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  • फ्रेशर्स ही नहीं अनुभवी प्रोफेशनल्स की भी बढ़ी मांग, 13 साल से ज्यादा अनुभव वालों की भर्ती में 22% उछाल

    फ्रेशर्स ही नहीं अनुभवी प्रोफेशनल्स की भी बढ़ी मांग, 13 साल से ज्यादा अनुभव वालों की भर्ती में 22% उछाल


    नई दिल्ली। भारत के रोजगार बाजार से अक्टूबर 2026 में अच्छी खबर सामने आई है। देश में व्हाइट-कॉलर यानी ऑफिस और पेशेवर क्षेत्र की नौकरियों में भर्ती गतिविधियां सालाना आधार पर 14 प्रतिशत बढ़ गई हैं। रोजगार वेबसाइट नौकरी की ताजा रिपोर्ट के मुताबिक मैन्युफैक्चरिंग ऑटोमोबाइल उत्पादन और आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस यानी एआई से जुड़े कौशलों की बढ़ती मांग ने नौकरी बाजार को मजबूती दी है। इस दौरान वरिष्ठ अनुभव वाले पेशेवरों के साथ फ्रेशर्स के लिए भी रोजगार के अवसर बढ़े हैं। रिपोर्ट के आंकड़े संकेत देते हैं कि कंपनियां अपनी उत्पादन क्षमता बढ़ाने और तकनीकी जरूरतों को पूरा करने के लिए नई भर्तियों पर जोर दे रही हैं।

    रिपोर्ट के अनुसार अक्टूबर 2026 में जॉबस्पीक इंडेक्स बढ़कर 2836 पर पहुंच गया जबकि अक्टूबर 2025 में यह 2480 था। इस तरह भर्ती गतिविधियों में सालाना आधार पर 14 प्रतिशत की वृद्धि दर्ज की गई। हालांकि इस बढ़ोतरी के पीछे अनुकूल आधार प्रभाव भी एक वजह रहा। पिछले साल दिवाली अक्टूबर में पड़ने के कारण उस महीने भर्ती गतिविधियां अपेक्षाकृत धीमी थीं। इस बार कंपनियों की ओर से भर्ती में बेहतर रफ्तार देखने को मिली।

    उद्योगों के प्रदर्शन पर नजर डालें तो ऑटोमोबाइल सेक्टर सबसे आगे रहा। इस क्षेत्र में भर्ती 36 प्रतिशत बढ़ी। इसके बाद बीपीओ और आईटीईएस क्षेत्र में 17 प्रतिशत तथा बैंकिंग एवं वित्तीय सेवाओं में 16 प्रतिशत की वृद्धि दर्ज की गई। सभी उद्योगों को मिलाकर उत्पादन और मैन्युफैक्चरिंग से जुड़ी नौकरियों की मांग में 39 प्रतिशत का उछाल आया। इससे स्पष्ट है कि कंपनियां उत्पादन और औद्योगिक गतिविधियों को विस्तार देने के लिए कर्मचारियों की संख्या बढ़ा रही हैं।

    इंफो एज इंडिया के प्रबंध निदेशक और सीईओ हितेश ओबेरॉय ने कहा कि मैन्युफैक्चरिंग कंपनियां अपनी क्षमता का विस्तार कर रही हैं और एआई कौशलों की मांग लगातार मजबूत बनी हुई है। उनके अनुसार मौजूदा भर्ती रुझान मजबूत व्यावसायिक बुनियाद और वास्तविक मांग को दर्शाते हैं। तकनीक के बढ़ते इस्तेमाल के साथ ऐसे कर्मचारियों की जरूरत बढ़ रही है जो उत्पादन प्रक्रियाओं के साथ आधुनिक डिजिटल तकनीकों को भी समझते हों।

    ऑटोमोबाइल उद्योग में भी भर्ती के आंकड़े काफी दिलचस्प रहे। उत्पादन और मैन्युफैक्चरिंग से जुड़ी भूमिकाओं में 41 प्रतिशत की बढ़ोतरी हुई। वहीं अनुसंधान एवं विकास यानी आरएंडडी में भर्ती 53 प्रतिशत और खरीद तथा सप्लाई चेन से जुड़े पदों पर 50 प्रतिशत बढ़ी। इसके मुकाबले बिक्री और व्यवसाय विकास से जुड़ी नौकरियों में केवल 7 प्रतिशत की वृद्धि हुई। इससे पता चलता है कि वाहन कंपनियां डिजाइन उत्पादन और आपूर्ति व्यवस्था को मजबूत करने पर ज्यादा ध्यान दे रही हैं।

    औद्योगिक उत्पाद और भारी मशीनरी क्षेत्र में उत्पादन से जुड़ी भर्ती 40 प्रतिशत बढ़ी जबकि गुणवत्ता आश्वासन के पदों पर 41 प्रतिशत की वृद्धि हुई। निर्माण इंजीनियरिंग सीमेंट और धातु उद्योग में भी उत्पादन संबंधी नौकरियों में 33 प्रतिशत का इजाफा दर्ज किया गया। इस क्षेत्र में प्रोजेक्ट और प्रोग्राम मैनेजमेंट की भर्ती 25 प्रतिशत तथा साइट इंजीनियरिंग की नौकरियां 20 प्रतिशत बढ़ीं। एफएमसीजी क्षेत्र में कुल भर्ती वृद्धि 6 प्रतिशत रही लेकिन उत्पादन से जुड़े पदों में 40 प्रतिशत और खरीद संबंधी भूमिकाओं में 20 प्रतिशत की बढ़ोतरी हुई। यहां बिक्री और व्यवसाय विकास से जुड़ी भर्ती 5 प्रतिशत घट गई।

    अनुभव के आधार पर देखें तो वरिष्ठ पेशेवरों की मांग सबसे अधिक रही। 13 से 16 वर्ष और 16 वर्ष से अधिक अनुभव वाले कर्मचारियों की भर्ती में 22-22 प्रतिशत की वृद्धि दर्ज की गई। वहीं फ्रेशर्स के लिए भर्ती 15 प्रतिशत बढ़ी। 8 से 12 वर्ष के अनुभव वाले पेशेवरों की मांग में 14 प्रतिशत और 4 से 7 वर्ष अनुभव वाले कर्मचारियों की भर्ती में 11 प्रतिशत की वृद्धि हुई।

    कुल मिलाकर अक्टूबर के आंकड़े बताते हैं कि भारत में रोजगार बाजार का रुझान मैन्युफैक्चरिंग तकनीकी कौशल और अनुभवी कर्मचारियों की ओर मजबूत हो रहा है। एआई और औद्योगिक उत्पादन से जुड़े कौशल आने वाले समय में नौकरी पाने के लिहाज से महत्वपूर्ण साबित हो सकते हैं।

  • एआई से नौकरियां खत्म होने की आशंकाओं पर बदला नजरिया, सैम ऑल्टमैन बोले- इंसानों की जगह लेना मशीनों के लिए आसान नहीं

    एआई से नौकरियां खत्म होने की आशंकाओं पर बदला नजरिया, सैम ऑल्टमैन बोले- इंसानों की जगह लेना मशीनों के लिए आसान नहीं

    नई दिल्ली । आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस को लेकर पिछले कुछ वर्षों से दुनिया भर में यह बहस तेज रही है कि क्या भविष्य में मशीनें इंसानों की नौकरियों की जगह ले लेंगी। विशेष रूप से दफ्तरों और पेशेवर क्षेत्रों से जुड़ी व्हाइट कॉलर नौकरियों को लेकर व्यापक स्तर पर चिंता जताई जाती रही है। तकनीक के तेजी से विस्तार के साथ यह आशंका भी सामने आई थी कि एआई के कारण बड़ी संख्या में रोजगार समाप्त हो सकते हैं। हालांकि अब इस विषय पर एक महत्वपूर्ण और संतुलित दृष्टिकोण सामने आया है, जिसमें माना गया है कि शुरुआती अनुमान वास्तविक परिस्थितियों से काफी अलग साबित हुए हैं।

    एआई क्षेत्र के प्रमुख चेहरों में शामिल सैम ऑल्टमैन ने रोजगार पर तकनीक के प्रभाव को लेकर अपनी पहले की सोच में बदलाव की बात कही है। उन्होंने स्वीकार किया कि शुरुआत में उन्हें यह उम्मीद थी कि आधुनिक एआई तकनीक के आने के बाद प्रवेश स्तर की व्हाइट कॉलर नौकरियां तेजी से प्रभावित होंगी और कई भूमिकाएं समाप्त हो सकती हैं। उस समय ऐसा माना जा रहा था कि मशीनें कई नियमित और कार्यालयी कार्यों को पूरी तरह अपने नियंत्रण में ले लेंगी। लेकिन समय के साथ जो तस्वीर सामने आई, वह अपेक्षाओं से काफी अलग दिखाई दी।

    उन्होंने कहा कि एआई के प्रभाव को लेकर उनका शुरुआती अनुमान वास्तविकता से अधिक गंभीर था। उनके अनुसार, तकनीकी विकास की गति और एआई क्षमताओं को लेकर जो आकलन किया गया था, वह काफी हद तक सही साबित हुआ, लेकिन सामाजिक और आर्थिक प्रभावों को लेकर समझ पूरी तरह सटीक नहीं रही। रोजगार के क्षेत्र में बदलाव जरूर हुए हैं, लेकिन वे उतने व्यापक और तीव्र नहीं रहे जितनी पहले संभावना जताई जा रही थी।

    उन्होंने यह भी माना कि शुरुआती दौर में नौकरी खत्म होने की आशंकाएं वास्तविक परिस्थितियों को देखते हुए स्वाभाविक थीं। तकनीकी बदलावों के दौरान अक्सर यह डर पैदा होता है कि मशीनें मनुष्यों की भूमिका को कम कर देंगी, लेकिन व्यावहारिक स्तर पर कई ऐसे पहलू सामने आते हैं जिन्हें तकनीक पूरी तरह प्रतिस्थापित नहीं कर पाती। यही कारण है कि अब रोजगार बाजार की तस्वीर पहले से अधिक संतुलित दिखाई दे रही है।

    दुनिया की कई बड़ी कंपनियां पहले ही यह संकेत दे चुकी हैं कि एआई आधारित उपकरणों और स्वचालन ने कुछ कार्यप्रणालियों को बदलना शुरू कर दिया है। कुछ पदों की प्रकृति बदली है और कई जिम्मेदारियों का स्वरूप भी नया हुआ है। इसके बावजूद विशेषज्ञ मानते हैं कि हर तकनीकी बदलाव के साथ नए अवसर भी पैदा होते हैं और कार्यक्षेत्र नई आवश्यकताओं के अनुरूप विकसित होता है।

    सैम ऑल्टमैन ने मानवीय संपर्क को रोजगार का सबसे महत्वपूर्ण पहलू बताया। उनका कहना है कि कई पेशे केवल तकनीकी दक्षता पर आधारित नहीं होते, बल्कि उनमें संवेदनशीलता, समझ, संवाद क्षमता और मानवीय व्यवहार की भी बड़ी भूमिका होती है। उन्होंने अपने अनुभव साझा करते हुए कहा कि कुछ कार्यों में एआई आधारित प्रतिक्रियाओं का उपयोग करने के बाद उन्हें महसूस हुआ कि इंसान द्वारा दी गई प्रतिक्रिया अधिक प्रभावी और स्वाभाविक होती है। इससे यह स्पष्ट होता है कि तकनीक सहायक भूमिका निभा सकती है, लेकिन हर परिस्थिति में इंसानी स्थान लेना उसके लिए आसान नहीं होगा।

  • माइक्रोसॉफ्ट AI के CEO ने मचाई दुनिया में हलचल… बोले- 12 से 18 माह में व्हाइट-कॉलर जॉब्स की जगह ले लेगा AI

    माइक्रोसॉफ्ट AI के CEO ने मचाई दुनिया में हलचल… बोले- 12 से 18 माह में व्हाइट-कॉलर जॉब्स की जगह ले लेगा AI


    नई दिल्ली।
    माइक्रोसॉफ्ट एआई (Microsoft AI) के सीईओ मुस्तफा सुलेमान (CEO Mustafa Suleiman) का ताजा बयान एआई की दुनिया में तहलका मचा रहा है। फाइनेंशियल टाइम्स को दिए एक इंटरव्यू में सुलेमान ने चेतावनी दी है कि कृत्रिम बुद्धिमत्ता (AI) अगले 12 से 18 महीनों के भीतर अधिकांश व्हाइट-कॉलर नौकरियों (White-Collar Jobs) के ज्यादातर कामों को पूरी तरह से स्वचालित (ऑटोमेट) कर देगी। उन्होंने कहा कि व्हाइट-कॉलर जॉब्स, यानी वे काम जो लोग कंप्यूटर के सामने बैठकर करते हैं, चाहे वो वकील हों, चार्टर्ड अकाउंटेंट, प्रोजेक्ट मैनेजर या मार्केटिंग प्रोफेशनल, इनमें से अधिकांश टास्क अगले 12-18 महीनों में एआई द्वारा पूरी तरह ऑटोमेट हो जाएंगे।


    एआई की मदद से कोडिंग

    उन्होंने सॉफ्टवेयर इंजीनियरिंग का उदाहरण देते हुए बताया कि अब इंजीनियर एआई की मदद से अपना अधिकांश कोड बनवा रहे हैं। उनकी भूमिका अब ‘रणनीतिक’ कार्यों जैसे आर्किटेक्चर डिजाइन करने और उत्पादन में लाने की ओर स्थानांतरित हो गई है। सुलेमान के अनुसार, यह बदलाव पिछले छह महीनों में ही देखने को मिला है। इसके अलावा, उन्होंने कहा कि आज मौजूद एआई मॉडल अधिकांश मानव कोडर्स से बेहतर कोडिंग कर सकते हैं, शायद अब तक के सभी कोडर्स से भी बेहतर। उन्होंने जोर देकर कहा कि नए एआई मॉडल बनाना अब ‘पॉडकास्ट बनाने या ब्लॉग लिखने’ जितना आसान हो जाएगा। संस्थान और संगठन अपनी जरूरतों के अनुसार खुद एआई डिजाइन कर सकेंगे। इस दौरान उन्होंने यह भी बताया कि अगले दो से तीन वर्षों में एआई एजेंट बड़े संस्थानों के वर्कफ्लो को और भी कुशलता से संभालने में सक्षम हो जाएंगे।


    माइक्रोसॉफ्ट का सुपरइंटेलिजेंस मिशन

    अपने विजन के बारे में बात करते हुए सुलेमान ने कहा कि माइक्रोसॉफ्ट का लक्ष्य एक सुपरइंटेलिजेंस का निर्माण करना है। उन्होंने बताया कि कुछ महीने पहले कंपनी ने ओपनएआई के साथ दीर्घकालिक समझौते को फिर से बातचीत करके 2032 तक आईपी लाइसेंस बढ़ा दिया है। उन्होंने कहा कि हमने यह भी तय किया है कि अब वास्तविक एआई आत्मनिर्भरता हासिल करने का समय आ गया है। सुलेमान ने माइक्रोसॉफ्ट के अपने स्वतंत्र बेसिक एआई मॉडल विकसित करने की योजना पर चर्चा की, जिसमें मजबूत प्रशिक्षण टीम होगी और डेटा को व्यवस्थित व क्रमबद्ध तरीके से तैयार किया जाएगा।

    माइक्रोसॉफ्ट एआई प्रमुख की ये टिप्पणियां ऐसे समय में आई हैं जब एआई के कारण मानव कार्यों के प्रतिस्थापित होने और बड़े पैमाने पर छंटनी की चिंताएं बढ़ रही हैं। इससे पहले अमेजन ने एक ब्लॉग पोस्ट में कहा था कि एआई से जुड़ी बढ़ती प्रतिस्पर्धा के कारण लगभग 16000 कंपनियों की नौकरियां प्रभावित हो सकती हैं। पिछले साल माइक्रोसॉफ्ट ने एक ब्लॉग पोस्ट में बताया था कि उसने ओपनएआई के साथ नए समझौते पर हस्ताक्षर किए हैं, जो दोनों संगठनों के बीच मजबूत होती साझेदारी पर आधारित है। इस समझौते के तहत ओपनएआई माइक्रोसॉफ्ट का प्रमुख मॉडल पार्टनर बना रहेगा और दोनों कंपनियों के बीच अनन्य बौद्धिक संपदा अधिकारों का विस्तार होगा।