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  • लाड़ली बहना योजना में घटती जा रही महिलाओं की संख्या 2026 में अब तक 21 हजार नाम बाहर

    लाड़ली बहना योजना में घटती जा रही महिलाओं की संख्या 2026 में अब तक 21 हजार नाम बाहर


    भोपाल। मध्य प्रदेश की महत्वाकांक्षी मुख्यमंत्री लाड़ली बहना योजना में पात्र हितग्राहियों की संख्या लगातार कम होती जा रही है। विधानसभा चुनाव 2023 से पहले शुरू हुई इस योजना में जहां शुरुआत में बड़ी संख्या में महिलाओं को शामिल किया गया था वहीं अब पात्रता की शर्तों और अन्य कारणों के चलते हजारों महिलाओं के नाम सूची से बाहर हो रहे हैं। आंकड़ों के मुताबिक जनवरी 2026 से सितंबर 2026 के बीच करीब 21 हजार 150 महिलाओं के नाम योजना से हटाए गए हैं। इसके साथ ही योजना शुरू होने के बाद तीन साल में करीब 6 लाख 26 हजार महिलाओं के नाम सूची से बाहर हो चुके हैं।

    विभागीय आंकड़ों के अनुसार 1 जनवरी 2026 को लाड़ली बहना योजना में 1 करोड़ 25 लाख 31 हजार महिलाएं पात्र हितग्राही थीं। सितंबर 2026 तक यह संख्या घटकर 1 करोड़ 25 लाख 10 हजार 150 रह गई। यानी करीब आठ महीने की अवधि में ही 21 हजार से ज्यादा नाम कम हो गए। यह गिरावट इसलिए भी महत्वपूर्ण है क्योंकि फिलहाल योजना में नए नाम जोड़ने की प्रक्रिया नहीं चल रही है। ऐसे में एक तरफ नए हितग्राही नहीं जुड़ रहे हैं और दूसरी तरफ पात्रता पूरी नहीं करने वाली महिलाओं के नाम लगातार हटाए जा रहे हैं।

    योजना की शुरुआत में अक्टूबर 2023 में करीब 1 करोड़ 31 लाख 35 हजार 985 महिलाएं योजना में शामिल थीं। इसके बाद आपत्तियों और पात्रता की जांच के दौरान 2 लाख 18 हजार 858 नाम हटाए गए। इसके बाद पात्र हितग्राहियों की संख्या करीब 1 करोड़ 29 लाख 5 हजार 457 रह गई थी। समय के साथ यह संख्या और कम होती चली गई।

    अधिकारियों के मुताबिक लाड़ली बहना योजना में पात्रता के लिए अधिकतम उम्र 60 वर्ष निर्धारित है। जिन महिलाओं की उम्र 60 वर्ष पूरी हो जाती है उनके नाम योजना की सूची से हटा दिए जाते हैं। इसके अलावा किसी हितग्राही की मृत्यु होने या अन्य पात्रता शर्तें पूरी नहीं होने की स्थिति में भी नाम बाहर किया जाता है। इसी वजह से योजना के आंकड़ों में लगातार कमी देखने को मिल रही है।

    दूसरी ओर नए नाम नहीं जुड़ने के कारण योजना में शामिल महिलाओं की संख्या बढ़ने की संभावना फिलहाल कम है। योजना की शुरुआत जून 2023 में 1000 रुपए प्रतिमाह की आर्थिक सहायता के साथ हुई थी। सरकार ने इसे पांच साल में बढ़ाकर 3000 रुपए प्रतिमाह करने का निर्णय लिया था। शुरुआत के करीब चार महीने बाद मासिक राशि बढ़ाकर 1250 रुपए कर दी गई थी। इसके बाद नवंबर 2025 से इसमें 250 रुपए की और बढ़ोतरी की गई और वर्तमान में पात्र महिलाओं को हर महीने 1500 रुपए दिए जा रहे हैं।

    विभाग की ओर से पात्रता के आधार पर हितग्राहियों की समीक्षा लगातार जारी है। ऐसे में दिसंबर 2026 के अंत तक योजना में शामिल महिलाओं की संख्या और घट सकती है। खासकर उम्र की सीमा पूरी करने वाली महिलाओं और अन्य कारणों से अपात्र पाए जाने वाले हितग्राहियों के नाम सूची से हटाए जाने की प्रक्रिया जारी रहेगी। इस बीच योजना में नए नाम जोड़ने की प्रक्रिया शुरू नहीं होने से मौजूदा संख्या में बढ़ोतरी की संभावना फिलहाल नजर नहीं आ रही है।

  • बंगाल चुनाव में भाजपा का बड़ा दांव, महिलाओं को ₹3000 मासिक सहायता और 33 प्रतिशत आरक्षण का वादा

    बंगाल चुनाव में भाजपा का बड़ा दांव, महिलाओं को ₹3000 मासिक सहायता और 33 प्रतिशत आरक्षण का वादा

    नई दिल्ली। पश्चिम बंगाल विधानसभा चुनाव से पहले राजनीतिक माहौल और अधिक गर्म हो गया है, जहां भारतीय जनता पार्टी ने अपना चुनावी घोषणापत्र जारी कर दिया है। इस घोषणापत्र को ‘संकल्प पत्र’ नाम दिया गया है, जिसे केंद्रीय गृह मंत्री Amit Shah ने कोलकाता में जारी किया। पार्टी ने इसे राज्य के विकास और बदलाव का रोडमैप बताते हुए कई बड़े वादों की घोषणा की है।

    इस घोषणापत्र में सबसे अधिक फोकस महिलाओं, युवाओं और सरकारी कर्मचारियों पर किया गया है। महिलाओं के लिए आर्थिक सहायता योजना के तहत हर पात्र महिला को प्रतिमाह तीन हजार रुपये सीधे बैंक खाते में देने का प्रस्ताव रखा गया है। इसके साथ ही महिलाओं को सरकारी नौकरियों में तैंतीस प्रतिशत आरक्षण देने का भी वादा किया गया है, जिससे उनकी भागीदारी को बढ़ाने का लक्ष्य रखा गया है।

    युवाओं के लिए भी घोषणापत्र में बड़े वादे किए गए हैं। बेरोजगार युवाओं को प्रतिमाह तीन हजार रुपये का भत्ता देने की बात कही गई है, साथ ही आने वाले वर्षों में बड़े पैमाने पर रोजगार और स्वरोजगार के अवसर पैदा करने का दावा किया गया है। इसके जरिए राज्य में रोजगार संकट को कम करने की रणनीति प्रस्तुत की गई है।

    शिक्षा के क्षेत्र में भी कई महत्वपूर्ण घोषणाएं की गई हैं। लड़कियों के लिए केजी से पीजी तक मुफ्त शिक्षा की बात कही गई है, जिससे शिक्षा को अधिक सुलभ और समावेशी बनाया जा सके। पार्टी का कहना है कि इस कदम से शिक्षा व्यवस्था में व्यापक बदलाव देखने को मिलेगा और सामाजिक सशक्तिकरण को बढ़ावा मिलेगा।

    सरकारी कर्मचारियों के लिए भी बड़ा वादा किया गया है, जिसके तहत सरकार बनने के बाद पैंतालीस दिनों के भीतर सातवें वेतन आयोग की सिफारिशों को लागू करने और बकाया महंगाई भत्ते का भुगतान सुनिश्चित करने की बात कही गई है। इस घोषणा को कर्मचारियों को साधने की एक बड़ी रणनीति के रूप में देखा जा रहा है।

    इसके अलावा राज्य में समान नागरिक संहिता को लेकर भी बड़ा ऐलान किया गया है। पार्टी ने कहा है कि यदि उन्हें सत्ता मिलती है तो छह महीने के भीतर समान नागरिक संहिता लागू करने की दिशा में कदम उठाए जाएंगे। इस घोषणा ने राजनीतिक बहस को और तेज कर दिया है।

    घोषणापत्र में सीमा सुरक्षा और घुसपैठ के मुद्दे को भी प्रमुखता दी गई है। पार्टी ने दावा किया है कि राज्य की सीमाओं को अधिक मजबूत बनाया जाएगा और अवैध गतिविधियों पर सख्त कार्रवाई की जाएगी। साथ ही भ्रष्टाचार के मामलों की जांच और पारदर्शिता सुनिश्चित करने के लिए विशेष कदम उठाने का वादा किया गया है।

    राजनीतिक विश्लेषकों का मानना है कि यह घोषणापत्र चुनावी रणनीति का एक महत्वपूर्ण हिस्सा है, जिसमें विभिन्न वर्गों को सीधे आर्थिक और सामाजिक लाभ का आश्वासन देकर समर्थन हासिल करने की कोशिश की गई है। वहीं सत्तारूढ़ दल की ओर से इन वादों को लेकर तीखी प्रतिक्रिया आने की संभावना जताई जा रही है

  • पंधाना से लाड़ली बहना की 33वीं किश्त जारी, सीएम डॉ मोहन यादव करेंगे सिंगल क्लिक ट्रांसफर, उद्योगों की मांग भी उठेगी

    पंधाना से लाड़ली बहना की 33वीं किश्त जारी, सीएम डॉ मोहन यादव करेंगे सिंगल क्लिक ट्रांसफर, उद्योगों की मांग भी उठेगी


    मध्यप्रदेश सरकार की महत्वाकांक्षी लाड़ली बहना योजना की 33वीं किश्त 14 फरवरी को पंधाना से जारी की जाएगी। राज्य स्तरीय इस कार्यक्रम में मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव सिंगल क्लिक के माध्यम से प्रदेश की लाखों हितग्राही महिलाओं के खातों में राशि अंतरित करेंगे। कार्यक्रम को लेकर खंडवा जिले में प्रशासनिक तैयारियां युद्धस्तर पर जारी हैं और आयोजन को भव्य बनाने के लिए पंचायत स्तर तक जिम्मेदारियां तय कर दी गई हैं।

    पंधाना में अनाज मंडी के सामने विशाल मंच और पंडाल तैयार किया जा रहा है। कार्यक्रम स्थल पर टेंट, बैठक व्यवस्था, पेयजल, सुरक्षा और यातायात नियंत्रण सहित सभी व्यवस्थाएं सुनिश्चित की जा रही हैं। जिला कलेक्टर और पुलिस अधीक्षक स्वयं तैयारियों की मॉनिटरिंग कर चुके हैं। गुरुवार को क्षेत्रीय विधायक छाया मोरे और दीक्षा भगोरे ने भी स्थल का निरीक्षण किया और अधिकारियों को आवश्यक निर्देश दिए। इसके बाद पंधाना और छैगांवमाखन जनपद कार्यालय में सरपंचों और सचिवों की बैठक लेकर भीड़ प्रबंधन और परिवहन व्यवस्था पर चर्चा की गई।

    ब्लॉक स्तर पर प्रत्येक ग्राम पंचायत को लगभग 50 लोगों को कार्यक्रम स्थल तक लाने का लक्ष्य दिया गया है। अनुमान है कि इसके लिए हर पंचायत को करीब पांच वाहनों की व्यवस्था करनी होगी। बोर्ड परीक्षाओं के कारण इस बार स्कूल बसों की सुविधा उपलब्ध नहीं हो पाएगी, इसलिए पंचायतों को निजी वाहनों या ट्रेवल्स के माध्यम से लोगों को लाने और वापस भेजने की जिम्मेदारी सौंपी गई है।

    पंचायतों को निर्देश दिए गए हैं कि परिवहन पर होने वाला खर्च पांचवें या पंद्रहवें वित्त आयोग की राशि से वहन किया जा सकता है। इसके लिए स्थानीय स्तर पर एजेंसियों से समन्वय स्थापित किया जा रहा है ताकि समय पर वाहन उपलब्ध हो सकें। बताया जा रहा है कि कार्यक्रम की व्यवस्थाओं पर करोड़ों रुपये खर्च किए जा रहे हैं और टेंट व अन्य व्यवस्थाएं मध्यप्रदेश जनसंपर्क विभाग के माध्यम से की जा रही हैं।

    विधायक छाया मोरे ने कहा कि यह कार्यक्रम क्षेत्र के लिए गौरव का अवसर है। उन्होंने संकेत दिया कि मुख्यमंत्री की मौजूदगी में क्षेत्र में नए उद्योग स्थापित करने की मांग भी रखी जाएगी ताकि युवाओं को स्थानीय स्तर पर रोजगार मिल सके। उनके अनुसार लाड़ली बहना योजना ने महिलाओं को आर्थिक रूप से सशक्त किया है और अब क्षेत्रीय विकास को नई दिशा देने की आवश्यकता है।

    लाड़ली बहना योजना राज्य सरकार की प्रमुख जनकल्याणकारी योजनाओं में से एक है, जिसके माध्यम से हर महीने महिलाओं को आर्थिक सहायता प्रदान की जा रही है। 33वीं किश्त का पंधाना से जारी होना न केवल प्रशासनिक बल्कि राजनीतिक दृष्टि से भी महत्वपूर्ण माना जा रहा है।

    प्रशासन पूरी तरह मुस्तैद है और कार्यक्रम को सफल बनाने के लिए सुरक्षा, यातायात और भीड़ नियंत्रण के विशेष इंतजाम किए जा रहे हैं। अधिकारियों का कहना है कि आयोजन सुव्यवस्थित और शांतिपूर्ण ढंग से संपन्न कराया जाएगा।