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  • रेलवे में महिलाओं की सुरक्षा को बड़ा बढ़ावा, महिला दिवस पर लॉन्च हुआ 'SHINE' फीचर, यौन उत्पीड़न की शिकायत अब सीधे ऑनलाइन दर्ज होगी

    रेलवे में महिलाओं की सुरक्षा को बड़ा बढ़ावा, महिला दिवस पर लॉन्च हुआ 'SHINE' फीचर, यौन उत्पीड़न की शिकायत अब सीधे ऑनलाइन दर्ज होगी



    नई दिल्ली। अंतरराष्ट्रीय महिला दिवस के अवसर पर रेलवे ने अपनी महिला कर्मचारियों की सुरक्षा और सशक्तिकरण के लिए एक बड़ा डिजिटल कदम उठाया है। अब रेलवे में कार्यरत महिलाएं कार्यस्थल पर होने वाले यौन उत्पीड़न (Sexual Harassment) की शिकायत सीधे HRMS (Human Resource Management System) एप्लिकेशन के माध्यम से दर्ज कर सकेंगी। इस नई पहल का नाम SHINE (Sexual Harassment Incident Notification for Empowerment) रखा गया है।

    रेल मंत्रालय ने इस पहल के जरिए शिकायत प्रक्रिया को अधिक गोपनीय (Confidential) और त्वरित बनाने का उद्देश्य रखा है। अब महिला कर्मचारी बिना किसी मध्यस्थ के सीधे अपनी शिकायत ऑनलाइन दर्ज कर सकती हैं, जो संबंधित नॉमिनेटेड कमेटी तक पहुंचेगी। यह सुविधा सिर्फ नियमित कर्मचारियों तक सीमित नहीं है, बल्कि कॉन्ट्रैक्ट वर्कर, स्टूडेंट्स और बाहरी विजिटर्स भी इसे इस्तेमाल कर अपनी शिकायत दर्ज कर सकते हैं।

    रेलवे के अधिकारियों को निर्देश दिए गए हैं कि वे सभी जोनों में इंटरनल कंप्लेंट (IC) कमिटी और संबंधित अधिकारियों को जल्द से जल्द नॉमिनेट करें, ताकि शिकायतों का समाधान समय पर हो। कर्मचारी इस मॉड्यूल तक Employee Self Service (ESS) के माध्यम से आसानी से पहुंच सकते हैं।

    रेल मंत्रालय ने बताया कि SHINE मॉड्यूल की सबसे बड़ी खासियत इसकी केंद्रीकृत निगरानी और त्वरित एक्सेस है। इससे न केवल शिकायत दर्ज करने वाली महिला कर्मचारी की गोपनीयता सुनिश्चित होगी, बल्कि निवारण प्रक्रिया में तेजी भी आएगी।

    इस पहल के माध्यम से रेलवे महिलाओं के सशक्तिकरण, सुरक्षित कार्यस्थल और डिजिटल शिकायत समाधान की दिशा में महत्वपूर्ण कदम उठा रहा है। मंत्रालय का कहना है कि SHINE मॉड्यूल आने वाले समय में महिला कर्मचारियों के लिए सुरक्षा और विश्वास का प्रतीक बनेगा।

    रेलवे में यह पहल ऐसे समय में आई है जब कार्यस्थल पर महिलाओं की सुरक्षा और सम्मान को लेकर जागरूकता बढ़ रही है। महिला कर्मचारियों ने भी इस कदम को सराहा है और इसे कार्यस्थल को सुरक्षित और आत्मविश्वासपूर्ण बनाने वाला कदम बताया है।

  • भोपाल में कर्मचारी मोर्चा: दैनिक वेतनभोगी और अंशकालीन कर्मचारी सत्याग्रह पर, महिला कर्मचारी भी शामिल

    भोपाल में कर्मचारी मोर्चा: दैनिक वेतनभोगी और अंशकालीन कर्मचारी सत्याग्रह पर, महिला कर्मचारी भी शामिल


    भोपाल में सरकारी कर्मचारियों ने अपने अधिकारों और मांगों को लेकर मोर्चा खोल दिया है। स्थायी दैनिक वेतनभोगी और अंशकालीन कर्मचारी एकजुट होकर सतपुड़ा गेट पर सत्याग्रह पर बैठे हैं। आंदोलन में महिला कर्मचारी भी शामिल हैं। यह आंदोलन कर्मचारियों की पांच सूत्रीय मांगों को लेकर चल रहा है जो लंबे समय से प्रतीक्षित थे।

    प्रांत अध्यक्ष अशोक पांडे के अनुसार कर्मचारियों की प्रमुख मांगें इस प्रकार हैं: पहला उच्च न्यायालय खंडपीठ इन्दौर के आदेशानुसार सातवें वेतनमान का लाभ दिया जाए या उन्हें नियमित किया जाए। दूसरा शासन द्वारा अस्थाई पदों को सांख्येत्तर घोषित करने वाले आदेश दिनांक 22 दिसंबर 2025 को निरस्त किया जाए। तीसरा दैनिक वेतन भोगी कर्मचारियों को नियमित किया जाए ताकि उनके अधिकार सुनिश्चित हो सकें। चौथा अंशकालीन कर्मचारियों को श्रमायुक्त द्वारा निर्धारित न्यूनतम वेतन या कलेक्टर दर के अनुसार वेतन भुगतान किया जाए। पांचवा अस्थाई कर्मचारियों को पेंशन सुविधा का लाभ प्रदान किया जाए।

    सत्याग्रह में शामिल कर्मचारियों का कहना है कि लंबे समय से उनकी आवाज़ सुनी नहीं जा रही और उनकी न्यायसंगत मांगों को अनदेखा किया जा रहा है। उन्होंने बताया कि सरकार की अनदेखी और समय पर समाधान न मिलने के कारण उन्हें मजबूर होकर सड़क पर आंदोलन करना पड़ा है। महिला कर्मचारी भी इस आंदोलन में शामिल होकर यह संदेश दे रही हैं कि कर्मचारियों की समस्याएं केवल पुरुष कर्मचारियों तक सीमित नहीं हैं बल्कि सभी वर्गों को समान अधिकार मिलने चाहिए।स्थानीय प्रशासन और पुलिस ने सुरक्षा दृष्टि से सत्याग्रह स्थल पर विशेष व्यवस्था की है। हालांकि कर्मचारियों का आंदोलन शांतिपूर्ण है लेकिन इसका असर प्रशासन पर निश्चित रूप से पड़ेगा। कर्मचारियों का कहना है कि उनका उद्देश्य केवल अपनी जायज़ मांगों को मान्यता दिलाना है न कि किसी तरह का विवाद खड़ा करना।

    इससे पहले भी विभिन्न विभागों में कर्मचारियों की समान मांगों को लेकर ज्ञापन दिया गया था लेकिन इसे लागू करने में ढिलाई बरती गई। अब कर्मचारियों ने सत्याग्रह के माध्यम से सीधे सरकार और प्रशासन का ध्यान अपनी समस्याओं की ओर खींचने का निर्णय लिया है।सत्याग्रह में भाग लेने वाले कर्मचारी मानते हैं कि यह आंदोलन उनके अधिकारों की लड़ाई है और यदि उनकी मांगें जल्द पूरी नहीं हुईं तो आगे और बड़े पैमाने पर आंदोलन की संभावना भी बनी हुई है। कर्मचारी मंच इस आंदोलन को लंबी लड़ाई के रूप में तैयार कर रहा है और इसका असर न केवल भोपाल बल्कि राज्य के अन्य हिस्सों में भी दिखाई देगा।