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  • जनवरी के मुकाबले फरवरी में थोक महंगाई बढ़ी, मैन्युफैक्चरिंग और खाद्य कीमतों का असर

    जनवरी के मुकाबले फरवरी में थोक महंगाई बढ़ी, मैन्युफैक्चरिंग और खाद्य कीमतों का असर

    नई दिल्ली: भारत में थोक मूल्य सूचकांक यानी डब्ल्यूपीआई पर आधारित महंगाई दर फरवरी महीने में बढ़कर 2.13 प्रतिशत हो गई है। सरकार की ओर से जारी आंकड़ों के मुताबिक खाद्य और गैर-खाद्य उत्पादों की कीमतों में बढ़ोतरी के कारण यह वृद्धि दर्ज की गई है।

    इससे पहले जनवरी में थोक महंगाई दर 1.81 प्रतिशत थी जबकि पिछले साल फरवरी में यह 2.45 प्रतिशत दर्ज की गई थी। वाणिज्य और उद्योग मंत्रालय के बयान के अनुसार फरवरी 2026 में महंगाई दर सकारात्मक रहने की मुख्य वजह मैन्युफैक्चरिंग सेक्टर, बेसिक मेटल, खाद्य उत्पाद, गैर-खाद्य उत्पाद और टेक्सटाइल की कीमतों में वृद्धि रही।

    आंकड़ों के अनुसार फरवरी में खाद्य उत्पादों की थोक महंगाई दर 2.19 प्रतिशत रही, जो जनवरी में 1.55 प्रतिशत थी। हालांकि सब्जियों की कीमतों में कुछ राहत देखने को मिली है। सब्जियों में थोक महंगाई दर जनवरी के 6.78 प्रतिशत से घटकर फरवरी में 4.73 प्रतिशत पर आ गई। इसके बावजूद दाल, आलू, अंडे, मांस और मछली जैसी वस्तुओं की कीमतों में पिछले महीने की तुलना में वृद्धि दर्ज की गई है।

    मैन्युफैक्चरिंग सेक्टर में भी महंगाई का दबाव बढ़ा है। फरवरी में मैन्युफैक्चरिंग उत्पादों की थोक महंगाई दर जनवरी के 2.86 प्रतिशत से बढ़कर 2.92 प्रतिशत हो गई। वहीं गैर-खाद्य पदार्थों की श्रेणी में महंगाई दर जनवरी के 7.58 प्रतिशत से बढ़कर फरवरी में 8.80 प्रतिशत हो गई। हालांकि ईंधन और ऊर्जा श्रेणी में महंगाई दर अभी भी नकारात्मक बनी हुई है। फरवरी में फ्यूल और पावर बास्केट की थोक महंगाई दर -3.78 प्रतिशत रही, जबकि जनवरी में यह -4.01 प्रतिशत थी।

    इससे पहले सरकार ने खुदरा महंगाई दर के भी आंकड़े जारी किए थे। फरवरी में खुदरा महंगाई दर 3.21 प्रतिशत दर्ज की गई, जो जनवरी के 2.74 प्रतिशत से 0.47 प्रतिशत अधिक है।ग्रामीण इलाकों में फरवरी में खुदरा महंगाई दर 3.37 प्रतिशत रही जबकि जनवरी में यह 2.73 प्रतिशत थी। वहीं शहरी क्षेत्रों में खुदरा महंगाई दर फरवरी में 3.02 प्रतिशत रही, जो जनवरी में 2.75 प्रतिशत थी।

    खाद्य महंगाई की बात करें तो फरवरी में यह 3.47 प्रतिशत रही। ग्रामीण इलाकों में खाद्य महंगाई दर 3.46 प्रतिशत और शहरी इलाकों में 3.48 प्रतिशत दर्ज की गई। विशेषज्ञों का मानना है कि खाद्य और मैन्युफैक्चरिंग उत्पादों की कीमतों में बढ़ोतरी के कारण आने वाले महीनों में महंगाई पर नजर बनाए रखना जरूरी होगा।

  • कृषि व ग्रामीण श्रमिकों के लिए राहत: दिसंबर में खाद्य महंगाई दर नकारात्मक, उपभोक्ता मूल्य सूचकांक में गिरावट

    कृषि व ग्रामीण श्रमिकों के लिए राहत: दिसंबर में खाद्य महंगाई दर नकारात्मक, उपभोक्ता मूल्य सूचकांक में गिरावट


    नई दिल्ली। दिसंबर 2025 में कृषि और ग्रामीण श्रमिकों के लिए खाद्य महंगाई दर नकारात्मक रही जिससे इन वर्गों के लिए महंगाई के बोझ में राहत मिली है। श्रम और रोजगार मंत्रालय ने बुधवार को जारी आंकड़ों के अनुसार कृषि श्रमिकों के लिए अखिल भारत उपभोक्ता मूल्य सूचकांक सीपीआई-एल 0.04 प्रतिशत और ग्रामीण श्रमिकों के लिए (सीपीआई-आरएल) 0.11 प्रतिशत सालाना आधार पर दर्ज किया गया।

    मंत्रालय ने बताया कि खाद्य महंगाई इस दौरान कृषि श्रमिकों के लिए -1.8 प्रतिशत और ग्रामीण श्रमिकों के लिए -1.73 प्रतिशत रही। इस नकारात्मक महंगाई का मुख्य कारण खाद्य उत्पादन में वृद्धि के साथ कीमतों में गिरावट है। हाल के महीनों में उपभोक्ता वस्तुओं की कीमतों में आई यह कमी विशेष रूप से कमजोर वर्गों के लिए राहत का संदेश लेकर आई है। इससे उनके पास खर्च करने के लिए अधिक धन उपलब्ध होता है और जीवन स्तर में सुधार की संभावना बढ़ती है।

    श्रम एवं रोजगार मंत्रालय के अधीन श्रम ब्यूरो ने जून 2025 से कृषि और ग्रामीण श्रमिकों के उपभोक्ता मूल्य सूचकांक का आधार वर्ष 2019=100 निर्धारित किया है। इस नए आधार वर्ष में 34 राज्यों और केंद्र शासित प्रदेशों के 787 गांवों से आंकड़े एकत्रित किए गए। पुराने 1986-87=100 सीरीज को बदलकर सीपीआई-एएल और सीपीआई-आरएल की नई सीरीज लाई गई है। नई सीरीज में सूचकांक की विश्वसनीयता बढ़ाने के लिए दायरा और कवरेज काफी हद तक बढ़ाया गया और इसमें कार्यप्रणालीगत सुधार भी किए गए।

    इस बीच सामान्य खुदरा महंगाई दर दिसंबर 2025 में 1.33 प्रतिशत रही जो नवंबर में 0.71 प्रतिशत थी। वहीं थोक कीमतों पर आधारित महंगाई दर दिसंबर में 0.83 प्रतिशत दर्ज की गई जबकि नवंबर में यह -0.32 प्रतिशत थी। थोक महंगाई में वृद्धि मुख्य रूप से विनिर्मित वस्तुओं और खनिजों की कीमतों में बढ़ोतरी के कारण हुई है।

    आरबीआई का अनुमान है कि वित्त वर्ष 2025-26 में खुदरा महंगाई दर करीब 2 प्रतिशत रह सकती है। इसकी वजह जीएसटी में कटौती और खाद्य उत्पादों की कीमतों में गिरावट को बताया गया है।
    विशेषज्ञों का कहना है कि कृषि और ग्रामीण श्रमिकों के लिए खाद्य महंगाई में आई यह कमी आर्थिक दृष्टि से महत्वपूर्ण है। इससे उनकी खरीद क्षमता बढ़ती है और जीवन यापन में आसानी होती है। सरकार की नीतियों और उत्पादन में बढ़ोतरी के कारण आने वाले महीनों में यह रुझान जारी रहने की उम्मीद है।

  • दिसंबर में थोक महंगाई में इजाफा, दर बढ़कर 0.83 प्रतिशत पर पहुंची

    दिसंबर में थोक महंगाई में इजाफा, दर बढ़कर 0.83 प्रतिशत पर पहुंची


    नई दिल्ली । देश में थोक स्तर पर महंगाई एक बार फिर बढ़ती नजर आई है। विनिर्मित उत्पादों की कीमतों में वृद्धि के कारण दिसंबर 2025 में थोक मूल्य सूचकांक WPI आधारित मुद्रास्फीति की दर बढ़कर 0.83 प्रतिशत पर पहुंच गई। यह सितंबर 2025 के बाद पहली बार है जब थोक महंगाई की दर शून्य से ऊपर दर्ज की गई है।सरकारी आंकड़ों के अनुसारनवंबर 2025 में थोक मुद्रास्फीति दर शून्य से नीचे रही थी और यह माइनस 0.32 प्रतिशत दर्ज की गई थी। वहींएक साल पहले दिसंबर 2024 में थोक महंगाई दर 2.57 प्रतिशत के स्तर पर थी। इस तरह साल-दर-साल तुलना में थोक महंगाई अब भी अपेक्षाकृत निचले स्तर पर हैलेकिन हालिया बढ़ोतरी से कीमतों पर दबाव के संकेत मिलते हैं।

    विनिर्मित उत्पादों ने बढ़ाई महंगाई

    दिसंबर में थोक महंगाई बढ़ने की मुख्य वजह विनिर्मित उत्पादों की कीमतों में इजाफा रहा। विनिर्मित वस्तुओं का थोक मूल्य सूचकांक में बड़ा योगदान होता है और इनकी कीमतों में मामूली बढ़ोतरी भी समग्र महंगाई दर को प्रभावित करती है। उद्योग जगत से जुड़े विशेषज्ञों के अनुसारकच्चे माल की लागतपरिवहन खर्च और मांग में धीरे-धीरे हो रही बढ़ोतरी इसके प्रमुख कारण हो सकते हैं।

    तीन महीने बाद राहत खत्म

    सितंबर 2025 के बाद से लगातार तीन महीनों तक थोक महंगाई दर शून्य के आसपास या उससे नीचे बनी हुई थीजिससे उद्योग और व्यापार जगत को कुछ राहत मिली थी। हालांकि दिसंबर में दर के फिर से सकारात्मक क्षेत्र में आने से यह संकेत मिलता है कि कीमतों में स्थिरता की अवधि अब खत्म हो सकती है।

    खुदरा महंगाई से अलग संकेत

    थोक महंगाई और खुदरा महंगाई CPI के रुझान अक्सर अलग-अलग होते हैं। थोक स्तर पर कीमतों में बदलाव का असर कुछ समय बाद खुदरा बाजार में भी दिख सकता है। ऐसे में दिसंबर के आंकड़े आने वाले महीनों में खुदरा महंगाई पर संभावित दबाव की ओर इशारा कर सकते हैंहालांकि इसका सीधा और त्वरित असर होना जरूरी नहीं है।

    आगे क्या संकेत

    अर्थशास्त्रियों का मानना है कि थोक महंगाई में यह बढ़ोतरी फिलहाल चिंताजनक नहीं हैलेकिन अगर विनिर्मित उत्पादों और कच्चे माल की कीमतों में लगातार इजाफा होता रहातो इसका असर उत्पादन लागत और अंततः उपभोक्ताओं पर पड़ सकता है। साथ ही वैश्विक बाजारों में कच्चे तेल और अन्य कमोडिटी की कीमतों में उतार-चढ़ाव भी आने वाले महीनों में महंगाई की दिशा तय करेगा। दिसंबर 2025 में थोक मुद्रास्फीति दर का 0.83 प्रतिशत पर पहुंचना यह दर्शाता है कि कीमतों में गिरावट का दौर थम गया है और महंगाई धीरे-धीरे बढ़ने लगी है। हालांकि मौजूदा स्तर अभी नियंत्रण में हैलेकिन सरकार और नीति निर्माताओं के लिए यह एक संकेत है कि महंगाई के रुझानों पर करीबी नजर बनाए रखना जरूरी होगा।