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  • हीट स्ट्रोक से बच्चों की सुरक्षा: WHO ने बताए खतरनाक लक्षण और बचाव के तरीके

    हीट स्ट्रोक से बच्चों की सुरक्षा: WHO ने बताए खतरनाक लक्षण और बचाव के तरीके



    मध्य प्रदेश । देश के कई हिस्सों में इस समय भीषण गर्मी, लू और उमस का असर लगातार बढ़ता जा रहा है। कई इलाकों में तापमान 45 डिग्री सेल्सियस तक पहुंच चुका है, जिससे खासकर छोटे बच्चों के लिए खतरा और अधिक बढ़ गया है। विश्व स्वास्थ्य संगठन (WHO) ने अभिभावकों को सतर्क रहने और बच्चों की अतिरिक्त देखभाल करने की सलाह दी है।

    WHO के अनुसार, बच्चों का शरीर वयस्कों की तुलना में तेजी से गर्म हो जाता है, जिससे उनमें डिहाइड्रेशन और हीट स्ट्रोक का खतरा काफी बढ़ जाता है। ऐसे में समय रहते लक्षणों की पहचान और सही कदम उठाना बेहद जरूरी है।

    हीट स्ट्रोक के लक्षणों पर रखें नजर
    डब्ल्यूएचओ के मुताबिक बच्चों में गर्मी से जुड़ी गंभीर समस्या के संकेत कई तरह से दिखाई दे सकते हैं। इनमें शरीर का तापमान 40 डिग्री सेल्सियस या उससे अधिक होना, तेज सिरदर्द, अत्यधिक पसीना आना, मांसपेशियों में दर्द या ऐंठन शामिल हैं। इसके अलावा तेज दिल की धड़कन, सांस फूलना, कमजोरी, चक्कर आना या बेहोशी जैसे लक्षण भी दिखाई दे सकते हैं। कई मामलों में बच्चा बहुत चिड़चिड़ा हो जाता है या उल्टी की शिकायत भी करता है।

    हीट स्ट्रोक होने पर क्या करें फर्स्ट एड
    WHO ने बताया है कि अगर बच्चे में हीट स्ट्रोक के लक्षण दिखें तो घबराने की बजाय तुरंत प्राथमिक उपचार शुरू करना चाहिए। बच्चे को सबसे पहले किसी छायादार या ठंडी जगह पर ले जाएं। अगर बच्चा होश में है तो उसे छोटे-छोटे घूंट में पानी, ओआरएस या नींबू पानी पिलाएं। बच्चे को लिटाकर उसके पैरों को थोड़ा ऊंचा रखें और शरीर पर ठंडे पानी से स्पंज करें ताकि शरीर का तापमान कम हो सके।
    अगर बच्चा बेहोश हो जाए तो उसे पानी या कोई भी तरल पदार्थ जबरदस्ती न दें। उल्टी की स्थिति में बच्चे को करवट पर लिटाना चाहिए ताकि सांस लेने में दिक्कत न हो।

    इन बातों का रखें विशेष ध्यान
    WHO ने स्पष्ट किया है कि बच्चों को सीधे धूप में न भेजें और भारी या गर्म कपड़े बिल्कुल न पहनाएं। गर्मी के समय दोपहर में बच्चों को बाहर खेलने से रोकना चाहिए। घर से निकलते समय पानी की बोतल, टोपी और छाता जरूर साथ रखें। बच्चों को हमेशा हल्के, सूती और ढीले कपड़े पहनाने की सलाह दी गई है।

    विशेषज्ञों की सलाह
    स्वास्थ्य विशेषज्ञों का कहना है कि थोड़ी सी सावधानी और सही समय पर कदम उठाकर बच्चों को हीट स्ट्रोक जैसी गंभीर स्थिति से बचाया जा सकता है। अगर लक्षण गंभीर दिखें तो तुरंत डॉक्टर से संपर्क करना जरूरी है, क्योंकि देरी जानलेवा साबित हो सकती है।

  • कार्बोहाइड्रेट पर बड़ा भ्रम: क्या इन्हें छोड़ना वाकई जरूरी है? एक्सपर्ट ने बताया सच

    कार्बोहाइड्रेट पर बड़ा भ्रम: क्या इन्हें छोड़ना वाकई जरूरी है? एक्सपर्ट ने बताया सच


    नई दिल्ली । आजकल वजन बढ़ने की समस्या तेजी से बढ़ती जीवनशैली से जुड़ी एक आम चुनौती बन चुकी है। इसी कारण लोग वजन घटाने के लिए तरह-तरह के डाइट प्लान अपनाते हैं, जिनमें सबसे आम तरीका कार्बोहाइड्रेट यानी कार्ब्स को पूरी तरह से छोड़ देना माना जाता है। बहुत से लोग यह मान लेते हैं कि रोटी, चावल, ब्रेड या आलू खाने से वजन बढ़ता है और इन्हें बंद कर देने से तेजी से वजन कम किया जा सकता है।

    लेकिन विशेषज्ञों और विश्व स्वास्थ्य संगठन यानी WHO की राय इस धारणा को पूरी तरह गलत बताती है। एक्सपर्ट्स के अनुसार कार्बोहाइड्रेट वजन बढ़ाने के लिए जिम्मेदार नहीं हैं, बल्कि असली समस्या उनके प्रकार और मात्रा में होती है। शरीर को ऊर्जा देने वाले मुख्य स्रोतों में कार्बोहाइड्रेट सबसे महत्वपूर्ण भूमिका निभाते हैं और इन्हें पूरी तरह बंद कर देना स्वास्थ्य के लिए हानिकारक हो सकता है।

    विशेषज्ञों का कहना है कि यह एक आम मिथक है कि सभी कार्बोहाइड्रेट वजन बढ़ाते हैं। वास्तव में शरीर को ऊर्जा, मस्तिष्क को सक्रिय रखने और दिनभर की गतिविधियों के लिए कार्ब्स की आवश्यकता होती है। अगर इन्हें पूरी तरह बंद कर दिया जाए तो शरीर में कमजोरी, थकान, चिड़चिड़ापन और मूड स्विंग जैसी समस्याएं उत्पन्न हो सकती हैं।

    WHO और पोषण विशेषज्ञ सलाह देते हैं कि रिफाइंड और प्रोसेस्ड कार्ब्स जैसे सफेद चीनी, सफेद मैदा, सफेद चावल, बिस्किट और कोल्ड ड्रिंक्स का सेवन सीमित किया जाए। ये कार्ब्स तेजी से पचते हैं और शरीर में फैट बढ़ाने में योगदान दे सकते हैं। इसके बजाय कॉम्प्लेक्स कार्बोहाइड्रेट को डाइट में शामिल करना ज्यादा फायदेमंद माना जाता है।

    कॉम्प्लेक्स कार्ब्स में फाइबर की मात्रा अधिक होती है, जो पाचन को धीमा और स्थिर बनाता है। इससे पेट लंबे समय तक भरा रहता है और बार-बार भूख लगने की समस्या कम होती है। यही कारण है कि ये कार्ब्स वजन नियंत्रित करने में मदद करते हैं। साबुत अनाज जैसे गेहूं, जौ, बाजरा, रागी, ब्राउन राइस, दालें और बीन्स को हेल्दी कार्ब्स की श्रेणी में रखा जाता है।

    इसके अलावा फल जैसे सेब, केला और संतरा, साथ ही सब्जियां, नट्स और बीज भी शरीर को जरूरी पोषण देने के साथ-साथ वजन संतुलन में मदद करते हैं। ये सभी खाद्य पदार्थ शरीर में धीरे-धीरे ऊर्जा छोड़ते हैं और ब्लड शुगर को स्थिर बनाए रखते हैं।

    विशेषज्ञ यह भी स्पष्ट करते हैं कि केवल कार्बोहाइड्रेट कम करना वजन घटाने का सही तरीका नहीं है। एक संतुलित आहार जिसमें कार्बोहाइड्रेट, प्रोटीन और हेल्दी फैट का सही अनुपात हो, वही सबसे प्रभावी माना जाता है। इसके साथ नियमित व्यायाम और पर्याप्त नींद भी बेहद जरूरी है।

    लंबे समय तक पूरी तरह कार्ब-फ्री डाइट अपनाना न सिर्फ मुश्किल है, बल्कि स्वास्थ्य के लिए भी नुकसानदायक हो सकता है। इसलिए बेहतर तरीका यह है कि प्रोसेस्ड कार्ब्स की जगह हेल्दी और कॉम्प्लेक्स कार्ब्स को रोजमर्रा की डाइट में शामिल किया जाए, जिससे वजन नियंत्रण भी हो और शरीर को जरूरी ऊर्जा भी मिलती रहे।