Tag: Women Safety Madhya Pradesh

  • गरबा पंडालों में संदिग्ध युवकों की रैंडम चेकिंग, रात 2 बजे तक निगरानी, मंदिर जाने वाली महिलाओं के लिए भी विशेष पेट्रोलिंग

    गरबा पंडालों में संदिग्ध युवकों की रैंडम चेकिंग, रात 2 बजे तक निगरानी, मंदिर जाने वाली महिलाओं के लिए भी विशेष पेट्रोलिंग


    उज्जैन । नवरात्रि के दौरान उज्जैन में गरबा पंडालों में शामिल होने वाली महिलाओं और युवतियों की सुरक्षा के लिए पुलिस ने निगरानी व्यवस्था मजबूत कर दी है। शहर में शक्ति स्क्वॉड अभियान के तहत गरबा स्थलों और आसपास के इलाकों में पुलिसकर्मियों की तैनाती की गई है। उज्जैन पुलिस अधीक्षक के निर्देश पर 15 चीता पार्टी और 34 एफआरवी वाहनों में महिला पुलिसकर्मियों को ड्यूटी पर लगाया गया है। पुलिस टीमें रात 8 बजे से सुबह 2 बजे तक गरबा स्थलों पर निगरानी रखेंगी। इसके अलावा सुबह मंदिर जाने वाली महिलाओं की सुरक्षा के लिए भी विशेष पेट्रोलिंग की व्यवस्था की गई है।

    मंगलवार रात शक्ति स्क्वॉड की टीम ने शहर के कई प्रमुख गरबा पंडालों का दौरा कर सुरक्षा इंतजामों का जायजा लिया। इस दौरान संदिग्ध नजर आने वाले युवकों की रैंडम चेकिंग की गई और उनसे पूछताछ भी की गई। पुलिस ने गरबा स्थलों पर सादे कपड़ों में महिला पुलिसकर्मियों को भी तैनात किया है। इसका उद्देश्य भीड़ के बीच संदिग्ध गतिविधियों पर नजर रखना और महिलाओं या युवतियों के साथ किसी तरह की छेड़छाड़ अथवा अभद्र व्यवहार की शिकायत मिलने पर तत्काल कार्रवाई करना है।

    उज्जैन में शक्ति स्क्वॉड अभियान पिछले दो वर्षों से नवरात्रि के दौरान चलाया जा रहा है। इस बार अभियान का तीसरा वर्ष है। इसका मुख्य उद्देश्य गरबा खेलने के बाद देर रात घर लौटने वाली महिलाओं और युवतियों को सुरक्षित वातावरण उपलब्ध कराना है। नवरात्रि में गरबा आयोजनों में बड़ी संख्या में लोग शामिल होते हैं। ऐसे में भीड़भाड़ वाले स्थानों पर सुरक्षा व्यवस्था बनाए रखना पुलिस के लिए महत्वपूर्ण होता है। इसी को ध्यान में रखते हुए पुलिस टीमों को नियमित गश्त और संदिग्ध गतिविधियों की निगरानी के निर्देश दिए गए हैं।

    मंगलवार रात पुलिस ने दशहरा मैदान राजा राम सामाजिक न्याय परिसर इंजीनियरिंग कॉलेज और तारामंडल क्षेत्र के गरबा स्थलों पर पहुंचकर जांच की। इन स्थानों पर आने-जाने वाले लोगों की गतिविधियों पर नजर रखी गई और जरूरत के मुताबिक संदिग्धों से पूछताछ की गई। पुलिस का कहना है कि इस तरह की औचक जांच का उद्देश्य किसी भी अप्रिय घटना को रोकना और आयोजनों में शामिल महिलाओं तथा परिवारों के बीच सुरक्षा का भरोसा बनाए रखना है।

    सुरक्षा व्यवस्था के तहत शहर में 15 चीता पार्टियों और 34 एफआरवी वाहनों में महिला पुलिसकर्मियों की तैनाती की गई है। एफआरवी वाहनों में महिला अधिकारियों को भी जिम्मेदारी दी गई है ताकि जरूरत पड़ने पर तुरंत सहायता पहुंचाई जा सके। पुलिस के मुताबिक गरबा आयोजनों के दौरान रात 8 बजे से सुबह 2 बजे तक विशेष निगरानी रहेगी। वहीं सुबह 4 बजे से 8 बजे तक मंदिर जाने वाली महिलाओं की सुरक्षा के लिए चार पेट्रोलिंग वाहन तैनात रहेंगे। इससे सुबह के समय भी प्रमुख रास्तों और मंदिरों के आसपास सुरक्षा व्यवस्था बनाए रखने में मदद मिलेगी।

    महिलाओं के खिलाफ अपराधों में पहले शामिल रहे लोगों पर भी पुलिस नजर रख रही है। इसके लिए संबंधित लोगों की सूची तैयार की गई है और शक्ति स्क्वॉड की टीमें गरबा पंडालों के साथ आसपास के क्षेत्रों में भी निगरानी कर रही हैं। पुलिस का उद्देश्य नवरात्रि के दौरान महिलाओं और युवतियों को ऐसा माहौल देना है जिसमें वे बिना डर के गरबा आयोजनों में शामिल हो सकें और सुरक्षित घर लौट सकें। पुलिस ने स्पष्ट किया है कि छेड़छाड़ या किसी भी तरह की संदिग्ध गतिविधि की सूचना मिलने पर नियमानुसार कार्रवाई की जाएगी।

  • सीहोर में थाने के बाहर बच्चे के साथ बैठी महिला का मामला, पुलिस पर FIR दर्ज न करने के गंभीर आरोप

    सीहोर में थाने के बाहर बच्चे के साथ बैठी महिला का मामला, पुलिस पर FIR दर्ज न करने के गंभीर आरोप

     मध्य प्रदेश के सीहोर जिले के इछावर क्षेत्र में एक महिला द्वारा न्याय की मांग को लेकर थाने के सामने अपने छोटे बच्चे के साथ सड़क पर बैठने का मामला सामने आया है, जिसने स्थानीय प्रशासन और पुलिस व्यवस्था की कार्यप्रणाली पर गंभीर सवाल खड़े कर दिए हैं। प्राप्त जानकारी के अनुसार पीड़ित महिला अपनी बेटी के साथ हुई कथित मारपीट की शिकायत दर्ज कराने के लिए पुलिस थाने पहुंची थी, लेकिन आरोप है कि उसकी FIR दर्ज करने के बजाय उसे अलग-अलग थानों के बीच भटकाया जाता रहा। इस पूरी प्रक्रिया में महिला घंटों तक थाने के बाहर बैठी रही और अंततः वह थक-हारकर सड़क पर ही बैठ गई, जबकि उसके साथ छोटा बच्चा भी मौजूद था। यह स्थिति उस समय और गंभीर हो गई जब शाम से लेकर देर रात तक पीड़िता न्याय की उम्मीद में वहीं मौजूद रही।

    बताया जा रहा है कि घटना उस समय की है जब पीड़िता की बेटी जंगल में बकरी चराने गई थी और किसी विवाद के दौरान कुछ लोगों द्वारा उसके साथ मारपीट किए जाने का आरोप सामने आया। परिजनों का कहना है कि इस घटना में युवती गंभीर रूप से घायल हुई और उसे उपचार के लिए अस्पताल में भर्ती कराना पड़ा। इसके बाद पीड़िता ने पुलिस से कार्रवाई की मांग की, लेकिन आरोप है कि पुलिस ने मामले को अपने क्षेत्राधिकार से बाहर बताते हुए तत्काल कार्रवाई करने के बजाय पीड़िता को एक थाने से दूसरे थाने भेजना शुरू कर दिया। इस व्यवहार से आहत होकर महिला थाने के बाहर बैठने को मजबूर हो गई।

    महिला का कहना है कि वह लगातार पुलिस से गुहार लगाती रही कि उसकी शिकायत दर्ज कर उचित जांच की जाए, लेकिन उसकी बात को गंभीरता से नहीं लिया गया। उसने यह भी आरोप लगाया कि कई बार उसे यह कहकर टाल दिया गया कि संबंधित थाना जाकर शिकायत दर्ज कराएं। इस पूरे घटनाक्रम के दौरान पीड़िता अपने छोटे बच्चे के साथ असहाय स्थिति में रही, जिससे उसकी परेशानी और बढ़ गई।

    यह मामला ऐसे समय सामने आया है जब प्रदेश में महिला सुरक्षा और त्वरित न्याय व्यवस्था को लेकर लगातार बड़े दावे किए जाते हैं। लेकिन जमीनी स्तर पर सामने आई यह घटना पुलिस की संवेदनशीलता और त्वरित कार्रवाई की क्षमता पर सवाल खड़े करती है। कानून व्यवस्था से जुड़े विशेषज्ञों का मानना है कि ऐसे मामलों में पुलिस को क्षेत्राधिकार के तकनीकी पहलू में उलझने के बजाय तुरंत प्रारंभिक कार्रवाई करते हुए Zero FIR दर्ज करनी चाहिए, ताकि पीड़ित को राहत मिल सके और जांच प्रक्रिया आगे बढ़ सके।

    घटना का एक वीडियो भी सामने आने की बात कही जा रही है, जिसके बाद स्थानीय स्तर पर चर्चा और तेज हो गई है। अब यह मामला प्रशासनिक स्तर पर भी ध्यान आकर्षित कर रहा है और लोगों में पुलिस की कार्यप्रणाली को लेकर असंतोष देखने को मिल रहा है। फिलहाल देखना यह होगा कि संबंधित अधिकारी इस मामले में क्या कदम उठाते हैं और पीड़ित परिवार को न्याय दिलाने के लिए किस तरह की कार्रवाई आगे बढ़ाई जाती है।