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  • स्टोर रूम की सफाई से लेकर वन विभाग की मदद तक, बारिश के मौसम में इन जरूरी घरेलू सुरक्षा नियमों का करें पालन

    स्टोर रूम की सफाई से लेकर वन विभाग की मदद तक, बारिश के मौसम में इन जरूरी घरेलू सुरक्षा नियमों का करें पालन


    नई दिल्ली । देश के विभिन्न हिस्सों में मानसून की सक्रियता बढ़ने के साथ ही आम नागरिकों के लिए मौसमी बीमारियों के अलावा एक और बड़ा और गंभीर खतरा पैदा हो जाता है। भारी बारिश, जलभराव और जमीन के भीतर नमी बढ़ने के कारण सांप, बिच्छू और अन्य जहरीले रेंगने वाले जीव अपने प्राकृतिक आवासों यानी बिलों से बाहर निकलने के लिए मजबूर हो जाते हैं। सुरक्षित और सूखी जगहों की तलाश में ये जीव अक्सर इंसानी बस्तियों, घरों के बगीचों, स्टोर रूम और बेसमेंट जैसी जगहों पर शरण ले लेते हैं। इस स्थिति से निपटने और अपने परिवार को पूरी तरह सुरक्षित रखने के लिए गृह स्वामियों को कुछ विशेष और महत्वपूर्ण सुरक्षा उपायों को अमल में लाने की तत्काल आवश्यकता है।

    घरेलू सुरक्षा के दृष्टिकोण से सबसे पहला और बुनियादी कदम घर के आसपास के बाहरी वातावरण को पूरी तरह से साफ-सुथरा रखना है। घर के परिसर या बगीचे में जमा होने वाले कचरे, सूखी लकड़ियों के गट्ठर, पुरानी ईंटों के ढेर और बेतरतीब उगी झाड़ियों को तुरंत साफ किया जाना चाहिए, क्योंकि ये स्थान सांप और बिच्छुओं के छिपने के लिए सबसे अनुकूल माने जाते हैं। इसके अतिरिक्त, यदि घर के लॉन या आसपास के मैदान में घास अधिक बढ़ गई है, तो उसकी नियमित रूप से छंटाई कराना अनिवार्य है, ताकि खुले और साफ स्थान पर ये जीव ठहर न सकें।

    सुरक्षा व्यवस्था को सुदृढ़ करने के अगले चरण में घर के भौतिक ढांचे का बारीकी से निरीक्षण करना आवश्यक है। भवन की दीवारों, खिड़कियों के कोनों, मुख्य दरवाजों के निचले हिस्सों और फर्श में मौजूद किसी भी प्रकार की छोटी-बड़ी दरारों या गैप की सघन जांच की जानी चाहिए। बिच्छू और छोटे सांप बेहद महीन दरारों के रास्ते भी घर के भीतर सुगमता से प्रवेश कर जाते हैं। अतः ऐसी किसी भी संभावित एंट्री पॉइंट या झिरी के दिखाई देने पर उसे अविलंब सीमेंट, सिलिकॉन सीलेंट या अन्य मजबूत निर्माण सामग्री की सहायता से पूरी तरह एयरटाइट बंद कर देना चाहिए।

    बरसात के दिनों में घर के आंतरिक वातावरण को सूखा रखना और वहां पर्याप्त रोशनी की व्यवस्था करना भी सुरक्षा के लिहाज से बेहद महत्वपूर्ण है। स्टोर रूम, बेसमेंट और घर के उन कोनों में जहां हवा और रोशनी कम पहुंचती है, वहां नियमित रूप से सफाई और कीटनाशक दवाओं का छिड़काव किया जाना चाहिए। अक्सर लोग जूते, चप्पल, पुराने कपड़े या कार्डबोर्ड के बक्से लंबे समय तक एक ही स्थान पर रख देते हैं, जो इन जीवों के लिए छिपने का आदर्श स्थान बन जाते हैं। विशेषज्ञों की सलाह है कि इस मौसम में किसी भी रखे हुए सामान, कपड़ों या जूतों का उपयोग करने से पहले उन्हें एक बार अच्छी तरह से झाड़कर और जांचकर ही इस्तेमाल में लाएं।

    इन तमाम सावधानियों के बावजूद यदि कभी घर के भीतर या आसपास कोई जहरीला सांप अथवा अन्य जीव दिखाई दे, तो नागरिकों को अत्यधिक संयम बरतने की आवश्यकता है। ऐसी आपातकालीन स्थिति में जीव को खुद पकड़ने, सहलाने या लाठी-डंडों से मारने का प्रयास बिल्कुल नहीं करना चाहिए, क्योंकि भयभीत होने पर ये जीव और अधिक आक्रामक होकर हमला कर सकते हैं। इसके स्थान पर स्थानीय वन विभाग के अधिकारियों, पशु बचाव दल (एनिमल रेस्क्यू टीम) या किसी प्रमाणित और प्रशिक्षित सर्प विशेषज्ञ से तुरंत संपर्क करना चाहिए, जो आधुनिक उपकरणों की मदद से सुरक्षित रूप से जीव को वहां से रेस्क्यू कर सकें।

  • भिंड में चंबल नदी किनारे ऊंट सफारी की शुरुआत सस्ती कीमतों में ऐतिहासिक व प्राकृतिक स्थल होंगे दिखाए

    भिंड में चंबल नदी किनारे ऊंट सफारी की शुरुआत सस्ती कीमतों में ऐतिहासिक व प्राकृतिक स्थल होंगे दिखाए


    भिंड । भिंड जिले के अटेर में वन विभाग ने चंबल नदी के किनारे ऊंट सफारी की शुरुआत की है। इस सफारी के जरिए पर्यटक प्राकृतिक सौंदर्य और ऐतिहासिक स्थलों की सैर कर सकेंगे। सफारी का ट्रैक करीब 10 किमी लंबा है और इसमें अटेर किला चामुंडा देवी मंदिर और वन्य जीवों को दिखाया जा रहा है। इस सफारी के लिए पर्यटकों को 200 रुपये और 500 रुपये के टिकट मिल रहे हैं और यह सफारी सुबह 11 बजे से शाम 4 बजे तक चलेगी।

    वन विभाग ने सफारी के संचालन के लिए एक विस्तृत योजना बनाई है। पर्यटक अटेर स्थित वन विभाग कार्यालय से आफलाइन टिकट प्राप्त कर सकते हैं। चंबल क्षेत्र प्राकृतिक दृष्टि से बहुत महत्वपूर्ण है और यह इको-टूरिज्म गतिविधियां क्षेत्र की जैव विविधता और पर्यावरणीय संरक्षण में योगदान करेंगी। इस पहल के तहत वन विभाग स्थानीय लोगों के लिए रोजगार सृजन के अवसर भी पैदा कर रहा है जिससे क्षेत्रीय विकास को गति मिलेगी।

    वन विभाग की रेंजर कृतिका शुक्ला ने बताया कि सफारी में स्थानीय व्यंजन पेश करने की योजना भी बनाई जा रही है। इसके जरिए स्थानीय समुदाय को आर्थिक लाभ मिलेगा। वर्तमान में 11 ऊंटों का उपयोग सफारी में किया जा रहा है और जैसे-जैसे सफारी की लोकप्रियता बढ़ेगी इस में और भी ऊंटों को शामिल किया जाएगा।

    सुरक्षा और पर्यटकों के अनुभव को बेहतर बनाने के लिए वन विभाग ने सफारी के मार्ग को विशेष रूप से तैयार किया है। सफारी में आने वाले पर्यटकों को चंबल क्षेत्र के इतिहास और वन्य जीवन के बारे में भी जानकारी दी जाएगी। इसके अलावा विभाग उत्तराखंड के ऋषिकेश की तर्ज पर यहां कैंपिंग की सुविधा भी शुरू करने की योजना बना रहा है। इससे पर्यटकों को एक अलग अनुभव मिलेगा जो स्थानीय पर्यटन को और आकर्षक बना देगा।

    यह सफारी क्षेत्र में इको-टूरिज्म को बढ़ावा देने के साथ-साथ स्थानीय संस्कृति और कारीगरी को भी प्रदर्शित करने का एक अवसर है। इसे वन्य जीवों की रक्षा और पर्यावरण संरक्षण की दिशा में एक महत्वपूर्ण कदम माना जा सकता है जो आने वाले समय में स्थानीय वन्य जीवन और पर्यावरणीय संतुलन को बनाए रखने में मदद करेगा।

  • जबलपुर के गांवों में मगरमच्छों की धूप सेंकने की घटना से मची दहशतवन विभाग की टीम की ढिलाई पर सवाल

    जबलपुर के गांवों में मगरमच्छों की धूप सेंकने की घटना से मची दहशतवन विभाग की टीम की ढिलाई पर सवाल


    जबलपुर । इन दिनों जबलपुर में पड़ रही कड़ाके की ठंड ने न केवल मानव जीवन को प्रभावित किया हैबल्कि वन्य प्राणियों के लिए भी समस्याएं पैदा कर दी हैं। जलचर प्राणीविशेष रूप से मगरमच्छठंड से राहत पाने के लिए धूप सेंकने की आदत बना रहे हैं। यह अद्भुत दृश्य जबलपुर जिले के परियट जलाशय से लगे गांवों में देखा जा रहा मटामरघानारिठौरीपिपरिया और आसपास की कालोनियों में मगरमच्छों का आना बढ़ गया हैजिससे ग्रामीणों में डर का माहौल बन गया है।

    परियट जलाशय मगरमच्छों के लिए एक प्राकृतिक निवास स्थान बन चुका है। इस क्षेत्र में लगभग 1000 मगरमच्छ रहते हैंऔर इनकी संख्या समय के साथ बढ़ी है। ये जलचरजो आमतौर पर जल में रहते हैंअब ठंड से बचने के लिए धूप में आराम करने निकल आते हैं। परियट नदी में मगरमच्छों की अधिकता के कारण वे शिकार की तलाश में और अपने निवास स्थान से बाहर भी भटकने लगे हैं। अब ये मगरमच्छ गांवों के नजदीक आकर मानव बस्तियों तक पहुंच रहे हैंजो लोगों के लिए एक बड़ा खतरा बन चुका है।

    इन मगरमच्छों ने पहले कुछ पालतू जानवरों पर हमले किए हैंजिनमें श्वान और मवेशी शामिल हैं। हालांकिअभी तक किसी मनुष्य पर हमला नहीं हुआ हैलेकिन स्थानीय लोग इस खतरे को लेकर बेहद चिंतित हैं। कई बार गांवों के सरपंचों ने वन विभाग से इस समस्या का समाधान निकालने के लिए अपील की हैलेकिन वन विभाग की टीम की तरफ से कोई ठोस कार्रवाई नहीं की गई है। वे केवल रेस्क्यू का आश्वासन देकर अपना काम निपटा लेते हैंजबकि समस्या लगातार बढ़ती जा रही है।

    वन विभाग के अधिकारियों का कहना है कि वे जल्द ही इस स्थिति से निपटने के लिए कदम उठाएंगेलेकिन अब तक इस पर कोई विशेष ध्यान नहीं दिया गया है। इस खतरनाक स्थिति में वन विभाग की ढिलाई पर सवाल उठने लगे हैं। ग्रामीणों का कहना है कि अगर समय रहते इस समस्या का हल नहीं निकाला गयातो यह स्थिति और भी गंभीर हो सकती है।

    मगरमच्छों के बढ़ते खतरे को लेकर विशेषज्ञों का मानना है कि इंसानी दखल की वजह से इनका प्राकृतिक निवास क्षेत्र घटता जा रहा हैजिसके कारण वे रहवासी इलाकों में घुसने लगे हैं। इस समस्या का समाधान वन विभाग के समुचित और तत्काल प्रयासों में हैलेकिन सवाल यह उठता है कि क्या वन विभाग जल्द इस मुद्दे पर कोई ठोस कदम उठाएगा

  • उज्जैन बनेगी देश की पहली सर्पमित्र नगरी सांपों के संरक्षण के लिए विशेष प्रयास जारी

    उज्जैन बनेगी देश की पहली सर्पमित्र नगरी सांपों के संरक्षण के लिए विशेष प्रयास जारी


    उज्जैन । मध्य प्रदेश के उज्जैन जिले को अब देश की पहली सर्पमित्र नगरी के रूप में विकसित किया जाएगा। मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव ने इस पहल का ऐलान किया है जिसका मुख्य उद्देश्य सांपों के संरक्षण के साथ-साथ समाज में इनके प्रति जागरूकता बढ़ाना है। महाकाल की नगरी उज्जैन को सांपों का संरक्षण करने वाली पहली नगरी के रूप में स्थापित किया जा रहा है जहां सांपों के जीवन को बचाने और उनके प्राकृतिक आवासों की रक्षा करने के लिए व्यापक प्रयास किए जाएंगे ।

    मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव का कहना है कि सांप भगवान शिव के गले का हार हैं और इन्हें सुरक्षित करना महाकाल की नगरी का कर्तव्य बनता है। उनका मानना है कि सांपों को लेकर समाज में सकारात्मक दृष्टिकोण विकसित करना बेहद जरूरी है ताकि न तो सांप किसी इंसान को नुकसान पहुंचाएं और न ही इंसान सांपों को नुकसान पहुंचाए। उनके इस दृष्टिकोण को ध्यान में रखते हुए राज्य सरकार ने कई कदम उठाने की योजना बनाई है।

    प्रशिक्षण कार्यक्रमों के माध्यम से जागरूकता फैलाना

    उज्जैन में इस पहल के तहत अब तक 100 से ज्यादा विद्यार्थियों को हायर सेकंडरी स्कूलों में सांपों से सुरक्षित और मित्रवत तरीके से व्यवहार करने के लिए प्रशिक्षण दिया गया है। इस कार्यक्रम का उद्देश्य बच्चों और युवाओं में सांपों के प्रति डर को कम करना और उनके संरक्षण के महत्व को समझाना है। आगामी चरणों में इस अभियान का विस्तार किया जाएगा जिसमें डॉक्टरों हेल्थ वर्कर्स किसानों और पंचायत सचिवों को भी सांपों के सुरक्षित संरक्षण के तरीके सिखाए जाएंगे।

    यह पहल उज्जैन में सांपों के प्रति जागरूकता बढ़ाने के साथ-साथ उनके संरक्षण के लिए जरूरी कदमों को लागू करेगी। सांपों के अलावा इस पहल में अन्य वन्य जीवों की सुरक्षा पर भी ध्यान दिया जाएगा। इसके परिणामस्वरूप न सिर्फ सांपों को बचाया जाएगा बल्कि पूरे पारिस्थितिकी तंत्र का संतुलन भी बना रहेगा।

    सांपों के संरक्षण के लिए तैयार की गई योजनाएं

    उज्जैन को सर्प संरक्षण के लिए नोडल जिला बनाने का निर्णय लिया गया है जिसका मतलब है कि इस जिले में सांपों के संरक्षण के लिए अलग-अलग योजनाओं का निर्माण किया जाएगा। इन योजनाओं में सांपों के प्राकृतिक आवासों को संरक्षित करना उनकी प्रजनन दर बढ़ाना और उन्हें उपयुक्त वातावरण प्रदान करना शामिल होगा। इसके अलावा किसानों को जागरूक किया जाएगा ताकि वे कृषि कार्यों के दौरान सांपों को नुकसान न पहुंचाएं और उनके प्राकृतिक आवासों में हस्तक्षेप न करें।

    मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव के नेतृत्व में सांपों के संरक्षण के लिए उठाए गए कदम केवल उनके अस्तित्व को बचाने के लिए नहीं हैं बल्कि इस पहल से पर्यावरण संतुलन बनाए रखने और जैव विविधता को बढ़ावा देने की दिशा में भी महत्वपूर्ण योगदान मिलेगा। उनका मानना है कि सांपों और मनुष्यों के बीच मित्रवत संबंध स्थापित करके हम पारिस्थितिकी तंत्र को सुदृढ़ कर सकते हैं जिससे समग्र पर्यावरण की रक्षा हो सकेगी।

    सांपों के संरक्षण से पर्यावरण संतुलन

    सांपों का पारिस्थितिकी तंत्र में महत्वपूर्ण स्थान है। वे छोटे कीटों और अन्य जीवों का शिकार करते हैं जिससे प्राकृतिक संसाधनों का संतुलन बना रहता है। सांपों की उपस्थिति से कीटों की संख्या नियंत्रित रहती है जिससे कृषि क्षेत्र में कीटों के हमले की संभावना कम होती है और कृषि उत्पादकता भी बढ़ती है। यदि सांपों का संरक्षण सही तरीके से किया जाए तो यह पूरे पारिस्थितिकी तंत्र के लिए लाभकारी साबित होगा।

    इसके साथ ही सांपों के संरक्षण से स्थानीय समुदायों में पर्यावरणीय जागरूकता बढ़ेगी। लोग अब सांपों को एक खतरनाक प्राणी के रूप में नहीं बल्कि एक महत्वपूर्ण पारिस्थितिकी तंत्र के हिस्से के रूप में देखेंगे। इस तरह की जागरूकता से समाज में पर्यावरण संरक्षण के प्रति एक नया दृष्टिकोण विकसित होगा।

    सीएम डॉ. मोहन यादव की पहल का प्रभाव

    सीएम डॉ. मोहन यादव की यह पहल न केवल सांपों के संरक्षण के लिए है बल्कि यह पूरे राज्य और देश के पर्यावरण के लिए एक बड़ी क्रांतिकारी बदलाव का संकेत देती है। उनके इस कदम से उज्जैन की पहचान एक पर्यावरण मित्र नगरी के रूप में होगी जो सांपों और अन्य वन्य जीवों के संरक्षण में अपनी भूमिका निभाएगी। यह कदम उन लोगों के लिए एक प्रेरणा का स्रोत बनेगा जो पर्यावरणीय संरक्षण की दिशा में काम कर रहे हैं।

    यह पहल उज्जैन को एक मिसाल बना सकती है जहां समाज और वन्य जीवों के बीच सामंजस्यपूर्ण संबंध स्थापित किया जा सकता है जिससे न केवल सांपों का संरक्षण होगा बल्कि पूरे पर्यावरण का संतुलन भी बनाए रखा जा सकेगा।