महुआ बीनने गया था अगले दिन मिला शव
शव के पास बैठा मिला बाघ

महुआ बीनने गया था अगले दिन मिला शव
शव के पास बैठा मिला बाघ

घटना का विवरण
पुलिस के अनुसार, मृतक सुधराम, पिता हजारी चौहान (निवासी चनागढ़ झुनकर), बुधवार दोपहर तवा नदी पार कर एसटीआर के कोर क्षेत्र में महुआ बीनने गया था। शाम तक घर न लौटने पर परिजन गुरुवार सुबह जंगल में खोजबीन के लिए निकले। जंगल में खोज के दौरान सुधराम का शव महुआ के पेड़ के पास मिला, जबकि बाघ उसके धड़ के पास बैठा था। परिजनों ने हिम्मत करके बाघ को वहां से भगाया और घटना की सूचना वन विभाग और पुलिस को दी।
पुलिस और वन विभाग की कार्रवाई
केसला थाना प्रभारी मदन लाल पवार ने बताया कि शव के सिर और धड़ को सुखतवा लाया गया, जबकि हाथ-पैर बाघ ने खा लिए थे। मर्ग कायम कर जांच शुरू कर दी गई है। एसटीआर की फील्ड डायरेक्टर राखी नंदा ने पुष्टि की कि यह घटना बैक वॉटर क्षेत्र में हुई, जो एसटीआर के अंतर्गत आता है।
घटना से प्रभावित परिजन
शव के पास बाघ को देखकर परिजन और ग्रामीण बुरी तरह सहम गए, लेकिन कुछ देर बाद उन्होंने हिम्मत करके बाघ को भगाया और शव को सुरक्षित निकाला।

यह दुखद घटना पन्ना टाइगर रिजर्व के कोर क्षेत्र की सीमा से लगे जरधोवा गांव की है। बताया जा रहा है कि बच्चा सुबह जब गांव के बाहरी हिस्से के पास था, तभी झाड़ियों में छिपे किसी हिंसक जानवर ने उस पर झपट्टा मार दिया। शोर सुनकर जब तक ग्रामीण मौके पर पहुंचे, तब तक वन्यजीव बच्चे को लहूलुहान कर जंगल की ओर भाग चुका था। घटना की सूचना मिलते ही वन विभाग और पुलिस प्रशासन की टीमें सक्रिय हो गई हैं।
वन अधिकारी अपनी टीम के साथ घटनास्थल पर पहुंच चुके हैं और बारीकी से साक्ष्य जुटा रहे हैं। विभाग के विशेषज्ञों द्वारा मौके पर मिले पगमार्क की जांच की जा रही है ताकि यह स्पष्ट हो सके कि हमला तेंदुए ने किया है, बाघ ने या किसी अन्य जंगली जानवर ने। वन अधिकारियों का कहना है कि हमले की परिस्थितियों का आकलन किया जा रहा है और हमलावर जानवर की पहचान के लिए गश्त बढ़ा दी गई है।
इस घटना ने एक बार फिर ‘इंसान और वन्यजीव’ के बीच बढ़ते संघर्ष को उजागर कर दिया है। पन्ना टाइगर रिजर्व के करीब स्थित गांवों में जंगली जानवरों की हलचल अक्सर देखी जाती है, लेकिन इस जानलेवा हमले ने ग्रामीणों के सब्र का बांध तोड़ दिया है। ग्रामीण प्रशासन से सुरक्षा के कड़े इंतजाम करने और पीड़ित परिवार को उचित मुआवजा देने की मांग कर रहे हैं। फिलहाल, वन विभाग ने आसपास के ग्रामीणों को जंगल की सीमा की ओर न जाने और समूह में रहने की सख्त हिदायत दी है।