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  • उत्तर प्रदेश विधानसभा का शीतकालीन सत्र: अनुपूरक बजट और वंदे मातरम् पर लंबी चर्चा की योजना

    उत्तर प्रदेश विधानसभा का शीतकालीन सत्र: अनुपूरक बजट और वंदे मातरम् पर लंबी चर्चा की योजना


    नई दिल्ली । उत्तर प्रदेश विधानसभा का शीतकालीन सत्र आज 19 दिसंबर से शुरू हो गया है और यह 24 दिसंबर तक चलेगा। इस सत्र में कई महत्वपूर्ण मुद्दों पर चर्चा होने वाली है जिसमें दिवंगत सदस्यों को श्रद्धांजलि अनुपूरक बजट और वंदे मातरम् पर विशेष चर्चा प्रमुख हैं। मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ ने सभी राजनीतिक दलों से इस सत्र के सुचारु संचालन में सहयोग की अपील की है और जनहित के मुद्दों पर सक्रिय भागीदारी का आश्वासन दिया है।

    शीतकालीन सत्र का प्रारंभ

    सत्र के पहले दिन 19 दिसंबर को दिवंगत सदस्यों को श्रद्धांजलि अर्पित की जाएगी। इस दिन का मुख्य उद्देश्य विधानसभा में योगदान देने वाले उन नेताओं को सम्मानित करना है जिनका हाल ही में निधन हुआ था। इसके बाद 20 और 21 दिसंबर को अवकाश रहेगा। 22 दिसंबर को सत्र का मुख्य कार्यक्रम शुरू होगा जिसमें वित्तीय वर्ष 2025-26 का अनुपूरक बजट पेश किया जाएगा।

    अनुपूरक बजट और वंदे मातरम् पर चर्चा

    सत्र के दौरान 22 दिसंबर को अनुपूरक बजट पेश किया जाएगा जिसमें राज्य सरकार की अतिरिक्त वित्तीय जरूरतों के लिए प्रस्तावित खर्चों पर चर्चा की जाएगी। इसके अलावा उसी दिन वंदे मातरम् पर पांच घंटे की विशेष चर्चा आयोजित की जाएगी। यह चर्चा भारतीय राष्ट्रवाद और संस्कृति को बढ़ावा देने के संदर्भ में होगी। मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ ने कहा कि विधानसभा जन आकांक्षाओं का महत्वपूर्ण मंच है और इस चर्चा के माध्यम से सरकार सभी मुद्दों पर सक्रिय भागीदारी करेगी।

    ‘विकसित उत्तर प्रदेश विजन डॉक्यूमेंट-2047’

    मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ ने शीतकालीन सत्र के उद्घाटन से पहले प्रदेश के ‘विकसित उत्तर प्रदेश विजन डॉक्यूमेंट-2047’ पर बात की। उन्होंने पिछले सत्र में इस विषय पर हुई 27 घंटे लंबी चर्चा का हवाला दिया। इस दौरान राज्य सरकार ने पूरे प्रदेश से लगभग 98 लाख सुझाव प्राप्त किए थे जिनका उपयोग आईआईटी कानपुर के सहयोग से अंतिम रूप देने में किया जाएगा। यह डॉक्यूमेंट उत्तर प्रदेश के 2047 तक के विकास का रोडमैप तय करेगा।

    एसआईआर अभियान और वीर बाल दिवस

    मुख्यमंत्री ने निर्वाचन आयोग द्वारा चलाए जा रहे एसआईआर स्पेशल इन्फॉर्मेशन रिवाइज अभियान की सराहना की। इस अभियान के माध्यम से मतदाता सूची का पुनरीक्षण किया जाएगा जिससे लोकतंत्र को और मजबूत किया जाएगा। साथ ही प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी की प्रेरणा से 26 दिसंबर को वीर बाल दिवस मनाने की घोषणा की गई है। यह दिन भारतीय संस्कृति और राष्ट्र के प्रति बच्चों को प्रेरित करने के लिए मनाया जाएगा।

    विधायी कार्य और आगामी कार्यक्रम

    सत्र के अंतिम दो दिनों यानी 23 और 24 दिसंबर को विधायी कार्य और विभिन्न मुद्दों पर चर्चाएं आयोजित की जाएंगी। इन दो दिनों में विभिन्न विधेयकों पर विचार किया जाएगा और जनहित से जुड़े मुद्दों पर चर्चा होगी। मुख्यमंत्री ने इस बात को स्पष्ट किया कि राज्य सरकार की प्राथमिकता हमेशा जनहित में निर्णय लेना और समस्याओं का समाधान करना रहेगा।

    संपूर्ण सत्र में राजनीतिक दलों से सहयोग की अपील करते हुए विधानसभा अध्यक्ष सतीश महाना ने यह भी कहा कि इस सत्र के दौरान जनोपयोगी मुद्दों पर सकारात्मक चर्चा की जाएगी। उन्होंने उम्मीद जताई कि सभी दलों के सहयोग से विधानसभा का संचालन सुचारु रूप से होगा और प्रदेश के विकास के लिए महत्वपूर्ण निर्णय लिए जाएंगे।

  • कांग्रेस ने BJP पर साधा निशाना पप्पू यादव भी उखड़े मनरेगा के विरोध में सियासी घमासान

    कांग्रेस ने BJP पर साधा निशाना पप्पू यादव भी उखड़े मनरेगा के विरोध में सियासी घमासान


    नई दिल्ली । केंद्र सरकार द्वारा 16 दिसंबर 2025 को लोकसभा में पेश किए गए VB-G RAM G विधेयक ने भारतीय राजनीति में एक नई सियासी हलचल मचा दी है। यह विधेयक महात्मा गांधी राष्ट्रीय ग्रामीण रोजगार गारंटी अधिनियम मनरेगा की जगह लेगा जिसे विपक्षी दलों ने गरीब और किसान विरोधी करार दिया है। विपक्ष का आरोप है कि सरकार ने पहले मनरेगा को कमजोर किया और अब इसे खत्म करने की दिशा में कदम बढ़ाया है जो ग्रामीण क्षेत्रों में रोजगार और समानता की गारंटी देने वाले कानून के खिलाफ है।
    कांग्रेस ने इसे सीधे तौर पर बीजेपी और राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ RSS का एजेंडा बताया। कांग्रेस नेता बेन्नी बेहनान ने कहा गांधीजी ने गरीबों के लिए जो विचार रखे थे वह मनरेगा के रूप में साकार हुए थे लेकिन अब सरकार इसे खत्म कर रही है। यह गरीबों के हितों के खिलाफ है और लोग इसे कभी माफ नहीं करेंगे।

    भारतीय कम्युनिस्ट पार्टी के सेल्वाराज वी ने भी सरकार पर तीखा हमला करते हुए कहा गरीबों के पास न खाने के लिए है न पहनने के लिए। काम न मिलने पर वे क्या खाएंगे? बच्चों के लिए दूध नहीं है। यह विधेयक गरीबों के खिलाफ है और हम इसका विरोध करते हैं। वहीं शिरोमणि अकाली दल की नेता हरसिमरत कौर बादल ने भी सरकार के फैसले का विरोध किया। उन्होंने कहा मनरेगा को खत्म करने के बाद सरकार गरीबों को चैरिटी की ओर धकेल रही है। राज्य सरकारों को कम धन देने से पंजाब जैसे राज्यों में गरीबों को काम कैसे मिलेगा?

    बीजेपी के राजकुमार चाहर ने सरकार के फैसले का समर्थन करते हुए कहा यह विधेयक गरीबों के लिए फायदेमंद होगा। अब उन्हें 100 की बजाय 125 दिनों का काम मिलेगा। प्रधानमंत्री मोदी का सपना एक विकसित भारत इसे पूरा करने में मदद करेगा। कुल मिलाकर इस विधेयक को लेकर सियासी घमासान जारी है। विपक्षी दलों का कहना है कि यह गरीबों और किसानों के खिलाफ कदम है जबकि भाजपा इसे विकास और गरीबों की भलाई का कदम बता रही है।

  • वंदे मातरम् पर संसद में गरमाई बहस अमित शाह ने विपक्ष पर किए तीखे आरोप

    वंदे मातरम् पर संसद में गरमाई बहस अमित शाह ने विपक्ष पर किए तीखे आरोप

     
    नई दिल्ली । संसद के शीतकालीन सत्र के दौरान वंदे मातरम् पर जारी बहस ने मंगलवार को एक नया मोड़ लिया जब गृह मंत्री अमित शाह ने राज्यसभा में इस मुद्दे पर अपनी बात रखी। इस मुद्दे पर पहले रक्षा मंत्री राजनाथ सिंह ने अपनी प्रतिक्रिया दी थी और अब अमित शाह ने विपक्ष पर तीखे आरोप लगाए। वंदे मातरम् पर संसद में चल रही यह बहस 9 दिसंबर को प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी द्वारा लोकसभा में इसकी शुरुआत के बाद और भी तेज हो गई है।

    अमित शाह का बयान

    अमित शाह ने कहा कि वंदे मातरम् पर चर्चा की आवश्यकता तब भी थी जब यह रचना रची गई थी। उन्होंने जोर देकर कहा कि यह चर्चा आजादी के आंदोलन के दौरान भी जरूरी थी और आज भी यह जरूरी है। साथ ही उन्होंने यह भी कहा कि जब भारत 2047 में एक विकसित राष्ट्र बनेगा तब भी वंदे मातरम् पर चर्चा जारी रहेगी। शाह ने वंदे मातरम् के ऐतिहासिक पृष्ठभूमि पर बात करते हुए कहा कि यह रचना विदेशी आक्रमणों और सांस्कृतिक चुनौतियों के प्रतिकार के रूप में सामने आई थी।

    गृह मंत्री अमित शाह ने आगे कहा कि वंदे मातरम् को लेकर भारतीय राष्ट्रीय आंदोलन के समय इसका एक बड़ा महत्व था। यह न केवल भारत के स्वतंत्रता संग्राम का प्रतीक बन चुका था बल्कि यह भारतीय संस्कृति और स्वाभिमान का भी प्रतीक था। उन्होंने विपक्ष को आड़े हाथों लेते हुए कहा कि आज वंदे मातरम् को लेकर विवाद उठाना और इसके महत्व को कम करने की कोशिश करना भारतीयता और भारतीय संस्कृति को कमजोर करने जैसा है।

    नेहरू और इंदिरा गांधी पर बयान

    अमित शाह ने इस मुद्दे पर एक और ऐतिहासिक टिप्पणी करते हुए कहा नेहरू ने वंदे मातरम् के टुकड़े किए थे और इंदिरा गांधी ने इसके विरोध में खड़ा कर दिया था। उन्होंने कहा कि कांग्रेस पार्टी और उसके नेताओं ने हमेशा इस पर विवाद उठाया जबकि वंदे मातरम् ने भारतीय जनमानस को एकजुट किया और यह हर भारतीय का राष्ट्रीय गीत बन गया।

    शाह ने कांग्रेस पर आरोप लगाया कि वंदे मातरम् के खिलाफ राजनीति करना भारतीय संस्कृति और भारतीयता के खिलाफ है। उनका यह भी कहना था कि अगर कांग्रेस के नेताओं के विचार इस गीत के खिलाफ थे तो यह पार्टी की सोच का संकेत है कि वह भारतीय संस्कृति और राष्ट्रवाद को प्राथमिकता नहीं देती।

    विपक्ष पर अमित शाह के आरोप

    अमित शाह ने विपक्ष पर तीखा हमला करते हुए कहा कि जो लोग वंदे मातरम् के खिलाफ बोलते हैं वे दरअसल भारतीय संस्कृति और राष्ट्रवाद का अपमान कर रहे हैं। उनका कहना था कि यह गीत हर भारतीय के दिल में गूंजता है और यह केवल एक गीत नहीं बल्कि भारत की स्वतंत्रता एकता और अखंडता का प्रतीक है। उन्होंने आरोप लगाया कि कांग्रेस और अन्य विपक्षी दल इस गीत का विरोध कर राजनीति कर रहे हैं और अपनी वोट बैंक की राजनीति के लिए इसे सांप्रदायिक रंग देने की कोशिश कर रहे हैं।

    राजनीतिक हलचल और संसद में गहमागहमी

    वंदे मातरम् पर संसद में चली यह बहस अब एक बड़े राजनीतिक विवाद का रूप ले चुकी है। यह मामला केवल एक गीत का नहीं बल्कि भारतीयता संस्कृति और राष्ट्रवाद से जुड़ा हुआ है। अमित शाह के बयान ने विपक्ष को चुप्प रहने की चुनौती दी है वहीं विपक्ष ने इस पर अपनी प्रतिक्रियाएं भी दी हैं। विपक्ष के नेताओं का कहना है कि वंदे मातरम् को लेकर किसी भी तरह की राजनीति नहीं की जानी चाहिए। उनका मानना है कि यह गीत सभी भारतीयों के लिए समान रूप से महत्वपूर्ण है और इसे किसी विशेष पार्टी या विचारधारा से जोड़कर नहीं देखना चाहिए।

    वंदे मातरम् पर यह बहस अब केवल एक गीत तक सीमित नहीं रही बल्कि यह भारतीय संस्कृति राष्ट्रीय एकता और राजनीति से जुड़ा हुआ मुद्दा बन गया है। जहां एक ओर अमित शाह और उनकी पार्टी इस मुद्दे को भारतीयता के प्रतीक के रूप में प्रस्तुत कर रहे हैं वहीं विपक्ष इसे राजनीति से जोड़ते हुए इसे विवादित बना रहे हैं। आने वाले दिनों में यह मुद्दा संसद के भीतर और बाहर भी चर्चा का विषय बना रहेगा और इस पर अधिक राजनीतिक बयानबाजी की संभावना है।

  • मप्र विधानसभाः हंगामेदार रहा शीतकालीन सत्र का दूसरा दिन, वीआईटी हिंसा पर विपक्ष का हंगामा

    मप्र विधानसभाः हंगामेदार रहा शीतकालीन सत्र का दूसरा दिन, वीआईटी हिंसा पर विपक्ष का हंगामा


    भोपाल।
    मध्य प्रदेश विधानसभा के शीतकालीन सत्र का दूसरा दिन मंगलवार को हंगामेदार रहा। सत्र के दौरान अतिवृष्टि और वीआईटी विश्वविद्यालय में विद्यार्थियों द्वारा अनियमितताओं को लेकर की गई तोड़-फोड़ के मामले में विपक्षी विधायकों ने जमकर हंगामा किया। इससे पहले कांग्रेस विधायक खेतों में फसलों की स्थिति को दर्शाती तख्तियां लेकर विधानसभा पहुंचे। शून्यकाल की सूचनाएं पढ़ी जाने के बाद विधानसभा की कार्यवाही गुरुवार तक स्थगित कर दी गई।

    दरअसल, लंच के बाद विधानसभा की कार्यवाही शुरू होते ही सीहोर जिले के वीआईटी विश्वविद्यालय में हुई मारपीट और आगजनी की घटना को लेकर विधायक दिनेश जैन ‘बोस’ ने ध्यानाकर्षण प्रस्ताव पेश किया। उच्च शिक्षा मंत्री इंदर सिंह परमार ने बताया कि विश्वविद्यालय को कारण बताओ नोटिस देकर जवाब मांगा गया है, इसके बाद आगे की कार्रवाई होगी। विधायक जैन ने मजिस्ट्रेट जांच कराने और दोषियों पर सख्त कार्रवाई की मांग की, साथ ही छात्रों पर दर्ज प्रकरण वापस लेने की भी बात कही। मंत्री परमार ने कहा कि 4 हजार छात्रों का सड़क पर आना गंभीर मामला है, सरकार इसे गंभीरता से ले रही है और आगे सख्त कदम उठाए जाएंगे।

    कांग्रेस विधायक महेश परमार ने हनुमान चालीसा का पाठ करने पर सजा देने के मामले में सख्त कार्रवाई की मांग की। उन्होंने कहा कि मामले की निष्पक्ष जांच के लिए विश्वविद्यालय में प्रशासक नियुक्त कर उच्च स्तरीय जांच कराई जाए। साथ ही उन्होंने विधानसभा अध्यक्ष से विधायकों की एक कमेटी गठित करने का भी आग्रह किया। इस पर उच्च शिक्षा मंत्री इंदर सिंह परमार ने कहा कि विश्वविद्यालय को जो कारण बताओ नोटिस जारी किया गया है, उसका उद्देश्य ही यह है कि सरकार आवश्यक होने पर विश्वविद्यालय को अपने नियंत्रण में लेकर कठोर कार्रवाई करे। मंत्री परमार ने स्पष्ट किया कि अब तक किसी विश्वविद्यालय के खिलाफ इतनी सख्त कार्रवाई नहीं हुई होगी, जैसी इस मामले में की जाएगी।

    उप नेता प्रतिपक्ष और कांग्रेस विधायक हेमंत कटारे ने आरोप लगाया कि वीआईटी विश्वविद्यालय में हनुमान जी का नाम लेने पर छात्रों से 5 हजार रुपये का जुर्माना वसूला जा रहा है। उन्होंने कहा कि ऐसी कार्रवाई उन्होंने पहले कभी नहीं देखी। कटारे ने सवाल उठाया कि जब सीएमएचओ को विश्वविद्यालय परिसर में प्रवेश नहीं करने दिया गया, तो शासकीय कार्य में बाधा का मामला अब तक दर्ज क्यों नहीं हुआ। उन्होंने कहा कि अगर कलेक्टर और सीएमएचओ चाहें तो धार्मिक भावनाएं भड़काने और शासकीय कार्य में बाधा समेत अन्य धाराओं में विश्वविद्यालय प्रबंधन पर केस दर्ज कराया जा सकता है। उन्होंने वीआईटी कॉलेज में हिंसा को छोटा जेन-जेड आंदोलन बताया।

    इससे पहले मंगलवार को शीतकालीन सत्र के दूसरे दिन सदन में मध्य प्रदेश नगर पालिका संशोधन अध्यादेश- 2025 सर्वसम्मति से पारित हो गया। नगरीय प्रशासन मंत्री कैलाश विजयवर्गीय ने कहा कि यह संशोधन राजीव गांधी के सपनों को पूरा करने की दिशा में एक कदम है। उन्होंने कहा कि पहले राइट टू रिकॉल ढाई साल में लागू होता था, जिसे अब 3 साल कर दिया गया है ताकि लोकतंत्र और मजबूत हो। वहीं, नेता प्रतिपक्ष उमंग सिंघार ने कहा कि इस बिल से जनता को कोई सीधा फायदा नहीं होगा। यह केवल टिकट बेचने का माध्यम बनेगा और 3 साल बाद फिर खुलेआम हॉर्स ट्रेडिंग होगी।

    मध्य प्रदेश दुकान एवं स्थापना संशोधन विधेयक 2025 पारित

    इसके साथ ही विधानसभा में मंगलवार को मध्य प्रदेश दुकान एवं स्थापना संशोधन विधेयक 2025 भी पारित हो गया। श्रम मंत्री प्रहलाद पटेल ने कहा कि 20 से कम दुकानों या स्थानों में लेबर इंस्पेक्टर केवल कमिश्नर की अनुमति से ही जाएगा। महिलाओं को समान वेतन और 24 घंटे खुली दुकानों में सुरक्षा देने की जिम्मेदारी सरकार की होगी। उन्होंने बताया कि दुकान रजिस्ट्रेशन शुल्क 250 रुपये से अधिकतम 2500 रुपये तय किया गया है, जिसका अर्थ यह नहीं कि सभी दुकानों पर 2500 रुपये लगेगा। यह राशि भविष्य में संभावित बढ़ोतरी के लिए निर्धारित की गई है।

    दूसरा अनुपूरक बजट सदन में पेश

    वित्त मंत्री जगदीश देवड़ा ने दूसरा अनुपूरक बजट सदन में पेश किया। इस पर 4 दिसंबर को 3:30 घंटे चर्चा होगी। दूसरा अनुपूरक बजट 13476 करोड़ 94 लाख रुपये का है।