Tag: Wimbledon 2026

  • विंबलडन पहुंचीं दीप्ति शर्मा, धोनी और जोकोविच की मानसिक मजबूती को बताया एक जैसा

    विंबलडन पहुंचीं दीप्ति शर्मा, धोनी और जोकोविच की मानसिक मजबूती को बताया एक जैसा


    नई दिल्ली। भारतीय महिला क्रिकेट टीम की अनुभवी ऑलराउंडर दीप्ति शर्मा इन दिनों विंबलडन का रोमांच करीब से देख रही हैं। इस दौरान उन्होंने टेनिस के महान खिलाड़ी नोवाक जोकोविच और भारत के पूर्व कप्तान महेंद्र सिंह धोनी की तुलना करते हुए कहा कि दोनों खिलाड़ियों की सबसे बड़ी ताकत कठिन परिस्थितियों में भी शांत रहकर मुकाबले का रुख बदलने की क्षमता है।

    जियो हॉटस्टार से बातचीत में दीप्ति ने कहा कि जब भी नोवाक जोकोविच का नाम आता है तो सबसे पहले उनकी मानसिक मजबूती की चर्चा होती है। उन्होंने कहा कि जोकोविच कभी हार नहीं मानते और चाहे हालात कितने भी चुनौतीपूर्ण हों, उनका आत्मविश्वास और संयम हमेशा कायम रहता है। यही गुण उन्हें दुनिया के महानतम खिलाड़ियों में शामिल करता है।

    दीप्ति ने कहा कि क्रिकेट में अगर किसी खिलाड़ी की तुलना जोकोविच से की जा सकती है तो वह महेंद्र सिंह धोनी हैं। उनके अनुसार धोनी मैदान पर हमेशा बेहद शांत दिखाई देते हैं और दबाव की स्थिति में भी उनके चेहरे पर घबराहट नहीं दिखती। यही कारण है कि उन्होंने अपने करियर में कई मुश्किल मुकाबलों में टीम इंडिया को जीत दिलाई। उन्होंने कहा कि दोनों दिग्गज खिलाड़ियों से यह सीख मिलती है कि कठिन परिस्थितियों में धैर्य और मानसिक संतुलन बनाए रखना ही सफलता की सबसे बड़ी कुंजी है।

    भारतीय ऑलराउंडर ने यह भी स्वीकार किया कि मौजूदा समय में नोवाक जोकोविच उनके पसंदीदा टेनिस खिलाड़ी हैं। उन्होंने कहा कि वह बचपन से रोजर फेडरर और राफेल नडाल जैसे दिग्गजों को खेलते हुए देखती आई हैं, लेकिन पिछले कुछ वर्षों में जोकोविच की जुझारू मानसिकता और कभी हार न मानने वाले रवैये ने उन्हें सबसे अधिक प्रभावित किया है। अब वह उनके लगभग हर मुकाबले को फॉलो करती हैं।

    दीप्ति ने विंबलडन का अनुभव साझा करते हुए कहा कि यह उनका लंबे समय से देखा गया सपना था। उन्होंने कहा कि वर्षों तक टीवी पर इस प्रतिष्ठित ग्रैंड स्लैम को देखने के बाद पहली बार यहां लाइव मुकाबले देखने का अनुभव बेहद खास है। स्टेडियम का माहौल, दर्शकों का उत्साह और प्रतियोगिता का वातावरण उन्हें बेहद रोमांचित कर रहा है।

    जब उनसे पूछा गया कि यदि उन्हें विंबलडन में किसी तीन भारतीय खेल हस्तियों के साथ मैच देखने का मौका मिले तो वह किन्हें चुनेंगी, तो उन्होंने सचिन तेंदुलकर, रवि शास्त्री और सुनील गावस्कर का नाम लिया। दीप्ति का मानना है कि इन तीनों दिग्गजों के साथ बैठकर मैच देखने और खेल पर उनकी राय सुनना अपने आप में यादगार अनुभव होगा।

    दीप्ति शर्मा का यह बयान खेल जगत के दो महान खिलाड़ियों की मानसिक मजबूती और नेतृत्व क्षमता को लेकर उनकी गहरी समझ को भी दर्शाता है। उन्होंने यह संदेश दिया कि किसी भी खेल में प्रतिभा के साथ मानसिक दृढ़ता और दबाव में सही फैसले लेने की क्षमता ही महान खिलाड़ियों की पहचान होती है।

  • विंबलडन 2026: एलेक्जेंड्रा एला ने रचा इतिहास, पहली फिलीपीन खिलाड़ी बनीं जो तीसरे दौर में पहुंचीं

    विंबलडन 2026: एलेक्जेंड्रा एला ने रचा इतिहास, पहली फिलीपीन खिलाड़ी बनीं जो तीसरे दौर में पहुंचीं


    नई दिल्ली। विंबलडन 2026 में फिलीपींस की युवा टेनिस स्टार एलेक्जेंड्रा एला ने ऐतिहासिक उपलब्धि हासिल करते हुए पहली बार महिला एकल के तीसरे दौर में प्रवेश कर लिया। गुरुवार को ऑल इंग्लैंड क्लब में खेले गए दूसरे दौर के मुकाबले में एला ने ऑस्ट्रेलिया की माया जॉइंट को 3-6, 6-2, 6-0 से हराकर न सिर्फ शानदार वापसी की, बल्कि विंबलडन के तीसरे दौर में पहुंचने वाली फिलीपींस की पहली खिलाड़ी बनने का गौरव भी हासिल किया।

    मुकाबले की शुरुआत एला के लिए चुनौतीपूर्ण रही। पहले सेट में माया जॉइंट ने आक्रामक खेल दिखाते हुए 6-3 से बढ़त बना ली। शुरुआती झटके के बाद एला ने अपना खेल पूरी तरह बदल दिया और दूसरे सेट में बेहतरीन सर्विस तथा दमदार ग्राउंड स्ट्रोक्स की बदौलत 6-2 से मुकाबला बराबरी पर ला दिया।

    निर्णायक तीसरे सेट में 21 वर्षीय एला ने अपने प्रतिद्वंद्वी को कोई मौका नहीं दिया। उन्होंने शुरुआत में ही सर्विस ब्रेक हासिल कर दबाव बनाया और लगातार शानदार प्रदर्शन करते हुए 6-0 से सेट जीतकर मैच अपने नाम कर लिया। पूरे मुकाबले में उनकी फिटनेस, संयम और आक्रामक खेल ने दर्शकों का भरपूर मनोरंजन किया।

    यह जीत एला के लिए इसलिए भी खास रही क्योंकि पिछले वर्ष ईस्टबोर्न ओपन के फाइनल में उन्हें माया जॉइंट के खिलाफ बेहद करीबी मुकाबले में हार का सामना करना पड़ा था। उस मैच का फैसला तीसरे सेट के टाईब्रेक में 12-10 से हुआ था। विंबलडन में मिली यह जीत उनके लिए उस हार का बेहतरीन जवाब साबित हुई।

    महिला एकल के अन्य मुकाबलों में 21वीं वरीयता प्राप्त मैरी बौजकोवा ने शानदार प्रदर्शन करते हुए ग्रांट को 7-5, 6-3 से हराकर तीसरी बार विंबलडन के तीसरे दौर में जगह बनाई। अब उनका सामना पिछले साल की क्वार्टर फाइनलिस्ट ल्यूडमिला सैमसनोवा से होगा, जिन्होंने 15वीं वरीयता प्राप्त डायना श्नाइडर को 6-4, 4-6, 6-2 से हराया।

    अमेरिका की एमा नवारो ने भी लगातार तीसरे वर्ष विंबलडन के तीसरे दौर में प्रवेश किया। उन्होंने ओक्साना सेलेखमेतेवा को 3-6, 6-4, 6-1 से मात देकर शानदार वापसी दर्ज की। नवारो का अगला मुकाबला मार्टा कोस्त्युक और अन्ना ब्लिंकोवा के बीच होने वाले मैच की विजेता से होगा।

    एलेक्जेंड्रा एला की इस ऐतिहासिक जीत ने न केवल फिलीपींस के टेनिस इतिहास में नया अध्याय जोड़ा है, बल्कि यह भी साबित कर दिया कि युवा खिलाड़ी अब ग्रैंड स्लैम स्तर पर बड़े उलटफेर करने का दम रखते हैं।

  • सीधे सेटों में जीते जेवरेव, बेरेटिनी और आर्थर फेरी ने भी अगले दौर का टिकट कटाया

    सीधे सेटों में जीते जेवरेव, बेरेटिनी और आर्थर फेरी ने भी अगले दौर का टिकट कटाया


    नई दिल्ली। विंबलडन 2026 में दूसरी वरीयता प्राप्त अलेक्जेंडर जेवरेव ने अपने शानदार खेल का प्रदर्शन करते हुए पुरुष एकल के तीसरे दौर में जगह बना ली है। जर्मनी के स्टार खिलाड़ी ने फ्रांस के वैलेंटिन रॉयर को सीधे सेटों में 6-1, 6-3, 7-6(3) से हराकर जीत दर्ज की। वहीं इटली के माटेओ बेरेटिनी और मेजबान ब्रिटेन के युवा खिलाड़ी आर्थर फेरी ने भी अपने-अपने मुकाबले जीतकर अगले दौर का टिकट हासिल कर लिया।

    फ्रेंच ओपन चैंपियन जेवरेव ने मुकाबले की शुरुआत से ही आक्रामक अंदाज अपनाया और पहले दो सेट बेहद आसानी से अपने नाम कर लिए। तीसरे सेट में रॉयर ने कड़ी चुनौती पेश की और मुकाबले को टाई-ब्रेक तक पहुंचा दिया, लेकिन निर्णायक क्षणों में जेवरेव का अनुभव भारी पड़ा। दो घंटे चार मिनट तक चले मुकाबले में उन्होंने संयम बनाए रखते हुए जीत अपने नाम कर ली।

    जीत के बाद जेवरेव ने कहा कि लगभग ढाई सेट तक उन्होंने अपना सर्वश्रेष्ठ टेनिस खेला। इसके बाद उनका ध्यान थोड़ा भटका, जिसका प्रतिद्वंद्वी ने फायदा उठाने की कोशिश की। उन्होंने माना कि ग्रैंड स्लैम के आगे के दौर में ऊर्जा बचाकर रखना बेहद जरूरी होता है और सीधे सेटों में मिली जीत उनके आत्मविश्वास को भी बढ़ाएगी। जेवरेव ने यह भी कहा कि विंबलडन हमेशा से उनका पसंदीदा टूर्नामेंट रहा है और इस बार वह यहां बड़ी सफलता हासिल करने के लिए पूरी तरह तैयार हैं।

    इटली के माटेओ बेरेटिनी ने भी प्रभावशाली प्रदर्शन करते हुए फ्रांस के आर्थर फिल्स को 6-4, 7-5, 3-6, 6-3 से मात दी। 2021 के विंबलडन उपविजेता बेरेटिनी ने सेंटर कोर्ट पर दमदार सर्विस और शानदार शॉट्स से मुकाबले पर नियंत्रण बनाए रखा। तीसरा सेट गंवाने के बाद उन्होंने बेहतरीन वापसी करते हुए चौथा सेट जीत लिया और 2023 के बाद पहली बार विंबलडन के तीसरे दौर में प्रवेश किया।

    दिन का सबसे चर्चित प्रदर्शन ब्रिटेन के 23 वर्षीय आर्थर फेरी का रहा। उन्होंने फिनलैंड के ओटो विर्टानेन को 5-7, 7-6(3), 6-3, 6-3 से हराकर अपने करियर की सबसे बड़ी जीत दर्ज की। पहला सेट हारने के बाद फेरी ने शानदार वापसी करते हुए लगातार तीन सेट अपने नाम किए। इस उपलब्धि के साथ वह वर्ष 2000 के बाद विंबलडन पुरुष एकल के तीसरे दौर में पहुंचने वाले केवल चौथे ब्रिटिश वाइल्ड कार्ड खिलाड़ी बन गए हैं।

    फेरी का मुकाबला देखने के लिए प्रिंसेस ऑफ वेल्स भी कुछ समय तक स्टेडियम में मौजूद रहीं। हालांकि घरेलू दर्शकों और खास मेहमानों की मौजूदगी के बावजूद युवा खिलाड़ी पर किसी तरह का दबाव नहीं दिखा। उन्होंने पूरे आत्मविश्वास के साथ अपना खेल जारी रखा। हाल के सप्ताहों में भी उनकी फॉर्म शानदार रही है। वह बर्मिंघम और नॉटिंघम के ग्रास कोर्ट टूर्नामेंट के फाइनल तक पहुंचे थे और पहले दौर में चौथी वरीयता प्राप्त बेन शेल्टन को हराकर बड़ा उलटफेर भी कर चुके हैं।

    जीत के बाद फेरी ने कहा कि जिस इलाके में वह बड़े हुए वहां से कुछ ही मिनट की दूरी पर स्थित विंबलडन में खेलना उनके लिए किसी सपने के सच होने जैसा है। उन्होंने बताया कि स्टेडियम में परिवार, दोस्त और कई परिचितों की मौजूदगी ने उन्हें अतिरिक्त आत्मविश्वास दिया। अब तीसरे दौर में उनकी कोशिश इस शानदार लय को बरकरार रखते हुए अपने यादगार अभियान को आगे बढ़ाने की होगी।