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  • सतना टाइगर शिकार केस में बड़ा मोड़, फरार मुख्य आरोपी की मौत; वन विभाग की जांच को बड़ा झटका

    सतना टाइगर शिकार केस में बड़ा मोड़, फरार मुख्य आरोपी की मौत; वन विभाग की जांच को बड़ा झटका


    सतना । मध्य प्रदेश के सतना जिले में सामने आए चर्चित बाघ शिकार मामले की जांच को बड़ा झटका लगा है। करंट लगाकर बाघ का शिकार करने और उसके नाखून तथा केनाइन निकालने के मामले में फरार चल रहे मुख्य आरोपी मुन्ना कोल की गिरफ्तारी से पहले ही मौत हो गई। वन विभाग को उम्मीद थी कि उसकी गिरफ्तारी के बाद बाघ के लापता 14 नाखूनों और अन्य वन्यजीव अंगों की बरामदगी हो सकेगी लेकिन उसकी मौत के साथ ही जांच की सबसे महत्वपूर्ण कड़ी टूट गई है। अब वन विभाग के सामने सबसे बड़ी चुनौती गायब नाखूनों का पता लगाना और यह जानना है कि आखिर उन्हें कहां और किसके पास पहुंचाया गया।

    जानकारी के अनुसार मझगवां वन परिक्षेत्र में करीब ढाई महीने पहले शिकारियों ने जंगल में बिजली का करंट बिछाकर बाघ का शिकार किया था। बाघ की मौत के बाद आरोपियों ने उसके शव से नाखून और केनाइन निकाल लिए तथा सबूत मिटाने के उद्देश्य से शव को गड्ढा खोदकर जंगल में दफना दिया। इस सनसनीखेज घटना की भनक वन विभाग को लगभग दो महीने बाद लगी। इसके बाद तीन जुलाई को मुखबिर की सूचना पर विभाग ने जेसीबी की मदद से शव बाहर निकलवाया। जांच में पुष्टि हुई कि बाघ की मौत करंट लगने से हुई थी।

    पूरे मामले की जांच के दौरान वन विभाग ने 11 आरोपियों की पहचान की थी। इनमें से 10 आरोपियों को गिरफ्तार कर न्यायिक अभिरक्षा में भेज दिया गया जबकि मुख्य आरोपी मुन्ना कोल लगातार फरार था। पूछताछ के दौरान गिरफ्तार आरोपियों ने बार-बार यही बताया कि बाघ के नाखूनों और उनके ठिकाने की पूरी जानकारी केवल मुन्ना कोल के पास थी। ऐसे में विभाग उसकी गिरफ्तारी को इस मामले की सबसे अहम कड़ी मान रहा था।

    जांच में यह भी सामने आया कि बाघ की मौत के बाद मुन्ना कोल ने उसके चारों पैर काटकर अलग-अलग स्थानों पर जमीन में दबा दिए थे। वहीं गिरोह के अन्य दो आरोपी सत्यम और शुभम ने बाघ के केनाइन निकाल लिए थे। बाद में जब अन्य साथियों ने नाखून मांगे तो मुन्ना ने दावा किया कि जमीन में दबे पैर किसी जंगली जानवर ने खोदकर निकाल लिए जिसके कारण केवल चार नाखून ही बरामद हो सके। इसी वजह से अब तक बाघ के 14 नाखूनों का कोई सुराग नहीं मिल पाया है।

    वन विभाग के अधिकारियों के अनुसार घटना उजागर होने के बाद से मुन्ना कोल गंभीर बीमारी से जूझ रहा था और गिरफ्तारी से बचने के लिए लगातार अलग-अलग स्थानों पर इलाज कराता रहा। विभाग उसकी तलाश में जुटा था लेकिन 18 जुलाई को उसकी मौत हो गई। इससे अब जांच का सबसे महत्वपूर्ण सिरा समाप्त हो गया है और वन्यजीव तस्करी के संभावित नेटवर्क तक पहुंचना भी कठिन हो गया है।

    मझगवां रेंजर रंजन सिंह परिहार ने मुख्य आरोपी की मौत की पुष्टि करते हुए बताया कि अन्य आरोपियों ने भी पूछताछ में नाखूनों की जानकारी केवल मुन्ना कोल के पास होने की बात कही थी। वन विभाग अब उपलब्ध साक्ष्यों और गिरफ्तार आरोपियों से मिली जानकारी के आधार पर जांच आगे बढ़ा रहा है। साथ ही यह भी पता लगाने का प्रयास किया जा रहा है कि गायब नाखून कहीं वन्यजीव तस्करों के नेटवर्क तक तो नहीं पहुंचा दिए गए।

  • बिजली के बढ़ते बिल ने खोला चौंकाने वाला राज, फ्लैट में चल रहा था 300 से ज्यादा अजगरों का अवैध ठिकाना; पुलिस छापे में हुआ खुलासा

    बिजली के बढ़ते बिल ने खोला चौंकाने वाला राज, फ्लैट में चल रहा था 300 से ज्यादा अजगरों का अवैध ठिकाना; पुलिस छापे में हुआ खुलासा

    नई दिल्ली । चीन के झेजियांग प्रांत से सामने आए एक हैरान करने वाले मामले ने वन्यजीव संरक्षण एजेंसियों और कानून प्रवर्तन संस्थाओं का ध्यान आकर्षित किया है। एक सामान्य आवासीय फ्लैट के भीतर 300 से अधिक अजगरों की मौजूदगी का खुलासा होने के बाद यह मामला चर्चा का विषय बन गया है। विशेष बात यह रही कि पूरे मामले का पर्दाफाश किसी गुप्त सूचना या शिकायत से नहीं, बल्कि असामान्य रूप से बढ़ी बिजली खपत की जांच के दौरान हुआ। अधिकारियों ने जब फ्लैट पर छापा मारा तो वहां का दृश्य देखकर वे भी चौंक गए।

    मामले की शुरुआत उस समय हुई जब एक स्थानीय निवासी ने पहाड़ी क्षेत्र के पास एक असामान्य आकार और रंग का विशाल सांप देखा। प्रत्यक्षदर्शी के अनुसार सांप सामान्य स्थानीय प्रजातियों से अलग दिखाई दे रहा था और उसका आकार भी काफी बड़ा था। घटना की जानकारी मिलने पर पुलिस और वन्यजीव विशेषज्ञों ने संयुक्त रूप से जांच शुरू की। शुरुआती जांच में यह आशंका जताई गई कि सांप स्थानीय प्राकृतिक आवास का हिस्सा नहीं है और संभवतः किसी निजी स्थान से बाहर निकला है।

    वन्यजीव विशेषज्ञों ने जांच के दौरान महत्वपूर्ण जानकारी साझा की। उन्होंने बताया कि अजगरों जैसी प्रजातियों को नियंत्रित वातावरण में जीवित रखने और उनकी संख्या बढ़ाने के लिए विशेष तापमान और नमी की आवश्यकता होती है। इसके लिए बड़े हीटर, तापमान नियंत्रण उपकरण और नमी बनाए रखने वाली मशीनों का लगातार उपयोग करना पड़ता है। ऐसी व्यवस्था सामान्य घरेलू उपयोग की तुलना में कहीं अधिक बिजली की खपत करती है।

    इसी जानकारी के आधार पर जांचकर्ताओं ने क्षेत्र के बिजली उपभोग के आंकड़ों का विश्लेषण शुरू किया। इस दौरान एक फ्लैट ऐसा मिला जहां बिजली की खपत आसपास के अन्य घरों की तुलना में कई गुना अधिक दर्ज की गई थी। लगातार बढ़ती बिजली खपत ने अधिकारियों का संदेह और मजबूत कर दिया। इसके बाद संबंधित फ्लैट की निगरानी की गई और आवश्यक प्रक्रिया पूरी करने के बाद वहां छापेमारी की गई।

    छापे के दौरान अधिकारियों को जो मिला, उसने पूरे मामले को गंभीर बना दिया। फ्लैट के अलग-अलग कमरों और विशेष रूप से तैयार किए गए हिस्सों में 300 से अधिक अजगर पाए गए। जांच में पता चला कि घर को व्यवस्थित रूप से एक निजी ब्रीडिंग सेंटर के रूप में विकसित किया गया था। सांपों को नियंत्रित तापमान और नमी वाले वातावरण में रखा गया था ताकि उनकी देखभाल और प्रजनन प्रक्रिया सुचारू रूप से चल सके।

    अधिकारियों के अनुसार बरामद किए गए अधिकांश अजगर संरक्षित श्रेणी के वन्यजीवों में शामिल हैं। संबंधित कानूनों के तहत ऐसे जीवों को बिना अनुमति खरीदना, बेचना, पालना या उनका परिवहन करना गंभीर अपराध माना जाता है। प्रारंभिक जांच में यह भी सामने आया कि आरोपी आवश्यक सरकारी स्वीकृतियों के बिना इन जीवों का पालन कर रहा था। इसके बाद उसके खिलाफ वन्यजीव संरक्षण से जुड़े प्रावधानों के तहत मामला दर्ज किया गया।

    मामले की सुनवाई के बाद अदालत ने आरोपी को दुर्लभ और संरक्षित वन्यजीवों को नुकसान पहुंचाने तथा अवैध ब्रीडिंग गतिविधियों में शामिल पाए जाने पर सजा सुनाई। अधिकारियों का मानना है कि यह कार्रवाई अवैध वन्यजीव व्यापार और गैरकानूनी प्रजनन गतिविधियों पर रोक लगाने की दिशा में महत्वपूर्ण कदम है।

    विशेषज्ञों का कहना है कि हाल के वर्षों में कई देशों में पारंपरिक पालतू जानवरों के स्थान पर दुर्लभ और विदेशी प्रजातियों को पालने का चलन बढ़ा है। हालांकि यह प्रवृत्ति वन्यजीव संरक्षण, जैव विविधता और सार्वजनिक सुरक्षा के लिए चुनौती बन सकती है। इसी कारण विभिन्न देशों की एजेंसियां ऐसे मामलों की निगरानी बढ़ा रही हैं। झेजियांग का यह मामला भी इस बात का उदाहरण माना जा रहा है कि आधुनिक जांच तकनीकों और डेटा विश्लेषण की मदद से असामान्य गतिविधियों का पता लगाकर बड़े अवैध नेटवर्क का खुलासा किया जा सकता है।

  • भोपाल रेलवे स्टेशन पर बड़ी कार्रवाई 311 कछुए बरामद आरपीएफ वन विभाग की संयुक्त कार्रवाई के बाद STF ने शुरू की जांच

    भोपाल रेलवे स्टेशन पर बड़ी कार्रवाई 311 कछुए बरामद आरपीएफ वन विभाग की संयुक्त कार्रवाई के बाद STF ने शुरू की जांच

    भोपाल /मध्यप्रदेश की राजधानी भोपाल में स्टेट टाइगर स्ट्राइक फोर्स, आरपीएफ और वन विभाग ने संयुक्त कार्रवाई करते हुए कछुए तस्करी का मामला पकड़ा है। रेलवे स्टेशन पर चेकिंग के दौरान 311 कछुए बरामद किए गए और एक आरोपी को गिरफ्तार किया गया।

    भोपाल के बैरागढ़ के संत हिरदाराम रेलवे स्टेशन पर आरपीएफ ने बैग चेकिंग के दौरान दो बैगों में कुल 311 कछुए पकड़े। आरोपी अजय सिंह राजपूत पिता रामकुमार रेलवे कोच में अटेंडर का काम करता है। आरोपी ने पूछताछ में बताया कि ढाई हजार रुपए की लालच में वह कछुओं को देवास और इंदौर भेजने के लिए ले जा रहा था।

    मामले की गंभीरता को देखते हुए वन विभाग को जानकारी दी गई। तुरंत स्टेट टाइगर स्ट्राइक फोर्स और वन विभाग का स्टाफ मौके पर पहुंचा और आरोपी को हिरासत में लिया। आरपीएफ की पूछताछ में यह सामने आया कि रविंद्र कश्यप नामक व्यक्ति ने ढाई हजार रुपए की लालच देकर आरोपी से कछुए तस्करी कराई।

    फिलहाल आरोपी के खिलाफ वन अपराध प्रकरण क्रमांक 237/23 पंजीबद्ध किया गया है। STF मामले की जांच में जुटी है और आरोपी से विस्तार से पूछताछ की जा रही है। आज उसे माननीय न्यायालय में पेश किया जाएगा।यह मामला वन्यजीव तस्करी और रेलवे सुरक्षा दोनों के लिए गंभीर चेतावनी माना जा रहा है