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  • US Open 2026 से दुनिया के नंबर एक जैनिक सिनर बाहर, घुटने की चोट के कारण नहीं खेल पाएंगे साल का आखिरी ग्रैंड स्लैम

    US Open 2026 से दुनिया के नंबर एक जैनिक सिनर बाहर, घुटने की चोट के कारण नहीं खेल पाएंगे साल का आखिरी ग्रैंड स्लैम

    नई दिल्ली ।साल के आखिरी ग्रैंड स्लैम यूएस ओपन 2026 से पहले पुरुष टेनिस जगत को बड़ा झटका लगा है। दुनिया के नंबर एक खिलाड़ी जैनिक सिनर ने दाएं घुटने की चोट के कारण टूर्नामेंट से अपना नाम वापस ले लिया है। 25 वर्षीय इटैलियन स्टार ने बताया कि वह 30 अगस्त से शुरू होने वाले मुख्य ड्रॉ तक पूरी तरह फिट नहीं हो पाएंगे।

    सिनर पिछले कुछ समय से चोट से उबरने पर ध्यान दे रहे थे। उन्होंने अपनी टीम और मेडिकल स्टाफ के साथ लगातार रिकवरी की कोशिश की और मोंटे कार्लो में अभ्यास के लिए कोर्ट पर भी वापसी की। हालांकि, अभ्यास के बाद उन्हें महसूस हुआ कि घुटने को पूरी तरह ठीक होने के लिए अभी और समय की जरूरत है।

    यूएस ओपन से हटने का फैसला सिनर के लिए आसान नहीं था। न्यूयॉर्क का यह ग्रैंड स्लैम उनके करियर में खास महत्व रखता है और यहां प्रशंसकों के सामने खेलने को लेकर वह उत्साहित थे। चोट के कारण टूर्नामेंट से बाहर होना उनके लिए निराशाजनक है, लेकिन उन्होंने फिटनेस को प्राथमिकता देने का फैसला किया।

    सिनर ने जुलाई में विंबलडन का खिताब अपने नाम किया था। फाइनल मुकाबले में उन्होंने अलेक्जेंडर ज्वेरेव को हराकर लगातार दूसरी बार ऑल इंग्लैंड क्लब की ट्रॉफी जीती। इस जीत के साथ उनके करियर के ग्रैंड स्लैम खिताबों की संख्या पांच हो गई। विंबलडन के बाद से वह किसी प्रतिस्पर्धी टूर्नामेंट में नहीं उतरे हैं।

    घुटने की समस्या के कारण सिनर ने मॉन्ट्रियल और सिनसिनाटी में आयोजित हार्ड कोर्ट प्रतियोगिताओं में भी हिस्सा नहीं लिया। यूएस ओपन से पहले इन टूर्नामेंटों को खिलाड़ियों के लिए तैयारी का अहम हिस्सा माना जाता है। लगातार मुकाबलों से दूर रहने के बाद सिनर की फिटनेस को लेकर स्थिति स्पष्ट नहीं थी, लेकिन अब उन्होंने न्यूयॉर्क में नहीं खेलने का निर्णय ले लिया है।

    2026 का सत्र सिनर के लिए शानदार रहा है। उन्होंने मियामी, मोंटे कार्लो, मैड्रिड और रोम सहित कई महत्वपूर्ण टूर्नामेंटों में खिताब जीते। फ्रेंच ओपन में उन्हें दूसरे दौर में जुआन मैनुअल सेरुंडोलो के खिलाफ हार का सामना करना पड़ा था। इसके बाद उन्होंने वापसी करते हुए विंबलडन में शानदार प्रदर्शन किया और चैंपियन बने।

    सिनर के हटने से यूएस ओपन के खिताबी समीकरण में बड़ा बदलाव आया है। कार्लोस अल्कारेज, नोवाक जोकोविच और अलेक्जेंडर ज्वेरेव जैसे शीर्ष खिलाड़ियों के लिए अब खिताब की दौड़ में आगे बढ़ने का अवसर और मजबूत हुआ है। खासतौर पर सिनर और अल्कारेज के बीच संभावित मुकाबले का इंतजार कर रहे दर्शकों को इस बार यह टक्कर देखने को नहीं मिलेगी।

    सिनर और अल्कारेज की प्रतिद्वंद्विता पिछले कुछ वर्षों में पुरुष टेनिस की सबसे चर्चित प्रतिद्वंद्विताओं में शामिल रही है। दोनों कई बड़े मुकाबलों में आमने-सामने आ चुके हैं। यूएस ओपन से सिनर के हटने के बाद इस प्रतिष्ठित टूर्नामेंट में अल्कारेज पर भी निगाहें रहेंगी।

    सिनर के लिए यह फैसला एक और वजह से महत्वपूर्ण है। 2019 में ग्रैंड स्लैम स्तर पर शुरुआत करने के बाद वह लगातार मेजर टूर्नामेंटों में हिस्सा लेते रहे हैं। चोट के कारण यूएस ओपन 2026 से बाहर होने के साथ उनका यह लगातार ग्रैंड स्लैम खेलने का सिलसिला पहली बार टूट जाएगा।

    फिलहाल सिनर का ध्यान पूरी तरह स्वस्थ होने और सुरक्षित तरीके से प्रतिस्पर्धी टेनिस में लौटने पर है। यूएस ओपन में उनकी गैरमौजूदगी से टूर्नामेंट की प्रतिस्पर्धा जरूर बदली है, लेकिन अब बाकी शीर्ष खिलाड़ियों के पास न्यूयॉर्क में खिताब हासिल करने का बड़ा मौका होगा।

  • विंबलडन का दिल है सेंटर कोर्ट: 104 साल का गौरवशाली इतिहास, यहीं लिखी गई टेनिस की सबसे बड़ी दास्तानें

    विंबलडन का दिल है सेंटर कोर्ट: 104 साल का गौरवशाली इतिहास, यहीं लिखी गई टेनिस की सबसे बड़ी दास्तानें


    नई दिल्ली । टेनिस की दुनिया में विंबलडन सिर्फ एक ग्रैंड स्लैम टूर्नामेंट नहीं बल्कि परंपरा प्रतिष्ठा और इतिहास का सबसे बड़ा प्रतीक माना जाता है। वर्ष 1877 में शुरू हुए इस टूर्नामेंट ने दुनिया को अनगिनत यादगार मुकाबले और महान खिलाड़ी दिए हैं लेकिन इसकी सबसे बड़ी पहचान सेंटर कोर्ट है जिसे विंबलडन का दिल कहा जाता है। यही वह मंच है जहां हर टेनिस खिलाड़ी खेलने और जीत दर्ज करने का सपना देखता है।

    सेंटर कोर्ट का इतिहास भी उतना ही दिलचस्प है जितना यहां खेले गए मुकाबलों का। शुरुआती दौर में विंबलडन के कोर्ट अलग-अलग बनाए गए थे लेकिन वर्ष 1881 में दो कोर्ट को मिलाकर एक मुख्य कोर्ट तैयार किया गया जो परिसर के बिल्कुल मध्य में स्थित था। इसी वजह से इसका नाम सेंटर कोर्ट रखा गया। बाद में वर्ष 1922 में जब ऑल इंग्लैंड लॉन टेनिस एंड क्रोके क्लब नए परिसर में स्थानांतरित हुआ तब आधुनिक सेंटर कोर्ट का निर्माण हुआ और तभी से यह विंबलडन की सबसे बड़ी पहचान बन गया।

    दिलचस्प बात यह है कि इस कोर्ट का उपयोग पूरे वर्ष में केवल दो सप्ताह के लिए किया जाता है। बाकी समय इसकी घास और सतह की विशेष देखभाल की जाती है ताकि टूर्नामेंट के दौरान खिलाड़ियों को सर्वोत्तम गुणवत्ता का कोर्ट मिल सके। यहां केवल बारहमासी राई घास का इस्तेमाल किया जाता है और उसकी लंबाई करीब 8 मिलीमीटर रखी जाती है जिससे खेल की गति और गुणवत्ता बनी रहती है।

    सेंटर कोर्ट की एक और खास पहचान इसका रॉयल बॉक्स है जहां ब्रिटिश शाही परिवार और विशेष अतिथि बैठकर मुकाबलों का आनंद लेते हैं। वर्ष 2009 में यहां आधुनिक रिट्रैक्टेबल रूफ लगाया गया जिससे बारिश के दौरान भी मुकाबले बिना ज्यादा बाधा के जारी रखे जा सकते हैं। महज कुछ मिनटों में छत बंद कर खेल दोबारा शुरू कर दिया जाता है।

    इस कोर्ट पर खेलने के लिए खिलाड़ियों को पूरी तरह सफेद पोशाक पहनना अनिवार्य होता है। इसके अलावा कोर्ट के आसपास किसी भी प्रकार के व्यावसायिक विज्ञापन बोर्ड लगाने की अनुमति नहीं दी जाती ताकि विंबलडन की पारंपरिक गरिमा और ऐतिहासिक स्वरूप बरकरार रहे।

    सेंटर कोर्ट ने टेनिस इतिहास के कई स्वर्णिम पल देखे हैं। रोजर फेडरर ने अपने आठ विंबलडन खिताब इसी कोर्ट पर जीते। वर्ष 2008 में फेडरर और राफेल नडाल के बीच खेला गया ऐतिहासिक फाइनल आज भी टेनिस इतिहास के सबसे महान मुकाबलों में गिना जाता है। वहीं वर्ष 2019 में नोवाक जोकोविच और फेडरर के बीच खेला गया विंबलडन इतिहास का सबसे लंबा पुरुष एकल फाइनल भी इसी कोर्ट का हिस्सा बना।

    आज सेंटर कोर्ट केवल एक खेल मैदान नहीं बल्कि उत्कृष्टता परंपरा और गौरव का प्रतीक बन चुका है। यहां जीत हासिल करना किसी भी खिलाड़ी के करियर की सबसे बड़ी उपलब्धियों में शामिल माना जाता है। यही वजह है कि जब भी विंबलडन का नाम लिया जाता है तो सबसे पहले सेंटर कोर्ट की भव्यता और उससे जुड़ी ऐतिहासिक यादें लोगों के सामने उभर आती हैं।