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  • बच्चों को मोटापा घटाने की दवाएं देने से पहले सावधान, WHO ने 10 साल से कम उम्र के बच्चों के लिए किया मना

    बच्चों को मोटापा घटाने की दवाएं देने से पहले सावधान, WHO ने 10 साल से कम उम्र के बच्चों के लिए किया मना

    नई दिल्ली: विश्व स्वास्थ्य संगठन (WHO) ने बच्चों और किशोरों में मोटापे के इलाज को लेकर नए दिशा-निर्देश जारी करते हुए वजन घटाने वाली दवाओं और सर्जरी के इस्तेमाल पर सावधानी बरतने को कहा है। संगठन के अनुसार अधिक वजन वाले बच्चों के लिए दवाएं और सर्जरी सीधे समाधान नहीं हैं। इसके बजाय संतुलित आहार और नियमित शारीरिक गतिविधियों पर जोर दिया जाना चाहिए। WHO ने स्पष्ट किया है कि 0 से 9 वर्ष तक के बच्चों के लिए वजन घटाने वाली दवाओं, पेट या पाचन तंत्र से जुड़ी सर्जरी और वजन कम करने वाले उपकरणों के इस्तेमाल की सिफारिश नहीं की जाती है।

    WHO के अनुसार 10 से 19 वर्ष के किशोरों के लिए वजन घटाने वाली दवाओं पर विचार किया जा सकता है, लेकिन यह विकल्प तभी अपनाया जाना चाहिए जब विशेषज्ञों की निगरानी में किए गए दूसरे उपाय प्रभावी साबित न हों। वहीं, अत्यधिक मोटापे से जूझ रहे किशोरों के लिए सर्जरी पर भी कुछ विशेष परिस्थितियों में विचार किया जा सकता है। इसके लिए कड़ी शर्तों का पालन जरूरी होगा। संगठन ने बच्चों और किशोरों में मोटापे से निपटने के लिए उपचार के साथ स्वस्थ जीवनशैली और शारीरिक गतिविधियों को महत्वपूर्ण बताया है।

    आंकड़ों के मुताबिक वर्ष 2024 में दुनियाभर में 5 से 9 वर्ष की आयु के लगभग 7 करोड़ बच्चे मोटापे से प्रभावित थे। इसी अवधि में 10 से 19 वर्ष की आयु के करीब 10 करोड़ किशोर भी मोटापे से जूझ रहे थे। 5 से 19 वर्ष की आयु के लोगों में मोटापे की दर 1990 में करीब 2 प्रतिशत थी, जो बढ़कर 2024 में 8 प्रतिशत हो गई। इन आंकड़ों से बच्चों और किशोरों में बढ़ते मोटापे की स्थिति का पता चलता है। ऐसे में वजन कम करने के लिए अपनाए जाने वाले तरीकों को लेकर सावधानी जरूरी मानी जा रही है।

    वजन घटाने के लिए पिछले कुछ वर्षों में कैलोरी कम करने वाली डाइट भी लोकप्रिय हुई है। इस तरह की डाइट में व्यक्ति भोजन से मिलने वाली ऊर्जा यानी कैलोरी की मात्रा कम करता है। इसमें इंटरमिटेंट फास्टिंग, अल्टरनेट डे फास्टिंग और फास्ट 800 जैसी डाइट शामिल हैं। इन तरीकों में भोजन के समय या मात्रा को सीमित करके कैलोरी का सेवन काफी कम किया जाता है। इसका आधार यह है कि जब शरीर को खर्च होने वाली ऊर्जा की तुलना में कम कैलोरी मिलती है, तो वह जमा वसा का इस्तेमाल करता है और समय के साथ वजन कम हो सकता है।

    विभिन्न शोधों में पाया गया है कि कैलोरी कम करने वाली डाइट से वजन और कमर का घेरा घट सकता है। इससे रक्त शर्करा और कोलेस्ट्रॉल के नियंत्रण में भी सुधार देखा गया है, जिससे हृदय रोग के जोखिम को कम करने में मदद मिल सकती है। खासकर अधिक वजन, मोटापे या टाइप-2 मधुमेह से जूझ रहे लोगों में इसके कुछ लाभ सामने आए हैं। हालांकि, उपलब्ध अध्ययनों में से अधिकांश केवल 2 से 12 सप्ताह की छोटी अवधि पर आधारित हैं। वजन कम करने के बाद उसे लंबे समय तक बनाए रखना चुनौतीपूर्ण हो सकता है और कई लोगों में डाइट खत्म होने के बाद कम हुआ कुछ या उससे अधिक वजन दोबारा बढ़ सकता है।

  • हीट स्ट्रोक से बच्चों की सुरक्षा: WHO ने बताए खतरनाक लक्षण और बचाव के तरीके

    हीट स्ट्रोक से बच्चों की सुरक्षा: WHO ने बताए खतरनाक लक्षण और बचाव के तरीके



    मध्य प्रदेश । देश के कई हिस्सों में इस समय भीषण गर्मी, लू और उमस का असर लगातार बढ़ता जा रहा है। कई इलाकों में तापमान 45 डिग्री सेल्सियस तक पहुंच चुका है, जिससे खासकर छोटे बच्चों के लिए खतरा और अधिक बढ़ गया है। विश्व स्वास्थ्य संगठन (WHO) ने अभिभावकों को सतर्क रहने और बच्चों की अतिरिक्त देखभाल करने की सलाह दी है।

    WHO के अनुसार, बच्चों का शरीर वयस्कों की तुलना में तेजी से गर्म हो जाता है, जिससे उनमें डिहाइड्रेशन और हीट स्ट्रोक का खतरा काफी बढ़ जाता है। ऐसे में समय रहते लक्षणों की पहचान और सही कदम उठाना बेहद जरूरी है।

    हीट स्ट्रोक के लक्षणों पर रखें नजर
    डब्ल्यूएचओ के मुताबिक बच्चों में गर्मी से जुड़ी गंभीर समस्या के संकेत कई तरह से दिखाई दे सकते हैं। इनमें शरीर का तापमान 40 डिग्री सेल्सियस या उससे अधिक होना, तेज सिरदर्द, अत्यधिक पसीना आना, मांसपेशियों में दर्द या ऐंठन शामिल हैं। इसके अलावा तेज दिल की धड़कन, सांस फूलना, कमजोरी, चक्कर आना या बेहोशी जैसे लक्षण भी दिखाई दे सकते हैं। कई मामलों में बच्चा बहुत चिड़चिड़ा हो जाता है या उल्टी की शिकायत भी करता है।

    हीट स्ट्रोक होने पर क्या करें फर्स्ट एड
    WHO ने बताया है कि अगर बच्चे में हीट स्ट्रोक के लक्षण दिखें तो घबराने की बजाय तुरंत प्राथमिक उपचार शुरू करना चाहिए। बच्चे को सबसे पहले किसी छायादार या ठंडी जगह पर ले जाएं। अगर बच्चा होश में है तो उसे छोटे-छोटे घूंट में पानी, ओआरएस या नींबू पानी पिलाएं। बच्चे को लिटाकर उसके पैरों को थोड़ा ऊंचा रखें और शरीर पर ठंडे पानी से स्पंज करें ताकि शरीर का तापमान कम हो सके।
    अगर बच्चा बेहोश हो जाए तो उसे पानी या कोई भी तरल पदार्थ जबरदस्ती न दें। उल्टी की स्थिति में बच्चे को करवट पर लिटाना चाहिए ताकि सांस लेने में दिक्कत न हो।

    इन बातों का रखें विशेष ध्यान
    WHO ने स्पष्ट किया है कि बच्चों को सीधे धूप में न भेजें और भारी या गर्म कपड़े बिल्कुल न पहनाएं। गर्मी के समय दोपहर में बच्चों को बाहर खेलने से रोकना चाहिए। घर से निकलते समय पानी की बोतल, टोपी और छाता जरूर साथ रखें। बच्चों को हमेशा हल्के, सूती और ढीले कपड़े पहनाने की सलाह दी गई है।

    विशेषज्ञों की सलाह
    स्वास्थ्य विशेषज्ञों का कहना है कि थोड़ी सी सावधानी और सही समय पर कदम उठाकर बच्चों को हीट स्ट्रोक जैसी गंभीर स्थिति से बचाया जा सकता है। अगर लक्षण गंभीर दिखें तो तुरंत डॉक्टर से संपर्क करना जरूरी है, क्योंकि देरी जानलेवा साबित हो सकती है।

  • कार्बोहाइड्रेट पर बड़ा भ्रम: क्या इन्हें छोड़ना वाकई जरूरी है? एक्सपर्ट ने बताया सच

    कार्बोहाइड्रेट पर बड़ा भ्रम: क्या इन्हें छोड़ना वाकई जरूरी है? एक्सपर्ट ने बताया सच


    नई दिल्ली । आजकल वजन बढ़ने की समस्या तेजी से बढ़ती जीवनशैली से जुड़ी एक आम चुनौती बन चुकी है। इसी कारण लोग वजन घटाने के लिए तरह-तरह के डाइट प्लान अपनाते हैं, जिनमें सबसे आम तरीका कार्बोहाइड्रेट यानी कार्ब्स को पूरी तरह से छोड़ देना माना जाता है। बहुत से लोग यह मान लेते हैं कि रोटी, चावल, ब्रेड या आलू खाने से वजन बढ़ता है और इन्हें बंद कर देने से तेजी से वजन कम किया जा सकता है।

    लेकिन विशेषज्ञों और विश्व स्वास्थ्य संगठन यानी WHO की राय इस धारणा को पूरी तरह गलत बताती है। एक्सपर्ट्स के अनुसार कार्बोहाइड्रेट वजन बढ़ाने के लिए जिम्मेदार नहीं हैं, बल्कि असली समस्या उनके प्रकार और मात्रा में होती है। शरीर को ऊर्जा देने वाले मुख्य स्रोतों में कार्बोहाइड्रेट सबसे महत्वपूर्ण भूमिका निभाते हैं और इन्हें पूरी तरह बंद कर देना स्वास्थ्य के लिए हानिकारक हो सकता है।

    विशेषज्ञों का कहना है कि यह एक आम मिथक है कि सभी कार्बोहाइड्रेट वजन बढ़ाते हैं। वास्तव में शरीर को ऊर्जा, मस्तिष्क को सक्रिय रखने और दिनभर की गतिविधियों के लिए कार्ब्स की आवश्यकता होती है। अगर इन्हें पूरी तरह बंद कर दिया जाए तो शरीर में कमजोरी, थकान, चिड़चिड़ापन और मूड स्विंग जैसी समस्याएं उत्पन्न हो सकती हैं।

    WHO और पोषण विशेषज्ञ सलाह देते हैं कि रिफाइंड और प्रोसेस्ड कार्ब्स जैसे सफेद चीनी, सफेद मैदा, सफेद चावल, बिस्किट और कोल्ड ड्रिंक्स का सेवन सीमित किया जाए। ये कार्ब्स तेजी से पचते हैं और शरीर में फैट बढ़ाने में योगदान दे सकते हैं। इसके बजाय कॉम्प्लेक्स कार्बोहाइड्रेट को डाइट में शामिल करना ज्यादा फायदेमंद माना जाता है।

    कॉम्प्लेक्स कार्ब्स में फाइबर की मात्रा अधिक होती है, जो पाचन को धीमा और स्थिर बनाता है। इससे पेट लंबे समय तक भरा रहता है और बार-बार भूख लगने की समस्या कम होती है। यही कारण है कि ये कार्ब्स वजन नियंत्रित करने में मदद करते हैं। साबुत अनाज जैसे गेहूं, जौ, बाजरा, रागी, ब्राउन राइस, दालें और बीन्स को हेल्दी कार्ब्स की श्रेणी में रखा जाता है।

    इसके अलावा फल जैसे सेब, केला और संतरा, साथ ही सब्जियां, नट्स और बीज भी शरीर को जरूरी पोषण देने के साथ-साथ वजन संतुलन में मदद करते हैं। ये सभी खाद्य पदार्थ शरीर में धीरे-धीरे ऊर्जा छोड़ते हैं और ब्लड शुगर को स्थिर बनाए रखते हैं।

    विशेषज्ञ यह भी स्पष्ट करते हैं कि केवल कार्बोहाइड्रेट कम करना वजन घटाने का सही तरीका नहीं है। एक संतुलित आहार जिसमें कार्बोहाइड्रेट, प्रोटीन और हेल्दी फैट का सही अनुपात हो, वही सबसे प्रभावी माना जाता है। इसके साथ नियमित व्यायाम और पर्याप्त नींद भी बेहद जरूरी है।

    लंबे समय तक पूरी तरह कार्ब-फ्री डाइट अपनाना न सिर्फ मुश्किल है, बल्कि स्वास्थ्य के लिए भी नुकसानदायक हो सकता है। इसलिए बेहतर तरीका यह है कि प्रोसेस्ड कार्ब्स की जगह हेल्दी और कॉम्प्लेक्स कार्ब्स को रोजमर्रा की डाइट में शामिल किया जाए, जिससे वजन नियंत्रण भी हो और शरीर को जरूरी ऊर्जा भी मिलती रहे।