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  • गणतंत्र दिवस पर पिछले 16 सालों में कौन-कौन से राज्य रहे झांकी के विजेता, जानिए कैसे होता है चयन ?

    गणतंत्र दिवस पर पिछले 16 सालों में कौन-कौन से राज्य रहे झांकी के विजेता, जानिए कैसे होता है चयन ?

    नई दिल्ली। गणतंत्र दिवस की झांकियां भारत के राष्ट्रीय उत्सव में एक खास जगह रखती हैं। हर भारतीय के बचपन की यादें समेटे हुए यह परेड श की एक बदलती हुई कहानी दिखाती है। 1952 में कल्चरल झांकियां शुरू की गईं, जिससे परेड में गर्व और अनेकता की भावना का एक नया पहलू जुड़ा।

    सांस्कृतिक झांकियों की शुरुआत असल में “विविधता में एकता” के तहत हुई थी। शुरुआती परेड में साधारण झांकियां होती थीं जिनमें फ्लैटबेड ट्रकों पर क्षेत्रीय हस्तशिल्प और लोक कलाकार होते थे। धीरे-धीरे समय के साथ झांकियों की झलक भी बदलती गई। आज हम यहां पिछले 16 सालों में जो झांकियां विजेता रहीं, उनकी बात करेंगे।

    उत्तर प्रदेश, महाकुंभ 2025
    इस झांकी ने महाकुंभ मेले का एक शानदार नजारा पेश किया था। इसमें ‘समुद्र मंथन’, ‘अमृत कलश’ और संगम के किनारे पवित्र स्नान करते साधु-संतों को दिखाकर आध्यात्मिक भव्यता को दर्शाया गया था। इसमें ‘विरासत’ और ‘विकास’ के लाक्षणिक संगम को भी दिखाया गया था।
    ओडिशा, महिला सशक्तिकरण और रेशम 2024

    झांकी में पट्टाचित्र कला रूप दिखाया गया था और राज्य की हस्तशिल्प अर्थव्यवस्था में महिलाओं की भूमिका पर जोर दिया गया था। इसकी बारीक हाथ से बनी डिटेल्स और पारंपरिक नर्तकियों की लाइव परफॉर्मेंस के लिए इसकी खूब तारीफ हुई।
    उत्तराखंड, मानसखंड 2023

    इस झांकी में घने देवदार के जंगलों के बीच जागेश्वर धाम को दिखाया गया था। यह कर्तव्य पथ पर शांत, ‘देवभूमि’ का माहौल लाने के लिए खास थी।

    उत्तर प्रदेश, अयोध्या और राम मंदिर 2021
    इसमें बन रहे राम मंदिर का एक भव्य मॉडल दिखाया गया था। इसमें दीपोत्सव की झलकियां और रामायण महाकाव्य की अलग-अलग कहानियों के साथ-साथ ऋषि वाल्मीकि की एक विशाल मूर्ति भी दिखाई गई थी।

    असम, भोरताल नृत्य और हस्तशिल्प 2020
    इस झांकी को भोरताल नृत्य और राज्य के बांस और बेंत की कारीगरी पर फोकस करके दिखाया गया था। झांकी पर कलाकारों द्वारा मंजीरों की लयबद्धता से एक अनोखा अनुभव हुआ।
    त्रिपुरा 2019

    इस झांकी में गांधीवादी तरीके से ग्रामीण अर्थव्यवस्था को सशक्त बनता हुआ दर्शाया गया था।
    महाराष्ट्र 2018

    इस झांकी में छत्रपति शिवाजी महाराज के राज तिलक को दर्शाया गया था।
    अरुणाचल प्रदेश 2017

    इस झांकी में मोनपास के याक डांस को दर्शाया गया।

    पश्चिम बंगाल 2016

    इस झांकी में भटके हुए जोगियों को दर्शाया गया।
    महाराष्ट्र 2015

    इस झांकी की थीम वारी से पंढर पुर थी।
    पश्चिम बंगाल 2014

    इस झांकी की थीम पुरुलिया छऊ नृत्य थी।
    केरल 2013

    इसने “गॉड्स ओन कंट्री” की प्राकृतिक सुंदरता को वहां के लोगों की आजीविका के साथ खूबसूरती से बैलेंस किया, जिसमें एक विशाल हाउस-बोट (केट्टुवल्लम) का रेप्लिका दिखाया गया था।
    एचआरडी मंत्रालय 2012

    इस झांकी थीम साक्षर भारत थी।
    दिल्ली 2011

    इस झांकी की थीम सांस्कृतिक और धार्मिक सद्भाव थी।
    संस्कृति मंत्रालय, 2010

    इस झांकी थीम भारतीय संगीत वाद्ययंत्र थी।

  • अभ्युदय मध्य प्रदेश क्विज के विजेताओं का मुख्यमंत्री आज करेंगे सम्मान

    अभ्युदय मध्य प्रदेश क्विज के विजेताओं का मुख्यमंत्री आज करेंगे सम्मान

    भोपाल। भय नहीं, भ्रम नहीं, पूरा विश्वास, विरासत के साथ विकास के मूलमंत्र पर आयोजित डॉ. मोहन यादव का अभ्युदय मध्य प्रदेश क्विज के 24 विजेताओं का सम्मान मंगलवार, 13 जनवरी, सायं 4 बजे मुख्यमंत्री के निवास पर आयोजित सम्मान समारोह में किया जायेगा। मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव स्वयं विजेता अभ्यर्थियों को सम्मानित करेंगे एवं सभी विजेताओं के साथ चाय पर चर्चा करेंगे।


    वीर भारत न्यास के न्यासी सचिव श्रीराम तिवारी ने बताया कि यह गौरव का झण है जब मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव के नेतृत्व में राज्य विरासत को संरक्षित करते हुए विकास के पथ पर अग्रसर है। सेवा भाव, सुशासन और दायित्वबोध के साथ मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव के नेतृत्व में मध्यप्रदेश ने विकास के दो सफल वर्ष पूर्ण किए हैं। परंपरा, धार्मिक एवं आध्यात्मिक मूल्यों के सम्मान के साथ संस्कृति को केंद्र में रखकर प्रदेश निरंतर नई ऊँचाइयों की ओर अग्रसर है।


    अभ्युदय मध्य प्रदेश क्विज़ इसी दृष्टि का सशक्त माध्यम बना, जो युवाओं को हमारी सांस्कृतिक विरासत, आध्यात्मिक चेतना और विकास यात्रा से जोड़ता है। इस आयोजन ने ज्ञान, उत्तरदायित्व और सहभागिता को प्रोत्साहित किया। उन्होंने कहा कि इसी का परिणाम है कि प्रदेश के विभिन्न आयुवर्ग, हर समुदाय, दूरस्थ अंचलों से अभ्युदय मध्यप्रदेश क्विज में लाखों लोगों ने भागीदारी की। इसी कड़ी में 13 जनवरी को मुख्यमंत्री के निवास स्थित समत्व भवन में सम्मान समारोह का आयोजन किया जा रहा है। जिसमें मुख्यमंत्री भव्य पुरस्कारों – लैपटॉप, ई-बाइक, ई-स्कूटी, 24 विक्रमादित्य वैदिक घड़ी को पुरस्कार स्वरूप विजेताओं को प्रदान करेंगे।