्स पर दिखने वाले विज्ञापनों को प्रभावित कर सकती हैं। ऐसे में सुरक्षा इस बात पर निर्भर करती है कि यूजर अपनी कितनी जानकारी साझा करना चाहता है।


    पहले भी घिर चुका है वॉट्सऐप

    वॉट्सऐप ने अपनी सफाई में कहा है कि उसकी मैसेजिंग सेवा मुफ्त है और दो लोगों के बीच की निजी चैट्स को कंपनी नहीं पढ़ती। वॉट्सऐप और मेटा की ओर से पेश वरिष्ठ वकील मुकुल रोहतगी ने दलील दी कि डेटा केवल यूजर की सहमति से ही साझा किया जाता है और प्राइवेसी पॉलिसी में बदलाव अंतरराष्ट्रीय मानकों के अनुरूप हैं।

    यह पहला मौका नहीं है जब वॉट्सऐप की नीतियों पर सवाल उठे हों। वर्ष 2021 में आयरलैंड के डेटा रेगुलेटर ने डेटा पारदर्शिता के नियमों के उल्लंघन पर वॉट्सऐप पर 225 मिलियन यूरो का जुर्माना लगाया था। जर्मनी की लाइपजिग रीजनल कोर्ट भी मेटा को दंडित कर चुकी है। अदालत ने कहा था कि मेटा के पास ऐसे टूल्स हैं जिनके जरिए वह यूजर्स के ऑनलाइन व्यवहार को ट्रैक कर टार्गेटेड विज्ञापनों से अरबों डॉलर कमाता है।


    सुरक्षा खामियों के आरोप

    पिछले वर्ष वॉट्सऐप के पूर्व सुरक्षा प्रमुख अत्ताउल्लाह बैग ने अमेरिका में मेटा के खिलाफ मुकदमा दायर किया था। उन्होंने आरोप लगाया कि प्लेटफॉर्म पर रोजाना लाखों अकाउंट हैक हो रहे थे और सुरक्षा खामियों के चलते कर्मचारी यूजर्स का निजी डेटा देख सकते थे। बैग के अनुसार, बार-बार चेतावनी देने के बावजूद मेटा ने ठोस कदम नहीं उठाए।

    साल 2025 में शोधकर्ताओं ने “जीरो-क्लिक” हमलों का खुलासा किया, जिनमें बिना किसी क्लिक के वॉट्सऐप के जरिए आईफोन और मैक डिवाइस हैक कर लिए गए। इन हमलों में मैकओएस और आईओएस में इमेज प्रोसेसिंग की खामी और वॉट्सऐप के डिवाइस लिंकिंग फीचर की कमजोरी सामने आई।

    ऑस्ट्रिया के स्वतंत्र शोधकर्ताओं के एक समूह ने भी वॉट्सऐप में ऐसी कमी खोजी, जिसके जरिये 350 करोड़ फोन नंबर, प्रोफाइल फोटो, डिवाइस जानकारी, टाइमस्टैम्प और बिजनेस डिटेल्स तक पहुंच संभव हो गई थी।


    भारत में कानूनी स्थिति

    राष्ट्रीय सुरक्षा विशेषज्ञ अमित दुबे बताते हैं कि वर्ष 2019 में वॉट्सऐप के जरिए पेगासस स्पायवेयर ने केवल एक मिस्ड कॉल से कई भारतीयों के फोन हैक कर लिए थे। यह स्पायवेयर इजरायली कंपनी एनएसओ ग्रुप ने विकसित किया था। इस मामले में वॉट्सऐप ने एनएसओ ग्रुप के खिलाफ मुकदमा दायर किया था।

    अमित दुबे के अनुसार, हाल के वर्षों में वॉट्सऐप ने चैट समरी और ऑटो-रिप्लाई जैसे एआई आधारित फीचर्स भी जोड़े हैं, जो यूजर की सहमति से सीमित परिस्थितियों में काम करते हैं। ऐसे में खासकर निजी, चिकित्सकीय या कानूनी बातचीत के दौरान सतर्क रहना जरूरी है।

    भारत में अभी बड़ी टेक कंपनियों को नियंत्रित करने के लिए सख्त और प्रभावी कानूनों की कमी है। डिजिटल पर्सनल डेटा प्रोटेक्शन (डीपीडीपी) अधिनियम मौजूद है, लेकिन यह पूरी तरह 13 मई 2027 से लागू होगा। ऐसे में नागरिकों के पास अदालत का रास्ता ही मुख्य विकल्प बचता है। पुट्टस्वामी फैसले में सुप्रीम कोर्ट पहले ही निजता को मौलिक अधिकार घोषित कर चुका है।


    यूजर क्या करें?

    वरिष्ठ सुप्रीम कोर्ट वकील पवन दुग्गल के अनुसार, आज कई सरकारी और निजी संस्थानों के आधिकारिक ग्रुप्स वॉट्सऐप पर चल रहे हैं, जो चिंता का विषय है। स्पष्ट कानूनी ढांचे के अभाव में डेटा सुरक्षा की जिम्मेदारी काफी हद तक यूजर पर ही है। वे सलाह देते हैं कि ऐप इस्तेमाल करने से पहले उसकी शर्तें और नीतियां ध्यान से पढ़ी जाएं।

    टेकयुगो के सीईओ अभिनव सिंह का कहना है कि प्राइवेसी को लेकर चिंतित यूजर्स सिग्नल, टेलीग्राम या आईफोन पर आईमैसेज जैसे विकल्पों पर विचार कर सकते हैं। सिग्नल विज्ञापनों के लिए डेटा का इस्तेमाल नहीं करता और टेलीग्राम में “सीक्रेट चैट” का विकल्प मिलता है। हालांकि, लोकप्रियता के मामले में ये प्लेटफॉर्म अभी भी वॉट्सऐप से पीछे हैं।